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‘पापा, माफ कर देना…’ 50 से ज्यादा कोशिशों के बाद टूटा गोल्ड मेडलिस्ट का सपना, सुसाइड नोट पढ़कर रो पड़ा परिवार

UP News: पापा… मुझे माफ करना, मैं सफल नहीं हो पाया. मैं भी भाई-बहन की तरह प्रशासनी नौकरी करना चाहता था. नौकरी पाने के लिए 50 से ज्यादा प्रयास किए… इन शब्दों के साथ छोड़े गए एक सुसाइड नोट ने कानपुर के एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया. राज्यपाल के हाथों सम्मानित B.Tech गोल्ड मेडलिस्ट आनंद कुमार (23) अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. मौके से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने अपने करियर को लेकर लंबे समय से किए गए लगातार संघर्षों का जिक्र करते हुए अपने पिता से माफी मांगी है. पुलिस के अनुसार, आनंद लंबे समय से प्रशासनी नौकरी न मिलने को लेकर मानसिक तनाव में था. कौन थे आनंद कुमार कानपुर जिले के गोविंदनगर थाना क्षेत्र स्थित गुजैनी जे-ब्लॉक निवासी आनंद कुमार पढ़ाई में बेहद मेधावी थे. उन्होंने भौंती स्थित पीएसआईटी कॉलेज से वर्ष 2024 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया था. उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें अगस्त 2024 में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था. उन्होंने प्रदेश के विश्वविद्यालयों की मेरिट सूची में भी उल्लेखनीय स्थान हासिल किया था. प्रशासनी नौकरी पाने का था सपना परिजनों के अनुसार आनंद प्रशासनी नौकरी करना चाहते थे और इसके लिए लगातार तैयारी कर रहे थे. उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी. इसी वजह से वह पिछले कुछ समय से मानसिक दबाव में थे. परिवार का कहना है कि वह अपने बड़े भाई और बहन की तरह प्रशासनी सेवा में जाना चाहते थे. घर में अकेले थे आनंद घटना के समय आनंद घर में अकेला था. उनके पिता राजकुमार गुप्ता और परिवार के अन्य सदस्य बड़े बेटे के विवाह के सिलसिले में बिहार गए हुए थे. शुक्रवार शाम जब घरेलू सहायिका घर पहुंची और काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला, तो उसने परिवार के लोगों को इसकी सूचना दी. इसके बाद पुलिस को बुलाया गया. पुलिस को मिला नोट घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने घर के अंदर जांच की. कमरे से एक हस्तलिखित नोट बरामद हुआ, जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है. फॉरेंसिक टीम ने भी मौके से साक्ष्य एकत्र किए हैं. अधिकारियों के अनुसार नोट में करियर और नौकरी को लेकर निराशा व्यक्त की गई है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे की कार्रवाई कर रही है. यह भी पढ़ें: UP की राजधानी में 4 साल की मासूम के साथ हैवानियत, आरोपी स्कूल वैन चालक गिरफ्तार The post ‘पापा, माफ कर देना…’ 50 से ज्यादा कोशिशों के बाद टूटा गोल्ड मेडलिस्ट का सपना, सुसाइड नोट पढ़कर रो पड़ा परिवार appeared first on Naya Vichar.

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किचन की सिंपल चीजों से बनाएं ये 5 इंस्टेंट मॉनसून स्नैक्स, स्वाद ऐसा कि बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई हो जाएगा आपका फैन

