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देवी दुर्गा के कितने हाथ? बंगाल में क्यों छिड़ा विवाद; क्या कहता है पुराण

Maa Durga Arms: शारदीय नवरात्र से पहले पश्चिम बंगाल में देवी दुर्गा भुजाओं (हाथों) को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है. पश्चिम बंगाल बीजेपी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें देवी दुर्गा के ग्यारह (11) हाथ दर्शाए गए हैं. इसके अलावा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने भी ‘एक्स’ एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें मां दुर्गा के ग्यारह हाथों को दर्शाया गया है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि शास्त्र-पुराण में मां दुर्गा के हाथों को लेकर क्या बताया गया है? देवी दुर्गा के कितने हाथ हैं गीता प्रेस से प्रकाशित ‘दुर्गा सप्तशती’ नामक धार्मिक पुस्तक में देवी दुर्गा के स्वरूप को विस्तार से बताया गया है. इसके प्रथम अध्याय में मां दुर्गा का ध्यान मंत्र- “खड्‌गं चक्र-गदेषु-चाप-परिघाञ्छूलं भुशुण्डीं शिर: शंखं संदधतीं करौस्त्रिनयनां सर्वाड्गभूषावृताम्, नीलाश्मद्युतिमास्य-पाददशकां सेवे महाकालिकां यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्‍तुंमधुं कैटभम्” है. इस ध्यान मंत्र के अनुसार मां दुर्गा के दस हाथ हैं. जिनमें वे अलग-अलग देवताओं द्वारा प्रदान किए गए अस्त्र-शस्त्र और अन्य वस्तु धारण की हुई हैं. ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2026: कब से शुरू होगा पितृ पक्ष? किस तारीख को करें पूर्वजों का तर्पण, श्राद्ध या पिंडदान मां दुर्गा के हाथों में कौन-कौन से अस्त्र-शस्त्र मां दुर्गा के हाथों में खड्ग (तलवार), चक्र, गदा, इषु (बाण या तीर), चाप (धनुष), परिघ (लोहे का अस्त्र), शूल (त्रिशूल), भुशुण्डी (एक प्रकार का अग्नेयास्त्र), शिर (कटा हुआ सिर) और शंख है. किन देवताओं ने मां दुर्गा को कौन से अस्त्र-शस्त्र दिए? देवता प्रदान किए गए अस्त्र-शस्त्र या वस्तु 1. भगवान शिव त्रिशूल 2. भगवान विष्णु सुदर्शन चक्र 3. इंद्र देव वज्र और घंटा 4. अग्नि देव शक्ति (भाला) 5. वायु देव धनुष और बाण 6. वरुण देव शंख 7. यमराज कालदंड (दंड) 8. विश्वकर्मा जी शक्तिशाली फरसा (परशु) और कवच 9. काल देवता तलवार और ढाल 10. ब्रह्मा जी कमंडल और कमल का फूल goddess durga (Image Crdit- Bengal BJP ‘X’ Handle) शास्त्र-पुराण में देवी दुर्गा के ग्यारह (11) हाथों का जिक्र नहीं देवी दुर्गा के हाथों को लेकर भगवती के उपासक और ज्योतिषाचार्य रतन कुमार मिश्र ने बताया कि ग्यारह (11) हाथों वाली देवी की दुर्गा की यह तस्वीर मनगढंत है. यह उसी तरह है जैसे आजकल के कुछ पंडित जी कलश पर ऊर्ध्व मुख (ऊपर की तरफ) नारियल स्थापित कर पूजन कराते हैं. लेकिन, यह अच्छा फल देने वाला नहीं है. शास्त्रों के अनुसार इसका फल रोगकारक (बिमारी उत्पन्न करने वाला) है. इसके आलावा उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी शास्त्र-पुराण में देवी दुर्गा के ग्यारह (11) भुजाओं का जिक्र नहीं है. देवी दुर्गा के कितने हाथ हैं देवी दुर्गा के एक अन्य वरिष्ठ साधन ने बताया कि शास्त्र-पुराणों में आदि शक्ति जगदम्बा को चतुर्भुजी (चार भुजाओं वाली), अष्टभुजी (आठ भुजाओं वाली), दशभुजी (दश भुजाओं वाली) और अष्टादश भुजी (अठारह भुजाओं वाली) कहा गया है. ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2026: पूर्वज से पहले क्यों जरूरी है ऋषि तर्पण, नहीं करने पर क्या होगा; पहले जान लें तारीख और महत्व मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है दुर्गा सप्तशती दुर्गा सप्तशती ‘मार्कंडेय पुराण’ का अहम हिस्सा है. इसमें देवी की स्तुति के लिए 700 मंन्त्रों का उल्लेख किया गया है. 700 मंत्र होने की वजह से इस धार्मिक पुस्तक को ‘दुर्गा सप्तशती’ नाम दिया गया. इसे चंडी पाठ और देवी महात्म्य के नाम से भी जाना जाता है. दुर्गा सप्तशती के वर्णित 700 मंत्र को तीन चरित्रों (प्रथम, मध्यम और उत्तम) में बांटा गया है लेकिन किसी भी चरित्र में भगवती दुर्गा के ग्यारह हाथों का उल्लेख नहीं है. ऐसे में देवी दुर्गा की तस्वीर में उनके 11 हाथ को दर्शाना शास्त्र-पुराण सम्मत नहीं है. साथ ही ऐसी कल्पना निराधार है. क्यों हुआ मां दुर्गा का प्रादुर्भाव? मार्कण्डेय पुराण की कथा के अनुसार, महिषासुर नाम के राक्षस ने युद्ध में देवताओं को हराकर स्वर्गलोक पर अधिकार प्राप्त कर लिया और बारी-बारी से देवताओं को परेशान करने लगा. देवगण परेशान होकर त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के पास पहुंचे. उनके तेज से एक शक्ति (देवी दुर्गा) का प्रदुर्भाव हुआ. देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया. The post देवी दुर्गा के कितने हाथ? बंगाल में क्यों छिड़ा विवाद; क्या कहता है पुराण appeared first on Naya Vichar.

