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JPSC और JSSC में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, विवादों के बीच बदल दिए गए 11 प्रशाखा पदाधिकारी

रांची से मनोज लाल की रिपोर्ट JPSC-JSSC Transfer: झारखंड प्रशासन ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने अधिसूचना जारी कर दोनों आयोगों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत प्रशाखा पदाधिकारियों (एसओ) का तबादला कर दिया है. जेपीएससी से पांच और जेएसएससी से छह प्रशाखा पदाधिकारियों को हटाकर विभिन्न विभागों में भेजा गया है. प्रशासन ने राज्यभर में कुल 89 प्रशाखा पदाधिकारियों का स्थानांतरण किया है. जेपीएससी से हटाए गए पांच प्रशाखा पदाधिकारी प्रशासनी अधिसूचना के अनुसार जेपीएससी में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत पांच प्रशाखा पदाधिकारियों को वहां से हटाकर उनके नए विभागों में भेज दिया गया है. ये सभी अधिकारी मूल रूप से अन्य विभागों के कर्मचारी थे और प्रतिनियुक्ति पर आयोग में अपनी सेवाएं दे रहे थे. जेपीएससी से हटाए गए अधिकारियों में धर्मजीत कुमार साहू, नुपूर कुमारी, रितेश कुमार अग्रहरी, शिव शंकर प्रसाद और सौरभ सिंह शामिल हैं. फिलहाल आयोग में किसी नए प्रशाखा पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई है. जेएसएससी से भी हटाए गए छह अधिकारी इसी तरह झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से भी छह प्रशाखा पदाधिकारियों का तबादला किया गया है. इनमें सुधीर लकड़ा, सुकरा भगत, इनोसेंट टुडू, चांद झा, स्नेह राज रवि और प्रेम कुमार के नाम शामिल हैं. इन सभी अधिकारियों को भी अलग-अलग विभागों में नई जिम्मेदारी दी गई है. प्रशासन के इस फैसले को दोनों आयोगों में प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. जेएसएससी में सात नए प्रशाखा पदाधिकारियों की तैनाती जहां जेएसएससी से छह अधिकारियों का तबादला किया गया है, वहीं आयोग में सात नए प्रशाखा पदाधिकारियों की तैनाती भी की गई है. नए अधिकारियों में कुमार भाष्कर, कृष्णा कुमार हांसदा, राहुल कुमार, सुदिप्तो बोस, अमित कुमार डे, ओम प्रकाश राणा और कुमारी रश्मि शामिल हैं. इन अधिकारियों के कार्यभार संभालने के बाद आयोग के प्रशासनिक कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है. राज्यभर में 89 प्रशाखा पदाधिकारियों का तबादला कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य स्तर पर कुल 89 प्रशाखा पदाधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है. सभी संबंधित अधिकारियों को अपने वर्तमान पद से 20 अगस्त से पहले विरमित होने का निर्देश दिया गया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी निर्धारित तिथि तक विरमित नहीं होता है, तो उसे 20 अगस्त की अपराह्न के बाद स्वतः विरमित माना जाएगा और उसके स्थानांतरण आदेश को प्रभावी समझा जाएगा. इसे भी पढ़ें: JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी पर कांग्रेस से हस्तक्षेप की मांग, बंधु तिर्की ने सौंपे पांच अहम सुझाव आयोगों में प्रशासनिक बदलाव पर नजर जेपीएससी और जेएसएससी में यह प्रशासनिक बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब दोनों आयोग विभिन्न भर्ती परीक्षाओं, नियुक्ति प्रक्रियाओं और उनसे जुड़े विवादों को लेकर चर्चा में हैं. ऐसे में अधिकारियों के तबादले को प्रशासनिक पुनर्संरचना के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि प्रशासन की ओर से इन स्थानांतरणों के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन बदलावों का दोनों आयोगों की कार्यप्रणाली और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है. इसे भी पढ़ें: JPSC-JSSC अभ्यर्थियों ने प्रशासन के सामने रखीं 10 प्रमुख मांगें, पूरी नहीं हुई तो सीएम हेमंत को देना होगा इस्तीफा The post JPSC और JSSC में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, विवादों के बीच बदल दिए गए 11 प्रशाखा पदाधिकारी appeared first on Naya Vichar.

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14 JPSC Scam: पीटी परीक्षा में 48 प्रश्न सही करने वाला सुमन सौरभ गिरफ्तार, कबूला पूरा ‘सेटिंग’ का खेल!

रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित धांधली मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को बड़ी सफलता मिली है. सीआईडी की टीम ने हजारीबाग पुलिस के सहयोग से झारखंड लोक सेवा आयोग 2025 की प्रारंभिक परीक्षा (PT) में चयनित एक अभ्यर्थी सुमन सौरभ को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी अभ्यर्थी ने गलत तरीके से पीटी परीक्षा पास की थी. ये वही छात्र है जिसकी कार्बन कॉपी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा था. इस कार्बन कॉपी को जांच करने पर पता चला था कि इस अभ्यर्थी ने 100 में से मात्र 48 प्रश्न हल किये थे. इसके बावजूद वो पीटी परीक्षा पास कर ली थी. गिरफ्तारी के बाद पुलिस और सीआईडी की टीम ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. आरोपी ने जुर्म किया स्वीकार सीआईडी द्वारा दर्ज इस मामले में जांच के दौरान यह बात सामने आई कि गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ के पास से OMR शीट की कार्बन कॉपी भी बरामद नहीं हुई है. जांच एजेंसी ने इस संबंध में जब कड़ाई से पूछताछ की तो उसने फर्जी तरीके से परीक्षा पास करने के अपने अपराध को स्वीकार कर लिया है. जांच एजेंसियों के अनुसार, इस गिरफ्तारी से परीक्षा में हुए पूरे सिंडिकेट और धांधली के तरीकों का पर्दाफाश करने में अहम सुराग हाथ लगे हैं. ये भी पढ़ें: दुमका में लूट की कोशिश नाकाम. विरोध करने पर ग्रामीण का हाथ तोड़ा, देवघर का युवक गिरफ्तार सीआईडी का दावा: आगे होगी और भी सख्त कार्रवाई झारखंड सीआईडी (CID) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस पूरे घोटाले और कांड का अनुसंधान तेजी से आगे बढ़ रहा है. सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जो भी नए साक्ष्य और सबूत सामने आएंगे, उनके आधार पर मामले में शामिल अन्य चेहरों और सेटिंग गिरोह के खिलाफ भी आगे की विधि-सम्मत कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ये भी पढ़ें: बोकारो में सदर अस्पताल की कैंटीन समेत 10 दुकानों में छापेमारी, कई अनियमितताएं मिलीं The post 14 JPSC Scam: पीटी परीक्षा में 48 प्रश्न सही करने वाला सुमन सौरभ गिरफ्तार, कबूला पूरा ‘सेटिंग’ का स्पोर्ट्स! appeared first on Naya Vichar.

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सुदेश बेरी ने पीएम मोदी को बताया ‘भगवान विष्णु का अवतार’, बोले- उनके पैर धोकर वह पानी पी लूंगा

Sudesh Berry: बॉलीवुड एक्टर सुदेश बेरी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर खुलकर बात की. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ की, उनके लिए अपना सम्मान जाहिर किया और नेतृत्व से जुड़े कुछ मुद्दों पर भी अपनी राय रखी. बातचीत के दौरान उन्होंने कई ऐसे बयान दिए, जो अब चर्चा में हैं. Sudesh Berry on PM Modi: ‘मोदी जी भगवान विष्णु के अवतार हैं’ Accompany Akki को दिए एक पॉडकास्ट में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र हुआ, तो सुदेश बेरी ने कहा कि वह उन्हें “भगवान विष्णु का अवतार” मानते हैं. उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी ने आखिर गलत क्या किया है? लोग कहते हैं कि उन्होंने चाय बेची. बेचने दीजिए. उन्होंने चाय बेचते हुए पूरी दुनिया का सफर तय किया है.” उन्होंने आगे कहा, “जैसे हमने भगवान को नहीं देखा, लेकिन फिर भी उनकी पूजा करते हैं, वैसे ही मैं मोदी जी का सम्मान करता हूं. मेरे लिए वह भगवान विष्णु के अवतार हैं.” Sudesh Berry Statement: ‘उनके पैर धोकर वह पानी पी लूंगा’ बातचीत के दौरान होस्ट ने सुदेश बेरी को याद दिलाया कि उन्होंने एक बार अपनी मां के पैर धोकर उनका सम्मान किया था. इस पर एक्टर ने कहा, “अब मैं मोदी जी के पैर धोकर उस पानी को पीना चाहता हूं. अगर आप मेरी उनसे मुलाकात करवा दें, तो मैं जरूर ऐसा करूंगा.” उन्होंने यह भी कहा कि वह आज तक कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं मिले हैं और न ही उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हैं. इसके बावजूद उनके मन में मोदी जी के लिए बहुत सम्मान है. Sudesh Berry on Politics: ‘नेतृत्व से ऊपर है मेरा सम्मान’ सुदेश बेरी ने कहा कि उनका सम्मान किसी पार्टी या नेतृत्व की वजह से नहीं है. उन्होंने कहा, “मैं मोदी जी का सम्मान एक इंसान के तौर पर करता हूं। मेरा सम्मान किसी पार्टी से नहीं जुड़ा है. इसमें मुझे कुछ भी गलत नहीं लगता.” Sudesh Berry on CJP: प्रदर्शन करने वालों पर उठाए सवाल पॉडकास्ट में सुदेश बेरी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह इस संगठन को जानते तक नहीं हैं. उनके मुताबिक, ऐसे लोग देश को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जा रहे हैं. उन्होंने कहा, “अगर सच में समाज की सेवा करनी है, तो बच्चों के लिए पार्क बनाइए, बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम बनाइए और जरूरतमंद लोगों का इलाज कराइए. सिर्फ जंतर-मंतर पर बैठकर प्रदर्शन करने से कुछ नहीं होगा.” सुदेश बेरी ने संगठन के नाम पर भी तंज कसते हुए कहा कि अगर ऐसा है तो कोई “लकड़बग्घा पार्टी” भी बना सकता है. Sudesh Berry on Ram Rajya: ‘देश में रामराज्य आ चुका है’ सुदेश बेरी ने कहा कि उन्हें लगता है कि देश में रामराज्य आ चुका है. उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है. उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी तारीफ की. उनके मुताबिक, ये सभी लोग देश की तरक्की के लिए लगातार काम कर रहे हैं. ये भी पढ़ें: किरदार सांवला, चेहरा फेयर… क्या बॉलीवुड अब भी ऑथेंटिक कास्टिंग से दूर है? The post सुदेश बेरी ने पीएम मोदी को बताया ‘भगवान विष्णु का अवतार’, बोले- उनके पैर धोकर वह पानी पी लूंगा appeared first on Naya Vichar.

