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इस साल मिलेगी मोटी सैलरी हाइक? TeamLease रिपोर्ट में सेक्टर-वाइज अनुमान

Private Job Salary Hike : प्रशासनी नौकरी करने वाले कर्मचारी जहां बेसब्री से 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं, वहीं प्राइवेट सेक्टर (Private Job) में काम करने वालों की नजरें भी इस साल के अप्रेजल और इंक्रीमेंट पर टिकी हुई हैं. वित्त वर्ष 2025-26 का इंक्रीमेंट तो लोगों के खातों में आने लगा है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में सैलरी कितनी बढ़ेगी? एचआर कंपनी ‘टीमलीज सर्विसेज’ (TeamLease Services) की ताजा रिपोर्ट ‘जॉब्स एंड सैलरीज प्राइमर 2026-27’ के मुताबिक, इस साल हिंदुस्तानीय कंपनियां अपने कर्मचारियों पर दिल खोलकर पैसा बरसाने वाली हैं. रिपोर्ट का दावा है कि अलग-अलग सेक्टर्स में इस साल 8.6% से लेकर 10.2% तक का औसत सैलरी इंक्रीमेंट देखने को मिल सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह मार्केट में कुशल (Skilled) टैलेंट की भारी डिमांड होना है. सेक्टर के हिसाब से आपका कितना बढ़ेगा वेतन? टीमलीज ने देश के जॉब मार्केट और सेक्टर्स को उनकी ग्रोथ के हिसाब से तीन मुख्य कैटेगरीज में बांटा है. बंपर ग्रोथ वाले सेक्टर्स (औसत इंक्रीमेंट: 9.6% से 10.2%) इस लिस्ट में ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल), फिनटेक (FinTech), हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल्स (दवा कंपनियां) सबसे आगे चल रहे हैं. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स: इस साल सबसे ज्यादा 11.2% तक की बंपर हाइक पा सकते हैं. क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर: इनकी सैलरी में 10.9% का तगड़ा उछाल आ सकता है. आईटी सपोर्ट एग्जीक्यूटिव: 10.3% की ग्रोथ देख सकते हैं. साइट इंजीनियर्स: इनकी सैलरी 10.2% तक बढ़ सकती है. सस्टेनेबल (स्थिर) ग्रोथ वाले सेक्टर्स (औसत इंक्रीमेंट: 8.9% से 9.5%) इस कैटेगरी में ऑटोमोटिव (गाड़ियों का सेक्टर), रिटेल, इंश्योरेंस और बीपीओ (BPO) शामिल हैं. प्रोजेक्ट इंजीनियर्स: इन्हें औसतन 10.7% का शानदार इंक्रीमेंट मिल सकता है. EHS ऑफिसर्स और रिलेशनशिप एग्जीक्यूटिव: इनकी सैलरी 10.1% तक बढ़ सकती है. धीरे-धीरे बढ़ने वाले सेक्टर्स (औसत इंक्रीमेंट: 8.6% से 8.8%) बैंकिंग, कंस्ट्रक्शन, रियल एस्टेट, टेलीकॉम और टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग) में कंपनियां इस साल थोड़ा संभलकर पैसा बढ़ाएंगी. इसके बावजूद कुछ खास पदों पर अच्छी हाइक मिलेगी. साइट इंजीनियर्स: 9.8% की बढ़ोतरी. टेलीकॉलर्स: 9.7% की हाइक. फाइनेंशियल एनालिस्ट: 9.5% का इंक्रीमेंट. इन शहरों में मिलेगा सबसे ज्यादा इंक्रीमेंट टीमलीज सर्विसेज के मुताबिक, अब सैलरी बढ़ने का ट्रेंड सिर्फ दिल्ली-मुंबई जैसे सुपर-मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इस बार बाजी कुछ दूसरे शहर मार रहे हैं. सैलरी बढ़ाने के मामले में इस साल चेन्नई (9.7%) सबसे आगे है. इसके ठीक बाद पुणे और हैदराबाद (9.6%) और अहमदाबाद (9.5%) का नंबर आता है. नए मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के कारण विशाखापट्टनम में 9.5% और नागपुर में 9.4% की औसत सैलरी हाइक देखी जा सकती है. पिछले साल के मुकाबले इस साल सूरत (8.4%), चंडीगढ़ (8.5%) और लखनऊ (8.7%) में सैलरी बढ़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी रहने का अनुमान है. इंक्रीमेंट का पूरा गणित: एक नजर में सेक्टर की कैटेगरी औसत सैलरी हाइक इन पदों को होगा सबसे ज्यादा फायदा हाई ग्रोथ (EV, फिनटेक, फार्मा) 9.6% – 10.2% इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (11.2%), क्वालिटी इंस्पेक्टर (10.9%) स्थिर ग्रोथ (ऑटो, रिटेल, BPO) 8.9% – 9.5% प्रोजेक्ट इंजीनियर (10.7%), IT सपोर्ट (10.1%) धीमी ग्रोथ (बैंकिंग, रियल एस्टेट) 8.6% – 8.8% साइट इंजीनियर (9.8%), टेलीकॉलर (9.7%) Also Read : 1 अप्रैल 2027 से बदल जाएगा लोन का नियम ! CIBIL स्कोर 730 से कम तो भूल जाइए होम-कार लोन The post इस साल मिलेगी मोटी सैलरी हाइक? TeamLease रिपोर्ट में सेक्टर-वाइज अनुमान appeared first on Naya Vichar.

