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आम्रपाली दुबे संग रिश्तों पर काजल राघवानी ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- ‘कैमरे के सामने सब सच नहीं होता’

भोजपुरी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्रियां काजल राघवानी और आम्रपाली दुबे इन दिनों शो ‘भोजपुरी बवाल’ को लेकर चर्चा में हैं. शो के फिनाले वाले दिन काजल राघवानी ने आम्रपाली दुबे के साथ अपने रिश्ते और शो में नजर आने वाले विवादों को लेकर खुलकर बात की. दोनों के बीच शो में दिखाई गई नोकझोंक और ड्रामे को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे. ऐसे में फिनाले के दिन काजल के बयान ने इन चर्चाओं को और दिलचस्प बना दिया.आम्रपाली दुबे के बारे में क्या बोलीं काजल राघवानी? ‘रील और रियल लाइफ में जमीन-आसमान का अंतर’ काजल ने कहा कि कैमरे के सामने जो कुछ दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि असल जिंदगी में भी वैसा ही हो. उन्होंने इसे एक आम उदाहरण से समझाया. उनका कहना था कि घर में हम सामान्य तरीके से रहते हैं, लेकिन जब कोई मेहमान आता है तो हमारा व्यवहार बदल जाता है. इसी तरह कैमरे के सामने और कैमरे के पीछे भी काफी अंतर होता है. काजल के इस बयान का सीधा इशारा इस बात की ओर था कि ‘भोजपुरी बवाल’ में दिखने वाले हर विवाद को वास्तविक रिश्तों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. View on Instagram शो का ड्रामा कितना असली और कितना रियल? शो में होने वाली बहस और नोकझोंक को लेकर काजल ने यह भी साफ किया कि दर्शक काफी समझदार हैं. वह स्क्रीन पर दिखाई जाने वाली चीजों को देखकर खुद समझ सकते हैं कि क्या वास्तविक है और क्या शो का हिस्सा है. काजल के इस बयान के बाद एक बार फिर आम्रपाली दुबे और काजल राघवानी की बॉन्डिंग चर्चा में आ गई है. दोनों अभिनेत्रियां भोजपुरी इंडस्ट्री की चर्चित चेहरों में शामिल हैं और ‘भोजपुरी बवाल’ में उनकी मौजूदगी दर्शकों का ध्यान लगातार खींच रही है. काजल के बयान से क्या समझ आता है? काजल राघवानी ने अपने बयान में किसी विवाद को हवा देने के बजाय यह समझाने की कोशिश की कि रियल लाइफ और रील लाइफ को अलग-अलग देखना चाहिए. शो में नजर आने वाला ड्रामा दर्शकों के मनोरंजन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन उससे कलाकारों के निजी रिश्तों का अंदाजा लगाना सही नहीं होगा. ये भी पढ़ें: अक्षरा सिंह संग दिखेंगी तो पवन सिंह आपके साथ नहीं करेगा काम… आम्रपाली दुबे ने इंडस्ट्री की खोली पोल, बोली- जो होगा वो देखा जाएगा ये भी पढ़ें: तेज प्रताप यादव की बांसुरी पर थिरकी काजल राघवानी, फैंस बोले- लालू यादव की बहू बनने का है इरादा The post आम्रपाली दुबे संग रिश्तों पर काजल राघवानी ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- ‘कैमरे के सामने सब सच नहीं होता’ appeared first on Naya Vichar.

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मानसून में निखरा पलामू टाइगर रिजर्व का सौंदर्य, उफनती नदियां और झरने बने आकर्षण का केंद्र, उमड़ रहे पर्यटक

