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“दूसरों की सोच से मत समझो रामायण-महाभारत”: कोंकणा सेन ने महाकाव्य को लेकर दिया बयान, इरफान खान को किया याद

Konkona Sen Sharma Mahabharat: एक्ट्रेस कोंकणा सेन शर्मा जस्टिन राव के साथ एक इंटरव्यू के दौरान रामायण और महाहिंदुस्तान का जिक्र करते हुए नजर आईं.  मानसून फिल्म फेस्टिवल के इस इवेंट में  उन्होंने कहा की रामायण और महाहिंदुस्तान  से आपका परिचय किसी  टीवी शो या किसी दूसरे व्यक्ति की सोच के आधार पर नहीं होना चाहिए बल्कि आपकी खुद की इमेजिनेशन से होनी चाहिए. What Konkona Sen Said in the Interview: क्या कहा कोंकणा सेन ने जस्टिन राव के साथ इंटरव्यू के दौरान कोंकणा ने बताया कि, “महाहिंदुस्तान और रामायण से आपका पहला परिचय किसी टीवी शो या किसी दूसरे व्यक्ति की सोच के आधार पर नहीं होना चाहिए. बेहतर है कि पहले आप खुद इन कहानियों को समझें और अपनी कल्पना बनाएं. इसके बाद आप इन्हें अपनी पसंद के अनुसार कहीं भी देख सकते हैं. मैंने भी इनसे जुड़ी कई चीजे देखीं और पढ़ीं. भले ही उस समय मैं सब कुछ पूरी तरह समझ नहीं पाई, लेकिन इससे मेरा ध्यान और एकाग्रता बेहतर हुआ. साथ ही, मैंने यह भी सीखा कि हर चीज का नतीजा तुरंत नहीं मिलता और इसके लिए धैर्य रखना जरूरी है”. View on Instagram I was Very Excited to Work With Irrfan Khan – Konkona Sen : इरफान के साथ काम को लेकर बहुत एक्ससिटेड थी  एक्टर इरफान खान के साथ ‘लाइफ इन ए मेट्रो’ में काम कर चुकी कोंकणा सेन ने राव के साथ इंटरव्यू के दौरान इरफान खान का भी जिक्र किया उन्होंने बताया कि, “मुझे लगता है कि यह बात 2000 के दशक की शुरुआत की है, जब इरफान खान इतने लोकप्रिय नहीं हुए थे. हालांकि, मैं जानती थी  कि वह एक शानदार अभिनेता हैं और मैं हमेशा उनके साथ काम करना चाहती थी. इसलिए जब भी मुझे पता चलता कि इरफान किसी फिल्म का हिस्सा हैं, तो मैं तुरंत उसमें काम करने के लिए तैयार हो जाती थी. बाद में मुझे पता चलता था कि वह कुछ दूसरे फिल्मों में काम कर रहे होते थे”. कोंकणा ने लीजेंडरी एक्टर इरफान खान के साथ कई नामी और चर्चित फिल्में की हैं, जिसमें लाइफ इन ए मेट्रो, तलवार, आजा नचले, सात खून  माफ, यूं  होता तो क्या होता, राइट या रॉन्ग, दिल कबाड़ी और मेरीडियन लाइन्स हैं. Konkona Was Not Allowed to Watch Ramayana and Mahabharata on TV: कोंकणा को रामायण और महाहिंदुस्तान देखने की इजाजत नहीं थी ‘फिल्म कम्पेनियन’ को दिए एक इंटरव्यू में अनुपमा चोपड़ा से बातचीत के दौरान एक्ट्रेस कोंकणा सेन शर्मा ने बताया था कि, उनकी मां और फिल्ममेकर अपर्णा सेन ने उन्हें बचपन में रामायण और महाहिंदुस्तान जैसे पौराणिक सीरियल देखने की इजाजत नहीं दी थी. इसके बजाय, उनकी मां चाहती थीं कि कोंकणा पहले इन महाकाव्यों को किताबों के जरिए पढ़ें. कोंकणा, अपर्णा सेन और लेखक मुकुल शर्मा की बेटी हैं. कोंकणा ने आगे बताया कि उन्हें रामायण और महाहिंदुस्तान देखने की इन कहानियों को टीवी पर देखने से पहले उन्हें पढ़ना ज्यादा जरूरी है. उन्होंने आगे  कहा कि उनकी मां चाहती थीं कि इन महाकाव्यों से उनका पहला परिचय किसी दूसरे व्यक्ति की कल्पना के जरिए नहीं, बल्कि उनकी अपनी कल्पना के माध्यम से हो. उस इंटरव्यू में उन्होंने अपनी मां के साथ अपने रिश्ते और उनके जीवन पर मां के प्रभाव के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि उनकी मां की इस सख्ती की वजह से उन्हें अलग-अलग तरह की कहानियों, कला और विचारों को समझने का मौका मिला. इससे उनके नजरिए को बेहतर तरीके से विकसित होने में भी मदद मिली. यह भी पढ़ें: Metro In Dino: पंकज त्रिपाठी- इरफान खान की तुलना पर कोंकणा सेन शर्मा ने तोड़ी चुप्पी, कही दिल छूने वाली बात The post “दूसरों की सोच से मत समझो रामायण-महाहिंदुस्तान”: कोंकणा सेन ने महाकाव्य को लेकर दिया बयान, इरफान खान को किया याद appeared first on Naya Vichar.