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शेखपुरा के चांदी वृंदावन पहाड़ पर मिला प्राचीन मूर्ति और पांडुलिपि का प्रमाण, महाभारत काल से जुड़ी है मान्यता

Shiekhpura News : (प्रदीप कुमार) शेखपुरा जिले के अरियरी प्रखंड स्थित चांदी वृंदावन पहाड़ एक बार फिर चर्चा में है. यहां प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज को लेकर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सुजीत कुमार सुमन ने स्थल का निरीक्षण किया. पहाड़ और आसपास के क्षेत्र में बिखरी प्राचीन मूर्तियों को देखकर इतिहास से जुड़े नए रहस्यों के खुलने की उम्मीद बढ़ गई है. प्राचीन धरोहरों की खोज में पहुंचे अधिकारी जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सुजीत कुमार सुमन ने चांदी वृंदावन पहाड़ और चांदी गांव का विस्तृत निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में मौजूद प्राचीन मूर्तियों और अन्य ऐतिहासिक अवशेषों का जायजा लिया. जांच के लिए कुछ नमूने भी अपने साथ ले गए हैं. इतिहास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा स्थल निरीक्षण के दौरान पदाधिकारी ने कहा कि चांदी वृंदावन पहाड़ शेखपुरा के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल है. यहां मौजूद पुरातात्विक अवशेष इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की ओर संकेत करते हैं. उन्होंने इस धरोहर को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया. पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने कहा कि इस ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित कर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए. इससे न केवल जिले की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे. वर्षों से उठ रही है खुदाई की मांग स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ता पिंटू चंद्रवंशी द्वारा लंबे समय से इस क्षेत्र में वैज्ञानिक खुदाई कराने और पर्यटन विकास की मांग की जा रही है. उनका मानना है कि पहाड़ के अंदर और आसपास कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य छिपे हो सकते हैं, जो जिले के इतिहास को नई पहचान दे सकते हैं. महाहिंदुस्तान काल और जरासंध से जुड़ी है मान्यता स्थानीय मान्यताओं के अनुसार चांदी वृंदावन पहाड़ का संबंध महाहिंदुस्तान काल और मगध सम्राट जरासंध से माना जाता है. इसी वजह से यह स्थल इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यदि यहां व्यापक स्तर पर शोध और खुदाई होती है तो कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारियां सामने आ सकती हैं. ऐतिहासिक विरासत को बचाने की जरूरत ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते इस क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित नहीं किया गया तो कई महत्वपूर्ण अवशेष नष्ट हो सकते हैं. लोगों ने प्रशासन और पुरातत्व विभाग से जल्द सर्वेक्षण और संरक्षण कार्य शुरू करने की मांग की है, ताकि शेखपुरा की इस अनमोल विरासत को सुरक्षित रखा जा सके. Also Read : बिहार STF बड़ी कार्रवाई, 12 साल से फरार नक्सली को धर दबोचा The post शेखपुरा के चांदी वृंदावन पहाड़ पर मिला प्राचीन मूर्ति और पांडुलिपि का प्रमाण, महाहिंदुस्तान काल से जुड़ी है मान्यता appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, मुनीर की फौज ने ली 11 मासूम बच्चों सहित 13 अफगानों की जान