संतोष कुमार की रिपोर्ट बेतला नेशनल पार्क . झारखंड में मानसून की लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पलामू टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक पर्यटन स्थल जीवंत हो उठे हैं. क्षेत्र की प्रमुख नदियां और जलप्रपात इस समय अपने पूरे शबाब पर हैं. प्रकृति का यह विहंगम और रौद्र रूप पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. औरंगा और उत्तर कोयल नदी का ऐतिहासिक मिलन पलामू और लातेहार जिले की सीमा पर स्थित केचकी संगम इस समय अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा है. यह स्थल उत्तर कोयल और औरंगा नदी का पवित्र विहंगम संगम स्थल है. मानसून के दौरान दोनों नदियों का बढ़ता जलस्तर और उनके पानी का आपस में टकराना एक गरजदार और रोमांचक माहौल पैदा करता है.यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहां महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे ने अपनी प्रसिद्ध बंगाली फिल्म ”अरन्येर दिनरात्रि” की शूटिंग की थी. यहां स्थित पुराना ब्रिटिश फॉरेस्ट बंगला आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है.मानसून में यहां की प्रकृति, एकांत और नदियों का उफान फोटोग्राफर्स और प्रकृति प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर रहा है. काली ग्रेनाइट चट्टानों से गिरती दूधिया धारा लातेहार जिले के गारू प्रखंड से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित ”मिर्चइया जलप्रपात” इस समय सैलानियों की पहली पसंद बना हुआ है. यह झरना पलामू टाइगर रिजर्व (बेतला) के घने जंगलों के बीच स्थित है. यह जलप्रपात उत्तर कोयल नदी की एक सहायक नदी पर बना हुआ है, जो काली ग्रेनाइट चट्टानों और लावा डोम के ऊपर से होकर बहती है. स्थानीय लोगों और प्रशासन के अनुसार, मिर्चइया फॉल झारखंड के सबसे सुरक्षित झरनों में से एक माना जाता है क्योंकि जहां इसका पानी गिरता है, वह स्थान बहुत गहरा नहीं है. पर्यटकों के देखने के लिए यहां वन विभाग द्वारा एक सुंदर लकड़ी का पुल भी बनाया गया है. जंगलों के बीच छुपा प्राकृतिक खजाना बेतला से नेतरहाट मार्ग पर बारेसांड के समीप स्थित ”सुग्गा बांध जलप्रपात” एक प्राचीन और शांत पर्यटन स्थल है. घने साल के जंगलों और पहाड़ियों से घिरा होने के कारण यह अन्य पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग दिखता है.उत्तर कोयल नदी प्रणाली से पोषित यह झरना लगभग 35 मीटर (या 80 फीट) की ऊंचाई से एक विशाल पथरीले कटोरे जैसी आकृति में गिरता है. यहां का साफ पानी और शांत वातावरण पर्यटकों को मानसिक शांति देता है. यहां वन विभाग द्वारा एक वॉचटावर भी बनाया गया है, जिससे पूरी घाटी और झरने का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है. सबसे ऊंचा और भयानक लोध फॉल महुआडांड़ प्रखंड में बूढ़ा नदी पर स्थित ”बूढ़ा घाघ”, जिसे ”लोध फॉल” के नाम से भी जाना जाता है, इस समय अपने सबसे विकराल और रौद्र रूप में है.यह जलप्रपात 143 मीटर (लगभग 469 फीट) की ऊंचाई से गिरता है, जो इसे झारखंड का सबसे ऊंचा और हिंदुस्तान का 21वां सबसे ऊंचा जलप्रपात बनाता है. मानसून के दिनों में इसकी पानी की गर्जना 10 किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है. ब्रिटिश काल में अंग्रेज अधिकारी यहां विश्राम के लिए आते थे और उनके ”लाट बंगला” के अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं. इस झरने के नीचे का कुंड इतना गहरा है कि स्थानीय कहानियों के अनुसार आज तक इसकी गहराई कोई नाप नहीं सका है. मानसून के मटमैले पानी के बावजूद चट्टानों से टकराकर गिरता पानी बिल्कुल दूधिया सफेद दिखाई देता है. ये भी पढ़ें: झारखंड का सबसे ऊंचा लोध फॉल में जलस्तर बढ़ा, लकड़ी के पुल पर पर्यटकों की आवाजाही पर रोक नदियों का रौद्र रूप और प्रशासन की चेतावनी मानसून की भारी बारिश के कारण औरंगा, कोयल और बूढ़ा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है. मेदिनीनगर में कोयल नदी का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंच चुका है और निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है. नदियों की तेज धारा और जलप्रपातों के बढ़ते वेग को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सभी पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी है. पर्यटकों को चेतावनी दी गयी है कि वे उफनती धाराओं के पास न जायें, चट्टानों पर चढ़ने का प्रयास न करें और सूर्यास्त के बाद इन जंगली क्षेत्रों में रुकने से बचें. रील बनाने के लिए बेताब है युवा पलामू टाइगर रिजर्व जंगल और पहाड़ों के लिए जाना जाता है. यहां कई ऐसे जंगली पहाड़िया है जिनकी खूबसूरती देखते ही बन रही है. जंगल की हरियाली के बीच आसमान में उतरते बादलों जैसा दृश्य देखकर लोग मोहित हो रहे हैं. इन रोमांचकारी दृश्य के बीच पर्यटन स्थलों पर जाकर रील्स बनाने की और लगी है. कई युवा बाइक अथवा अन्य माध्यम से इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच रहे हैं और रील्स बना रहे हैं. ये भी पढ़ें: लातेहार : विधायक रामचंद्र सिंह की पहल, आदर्श नगर-छिपादोहर रोड पर जल्द बनेगा नया पुल नेशनल पार्क बंद पर्यटकों को मिला नया विकल्प बेतला नेशनल पार्क बरसात के कारण तीन महीने के लिए बंद है. इसलिए पर्यटक बेतला नेशनल पार्क को छोड़कर अन्य सभी पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर रहे हैं. हालांकि बरसात के समय में काफी सावधानी बरतने की हिदायत दी गयी है. लेकिन बरसात के इस मौसम में कुछ दिलेर पर्यटक पलामू टाइगर रिजर्व के अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंच रहे हैं. The post मानसून में निखरा पलामू टाइगर रिजर्व का सौंदर्य, उफनती नदियां और झरने बने आकर्षण का केंद्र, उमड़ रहे पर्यटक appeared first on Naya Vichar.

