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दिल्ली में PM मोदी से मिले विजय सिन्हा, भेंट की राम की मूर्ति, बिहार के मुद्दों पर हुई खास चर्चा

Vijay Sinha: बिहार प्रशासन के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है. इस दौरान उन्होंने पीएम को राम की मूर्ति भेंट की. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और विजय सिन्हा के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई. जिसमें बिहार की मौजूदा नेतृत्वक स्थिति, संगठनात्मक समीकरण और कई समसामयिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. बिहार की नेतृत्व और भविष्य की भूमिका पर चर्चा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विजय सिन्हा ने बिहार के मौजूदा नेतृत्वक हालात को लेकर अपनी बात प्रधानमंत्री के सामने रखी. इसके साथ ही आगे की नेतृत्वक भूमिका और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है. हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. डिप्टी सीएम से कृषि मंत्री तक का सफर नीतीश कुमार प्रशासन में विजय कुमार सिन्हा को बीजेपी कोटे से डिप्टी सीएम बनाया गया था. उस समय बीजेपी के दो उपमुख्यमंत्री थे. लेकिन बाद में सत्ता संतुलन और सहयोगी दलों के बीच नए नेतृत्वक समीकरण बनने के बाद दोनों डिप्टी सीएम पद जेडीयू के खाते में चले गए. इसके बाद विजय सिन्हा को कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई. नेतृत्वक गलियारों में अक्सर यह चर्चा होती रही है कि विजय सिन्हा का नेतृत्वक कद और अनुभव बीजेपी के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहा है. कई मौकों पर उनके बयान और हावभाव में यह संकेत भी देखने को मिला कि वह खुद को बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार मानते हैं. ‘कमांडर का आदेश सर्वोपरि’ जब सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया था तब विजय सिन्हा ने पार्टी नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि हम अपने कमांडर के आदेश का पालन करते हैं. जो जिम्मेदारी मिलेगी, कमांडर का जो आदेश होगा, उसे हम पूरा करेंगे. उनके इस बयान को भी अब नेतृत्वक संकेतों के तौर पर देखा जा रहा है. ‘अब सिर्फ विजय सिन्हा नहीं, विजय बिहारी हूं’ कुछ दिनों पहले मुजफ्फरपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ये भी कहा था कि विभाग बदल जाने से उनका काम और सोच नहीं बदली है. उन्होंने मंच से कहा कि अब सिर्फ विजय सिन्हा नहीं, विजय बिहारी हूं. पूरे बिहार के लोगों की चिंता है और उनकी जमीन सुरक्षित रखने का संकल्प आज भी कायम है. बीजेपी के भीतर विजय सिन्हा को ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिनकी संगठन और प्रशासन दोनों में मजबूत पकड़ है. विजय सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष से लेकर डिप्टी सीएम तक की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. Also Read: ‘शाम में घर आइए, एक-एक चीज बताइए…’ गाड़ी रुकवाकर विजय चौधरी से बोले नीतीश, JDU ऑफिस पहुंचे तो गायब मिले मंत्री The post दिल्ली में PM मोदी से मिले विजय सिन्हा, भेंट की राम की मूर्ति, बिहार के मुद्दों पर हुई खास चर्चा appeared first on Naya Vichar.

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1 साल की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी; लेकिन इन 3 गलतियों पर कंपनी रोक सकती है पैसा