Pakistan Airstrikes Afghanistan: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव भड़क उठा है. तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. तालिबान प्रशासन का कहना है कि हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए और मरने वालों में बड़ी संख्या में शिशु शामिल हैं. इस संबंध में पाकिस्तान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. तालिबान का दावा- तीन प्रांतों में हुए हवाई हमले तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और कुनार, खोस्त तथा पक्तिका प्रांतों में कई स्थानों को निशाना बनाया. मुजाहिद के अनुसार, ‘पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने रात के समय नागरिकों के घरों पर बमबारी की. इस हमले में 11 बच्चों, एक स्त्री और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हुई है.’ उन्होंने यह भी बताया कि हमले में 14 स्त्रीएं घायल हुई हैं. प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी साझा कीं, जिनके बारे में दावा किया गया कि वे हमलों में प्रभावित लोगों की हैं. Reports circulating on social media claim that Pakistan has once again carried out airstrikes inside Afghanistan. Yesterday TTP-linked militants attacked a Pakistani paramilitary post in Hassan Khel near Peshawar, reportedly killing 7 soldiers and capturing 5 others.@RANATVAF… https://t.co/Uji3VdxNMD — Sami Yousafzai سمیع یوسفزي (@SamiYousafzaii) June 9, 2026 पिछले एक साल से बढ़ रही हैं सीमा पार झड़पें तालिबान प्रशासन का आरोप है कि पिछले एक वर्ष के दौरान पाकिस्तान की ओर से अफगान क्षेत्र में कई सैन्य अभियान चलाए गए हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. अफगानिस्तान का दावा है कि मार्च में भी पाकिस्तान ने काबुल स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया था, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. हालांकि संयुक्त राष्ट्र् ने 269 लोगों की मौत कंफर्म की थी.  2025 में बढ़ा था दोनों देशों के बीच संघर्ष अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव नया नहीं है. दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय से खटास बनी हुई है, लेकिन अक्टूबर 2025 में हालात और ज्यादा बिगड़ गए थे. रिपोर्टों के मुताबिक उस समय पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों, यहां तक कि राजधानी काबुल के आसपास भी हवाई हमले किए थे. इसके बाद सीमा पार संघर्ष और तेज हो गया. लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और झड़पों के कारण हजारों अफगान नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े. कई इलाकों में बड़े पैमाने पर विस्थापन की स्थिति पैदा हो गई. ये भी पढ़ें:- लंदन में हिंदुस्तानीय परिवार की दर्दनाक मौत: 36वीं मंजिल से गिरकर दंपती और बेटे की जान गई, सामने आईं कई चौंकाने वाली बातें पाकिस्तान क्या कहता रहा है? पाकिस्तान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान में मौजूद कुछ समूह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं. इस्लामाबाद का कहना है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठन अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल कर हमले करते हैं. पाकिस्तान कई बार यह भी दावा कर चुका है कि तालिबान प्रशासन इन संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है. हालांकि तालिबान प्रशासन इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है. ये भी पढ़ें:- अमेरिका ने अपाचे हेलीकॉप्टर गिराने का लिया बदला, ईरान के ऊपर किए ताबड़तोड़ हमले, तेहरान ने फिर दी चेतावनी रिश्तों में आई बड़ी दरार दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक समय पाकिस्तान को तालिबान का प्रमुख समर्थक माना जाता था. कई सालों तक तक इस्लामाबाद और तालिबान के बीच करीबी संबंधों की चर्चा होती रही. लेकिन 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में लौटने के बाद दोनों पक्षों के संबंध लगातार खराब होते गए. सीमा सुरक्षा, उग्रवादी संगठनों की मौजूदगी और सीमा पार हमलों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद गहराते चले गए, जो अब खुले टकराव का रूप लेते दिखाई दे रहे हैं. The post पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, मुनीर की फौज ने ली 11 मासूम बच्चों सहित 13 अफगानों की जान appeared first on Naya Vichar.

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सपना चौधरी की जिंदगी में मचा बवाल, पति के खिलाफ कोर्ट पहुंचीं तो मिला बड़ा सहारा

Sapna Choudhary: हरियाणवी डांसर और गायिका सपना चौधरी इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं. हाल ही में सामने आए एक कानूनी मामले में दिल्ली की एक स्त्री अदालत ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है. अदालत ने उनके पति यशवीर साहू (वीर साहू) के खिलाफ कुछ अस्थायी प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है. यह फैसला घरेलू विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. अदालत ने जारी किए अंतरिम निर्देश मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अगली सुनवाई तक दोनों पक्षों के बीच दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. आदेश के अनुसार, पति को सपना चौधरी से सीधे संपर्क करने, उनके निवास स्थान, कार्यस्थल या सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने से रोका गया है. अदालत का उद्देश्य मामले की निष्पक्ष सुनवाई तक दोनों पक्षों की सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करना है. क्या है पूरा मामला? दायर याचिका में सपना चौधरी ने वैवाहिक जीवन से जुड़ी कई परेशानियों का जिक्र किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि शादी के बाद उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. याचिका के अनुसार, हालात ऐसे बने कि उन्हें अपने बच्चों के साथ ससुराल छोड़कर मायके में रहना पड़ा. उन्होंने अदालत के समक्ष यह भी आशंका जताई कि भविष्य में उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है. इसी आधार पर अदालत से सुरक्षा की मांग की गई थी. फिल्म प्रीमियर को लेकर भी जताई गई चिंता सुनवाई के दौरान सपना की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उनकी आगामी फिल्म Momaku का प्रीमियर आयोजित होना है. ऐसे में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सुरक्षा जरूरी है. अदालत ने इस तर्क को ध्यान में रखते हुए अंतरिम आदेश जारी किया. सबूतों पर विचार के बाद आया फैसला मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कई दस्तावेज, तस्वीरें और अन्य सबूत पेश किए गए. इन्हें देखने के बाद न्यायालय ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत देने का फैसला किया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा. यह भी पढ़ें: सतीश शाह को मरणोपरांत मिलेगा पद्म श्री, भावुक हुईं रुपाली गांगुली बोलीं- काश वो खुद ये सम्मान ले पाते The post सपना चौधरी की जिंदगी में मचा बवाल, पति के खिलाफ कोर्ट पहुंचीं तो मिला बड़ा सहारा appeared first on Naya Vichar.