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Patna Student Protest : सीएम हाउस घेराव के लिए बैरिकेडिंग तोड़कर निकले छात्र, रोकने के लिए DM-SSP ने संभाला मोर्चा

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता के विरोध में 15 छात्र संगठनों ने पटना में पैदल मार्च शुरू कर दी है. छात्र गांधी मैदान से निकलकर सीएम हाउस की ओर बढ़ रहे हैें. पुलिस ने कई छात्रों को डिटेन किया है. The post Patna Student Protest : सीएम हाउस घेराव के लिए बैरिकेडिंग तोड़कर निकले छात्र, रोकने के लिए DM-SSP ने संभाला मोर्चा appeared first on Naya Vichar.

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किराएदार हैं तो जान लें हाईकोर्ट का फैसला, अब UP में मकान मालिकों की मनमानी पर लगेगा ब्रेक? 5-7% किराया बढ़ाने का नियम खत्म

Allahabad High Court: उत्तर प्रदेश में मकान मालिक और किराएदारों के बीच किराया, बेदखली और विवादों से जुड़े नियमों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 की धारा 8, 9, 10, 38 और 42 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है. इन प्रावधानों में किराया संशोधन, विवाद की स्थिति में किराया तय करने और किरायेदारी विवादों के निपटारे की व्यवस्था शामिल थी. 2021 के कानून की पांच धाराएं रद्द न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने इंदर भूषण साहनी और अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2021 के कानून की धारा 8, 9 और 10 किराए के संशोधन और निर्धारण से संबंधित थीं, जबकि धारा 38 और 42 अन्य लागू कानूनों के तहत निर्धारित प्रक्रिया को प्रभावित करती थीं. कोर्ट ने इन प्रावधानों को संबंधित केंद्रीय कानूनों से असंगत पाया. राष्ट्रपति की मंजूरी क्यों बनी मुद्दा? हाईकोर्ट ने कहा कि मकान मालिक और किराएदार के संबंधों से जुड़े कानून संविधान की समवर्ती सूची में आते हैं. ऐसे मामलों में राज्य कानून यदि पहले से मौजूद केंद्रीय कानून से टकराता है तो संविधान के अनुच्छेद 254(2) के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होती है. कोर्ट के मुताबिक, 2021 के कानून के संबंधित प्रावधान केंद्रीय कानूनों से टकराते थे और उन्हें राष्ट्रपति की आवश्यक मंजूरी प्राप्त नहीं थी. इसलिए वे प्रभावी नहीं रह सकते. सालाना 5 और 7 फीसदी किराया बढ़ाने का आधार खत्म धारा 9 में पुराने किराएदारों के लिए किराया संशोधन की व्यवस्था थी. इसके तहत आवासीय परिसर के किराए में 5 प्रतिशत और गैर-आवासीय परिसर के किराए में 7 प्रतिशत सालाना संशोधन का प्रावधान था. अब धारा 9 के रद्द होने के बाद मकान मालिक केवल 2021 के इस प्रावधान का हवाला देकर हर साल किराया नहीं बढ़ा सकेंगे. किराया बढ़ाने का मामला अब किरायेदारी समझौते और लागू केंद्रीय व राज्य कानूनों के तहत तय होगा. रेंट अथॉरिटी की भूमिका भी बदली धारा 10 के तहत विवाद होने पर रेंट अथॉरिटी को किराया निर्धारित करने की शक्ति दी गई थी. हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को भी केंद्रीय कानून से असंगत माना है. वहीं, 2021 के कानून के तहत बनाए गए विशेष विवाद निपटान तंत्र को लेकर भी कोर्ट ने धारा 38 और 42 को उस सीमा तक असंवैधानिक माना, जहां वे प्रांतीय लघु वाद न्यायालय अधिनियम और संबंधित सिविल कानूनों की प्रक्रिया को प्रभावित करते थे. 1972 का कानून कितनी सीमा तक लौटेगा? 2021 के कानून की धारा 46 के जरिए निरस्त किया गया उत्तर प्रदेश नगरीय भवन (किराया, किराया निर्धारण और बेदखली का विनियमन) अधिनियम, 1972 अब कानूनी स्थिति में जरूरी सीमा तक फिर प्रभावी होगा. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 1972 का कानून हर मामले में पूरी तरह स्वतः लागू हो गया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुराने कानून की व्यवस्था उतनी ही सीमा तक प्रभावी होगी, जितनी 2021 की रद्द की गई धाराओं के बाद कानूनी स्थिति को संभालने के लिए आवश्यक है. पहले से तय किराया और समझौते रहेंगे सुरक्षित कोर्ट ने पहले से पूरे हो चुके उन मामलों और किरायेदारी समझौतों को भी सुरक्षित रखा है, जिनमें संबंधित प्रावधानों की वैधता को चुनौती नहीं दी गई थी. यानी 2021 के कानून के तहत पहले से तय या संशोधित किराया और निष्पादित किरायेदारी समझौते केवल इस फैसले के कारण अपने आप खत्म नहीं होंगे. Must Read: UP में पूर्व BSP विधायक शाहनवाज राणा के ठिकानों पर ED की रेड, 2 करोड़ से ज्यादा कैश बरामद The post किराएदार हैं तो जान लें हाईकोर्ट का फैसला, अब UP में मकान मालिकों की मनमानी पर लगेगा ब्रेक? 5-7% किराया बढ़ाने का नियम खत्म appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SL 2nd Test Day 3 Live: श्रीलंका का स्कोर 69/3, प्रसिद्ध कृष्णा को मिला दूसरा विकेट