New Gratuity Rules Labor Code : निजी क्षेत्र (Private Sector) में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी को लेकर एक बहुत बड़ी और अच्छी समाचार है. प्रशासन ने नए लेबर कोड (New Labour Codes) के जरिए ग्रेच्युटी के पुराने नियमों को पूरी तरह बदल दिया है. नए नियमों ने जहां एक तरफ कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ दफ्तर में अनुशासन को लेकर नियमों को काफी सख्त भी कर दिया है. आइए आसान भाषा में समझते हैं ग्रेच्युटी का यह नया गणित, कर्मचारियों को होने वाले फायदे और वे खतरे जिनसे आपकी गाढ़ी कमाई डूब सकती है. अब 5 साल का इंतजार खत्म: 1 साल में ही ग्रेच्युटी पक्की! पुराने नियमों के मुताबिक, किसी भी कंपनी में लगातार 5 साल तक काम करने के बाद ही कोई कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार बनता था. लेकिन नए लेबर कोड ने ‘फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों’ (Fixed-Term Employees – जो कॉन्ट्रैक्ट या निश्चित अवधि के लिए काम करते हैं) के लिए यह पाबंदी खत्म कर दी है. अब कॉन्ट्रैक्ट (FTE) पर काम करने वाले कर्मचारी सिर्फ 1 साल की नौकरी के बाद भी ग्रेच्युटी के हकदार होंगे. नए नियमों के तहत किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी (मूल वेतन) और महंगाई भत्ता (DA) उसकी कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होना अनिवार्य है. पहले कंपनियां भत्तों (Allowances) को बढ़ाकर बेसिक सैलरी कम रखती थीं जिससे ग्रेच्युटी कम बनती थी, लेकिन अब बेसिक सैलरी बढ़ते ही ग्रेच्युटी की रकम भी अपने आप मोटी हो जाएगी. इन 3 मामलों में कंपनी ‘हड़प’ सकती है आपकी ग्रेच्युटी ग्रेच्युटी भले ही आपका कानूनी अधिकार है, लेकिन अगर आपका रिकॉर्ड खराब होता है, तो कंपनी को आपका पैसा रोकने का पूरा अधिकार है. कंपनी इन परिस्थितियों में आपकी ग्रेच्युटी पर ताला लगा सकती है. चोरी या धोखाधड़ी (Fraud): यदि कोई कर्मचारी कंपनी में वित्तीय हेराफेरी, रिश्वतखोरी या फर्जी कागजात (फ्रॉड) के जरिए कंपनी को चूना लगाते हुए पकड़ा जाता है. बदतमीजी और अनुशासनहीनता: ऑफिस में किसी के साथ मारपीट करना, स्त्री कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करना या दफ्तर के नियमों को पूरी तरह ताक पर रखना भारी पड़ सकता है. आरोप साबित होने पर कंपनी 100% ग्रेच्युटी काट सकती है. कंपनी को नुकसान पहुंचाना: यदि कर्मचारी की किसी लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती से कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान होता है, तो कंपनी उस नुकसान की भरपाई कर्मचारी की ग्रेच्युटी के पैसे से कर सकती है. नुकसान की रकम काटने के बाद यदि कुछ बचेगा, तभी कर्मचारी को मिलेगा. क्या बॉस अपनी मर्जी से पैसा रोक सकता है? जी नहीं, यह इतना भी आसान नहीं है. अगर कोई कंपनी किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी रोकना चाहती है, तो उसे बाकायदा कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा. कंपनी को ठोस सबूत पेश करने होंगे और कर्मचारी को अपनी सफाई देने का पूरा मौका देना होगा. अगर आरोप झूठे निकलते हैं, तो कंपनी को देरी की अवधि का भारी ब्याज भी चुकाना पड़ेगा. Also Read : केंद्रीय कर्मचारियों को लग सकता है लाखों का फटका, वेतन आयोग में देरी से HRA और भत्तों के एरियर पर मंडराया खतरा The post 1 साल की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी; लेकिन इन 3 गलतियों पर कंपनी रोक सकती है पैसा appeared first on Naya Vichar.

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Google Search में AI से परेशान हुए लोग, अब DuckDuckGo बना नया सहारा

गूगल पिछले कुछ समय से अपने सर्च प्लैटफॉर्म में लगातार AI फीचर्स जोड़ रहा है. लेकिन अब यही बदलाव कई यूजर्स को परेशान करने लगा है. बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जो बिना AI वाले पुराने और सीधे-सादे सर्च अनुभव को पसंद करते हैं. इसी वजह से अब प्राइवेसी-फोकस्ड सर्च इंजन DuckDuckGo को बड़ा फायदा मिलता दिख रहा है. हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, गूगल के नए AI अपडेट्स के बाद DuckDuckGo के डाउनलोड और ट्रैफिक में अचानक तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. Google I/O के बाद अचानक बढ़ी DuckDuckGo की लोकप्रियता रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल के बड़े AI ऐलानों के बाद अमेरिका में DuckDuckGo मोबाइल ऐप इंस्टॉल्स में औसतन 18 प्रतिशत से ज्यादा की साप्ताहिक बढ़ोतरी देखने को मिली. खास बात यह रही कि iPhone यूजर्स के बीच इसकी ग्रोथ और भी ज्यादा रही. कुछ दिनों में ऐप डाउनलोड लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़ गए. इतना ही नहीं, DuckDuckGo के उस खास सर्च पेज पर भी ट्रैफिक तेजी से बढ़ा जहां AI फीचर्स पूरी तरह बंद रहते हैं. यह साफ संकेत है कि इंटरनेट पर अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे यूजर्स मौजूद हैं जो AI-जेनरेटेड जवाबों की बजाय सामान्य सर्च रिजल्ट देखना चाहते हैं. यूजर्स को क्यों पसंद आ रहा AI-Free सर्च? कई यूजर्स का मानना है कि AI आधारित सर्च रिजल्ट्स कई बार जरूरत से ज्यादा जानकारी देते हैं या असली वेबसाइट्स तक पहुंचने का अनुभव खराब कर देते हैं. कुछ लोगों को यह भी लगता है कि AI फीचर्स अब जबरदस्ती थोपे जा रहे हैं और उन्हें बंद करने का आसान विकल्प नहीं मिलता. DuckDuckGo ने इसी मुद्दे को अपनी ताकत बना लिया है. कंपनी लगातार यह कह रही है कि उसके यहां यूजर्स तय कर सकते हैं कि उन्हें AI चाहिए या नहीं. यानी अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह AI-Free सर्च चाहता है तो उसे वह विकल्प आसानी से मिल जाता है. प्राइवेसी भी बनी बड़ी वजह DuckDuckGo पहले से ही प्राइवेसी-केंद्रित सर्च इंजन के तौर पर जाना जाता है. कंपनी दावा करती है कि वह यूजर्स की सर्च हिस्ट्री स्टोर नहीं करती और न ही चैट या डेटा को AI ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल करती है. आज जब AI और डेटा कलेक्शन को लेकर लोगों की चिंता बढ़ रही है, तब यह मॉडल कई यूजर्स को आकर्षित कर रहा है. खासकर वे लोग जो अपनी ऑनलाइन एक्टिविटी को ज्यादा निजी रखना चाहते हैं, अब गूगल के विकल्प तलाश रहे हैं. DuckDuckGo ने AI को पूरी तरह नहीं हटाया दिलचस्प बात यह है कि DuckDuckGo खुद भी AI फीचर्स ऑफर करता है. कंपनी के पास AI आधारित Search Assist और Duck.AI जैसे टूल मौजूद हैं. लेकिन फर्क यह है कि यहां AI फीचर्स ऑप्शनल रखे गए हैं. कंपनी ने ऐसे फीचर्स भी लॉन्च किए हैं जो सर्च रिजल्ट्स से AI जनरेटेड इमेजेज को फिल्टर कर सकते हैं. यानी यूजर के पास ज्यादा कंट्रोल रहता है कि वह इंटरनेट को किस तरीके से इस्तेमाल करना चाहता है. क्या AI सर्च के खिलाफ बढ़ रही नयी बहस? AI अब टेक इंडस्ट्री का सबसे बड़ा ट्रेंड बन चुका है. गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और दूसरी बड़ी कंपनियां अपने प्लैटफॉर्म्स में तेजी से AI जोड़ रही हैं. लेकिन अब इसके खिलाफ एक अलग तरह की प्रतिक्रिया भी दिखने लगी है. कुछ यूजर्स चाहते हैं कि इंटरनेट पहले जैसा आसान और कंट्रोल्ड रहे, जहां वे खुद तय करें कि उन्हें AI की मदद चाहिए या नहीं. DuckDuckGo की बढ़ती लोकप्रियता इसी बदलती सोच का संकेत मानी जा रही है. गूगल का नया एआई एजेंट बनेगा आपकी डिजिटल लाइफ का 24/7 मैनेजर The post Google Search में AI से परेशान हुए लोग, अब DuckDuckGo बना नया सहारा appeared first on Naya Vichar.

