संतोष कुमार की रिपोर्ट
बेतला नेशनल पार्क . झारखंड में मानसून की लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पलामू टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक पर्यटन स्थल जीवंत हो उठे हैं. क्षेत्र की प्रमुख नदियां और जलप्रपात इस समय अपने पूरे शबाब पर हैं. प्रकृति का यह विहंगम और रौद्र रूप पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.
औरंगा और उत्तर कोयल नदी का ऐतिहासिक मिलन
पलामू और लातेहार जिले की सीमा पर स्थित केचकी संगम इस समय अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा है. यह स्थल उत्तर कोयल और औरंगा नदी का पवित्र विहंगम संगम स्थल है. मानसून के दौरान दोनों नदियों का बढ़ता जलस्तर और उनके पानी का आपस में टकराना एक गरजदार और रोमांचक माहौल पैदा करता है.यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहां महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे ने अपनी प्रसिद्ध बंगाली फिल्म ”अरन्येर दिनरात्रि” की शूटिंग की थी. यहां स्थित पुराना ब्रिटिश फॉरेस्ट बंगला आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है.मानसून में यहां की प्रकृति, एकांत और नदियों का उफान फोटोग्राफर्स और प्रकृति प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर रहा है.
काली ग्रेनाइट चट्टानों से गिरती दूधिया धारा
लातेहार जिले के गारू प्रखंड से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित ”मिर्चइया जलप्रपात” इस समय सैलानियों की पहली पसंद बना हुआ है. यह झरना पलामू टाइगर रिजर्व (बेतला) के घने जंगलों के बीच स्थित है. यह जलप्रपात उत्तर कोयल नदी की एक सहायक नदी पर बना हुआ है, जो काली ग्रेनाइट चट्टानों और लावा डोम के ऊपर से होकर बहती है. स्थानीय लोगों और प्रशासन के अनुसार, मिर्चइया फॉल झारखंड के सबसे सुरक्षित झरनों में से एक माना जाता है क्योंकि जहां इसका पानी गिरता है, वह स्थान बहुत गहरा नहीं है. पर्यटकों के देखने के लिए यहां वन विभाग द्वारा एक सुंदर लकड़ी का पुल भी बनाया गया है.
जंगलों के बीच छुपा प्राकृतिक खजाना
बेतला से नेतरहाट मार्ग पर बारेसांड के समीप स्थित ”सुग्गा बांध जलप्रपात” एक प्राचीन और शांत पर्यटन स्थल है. घने साल के जंगलों और पहाड़ियों से घिरा होने के कारण यह अन्य पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग दिखता है.उत्तर कोयल नदी प्रणाली से पोषित यह झरना लगभग 35 मीटर (या 80 फीट) की ऊंचाई से एक विशाल पथरीले कटोरे जैसी आकृति में गिरता है. यहां का साफ पानी और शांत वातावरण पर्यटकों को मानसिक शांति देता है. यहां वन विभाग द्वारा एक वॉचटावर भी बनाया गया है, जिससे पूरी घाटी और झरने का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है.
सबसे ऊंचा और भयानक लोध फॉल
महुआडांड़ प्रखंड में बूढ़ा नदी पर स्थित ”बूढ़ा घाघ”, जिसे ”लोध फॉल” के नाम से भी जाना जाता है, इस समय अपने सबसे विकराल और रौद्र रूप में है.यह जलप्रपात 143 मीटर (लगभग 469 फीट) की ऊंचाई से गिरता है, जो इसे झारखंड का सबसे ऊंचा और हिंदुस्तान का 21वां सबसे ऊंचा जलप्रपात बनाता है. मानसून के दिनों में इसकी पानी की गर्जना 10 किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है. ब्रिटिश काल में अंग्रेज अधिकारी यहां विश्राम के लिए आते थे और उनके ”लाट बंगला” के अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं. इस झरने के नीचे का कुंड इतना गहरा है कि स्थानीय कहानियों के अनुसार आज तक इसकी गहराई कोई नाप नहीं सका है. मानसून के मटमैले पानी के बावजूद चट्टानों से टकराकर गिरता पानी बिल्कुल दूधिया सफेद दिखाई देता है.
ये भी पढ़ें: झारखंड का सबसे ऊंचा लोध फॉल में जलस्तर बढ़ा, लकड़ी के पुल पर पर्यटकों की आवाजाही पर रोक
नदियों का रौद्र रूप और प्रशासन की चेतावनी
मानसून की भारी बारिश के कारण औरंगा, कोयल और बूढ़ा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है. मेदिनीनगर में कोयल नदी का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंच चुका है और निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है. नदियों की तेज धारा और जलप्रपातों के बढ़ते वेग को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सभी पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी है. पर्यटकों को चेतावनी दी गयी है कि वे उफनती धाराओं के पास न जायें, चट्टानों पर चढ़ने का प्रयास न करें और सूर्यास्त के बाद इन जंगली क्षेत्रों में रुकने से बचें.
रील बनाने के लिए बेताब है युवा
पलामू टाइगर रिजर्व जंगल और पहाड़ों के लिए जाना जाता है. यहां कई ऐसे जंगली पहाड़िया है जिनकी खूबसूरती देखते ही बन रही है. जंगल की हरियाली के बीच आसमान में उतरते बादलों जैसा दृश्य देखकर लोग मोहित हो रहे हैं. इन रोमांचकारी दृश्य के बीच पर्यटन स्थलों पर जाकर रील्स बनाने की और लगी है. कई युवा बाइक अथवा अन्य माध्यम से इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच रहे हैं और रील्स बना रहे हैं.
ये भी पढ़ें: लातेहार : विधायक रामचंद्र सिंह की पहल, आदर्श नगर-छिपादोहर रोड पर जल्द बनेगा नया पुल
नेशनल पार्क बंद पर्यटकों को मिला नया विकल्प
बेतला नेशनल पार्क बरसात के कारण तीन महीने के लिए बंद है. इसलिए पर्यटक बेतला नेशनल पार्क को छोड़कर अन्य सभी पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर रहे हैं. हालांकि बरसात के समय में काफी सावधानी बरतने की हिदायत दी गयी है. लेकिन बरसात के इस मौसम में कुछ दिलेर पर्यटक पलामू टाइगर रिजर्व के अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंच रहे हैं.
The post मानसून में निखरा पलामू टाइगर रिजर्व का सौंदर्य, उफनती नदियां और झरने बने आकर्षण का केंद्र, उमड़ रहे पर्यटक appeared first on Naya Vichar.