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इन 5 गलतियों की वजह से घर में नहीं टिकती सुख-शांति और खुशहाली, चाणक्य ने इन्हें बताया परिवार का सबसे बड़ा दुश्मन

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य को अपने समय के सबसे ज्ञानी, समझदार और बुद्धिमान पुरुष के तौर पर जाना जाता है. वे सिर्फ एक महान शिक्षक ही नहीं थे, बल्कि एक कमाल के पॉलिटिशियन भी थे. मानवजाति को सही रास्ता दिखाने के लिए उन्होंने कई बातें बताई हैं, जिन्हें आज हम चाणक्य नीति के नाम से जानते हैं. उनकी कही बातें भले ही सदियों पुरानी हों, लेकिन आज के समय में भी हमारे जीवन में उतनी ही सटीक बैठती हैं. अपनी नीतियों में चाणक्य ने घर-परिवार से जुड़ी भी कई बातें बताई हैं. उनके अनुसार किसी भी घर में असली शांति सिर्फ पैसों से नहीं आती, बल्कि वहां रहने वाले लोगों की आदतों और सोच से आती है. अक्सर हम रोजमर्रा की जिंदगी में अनजाने में कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं, जो देखते ही देखते परिवार की खुशियां और सुख-चैन छीन लेती हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपको इन्हीं गलतियों के बारे में बहुत ही आसान शब्दों में समझाने जा रहे हैं. जब आप इन आदतों और गलतियों को सुधार लेंगे, तो आपके घर में एक बार फिर से एक-दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान की भावना जागने लगेगी, और देखते ही देखते पूरे घर की खुशियां लौट आएंगी. chanakya niti on happy family कड़वी बातें बोलना और ताने मारना आचार्य चाणक्य के अनुसार, जिस घर में लोग एक-दूसरे से प्यार और सम्मान से बात नहीं करते, वहां कभी शांति रह ही नहीं सकती. बात-बात पर एक-दूसरे को ताने मारना, चिल्लाकर बात करना या हमेशा कड़वे शब्दों का इस्तेमाल करना रिश्तों को अंदर से खोखला कर देता है. जब घर के लोग एक-दूसरे की इज्जत करना बंद कर देते हैं, तो रिश्तों में दूरियां आने लगती हैं. इसलिए, अगर आपको अपने घर में खुशहाली और सुख-चैन चाहिए, तो अपनी बोली को जितना हो सके मीठा और सॉफ्ट रखने की कोशिश करनी चाहिए. ये भी पढ़ें: कब करें दूसरों को माफ और कब उठाएं उनके खिलाफ सख्त कदम? जानिए क्या कहते हैं आचार्य चाणक्य छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना चाणक्य नीति के अनुसार, किसी भी इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन उसका गुस्सा ही होता है. जब किसी व्यक्ति को गुस्सा आता है, तो वह सही और गलत के बीच का फर्क भूल जाता है. चाणक्य के अनुसार, जिस घर में हर दिन लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं और लोग छोटी से छोटी बात पर भी भड़कने लगते हैं, वहां कभी तरक्की नहीं हो सकती. गुस्से की वजह से सिर्फ रिश्ते टूटते हैं और जीवन में स्ट्रेस बढ़ता है. अगर आप परिवार में खुशहाली और सुख-चैन चाहते हैं, तो किसी भी समस्या पर भड़कने से बेहतर है कि आप उसे ठंडे दिमाग से बैठकर सुलझाएं. एक-दूसरे पर भरोसा न करना आचार्य चाणक्य की मानें तो किसी भी मजबूत रिश्ते की नींव भरोसे पर टिकी होती है. अगर परिवार के सदस्यों के बीच शक की बीमारी अपनी जगह बना ले, तो देखते ही देखते घर की हंसी और खुशहाली गायब हो जाती है. जब परिवार में लोग एक-दूसरे से ही बातें छिपाने लगते हैं या बेवजह शक करते हैं, तो हर बीतते दिन के साथ आपसी प्रेम खत्म होने लगता है. एक खुशहाल परिवार के लिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि सब एक-दूसरे के प्रति ईमानदार रहें और खुलकर बात करें. ये भी पढ़ें: इन 5 चीजों पर कंट्रोल करते ही बदल जाएगी आपकी जिंदगी, खुद पर जीत दिलाएंगी आचार्य चाणक्य की ये बातें खाना बर्बाद करना और फालतू खर्चे करना चाणक्य नीति कहती है कि जिस घर में भी अन्न और धन की कद्र नहीं की जाती, वहां परेशानियां हमेशा बनी रहती हैं. चाणक्य के अनुसार, प्लेट में खाना छोड़कर फेंकना या बिना सोचे-समझे फालतू चीजों पर पैसे बर्बाद करना बहुत ही गलत आदत है. जब आपके खर्चे बिना वजह बढ़ने लगते हैं और आप बचत नहीं कर पाते, तो जरूरत के समय आपको पैसों की तंगी से भी गुजरना पड़ता है. पैसों की यही किल्लत आगे चलकर घर में झगड़ों की वजह बन जाती है. आलस करना और घर में गंदगी रखना अगर आपको जीवन में आगे बढ़ना है, तो सबसे पहले आलस का त्याग कर देना चाहिए. चाणक्य के अनुसार, जिस घर के लोग देर तक सोते रहते हैं, कामों को बाद के लिए टालते रहते हैं और घर में हमेशा गंदगी रखते हैं, वहां का माहौल हमेशा भारी और निगेटिव बना रहता है. उनके अनुसार, साफ-सफाई और डिसिप्लिन से घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है. जब आपका घर साफ और व्यवस्थित रहता है, तो आपका मन खुश रहता है और काम करने में भी आपका मन लगता है. ये भी पढ़ें: इस तरह के लोगों को हमेशा रखें अपने घर के मामलों से दूर, वरना छिन सकती है परिवार की सुख-शांति The post इन 5 गलतियों की वजह से घर में नहीं टिकती सुख-शांति और खुशहाली, चाणक्य ने इन्हें बताया परिवार का सबसे बड़ा दुश्मन appeared first on Naya Vichar.