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Weather Update : 8, 9, 10 सितंबर को देश के कई हिस्सों में बारिश, MP-Bihar समेत इन राज्यों में IMD का अलर्ट

Weather Update : देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां अगले तीन दिनों तक जारी रहने वाली हैं. हिंदुस्तान मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 6 सितंबर के अखिल हिंदुस्तानीय मौसम बुलेटिन के मुताबिक 8, 9 और 10 सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों समेत कई इलाकों में बारिश का दौर बना रह सकता है. कुछ राज्यों में भारी बारिश की भी चेतावनी है. MP और UP में बारिश का दौर मध्य प्रदेश में 8 सितंबर को पूर्वी हिस्से में भारी बारिश की संभावना है. 9 और 10 सितंबर को भी पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं. पश्चिमी मध्य प्रदेश में 8 से 10 सितंबर के दौरान गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. उत्तर प्रदेश में भी बारिश का असर बना रहेगा. IMD के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 8 और 9 सितंबर को बारिश के साथ भारी बारिश की संभावना है. 10 सितंबर से भारी बारिश की चेतावनी नहीं है. बिहार में 8 से 10 सितंबर तक बारिश बिहार में भी अगले तीन दिनों तक मौसम सक्रिय रहेगा. IMD ने 8, 9 और 10 सितंबर को बिहार में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. राज्य में बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है. बंगाल, सिक्किम और झारखंड में भी बारिश पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 8 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है. गंगीय पश्चिम बंगाल में 8 और 9 सितंबर को भी भारी बारिश हो सकती है. झारखंड में 8 सितंबर को गरज-चमक के साथ बारिश का दौर शुरू हो सकता है और 9 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है. ओडिशा में 8 सितंबर को गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. 9 और 10 सितंबर को यहां भारी बारिश की संभावना बढ़ेगी. पूर्वोत्तर राज्यों में भी सक्रिय रहेगा मौसम अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी बारिश का दौर बना रह सकता है. IMD के अनुसार असम-मेघालय में 8 सितंबर तक व्यापक बारिश और 9-10 सितंबर को भी बारिश की गतिविधियां रहने की संभावना है. पूर्वोत्तर के कई राज्यों में 8 से 10 सितंबर के दौरान भारी बारिश हो सकती है. पश्चिम और दक्षिण हिंदुस्तान में कैसा रहेगा मौसम? पश्चिमी हिंदुस्तान में गुजरात, महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों में 8 से 10 सितंबर के दौरान हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. कोंकण-गोवा में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है. दक्षिण हिंदुस्तान में कई राज्यों में छिटपुट बारिश की संभावना है. आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में 8 से 10 सितंबर तक गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. तमिलनाडु और तेलंगाना में भी कुछ जगह गरज-चमक की स्थिति बन सकती है. 8, 9 और 10 सितंबर का मौसम एक नजर में 📅 तारीख 🌧️ प्रमुख मौसम गतिविधियां 8 सितंबर 🌧️ MP, बिहार, पूर्वी यूपी, बंगाल-सिक्किम और पूर्वोत्तर में बारिश 9 सितंबर ⛈️ MP, बिहार, पूर्वी यूपी, बंगाल, झारखंड और ओडिशा में बारिश; कुछ जगह भारी बारिश 10 सितंबर 🌧️ MP, बिहार और ओडिशा समेत कई इलाकों में बारिश; दक्षिण हिंदुस्तान के कुछ हिस्सों में गरज-चमक बारिश के दौरान सावधानी जरूरी भारी बारिश वाले इलाकों में निचली जगहों पर पानी भरने और यातायात प्रभावित होने की परेशानी हो सकती है. गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहें. पहाड़ी और नदी किनारे वाले इलाकों में स्थानीय प्रशासन की चेतावनी पर ध्यान दें. कुल मिलाकर 8 से 10 सितंबर के बीच मध्य और पूर्वी हिंदुस्तान के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहने वाला है, जबकि पश्चिम और दक्षिण हिंदुस्तान में कई जगह हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक देखने को मिल सकती है. The post Weather Update : 8, 9, 10 सितंबर को देश के कई हिस्सों में बारिश, MP-Bihar समेत इन राज्यों में IMD का अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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DTU का टॉप BTech ब्रांच, Amazon और Google में प्लेसमेंट का मौका