Instant Monsoon Snacks: बारिश के इस मौसम में जब हम खिड़की के पास बैठकर बाहर देखते हैं, तो अक्सर कुछ ऐसा खाने का मन करता है जो सिर्फ गरमा-गरम ही न हो, बल्कि चटपटा भी हो. ऐसे में हमें अपना दिमाग तेजी से दौड़ाना पड़ता है कि आखिर क्या बनाया जाए. वैसे तो ज्यादातर घरों में शाम के नाश्ते में चाय के साथ हम पकौड़े ही खाते हैं, क्योंकि ये आसानी से बन जाते हैं और इन्हें बनाने में ज्यादा समय भी बर्बाद नहीं होता. लेकिन अगर आप हर शाम चाय के साथ सिर्फ पकौड़े खाकर बोर हो चुके हैं और इसकी जगह कुछ यूनिक और ज्यादा टेस्टी ट्राई करना चाहते हैं, तो आज का यह आर्टिकल आपके बड़े काम का है. आज हम आपको 5 ऐसे कमाल के स्नैक्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें तैयार करने में आपको ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट का समय लगेगा, लेकिन ये सभी स्नैक्स मानसून के मजे को दोगुना जरूर कर देंगे. तो चलिए, इन स्नैक्स और इन्हें बनाने के तरीके के बारे में विस्तार से जानते हैं. instant snacks ideas क्रिस्पी एंड ऑल टाइम फेवरेट आलू टिक्की चाट अगर आपको बारिश के इस मौसम में चटपटा खाने का मन करे, तो घर पर रखी ब्रेड और आलू से आप मिनटों में टिक्की बना सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले उबले हुए आलू को मैश करें और उसमें थोड़ा सा कॉर्नफ्लोर या ब्रेड क्रम्ब्स मिलाएं ताकि टिक्की ज्यादा क्रिस्पी बने. इसके बाद इसमें नमक, हरी मिर्च और हरा धनिया डालकर टिक्कियां बना लें. इसके बाद तवे पर थोड़ा सा तेल या घी डालकर इन्हें दोनों तरफ से इसे गोल्डन होने तक सेकें. लास्ट में ऊपर से दही, मीठी चटनी, तीखी हरी चटनी और थोड़ा सा चाट मसाला डालकर इसे गर्मागर्म सर्व करें. ये भी पढ़ें: सुबह टिफिन को लेकर होती है टेंशन? 10 मिनट में बन जाएंगे ये 5 टेस्टी ऑप्शन, स्वाद ऐसा कि शिशु हो जाएंगे आपके फैन इंस्टेंट रवा टोस्ट है बिल्कुल लाइट और हेल्दी इंस्टेंट रवा टोस्ट एक बहुत ही लाइट और हेल्दी स्नैक है जो सिर्फ 10 मिनट में बनकर तैयार हो जाता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले आधा कप सूजी में दो चम्मच मलाई या दही मिक्स करें. अब इसमें अपनी पसंद की बारीक कटी सब्जियां जैसे प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च, हरी मिर्च और हरा धनिया डालें. इसके बाद इसमें स्वादानुसार नमक और काली मिर्च पाउडर डालकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. अब इस इस पेस्ट को ब्रेड स्लाइस पर एक तरफ अच्छी तरह फैलाएं और फिर तवे पर थोड़ा सा बटर या घी लगाएं और पेस्ट वाली साइड को तवे पर रखकर मीडियम आंच पर सेकें. इसके बाद इसे दूसरी तरफ से भी सेक लें. आपको सुपर लाइट एंड क्रिस्पी रवा टोस्ट तैयार है. अगर कुकिंग नहीं करनी तो मसाला पापड़ ट्विस्ट अगर आपको बिल्कुल भी कुकिंग नहीं करनी है और कुछ बहुत लाइट और चटपटा खाना है, तो मसाला पापड़ सबसे बेस्ट चॉइस है. इसे बनाने के लिए उड़द या मूंग दाल के पापड़ को तवे पर या डायरेक्ट आंच पर सेक लें. इसके बाद एक कटोरी में बारीक कटा प्याज, टमाटर, खीरा, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाएं. अब इस मिक्चर में थोड़ा सा नींबू का रस, चाट मसाला और प्लेन नमक मिलाएं. इसके बाद सेके हुए पापड़ के ऊपर इस मिक्सचर को फैलाएं और ऊपर से थोड़ी सी बारीक भुजिया या सेव छिड़क दें. इसे आपको तुरंत ही खा लेना होगा ताकि पापड़ क्रिस्पी बनी रहे. ये भी पढ़ें: सुबह ऑफिस की भागदौड़ में नहीं कर पा रहे हैं नाश्ता? 10 मिनट में तैयार करें ये 3 हेल्दी ब्रेकफास्ट नए ट्विस्ट के साथ ट्राई करें चीजी मैगी पकौड़ा मैगी एक ऐसी चीज है जो काफी आसानी से सभी घरों में मिल जाएगी. अगर आपको मैगी पसंद है, तो बारिश के इस मौसम में आप इसका पकौड़ा बनाकर इसे बिल्कुल एक नया ट्विस्ट दे सकते हैं. इसे बनाने के लिए सबसे पहले मैगी को बिना मसाला डाले सादा उबाल लें और उसका पानी छान लें. अब एक बर्तन में उबली हुई मैगी, मैगी मसाला टेस्टमेकर, दो चम्मच बेसन, क्रिस्पिनेस के लिए दो चम्मच चावल का आटा, बारीक कटी प्याज, हरी मिर्च और थोड़ा सा कद्दूकस किया हुआ चीज मिक्स करें. इसके बाद इस मिश्रण के छोटे-छोटे गोले बनाकर गरम तेल में फ्राई कर लें. यह बच्चों और बड़ों, दोनों का पसंदीदा स्नैक बन जाएगा. तली-भुनी चीजों से बचना है तो फ्राइड मसाला मखाना अगर आप बारिश के इन दिनों में तली-भुनी चीजों से बचना चाहते हैं और कुछ हेल्दी ढूंढ रहे हैं, तो मसाला मखाना एक बेहतरीन टी-टाइम स्नैक है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक कढ़ाई में एक चम्मच देसी घी गरम करें. इसके बाद इसमें एक छोटा कप मखाने डालें और धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि वे एकदम क्रिस्पी न हो जाएं. जब मखाने अच्छी तरह से भुन जाएं, तो गैस बंद कर दें और कढ़ाई में ही थोड़ा सा नमक, हल्दी पाउडर, चाट मसाला और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह टॉस करें ताकि मसाला मखानों पर चिपक जाए. यह मिनटों में बनने वाला एक बेहद ही लाइट और हेल्दी स्नैक है. ये भी पढ़ें: रात की भूख भी मिटेगी और वजन भी नहीं बढ़ेगा, डिनर में शामिल करें ये 5 सुपर लो कैलोरी फूड्स The post किचन की सिंपल चीजों से बनाएं ये 5 इंस्टेंट मॉनसून स्नैक्स, स्वाद ऐसा कि बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई हो जाएगा आपका फैन appeared first on Naya Vichar.