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MBA के बाद सरकारी नौकरी कर कमा सकते हैं लाखों, देखें ये 4 बेस्ट ऑप्शन

Sarkari Jobs After MBA: एमबीए (MBA) की डिग्री लेने वाले अक्सर पहले प्राइवेट नौकरी का रुख करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि MBA करने के बाद आप प्रशासनी नौकरी भी कर सकते हैं. केंद्र और राज्य प्रशासनों के विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), बैंकिंग सेक्टर आदि में MBA डिग्री होल्डर की काफी डिमांड है. साथ ही इन पदों पर सैलरी अच्छी होती है. प्रशासनी नौकरी होने के कारण भत्ते और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं. 1. बैंकिंग और फाइनेंस के फील्ड में करियर MBA ग्रेजुएट के लिए बैंकिंग सेक्टर सबसे लोकप्रिय ऑप्शन में से एक है. RBI Grade B: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में यह सबसे प्रतिष्ठित पदों में शामिल है, जहां पॉलिसी मेकिंग और फाइनेंस मैनेजमेंट की भूमिका मिलती है. MBA की डिग्री वाले कैंडिडेट्स इस भर्ती के लिए अप्लाई कर सकते हैं. RBI की ऑफिशियल वेबसाइट rbi.org.in से आपको ज्यादा जानकारी मिल जाएगी. RBI ग्रेड बी ऑफिसर की शुरुआती सैलरी भत्तों को मिलाकर लगभग 1.5 लाख रुपये होती है. प्रशासनी बैंक: MBA करने के बाद आप बैंक की नौकरी भी कर सकते हैं. प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) और स्पेशलिस्ट ऑफिसर (SO) के पदों पर भर्ती होती है. सैलरी पोस्ट के अनुसार, अलग-अलग हो सकती है. SEBI, IRDA जैसे संस्थान: फाइनेंशियल स्ट्रैटजी और प्लानिंग से जुड़े पदों पर अवसर मिलते हैं. 2. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) में मौके हिंदुस्तान की बड़ी प्रशासनी कंपनियां भी MBA उम्मीदवारों को बड़े पैमाने पर नियुक्त करती हैं. ONGC NTPC BHEL GAIL इन कंपनियों में मैनेजमेंट ट्रेनी (MT), HR, मार्केटिंग और ऑपरेशंस जैसे पदों पर भर्ती होती है. रोल्स और कंपनी के अनुसार, सैलरी अलग-अलग होती है. आमतौर पर देखें अगर तो शुरुआती सैलरी 12 लाख से लेकर 25 लाख प्रति साल होती है. 3. प्रशासनिक और आर्थिक सेवाओं में अवसर MBA ग्रेजुएट केवल कॉर्पोरेट सेक्टर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्रतिष्ठित प्रशासनी सेवाओं में भी जा सकते हैं. UPSC सिविल सेवा: IAS, IPS, IRS जैसे उच्च कई पद हैं, जिनके लिए MBA ग्रेजुएट अप्लाई कर सकते हैं. MBA और टेक्निकल फील्ड वालों के लिए यहां शानदार करियर है. भत्ते और सुविधाएं मिलाकर IAS-IPS की सैलरी करीब 80,000 से लेकर 1,00,000 तक होती है. Indian Economic Service (IES): MBA करने के बाद IES के लिए अप्लाई कर सकते हैं. फाइनेंस और आर्थिक नीति से जुड़े महत्वपूर्ण पद होते हैं. शानदार करियर के साथ सैलरी भत्ते मिलाकर करीब 80,000 से 1,00,000 रुपये प्रति महीने तक होती है. 4. बीमा और अन्य प्रशासनी फील्ड LIC (Life Insurance Corporation) और अन्य प्रशासनी बीमा कंपनियों में भी MBA डिग्री होल्डर की काफी डिमांड है. इनमें रिस्क मैनेजमेंट, मैनेजमेंट और प्रशासनिक भूमिकाओं में MBA उम्मीदवारों की अच्छी मांग रहती है. शुरुआती सैलरी 1 लाख से 1.25 लाख रुपये प्रति महीने तक होती है. यह भी पढ़ें- BA के बाद टेंशन खत्म, ये 5 प्रशासनी नौकरियां बना सकती हैं करियर The post MBA के बाद प्रशासनी नौकरी कर कमा सकते हैं लाखों, देखें ये 4 बेस्ट ऑप्शन appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में भूजल संरक्षण की नई पहल, इंजेक्शन वेल परियोजना की तैयारी; हरित आवरण 15.5 प्रतिशत तक पहुंचा