IND vs SL हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच कोलंबो में स्पोर्ट्से जा रहे दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन श्रीलंका का 3 विकेट गिर गया है. समाचार लिखे जाने तक श्रीलंका का स्कोर 3 विकेट पर 69 रन है. आज के दिन हिंदुस्तानीय गेंदबाजों से काफी उम्मीद है. The post IND vs SL 2nd Test Day 3 Live: श्रीलंका का स्कोर 69/3, प्रसिद्ध कृष्णा को मिला दूसरा विकेट appeared first on Naya Vichar.

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दानापुर फायरिंग : लड़की की रैपिडो चालक से दोस्ती से नाराज था पूर्व प्रेमी, पहले धमकी दी, कई दिन की रेकी

Danapur minor girl Firing : दानापुर थाना क्षेत्र में रविवार को सरेशाम नाबालिग लड़की और रैपिडो चालक को गोली मारकर घायल करने के मामले में पुलिस ने आरोपित की पहचान कर ली है. पुलिस के अनुसार, आरोपित नाबालिग का पूर्व प्रेमी है. नाबालिग से अनबन होने के बाद दोनों अलग हो गये थे. इसके बाद नाबालिग ने आरोपित का फोन उठाना भी बंद कर दिया था, जिससे वह नाराज था. नये युवक से दोस्ती से नाराज था पूर्व प्रेमी पुलिस के अनुसार, गोली से घायल रैपिडो चालक राहुल की नाबालिग लड़की से दोस्ती थी. इस बात की जानकारी होने के बाद आरोपित पूर्व प्रेमी और अधिक गुस्से में आ गया. उसने फोन पर नाबालिग को जान से मारने की धमकी भी दी थी. बताया जा रहा है कि धमकी को अंजाम देने के लिए आरोपित कई दिनों से नाबालिग की रेकी कर रहा था. आरपीएस मोड़ पर पीछा कर की फायरिंग रविवार को आरपीएस मोड़ के समीप आरोपित ने नाबालिग को रैपिडो चालक राहुल के साथ देखा. इसके बाद उसने दोनों का पीछा किया और नाबालिग को निशाना बनाकर फायरिंग कर दी. हालांकि, गोली चलने के समय नाबालिग के झुक जाने से गोली रैपिडो चालक राहुल को लग गयी. गोली लगने के बाद राहुल और नाबालिग बाइक से गिर गये. नाबालिग अपनी जान बचाने के लिए वहां से भागकर एक पूर्व परिचित टेलर की दुकान में घुस गयी. टेलर की दुकान से खींचकर नाबालिग को मारी गोली पुलिस के अनुसार, आरोपित पीछा करते हुए टेलर की दुकान तक पहुंच गया. उसने नाबालिग को दुकान से खींचकर बाहर निकालने की कोशिश की. इस दौरान उसने नाबालिग को गोली मार दी. गोली लगने से वह घायल हो गयी. लोगों के जुटने पर आरोपित मौके से फरार हो गया. घायल रैपिडो चालक राहुल लखनी बिगहा का रहने वाला है. आरोपित की पहचान के बाद गिरफ्तारी के लिए छापेमारी सिटी एसपी पश्चिमी संकेत कुमार ने बताया कि घटना में शामिल आरोपित की पहचान कर ली गयी है. उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम लगातार छापेमारी कर रही है. पुलिस दानापुर के साथ ही खगौल इलाके में भी आरोपित की तलाश कर रही है. पुलिस ने फिलहाल आरोपित का नाम सार्वजनिक नहीं किया है. पुलिस के अनुसार, आरोपित युवक और उसका साथी फिलहाल फरार हैं. इसे भी पढ़ें : मारना था लड़की को, लग गयी रैपिडो चालक को, दुकान में छिपी नाबालिग को एक ने खींचकर निकाला तो दूसरे ने मारी गोली The post दानापुर फायरिंग : लड़की की रैपिडो चालक से दोस्ती से नाराज था पूर्व प्रेमी, पहले धमकी दी, कई दिन की रेकी appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SL 2nd Test Day 3 Live: तीसरे दिन का खेल शुरू, श्रीलंका का स्कोर 26/2