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जम्मू-कश्मीर में मानसून का कहर: भारी बारिश और भूस्खलन से 11 की मौत, कई लापता

Jammu Kashmir Heavy Rain: भारी बारिश की वजह से सबसे अधिक तबाही पुंछ जिले की सुरनकोट तहसील में हुई. लगातार बारिश और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुआ है, हालांकि बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जम्मू-कश्मीर में 23 जुलाई तक मध्यम से भारी बारिश के आसार हैं. भूस्खलन की चपेट आया घर, 8 लोग मलबे में दबे सुरनकोट के लोअर मुराह गांव में मूसलाधार बारिश के कारण रविवार को भूस्खलन की चपेट में एक मकान आ गया, जिससे उसमें रह रहे 8 लोग मलबे में दब गए. बचाव दल ने सोफियान यासिर (दो) समेत पांच लोगों के शव बरामद कर लिए हैं, जबकि शेष की तलाश जारी है. संगला गांव में अचानक आई बाढ़ में एक ही परिवार के 4 सदस्य बह गए. लापता लोगों में अब्दुल हमीद, उनकी पत्नी शरीफा बेगम, बेटी अरीबा और बहन मनीरा बेगम शामिल हैं. नूनाबंदी गांव में मकान ढहने से एक की मौत नूनाबंदी गांव में एक मकान ढहने से नाजिया कौसर (28) की मौत हो गई. उनके पति मोहम्मद हाफिज और दो से छह वर्ष की आयु के तीन बच्चों को मलबे से निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया. सुरनकोट के संगलानी क्षेत्र में मकान ढहने से शाहजैब अहमद (22) की मौत हो गई, जबकि मरहोट क्षेत्र में इरम नामक एक नाबालिग लड़की नाले में डूब गई. इसके अलावा, धुंधक लाथूंग पुल के निकट एक नाले से एक अज्ञात स्त्री का शव भी बरामद किया गया. पुंछ जिले की हवेली तहसील में लगभग छह मकान ढह जाने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया. जम्मू-कश्मीर के राजौरी में बारिश के कारण बाउंड्री वॉल गिरा, राहत-बचाव कार्य करते अधिकारी, फोटो एएनआई राजौरी में रातभर हुई बारिश, नदी में अचानक आई बाढ़ राजौरी में भी रातभर हुई मूसलाधार बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ के दौरान एक नदी से स्त्री का शव बरामद किया गया. निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर जाने के कारण सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा. नदियों और नालों के उफान पर आने तथा तटबंधों के टूटने से कई वाहन बह गए, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ. जम्मू और राजौरी में नदियों में फंसे 14 लोगों को सुरक्षित निकाला गया जम्मू और राजौरी के विभिन्न हिस्सों में उफान पर आई नदियों में फंसे कम से कम 14 लोगों को पुलिस, सेना और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के संयुक्त अभियान में रविवार को सुरक्षित निकाल लिया गया. पुलिस के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि कई घंटे के अभियान में जम्मू में पीर खो मंदिर के निकट तवी नदी में फंसे तीन युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. अचानक जलस्तर बढ़ने के कारण तीनों नदी के बीच फंस गए थे. जम्मू शहर के रणदीप सिंह और मुनीश शर्मा तथा बिहार निवासी उनके मित्र विकास कुमार को सकुशल निकाल लिया गया. उफनाई धनगरी नदी में फंसे 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया एक अन्य बचाव अभियान में सेना के जवानों ने पुलिस और एसडीआरएफ के साथ मिलकर राजौरी जिले के धनगरी क्षेत्र में बाढ़ से उफनाई धनगरी नदी में फंसे दो लड़कों तथा थानामंडी क्षेत्र में फंसे नौ अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. सीएम उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली दौरा बीच में किया स्थगित दिल्ली गए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारी बारिश की वजह से बिगड़ते हालात को देखते हुए अपना दौरा बीच में ही समाप्त कर दोपहर में जम्मू लौटने का निर्णय लिया. उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी बारिश और बाढ़ प्रभावित जिलों की स्थिति की समीक्षा की तथा अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. ये भी पढ़ें: Heavy Rain Warning: 19 से 24 जुलाई तक भारी बारिश, गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल, जानें अगले 5 दिनों का मौसम The post जम्मू-कश्मीर में मानसून का कहर: भारी बारिश और भूस्खलन से 11 की मौत, कई लापता appeared first on Naya Vichar.

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वांगचुक की भूख हड़ताल से बदल सकती है संसद की सियासत, क्या विपक्ष जोड़ पाएगा बिखरी कड़ियां?