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DU के इस कॉलेज में शॉर्ट्स बैन, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सेंट स्टीफंस कॉलेज के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस भी शुरू हो गई है. कई लोग इसे अनुशासन बनाए रखने का कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ छात्र इसे अपनी व्यक्तिगत पसंद में दखल मान रहे हैं. कॉलेज ने सभी छात्रों से इन नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है. नोटिस पर कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर सुसान एलियास के हस्ताक्षर हैं. किन जगहों पर शॉर्ट्स पहनने की अनुमति नहीं? 26 जुलाई को जारी “Campus Regulations & Guidelines” नोटिस के मुताबिक, छात्रों को क्लासरूम, ट्यूटोरियल रूम, लैब, कॉलेज चैपल, असेंबली हॉल, लाइब्रेरी और डाइनिंग हॉल में शॉर्ट्स पहनकर आने की अनुमति नहीं होगी. सिर्फ ड्रेस कोड ही नहीं, ये नियम भी लागू ANI की रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज ने ड्रेस कोड के अलावा कुछ और जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं. नोटिस में साफ कहा गया है कि पूरा कैंपस स्मोक-फ्री जोन है. अगर कोई छात्र धूम्रपान करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा छात्रों से कैंपस को साफ रखने की अपील की गई है और कूड़ा हमेशा डस्टबिन में डालने को कहा गया है. कॉलेज ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर छात्र को अपना वैध कॉलेज आईडी कार्ड हमेशा साथ रखना होगा. जरूरत पड़ने पर डाइनिंग हॉल में प्रवेश से पहले भी आईडी कार्ड दिखाना पड़ सकता है. सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस जैसे ही यह नोटिस सामने आया, सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं. कुछ लोगों का कहना है कि कॉलेज को अनुशासन और संस्थान की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसे नियम बनाने का अधिकार है. वहीं कई छात्र और सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि कपड़े पहनना व्यक्तिगत पसंद का मामला है और इस तरह की पाबंदियां जरूरी नहीं हैं. फिलहाल कॉलेज की ओर से इस मुद्दे पर कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है. प्रिंसिपल की ओर से नहीं आया जवाब इस ड्रेस कोड के पीछे की वजह जानने के लिए मीडिया ने कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर सुसान एलियास से संपर्क करने की कोशिश की. हालांकि समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. इसलिए यह साफ नहीं हो पाया है कि यह नियम पहले से लागू नीति का हिस्सा है या फिर नया बदलाव किया गया है. पहले भी चर्चा में रहा है कॉलेज सेंट स्टीफंस कॉलेज इससे पहले भी सुर्खियों में रह चुका है. इसी साल अप्रैल में दिल्ली यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में अपनाए गए शॉर्टलिस्टिंग नियमों पर सवाल उठाए थे. काउंसिल ने कॉलेज को नियुक्ति पत्र जारी करने से रोकने की सलाह दी थी और कहा था कि अपनाई गई प्रक्रिया विश्वविद्यालय के तय नियमों के अनुरूप नहीं थी. अब नए ड्रेस कोड को लेकर भी कॉलेज एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है. ये भी पढ़ें: DU UG Cut Off: St Stephens College के विज्ञान विषय का कटऑफ इतना हाई कि छूट जाएंगे पसीने, देखें अन्य Subjects का हाल The post DU के इस कॉलेज में शॉर्ट्स बैन, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस appeared first on Naya Vichar.

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“राहुल गांधी नव जवान मनके कहलैं इडियट”, जितेंद्र सिंह और अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस सांसद पर बोला हमला

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर कहा, “अगर राहुल गांधी ने किसी छात्र के लिए ‘इडीयट’ शब्द का इस्तेमाल किया है, तो हमें इस पर सख्त आपत्ति है. लेकिन अगर उन्होंने यह शब्द खुद के लिए इस्तेमाल किया है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि हम इसका स्वागत करते हैं. देर से ही सही, कम से कम उन्होंने अपने बारे में यह अहसास और स्वीकारोक्ति तो की.” देश के युवाओं को ‘इडीयट’ कहा दुर्भाग्यपूर्ण : जितेंद्र सिंह केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा का जवाब देते हुए राहुल गांधी पर संसदीय मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को बुनियादी संसदीय नियमों की भी जानकारी नहीं है. “जब इतने संवेदनशील और महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा हो रही थी, तब रचनात्मक सुझाव देने के बजाय नेतृत्व की जा रही है. देश के भविष्य यानी युवाओं के लिए इडियट जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.” – केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह विरोध प्रदर्शन और 7 एलकेएम पर घेराव को लेकर कसा तंज केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दिल्ली में हुए प्रदर्शनों और प्रधानमंत्री आवास (7 एलकेएम) के बाहर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री न बन पाने की निराशा और हताशा के कारण राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के गेट पर जाकर बैठ गए थे. जब उन्हें बेहद शिष्टाचार के साथ समझाने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें बस हटा दिया जाए. पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर फायरिंग नहीं की थी: जितेंद्र सिंह दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के आरोपों को खारिज करते हुए जितेंद्र सिंह ने साफ किया कि पुलिस ने केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया था, कोई फायरिंग नहीं हुई थी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ऐसी स्थिति में आदेश देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है, किसी मंत्री के पास नहीं. ये भी पढ़ें: भारी हंगामे के बीच लोकसभा से एंटी पेपर लीक बिल पास, 10 साल जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान ये भी पढ़ें: राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा- ‘इडियट’, सदन में हंगामा- फिर क्या बोले- राजनाथ सिंह और किरेन रिजिजू The post “राहुल गांधी नव जवान मनके कहलैं इडियट”, जितेंद्र सिंह और अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस सांसद पर बोला हमला appeared first on Naya Vichar.