Bihar News: (हिमांशु देव की रिपोर्ट)बिहार राज्य में लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है. लघु जल संसाधन विभाग पायलट आधार पर ‘इंजेक्शन वेल’ परियोजना शुरू करने जा रहा है, जिससे वर्षा जल को सीधे गहरे भूजल भंडार तक पहुंचाया जाएगा. इंजेक्शन वेल से बढ़ेगा भूजल स्तर इस तकनीक के माध्यम से बारिश के पानी को सीधे एक्वीफर तक पहुंचाया जाएगा, जिससे भूजल स्तर (Groundwater Level) में सुधार होगा और लंबे समय तक जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी. इसके साथ ही भूजल उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नया नियामक प्रारूप भी तैयार किया जा रहा है. जल-जीवन-हरियाली अभियान के सकारात्मक परिणाम हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार जल-जीवन-हरियाली अभियान के अच्छे परिणाम सामने आए हैं. वर्ष 2017 में जहां 102 प्रखंड अर्ध-गंभीर, गंभीर और अतिदोहित श्रेणी में थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 64 रह गई है. जल संरक्षण के लिए कई कार्य तालाब की तस्वीर अभियान के तहत तालाब, आहर, पोखर और पुराने कुओं का जीर्णोद्धार किया गया है. साथ ही वर्षा जल संचयन, चेकडैम निर्माण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है. हरित आवरण में बढ़ोतरी राज्य का हरित आवरण 9 प्रतिशत से बढ़कर 15.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इसे 17 प्रतिशत तक ले जाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है. किसानों को मिला लाभ जल संरक्षण के साथ जैविक खेती और टपक सिंचाई को बढ़ावा मिलने से किसानों की सिंचाई व्यवस्था बेहतर हुई है और उनकी आय में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है. विशेषज्ञों की राय जानकारों का मानना है कि जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के प्रयासों से आने वाले समय में जल संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. ALSO READ: पटना से चलने वाली ट्रेनों में पानी की भारी किल्लत, टॉयलेट और बेसिन के नल खराब, यात्रियों की बढ़ी परेशानी The post बिहार में भूजल संरक्षण की नई पहल, इंजेक्शन वेल परियोजना की तैयारी; हरित आवरण 15.5 प्रतिशत तक पहुंचा appeared first on Naya Vichar.

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सतीश शाह को मरणोपरांत मिलेगा पद्म श्री, भावुक हुईं रुपाली गांगुली बोलीं- काश वो खुद ये सम्मान ले पाते

Satish Shah: हिंदुस्तानीय सिनेमा और टेलीविजन जगत के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह को मरणोपरांत पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. यह घोषणा होने के बाद उनके चाहने वालों और इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकारों ने खुशी के साथ भावुक प्रतिक्रियाएं भी दी हैं. अभिनेता के साथ लंबे समय तक काम कर चुकीं टीवी स्टार रुपाली गांगुली ने भी इस समाचार पर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं. सतीश शाह को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान गृह मंत्रालय द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची जारी किए जाने के बाद यह जानकारी सामने आई कि दिवंगत अभिनेता सतीश शाह को कला और मनोरंजन जगत में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा. सतीश शाह ने अपने करियर में फिल्मों, टेलीविजन और थिएटर तीनों माध्यमों में उल्लेखनीय काम किया था. अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, दमदार अभिनय और यादगार किरदारों की बदौलत उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक दर्शकों का मनोरंजन किया. उनके अभिनय का प्रभाव कई पीढ़ियों तक देखने को मिला और यही वजह है कि आज भी उनके किरदार लोगों की यादों में बसे हुए हैं. रुपाली गांगुली हुईं भावुक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से सतीश शाह के योगदान को याद करते हुए एक पोस्ट साझा किया गया था. इस पोस्ट में उनके लंबे करियर, कला के प्रति समर्पण और युवा कलाकारों के मार्गदर्शन का जिक्र किया गया. Wish he could have received this honour himself …. https://t.co/c3fPnERcnu — Rupali Ganguly (@TheRupali) June 9, 2026 इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रुपाली गांगुली ने भावुक शब्दों में लिखा कि काश सतीश शाह खुद यह सम्मान प्राप्त करने के लिए मौजूद होते. उनके इस छोटे से संदेश ने फैंस को भी भावुक कर दिया. ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ से जुड़ा था खास रिश्ता रुपाली गांगुली और सतीश शाह ने लोकप्रिय टीवी शो Sarabhai vs Sarabhai में साथ काम किया था. शो में दोनों के किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया था. रुपाली कई मौकों पर सतीश शाह को अपना मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बता चुकी हैं. उनके निधन के बाद भी वह अक्सर उन्हें याद करती नजर आती हैं. 23 जून को होगा सम्मान समारोह राष्ट्रपति Droupadi Murmu 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले सिविल इन्वेस्टिचर समारोह में पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी. इसी समारोह में सतीश शाह को मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा. इसके अलावा अभिनेता R. Madhavan और सुपरस्टार Mammootty को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा. यह भी पढ़ें: राम चरण की ‘पेद्दी’ की कमाई पर लगा ब्रेक, मंगलवार को सिंगल डिजिट में सिमटी फिल्म The post सतीश शाह को मरणोपरांत मिलेगा पद्म श्री, भावुक हुईं रुपाली गांगुली बोलीं- काश वो खुद ये सम्मान ले पाते appeared first on Naya Vichar.