Monsoon Session 2026 : पिछले एक दशक में हिंदुस्तानीय नेतृत्व में विपक्ष की भूमिका और उसकी एकजुटता को लेकर यदि आप किसी नेतृत्वक विश्लेषक से सवाल करेंगे, तो संभव है कि उनका जवाब सीधे शब्दों में न मिले. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि अखबारों की सुर्खियां और कागजी दस्तावेज भले ही विपक्षी गठबंधन के होने का सबूत देते हो, लेकिन राज्यों की नेतृत्व, चुनावी समीकरण, दलों के बीच बढ़ती दूरियां और नेताओं द्वारा एक-दूसरे पर लगाए जाने वाले आरोप,अक्सर इस एकजुटता पर सवाल उठाते हैं. ऐसे में 20 जुलाई (सोमवार) से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और उसके बाद प्रशासन की कार्रवाई विपक्ष के लिए एक ऐसा मुद्दा लेकर आई है, जिस पर लगभग सभी विपक्षी दल सुर में सुर मिलाते नजर आ रहे हैं. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और वाम दलों ने केंद्र प्रशासन पर लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का आरोप लगाया है. जिसको लेकर नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र में यह मुद्दा विपक्ष की साझा रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है. हालांकि, सवाल यह भी है कि, क्या सोनम वांगचुक का मुद्दा संसद के भीतर विपक्ष को एक बार फिर एकजुट कर पाएगा? या पहले से बिखरी हुई विपक्षी एकता, बिखरी हुई ही नजर आएगी? इसे समझने के लिए चलते है एक दिन पीछे यानी कि शनिवार (18 जुलाई 2026) को. संसद के मानसून सत्र से पहले उठे इस सवाल की पूरी कहानी दरअसल बात ये है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग…को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे थे. 21 दिनों तक सबकुछ शांतिपूर्ण चल रहा था लेकिन प्रदर्शनकारियों को दिक्कत इस बात से थी कि प्रशासन उनकी सुन नहीं रही.लगातार भूखे रहने के कारण वांगचुक की तबीयत बिगड़ रही थी,  प्रदर्शन स्थल से आने वाली तस्वीर उनकी हालात बयां कर रहा थी. सोशल मीडिया से लेकर हाईकोर्ट तक मामले को लेकर चर्चा हो रही थी. लोग वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील कर रहे थे, लेकिन उनका कहना था कि प्रशासन जब तक उनकी मांगें नहीं मान लेती, उनका भूख हड़ताल जारी रहेगा. इन सब के बीच सेलिब्रिटीज और दूसरे चर्चित चेहरों के साथ नेतृत्वक पार्टियों की गाड़ियां भी जंतर मंतर आंदोलन की तरफ मुड़ने लगी थी. आम आदमी पार्टी, कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल तो वांगचुक का हाल लेने जंतर मंतर भी पहुंच गए. जिसके बाद शनिवार को दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले आई, ताकि उनका इलाज किया जा सके. यहीं से यह मामला सिर्फ एक आंदोलन तक सीमित नहीं रहकर नेतृत्वक बहस का विषय बन गया. प्रशासन की कार्रवाई पर विपक्ष क्यों भड़का हुआ ये कि दिल्ली पुलिस के जवान शनिवार सुबह- सुबह जंतर- मंतर पहुंच गए और वांगचुक को उठाकर अस्पताल ले गए. पुलिस सादे लिबास में आई थी और सफेद पर्दे के पीछे वे वांगचुक को उठाकर ले गए. सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के कुछ ही घंटों के भीतर लगभग पूरा विपक्ष केंद्र प्रशासन पर हमलावर हो गया. कोई प्रशासन को तानाशाह बताने लगा तो कोई इसे प्रशासन की मनमानी बता रहा था. संसद के मानसून सत्र से इसका क्या लेना-देना है? आप सोच रहे होंगे कि सोनम वांगचुके के साथ जो कुछ और उसके बाद देश में जो कुछ चल है वो तो सबको मालूम है…इसमें नया क्या है ? और तो और संसद के मानसून सत्र से इसका क्या लेना-देना ? दरअसल, पूरी कहानी इसी पर टिकी है और यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है. सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है और ऊपर हमने आपको ये भी बता दिया कि कैसे वांगचुक को लेकर प्रशासन की कार्रवाई सियासी मुद्दा बन गई है. जिस तरह बजट सत्र केे दौरान मजबूती से विपक्ष ने प्रशासन को जवाब दिया था, उसी एकजुटता की जरूरत फिर आन पड़ी है. आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया तो तृणमूल कांग्रेस और कुछ अन्य दलों के सांसदों ने भी पाला बदला. बजट सत्र के बाद कैसे कमजोर हुआ विपक्ष परिस्थितियों पर अगर गौर करें तो बजट सत्र की एकता बदलते नेतृत्वक परिदृश्य में बदल गई थी. विपक्ष की नेतृत्वक एकजुटता कमजोर पड़ती दिखाई देने लगी थी और संख्या के लिहाज से भी उनकी ताकत कम हुई है.  वैसे तो संसद में संख्या ही सर्वोपरि है लेकिन मौजूदा जो स्थिति है उसमें  सिर्फ संख्या ही नहीं, नेतृत्वक एकजुटता भी कमजोर हुई. तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके जैसे सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए. जिस परिसीमन को लेकर प्रशासन को घेरा जा रहा था, उसको लेकर इरादे बदलने लगे और एक देश-एक चुनाव जैसे दूसरे  मुद्दों पर भी विपक्षी दलों की राय अलग-अलग दिखाई देने लगी . जिसका मतलब था कि विपक्ष एकजुट नहीं है. यानी संसद सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी, क्या वह किसी एक मुद्दे पर एकजुट होकर प्रशासन को घेर पाएगा? सोनम वांगचुक का आंदोलन बन सकता है विपक्ष का कॉमन ग्राउंड अब इस सवाल को लेकर जो विश्लेषकों की राय है, वो फिलहाल सकारात्मक नजर आ रही है. जिसका कारण भी साफ है. दरअसल वांगचुक जिस मुद्दे को लेकर अनशन पर हैं, वो  मुद्दा किसी एक राज्य, किसी एक जाति, किसी एक धर्म या किसी एक क्षेत्र से जुड़ा नहीं है. यह सीधे छात्रों, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और लोकतांत्रिक विरोध जैसे राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ा हुआ है और हर पार्टी इन मुद्दों को लेकर खुद को जनता का हितैषी मानती है. जिसको लेकर नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा विपक्ष के लिए साझा नेतृत्वक आधार बन सकता है. कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी…तृणमूल कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी… शिवसेना (यूबीटी), वाम दल या शरद पवार की एनसीपी…सभी ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए. हां, शब्द अलग अलग जरूर है, लेकिन आरोप एक ही है. मामले को लेकर प्रशासन क्या