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भारत-नेपाल सीमा पर भड़की हिंसा! एक की मौत के बाद लगा कर्फ्यू, जनकपुर और वीरगंज में हाई अलर्ट

हिंदुस्तान-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में हुई हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं. स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए नेपाल प्रशासन ने धनुषा जिले के जनकपुर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है. वहीं, पर्सा जिले के वीरगंज में भी निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. सुनसरी हिंसा के बाद सख्ती नेपाल के सुनसरी जिले के कप्तानगंज इलाके में दो धार्मिक समुदायों के त्योहार के दौरान विवाद हिंसक झड़प में बदल गया था. हालात काबू करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत 12 से अधिक लोग घायल हुए. इसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया. सीमा क्षेत्र में बढ़ाई गई निगरानी हिंसा के बाद हिंदुस्तान-नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं. सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की घटना या सीमा पार गतिविधि को रोका जा सके. स्थानीय प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और अफवाहों से बचने की अपील कर रहा है. नेपाल के जनकपुर के सहायक मुख्य जिला अधिकारी चेतराज बराल ने बताया कि सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है. पहले भी सीमा पर बढ़ चुका है तनाव यह पहली बार नहीं है जब हिंदुस्तान-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में तनाव देखने को मिला हो। इससे पहले भी सीमा विवाद, स्थानीय झड़पों और नेतृत्वक विरोध-प्रदर्शनों के कारण कई बार दोनों देशों की सीमा पर सुरक्षा बढ़ानी पड़ी थी. साल 2020 में सीमा विवाद के दौरान भी कई संवेदनशील इलाकों में तनाव की स्थिति बनी थी, हालांकि दोनों देशों ने बातचीत के जरिए हालात सामान्य करने की कोशिश की थी. संसद से लेकर सुरक्षा परिषद तक हलचल नेपाल की संसद में कई सांसदों ने बढ़ते तनाव पर प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की. वहीं प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाकर सुनसरी समेत सीमा से जुड़े जिलों की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की. हिंदुस्तान के बिहार से सटा सुनसरी जिला व्यापार और आवागमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए हालात पर दोनों देशों की एजेंसियां भी नजर बनाए हुए हैं. शांति बहाली की कोशिशें जारी नेपाल प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों को उम्मीद है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और शांति वार्ता के प्रयासों से जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे. फिलहाल लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है. यह भी पढ़ें – जापान में भूकंप से 18 की मौत, मलबे में अब भी जिंदा लोगों की तलाश जारी The post हिंदुस्तान-नेपाल सीमा पर भड़की हिंसा! एक की मौत के बाद लगा कर्फ्यू, जनकपुर और वीरगंज में हाई अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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NEET पेपर लीक प्रोटेस्ट के खिलाफ केस बंद, दिल्ली सरकार ने जारी किया आदेश

