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INS महेंद्रगिरि नौसेना में शामिल, 75% स्वदेशी तकनीक से बना युद्धपोत, समंदर में बढ़ा भारत का दबदबा

INS Mahendragiri : हिंदुस्तान में स्वदेशी रूप से तैयार स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को नौसेना में शामिल कर लिया गया, जो छठे प्रोजेक्ट 17 ए नीलगिरि का हिस्सा है. इसे विशाखापत्तनम डोकयार्ड में कमीशन किया गया है. कमीशनिंग कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि यह एक ब्लू वाटर शिप है, जो केवल तट के पास ही नहीं बल्कि हफ्तों गहरे महासागरों में रहकर हिंदुस्तान के समुद्री हितों की रक्षा कर सकता है. INS का नाम ‘महेंद्रगिरी’ क्यों? INS महेंद्रगिरी का नाम ईस्टर्न घाट (पूर्वी घाट) में स्थित महेंद्रगिरी पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है. इसे सामर्थ्य और अटूट संकल्प का प्रतीक माना जाता है. इस युद्धपोत से एक गौरवशाली विरासत का निर्माण होने और हिंदुस्तान के समुद्री इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है. 75% हिस्सा इंडिया मेड न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट में बताया गया कि इसका डिजाइन हिंदुस्तानीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है. वहीं इसे बनाने का श्रेय मजगांव शिपबिल्डर्स लिमिटेड को जाता है. हिंदुस्तान द्वारा बनाया गया स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट इसके बढ़ते एक्सपर्टीज को दर्शाता है. INS महेंद्रगिरी की लंबाई 149 मीटर और चौड़ाई 17.8 मीटर है, जबकि इसका 6670 टन है. इसका 75 प्रतिशत हिस्सा हिंदुस्तान में बना है, जो प्रशासन के आत्मनिर्भर हिंदुस्तान की सफलता बताता है. खुले नए रोजगार के अवसर रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि इसके निर्माण में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में बड़ी संख्या में कंपनियों ने भाग लिया. जिससे देश के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूती मिली और नए रोजगार भी उपलब्ध कराए गए. नौसेना के लिए किस प्रकार मददगार महेंद्रगिरि अत्याधुनिक स्वदेशी हथियारों, सेंसरों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से लैस है. जिससे यह समुद्र, स्थल और आकाश हर जगह सेना के ऑपरेशन को सफल बनाने में सक्षम है. यह जहाज समुद्री सुरक्षा अभियानों, खोज एवं बचाव अभियानों, मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में नौसेना की मदद करेगी. इसके साथ इसकी निरंतर तैनाती हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे के क्षेत्रों में भी की जा सकती है. प्रोजेक्ट 17ए नीलगिरि इस श्रेणी के अंतर्गत 7 स्वदेशी युद्धपोत बनाए जाने हैं. जिनमें से 6 को कमीशन कर दिया गया है. इनमें INS नीलगिरी, INS हिमगिरि, INS उदयगिरि, INS तारागिरि, INS दूनागिरी और INS महेंद्रगिरि शामिल हैं. ये भी पढ़ें : Video : न्यूजीलैंड में पीएम मोदी के ‘किओरा’ बोलते ही तालियों की गड़गड़ाहट, क्या है इसका अर्थ? The post INS महेंद्रगिरि नौसेना में शामिल, 75% स्वदेशी तकनीक से बना युद्धपोत, समंदर में बढ़ा हिंदुस्तान का दबदबा appeared first on Naya Vichar.

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प्रभात खबर के 30 साल पूरे होने पर पढ़िए बोधगया की उस गुफा की कहानी, जहां बुद्ध ने 6 साल की थी कठोर तपस्या