अगर आप इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे हैं और सोच रहे हैं कि कौन सा ब्रांच लेने से नौकरी की गारंटी ज्यादा रहती है, तो दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी यानी DTU के 2023-24 पास आउट बैच के आंकड़े आपकी उलझन दूर कर सकते हैं. यहां Computer Engineering ब्रांच ने प्लेसमेंट के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया है. Amazon और Google जैसी दिग्गज कंपनियां भी यहां के स्टूडेंट्स को हाथों-हाथ उठा रही हैं. Computer Engineering ने मारी बाजी DTU में Computer Engineering यानी COE ब्रांच को सबसे ज्यादा भरोसे के साथ देखा जाता है. इस ब्रांच से 489 स्टूडेंट्स ने प्लेसमेंट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से 389 स्टूडेंट्स को नौकरी का ऑफर मिल गया. यानी हर तीन में से करीब ढाई स्टूडेंट को कैंपस में ही जॉब मिल गई, जो अपने आप में एक शानदार आंकड़ा है. कितनी सैलरी, कितना पैकेज? ब्रांच रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स ऑफर मिले औसत पैकेज (लाख) मैक्सिमम पैकेज (लाख) Computer Engineering 489 389 17.21 85.3 Software Engineering 158 114 21.54 64 Mathematics & Computing 152 126 18.90 85.30 Electronics & Communication 228 153 16.61 85.30 Information Technology 160 119 16.23 51 अब बात करते हैं पैसों की, जो हर स्टूडेंट के लिए सबसे बड़ा सवाल होता है. Computer Engineering ब्रांच का औसत पैकेज 17.21 लाख रुपये सालाना रहा, वहीं सबसे ज्यादा पैकेज 85.3 लाख रुपये तक पहुंचा. यह आंकड़ा दिखाता है कि सिर्फ औसत ही नहीं, बल्कि टॉप परफॉर्मर्स के लिए भी यहां शानदार मौके मौजूद हैं. ये भी पढ़ें: IIT ISM धनबाद में रैंक 4167 पर BTech CSE पक्का, देखें कैटेगरी वाइज सीट अलॉटमेंट Amazon और Google की दिलचस्पी क्यों Amazon और Google जैसी कंपनियां हमेशा से मजबूत कोडिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स वाले स्टूडेंट्स की तलाश में रहती हैं, और DTU का Computer Engineering ब्रांच बिल्कुल इसी जरूरत को पूरा करता है. इसी वजह से हर साल यहां से बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स इन कंपनियों में सिलेक्ट होते हैं, जो कॉलेज की साख को और मजबूत बनाता है. दूसरे ब्रांच भी कम नहीं सिर्फ Computer Engineering ही नहीं, Software Engineering यानी SE ब्रांच ने भी सबको चौंकाया है. यहां का औसत पैकेज 21.54 लाख रुपये रहा, जो लिस्ट में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा Mathematics and Computing यानी MCE ब्रांच का औसत पैकेज भी 18.90 लाख रुपये के आसपास रहा, जो बताता है कि टेक्निकल ब्रांचेज का जलवा हर तरफ बरकरार है. MBA और MTech स्टूडेंट्स के लिए भी उम्मीद सिर्फ BTech ही नहीं, DTU में MBA और M.Tech करने वाले स्टूडेंट्स को भी अच्छी कंपनियां मिल रही हैं. MBA डिजिटल एंड सोशल मीडिया मार्केटिंग स्ट्रीम में औसत पैकेज करीब 9.48 लाख रुपये रहा, वहीं MTech में Software Engineering वाइज डिवीजन SPD का औसत पैकेज 25.64 लाख रुपये तक पहुंच गया, जो किसी भी BTech ब्रांच को टक्कर दे सकता है. ये भी पढ़ें: NIT Rourkela Placement: 2027 बैच के लिए शुरू हुई तैयारी, पिछले वर्ष 1,340 जॉब ऑफर और 131 LPA का था हाईएस्ट पैकेज The post DTU का टॉप BTech ब्रांच, Amazon और Google में प्लेसमेंट का मौका appeared first on Naya Vichar.

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आसनसोल में बढ़े साइबर ठगी के मामले, पहले महीने में 8 केस दर्ज होते थे, 5 दिन में हुई 10 FIR