IND vs SL दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन का स्पोर्ट्स कुछ ही देर में शुरू होने वाला है. पहले दिन हिंदुस्तानीय टीम ने 5 विकेट पर 300 रन बनाए, जिसमें देवदत्त पडिक्कल का शानदार शतक शामिल था. आज ध्रुव जुरेल और सारांश जैन से बड़ी पारियों की उम्मीद है. The post IND vs SL 2nd Test Day 3 Live: तीसरे दिन का स्पोर्ट्स शुरू, श्रीलंका का स्कोर 26/2 appeared first on Naya Vichar.

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ड्यूटी-फ्री चीनी इम्पोर्ट के बदले नियम, अब रिफाइंड चीनी बेचने के लिए मिलेगा 2 महीने का समय

प्रशासन ने ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी के इम्पोर्ट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. अब इंपोर्टर्स को कच्ची चीनी को रिफाइंड करके घरेलू बाजार में बेचने के लिए तय 31 अक्टूबर की आखिरी तारीख के बजाय बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने का समय मिलेगा. प्रशासन का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाना और त्योहारों से पहले बढ़ती कीमतों पर दबाव कम करना है. क्या बदला है चीनी इम्पोर्ट के नियम में? 20 अगस्त को प्रशासन ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की अनुमति दी थी. यह इम्पोर्ट टैरिफ रेट कोटा यानी टीआरक्यू के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकता है. पहले नियम था कि इम्पोर्ट की गई कच्ची चीनी को देश में रिफाइंड करके सफेद चीनी बनानी होगी और उसे 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेच देना होगा. अब इस तय तारीख की जगह दो महीने की समय सीमा लागू होगी. यानी अगर किसी इम्पोर्टर ने बिल ऑफ एंट्री 25 अगस्त को दाखिल किया है, तो उसे इम्पोर्टेड कच्ची चीनी को प्रोसेस करके रिफाइंड चीनी बेचने के लिए करीब दो महीने का समय मिलेगा. प्रशासन ने यह बदलाव क्यों किया? देश में इस समय चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव है. चालू सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था. यानी प्रोडक्शन अनुमान से करीब 11 फीसदी कम है. कम प्रोडक्शन और घटते स्टॉक के बीच घरेलू चीनी कीमतें भी हाल के महीनों में तेजी से बढ़ी हैं. अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों का सीजन होने के कारण चीनी की मांग और बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में प्रशासन चाहती है कि इम्पोर्टेड कच्ची चीनी जल्दी घरेलू बाजार तक पहुंचे और उपलब्धता बेहतर हो. ये भी पढ़ें: Sugar Price Hike: हिंदुस्तान में चीनी 55 रुपये के पार, प्रशासन ने रेड रॉट और एल्निनो को ठहराया जिम्मेदार; विपक्ष ने एथेनॉल पर घेरा कारोबारियों और ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? इस फैसले से चीनी कारोबार से जुड़े इंपोर्टर्स को काम करने के लिए ज्यादा लचीलापन मिलेगा. तय 31 अक्टूबर की एक ही डेडलाइन के बजाय हर बिल ऑफ एंट्री के हिसाब से दो महीने की समय सीमा मिलने से इम्पोर्टेड चीनी को प्रोसेस और बेचने की प्रक्रिया आसान हो सकती है. इसका फायदा आगे चलकर घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने के रूप में दिख सकता है. अगर उपलब्धता सुधरती है, तो त्योहारों के दौरान कीमतों पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है. थोक खरीदारों के लिए भी बदले नियम प्रशासन ने चीनी की जमाखोरी पर नजर रखने के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी तय की है. 10 टन से ज्यादा चीनी हर महीने इस्तेमाल करने वाले कारोबार 1 सितंबर से 30 नवंबर के बीच अधिकतम 15 दिन की खपत के बराबर स्टॉक रख सकेंगे. यह पाबंदी ऐसे समय लगाई गई है जब त्योहारों के कारण मांग बढ़ने की उम्मीद है. मौसम से जुड़ी परेशानियों और कम गन्ना उत्पादन ने भी चीनी की घरेलू सप्लाई पर दबाव बढ़ाया है. प्रशासन ने साथ ही मौजूदा एडवांस ऑथराइजेशन में से एसआईओएन ई-52 के तहत जारी कुछ अनुमतियों को एक बार टीआरक्यू व्यवस्था में बदलने की सुविधा भी दी है. यह उन कच्ची चीनी के इम्पोर्ट पर लागू है जो 20 अगस्त तक वास्तव में इम्पोर्ट हो चुकी थी. ये भी पढ़ें: Sugar Price: क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी? जानें ISMA ने क्या दिया जवाब The post ड्यूटी-फ्री चीनी इम्पोर्ट के बदले नियम, अब रिफाइंड चीनी बेचने के लिए मिलेगा 2 महीने का समय appeared first on Naya Vichar.