दिल्ली प्रशासन ने गुरुवार को यह ऐलान किया कि नीट परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर किए गए प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई और कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों का आपराधिक बैकग्राउंड है, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा. दिल्ली प्रशासन की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में यह बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने कुल 13 केस नीट पेपर लीक के खिलाफ किए गए प्रदर्शन के खिलाफ दायर किए थे, जिनपर कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया गया है. दिल्ली के अंदर कोई भी पुलिस अथॉरिटी नहीं करेगी कार्रवाई प्रशासन ने यह जानकारी दी है कि विरोध प्रदर्शंनों में शामिल लोगों के खिलाफ दिल्ली के अंदर कोई भी पुलिस अथॉरिटी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी. हालांकि, यह सुरक्षा उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनका क्रिमिनल रिकॉर्ड है. इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से पुख्ता भी किया गया है. ये केस उन लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए थे, जिन्हें पुलिस ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा में शामिल पाया था. ‘चलो संसद मार्च’ के दौरान पुलिसवालों पर हुआ था हमला हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार दिल्ली पुलिस ने CCTV फुटेज के जरिए 2,873 लोगों की पहचान की, जिन्होंने ‘चलो संसद मार्च’ के दौरान पुलिसवालों पर हमला किया और गाड़ियों में तोड़-फोड़ की. दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के हवाले से बताया गया था कि उनमें से लगभग एक हजार लोगों का क्रिमिनल रिकॉर्ड था.केंद्र ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया था कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों और वॉलंटियर्स के खिलाफ कोई कानूनी या पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी, उसी आश्वासन के तहत यह कार्रवाई की गई है. सीजेपी के नेतृत्व में हुआ था आंदोलन CJP के नेतृत्व वाला आंदोलन पिछले महीने तब शुरू हुआ जब बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोपों पर नीट की परीक्षा रद्द कर दी गई थी. प्रदर्शनकारियों ने एग्जामिनेशन सिस्टम में बड़े सुधार और उस समय के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन ने तब और जोर पकड़ा जब एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए. ये भी पढ़ें : अभिजीत दीपके का दावा, BJP ज्वाइन करने की मिल रही धमकी; पीएम मोदी और शाह पर बोला हमला The post NEET पेपर लीक प्रोटेस्ट के खिलाफ केस बंद, दिल्ली प्रशासन ने जारी किया आदेश appeared first on Naya Vichar.

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पीएम मोदी का फर्जी इस्तीफा पत्र वायरल, PIB ने किया अलर्ट

Fact Check: वायरल हो रहे इस पत्र में राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए लिखा गया है कि ‘व्यक्तिगत एवं नेतृत्वक उत्तरदायित्व स्वीकार करते हुए’ प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र दिया जा रहा है. इस पत्र पर फर्जी दस्तखत के साथ ’24 मई 2025′ की तारीख भी अंकित की गई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग इसे तरह-तरह के दावों के साथ शेयर कर रहे हैं. PIB ने किया फर्जीवाड़े का खुलासा PIB Fact Check ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए स्पष्ट किया है कि पत्र पूरी तरह फर्जी है. पीआईबी ने बताया, “प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है.” PIB ने बताया, इस पत्र पर किए गए हस्ताक्षर फर्जी हैं और इसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है. आधिकारिक सूत्रों पर ही करें विश्वास प्रशासनी एजेंसी PIB ने नागरिकों को सलाह दी है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी संवेदनशील या चौकाने वाले दावे पर तुरंत भरोसा न करें. किसी भी समाचार या दावे पर यकीन करने से पहले हमेशा प्रशासनी एवं आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि करें. वायरल पोस्ट को लेकर रहें सावधान पीआईबी ने कहा, पर्सनल या फाइनेंशियल जानकारी शेयर करने या कोई भी फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट करने से पहले खास सावधानी बरतें. ये भी पढ़ें: संसद भवन में पीएम मोदी ने की हाई लेवल बैठक, राजनाथ-जयशंकर और डोभाल समेत कई दिग्गज रहे मौजूद The post पीएम मोदी का फर्जी इस्तीफा पत्र वायरल, PIB ने किया अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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19 साल बाद बंगाल लौटीं तसलीमा नसरीन, कहा- कोलकाता आना घर लौटने जैसा