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4399 दिन… पीछे छूटे नेहरू, नरेंद्र मोदी बने भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री

Modi Surpass Nehru PM of India: हिंदुस्तानीय नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक और बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है. लगातार तीसरी बार देश की सत्ता संभाल रहे नरेंद्र मोदी अब हिंदुस्तान के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. प्रधानमंत्री मोदी का लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल अब 4,399 दिनों तक पहुंच चुका है, जबकि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,398 दिनों तक देश का नेतृत्व किया था. 2014 में शुरू हुआ सफर नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को हिंदुस्तान के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. उस समय हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया था और मोदी देश के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता बने थे जिन्होंने अपने दम पर पूर्ण बहुमत वाली प्रशासन का नेतृत्व किया. इसके बाद उन्होंने 2019 में दूसरी बार और 2024 में लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. लगातार तीन आम चुनाव जीतकर सत्ता में वापसी करना भी हिंदुस्तानीय नेतृत्व में बेहद दुर्लभ उपलब्धि माना जाता है. टूटा जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र हिंदुस्तान में पहले आम चुनाव के बाद 13 मई 1952 को निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. वह 27 मई 1964 तक इस पद पर बने रहे. इस दौरान उनका कुल कार्यकाल 4,398 दिनों का रहा. अब नरेंद्र मोदी ने 4,399 दिनों का लगातार कार्यकाल पूरा कर इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. वह देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने वाले नेता बन गए हैं. हालांकि, जवाहर लाल नेहरू 15 अगस्त 1947 को देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे. लेकिन उस समय वह चुनकर नहीं आए थे. उन्हें सर्वसम्मति से इस पद पर नियुक्त किया गया था. अगर उनके 1947 से 1964 तक के कार्यकाल को जोड़ दें, तो यह 6 वर्ष और 286 दिन यानी 6,130 दिन होता है. गुजरात से दिल्ली तक का सफर नरेंद्र मोदी का नेतृत्वक सफर राष्ट्रीय नेतृत्व में आने से पहले गुजरात से शुरू हुआ था. उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी और 21 मई 2014 तक इस पद पर बने रहे. करीब 13 साल से अधिक समय तक गुजरात का नेतृत्व करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व में कदम रखा और प्रधानमंत्री बने. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल राज्य के इतिहास में सबसे लंबा रहा है. नागरकोल में जनसभा के दौरान पीएम मोदी. फोटो- एक्स. 25वें साल में पहुंचा नेतृत्व का सफर प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का कुल नेतृत्वकाल अब 8,931 दिनों तक पहुंच गया है. इसके साथ ही उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 8,930 दिनों तक प्रशासन का नेतृत्व किया था. इस उपलब्धि के साथ मोदी अब हिंदुस्तान में किसी निर्वाचित प्रशासन के सबसे लंबे समय तक प्रमुख रहने वाले नेता बन गए हैं. उनका यह नेतृत्वक सफर अब 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. कई रिकॉर्ड पहले भी बना चुके हैं मोदी नरेंद्र मोदी के नाम पहले से ही कई महत्वपूर्ण नेतृत्वक उपलब्धियां दर्ज हैं. वह हिंदुस्तान के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म देश की स्वतंत्रता के बाद हुआ. इसके अलावा वह पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए और फिर तीसरे कार्यकाल के लिए भी सत्ता में वापसी की. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल कर अपनी नेतृत्वक पकड़ और जनसमर्थन को भी साबित किया है. बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान झालमुड़ी खाते पीएम मोदी. फोटो- एक्स. सोशल मीडिया पर भी कायम है दबदबा नेतृत्वक रिकॉर्ड्स के अलावा प्रधानमंत्री मोदी डिजिटल दुनिया में भी लगातार नए मुकाम हासिल कर रहे हैं. इसी महीने उनके यूट्यूब चैनल ने 3 करोड़ सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार किया है. इसके साथ ही वह दुनिया के मौजूदा और पूर्व राष्ट्राध्यक्षों तथा प्रशासन प्रमुखों में सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर्स वाले नेताओं में शामिल हो गए हैं. फरवरी 2025 में उन्होंने इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ फॉलोअर्स का आंकड़ा भी पार किया था. ऐसा करने वाले वह दुनिया के पहले कार्यरत राष्ट्र प्रमुख और राजनेता बने. फिलहाल इंस्टाग्राम पर उनके 10.1 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं. वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के 10.64 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं. ये भी पढ़ें:- ‘हमें कांग्रेस के लोगों ने ही जानकारी दी होगी…’ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर बोले कैलाश विजयवर्गीय ये भी पढ़ें:- ममता बनर्जी के चारों ओर सन्नाटा! फोन बंद, चेहरे गायब, दीदी के सबसे करीबी सांसदों ने संकट में मुंह फेरा पीएम मोदी के 12 साल: प्रमुख उपलब्धियां एक नजर में आर्थिक और वैश्विक स्तर पर हिंदुस्तान दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वित्तीय स्थिति बना. जीडीपी लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 4.18 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हुई. कारोबार को आसान बनाने और निवेश बढ़ाने पर जोर. डिजिटल वित्तीय स्थिति और यूपीआई को वैश्विक पहचान मिली. जनकल्याण और सामाजिक योजनाएं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन. प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 58 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते. आयुष्मान हिंदुस्तान योजना के जरिए करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों परिवारों को पक्के घर. जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल पहुंचाने का अभियान. स्वच्छता अभियान के तहत देश भर में सफाई अभियान के साथ ओडीएफ का सफल प्रतिपादन. नेतृत्वक और संवैधानिक फैसले जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया. तीन तलाक कानून लागू किया गया. नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित किया गया. नए संसद भवन का निर्माण और उद्घाटन. सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया गया. बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी एक्सप्रेसवे, हाईवे और रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार. वंदे हिंदुस्तान ट्रेनों की शुरुआत. कई नए एयरपोर्ट और बंदरगाह परियोजनाएं शुरू हुईं. गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान लागू किया गया. रक्षा और सुरक्षा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर. राफेल लड़ाकू विमान हिंदुस्तानीय