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बजट है ₹10 लाख से कम तो कौन-सी 7-सीटर कारें होंगी बेस्ट? Maruti, Mahindra और Renault लिस्ट में शामिल

इंडियन ऑटोमोबाइल मार्केट में भले ही SUV के चर्चे सबसे ज्यादा होते हैं, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि MPV शुरुआत से ही काफी ज्यादा लोकप्रिय रही हैं. 7-सीटर कार लोगों को ले-जाने और लाने के लिए बेस्ट मानी जाती है. इसके अलावा पूरी फैमिली को एकसाथ घूमने के लिए भी इसमें पर्याप्त जगह ऑफर करती हैं, वो भी बिना बजट खराब किए. इस आर्टिकल में हम हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा पॉपुलर टॉप 5 किफायती 7-सीटर कार के बारे में बताएंगे, जो आपके लिए बेस्ट चॉइस बन सकती हैं.  Maruti Suzuki Ertiga (LXi) इस लिस्ट में पहले नंबर पर हमने मारुति सुजुकी इस समय मोस्ट पॉपुलर 7-सीटर कार अर्टिगा को रखा है, जो आपके लिए एक बढ़िया ऑप्शन बन सकती है. फैमिली के लिए यह कार मोस्ट चॉइस बनी हुई है. 1.5 लीटर पेट्रोल/सीएनजी ऑप्शन वाला इंजन इसे और अधिक लोकप्रिय बना रहा है. इसके अलावा इसमें 7.8 इंच का प्रो टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है, जो एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले को सपोर्ट करता है. इसमें 6 स्टैन्डर्ड एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP), ABS विद EBD और ISOFIX चाइल्ड सीट्स भी मिलेंगे. Renault Triber  सूची में दूसरे नंबर पर Renault Triber का नाम है, जो स्पेशली फैमिली के लिए ही डिजाइन किया गया है. 1.0 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ यह एमपीवी आती है, जिसकी शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 5,80,775 रुपए है. एक बार में 7 लोगों के साथ ट्रेवल करने के लिए इससे बढ़िया बजट फ़्रेंडली कार शायद ही मिल सकता है. इसमें 8 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम लगाया गया है, जो एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले को सपोर्ट करता है. इसके अलावा वायरलेस चार्जर, क्रूज कंट्रोल, एलईडी हेडलैंप, रेन सेन्सिंग वाइपर, 6 एयरबैग्स, ABS के साथ EBD, ट्रैक्शन कंट्रोल, हिल होल्ड और रियर पार्किग सेंसर जैसे फीचर्स मिलेंगे. ये भी पढ़ें: ₹10 लाख से कम बजट में ऑटोमैटिक कार खरीदने का है प्लान? शहर के लिए ये मॉडल बने पहली पसंद, CNG और SUV का भी मिलेगा ऑप्शन Nissan Gravite  तीसरे स्थान पर हमने निसान कंपनी की 7-सीटर ग्रेवाइट को रखा है, जिसकी शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 5,73,400 (Nissan Gravite Visia MT) है. फैमिली वालों के लिए यह कार एक बढ़िया विकल्प है. इसमें 20.32 CM टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलेगा, जो एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले को सपोर्ट करता है. इसके अलावा इसमें 999 सीसी का 3 सिलेंडर नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलता है. सेफ्टी के रूप में 6 एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम, हिल स्टार्ट असिस्ट और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम मिलेंगे. Mahindra Bolero NEO महिंद्रा कंपनी की धांसू कार बोलेरो नियो इस लिस्ट में चौथे नंबर पर शामिल है, जिसकी स्टार्टिंग एक्स शोरूम कीमत 8.99 लाख रुपए है. यह कार लोगों के ले जाने और लाने के लिए शानदार है, जो मार्केट में बहुत पॉपुलर भी है. इसमें 9 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है. इसके अलावा क्रूज कंट्रोल, मैकेनिकल लॉकिंग डिफरेंशियल और ड्यूअल एयरबैग्स जैसे शानदार फीचर्स मिलते हैं. इतना ही नहीं, 1493 सीसी mHawk डीजल इंजन लगा है, जो इसकी पावर को दर्शाता है. Mahindra Bolero  महिंद्रा की बोलेरो काफी पुरानी और दमदार गाड़ी है, जो देश में शुरू से ही पॉपुलर है. इसपर हमेशा कंपनी अपडेट लाती रहती है. इस 7-सीट कार की शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 8.49 लाख रुपए है. इसमें आपको 1.5 लीटर mHawk75 डीजल इंजन मिलता है, जो 55.9kW पावर और 210 nm टॉर्क जेनरेट करता है. इसमें ड्यूअल एयरबैग्स, ABS विद ABD, रियर पार्किंग सेंसर, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और मैनुअल एसी जैसे फीचर्स मिलेंगे. ये भी पढ़ें: 2.50 लाख रुपए सस्ती हो गई Mahindra की ये दमदार EV, 500+ KM रेंज के साथ मिलते हैं शानदार फीचर्स The post बजट है ₹10 लाख से कम तो कौन-सी 7-सीटर कारें होंगी बेस्ट? Maruti, Mahindra और Renault लिस्ट में शामिल appeared first on Naya Vichar.