अपनी विवादित पुस्तक ‘द्विखंडितो’ की वजह से विरोध-प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ने पर मजबूर हुईं बांग्लादेशी लेखिका तसलीम नसरीन ने बृहस्पतिवार को कहा कि लंबे समय बाद अपनी पहली सार्वजनिक उपस्थिति के लिए शहर (कोलकाता) लौटना ‘अपने देश’ में लौटने जैसा है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि यह दौरा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति की आवाजों की सुरक्षा के महत्व की पुनः पुष्टि करेगा. नसरीन एक अगस्त को यहां एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और मशहूर लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के भी शामिल होने की संभावना है. निर्वासन ने मुझे मजबूत बनाया है, लेकिन इसने मुझे ऐसे जख्म भी दिये हैं, जिन्हें यह मजबूती मिटा नहीं सकती. इसने मुझे सिखाया कि घर सिर्फ कोई इमारत या पता नहीं होता. -तसलीमा नसरीन 2007 के बाद पहली बार कोलकाता लौटीं तसलीमा वर्ष 2007 के बाद कोलकाता में नसरीन की यह पहली सार्वजनिक उपस्थिति होगी. उस समय उनकी आत्मकथा के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण उन्हें वह शहर छोड़ना पड़ा था, जिसे उन्होंने बांग्लादेश छोड़ने के एक दशक बाद अपना घर बनाया था. ये भी पढ़ें: 20 साल बाद कोलकाता लौट रहीं तसलीमा नसरीन, 1 अगस्त को कट्टरपंथ-विरोधी कार्यक्रम में होंगी शामिल ‘द्विखंडितो’ पर विवाद के बाद बंगाल छोड़ना पड़ा था नसरीन को पश्चिम बंगाल प्रशासन ने वर्ष 2003 में तसलीमा नसरीन की किताब ‘द्विखंडितो’ (दो हिस्सों में बंटी) पर कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के कारण प्रतिबंध लगा दिया था. नसरीन ने कोलकाता में कहा कि उनके लिए कोलकाता केवल रहने की जगह नहीं थी. एक ऐसा शहर था, जिसने उन्हें अपनापन महसूस कराया और इतने वर्षों तक दूर रहने के बावजूद उनका पश्चिम बंगाल से जुड़ाव कम नहीं हुआ. मैं खुशी के साथ-साथ दर्द भी महसूस कर रही हूं. कोलकाता सिर्फ वह शहर नहीं था, जहां मैं रहती थी. वहां मेरा घर, दोस्त और पाठक होने के साथ अपनापन था. मेरे जीवन के लगभग 19 साल मुझसे छीन लिये गये और घर वापसी उन खोये हुए सालों को वापस नहीं ला सकती. मैं किसी अजनबी या मेहमान की तरह नहीं लौट रही हूं. मैं एक ऐसी इंसान के तौर पर लौट रही हूं, जिसने हमेशा खुद को बंगाल का ही हिस्सा माना है. मेरे दिल में बंगाल कभी भी किसी सीमा या कंटीले तार की बाड़ से बंटा नहीं रहा. बंगाल के पूर्वी हिस्से का दरवाजा मेरे लिए बंद है, इसलिए अभी के लिए बंगाल का यही हिस्सा मेरा घर है. -तसलीमा नसरीन, लेखिका ‘मैंने अपनी मर्जी से कोलकाता नहीं छोड़ा’ नसरीन ने कहा कि उन्होंने कभी अपनी मर्जी से कोलकाता नहीं छोड़ा. उन्हें हमेशा उम्मीद थी कि वह एक दिन वापस आयेंगीं. उन्होंने कहा- उस समय की पश्चिम बंगाल प्रशासन ने मुझे राज्य छोड़ने पर मजबूर किया था. अपनी वापसी को सिर्फ घर लौटने से कहीं अधिक बताते हुए, उन्होंने कहा कि यह एक लेखक के आजादी से बोलने के अधिकार के लिए एक बड़े संघर्ष का प्रतीक है. ये भी पढ़ें: तस्लीमा नसरीन ने ट्विटर पर डाली अपने ब्वॉयफ्रेंड की तसवीर तसलीमा को अवास्तविक लगता है कोलकाता लौटना नसरीन ने कहा कि लगभग 19 साल बाद लौटना और कोलकाता के बीचों-बीच सार्वजिनक रूप से बोलना लगभग अवास्तविक लगता है. मेरे लिए, यह एक ऐसी आवाज की वापसी का प्रतीक है, जिसे कट्टरपंथियों ने कभी चुप कराने की कोशिश की थी. उस मंच पर मेरी मौजूदगी इस बात की पुष्टि करेगी कि धमकियां और फतवे किसी लेखक को कुछ समय के लिए देश से बाहर (निर्वासित) कर सकते हैं, लेकिन वे उसके विचारों को मिटा नहीं सकते. युवा पाठकों और लेखकों से मेरा संदेश यही होगा- हर चीज पर सवाल उठाओ. धर्म, परंपरा, सत्ता, नेतृत्व और यहां तक कि उन विचारों पर भी सवाल उठाओ, जिन्हें तुम सबसे अधिक पसंद करते हो. किसी और के पूर्वाग्रहों को अपनाकर उन्हें अपनी पक्की राय मत समझो. -तसलीमा नसरीन बंगाल वापसी से उत्साहित हैं ‘द्विखंडितो’ की लेखिका लेखिका ने कहा कि वापसी के आमंत्रण को वह एक उत्साहजनक संकेत मानती हैं. उन्होंने अपनी यात्रा को संभव बनाने के लिए आयोजकों और प्रशासन का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा- मैं निश्चित रूप से अपनी वापसी को एक उत्साहजनक संकेत मानती हूं. मैं उन आयोजकों की आभारी हूं, जिन्होंने इसे संभव बनाया और सुरक्षा देने के लिए प्रशासन की भी शुक्रगुजार हूं. मैं मुख्यमंत्री अधिकारी की उस इच्छा की बहुत सराहना करती हूं, जिसके तहत उन्होंने एक अलग राय रखने वाले लेखक की आजादी का सम्मान और सुरक्षा करने का फैसला किया, भले ही वह लेखक की हर बात से सहमत न हों. नसरीन ने बताया- क्या हो अभिव्यक्ति की आजादी का पैमाना नसरीन ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का असली पैमाना उन विचारों की रक्षा करने की क्षमता है, जो शायद लोकप्रिय न हों या असहज करने वाले हों. एक लेखक की स्वतंत्रता और सुरक्षा किसी प्रशासन की उदारता, किसी नेतृत्वक दल की विचारधारा या किसी धार्मिक समूह की अनुमति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. उनकी रक्षा मौलिक अधिकारों के रूप में की जानी चाहिए. हिंदुस्तान की उदारता से प्रभावित हैं नसरीन नसरीन ने कहा- भले ही मैं हिंदुस्तान की नागरिक नहीं हूं, लेकिन मैं उस देश की उदारता से बहुत प्रभावित हूं, जिसने मुझ जैसी सतायी गयी लेखक को शरण दी है. मुझे दिये गये समर्थन और सुरक्षा के लिए मैं पश्चिम बंगाल की मौजूदा प्रशासन की तहे दिल से शुक्रगुजार हूं. नसरीन ने कहा कि प्रौद्योगिकी ने लेखकों के लिए मौके तो बढ़ाये हैं, लेकिन साथ ही डराने-धमकाने के नये तरीके भी दिये हैं. टेक्नोलॉजी और बांग्लादेश पर तसलीमा के विचार प्रौद्योगिकी ने लेखकों को अपनी बात कहने के कई और तरीके दिये हैं, लेकिन इसने संगठित समूहों को भी उन्हें धमकाने, परेशान करने और चुप कराने के भी कई और तरीके दिये हैं. बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्ष सोच, धार्मिक आलोचना और ईमानदार बौद्धिक बहस की गुंजाइश खतरनाक रूप से कम हो गयी है. बांग्लादेश में स्वतंत्र विचारकों की हत्या की गयी है, उन्हें जेल में डाला गया है, छिपने पर मजबूर किया गया है या देश छोड़ने पर मजबूर किया गया है. बांग्लादेश जैसे देश में भय अब अभिव्यक्ति पर पाबंदी लगाने का एक जरिया बन गया है. दक्षिण एशिया