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4750+ एपिसोड, 18 साल का सफर… जेठालाल उर्फ दिलीप जोशी ने बताया शो की सफलता का राज

हिंदुस्तानीय टेलीविजन के सबसे पसंदीदा कॉमेडी शोज में से एक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के 18 साल पूरे हो चुके हैं. इस बड़े माइलस्टोन को दिलीप जोशी ने सेलिब्रेट किया है. वह शो में जेठालाल का किरदार निभाते हैं. उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग और गोकुलधाम सोसाइटी संग ट्विनिंग दर्शकों को खूब पसंद आती है. Dilip Joshi On 18 Years of Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: तारक मेहता का उल्टा चश्मा के 18 साल पूरे होने पर क्या बोले दिलीप जोशी तारक मेहता का उल्टा चश्मा के 18 साल पूरे होने पर दिलीप जोशी ने मीडिया संग बात करते हुए कहा, “यह मेरे लिए बेहद खास पल है. मैं भगवान और दर्शकों का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं. एक कॉमेडी शो का 18 साल तक लगातार चलना, 4750 से ज्यादा एपिसोड पूरे करना और परिवारों को एक साथ जोड़कर रखना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है.” दर्शकों का प्यार ही हमारी ताकत है- दिलीप जोशी दिलीप ने कहा कि दर्शकों का लगातार मिला प्यार ही पूरी टीम की सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि निर्माता असित कुमार मोदी शो के सेट्स में बड़े बदलाव कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में दर्शकों को एक नया और अलग अनुभव देखने को मिलेगा. Jethalal Remains Excited To Do Episodes: जेठालाल एपिसोड्स करने के लिए रहते हैं एक्सइटेड उन्होंने आगे कहा, “आज भी जब हम शूटिंग के लिए निकलते हैं, तो कभी यह महसूस नहीं होता कि काम दोहराव वाला हो गया है. हर दिन यह जानने की उत्सुकता रहती है कि आज क्या नया शूट होने वाला है. सबसे बड़ी चुनौती कहानियों को ताजा और दिलचस्प बनाए रखना है. इसका पूरा श्रेय हमारे राइटर्स और असित मोदी को जाता है. एक कलाकार के तौर पर हम अपनी तरफ से उन कहानियों में जान डालने की कोशिश करते हैं.” ये भी पढ़ें: ‘रात में होटल बुलाया और रखी ऐसी शर्त’, ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की गुलाबो का खुलासा, एक्ट्रेस ने फिर संभाली बात The post 4750+ एपिसोड, 18 साल का सफर… जेठालाल उर्फ दिलीप जोशी ने बताया शो की सफलता का राज appeared first on Naya Vichar.