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पान के पत्ते के ये आसान उपाय बदल सकते हैं किस्मत! वास्तु दोष से लेकर धन लाभ तक माने जाते हैं प्रभावी

Betel Leaf Remedies: हिंदू धर्म में पान के पत्ते को शुभता, समृद्धि और मांगलिक कार्यों का प्रतीक माना जाता है. पूजा-पाठ, कलश स्थापना, विवाह और देवी-देवताओं के पूजन में इसका विशेष महत्व बताया गया है. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में पान के पत्ते का संबंध बुध और शुक्र ग्रह से माना जाता है, जो बुद्धि, संवाद कौशल, सुख-सुविधा और वैभव के कारक माने जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पान के पत्ते से जुड़े कुछ उपाय जीवन की बाधाओं को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं. अटके हुए कार्यों के लिए करें यह उपाय यदि किसी कारणवश आपके महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय से पूरे नहीं हो पा रहे हैं या बार-बार रुकावटें आ रही हैं, तो शुक्रवार या रविवार के दिन यह उपाय किया जा सकता है. मान्यता है कि पान के पत्ते पर थोड़ा सफेद चूना लगाकर उसे घर के मुख्य द्वार के पास ऐसी जगह रख दें, जहां किसी की नजर न पड़े. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और कार्यों में आने वाली बाधाओं को कम करने में सहायक माना जाता है. व्यापार में उन्नति के लिए पान की माला व्यापार में मंदी, नुकसान या कामकाज में रुकावट महसूस होने पर पान के पत्तों का यह पारंपरिक उपाय किया जाता है. शनिवार के दिन पांच अखंडित और ताजे पान के पत्ते लेकर उन्हें धागे में पिरोकर माला बनाएं. इस माला को दुकान या कार्यालय के मुख्य द्वार की पूर्व दिशा में टांग दें. पत्ते सूख जाने पर उन्हें सम्मानपूर्वक बहते जल में प्रवाहित कर नए पत्तों की माला लगा सकते हैं. ये भी पढ़ें: सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं किए जाते ये सारे काम? जानिए धार्मिक मान्यताओं से जुड़े नियम आर्थिक समृद्धि के लिए करें यह उपाय धन-संपत्ति और आर्थिक स्थिरता की कामना रखने वाले लोग शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को गुलकंद युक्त पान अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद एक अन्य पान के पत्ते के चिकने भाग पर थोड़ा सिंदूर लगाकर उसे तिजोरी, लॉकर या धन रखने के स्थान पर रखें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय आर्थिक खुशहाली और लक्ष्मी कृपा का प्रतीक माना जाता है. ध्यान रखें ये सभी उपाय ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इनके परिणाम व्यक्ति की आस्था और विश्वास से जुड़े हो सकते हैं. जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक प्रयासों और उचित वित्तीय योजना को भी समान महत्व देना चाहिए. The post पान के पत्ते के ये आसान उपाय बदल सकते हैं किस्मत! वास्तु दोष से लेकर धन लाभ तक माने जाते हैं प्रभावी appeared first on Naya Vichar.