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बुलडोजर एक्शन से भड़के अभिषेक बनर्जी, कहा- 2031 में हमारी सरकार बनी तो बीजेपी के दफ्तर ऐसे ही तोड़ेंगे

West Bengal Bulldozer Action: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यालय पर बुलडोजर एक्शन से डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी बौखला गये हैं. शनिवार को हुए इस एक्शन पर रविवार को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव ने प्रतिक्रिया दी. कहा कि हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रशासन के अधीन काम कर रही बंगाल पुलिस अब ‘कानून तोड़ने वाली’ एजेंसी बन गयी है. उन्होंने इस पूरी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर कहा कि यह प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, ‘वर्दी में चोरी’ है. स्वीकृत योजना के उल्लंघन का आरोप, प्रशासन ने दी सफाई शनिवार को जिला प्रशासन ने आमतला स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय के सामने वाले हिस्से को बुलडोजर से तोड़ दिया था. अधिकारियों का दावा है कि इस भवन के हिस्से का निर्माण बिना किसी स्वीकृत भवन योजना के और नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन करके किया गया था. राज्य प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के तहत और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए की गयी है. इसके पीछे कोई भी नेतृत्वक प्रतिशोध या मंशा नहीं थी. अभिषेक का गंभीर आरोप- लैपटॉप और दस्तावेज ले गयी पुलिस पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से 3 बार के सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करके अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा- यह कोई वैध ध्वस्तीकरण नहीं था. वर्दी पहनकर की गयी चोरी थी. वीडियो में साफ दिख रहा है कि पश्चिम बंगाल पुलिस के जवान भाजपा के गुंडों के साथ मिलकर कार्यालय के भीतर रखे लैपटॉप, प्रिंटर, महत्वपूर्ण दस्तावेज, मेज, कुर्सियां और सामान से भरे बक्से उठाकर ले जा रहे हैं. यह सब तब किया गया, जब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है. ये भी पढ़ें: अभिषेक बनर्जी ने कहा- टीएमसी छोड़ने वाले लौट आयें, एक घंटे में इस्तीफा दे दूंगा, रीतब्रत बोले- नौटंकी न करें कानून के रक्षक ही उड़ा रहे कानून की धज्जियां : बनर्जी अभिषेक बनर्जी यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय पहले ही बुलडोजर से की जाने वाली इस तरह की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को असंवैधानिक ठहरा चुके हैं. ऐसे में जिन पर कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी है, वही आज कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. ये भी पढ़ें: अभिषेक बनर्जी ने कहा- टीएमसी छोड़ने वाले लौट आयें, एक घंटे में इस्तीफा दे दूंगा, रीतब्रत बोले- नौटंकी न करें कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी टीएमसी अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जिस कार्यालय को तोड़ा गया है, उसका निर्माण खरीदी गयी वैध जमीन पर सभी आवश्यक प्रशासनिक अनुमतियां प्राप्त करने के बाद हुआ था. उन्होंने इस कार्रवाई को सत्तारूढ़ भाजपा और प्रशासन की मिलीभगत बताते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस इस मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करेगी. इसके साथ ही उन्होंने भाजपा को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर वर्ष 2031 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में प्रशासन बदली, तो फिर भाजपा के कार्यालयों के साथ भी यही हश्र हो सकता है. ये भी पढ़ें: अभिषेक बनर्जी का अमित शाह को चैलेंज- हिम्मत है तो 4 मई को कोलकाता में रहें, सूद समेत होगा हिसाब The post बुलडोजर एक्शन से भड़के अभिषेक बनर्जी, कहा- 2031 में हमारी प्रशासन बनी तो बीजेपी के दफ्तर ऐसे ही तोड़ेंगे appeared first on Naya Vichar.

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इंग्लैंड ने टॉस जीता, पहले बल्लेबाजी का फैसला, देखें प्लेइंग इलेवन

हिंदुस्तान और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला लॉर्ड्स में स्पोर्ट्सा जा रहा है. सीरीज में दोनों ही टीमों ने एक-एक मैच जीता है. जिससे सीरीज 1-1 से बराबरी पर है. मैच का पूरा हाल आप यहां देख सकते हैं. The post इंग्लैंड ने टॉस जीता, पहले बल्लेबाजी का फैसला, देखें प्लेइंग इलेवन appeared first on Naya Vichar.