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छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा और रात में नहीं आती नींद? स्ट्रेस के इन 5 संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Signs of Excessive Stress: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव यानी कि स्ट्रेस होना एक बहुत ही कॉमन बात बन गई है. पढ़ाई की बात हो, करियर की टेंशन हो या फिर परिवार की जिम्मेदारियां और सोशल मीडिया पर दूसरों से आगे निकलने की दौड़, इन सभी चीजों में हम इतने उलझ जाते हैं कि अपने मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं. आपको शायद यह जानकर हैरानी हो, लेकिन जब हम अंदर से परेशान या फिर दुखी होते हैं, तो हमारा शरीर हमें कुछ संकेत या फिर इशारे देने लगता है. सबसे बड़ी परेशानी भी यही है कि हममें से ज्यादातर लोगों को इन संकेतों के बारे में कुछ पता ही नहीं होता. अक्सर हम शरीर में दिखाई देने वाले इन संकेतों को कोई मामूली थकान या फिर छोटी-मोटी बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. अगर आप समय रहते इन संकेतों पर ध्यान नहीं देते हैं, तो आगे चलकर यही हमारी सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपको इन्हीं संकेतों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, जो आपके शरीर में ज्यादा स्ट्रेस होने की वजह से दिखाई देने लगते हैं. तो चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं. signs of excessive stress बार-बार सिरदर्द होना और मसल्स में खिंचाव जब हम बहुत ज्यादा स्ट्रेस से गुजरते हैं, तो इसका सबसे पहला असर हमारे शरीर की मसल्स पर देखने को मिलता है. स्ट्रेस की वजह से कंधे, गर्दन और पीठ की मसल्स अकड़ने लग जाती हैं. इसकी वजह से सिर में भारीपन और हल्का-हल्का दर्द बना रहता है. अक्सर जब ऐसा होता है, तो हम इसे नॉर्मल थकान समझकर डिस्प्रिन या फिर कोई पेनकिलर खा लेते हैं. लेकिन सच्चाई तो यही है कि यह आपके दिमाग का एक सिग्नल है कि अब आपको थोड़े आराम की जरूरत है. नींद न आना या रात में बार-बार नींद टूटना अगर आप एक हेल्दी जीवन जीना चाहते हैं तो इसके लिए एक गहरी और अच्छी नींद बहुत ही जरूरी होती है. लेकिन जब दिमाग में ढेर सारी बातें और परेशानियां घूमती रहती हैं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन्स का लेवल बढ़ने लग जाता है. ऐसा होने की वजह से या तो देर तक नींद नहीं आती है और अगर आ भी जाए तो आंख बार-बार खुलती रहती है. कई बार तो सुबह उठने के बाद भी ऐसा लगता है जैसे कि सोए ही नहीं हों और इसका असर पूरे दिन सुस्ती के रूप में देखने को मिलता है. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो समझ जाइए कि यह स्ट्रेस का ही एक संकेत है. ये भी पढ़ें: क्या आप भी बाहरी चीजों में ढूंढ रहे हैं खुशी? आज ही जान लें खुशहाल जिंदगी के ये 5 असली सीक्रेट्स पेट खराब रहना और डाइजेशन में गड़बड़ी आपको शायद यह मालूम न हो लेकिन हमारे पेट और दिमाग का आपस में बहुत ही गहरा कनेक्शन होता है. जब भी आप टेंशन या फिर स्ट्रेस में होते हैं, तो आपका डाइजेस्टिव सिस्टम खराब हो जाता है. ऐसा होने की वजह से आप कितना भी अच्छा-भला क्यों न खा लें, आपके पेट में गैस बनने, एसिडिटी होने, खट्टी डकारें आने और बार-बार पेट खराब होने जैसी प्रॉब्लम्स होने लगती हैं. अगर बिना किसी साफ वजह के आपका पेट अक्सर खराब रहता है, तो इसकी असली वजह आपका मेंटल स्ट्रेस हो सकता है. बात-बात पर चिढ़ जाना और काम में मन न लगना स्ट्रेस सिर्फ हमारे शरीर को ही नहीं, बल्कि हमारे मूड और बिहेवियर को भी पूरी तरह से बदल देने की काबिलियत रखता है. अगर आपको छोटी से छोटी बातों पर भी गुस्सा आने लगा है, चिड़चिड़ापन महसूस होता रहता है या फिर किसी भी काम में फोकस करने में परेशानी हो रही है, तो यह सीधे तौर पर बढ़ते स्ट्रेस का संकेत है. जब हमारा दिमाग बहुत ही ज्यादा थक जाता है, तो उसके सोचने-समझने और फोकस करने की कैपिसिटी कमजोर हो जाती है. स्ट्रेस की वजह से आसान से आसान काम भी बहुत मुश्किल लगने लगते हैं. हर वक्त थका-थका और लो-एनर्जी महसूस करना अगर आप अपनी नींद भी पूरी कर रहे हैं और खाना भी बिल्कुल सही से खा रहे हैं, फिर भी आपको पूरे दिन थकावट महसूस होती रहती है, तो इसकी सबसे बड़ी वजह स्ट्रेस भी हो सकता है. जब हम मेंटली परेशान रहते हैं, तो हमारे शरीर की एनर्जी बहुत ही तेजी से खत्म होने लग जाती है. मेंटली थके होने की वजह से शरीर ढीला पड़ने लगता है और किसी भी काम को करने में हमारा मन नहीं लगता है. बहुत ज्यादा स्ट्रेस की वजह से हमें हर समय लेटे रहने की इच्छा होती रहती है. स्ट्रेस दूर करने के लिए क्या करें? अगर आप स्ट्रेस से बाहर निकलना चाहते हैं तो इन शुरुआती संकेतों को जरूर समझ लेना चाहिए. अगर आपको अपने शरीर में इनमें से कोई भी संकेत दिखाई दे रहा है, तो थोड़ी देर रुककर आपको खुद पर ध्यान देना चाहिए. स्ट्रेस लेवल्स को कम करने के लिए हर सुबह थोड़ी देर टहलने के लिए जाएं, लाइट एक्सरसाइज या फिर योगा करें, अपने फेवरेट गाने सुनें या फिर वो काम करें जो आपको करना अच्छा लगता है. स्ट्रेस को कम करने के लिए सबसे जरूरी यह भी है कि आप अपने दिल की बातों को किसी दोस्त, भाई-बहन या फिर अपने माता-पिता के साथ शेयर करें. जब आप अपने दिल की बातों को दबाकर रखते हैं तो इससे आपका स्ट्रेस बढ़ता है. ये भी पढ़ें: रात में बार-बार टूटती है नींद? सोने से पहले बदलें ये 5 आदतें, आएगी घोड़े बेचकर नींद The post छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा और रात में नहीं आती नींद? स्ट्रेस के इन 5 संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज appeared first on Naya Vichar.

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बांकीपुर उपचुनाव: EVM लेकर बूथों के लिए रवाना हुईं पोलिंग पार्टियां, कल होगी वोटिंग, पैरामिलिट्री की 14 कंपनियां तैनात