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प्रशांत किशोर से बहस करने वाली SP ममता कल्याणी कौन हैं? वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आईं महिला अधिकारी

SP Mamta Kalyani: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान जारी है. इसी बीच पटना की सेंट्रल सिटी एसपी ममता कल्याणी और जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर ममता कल्याणी कौन हैं. मतदान के बीच हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा उपचुनाव के दौरान जन सुराज ने आरोप लगाया कि उसके कई पोलिंग एजेंटों और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है. इसी शिकायत को लेकर प्रशांत किशोर अपने समर्थकों के साथ पुलिस अधिकारियों से बातचीत करने पहुंचे. इसी दौरान उनकी सेंट्रल सिटी एसपी ममता कल्याणी से तीखी बहस हो गई. क्या था पूरा मामला? जन सुराज का आरोप है कि मतदान से पहले ही उसके कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया. पार्टी का दावा है कि कुछ कार्यकर्ताओं का पता भी नहीं चल रहा था. वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई. वायरल वीडियो में क्या दिखा? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एसपी ममता कल्याणी प्रशांत किशोर और उनके समर्थकों से आचार संहिता का पालन करने की बात कहती नजर आती हैं. वह बार-बार कहती हैं कि चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में एक जगह इकट्ठा होने की अनुमति नहीं है. उन्होंने समर्थकों से वहां से हटने को भी कहा. दूसरी ओर, प्रशांत किशोर अपने कार्यकर्ताओं के बारे में जानकारी मांगते रहे. उनका कहना था कि पुलिस बिना कारण उनके लोगों को उठा रही है. View on Instagram कौन हैं SP ममता कल्याणी? ममता कल्याणी बिहार पुलिस सेवा (BPSC) की 45वीं बैच की अधिकारी हैं. वह बिहार के लखीसराय जिले के पुरानी बाजार स्थित नया टोला की रहने वाली हैं. उनके पिता स्वर्गीय सीताराम मेहता सेवानिवृत्त प्राचार्य थे. ममता कल्याणी अपनी सख्त कार्यशैली, अनुशासन और प्रशासनिक क्षमता के लिए जानी जाती हैं. हाल ही में हुए पुलिस प्रशासन के फेरबदल के बाद उन्हें पटना सेंट्रल सिटी एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान पटना के सबसे संवेदनशील पुलिस जोन की जिम्मेदारी संभाल रहीं ममता कल्याणी के लिए यह पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान माना जा रहा है. इससे पहले वह डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. वीडियो बना चर्चा का विषय प्रशांत किशोर और एसपी ममता कल्याणी के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है. एक तरफ जन सुराज पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगा रही है, तो दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई चुनाव आयोग के निर्देशों और कानून के तहत की गई है. इसी वजह से यह वीडियो अब बांकीपुर उपचुनाव की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया. Also Read: ‘रात से हमारे लोगों को उठाया जा रहा है’, बांकीपुर में बूथों का जायजा लेने पहुंचे प्रशांत किशोर बोले- भाजपा नहीं, पुलिस चुनाव लड़ रही है The post प्रशांत किशोर से बहस करने वाली SP ममता कल्याणी कौन हैं? वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आईं स्त्री अधिकारी appeared first on Naya Vichar.