Cyber Crime News: आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट (एडीपीसी) में साइबर क्राइम के मामलों में अचानक तेजी आ गयी है. पहले औसतन हर महीने 8 केस दर्ज होते थे. सितंबर के महीने में 1 से 5 तारीख के बीच 10 मामले दर्ज हो चुके हैं. NCRP पोर्टल पर शिकायत और जीरो ई-एफआईआर दरअसल, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर एक लाख रुपए से अधिक की ठगी की शिकायत आने पर स्थानीय थाने में स्वतः ई-जीरो एफआईआर दर्ज हो जाती है. पहले यह राशि 5 लाख रुपए थी. इससे अधिक की ठगी होने पर प्रथमिकी दर्ज करना अनिवार्य था. 5 लाख रुपए से कम की ठगी मामले में पुलिस जनरल डायरी एंट्री (जीडीई) करके जांच करती थी. जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी भी दर्ज होती थी. एक लाख रुपए की साइबर ठगी में प्राथमिकी दर्ज करने की बाध्यता की वजह से थानों में एफआईआर में तेजी आ गयी है. ये भी पढ़ें: 9 बैंक खाते और 72 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 7 गिरफ्तार, नेटवर्क के मास्टरमाइंड की तलाश 3 माह में साइबर अपराध से जुड़ी प्राथमिकी के आंकड़े जून 2026 में साइबर अपराध की घटना से जुड़ी कुल 8 प्राथमिकी दर्ज हुई. इसमें 5 प्राथमिकी साइबर क्राइम थाना आसनसोल में केस संख्या 30 से 34 तक, दुर्गापुर थाने में केस संख्या 324, अंडाल थाने में केस संख्या 192 और कांकसा थाने में केस संख्या 209 दर्ज हुई. जुलाई 2026 में साइबर क्राइम की 8 प्राथमिकी दर्ज हुई. इसमें 3 प्राथमिकियां साइबर क्राइम थाना आसनसोल में केस संख्या 35 से 37 तक, कुल्टी थाने में 2 प्रथमिकी केस संख्या 317 और 356, दुर्गापुर थाने में केस संख्या 401, आसनसोल नॉर्थ थाने में केस संख्या 338 और एनटीएस थाने में केस संख्या 109 दर्ज हुई. अगस्त 2026 में साइबर अपराध से जुड़ी कुल 9 प्राथमिकियां दर्ज हुईं. इसमें साइबर क्राइम थाने में 2 (केस संख्या 38 और 39), आसनसोल नॉर्थ थाने में केस संख्या 413, रानीगंज थाने में केस संख्या 363, आसनसोल साउथ थाने में केस संख्या 333, अंडाल थाने में केस संख्या 251, जामुड़िया थाने में केस संख्या 343, कुल्टी थाने में केस संख्या 391 तथा हीरापुर थाने में केस संख्या 218 दर्ज हुई. सितंबर 2026 में सिर्फ 5 दिन में 10 प्राथमिकियं दर्ज हुई हैं. साइबर क्राइम थाना आसनसोल में कुल 4 एफआईआर (केस नंबर 40 से 43), दुर्गापुर थाने में भी 4 प्राथमिकियां (केस संख्या 485 से 487 और केस संख्या 497) और कांकसा थाने में 2 प्राथमिकी केस संख्या 321 और 324 दर्ज दर्ज हुई. ये भी पढ़ें: 600 करोड़ के साइबर स्कैम में उद्योगपति पवन रुईया कोलकाता से गिरफ्तार एक लाख रुपए से अधिक की साइबर ठगी की शिकायत एनसीआरपी या 1930 पर होते ही उसकी ई-प्राथमिकी स्थानीय थानों में दर्ज हो रही है. इससे साइबर ठगी की प्राथमिकी दर्ज होने के मामले बढ़े हैं. पहले 5 लाख रुपए से अधिक की राशि की ठगी होने पर ही अनिवार्य प्राथमिकी दर्ज होती थी. 5 लाख से कम की ठगी की शिकायत पर जनरल इन्क्वायरी की जाती थी. जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी की जाती थी. डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में नियमित हो रहे सुधार से ई-जीरो एफआइआर दर्ज हो रहे हैं. पुलिस सभी मामलों में त्वरित कार्रवाई कर रही है. पिछले दिनों 44 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. -राहुल पांडे, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, साइबर अपराध, आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट दोस्त की मदद करने में गंवा दिये 1.37 लाख रुपए आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र में उपरपाड़ा के आमार बाड़ी इलाके के निवासी मानस दास (62) की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना आसनसोल में केस संख्या 42/26 शनिवार रात को दर्ज हुई. इसमें उन्होंने कहा कि 17 अगस्त से 18 अगस्त 2026 के बीच उन्हें मोबाइल फोन नंबर 9575473672 से कॉल आया. कॉल करने वाले ने कहा कि वह उनका (दास का) दोस्त रिंकू साहू है. उसकी पत्नी ईएम बाइपास हॉस्पिटल के भर्ती हैं. उसका फोन-पे काम नहीं कर रहा है और उन्हें 7415776981 नंबर पर ऑनलाइन पेमेंट कर दें. दास ने दोस्त की मदद के नाम पर 7 किस्तों में 1,36,999 रुपए पेमेंट कर दिये. बाद में पता चला कि उनके साथ साइबर ठगी हुई है. उन्होंने इसकी शिकायत एनसीआरपी पर की और शनिवार को साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई. पुलिस जांच में जुट गयी है. ये भी पढ़ें: कोलकाता में कॉल सेंटर खोल ठगी कर रहे थे झारखंड के साइबर अपराधी The post आसनसोल में बढ़े साइबर ठगी के मामले, पहले महीने में 8 केस दर्ज होते थे, 5 दिन में हुई 10 FIR appeared first on Naya Vichar.

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पटना में गंगा-पुनपुन का उफान, कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित; नौबतपुर के 27 गांवों में पानी, पुनपुन में 15 फीट बांध टूटा