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Suryakumar Yadav Dhoni Rohit photo: रोहित के साथ फोटो लेने पहुंचे थे SKY, फिर धोनी को फ्रेम में लाने के लिए चला ये प्लान

Suryakumar Yadav Dhoni Rohit photo: रोहित शर्मा और एमएस धोनी के बीच खड़े सूर्यकुमार यादव की वह तस्वीर आपने जरूर देखी होगी. लेकिन क्या आपको पता है कि इस फोटो के पीछे पूरा प्लान SKY का था? आकाश चोपड़ा के शो Lava Presents Baith & Bol में सूर्यकुमार ने बताया कि यह तस्वीर कैसे बनी और क्यों यह उनके लिए सबसे खास तस्वीरों में से एक है. Suryakumar Yadav Dhoni Rohit photo: पहले रोहित के साथ फोटो लेने पहुंचे थे SKY सूर्यकुमार ने बताया कि यह किस्सा चेन्नई में प्रैक्टिस के दौरान का है. प्रैक्टिस सेशन के बाद उन्होंने रोहित शर्मा को खाना खाते हुए देखा. वह रोहित के पास फोटो खिंचवाने पहुंचे. लेकिन फोटो लेने से पहले ही उनके दिमाग में एक और आइडिया आया. SKY चाहते थे कि इस तस्वीर में एमएस धोनी भी हों और वह खुद दोनों दिग्गजों के बीच खड़े हों. इसे भी पढ़े- India WTC Points Table: बांग्लादेश की हार से WTC में हिंदुस्तान को बड़ा फायदा, चौथे नंबर पर पहुंचने का मौका; जानें क्या करना होगा Suryakumar Yadav Dhoni Rohit photo: फिर SKY ने बनाया फोटो का पूरा प्लान सूर्यकुमार ने बताया कि उन्होंने तय किया कि रोहित एक तरफ और धोनी दूसरी तरफ होंगे. उन्हें बस धोनी के फोटो में आने का इंतजार था. इसी कोशिश में उन्हें पता चला कि धोनी आइस बाथ लेने की तैयारी कर रहे हैं. इसके बाद SKY खुद धोनी के पास पहुंचे और फोटो के लिए अपना प्लान बताया. Suryakumar Yadav Dhoni Rohit photo: धोनी को भी फ्रेम में लाने के लिए पहुंचे कमरे में सूर्यकुमार ने शो में बताया कि उन्होंने ऐसा सेटअप करवाया, जिसमें रोहित शर्मा एक तरफ, एमएस धोनी दूसरी तरफ और वह खुद दोनों के बीच में खड़े हों. इस तरह वह तस्वीर क्लिक हुई, जो बाद में SKY की ऑल टाइम फेवरेट तस्वीर बन गई. यानी जिसे देखकर फैंस को एक शानदार तस्वीर नजर आती है, उसके पीछे सूर्यकुमार की पूरी प्लानिंग थी. View on Instagram Suryakumar Yadav Dhoni Rohit photo: ‘ग्रुप DP मिल गया, बस नाम सजेस्ट करो’ सूर्यकुमार ने इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा था, “ग्रुप DP मिल गया, बस ग्रुप नाम सजेस्ट करो.” इसके बाद फैंस ने इस खास तस्वीर के लिए कई नाम सुझाए. तस्वीर में रोहित, धोनी और SKY को एक साथ देखकर क्रिकेट फैंस के बीच भी इसकी खूब चर्चा हुई. इसे भी पढ़े- Sara Tendulkar comment: शहनील गिल के वीडियो पर सारा तेंदुलकर का कमेंट, फिर क्यों होने लगी शुभमन गिल की चर्चा? Suryakumar Yadav Dhoni Rohit photo: SKY बोले- मेरे लिए ड्रीम कम ट्रू था आकाश चोपड़ा से बातचीत में सूर्यकुमार ने इस तस्वीर और अपने सफर को याद करते हुए कहा कि उनके लिए यह पल ड्रीम कम ट्रू जैसा था. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने हिंदुस्तान के लिए स्पोर्ट्सने और मैच जीतने का सपना देखा था, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें हिंदुस्तानीय टीम की कप्तानी करने का मौका भी मिलेगा. SKY ने कहा कि भगवान की कृपा और लोगों की दुआओं से उन्हें हिंदुस्तान को लीड करने का अवसर मिला. रोहित और धोनी के साथ वाली यह तस्वीर उनके लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि यह उनके क्रिकेट सफर के एक बेहद यादगार पल की कहानी अपने अंदर समेटे हुए है. Lava Presents Baith & Bol का पहला एपिसोड 28 अगस्त को शाम 6 बजे रिलीज होगा. शो के ट्रेलर को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर 60 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. The post Suryakumar Yadav Dhoni Rohit photo: रोहित के साथ फोटो लेने पहुंचे थे SKY, फिर धोनी को फ्रेम में लाने के लिए चला ये प्लान appeared first on Naya Vichar.

