Ped Chalta Hai: निर्देशक देबादित्य बंदोपाध्याय की फिल्म “पेड़ चलता है” इस समय काफी चर्चा में है. पर्यावरण और इंसानी जीवन के गहरे रिश्ते को दिखाने वाली यह फिल्म कान्स के Marché du Film में वर्ल्ड प्रीमियर हुआ. अब निर्देशक ने फिल्म को लेकर बात की और बताया कि इसकी शुरुआत झारखंड की मिट्टी, वहां की गर्मी और जंगलों के बीच रहने वाले लोगों की कहानियों से हुई थी.
झारखंड के जंगलों को देखकर पेड़ चलता है बनाने की मिली प्रेरणा
देबादित्य ने टाइम्स नाऊ संग बात करते हुए कहा कि आज की आधुनिक जिंदगी प्रकृति से लगातार दूर होती जा रही है, जबकि इंसान का पूरा अस्तित्व उसी पर टिका है. उन्होंने बताया कि फिल्म की प्रेरणा उन्हें झारखंड के जंगलों और नदियों के आसपास रहने वाले लोगों से बातचीत के दौरान मिली. उनके मुताबिक जंगल सिर्फ पेड़-पौधों का हिस्सा नहीं होते, बल्कि लोगों की यादें, पहचान, रोजी-रोटी और जीवन का आधार होते हैं.
पलामू में हुई है पेड़ चलता है की शूटिंग
पेड़ चलता के की शूटिंग झारखंड के पलामू इलाके में हुई है. निर्देशक के अनुसार वहां का प्राकृतिक माहौल ही फिल्म की असली जान है. जंगलों की खामोशी, सूखी जमीन, वहां की आवाजें और वातावरण ने फिल्म के हर सीन को खास बनाया. उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान कई बार जंगलों में बदलती रोशनी या किसी लोकेशन की शांति ने पूरे सीन का मूड तय किया.
झारखंड की मिट्टी को खूबसूरती से दिखाता है फिल्म
देबादित्य बंदोपाध्याय ने कहा कि उन्होंने फिल्म में किसी तरह का बनावटी ग्लैमर नहीं रखा, क्योंकि उनके लिए असलीपन सबसे ज्यादा जरूरी था. वह चाहते थे कि दर्शक स्क्रीन पर झारखंड की मिट्टी और वहां की सच्चाई को महसूस कर सकें.
झारखंड की फिल्म का कान्स में जाना गर्व का पल
कान्स में फिल्म का प्रीमियर होना निर्देशक के लिए बेहद भावुक और गर्व का पल है. उन्होंने कहा कि हर फिल्ममेकर का सपना होता है कि उसकी जमीनी कहानी दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचे और “पेड़ चलता है” के साथ यह सपना सच होता दिख रहा है. उनके अनुसार यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि झारखंड और हिंदुस्तानीय इंडिपेंडेंट सिनेमा के लिए भी गर्व का मौका है.
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