Bodhgaya Dungeshwari Cave: (कलेंद्र प्रताप, बोधगया) बिहार में नया विचार के 30 वर्ष पूरे होने के मौके पर पढ़िए बोधगया की उस ऐतिहासिक ढुंगेश्वरी पहाड़ी की कहानी, जहां भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति से पहले छह वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. मान्यता है कि सिद्धार्थ गौतम ने इसी स्थान पर आत्म-साधना की. लंबे समय तक तपस्या के कारण उनका शरीर बेहद कमजोर हो गया था. इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि केवल शरीर को कष्ट देकर अंतिम सत्य की प्राप्ति संभव नहीं है. छह साल की कठोर तपस्या का गवाह है ढुंगेश्वरी गुफा ढुंगेश्वरी पहाड़ी की मुख्य गुफा में आज भी भगवान बुद्ध की कंकाल रूपी प्रतिमा स्थापित है. ध्यान की मुद्रा में बैठी यह प्रतिमा उनकी छह वर्षों की कठिन साधना और शारीरिक क्षीणता को दर्शाती है. यह प्रतिमा दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं को बुद्ध के संघर्ष और आत्मज्ञान की यात्रा की याद दिलाती है. ह्वेनसांग ने बताया था ‘प्रागबोधि’ ढुंगेश्वरी पहाड़ी का ऐतिहासिक महत्व भी काफी पुराना है. प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में इस स्थान का उल्लेख किया था. उन्होंने इसे ‘प्रागबोधि’ यानी ज्ञान प्राप्ति से पहले का स्थान बताया था. इससे इस स्थल की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता और मजबूत होती है. इसी गुफा से शुरू हुई बुद्ध बनने की यात्रा कहा जाता है कि ढुंगेश्वरी गुफा में तपस्या के दौरान ही सिद्धार्थ गौतम को जीवन के अंतिम सत्य की खोज का मार्ग मिला. इसके बाद वे बकरौर पहुंचे, जहां सुजाता नाम की कन्या ने उन्हें खीर खिलाई. फिर निरंजना नदी पार कर पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर उन्होंने अंतिम साधना शुरू की और आगे चलकर उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई. हिंदू और बौद्ध आस्था का अनोखा संगम ढुंगेश्वरी गुफा परिसर में हिंदू धर्म की माता ढुंगेश्वरी यानी मां तारा देवी की मूर्तियां भी स्थापित हैं. एक ही स्थान पर भगवान बुद्ध की कंकाल प्रतिमा और हिंदू देवी की मौजूदगी इस स्थल को दोनों धर्मों के श्रद्धालुओं के लिए खास बनाती है. हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. बौद्ध अनुयायियों के लिए बेहद पवित्र स्थल ढुंगेश्वरी गुफा दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. महायान और तिब्बती परंपरा को मानने वाले श्रद्धालु इसे ‘महाकाल गुफा’ के नाम से भी जानते हैं. यहां पहुंचकर श्रद्धालु बुद्ध के कठिन तप और आत्मज्ञान की यात्रा को करीब से महसूस करते हैं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें रोपवे से आसान होगी गुफा तक पहुंच ढुंगेश्वरी पहाड़ी अब आधुनिक सुविधाओं से जुड़ने जा रही है. यहां बन रही रोपवे परियोजना का करीब 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है. लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस रोपवे के शुरू होने के बाद श्रद्धालु और पर्यटक कुछ ही मिनटों में पहाड़ी पर स्थित ढुंगेश्वरी मंदिर और बौद्ध गुफाओं तक पहुंच सकेंगे. इससे बोधगया आने वाले पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी और यह ऐतिहासिक स्थल पर्यटन के नक्शे पर और मजबूत होगा. Also Read:बांकीपुर में क्यों बदला भाजपा का उम्मीदवार? अभिषेक बंटी की जगह नीरज सिन्हा को उतारने के पीछे क्या है रणनीति The post नया विचार के 30 साल पूरे होने पर पढ़िए बोधगया की उस गुफा की कहानी, जहां बुद्ध ने 6 साल की थी कठोर तपस्या appeared first on Naya Vichar.

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पुणे मर्डर : पुलिस ने सिया और चेतन को बताया कातिल, लेकिन अदालत में कैसे साबित होगा आरोप?