Patna Flood: पटना जिले में गंगा और पुनपुन नदी के बढ़े जलस्तर से अलग-अलग इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. नौबतपुर और पुनपुन क्षेत्र में पुनपुन नदी के उफान से गांव, खेत और सड़कें प्रभावित हैं, जबकि दानापुर और मनेर के दियारा इलाके गंगा के बढ़े पानी से जूझ रहे हैं. पुनपुन में जहां 15 फीट जमींदारी बांध टूटने और कई जगह ओवरफ्लो से पानी बाजार व घरों तक पहुंच गया है, वहीं नौबतपुर में चार पंचायतों के करीब 27 गांव प्रभावित हैं. मनेर के दियारा क्षेत्रों में सड़क पर पानी रहने से आवागमन और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है. पटना जिले में गंगा और पुनपुन समेत कई नदियों के बढ़े जलस्तर से बाढ़ का दबाव बना हुआ है. नौबतपुर : पुनपुन नदी के पानी से 27 गांव प्रभावित नौबतपुर प्रखंड में पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर से चार पंचायतों के करीब 27 गांव प्रभावित हैं. करंजा, खजुरी-सावरचक, बारा और देवरा पंचायत के गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है. बखोरदारचक, पनहारा, करदाहां, मितनचक, खैरा और सलारपुर में पानी घरों तक पहुंचने की बात सामने आयी है. ग्रामीण संपर्क मार्गों के जलमग्न होने से कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है. देवरा और बारा पंचायत में हजारों एकड़ धान की फसल डूबने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है. पशुपालकों के सामने मवेशियों के चारे और सुरक्षित स्थान की समस्या भी बनी हुई है. पटना जिला कृषक संघर्ष समिति के अध्यक्ष अजय कुमार ने प्रभावित फसलों का वैज्ञानिक सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है. पुनपुन नदी में कटाव से गांव में पहुंचा पानी पुनपुन : 15 फीट जमींदारी बांध टूटा, बाजार तक पहुंचा पानी पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब तीन मीटर ऊपर पहुंचने के बाद तटबंधों और निचले इलाकों पर दबाव बना हुआ है. पैमार पंचायत के बड़हियाकोल के समीप करीब 15 फीट जमींदारी बांध टूट गया. इससे गांवों और खेतों में तेजी से पानी फैल गया और बड़ी संख्या में धान की फसल जलमग्न हो गयी. पुनपुन घाट के पास तीन जगह नदी का पानी ओवरफ्लो कर रहा है. मुख्य बाजार के सामने की गली, लक्ष्मण झूला और पकड़ी के समीप पानी फैलने से परेशानी बढ़ गयी है. पुनपुन बाजार में मस्जिद के पास तक पानी पहुंच गया है, जबकि पुनपुन बाजार और शिवनगर के करीब 700 घरों में पानी घुसने की जानकारी है. पटना में गंगा और पुनपुन दोनों से बढ़ा बाढ़ का दबाव पटना जिले में गंगा का असर मुख्य रूप से मनेर, दानापुर और दियारा क्षेत्रों में, जबकि पुनपुन का प्रभाव नौबतपुर, पुनपुन और आसपास के दक्षिणी इलाकों में देखने को मिल रहा है. दोनों नदी तंत्रों के बढ़े जलस्तर से खेत, गांव, सड़क, स्कूल और आवागमन प्रभावित हुए हैं. पुनपुन के उफान से नौबतपुर में बाढ़, 27 गांवों में घुसा पानी; हजारों एकड़ धान की फसल पर खतरा! The post पटना में गंगा-पुनपुन का उफान, कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित; नौबतपुर के 27 गांवों में पानी, पुनपुन में 15 फीट बांध टूटा appeared first on Naya Vichar.

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Ganesh Chaturthi Special: मां पार्वती ने हल्दी से कैसे बनाए गणेश जी? जानें जन्म की पूरी कहानी