Bankipur By Election: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए बुधवार, 30 जुलाई को मतदान होगा. इससे पहले मंगलवार को चुनावकर्मियों को EVM और अन्य चुनावी सामग्री सौंप दी गई. पोलिंग पार्टियां अपने-अपने मतदान केंद्रों के लिए रवाना हो गई हैं. प्रशासन ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है. EVM और VVPAT लेकर बूथों के लिए रवाना हुए चुनावकर्मी पटना के बांकीपुर गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल से चुनावकर्मियों ने EVM, कंट्रोल यूनिट और VVPAT समेत पूरा चुनावी सेट प्राप्त किया. नया विचार की पत्रकार रिया से बातचीत में चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने बताया कि सामग्री लेने के बाद वे गांधी मैदान जाएंगे. वहां से प्रशासन की ओर से वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों के साथ सभी अपने-अपने मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगे. गुरुवार सुबह तय समय पर मतदान शुरू होगा. 3.79 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे मतदान बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार 3,79,616 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. इनमें शामिल हैं: पुरुष मतदाता: 2,00,060 स्त्री मतदाता: 1,79,533 थर्ड जेंडर मतदाता: 23 422 मतदान केंद्र, 29 मोबाइल बूथ भी तैयार मतदान के लिए कुल 422 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. इसमें 247 मतदान केंद्र प्रशासनी भवनों में वहीं 175 मतदान केंद्र निजी भवनों में बनाए गए हैं. इसके अलावा मतदाताओं की सुविधा के लिए 29 मोबाइल मतदान केंद्र भी बनाए गए हैं. 25 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान 40 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया था. जांच के बाद 26 नामांकन वैध पाए गए. बाद में एक उम्मीदवार ने नाम वापस ले लिया. अब चुनाव मैदान में 25 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. सुरक्षा के लिए 14 कंपनियां पैरामिलिट्री फोर्स की तैनात शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. बांकीपुर में पैरामिलिट्री फोर्स की 14 कंपनियां तैनात की गई हैं. इसके अलावा पूरे क्षेत्र में 28 विशेष चेकिंग प्वाइंट बनाए गए हैं. यहां हर छोटे-बड़े वाहन की जांच की जा रही है. आईजी ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश पटना आईजी जितेंद्र राणा ने सभी डीएसपी, सर्किल इंस्पेक्टर और थानाध्यक्षों को लगातार गश्त करने और आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है. संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है. हर बूथ पर रहेगा केंद्रीय सशस्त्र बल पुलिस प्रेक्षक राकेश अग्रवाल ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराएंगे. उन्होंने बताया कि सभी 422 मतदान केंद्रों पर केंद्रीय सशस्त्र बल तैनात रहेंगे. इसके साथ ही जिला पुलिस लगातार फ्लैग मार्च और निगरानी करेगी. 3 अगस्त को आएंगे नतीजे 30 जुलाई को मतदान पूरा होने के बाद 3 अगस्त को मतों की गिनती होगी. उसी दिन यह तय हो जाएगा कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनता ने किस उम्मीदवार पर भरोसा जताया है. Also Read: बिहार स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट: ‘मैं रूस में हूं, प्रदर्शन में शामिल नहीं था’… फिर FIR में मेरा नाम कैसे आया? छात्र ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल The post बांकीपुर उपचुनाव: EVM लेकर बूथों के लिए रवाना हुईं पोलिंग पार्टियां, कल होगी वोटिंग, पैरामिलिट्री की 14 कंपनियां तैनात appeared first on Naya Vichar.

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बीरभूम में बालू माफिया के करीबी मोनिर के घर छापा, 15 किलो सोना और 5.5 करोड़ कैश जब्त, देखें तस्वीरें

मुकेश तिवारी और संतोष विश्वकर्मा की रिपोर्ट पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में बालू माफिया के ठिकानों पर छापेमारी कर पुलिस ने 15 किलो सोना और 5.5 करोड़ रुपए नकद जब्त किये हैं. बुधवार तड़के मोहम्मद बाजार थाना क्षेत्र के देउचा बस स्टैंड के पास चर्चित पत्थर कारोबारी टुलू मंडल के करीबी और रिश्तेदार मोनिर मंडल के आलीशान घर पर पुलिस ने रेड की. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस कार्रवाई के लिए सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर पुलिस को शाबाशी दी है. मोनिर मंडल और टुलू मंडल. 22 करोड़ रुपए और 20 करोड़ कैश मिलने का दावा दावा यह भी किया जा रहा है कि छापेमारी में करीब 22 करोड़ रुपए मूल्य का सोना मिला है. 20 करोड़ से अधिक नकदी की भी बात कही जा रही है. हालांकि, पुलिस की ओर से ऑफिशियल जानकारी नहीं दी गयी है. पुलिस की जांच जारी है. वह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकदी और सोना किसका है. ये भी पढ़ें: The post बीरभूम में बालू माफिया के करीबी मोनिर के घर छापा, 15 किलो सोना और 5.5 करोड़ कैश जब्त, देखें तस्वीरें appeared first on Naya Vichar.

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Tata Punch EV ने क्रैश टेस्ट में मचाया धमाल, भारत-NCAP से मिली 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग

हिंदुस्तानीय ऑटोमोबाइल मार्केट में इलेक्ट्रिक कारों के शौकीन लोगों के लिए बड़ी खुशसमाचारी निकलकर सामने आई है. हाल ही में आयोजित हुए इंडियन न्यू कार असेस्मेंट प्रोग्राम क्रैश टेस्ट में टाटा मोटर्स ने जलवा बिखेरा है. कंपनी की इलेक्ट्रिक कार Tata Punch EV Facelift ने लाजवाब परफॉर्मेंस देते हुए एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन (AOP) और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन (COP) कैटेगरी में 5-स्टार रेटिंग प्राप्त की है. इस उपलब्धि के बाद टाटा ने एक बार फिर से यह प्रूव कर दिया है कि वह देश के ग्राहकों के लिए दमदार और सेफ गाड़ियां बनाने के मामले में सबसे आगे क्यों है. टाटा पंच ईवी फेसलिफ्ट की स्टार्टिंग एक्स शोरूम प्राइस 9.69 लाख रुपये है. इसका मतलब 10 लाख के अंदर ही 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग वाली कार आपको मिलेगी. टाटा पंच ईवी ने क्रैश टेस्ट में दिखाया दम  हिंदुस्तान NCAP द्वारा सेकंड टाइम टेस्ट की गई टाटा पंच ईवी फेसलिफ्ट AOP में 32 में से 31.09 पॉइंट अंक हासिल किए. इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा के मामले में 49 में से 45 अंक इसे मिले. हालांकि, 2024 मॉडल के कंपैरिजन में एडल्ट प्रोटेक्शन का स्कोर थोड़ा कम हुआ है, लेकिन इसके बावजूद 5-स्टार रेटिंग बनाए रखा है. चाइल्ड सेफ्टी के मामले में इस कार ने फ्री-फेसलिफ्ट के जैसा ही बेहतरीन परफॉर्मेंस किया है. इस चैलेंज में पंच ईवी को 49 में से 45 अंक मिले, जिसमें पीछे वाली सीटों पर बैठने वाले शिशु पूरी तरह से हर टेस्ट में सेफ रहे. इसमें ISOFIX चाइल्ड सीट एंकर मिलता है, जो सेफ्टी में बड़ा रोल निभाता है. मजबूत प्लेटफॉर्म पर तैयार टाटा पंच ईवी  कंपनी ने इस टाटा पंच ईवी को सबसे स्ट्रॉंग प्लेटफॉर्म पर बनाया है, जो टक्कर लगने के बाद भी इसमें बैठने वाले पैसेंजर्स को सुरक्षित रखता है. इस इलेक्ट्रिक कार में 6 स्टैंडर्ड एयरबैग्स, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), इलेक्ट्रॉनिक स्टैबिलिटी कंट्रोल (ESC), 360 डिग्री कैमरा, रियर पार्किंग सेंसर और ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटर जैसे शानदार सेफ्टी फीचर्स मिलते हैं.  टाटा पंच ईवी की बैटरी और रेंज कैसा है? टाटा पंच ईवी को कंपनी द्वारा मीडियम और लॉंग रेंज जैसे दो अलग-अलग (30kWh और 40kWh) बैटरी पैक का ऑप्शन देती है. 40kWh बैटरी फुल चार्ज होने पर इस कार को 468 किलोमीटर तक लेकर जा सकती है, जबकि 30kWh बैटरी पैक एक बार चार्ज होने पर 365 किलोमीटर की यात्रा आपको करवा सकती है. यह इलेक्ट्रिक कार 87-127 bhp की ताकत और 190 nm पीक टॉर्क जेनरेट करता है. इसकी खासियत एक यह भी है कि सिर्फ 9 सेकंड में टाटा पंच ईवी 0 से 100 kmph की रफ्तार पकड़ सकती है. इसमें मिलने वाला DC चार्जर 26 मिनट में बैटरी को 0-80 पर्सेंट चार्ज करता है, जबकि 15 मिनट तक चार्ज करने के बाद इस कार को 125 KM ड्राइव किया जा सकता है. टाटा पंच ईवी में क्या फीचर्स मिलते हैं? इस ईवी में आपको मॉडर्न फीचर्स देखने को मिलेंगे. पंच ईवी में 10.25 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, 10.25 इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, वेंटीलेटेड फ्रंट सीट, वॉइस असिस्टेड पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस चार्जर, एयर प्यूरीफायर, 195 mm ग्राउंड क्लियरेंस, 366 लीटर बूटस्पेस, अट्रैक्टिव कलर्स ऑप्शन और एलईडी लाइट्स मिलेंगे. ये भी पढ़ें: लॉन्च से पहले ही रिवील हुए Mahindra Scoropio N Facelift के फीचर्स, जानें क्या-क्या मिलेगा नया The post Tata Punch EV ने क्रैश टेस्ट में मचाया धमाल, हिंदुस्तान-NCAP से मिली 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग appeared first on Naya Vichar.

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Gen Z Special: Idea of Shiva ही है भारत की सबसे पुरानी कल्चरल यूनिटी का आधार