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सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ायी अभिषेक बनर्जी की टेंशन, भवानीपुर थाने में केस दर्ज, दीदी के बाद मुश्किल में ‘भाईपो’!

खास बातें डायमंड हार्बर के सांसद पर पहले से दर्ज है एक प्राथमिकी भवानीपुर में अर्नब कांति ने खोला मोर्चा पुलिस ने शिकायत के आधार पर शुरू की जांच बिधाननगर का ‘आधी रात’ वाला बयान लालबाजार मुख्यालय की पैनी नजर अगला कदम क्या होगा? Complaint Against Abhishek Banerjee: पश्चिम बंगाल की नेतृत्व के केंद्रबिंदु और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. उनके आवास ‘शांतिनिकेतन’ की सुरक्षा में कटौती और केएमसी के नोटिसों के बीच अब उनके खिलाफ कोलकाता के भवानीपुर थाने में एक शिकायत दर्ज हुई है. डायमंड हार्बर के सांसद पर पहले से दर्ज है एक प्राथमिकी आरोप है कि डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी ‘गैर-जिम्मेदाराना’ पोस्ट की, जिससे राज्य का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है. यह शिकायत ऐसे समय में हुई है, जब वे पहले से ही बिधाननगर में दर्ज एक प्राथमिकी (FIR) का सामना कर रहे हैं. भवानीपुर में अर्नब कांति ने खोला मोर्चा गुरुवार को पुलिस ने इस बात की पुष्टि की कि अर्नब कांति दास नामक व्यक्ति ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लिखित शिकायत की है. शिकायतकर्ता ने 2 मई 2026 को की गयी एक सोशल मीडिया पोस्ट की प्रति पुलिस को सौंपी है. उनका दावा है कि इस पोस्ट की भाषा और इरादा दोनों ही समाज में विभाजन पैदा करने वाले हैं. इसे भी पढ़ें : अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा की बढ़ी मुश्किलें, 2 PAN कार्ड, 2 पिता और 2 देशों की नागरिकता? पुलिस ने शिकायत के आधार पर शुरू की जांच कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शिकायत मिली है. आरोपों की सत्यता जांचने के लिए प्राथमिक तफ्तीश शुरू कर दी गयी है. जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी धाराएं तय की जायेंगी. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बिधाननगर का ‘आधी रात’ वाला बयान अभिषेक बनर्जी के लिए यह दोहरी मार है, क्योंकि उन पर पहले से ही एक गंभीर FIR दर्ज है. बागुईआटी निवासी राजीब प्रशासन ने बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में अभिषेक के खिलाफ केस दर्ज कराया था. आरोप है कि 27 अप्रैल को एक जनसभा में टीएमसी नेता ने हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थकों और नेताओं को खुलेआम चुनौती देते हुए कहा था- देखेंगे कि 4 मई की आधी रात के बाद उन्हें बचाने कौन आता है. पुलिस इस बयान को भड़काऊ भाषण और हिंसा के लिए उकसाने के एंगल से देख रही है. इसे भी पढ़ें : 100 से ज्यादा टीएमसी पार्षदों का इस्तीफा, ममता बनर्जी ने कहा- जो जाना चाहते हैं, जा सकते हैं लालबाजार मुख्यालय की पैनी नजर कोलकाता पुलिस के मुख्यालय लालबाजार से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस इन दोनों शिकायतों को जोड़कर देख रही है. साइबर सेल विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित पोस्ट किस डिवाइस से की गयी और इसका व्यापक असर क्या हुआ. भाजपा ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि टीएमसी नेता हार की बौखलाहट में भाषा की मर्यादा लांघ रहे हैं. टीएमसी का कहना है कि यह पूरी तरह से पॉलिटिकल वेंडेटा यानी नेतृत्वक प्रतिशोध है. इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026 में हार के बाद ‘कॉकरोच’ के सहारे ममता-अभिषेक! वायरल CJP का किया समर्थन Complaint Against Abhishek Banerjee: अगला कदम क्या होगा? कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो पुलिस अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है. बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद जिस तरह से ‘खाकी’ का रुख बदला है, उसने टीएमसी खेमे में खलबली मचा दी है. अब सबकी नजरें पुलिस की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या इस शिकायत को भी FIR में बदला जायेगा. इसे भी पढ़ें क्या खत्म हो जायेगा अभिषेक बनर्जी का नेतृत्वक करियर? पढ़ें पूरा विश्लेषण फालता में ऐतिहासिक हार के बाद अभिषेक बनर्जी ने जहांगीर खान को कहा विश्वासघाती, शुभेंदु अधिकारी बोले- ये तो बस शुरुआत है सत्ता छिनते ही TMC के अस्तित्व पर संकट, जानें क्यों अब ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह है कठिन अंदरूनी कलह और ‘मिड-लेवल’ लीडरशिप की बेरुखी ने डुबोयी TMC की लुटिया! बंगाल में ममता का किला ढहने की इनसाइड स्टोरी The post सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ायी अभिषेक बनर्जी की टेंशन, भवानीपुर थाने में केस दर्ज, दीदी के बाद मुश्किल में ‘भाईपो’! appeared first on Naya Vichar.