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क्या आप भी रात में देर से खाते हैं खाना? जानिए इससे होने वाले नुकसान

Late Night Dinner Side Effects: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग देर रात तक काम करते हैं या मोबाइल और टीवी देखते-देखते खाना भी देर से खाते हैं. कुछ लोगों के लिए रात 10 या 11 बजे खाना खाना रोज की आदत बन चुकी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत धीरे-धीरे आपकी सेहत पर बुरा असर डाल सकती है? सिर्फ क्या खाते हैं, यह ही नहीं बल्कि कब खाते हैं, यह भी आपकी हेल्थ के लिए उतना ही जरूरी है. आइए जानते हैं कि रात में देर से खाना खाने से (Late Night Dinner Side Effects) शरीर को क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं.  डाइजेस्टिव सिस्टम पर बढ़ता है प्रेशर  रात में खाना खाने के बाद हमारा शरीर आराम की तैयारी करने लगता है. ऐसे में अगर आप बहुत देर से या भारी खाना खाते हैं, तो उसे पचाने में ज्यादा समय लगता है. इससे गैस, अपच, पेट फूलना और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कई लोगों को सुबह उठते ही पेट भारी महसूस होता है, जिसकी एक वजह देर से डिनर भी हो सकता है.  बढ़ सकता है वजन (Late Night Dinner Side Effects) अगर आप रोज देर रात खाना खाते हैं और उसके तुरंत बाद सो जाते हैं, तो शरीर को कैलोरी बर्न करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता. धीरे-धीरे यह आदत वजन बढ़ने का कारण बन सकती है. खासकर अगर रात के खाने में तला-भुना या ज्यादा मीठा खाना शामिल हो, तो वेट और बढ़ जाता है.  नींद की गुणवत्ता हो सकती है खराब देर से खाना खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर जाने से कई लोगों को बेचैनी, सीने में जलन या भारीपन महसूस होता है.  इससे नींद बार-बार खुल सकती है या गहरी नींद नहीं आती. अच्छी नींद न मिलने का असर अगले दिन आपकी एनर्जी, मूड और काम करने की कैपेसिटी पर भी पड़ता है.  ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर देर रात खाना खाने की आदत शरीर के ब्लड शुगर लेवल (Late Night Dinner Side Effects) को भी प्रभावित कर सकती है. खासकर जिन लोगों को डायबिटीज है या उसका खतरा है, उन्हें रात में बहुत देर से खाना खाने से बचना चाहिए. सही समय पर भोजन करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर तरीके से काम करता है.  सुबह भूख कम लग सकती है अगर रात में देर से और ज्यादा मात्रा में खाना खाया जाए, तो अगली सुबह भूख कम लग सकती है. इससे लोग नाश्ता छोड़ देते हैं या बहुत हल्का खाते हैं. जबकि हेल्दी नाश्ता पूरे दिन शरीर को एनर्जी देने के लिए जरूरी माना जाता है.  कब खाना खाना सबसे बेहतर माना जाता है? सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले रात का खाना खा लेना बेहतर माना जाता है. इससे शरीर को भोजन पचाने का समय मिल जाता है और नींद भी अच्छी आती है.  यह भी पढ़ें: वेट लॉस से लेकर ग्लोइंग स्किन तक, जानिए आपके लिए कौन-सा सीड्स वॉटर है बेस्ट The post क्या आप भी रात में देर से खाते हैं खाना? जानिए इससे होने वाले नुकसान appeared first on Naya Vichar.

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केन-बेतवा परियोजना पर टकराव: पुलिस कार्रवाई के बाद खत्म हुआ 15 दिन का आंदोलन

Ken Betwa Link Project : मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं के खिलाफ चल रहा एक बड़ा आंदोलन रविवार सुबह अचानक समाप्त हो गया. पिछले 15 दिनों से कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने सुबह-सुबह वहां से हटा दिया. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है. गिरफ्तारी के दावे पर पुलिस का इनकार ​इस पूरी कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बयानों में काफी अंतर देखने को मिल रहा है. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दिव्या अहिरवार जैसी प्रमुख नेताओं का आरोप है कि पुलिस रविवार सुबह करीब 5 बजे हजारों की संख्या में आई और आंदोलन के मुख्य नेता अमित भटनागर सहित अन्य लोगों को जबरन गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने दावा किया कि भटनागर आज मीडिया के सामने केन-बेतवा प्रोजेक्ट में हुए 400 करोड़ रुपये के एक कथित भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा करने वाले थे, इसलिए उन्हें रोका गया. दूसरी तरफ, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है. नदी का बढ़ता जलस्तर और गिरती सेहत बनी वजह ​पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से सुरक्षा और मानवीय आधार पर की गई है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, ग्रामीण जिस जगह पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, वहां एक पुल का निर्माण कार्य चल रहा है. लगातार हो रही बारिश की वजह से बराना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था, जो आंदोलनकारियों के लिए कभी भी जानलेवा साबित हो सकता था. इसके साथ ही, कई दिनों से भूख हड़ताल पर रहने के कारण आंदोलन के नेता अमित भटनागर और अन्य ग्रामीणों का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था. इसलिए डॉक्टरों की टीम के साथ पहुंचकर सभी को ‘प्रेम और शांतिपूर्वक’ वहां से हटाकर अस्पताल और उनके घर भेजा गया है. आदिवासी स्त्रीओं का अनोखा सत्याग्रह ​इस पूरे आंदोलन में मुख्य रूप से आदिवासी स्त्रीओं की बहुत बड़ी भागीदारी देखने को मिली थी. अपनी मांगों को लेकर और पुनर्वास के पुराने वादों को पूरा न किए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने पटरियों और नदी के किनारे अनोखे तरीके अपनाए थे. उन्होंने प्रशासन के खिलाफ ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और यहां तक कि प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ करके पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था. आंदोलनकारियों का आरोप है कि विस्थापित होने वाले परिवारों को न तो सही मुआवजा मिला है और न ही प्रशासन ने अप्रैल में दिए गए अपने आश्वासनों को पूरा किया है. क्या है केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट? ​राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत विकसित की जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली ऐसी नदी जोड़ो योजना है, जिसका उद्देश्य केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में मोड़ना है. प्रशासन का दावा है कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रोजेक्ट है, जिससे मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड इलाके में सिंचाई, पीने का पानी और समग्र विकास की रफ्तार तेज होगी. हालांकि, इस प्रोजेक्ट के कारण पन्ना बाघ अभयारण्य (पन्ना टाइगर रिजर्व) के कुछ हिस्सों, जंगलों और वन्यजीवों पर पड़ने वाले बुरे असर के साथ-साथ स्थानीय लोगों के विस्थापन को लेकर पर्यावरण संगठन और स्थानीय ग्रामीण लगातार इसका विरोध कर रहे हैं. मध्यप्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ पिछले 15 दिनों से चल रहा ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन अनशन रविवार सुबह खत्म हो गया. पुलिस और प्रशासन की टीम ने नदी किनारे बने प्रदर्शन स्थल से आंदोलनकारियों को हटाकर उनके गांवों की तरफ भेज दिया है. The post केन-बेतवा परियोजना पर टकराव: पुलिस कार्रवाई के बाद खत्म हुआ 15 दिन का आंदोलन appeared first on Naya Vichar.