India को सबसे पहले किसने जोडा? यह सवाल सुनते ही हमारे दिमाग में कुछ नाम आते हैं. चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, अकबर या फिर सरदार पटेल. इतिहास की किताबों ने हमें यही सिखाया है कि देश राजाओं, युद्धों और सीमाओं से बनते हैं. लेकिन अगर हम प्राचीन हिंदुस्तान को उसकी अपनी नजर से देखें, तो तस्वीर कुछ और दिखाई देती है. प्राचीन हिंदुस्तान की सबसे बडी पहचान कोई साम्राज्य नहीं था. न कोई राजधानी, न कोई राजा और न ही कोई स्थायी सीमा. एक राजा जाता था, दूसरा आ जाता था. साम्राज्य बनते थे, बिखर जाते थे. लेकिन एक चीज थी, जो हजारों वर्षों तक नहीं बदली. वह थी इस भूमि की साझा सांस्कृतिक चेतना. एक ऐसी चेतना, जिसने अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले, अलग-अलग भोजन करने वाले और अलग-अलग परंपराओं में जीने वाले लोगों को एक अदृश्य सूत्र में बांध दिया. अगर उस सूत्र का कोई सबसे सशक्त प्रतीक खोजा जाए, तो वह शायद भगवान शिव हैं. शिव केवल एक देवता नहीं हैं. वह एक विचार हैं. वह हिंदुस्तान की सांस्कृतिक स्मृति हैं. वह हिमालय की बर्फ में भी हैं, काशी की गलियों में भी. वह समुद्र किनारे बसे सोमनाथ में भी हैं और दक्षिण के रामेश्वरम में भी. वह जंगल के आदिवासी के भी भगवान हैं और वेद पढने वाले ऋषि के भी. यही कारण है कि शिव का विस्तार किसी एक क्षेत्र, भाषा या समुदाय तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने पूरे हिंदुस्तानीय भूगोल को एक जीवित आध्यात्मिक मानचित्र में बदल दिया. कल सावन का महीना शुरू होने वाला है. लाखों लोग शिव मंदिरों में जल चढाएंगे. कांवड यात्रा निकलेगी. हर हर महादेव की गूंज गांव से लेकर महानगर तक सुनाई देगी. लेकिन क्या हमने कभी रुककर यह सोचा कि आखिर शिव ही क्यों? हिंदुस्तान के सांस्कृतिक मानस में ऐसा क्या है कि हजारों वर्षों बाद भी सावन आते ही पूरा देश जैसे एक ही भाव में बहने लगता है? इस सवाल का जवाब केवल धर्म में नहीं, बल्कि दर्शन, भूगोल, समाज और मनोविज्ञान में छिपा है. जब दर्शन नक्शे पर उतर आया पुराणों में एक प्रसिद्ध कथा आती है. एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच यह विवाद छिड गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है. तभी अचानक उनके सामने अग्नि का एक अनंत स्तंभ प्रकट हुआ. वह इतना विशाल था कि उसका न आदि दिखाई देता था और न अंत. ब्रह्मा ऊपर की ओर चले कि शायद उसका सिरा मिल जाए. विष्णु नीचे की ओर गए कि शायद उसका आधार मिल जाए. दोनों लौट आए, लेकिन किसी को उसका अंत नहीं मिला. तब उन्हें समझ आया कि यह अग्नि स्तंभ स्वयं शिव हैं, जो अनंत हैं, असीम हैं और किसी सीमा में बंध नहीं सकते. अगर इस कथा को केवल चमत्कार समझकर पढेंगे, तो उसका आधा अर्थ ही समझ पाएंगे. असल में यह कहानी हमें एक बहुत गहरी बात बताती है. मनुष्य हर चीज को मापना चाहता है. वह हर सत्य की सीमा तय करना चाहता है. लेकिन जीवन का अंतिम सत्य सीमाओं से परे है. उपनिषद इसे “ब्रह्म” कहते हैं. वही अनंत चेतना, जिसका न आरंभ है और न अंत. शिव उसी अनंत का प्रतीक बन जाते हैं. यही कारण है कि शिव की पूजा किसी मानव आकृति से अधिक लिंग के रूप में होती है. लिंग यहां किसी व्यक्ति का चित्र नहीं, बल्कि उस अनंत चेतना का प्रतीक है, जिसे पूरी तरह देखा या बांधा नहीं जा सकता. यहीं से ज्योतिर्लिंग की अवधारणा जन्म लेती है. बारह ज्योतिर्लिंग क्यों? अगर शिव अनंत हैं, तो फिर उन्हें बारह स्थानों पर क्यों स्थापित किया गया? यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है. हमारे पूर्वज केवल मंदिर नहीं बना रहे थे. वे एक सभ्यता का नक्शा तैयार कर रहे थे. सोचिए… पश्चिम में सोमनाथ. उत्तर में केदारनाथ. मध्य हिंदुस्तान में महाकाल. पूर्व में वैद्यनाथ. दक्षिण में रामेश्वरम. इन मंदिरों को अगर हिंदुस्तान के नक्शे पर देखें, तो वे किसी संयोग से नहीं बने दिखाई देते. वे पूरे उपमहाद्वीप को एक सांस्कृतिक वृत्त में बांध देते हैं. आज हम कहते हैं कि देश सडकों, रेल और इंटरनेट से जुडता है. लेकिन हजारों साल पहले हिंदुस्तान तीर्थयात्राओं से जुडता था. तमिलनाडु का श्रद्धालु केदारनाथ जाता था. काशी का साधु सोमनाथ पहुंचता था. गुजरात का व्यापारी रामेश्वरम जाता था. महाराष्ट्र का संत श्रीशैलम की यात्रा करता था. इन यात्राओं ने केवल लोगों को मंदिरों तक नहीं पहुंचाया. उन्होंने लोगों को एक-दूसरे तक पहुंचाया. यही हिंदुस्तान का सबसे पुराना सांस्कृतिक नेटवर्क था. मंदिर केवल पूजा की जगह नहीं थे आज जब हम किसी मंदिर में जाते हैं, तो अक्सर उसे केवल पूजा का स्थान मानते हैं. लेकिन प्राचीन हिंदुस्तान में मंदिर उससे कहीं अधिक थे. वे विश्वविद्यालय थे. वे कला केंद्र थे. वे संगीत के विद्यालय थे. वे समाज को जोडने वाले सार्वजनिक स्थल थे. वे यात्रियों के विश्राम स्थल थे. वे व्यापारिक मार्गों के केंद्र थे. और सबसे महत्वपूर्ण… वे दर्शन को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम थे. उपनिषदों का दर्शन हर व्यक्ति नहीं पढ सकता था. लेकिन हर व्यक्ति मंदिर जा सकता था. हर व्यक्ति कथा सुन सकता था. हर व्यक्ति जल चढा सकता था. हर व्यक्ति ॐ नमः शिवाय बोल सकता था. यही हिंदुस्तानीय सभ्यता की सबसे बडी ताकत थी. उसने सबसे गहरे दर्शन को सबसे सरल अनुभव में बदल दिया. ज्ञान केवल ग्रंथों में नहीं रहा. वह यात्रा बन गया. वह पर्व बन गया. वह मंदिर बन गया. वह लोकगीत बन गया. और धीरे-धीरे वह लोगों के जीवन का हिस्सा बन गया. जब मंदिर, हिंदुस्तान की पहली यूनिवर्सिटी बने बारह ज्योतिर्लिंगों को केवल बारह मंदिर मान लेना, शायद उनकी सबसे छोटी पहचान है. असल में वे बारह अलग-अलग जीवन दर्शन हैं. हिंदुस्तान के प्राचीन मनीषियों ने दर्शन को केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने उसे धरती पर उतार दिया. पहाड़, नदियां, जंगल, समुद्र और नगर, सबको आध्यात्मिक अर्थ दे दिया. यही कारण है कि हिंदुस्तान में तीर्थ केवल किसी भवन का नाम नहीं है, बल्कि एक पूरी यात्रा का नाम है. आज हम किसी जगह तक पहुंचने के लिए गूगल मैप खोलते हैं. लेकिन हजारों साल पहले हिंदुस्तान का नक्शा तीर्थयात्राओं ने बनाया था. एक यात्री जब अपने गांव से निकलता था, तो वह केवल मंदिर देखने