Ganesh Chaturthi Special: गणेश चतुर्थी 2026 का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा. इसी खास मौके पर नया विचार की धर्म बीट में शुरू हो रही ‘गणेश चतुर्थी स्पेशल’ सीरीज में हम भगवान गणेश से जुड़ी ऐसी कथाएं आपको बताने जा रहे हैं, जिनमें आस्था के साथ-साथ जीवन के गहरे संदेश भी छिपे होंगे. सीरीज की पहली कड़ी में जानिए भगवान गणेश के जन्म से लेकर उनके गजानन बनने और प्रथम पूज्य कहलाने की रोचक कथा. मां पार्वती ने कैसे बनाया गणेश जी को? भगवान गणेश के जन्म की कथा अलग-अलग पुराणों और परंपराओं में कुछ अंतर के साथ मिलती है. शिव पुराण के रुद्र संहिता के कुमार खंड में बताया गया है कि एक बार मां पार्वती स्नान करने जा रही थीं. वह चाहती थीं कि उस दौरान कोई उनके पास न आए. इसलिए उन्होंने एक ऐसे बालक की रचना की, जो उनकी आज्ञा का पूरी तरह पालन करे. मां पार्वती ने अपने शरीर पर लगे उबटन या लेप से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राणों का संचार किया. उन्होंने उसे अपना पुत्र माना और द्वार पर पहरा देने की जिम्मेदारी दी. स्कंद पुराण में भी इससे मिलता-जुलता प्रसंग मिलता है. इसमें भी पार्वती द्वारा अपने शरीर के लेप से बालक की रचना किए जाने का उल्लेख है. यही कारण है कि गणेश जी के जन्म को केवल ‘हल्दी से बने गणेश’ कहना पूरी पौराणिक कथा को नहीं दर्शाता, बल्कि हल्दी के उबटन वाली कथा लोक परंपरा में अधिक प्रचलित है. मां की आज्ञा को माना सबसे बड़ा कर्तव्य पार्वती ने बालक से कहा कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, तब तक किसी को भी अंदर न आने न दें. बालक ने मां की आज्ञा को अपना कर्तव्य मान लिया और द्वार पर पहरा देने लगा. कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे. गणेश जी उन्हें पहचानते नहीं थे. उन्होंने शिव को भी अंदर जाने से रोक दिया. शिव ने बताया कि वह पार्वती के पति हैं और उन्हें अंदर जाने से कोई नहीं रोक सकता. लेकिन गणेश जी अपनी मां की आज्ञा से पीछे नहीं हटे. उनके लिए मां का आदेश सबसे महत्वपूर्ण था. शिव के गणों से हुआ युद्ध गणेश जी को हटाने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को भेजा. तब गणेश जी ने अकेले ही उनका सामना किया. शिव पुराण में गणेश जी और शिव के गणों के बीच हुए युद्ध का विस्तार से वर्णन मिलता है. गणेश जी के साहस और पराक्रम से सभी आश्चर्यचकित रह गए. जब वह किसी भी तरह वहां से हटने को तैयार नहीं हुए, तब भगवान शिव स्वयं उनके सामने आए. शिव ने क्यों काटा गणेश जी का सिर? भगवान शिव और गणेश जी के बीच युद्ध हुआ. युद्ध के दौरान शिव ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर अलग कर दिया. जब मां पार्वती को इस घटना का पता चला, तो वह क्रोधित हुईं. उन्होंने शिव से गणेश जी के सिर को पुनः स्थापित करने की मांग की. पार्वती जी का क्रोध इतना बढ़ गया कि उन्होंने पूरी सृष्टि के विनाश की चेतावनी तक दे दी. परिस्थिति को देखते हुए भगवान शिव ने गणेश जी को फिर से उस रूप में वापस लाने का वचन दिया. हाथी का सिर लगाकर मिला नया जीवन भगवान शिव ने अपने गणों को उत्तर दिशा की ओर जाने और वहां मिलने वाले पहले जीव का सिर लाने का आदेश दिया. गणों को उत्तर दिशा में एक हाथी मिला. वे उसका सिर लेकर लौटे. इसके बाद हाथी का सिर गणेश जी के शरीर पर लगाया गया और मंत्रों के माध्यम से उन्हें नया जीवन दिया गया. शिव पुराण में गणेश जी के पुनर्जीवन और उनके गजानन स्वरूप से जुड़ा यह प्रसंग मिलता है. इस तरह गणेश जी को हाथी के मुख वाला (गजानन) स्वरूप प्राप्त हुआ. इसलिए गणेश जी को गजानन कहा जाता है. ये भी पढ़ें: Ganesh Jee Ki Arti: ऐसे करें गणेश जी की आरती, इस मंत्रों का करें जाप ऐसे बने गणपति और प्रथम पूज्य गणेश जी के जीवित होने के बाद भगवान शिव ने उन्हें गले लगाया. इसके बाद उन्हें अपने गणों का प्रमुख बनाया. इस वजह से गणेश जी का एक नाम ‘गणपति’ पड़ा. इस घटना के बाद गणेश जी को कई महत्वपूर्ण वरदान मिले. पौराणिक मान्यता के अनुसार उन्हें शुभ कार्यों और देवपूजा में सबसे पहले पूजे जाने का अधिकार प्राप्त हुआ. यही वजह है कि आज भी किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से की जाती है. गणेश जी की कथा में छिपा जीवन संदेश गणेश जी की यह कथा केवल जन्म और पुनर्जीवन की कहानी नहीं है. इसमें जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश भी छिपे हैं. गणेश जी का अपनी मां की आज्ञा के लिए अडिग रहना कर्तव्य, निष्ठा और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है. वहीं, उनका सिर कटना और फिर हाथी का सिर लगाया जाना आध्यात्मिक रूप से अहंकार से विवेक की ओर बढ़ने का संकेत है. हाथी को हिंदुस्तानीय परंपरा में बुद्धि, धैर्य, शक्ति और स्मरण शक्ति से जोड़कर देखा गया है. इसलिए गणेश जी का गजानन स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में केवल शक्ति पर्याप्त नहीं है बल्कि सही निर्णय के लिए बुद्धि, धैर्य और विवेक भी जरूरी हैं. पुराणों में अलग-अलग रूपों में मिलती है कथा गणेश जी के जन्म की कथा सभी पुराणों में बिल्कुल एक जैसी नहीं है. शिव पुराण में पार्वती द्वारा अपने शरीर के लेप से बालक की रचना का प्रसंग प्रमुख है. स्कंद पुराण में भी इसी तरह की कथा मिलती है. वहीं, लोक परंपराओं में हल्दी के उबटन से गणेश जी के जन्म की कहानी अधिक लोकप्रिय है. इसलिए गणेश जी के जन्म से जुड़ी इन कथाओं को अलग-अलग पौराणिक और लोक परंपराओं के रूप में समझना चाहिए. ‘गणेश चतुर्थी स्पेशल’ कथा की अगली कड़ी में कल बताएंगे कि गणेश जी को एक दांत क्यों कहा जाता है, और इससे जुड़ी दिलचस्प और पौराणिक कथा The post Ganesh Chaturthi Special: मां पार्वती ने हल्दी से कैसे बनाए गणेश जी? जानें जन्म की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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आयुष्मान भारत योजना : बंगाल में 31541 लोगों ने कराया इलाज, 3.23 करोड़ लोगों को मिला PM-JAY कार्ड