पुणे के लोहागढ़ किला हत्याकांड की गुत्थी अब उस चट्टान पर आकर टिक गई है, जहां से 18 जून को 26 साल के केतन अग्रवाल नीचे गिरा था. जांच एजेंसियां अब इसी जगह को मामले का सबसे अहम सबूत मानकर जांच आगे बढ़ा रही हैं. तीन हफ्ते पहले तक इसे ट्रैकिंग के दौरान हुआ हादसा माना जा रहा था, लेकिन अब मामला हत्या की जांच में बदल चुका है. शादी से पहले केतन अग्रवाल की मौत हो गई. पुलिस ने उनकी मंगेतर 20 साल की सिया गोयल और उसके प्रेमी 22 साल के चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया है. पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मिलकर केतन को लोहागढ़ किले से धक्का देकर मारने की साजिश रची. सिया गोयल और चेतन चौधरी हत्या के आरोपी पुणे के ग्रामीण पुलिस का दावा है कि सिया गोयल अपनी तयशुदा शादी से खुश नहीं थी और चेतन चौधरी से प्यार करती थी. इसी वजह से दोनों ने मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची. पुलिस के मुताबिक, इस प्लान के लिए दोनों कई बार कैफे में मिले, पूरी प्लानिंग की, घटना की पहले रिहर्सल भी की. एक बार हत्या की कोशिश नाकाम होने के बाद दोबारा वारदात को अंजाम दिया. फिलहाल यही कहानी सुर्खियों में है, लेकिन अभी तक इनमें से कोई भी आरोप अदालत में साबित नहीं हुआ है. सिया गोयल और चेतन चौधरी इस मामले में केवल आरोपी हैं और जांच अभी जारी है. पुलिस के सामने अब क्या है चुनौती? अगर अदालत को दोनों को दोषी ठहराना है, तो पुलिस को हर आरोप ठोस सबूतों से साबित करना होगा. प्रेम संबंध से हत्या की वजह, कैफे में मुलाकातों से साजिश और फोन रिकॉर्ड, सीसीटीवी, लोकेशन, कपड़े व घटना के बाद का व्यवहार जैसे सबूत पुलिस के पक्ष को मजबूत कर सकते हैं. लेकिन अदालत में सबसे अहम बात यह साबित करना होगी कि केतन की मौत हादसा नहीं थी. वह खुद नहीं फिसला या गिरा, बल्कि उसे जानबूझकर चट्टान से धक्का दिया गया था. ये भी पढ़ें: पुणे मर्डर : परिवार के एक शक से खुल गई पोल, केतन की मौत का सच आया सामने पुलिस के लिए इन आरोपों को साबित करना, आरोप लगाने से कहीं ज्यादा मुश्किल होगा. इसी वजह से उसने पहले दोनों का लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराने की मांग की थी. रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने अदालत को बताया कि उसके पास कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह या ऐसा पक्का सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि केतन को किसने धक्का दिया. पुलिस का दावा है कि उसके पास सिर्फ दोनों आरोपियों के कथित कबूलनामे हैं. सिनियर एडवोकेट तनवीर अहमद मीर ने क्या कहा? सिनियर एडवोकेट तनवीर अहमद मीर ने इंडिया टुडे से मामले पर बात की. उनका कहना है कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. 2008 के आरुषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपती की ओर से पैरवी कर चुके मीर का मानना है कि अदालत में ऐसे कबूलनामों की कानूनी अहमियत बहुत सीमित होती है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी मामले को लेकर बनी जनधारणा और अदालत में सबूतों के आधार पर होने वाला फैसला, दोनों अलग-अलग बातें हैं. The post पुणे मर्डर : पुलिस ने सिया और चेतन को बताया कातिल, लेकिन अदालत में कैसे साबित होगा आरोप? appeared first on Naya Vichar.

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मुरादाबाद डबल मर्डर : पति ने पकड़े पैर, देवर ने रेता गला, मां के बारे में पूछ रहे बेटे की भी कर दी हत्या