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अमित शाह ने कोलकाता में की हाई लेवल रिव्यू मीटिंग, कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा पर किया मंथन

Amit Shah in Bengal: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पश्चिम बंगाल के 3 दिवसीय दौरे के आखिरी दिन रविवार (19 जुलाई) को राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. दक्षिण कोलकाता में आयोजित इस बैठक में गृह मंत्री ने राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया. नये कड़े लोक सुरक्षा कानून के बीच बड़ी बैठक इस हाई लेवल रिव्यू मीटिंग में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धनाथ गुप्ता सहित कई वरिष्ठ नौकरशाह और पुलिस अधिकारी शामिल हुए. यह बैठक इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि हाल ही में राज्य में ‘पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियां नियंत्रण अधिनियम’ पारित किया गया है. क्या है नया कानून? इस नये और कड़े कानून के तहत राज्य प्रशासन को संगठित अपराध (Organized Crime), जबरन वसूली, अवैध खनन, साइबर अपराध और लोक व्यवस्था भंग करने जैसी राष्ट्रविरोधी व असामाजिक गतिविधियों से कड़ाई से निपटने के लिए बेहद व्यापक अधिकार दिये गये हैं. बैठक में इस कानून के क्रियान्वयन को लेकर भी चर्चा हुई. ये भी पढ़ें: हावड़ा में बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा दही उत्पादन संयंत्र, अमित शाह आज रखेंगे आधारशिला, अमूल करेगा 700 करोड़ का निवेश घुसपैठ और अधूरी बाड़बंदी को लेकर शाह गंभीर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले भी कई बार पश्चिम बंगाल में घुसपैठ, लचर कानून-व्यवस्था और बांग्लादेश के साथ खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा को लेकर गहरी चिंता प्रकट कर चुके हैं. शाह ने एक बार फिर दोहराया कि बंगाल में अंतरराष्ट्रीय सीमा का एक बड़ा हिस्सा अब भी ऐसा है जहां बाड़ (Fencing) नहीं लगायी जा सकी है, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती है. इससे पहले, अपने दौरे के दूसरे दिन शनिवार को अमित शाह ने उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीमा का दौरा किया था और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लिए 77.06 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की सौगात दी थी. पश्चिम बंगाल की भौगोलिक स्थिति सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि राज्य की 2,217 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है और इसके साथ ही इसकी सीमाएं नेपाल और भूटान जैसे देशों से भी सटी हुई हैं. ये भी पढ़ें: सिलीगुड़ी के पास BSF चौकी पहुंचे अमित शाह, सीमा सुरक्षा की समीक्षा और ‘चिकन नेक’ पर किया महामंथन स्वदेशी तकनीक और नये प्रोजेक्ट्स से अभेद्य होगी सीमा केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, सिलीगुड़ी के निकट एक बीएसएफ सीमा चौकी के निरीक्षण के दौरान गृह मंत्री ने घुसपैठ रोकने वाली स्वदेशी और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रौद्योगिकियों का जायजा लिया. रेडियो आधारित अलर्ट सिस्टम : इसमें एक विशेष रेडियो आधारित प्रणाली शामिल है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा की बाड़ से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या घुसपैठ की कोशिश होते ही अलर्ट मोड पर आ जाती है और पहले से रिकॉर्ड किया गया संदेश प्रसारित कर सुरक्षाकर्मियों को तत्काल सतर्क कर देती है. 47 करोड़ की परियोजनाएं : अमित शाह ने डिजिटल माध्यम से 47 करोड़ रुपए की लागत वाली बीएसएफ की 3 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी. नया फेंसिंग प्रोजेक्ट : हाल ही में अधिग्रहीत भूमि पर 30 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली 4 किलोमीटर लंबी नयी सीमा बाड़ (Border Fencing) के निर्माण का भी शिलान्यास किया गया. ये भी पढ़ें: अमित शाह के दौरे से पहले कोलकाता में बवाल, डॉ श्यामा प्रसाद की प्रतिमा के चबूतरे पर तोड़फोड़, तनाव The post अमित शाह ने कोलकाता में की हाई लेवल रिव्यू मीटिंग, कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा पर किया मंथन appeared first on Naya Vichar.

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