Ayushman Bharat Yojana: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि राज्य में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रशासन बनने के बाद 3.23 करोड़ लोगों को आयुष्मान कार्ड मिले हैं. इसकी मदद से 31,541 लोगों ने अपना इलाज करवाया है. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat PM-JAY) की उपलब्धियां गिनाते हुए बंगाल के चीफ मिनिस्टर शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में इसकी शुरुआत हुई थी. लोगों को मिल रही कैशलेस इलाज की सुविधा : शुभेंदु उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के तहत अब तक राज्य में 31,541 लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं और अपना इलाज करवाया है. मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया बयान में कहा गया है कि हजारों मरीजों को सूचीबद्ध अस्पतालों में समय पर, बिना नकद भुगतान के इलाज मिल चुका है. उनके परिवारों को आर्थिक संकट में नहीं डाला गया है. बंगाल के बाहर के 716 लोगों को मिला लाभ चीफ मिनिस्टर ने यह भी बताया कि अस्पताल में भर्ती 31,541 मरीजों में से 716 मरीज राज्य के बाहर के थे. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि देशव्यापी परिवहन सुविधा का लाभ उठाते हुए पश्चिम बंगाल के मरीजों को हिंदुस्तान भर के प्रमुख संस्थानों में निर्बाध उपचार मिला है. मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने से लेकर देशभर में स्वास्थ्य सेवा सुविधा उपलब्ध कराने तक, इस योजना ने पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य सेवा में सकारात्मक बदलाव दिखने लगा है. ये भी पढ़ें: आयुष्मान हिंदुस्तान-PMJAY योजना : आज बंगाल में मनेगा ‘आयुष्मान दिवस’, 6 करोड़ लोगों को मिलेगा 5 लाख तक का मुफ्त इलाज ममता बनर्जी ने रोक रखा था योजना को पश्चिम बंगाल में जब ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस प्रशासन थी, तो उसने केंद्र की नरेंद्र मोदी प्रशासन की ओर से शुरू की गयी ‘आयुष्मान हिंदुस्तान योजना’ को राज्य में लागू नहीं होने दिया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना था कि राज्य की स्वास्थ्य बीमा योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ लोगों को 5 लाख तक के इलाज की सुविधा देता है. इसलिए पश्चिम बंगाल में केंद्रीय योजना आयुष्मान हिंदुस्तान की कोई आवश्यकता नहीं है. ये भी पढ़ें: बंगाल के 1867 अस्पतालों में ‘आयुष्मान हिंदुस्तान’ और ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत होगा कैशलेस इलाज शुभेंदु अधिकारी ने लागू की आयुष्मान हिंदुस्तान योजना पश्चिम बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने सबसे पहले ‘आयुष्मान हिंदुस्तान पीएम-जय योजना’ को राज्य में लागू किया. मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जो लोग ‘आयुष्मान हिंदुस्तान पीएम-जय योजना’ के लिए पात्र नहीं होंगे, उन्हें मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर किया जायेगा. कवरेज राशि प्रति वर्ष 5 लाख रुपए होगी. ये भी पढ़ें: बंगाल बजट: आयुष्मान हिंदुस्तान योजना को मिले 3100 करोड़, बंगाल के इतने लोगों का अब होगा मुफ्त इलाज The post आयुष्मान हिंदुस्तान योजना : बंगाल में 31541 लोगों ने कराया इलाज, 3.23 करोड़ लोगों को मिला PM-JAY कार्ड appeared first on Naya Vichar.

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चतरा विधायक जनार्दन पासवान के बेटे का अपहरण, रांची पुलिस ने चंद घंटे में किया बरामद

चतरा से दीनबंधू और मो तसलीम की रिपोर्ट रांची: झारखंड की राजधानी रांची में विधानसभा थाना क्षेत्र स्थित अमेटी यूनिवर्सिटी के बाहर से चतरा से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक जनार्दन पासवान के छोटे बेटे सौरभ के अपहरण की सूचना सामने आयी है. घटना सोमवार शाम करीब पांच बजे की बतायी जा रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपहरणकर्ता ने उनके बेटे को थार से अपहरण किया और स्काॅर्पियो पर सवार होकर चले गए. सूचना मिलने के बाद पुलिस जांच में जुट गयी. हालांकि, राहत की बात यह है कि रांची पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सौरभ को बरामद भी कर लिया है. सौरभ की बरामदगी अरगोड़ा क्षेत्र से हुई है. सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है पुलिस जांच के दौरान जो जानकारी सामने आई है उसके आधार पर पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और मामले के तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. विधायक जनार्दन पासवान ने बताया कि अपराधियों ने उनके बेटे के साथ मारपीट की और उसे जबरदस्ती अपने साथ गाड़ी में बैठाकर ले गए हैं. उनके बेटे का नाम सौरभ है, जो रांची के अमेटी यूनिर्विसिटी में पढ़ाई कर रहा है. बताया यह जा रहा है कि अपहरण से पहले यूनिवर्सिटी के गेट पर सौरभ को थार से उतारकर पिटाई की गई. उसके बाद स्कॉर्पियो में बैठाकर ले जाया गया. रांची पुलिस ने दिखाई तत्परता रांची पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एमिटी यूनिवर्सिटी के समीप से कथित रूप से अपहृत चतरा विधायक जनार्दन पासवान के छोटे पुत्र सौरभ को सकुशल बरामद कर लिया है. विधायक जनार्दन पासवान ने अपने पुत्र की सकुशल बरामदगी की पुष्टि की है. सौरभ के अपहरण की सूचना मिलते ही रांची पुलिस सक्रिय हुई और इलाके की घेराबंदी कर सर्च अभियान शुरू किया था. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. घटना के पीछे के कारणों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है. विधायक पुत्र की बरामदगी के बाद परिजनों और समर्थकों ने राहत की सांस ली है. चतरा पुलिस से मिली तकनीकी जानकारी रांची पुलिस की इस कार्रवाई में चतरा पुलिस ने रांची पुलिस को तकनीकी सहयोग दिया. इसके बाद पुलिस को सौरभ तक पहुंचने में कामयाबी मिली. The post चतरा विधायक जनार्दन पासवान के बेटे का अपहरण, रांची पुलिस ने चंद घंटे में किया बरामद appeared first on Naya Vichar.