UP Crime News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के पाकबड़ा थाना क्षेत्र में मां-बेटे की हत्या के मामले में पुलिस ने खुलासा किया है. पुलिस ने स्त्री सीमा और उसके 10 वर्षीय बेटे अंकुश की हत्या के आरोप में पति जसराम और देवर जयराम को गिरफ्तार किया है. पुलिस की जांच में सामने आया कि दोनों भाइयों ने मिलकर पहले सीमा की हत्या की और बाद में वारदात का राज खुलने के डर से मासूम अंकुश को भी मौत के घाट उतार दिया. एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह ने मीडिया को बताया कि मौढ़ा तैय्या निवासी सीमा (35) और उसके बेटे अंकुश (10) की हत्या के मामले में पति जसराम और देवर जयराम को गिरफ्तार किया गया है. पूछताछ में दोनों आरोपियों ने वारदात से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं. हत्या से पहले पति-पत्नी के बीच हुआ था झगड़ा पुलिस के मुताबिक, सीमा करीब दो साल से शेरुआ चौराहे पर किराये के मकान में रह रही थी. उसके साथ पति जसराम और बेटा अंकुश भी रहते थे. जसराम अपना मकान छोटे भाई जयराम को बेच चुका था. जयराम ने 60 हजार रुपये दे दिए थे, जबकि 2 लाख 40 हजार रुपये बाकी थे. बकाया रकम को लेकर सीमा अक्सर विवाद करती थी. जांच में यह भी सामने आया कि जसराम अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था. इस बात को लेकर दोनों के बीच आए दिन विवाद होता था. सोमवार रात भी पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था, जिसके बाद सीमा ने पुलिस चौकी में शिकायत की थी. बाद में समझौता होने पर वह पति के साथ घर लौट गई थी. इस समझौते में जयराम भी शामिल था. दोनों भाइयों ने रची थी सीमा की हत्या की साजिश पुलिस के अनुसार, घर लौटने के बाद दोनों भाइयों ने सीमा की हत्या की साजिश रची. जसराम ने जयराम से कहा कि यदि वह सीमा की हत्या कर देगा तो मकान के बाकी रुपये भी नहीं मांगे जाएंगे. जयराम भी बकाया रकम देने से बचना चाहता था, इसलिए वह इस साजिश में शामिल हो गया. मंगलवार शाम करीब छह बजे जयराम अगवानपुर पहुंचा और सीमा से कहा कि वह उसे बाकी रुपये दे देगा. इस बहाने वह सीमा और अंकुश को बाइक पर बैठाकर मौढ़ा तैय्या की ओर ले गया. रास्ते में पेट्रोल पंप पर उसने अंकुश को उतार दिया और सीमा को खेत में ले गया, जहां पहले से जसराम मौजूद था. वहां जसराम ने सीमा के पैर पकड़ लिए, जबकि जयराम ने धारदार हथियार से उसका गला रेत दिया. हत्या के बाद जयराम दोबारा पेट्रोल पंप पहुंचा और बोतल में पेट्रोल लेकर वापस लौटा, इसके बाद वह अंकुश को भी अपने साथ घटनास्थल पर ले आया. पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर भेजा जेल पुलिस पूछताछ में जयराम ने बताया कि वह अपने भतीजे को नहीं मारना चाहता था. लेकिन अंकुश लगातार अपनी मां के बारे में पूछ रहा था. जब उसने खेत में अपनी मां का शव देखा तो वह रोने और चिल्लाने लगा. आरोपी को डर था कि बच्चा घर जाकर पूरी घटना बता देगा. इसी डर से उसने अंकुश का गला दबाकर उसकी भी हत्या कर दी. वारदात के बाद दोनों भाइयों ने सीमा के शव पर पेट्रोल डालकर उसका चेहरा जला दिया. इसके बाद अंकुश के शव को करीब 500 मीटर दूर प्रदीप के खेत में फेंक दिया और उसका चेहरा भी जला दिया, ताकि दोनों की पहचान न हो सके. वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए. एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह ने बताया कि आरोपी देवर जयराम को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है. वहीं शुक्रवार देर रात पुलिस ने पति जसराम को भी गिरफ्तार कर लिया. यह है मामला पाकबड़ा थाना क्षेत्र में मां-बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. मौढ़ा तैय्या निवासी सीमा का गला रेता गया था, जबकि उसके 10 वर्षीय बेटे अंकुश की गला दबाकर हत्या की गई थी. सीमा का शव बुधवार को गन्ने के खेत से बरामद हुआ था, जबकि अगले दिन करीब 500 मीटर दूर दूसरे खेत से अंकुश का शव मिला था. हत्यारों ने दोनों के चेहरे जलाकर पहचान मिटाने की कोशिश की थी, लेकिन अंकुश का चेहरा पूरी तरह नहीं जल पाया, जिससे उसकी पहचान हो गई. पुलिस के अनुसार, सीमा पिछले दो साल से पति जसराम से विवाद के बाद अलग रह रही थी. 15 साल पहले हुई थी शादी पुलिस के मुताबिक, जसराम की शादी करीब 15 साल पहले गोरखपुर निवासी सीमा से हुई थी. दोनों का एक 10 वर्षीय बेटा अंकुश था. जसराम ट्रक चालक है, लेकिन कुछ समय से बीमारी के कारण ट्रक नहीं चला रहा था. बताया गया कि करीब दो साल पहले पति-पत्नी के बीच विवाद के बाद सीमा अलग रहने लगी थी. जमीन बेचने को लेकर भी था विवाद पुलिस के अनुसार, मौढ़ा तैय्या निवासी पातीराम सैनी के पांच बेटे सोमपाल, जयराम, जसवंत, कुलवंत और जसराम हैं. जसराम के हिस्से में दो बीघा जमीन आई थी. करीब दो साल पहले सीमा ने एक बीघा जमीन बेच दी थी, जिसका जसराम ने विरोध किया था. इसके बाद दोनों के बीच विवाद और बढ़ गया. बताया जा रहा है कि सीमा बची हुई एक बीघा जमीन भी बेचना चाहती थी, जिसे लेकर पति-पत्नी के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था. यह भी पढ़ें: यूपी में 15 की मौत, तीन दिन की बारिश ने बढ़ाई मुसीबत,75 जिलों में अलर्ट The post मुरादाबाद डबल मर्डर : पति ने पकड़े पैर, देवर ने रेता गला, मां के बारे में पूछ रहे बेटे की भी कर दी हत्या appeared first on Naya Vichar.