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Civil या Infrastructure, कौन सा BTech बेहतर? जानें पढ़ाई, करियर और जॉब का पूरा फर्क

Civil Engineering VS Infrastructure Engineering: 12वीं के बाद इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने जा रहे हैं और Civil Engineering को लेकर कंफ्यूज हैं? अगर आपको BTech Civil Engineering और Civil and Infrastructure Engineering दोनों ऑप्शन मिल रहे हैं, तो सिर्फ कोर्स के नाम देखकर फैसला न करें. दोनों में कई विषय एक जैसे हैं, लेकिन पढ़ाई के फोकस और आगे के करियर ऑप्शन में अंतर हो सकता है. आइए समझते हैं कि दोनों बीटेक कोर्स (BTech Course) में क्या पढ़ाया जाता है, किसमें किस तरह के करियर ऑप्शन मिलते हैं और आपके लिए कौन सा ऑप्शन बेहतर होता है. Civil Engineering में क्या पढ़ते हैं? सिविल इंजीनियरिंग एक ट्रेडिशनल बीटेक कोर्स है. इसमें छात्रों को भवन निर्माण, सड़क, पुल, बांध, जल संसाधन, स्ट्रक्चरल डिजाइन और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी टेक्नोलॉजी की जानकारी दी जाती है. इसमें मुख्य रूप से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग, ट्रांसपोर्टेशन, एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग और वाटर रिसोर्सेज जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. ये भी पढ़ें: उंगलियों की रफ्तार से मिलेगी प्रशासनी नौकरी, जानें टाइपिंग स्पीड का असली गणित और डिटेल्स Civil and Infrastructure Engineering क्या है? सिविल और इंफ्रास्ट्रक्चर को ट्रेडिशिनल सिविल इंजीनियरिंग के ब्रॉड (Broader) प्रोग्राम के रूप में देखा जा सकता है. हालांकि, इसका सिलेबस संस्थान के अनुसार अलग-अलग होता है. आमतौर पर इसमें ट्रेडिशिनल सिविल इंजीनियरिंग के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, शहरी विकास, स्मार्ट सिटी, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट पर भी फोकस किया जाता है. कौन सा कोर्स चुनें? अगर आपका इंटरेस्ट बिल्डिंग, सड़क, पुल, स्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन जैसे ट्रेडिशिनल सिविल इंजीनियरिंग फील्ड में है, तो BTech Civil Engineering अच्छा ऑप्शन हो सकता है. अगर आपका इंटरेस्ट ब्रॉड प्रोजेक्ट्स में है जैसे शहर का डेवलेपमेंट, एक पूरी सिटी का डेवलेपमेंट और एडवांस इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग तो आप Civil and Infrastructure Engineering आपके लिए बेस्ट है. Civil Engineering VS Infrastructure Engineering: जानें कौन सा बेहतर ऑप्शन है अगर आपका इंटरेस्ट बेहतर ऑप्शन Building, bridge, construction BTech Civil Engineering Smart city, urban development Civil & Infrastructure Core civil jobs Civil Engineering Large infrastructure projects Civil & Infrastructure Traditional civil subjects Civil Engineering Infrastructure planning & management Civil & Infrastructure कहां से करें ये दोनों कोर्स?  सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स IIT Delhi, IIT Madras जैसे टॉप संस्थान से कर सकते हैं. हर IITs, NITs ये कोर्स ऑफर करता है. आप किसी स्टेट यूनिवर्सिटी या प्राइवेट यूनिवर्सिटी से भी ये कोर्स कर सकते हैं. लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग हर संस्थान में ऑफर नहीं किया जाता है. NIT Delhi से ये कोर्स कर सकते हैं. इसके अलावा भी कई संस्थान हैं, जैसे कि एनआईटी त्रिची, एनआईटी राउरकेला, एनआईटी वारंगल. फीस की जानकारी के लिए कॉलेज की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं.  