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Bigg Boss 20 Episode 1 Live: इस कंटेस्टेंट पर भड़की मैरी कॉम, बोली- आगे से मुझे मत टोकना

Bigg Boss 20 Episode 1: बिग बॉस 20 का प्रीमियर हो चुका है औऱ 16 कंटेस्टेंट्स अब अपने जबरदस्त गेम प्लान से दर्शकों को एंटरटेन करेंगे. इसी बीच फर्स्ट एपिसोड में क्या कुछ खास रहा. आइये जानते हैं पल-पल के अपडेट्स. The post Bigg Boss 20 Episode 1 Live: इस कंटेस्टेंट पर भड़की मैरी कॉम, बोली- आगे से मुझे मत टोकना appeared first on Naya Vichar.

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Pitru Paksha 2026: पूर्वज से पहले क्यों जरूरी है ऋषि तर्पण, नहीं करने पर क्या होगा; पहले जान लें तारीख और महत्व

Pitru Paksha 2026 Rishi Tarpan: मिथिला और महावीर पंचांग के अनुसार, इस साल पितृ पक्ष का आरंभ 26 सितंबर से होने वाला है. इस दिन भाद्रपद (भादो) की पूर्णिमा तिथि है. इसलिए इस दिन ऋषियों के नाम से तर्पण किया जाएगा. इसके अलावा इस दिन उन पूर्वजों के लिए तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध कर्म किया जाएंगे जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि में हुई. इस साल आश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक पूर्वजों के लिए तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध किया जाएगा. आइए, जानते हैं कि पूर्वज से पहले ऋषि का तर्पण क्यों जरूरी है, यह किस तारीख को किया जाएगा और इसका महत्व क्या है. पितर से पहले क्यों जरूरी हो ऋषि तर्पण धर्मशास्त्र के मुताबिक, भाद्रपद पूर्णिमा के दिन ऋषियों का तर्पण करना जरूरी है. शास्त्रों के अनुसार, मनुष्य पर जन्म लेता है तब से ही वह ऋषि, देवता और पितर (पूर्वज) का ऋणी हो जाता है. इसे ऋषि ऋण, देव ऋण और पितृ ऋण के नाम से जाना जाता है. इसलिए पितृ पक्ष में इनके लिए तर्पण करने की परंपरा है. कर्मकांड के जानकार पं. धर्मनाथ झा ने बताया कि पितृ पक्ष में पितृ तर्पण से पहले ऋषि तर्पण करना जरूरी है क्योंकि इसके बिना पूर्वज भी तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध कर्म स्वीकार नहीं करते. पितृ पक्ष में कब होगा ऋषि तर्पण पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि गुरुवार, 26 सितंबर 2026 को है. ऐसे में इस दिन ऋषि तर्पण किया जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों में ऋषि तर्पण के लिए भाद्रपद पूर्णिमा तिथि का स्पष्ट उल्लेख है. तिथि दिनांक समय पूर्णिमा तिथि आरंभ 25 सितंबर 2026 रात- 11: 06बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त 26 सितंबर 2026 रात 10:18 बजे उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा 26 सितंबर, शनिवार पूरे दिन मान्य पितृ पक्ष में सबसे पहले अगस्त्य ऋषि का तर्पण क्यों? वैदिक परंपरा के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर सबसे पहले और विशेष रूप से अगस्त्य ऋषि के लिए तर्पण किया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों में उन्हें पितृ पूजन का अधिकारी, विघ्नों को दूर करने वाला और तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध का साक्षी बताया गया है. ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2026: कब से शुरू होगा पितृ पक्ष? किस तारीख को करें पूर्वजों का तर्पण, श्राद्ध या पिंडदान देव और ऋषि तर्पण की विधि भाद्रपद पूर्णिमा के दिन ऋषि तर्पण के दौरान क्रम से देवता, ऋषि और पितर यानी पूर्वज का तर्पण किया जाता है. देव तर्पण के लिए पूरब की ओर मुंह करके जनेऊ को गले में आगे की ओर (हृदय की तरफ) रखें. दाहिने हाथ की उंगलियों के आगे वाले हिस्से (देवतीर्थ) से देवता को बारी-बारी से जल देना चाहिए. इस दौरान ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) का ध्यान करना चाहिए. यह नियम नदियों के लिए है. अर्धा से भी देवता को जल दिया जा सकता है. ऋषि तर्पण के दौरान उत्तर दिशा की ओर मुंह करके हथेली के ऋषि तीर्थ से ऋषि (अगस्त्य) को जल अर्पित करना चाहिए. ऋषि तर्पण इन्फोग्राफिक्स (AI) The post Pitru Paksha 2026: पूर्वज से पहले क्यों जरूरी है ऋषि तर्पण, नहीं करने पर क्या होगा; पहले जान लें तारीख और महत्व appeared first on Naya Vichar.

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