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JPSC-JSSC अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने रखीं 10 प्रमुख मांगें, पूरी नहीं हुई तो सीएम हेमंत को देना होगा इस्तीफा

रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट Jharkhand Students Protest: झारखंड में जेपीएससी (जेपीएससी) और जेएसएससी (जेएसएससी) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों और छात्रों ने प्रशासन के सामने 10 सूत्री मांगपत्र रखा है. मांगपत्र में 14वीं जेपीएससी, वर्ष 2023 और 2025 के बैकलॉग विज्ञापनों को रद्द करने, सीबीआई और ईडी से जांच कराने, आयोग में व्यापक सुधार लागू करने और समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की गई है. अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना होगा. 14वीं जेपीएससी और बैकलॉग विज्ञापन रद्द करने की मांग रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की है कि 14वीं जेपीएससी तथा वर्ष 2023 और 2025 के बैकलॉग विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए. इसके साथ ही टीडीपीएल एजेंसी द्वारा पूर्व में आयोजित सभी परीक्षाओं को भी निरस्त करने की मांग उठाई गई है. उनका आरोप है कि इन परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. साथ ही 11वीं से 13वीं जेपीएससी मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन को भी नियमावली 2002 के विपरीत बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की गई है. सीबीआई, ईडी जांच और 90 दिनों में सुनवाई की मांग प्रदर्शनकारियों के मांगपत्र में कहा गया है कि सभी विवादित परीक्षाओं और संबंधित मामलों की जांच सीबीआई और ईडी से कराई जाए. छात्रों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है. टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की कथित संलिप्तता की भी जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग रखी गई है. जेपीएससी और जेएसएससी में बड़े सुधार की मांग प्रदर्शनकारी छात्रों ने आयोगों में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा है कि जेपीएससी और जेएसएससी के शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला किया जाए. उनकी जगह निष्पक्ष और बेदाग छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति हो. साथ ही परीक्षा के प्रत्येक चरण के लिए अलग-अलग एजेंसियों का चयन जीईएम पोर्टल के माध्यम से किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर मांगपत्र में कहा गया है कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की मैन्युअल जांच कर उसकी डिजिटल कॉपी अभ्यर्थियों के ओटीआर आईडी पर अपलोड की जाए. परिणाम जारी करते समय श्रेणीवार कटऑफ अंक सार्वजनिक किए जाएं तथा सात दिनों के भीतर प्रत्येक अभ्यर्थी का स्कोर कार्ड उपलब्ध कराया जाए. इसके अलावा ओएमआर शीट में “नॉट अटेम्प्ड” का विकल्प जोड़ने और सभी प्रश्नों पर बबल भरना अनिवार्य करने की भी मांग की गई है. कैलेंडर, आयु सीमा और विज्ञापन को लेकर भी मांग अभ्यर्थियों ने आयोग द्वारा रद्द की गई परीक्षाओं के साथ आगामी भर्तियों का वार्षिक कैलेंडर जारी करने तथा तय समय सीमा में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है. कैलेंडर का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई गई है. इसके अलावा 14वीं जेपीएससी की अधियाचना वापस लेकर 14वीं और 15वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का नया विज्ञापन जारी करने तथा अधिकतम आयु सीमा 1 अगस्त 2018 के आधार पर निर्धारित करने की मांग की गई है. दौड़ की समय सीमा बढ़ाने और आयु में छूट की मांग अभ्यर्थियों ने 1600 मीटर दौड़ की समय सीमा पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 6 मिनट से बढ़ाकर 7 मिनट करने की मांग की है. साथ ही सभी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में अनारक्षित वर्ग की अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष करने तथा अन्य वर्गों को नियमानुसार अतिरिक्त आयु छूट देने की मांग भी रखी गई है. इसे भी पढ़ें: JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी पर कांग्रेस से हस्तक्षेप की मांग, बंधु तिर्की ने सौंपे पांच अहम सुझाव मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी मांगपत्र के अंत में अभ्यर्थियों ने कहा है कि उनकी सभी मांगें न्यायसंगत और विद्यार्थियों के हित में हैं. यदि प्रशासन इन मांगों पर गंभीरता से निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा है कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में मुख्यमंत्री को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. इसे भी पढ़ें: छात्रवृत्ति योजनाओं में केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग, सीएम हेमंत ने पीएम मोदी को लिखा पत्र The post JPSC-JSSC अभ्यर्थियों ने प्रशासन के सामने रखीं 10 प्रमुख मांगें, पूरी नहीं हुई तो सीएम हेमंत को देना होगा इस्तीफा appeared first on Naya Vichar.

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