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सिद्धारमैया ने राज्यसभा का ऑफर ठुकराया, कहा- मुझे राष्ट्रीय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं

Siddaramaiah ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा- कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने मुझे राज्यसभा सीट की पेशकश की, मैंने विनम्रतापूर्वक इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि मुझे राष्ट्रीय नेतृत्व में कोई दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने आगे कहा- मैं राज्य की नेतृत्व में बना रहूंगा क्योंकि विधायक के रूप में मेरा कार्यकाल अभी दो साल बाकी है. मैं और मेरा परिवार नेतृत्वक द्वेष का शिकार बना : सिद्धारमैया सिद्धारमैया ने कहा, न सिर्फ मैं, बल्कि मेरा परिवार भी नेतृत्वक द्वेष का शिकार बना. मेरे नेतृत्वक विरोधियों ने मेरी पत्नी पर भी झूठे आरोप लगाए. जो नेतृत्व से पूरी तरह दूर रहीं और खुद को सिर्फ परिवार की देखभाल और परवरिश तक ही सीमित रखा और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया. यह सब झेलकर मेरा मन इतना आहत हुआ कि मैंने नेतृत्व से संन्यास लेने का विचार कर लिया था. लेकिन मेरी अंतरात्मा ने मुझे चेताया कि मैं दुश्मनों के हमलों से डरकर मैदान छोड़कर भागने वाला न बनूं, और न ही जनसेवा के मार्ग से पीछे हटूं. मैंने अन्याय के विरुद्ध न्याय की लड़ाई जारी रखी और अपने ऊपर लगे आरोपों के कलंक को मिटाकर खुद को दोषमुक्त किया. Bengaluru: After resigning from the CM post, Siddaramaiah says, “I have given my resignation after a suggestion by the party high command. I have told the party high command that I don’t want to go to the Rajya Sabha. I remain in Karnataka politics till my last breath.” pic.twitter.com/JSxnSMLFuM — ANI (@ANI) May 28, 2026 संविधान के खिलाफ काम करने वालों के खिलाफ लड़ूंगा : सिद्धारमैया सिद्धारमैया ने कहा- मैं संविधान के खिलाफ काम करने वालों के खिलाफ लड़ूंगा. मैं अपनी आखिरी सांस तक सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ूंगा. मैं न कभी पैसे के पीछे भागा और न ही संपत्ति के पीछे : सिद्धारमैया मैं न कभी पैसे के पीछे भागा और न ही संपत्ति बनाने की लालसा रही, मेरा नेतृत्वक जीवन एक खुली किताब की तरह है. उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा- मेरे खिलाफ कई झूठी कहानियां गढ़ी गईं. मैंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया : सिद्धरमैया इस्तीफा सौंपने के बाद सिद्धरमैया ने कहा, मैंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. चूंकि राज्यपाल थावरचंद गहलोत शहर में नहीं हैं, इसलिए मैंने अपना त्यागपत्र उनके विशेष सचिव को सौंप दिया. उन्होंने कहा, मैंने बार-बार कहा था कि जब भी आलाकमान मुझे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को कहेगा, मैं इस्तीफा दे दूंगा. आलाकमान ने मुझे दो दिन पहले पद छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसके अनुसार मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया. उन्होंने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि राज्यपाल संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लेंगे. मुझे दो बार कर्नाटक के लोगों की सेवा करने का मौका मिला, मैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे को धन्यवाद देता हूं. सिद्धारमैया ने आवास पर डीके शिवकुमार और कैबिनेट के साथियों के साथ किया नाश्ता इस्तीफा देने से पहले सिद्धरमैया ने अपने प्रशासनी निवास पर मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ नाश्ता किया था. उसी समय उन्होंने पद छोड़ने के अपने फैसले से अवगत कराया था. यह भी कहा कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देशानुसार उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे. इस दौरान सिद्धारमैया भावुक हुए और शिवकुमार को गले लगा लिया. जिसपर डीके ने उन्हें पैरा छूआ और आशीर्वाद लिया. ये भी पढ़ें: मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते ही भावुक हुए सिद्धारमैया, कहा- आलाकमान ने जो कहा वो किया The post सिद्धारमैया ने राज्यसभा का ऑफर ठुकराया, कहा- मुझे राष्ट्रीय नेतृत्व में कोई दिलचस्पी नहीं appeared first on Naya Vichar.