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क्या रोबोट कर सकते हैं जासूसी? अमेरिका ने स्मार्ट डिवाइसेज पर कड़े किये नियम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट डिवाइस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को लेकर भी नई चिंताएं सामने आ रही हैं. इसी बीच अमेरिका ने विदेशी निर्मित रोबोट और सोलर पावर इन्वर्टर को लेकर बड़ा कदम उठाया है. ट्रंप प्रशासन ने ऐसे नए डिवाइसों की एंट्री पर रोक लगाने का फैसला किया है, जब तक कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच में सुरक्षित साबित न हो जाएं. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इंटरनेट से जुड़े ये उपकरण संवेदनशील जानकारी जुटाने, साइबर हमलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. किन डिवाइसों पर लागू होगा नया नियम? ‘द स्टेट्समैन’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने विदेशी निर्मित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले एडवांस रोबोट और पावर इन्वर्टर को अपनी “Covered List” में शामिल कर लिया है. इसके बाद इन श्रेणी के नए मॉडल तब तक अमेरिकी बाजार में आयात, बिक्री या मार्केटिंग के लिए मंजूरी नहीं पा सकेंगे, जब तक उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर विशेष अनुमति नहीं मिल जाती. इस फैसले का दायरा मोबाइल रोबोट, ह्यूमनॉइड रोबोट, चार पैरों वाले रोबोट और ऐसे पावर इन्वर्टर तक फैला है, जो सोलर सिस्टम और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं को बिजली ग्रिड से जोड़ते हैं और जिनमें रिमोट कनेक्टिविटी मौजूद होती है. अमेरिका को क्यों है जासूसी और साइबर हमलों का डर? अमेरिकी एजेंसियों की समीक्षा में यह आशंका जताई गई है कि इंटरनेट से जुड़े रोबोट और स्मार्ट इन्वर्टर साइबर हमलों का जरिया बन सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे डिवाइस दूर से नियंत्रित किए जा सकते हैं, उनसे डेटा एकत्र किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर बिजली नेटवर्क को भी प्रभावित किया जा सकता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एडवांस रोबोट अपने आसपास के माहौल और लोगों से जुड़ा काफी डेटा इकट्ठा करते हैं. अगर यह जानकारी गलत हाथों में पहुंचती है तो इसका इस्तेमाल निगरानी, विदेशी खुफिया गतिविधियों या रोबोट को दूर से नियंत्रित करने जैसी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. पहले खरीदे गए डिवाइस पर नहीं पड़ेगा असर FCC ने साफ किया है कि यह फैसला केवल नए मॉडल पर लागू होगा. जिन रोबोट और इन्वर्टर को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है या जिन्हें उपभोक्ता पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं, उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. यानी मौजूदा ग्राहकों को अपने डिवाइस बदलने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही जिन उत्पादों को पहले FCC की मंजूरी मिल चुकी है, उनकी बिक्री भी जारी रह सकेगी. कंपनियों के पास रहेगी मंजूरी लेने की सुविधा विदेशी कंपनियां पूरी तरह से अमेरिकी बाजार से बाहर नहीं होंगी. यदि कोई निर्माता यह साबित कर देता है कि उसका उत्पाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, तो वह विशेष छूट के लिए आवेदन कर सकता है. संबंधित अमेरिकी एजेंसियां सुरक्षा जांच के बाद ऐसे उत्पादों को सशर्त मंजूरी दे सकती हैं. मंजूरी मिलने पर संबंधित डिवाइस को Covered List से बाहर रखा जा सकेगा और उसे FCC की स्वीकृति मिल सकती है. तकनीकी सप्लाई चेन पर बढ़ी अमेरिकी निगरानी यह फैसला केवल टेलीकॉम उपकरणों तक सीमित नहीं है. अमेरिका अब ऐसे सभी स्मार्ट और नेटवर्क से जुड़े उपकरणों पर नजर रख रहा है, जो डेटा एकत्र करने, रिमोट ऐक्सेस देने या महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हों. माना जा रहा है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर तकनीकी उत्पादों की जांच और भी सख्त हो सकती है. ये भी पढ़ें: किशोर ने खुद को नुकसान पहुंचाने की बात की, तो पैरेंट्स को अलर्ट करेगा मेटा एआई का नया फीचर The post क्या रोबोट कर सकते हैं जासूसी? अमेरिका ने स्मार्ट डिवाइसेज पर कड़े किये नियम appeared first on Naya Vichar.

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