तुलना Civil Engineering Civil & Infrastructure Course focus Core Civil Civil + Infrastructure Major subjects Structures, Geotech, Transportation Civil + Urban/Infrastructure systems Construction focus ज्यादा संस्थान के अनुसार Urban planning exposure सीमित/संस्थान पर निर्भर अपेक्षाकृत ज्यादा Career scope व्यापक Infrastructure-focused Best for Core Civil में रुचि Infrastructure projects में रुचि FAQ: सिविल इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग {“type”:”faq”,”question”:”Q. Civil Engineering और Civil & Infrastructure Engineering में क्या अंतर है?”,”answer”:”Ans. Civil Engineering एक व्यापक इंजीनियरिंग कोर्स है, जिसमें बिल्डिंग, रोड, ब्रिज, बांध, स्ट्रक्चर, जल संसाधन और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी पढ़ाई होती है. Civil & Infrastructure Engineering में इन विषयों के साथ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम पर अधिक फोकस किया जा सकता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q. Civil Engineering में क्या पढ़ते हैं?”,”answer”:”Ans. इसमें Structural Engineering, Geotechnical Engineering, Transportation Engineering, Environmental Engineering, Hydraulics, Surveying और Construction Management जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q. Civil & Infrastructure Engineering में क्या पढ़ते हैं?”,”answer”:”Ans. इसमें Civil Engineering के बेसिक विषयों के साथ Infrastructure Planning, Urban Infrastructure, Construction Technology, Project Management और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े विषयों पर फोकस किया जाता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q. Civil Engineering के बाद कौन सी Jobs मिलती हैं?”,”answer”:”Ans. Civil Engineer, Structural Engineer, Site Engineer, Construction Engineer, Planning Engineer, Quantity Surveyor और Project Engineer जैसे पदों पर करियर बनाया जा सकता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q. Civil & Infrastructure Engineering के बाद Career Options क्या हैं?”,”answer”:”Ans. Infrastructure Engineer, Project Engineer, Construction Manager, Planning Engineer, Infrastructure Consultant और Urban Infrastructure से जुड़े क्षेत्रों में करियर के अवसर मिल सकते हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q. Civil Engineering या Infrastructure Engineering, कौन सा बेहतर है?”,”answer”:”Ans. यह आपके करियर लक्ष्य पर निर्भर करता है. अगर आप Civil Engineering के व्यापक क्षेत्रों में विकल्प चाहते हैं तो Civil Engineering अच्छा विकल्प हो सकता है. वहीं बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट आधारित काम में रुचि है तो Civil & Infrastructure Engineering बेहतर विकल्प हो सकता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q. क्या दोनों Courses के बाद Government Job मिल सकती है?”,”answer”:”Ans. हां, दोनों कोर्स के बाद योग्यता और संबंधित भर्ती के नियमों के आधार पर प्रशासनी नौकरियों के लिए आवेदन किया जा सकता है. हालांकि, हर भर्ती में मांगी गई शैक्षणिक योग्यता और मान्यता की शर्तें अलग हो सकती हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q. Civil Engineering में BTech के बाद Salary कितनी होती है?”,”answer”:”Ans. सैलरी कंपनी, जॉब प्रोफाइल, शहर, अनुभव और स्किल्स के आधार पर अलग-अलग होती है. फ्रेशर्स के लिए शुरुआती वेतन आमतौर पर अनुभव बढ़ने के साथ बढ़ता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q. Civil Engineering के लिए JEE Main जरूरी है क्या?”,”answer”:”Ans. हर कॉलेज में BTech Civil Engineering में एडमिशन के लिए JEE Main जरूरी नहीं होता. IITs और NITs जैसे संस्थानों में प्रवेश के लिए JEE Main/JEE Advanced से जुड़ी प्रक्रिया लागू होती है, जबकि अन्य कॉलेजों में राज्य स्तरीय या संस्थान स्तर की प्रवेश प्रक्रिया हो सकती है.”} ये भी पढ़ें: BA LLB के बाद क्या? सिर्फ वकालत नहीं, ये भी हैं ऑप्शन The post Civil या Infrastructure, कौन सा BTech बेहतर? जानें पढ़ाई, करियर और जॉब का पूरा फर्क appeared first on Naya Vichar.

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