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नंगे पांव इस्कॉन में शुभेंदु अधिकारी ने की गौ सेवा, संतों के साथ बंगाल के सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर बड़ी बैठक

खास बातें सांस्कृतिक रूप से भी अहम सीएम की यात्रा जब गौशाला में गायों के बीच पहुंचे दादा इस्कॉन के संतों के साथ बंद कमरे में मंथन चप्पे-चप्पे पर पहरा, छावनी में तब्दील मायापुर सॉफ्ट हिंदुत्व या सांस्कृतिक राष्ट्रवाद? CM Suvendu Adhikari Mayapur ISKCON Visit: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को अलग अंदाज में नजर आये. सत्ता की भाग-दौड़ से दूर, नदिया जिले के मायापुर स्थित अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के वैश्विक मुख्यालय पहुंचे. सफेद धोती-कुर्ता पहने और पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे शुभेंदु अधिकारी पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे नंगे पांव मंदिर की गौशाला में दाखिल हुए. इस्कॉन की गौशाला में गौ पूजन करते बंगाल के मुख्यमंत्री. सांस्कृतिक रूप से भी अहम सीएम की यात्रा गौशाला में उन्होंने न केवल गौ पूजा की, बल्कि अपने हाथों से गायों को फल और मिठाइयां भी खिलायीं. मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने इस्कॉन के शीर्ष संतों के साथ बंगाल की आध्यात्मिक विरासत को विश्व पटल पर नयी पहचान दिलाने के रोडमैप पर चर्चा की है. मायापुर के इस्कॉन मंदिर में शुभेंदु अधिकारी ने हवन भी किया. जब गौशाला में गायों के बीच पहुंचे दादा मायापुर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने किसी भी प्रकार के प्रोटोकॉल की औपचारिकता को आड़े नहीं आने दिया. मंदिर परिसर की गौशाला में प्रवेश करते ही मुख्यमंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गौ माता की पूजा की. उन्होंने गायों को केला, सेव और मंदिर का विशेष मिष्ठान्न खिलाया. उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए यह एक दुर्लभ दृश्य था, जब राज्य का मुखिया एक साधारण सेवक की भांति गौशाला में समय बिता रहा था. सीएम ने कुछ समय ध्यान भी लगाया. इसे भी पढ़ें : नबान्न से लोक भवन तक हलचल, राज्यपाल से मिले शुभेंदु अधिकारी, मंत्रिमंडल विस्तार या घुसपैठियों पर एक्शन? इस्कॉन के संतों के साथ बंद कमरे में मंथन गौ पूजा के बाद मुख्यमंत्री ने इस्कॉन मंदिर प्रबंधन और वहां के वरिष्ठ साधु-संतों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में मायापुर को ‘विश्व आध्यात्मिक राजधानी’ के रूप में विकसित करने और बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने इस्कॉन के शिक्षण संस्थानों के कार्यों का जायजा लिया और राज्य प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया. इस मुलाकात को बंगाल में सनातन मूल्यों की पुनर्स्थापना के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें चप्पे-चप्पे पर पहरा, छावनी में तब्दील मायापुर मुख्यमंत्री के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे. पुलिस के आला अधिकारियों ने सुबह से ही कमान संभाल ली थी. मायापुर के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग की गयी थी. मुख्यमंत्री की एक झलक पाने के लिए सुबह से ही देश-विदेश से आये श्रद्धालु और स्थानीय लोग मंदिर के बाहर कतारों में खड़े रहे. संवेदनशील इलाकों और मंदिर परिसर की निगरानी के लिए पुलिस ने ड्रोन का भी सहारा लिया. इसे भी पढ़ें : भागो नहीं तो हम खदेड़ेंगे, शुभेंदु अधिकारी के अल्टीमेटम से घबराये बांग्लादेशियों का बॉर्डर पर लगा जमावड़ा CM Suvendu Adhikari Mayapur ISKCON Visit: सॉफ्ट हिंदुत्व या सांस्कृतिक राष्ट्रवाद? शुभेंदु अधिकारी का मायापुर जाना और वहां गौ पूजा करना बंगाल की बदलती नेतृत्व का एक बड़ा संकेत है. नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी इस्कॉन जैसे वैश्विक मंच के जरिये बंगाल की जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी प्रशासन विकास के साथ-साथ राज्य की जड़ों और धर्म की रक्षा के लिए भी उतनी ही गंभीर है. इसे भी पढ़ें बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के 3 बड़े धमाके! 5 रुपए में मिलेगा मछली-चावल, 27 से भरे जायेंगे ‘अन्नपूर्णा योजना’ के फॉर्म शुभेंदु अधिकारी का डोनाल्ड ट्रंप स्टाइल एक्शन, मिशन Detect, Delete and Deport शुरू, 9 घुसपैठियों को डिटेंशन सेंटर में डाला बंगाल में खत्म होगा 70 साल पुराना ‘लैंड सीलिंग’ कानून? जानें शुभेंदु प्रशासन के बड़े दांव से क्या होगा बदलाव बंगाल के स्कूलों में सुबह-सुबह वंदे मातरम गाना अनिवार्य, शुभेंदु अधिकारी प्रशासन ने वीडियो रिकॉर्डिंग भी करने को कहा The post नंगे पांव इस्कॉन में शुभेंदु अधिकारी ने की गौ सेवा, संतों के साथ बंगाल के सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर बड़ी बैठक appeared first on Naya Vichar.