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फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिका की मनमानी, रेफरी और ईरानी समर्थकों पर लगा बैन

FIFA WORLD CUP 2026: स्पोर्ट्स जगत के सबसे बड़े महाकुंभ ‘फीफा वर्ल्ड कप 2026’ की शुरुआत आगामी 11 जून से होने जा रही है. अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट को लेकर फैंस में उत्साह से ज्यादा अब बेचैनी का माहौल है. विवादों का मुख्य केंद्र सबसे बड़ा मेजबान अमेरिका बना हुआ है, जहां ट्रम्प प्रशासन की सख्त वीजा नीतियों के कारण गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले ईरान फुटबॉल टीम, उनके अधिकारियों और समर्थकों को वीजा प्रक्रियाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. इतना ही नहीं, सुरक्षा और कड़े नियमों का हवाला देकर कई अन्य देशों के खिलाड़ियों, दर्शकों और मीडियाकर्मियों को भी एंट्री देने से रोका जा रहा है, जिससे इस वैश्विक आयोजन के स्पोर्ट्स भावना पर असर पड़ने की आशंका है. सिर्फ ‘मैच डे’ की अनुमति 11 जून से शुरू हो रहे फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिका की सख्त वीजा और प्रशासनिक नीतियों ने विवाद को चरम पर पहुंचा दिया है. सबसे बड़ा झटका ईरान के फुटबॉल प्रशंसकों को लगा है, जिनके टिकट टूर्नामेंट से ठीक पहले रद्द कर दिए गए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच जारी नेतृत्वक गतिरोध के कारण ईरानी टीम को भी सख्त प्रतिबंधों के बीच स्पोर्ट्सना होगा. शेड्यूल के मुताबिक ईरान को अपने तीनों ग्रुप मैच अमेरिका में स्पोर्ट्सने हैं, लेकिन कड़े नियमों के चलते टीम वहां रुक नहीं सकती. वे मैच से चंद घंटे पहले अमेरिका पहुंचेंगे और स्पोर्ट्स खत्म होते ही तुरंत अपने मेक्सिको स्थित बेस कैंप लौट जाएंगे. कूटनीतिक तनातनी के कारण उपजे इन हालातों ने खिलाड़ियों और फुटबॉल प्रेमियों दोनों को बड़ी मायूसी दी है. फेडरेशन चीफ मेहदी ताज का वीजा भी खारिज फीफा वर्ल्ड कप 2026 के शुरू होने से पहले मेजबान अमेरिका और ईरान के बीच का विवाद अब पूरी तरह सामने आ चुका है. ईरान फुटबॉल फेडरेशन ने 9 जून को आधिकारिक तौर पर बताया कि अमेरिका ने उनके दर्शकों के लिए आवंटित ग्रुप स्टेज के टिकटों को रद्द कर दिया है. नियमों के तहत मिलने वाले 8% टिकटों के निरस्त होने से ईरानी फैंस अब अपनी टीम की हौसलाअफजाई नहीं कर सकेंगे. फेडरेशन ने इसे नेतृत्वक द्वेष का हिस्सा बताते हुए कहा कि इससे पहले महासंघ के अध्यक्ष मेहदी ताज, मेडिकल टीम और तकनीकी स्टाफ समेत करीब 12 अधिकारियों को भी आखिरी समय पर अमेरिकी वीजा देने से मना कर दिया गया था. सोमाली रेफरी ओमर अर्टान को एयरपोर्ट से लौटाया अमेरिका के कड़े प्रशासनिक नियमों के चलते फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब सोमालिया के स्टार रेफरी ओमर अर्टान को वैध वीजा होने के बाद भी अमेरिका में प्रवेश नहीं दिया गया है. मियामी एयरपोर्ट पर अमेरिकी बॉर्डर सिक्योरिटी ने कुछ शक का हवाला देकर उन्हें एंट्री देने से इनकार कर दिया. इस घटना के बाद फीफा ने आधिकारिक तौर पर अर्टान को वर्ल्ड कप पैनल से हटा दिया है. फीफा का कहना है कि वे टूर्नामेंट के सफल आयोजन के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन किसी देश के राष्ट्रीय सुरक्षा और वीजा फैसलों को बदलने का अधिकार उनके पास नहीं है. इसे भी पढ़े- 48 टीमें, 1248 खिलाड़ी और 891 डेब्यू! फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बनने जा रहा है इतिहास The post फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिका की मनमानी, रेफरी और ईरानी समर्थकों पर लगा बैन appeared first on Naya Vichar.

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