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मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते ही भावुक हुए सिद्धारमैया, कहा- आलाकमान ने जो कहा वो किया

Siddaramaiah Resign CM Post: लोक भवन से लौटने के बाद सिद्धारमैया ने कहा- मैंने अपना इस्तीफा राज्यपाल के कार्यालय में जमा कर दिया है. राज्यपाल यहां नहीं हैं; वे आज रात लौट रहे हैं. इसलिए, मैंने इस्तीफा उनके कार्यालय में जमा कर दिया. हाई कमान के कहने पर दिया इस्तीफा: सिद्धारमैया सिद्धारमैया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- हाई कमान के पहले ही इस्तीफा देने के लिए कहने के बाद, मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है. मुझे पूरा भरोसा है कि जब गवर्नर आएंगे, तो वे इसे मंजूर कर लेंगे, क्योंकि यह संविधान के मुताबिक ही होना है. हमारे पास पूर्ण बहुमत है. इसलिए, यह संवैधानिक है कि मुख्यमंत्री को (प्रशासन बनाने की) अनुमति दी जाए. मैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगा, जिन्होंने मुझे यह मौका दिया है. #WATCH | Bengaluru | Karnataka CM Siddaramaiah gets emotional as he speaks about his tenure He resigned from the CM post today. His resignation is yet to be accepted by the Karnataka Governor. pic.twitter.com/4FDxBaxCoL — ANI (@ANI) May 28, 2026 हमने जो वादा किया था उसे पूरा किया: सिद्धामैया सिद्धारमैया ने अपने कार्यकाल पर कहा- हमने अपने घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम किया है. 2013 में, हमने 163 वादे किए थे, जिनमें से हमने 158 वादे पूरे किए हैं. 2023 में, हमने 550 से अधिक वादे किए. जिनमें से हमने 300 वादे पूरे किए हैं. इसके अलावा, हमने 5 गारंटी योजनाओं की घोषणा की है, जिन्हें हमने पहले ही वर्ष में पूरा कर दिया है. जनता से किए वादों को पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास किया : सिद्धारमैया सिद्धारमैया ने कहा- हमने राज्य की जनता से किए गए वादों को पूरा करने का पूरी ईमानदारी से प्रयास किया है. हमने अपना वचन नहीं तोड़ा है. इस बात से मुझे और हमारी पार्टी को बहुत संतोष मिला है. उन्होंने (विपक्ष ने) मेरे बारे में गलत जानकारी फैलाई है. उन्होंने मेरे खिलाफ, यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ भी, गलत जानकारी फैलाई है. उन्होंने कहा था कि विकास कार्यों के लिए कोई पैसा नहीं होगा और प्रशासनी खजाना खाली हो जाएगा. गारंटी लागू होने के बाद, आय के मामले में हम पूरे देश में पहले स्थान पर हैं. GST संग्रह में हम दूसरे स्थान पर हैं. महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, कर्नाटक दूसरे स्थान पर है. इस्तीफा देने से पहले सि्द्धारमैया ने डीके शिवकुमार के साथ किया था नाश्ता कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने आज अपने प्रशासनी आवास पर मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ नाश्ता किया था. उपमुख्यमंत्री एवं मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार डीके शिवकुमार तथा अन्य मंत्री भी इस बैठक में शामिल थे. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक तस्वीर में सिद्धरमैया, शिवकुमार को गले लगाते नजर आ रहे हैं. वहीं दूसरी तस्वीर में शिवकुमार, सिद्धरमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते दिखाई दे रहे हैं. कर्नाटक में लंबे समय से मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान जारी थी कर्नाटक में लंबे समय से सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान जारी थी. सिद्धारमैया 3 साल तक मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने 20 मई 2023 को सीएम पद की शपथ ली थी. उनके सत्ता संभालने के बाद से ही सत्ता परिवर्तन की मांग उठने लगी थी. The post मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते ही भावुक हुए सिद्धारमैया, कहा- आलाकमान ने जो कहा वो किया appeared first on Naya Vichar.

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मशहूर शायर बशीर बद्र का लंबी बीमारी के बाद निधन

Bashir Badr Passes Away: मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र का गुरुवार को भोपाल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 91 वर्ष के थे. परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उन्होंने भोपाल स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली. Noted Urdu poet Bashir Badr passes away in Bhopal after prolonged illness: Family sources. pic.twitter.com/H1m1mib8J7 — Press Trust of India (@PTI_News) May 28, 2026 The post मशहूर शायर बशीर बद्र का लंबी बीमारी के बाद निधन appeared first on Naya Vichar.

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कौन हैं केवल सिंह ढिल्लों? बने पंजाब भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष, 2027 विस चुनाव से पहले बीजेपी ने क्या दांव खेला?

Kewal Singh Dhillon BJP Punjab: पंजाब बीजेपी की कमान अब केवल सिंह ढिल्लों के हाथों में आ गई है. पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा नेतृत्वक दांव स्पोर्ट्सते हुए एक सिख चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. गुरुवार को भाजपा ने चार राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए, इनमें पंजाब सहित दिल्ली, हरियाणा और त्रिपुरा शामिल हैं. लंबे समय तक कांग्रेस की नेतृत्व करने वाले केवल सिंह ढिल्लों को संगठन और मालवा क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाला नेता माना जाता है. भाजपा ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कार्यकाल जुलाई में खत्म होने से पहले ही नए नेतृत्व पर फैसला कर लिया. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केवल सिंह ढिल्लों के नाम पर सहमति बन चुकी थी और अब आधिकारिक ऐलान भी कर दिया गया है. ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ लगातार पंजाब में सिख चेहरे को आगे लाने की वकालत कर रहे थे. वहीं पंजाब में आरएसएस के प्रभारी मंत्री श्रीनिवासलु भी ढिल्लों के नाम के पक्ष में बताए गए. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी पंजाब में पार्टी कार्यक्रमों के दौरान सिख नेतृत्व को आगे बढ़ाने की बात कर चुके थे. कौन हैं केवल सिंह ढिल्लों? केवल सिंह ढिल्लों पंजाब के बरनाला जिले के तल्लेवाल गांव के रहने वाले हैं. जाट सिख समुदाय से आने वाले ढिल्लों पंजाब की नेतृत्व में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. उनकी पहचान पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी नेताओं में होती रही है. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बरनाला विधानसभा सीट से 2007 और 2012 का चुनाव जीता था. हालांकि 2017 में उन्हें आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार गुरमीत सिंह मीत हेयर ने हरा दिया था. कांग्रेस से निकाले गए, फिर भाजपा में हुए शामिल 2022 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने केवल सिंह ढिल्लों को बरनाला सीट से टिकट नहीं दिया था. इसके बाद पार्टी के साथ उनके रिश्ते लगातार खराब होते गए. फरवरी 2022 में कांग्रेस ने उन्हें कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर कर दिया. कुछ महीने बाद जून 2022 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया. उस समय पंजाब चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कई नेता बीजेपी में शामिल हुए थे. भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें पंजाब बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया था. उपचुनाव से भी जुड़ा रहा नाम 2022 में पंजाब की संगरूर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के दौरान भी केवल सिंह ढिल्लों का नाम चर्चा में रहा था. यह उपचुनाव भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के बाद सांसद पद से इस्तीफा देने के कारण हुआ था. हालांकि उस चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेता सिमरनजीत सिंह मान ने जीत हासिल की थी. प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद क्या बोले ढिल्लों पंजाब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने पद संभालने के बाद चंडीगढ़ में कहा कि उनकी नेतृत्व का तरीका भाषण, शायरी या नाटकीय अंदाज नहीं, बल्कि मेहनत है. उन्होंने कहा, ‘मुझे न चुटकुले सुनाने आते हैं, न शायरी और न ही ड्रामा करना आता है. मैं सिर्फ मेहनत करना जानता हूं. मेहनत के दम पर ही हमें पंजाब को आगे ले जाना है.’ ढिल्लों ने दावा किया कि पंजाब की जनता अब बदलाव चाहती है और आने वाले समय में राज्य में भाजपा की प्रशासन बनेगी. उन्होंने कहा कि लोगों ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों को देख लिया है और अब पंजाब में ‘कमल’ खिलने का समय आ गया है. उनके मुताबिक, अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है और राज्य के लोग अब बीजेपी को मौका देने का मन बना चुके हैं. VIDEO | Chandigarh: On being appointed Punjab BJP president, Kewal Singh Dhillon, says, “As far as my roadmap is concerned, I want to say that I neither know how to crack jokes, nor do I know ‘shayari’ or dramatic performances. The only thing I know is hard work. Through hard… pic.twitter.com/daQnxLsYKr — Press Trust of India (@PTI_News) May 28, 2026 भाजपा ने सिख चेहरे पर क्यों लगाया दांव? पंजाब में भाजपा की पारंपरिक नेतृत्व लंबे समय तक हिंदू वोट बैंक और शहरी क्षेत्रों तक सीमित मानी जाती रही है. लेकिन शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद पार्टी लगातार राज्य में अपनी नई नेतृत्वक पहचान बनाने की कोशिश कर रही है. नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति से यह साफ हो रहा है कि भाजपा अब पंजाब में सिर्फ शहरी नेतृत्व तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ग्रामीण और मालवा बेल्ट में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने साफ संदेश दिया है कि वह सिख समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. पार्टी को उम्मीद है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी होने की वजह से ढिल्लों मालवा क्षेत्र में भाजपा के लिए नया समर्थन आधार तैयार कर सकते हैं. ये भी पढ़ें:- भाजपा ने चार राज्यों में बदले प्रदेश अध्यक्ष, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा में इन्हें मिली जिम्मेदारी ये भी पढ़ें:- जून में 77 ट्रेनें कैंसिल, दुरंतो और ज्ञानेश्वरी जैसे VIP ट्रेनों के रूट बदले, देखें प्रभावित ट्रेनों की पूरी लिस्ट कौन-कौन थे प्रदेश अध्यक्ष की रेस में? केवल सिंह ढिल्लों के अलावा कई बड़े सिख नेताओं के नाम भी प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में चर्चा में रहे. इनमें मनजीत सिंह राय, जगमोहन राजू, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल का नाम प्रमुख रूप से लिया जा रहा था.  पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू और मौजूदा समय में केंद्र प्रशासन में मंत्री का नाम इनमें सबसे आगे था. हालांकि आखिरकार भाजपा नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव और जमीनी पकड़ को देखते हुए केवल सिंह ढिल्लों पर भरोसा जताया. 2027 चुनाव पर भाजपा की नजर पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है. ऐसे में भाजपा अभी से संगठन को मजबूत करने, पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और नए सामाजिक समीकरण बनाने में जुट गई है. पार्टी नेतृत्व को भरोसा है कि कांग्रेस में लंबे समय तक संगठन संभालने का अनुभव रखने वाले केवल सिंह ढिल्लों बीजेपी के कैडर नेटवर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते

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कर्नाटक : दोपहर 2:30 बजे लोक भवन जाएंगे सिद्धारमैया, 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने आवास पर ब्रेकफास्ट के दौरान हुई बैठक में मंत्रिमंडल के सहयोगियों को पद छोड़ने के अपने फैसले से अवगत कराया. आधिकारिक सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी पीटीआई ने यह समाचार दी है. उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार डी. के. शिवकुमार के अलावा अन्य मंत्री इस बैठक में मौजूद थे. मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी एक तस्वीर में सिद्धारमैया, शिवकुमार को गले लगाते नजर आ रहे हैं. वहीं दूसरी तस्वीर में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार शिवकुमार, सिद्धरमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते दिखाई दे रहे हैं. सीएमओ के सूत्रों के अनुसार, पार्टी आलाकमान द्वारा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का संकेत दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय मांगा. हालांकि, लोक भवन सूत्रों ने कहा कि सिद्धारमैया ने अब तक राज्यपाल से मिलने के लिए समय नहीं मांगा है. सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल निजी कारणों से अपने गृह नगर इंदौर गए हुए हैं. राहुल गांधी के कहने पर सिद्धारमैया ने छोड़ा पद? सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने सिद्धरमैया से कथित तौर पर नेतृत्व परिवर्तन के लिए रास्ता बनाने को कहा और उन्हें राज्यसभा सीट के साथ पार्टी में केंद्रीय भूमिका की पेशकश की. सूत्रों का यह भी कहना है कि चूंकि यह संदेश सीधे राहुल गांधी की ओर से आया है, इसलिए संभवत: सिद्धरमैया पद छोड़ने के लिए तैयार हो गए. मुख्यमंत्री पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अगर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा तो वह पद छोड़ देंगे. यह भी पढ़ें : कर्नाटक की सियासत में गर्मजोशी: ब्रेकफास्ट पर पहुंचे डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया के पैर छुए दिल्ली में हुई अहम बैठक सिद्धारमैया और शिवकुमार को मंगलवार (26 मई) को पार्टी ने दिल्ली बुलाया था, जहां कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल तथा रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ लगातार बैठकें हुईं. The post कर्नाटक : दोपहर 2:30 बजे लोक भवन जाएंगे सिद्धारमैया, 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस appeared first on Naya Vichar.

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