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ट्रंप की कड़ी चेतावनी – अगर ईरान ने मेरी हत्या की कोशिश की तो 1 हजार मिसाइलें तैयार हैं

Trump Iran Threat : अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करके ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने लिखा कि अगर ईरान उनकी हत्या करने का प्रयास करता है तो अमेरिका ने 1 हजार मिसाइलें तैयार कर रखी हैं और सभी मिसाइलों का टारगेट ईरान ही है. Trump Truth Social अमेरिकी सेना को दे दिए गए हैं निर्देश उन्होंने आगे कहा कि किसी भी प्रारंभिक जवाबी कार्रवाई के तुरंत बाद हजारों और मिसाइलें दागी जाएंगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना को पहले ही आवश्यक निर्देश मिल चुके हैं और वह उन्हें अंजाम देने के लिए तैयार है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने धमकी भरे पोस्ट में कहा कि अमेरिकी सेना ईरान को तबाह करने में पूरी तरह से सक्षम है. पहले भी इंटरव्यू में दे चुके हैं धमकी ये टिप्पणियां न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए गए एक साक्षात्कार में उनके द्वारा की गई टिप्पणियों से मिलती-जुलती हैं. जहां उन्होंने कहा था कि यदि उनकी हत्या कर दी जाती है तो अभूतपूर्व सैन्य प्रतिक्रिया के लिए उन्होंने पहले से ही निर्देश दे रखे हैं. इजरायल की रिपोर्ट खारिज ट्रम्प ने कहा कि ऐसी कोई नई खुफिया जानकारी नहीं है जो उनकी हत्या की साजिश को लेकर नई जानकारी देती हो. उन्होंने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि इजरायल ने उन्हें निशाना बनाने वाली ईरानी योजना के बारे में नई जानकारी का पता लगाया है. ये भी पढ़ें : अमेरिका के नए रूसी प्रतिबंध कानून से बढ़ सकती हैं हिंदुस्तान की मुश्किलें, जानिए पूरा मामला The post ट्रंप की कड़ी चेतावनी – अगर ईरान ने मेरी हत्या की कोशिश की तो 1 हजार मिसाइलें तैयार हैं appeared first on Naya Vichar.

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देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास, जानें इस दौरान कौन-से कार्य करने चाहिए

Chaturmas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है. वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है. भगवान विष्णु की योग निद्रा का महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं. इस अवधि को देवताओं के विश्राम काल के रूप में देखा जाता है. मान्यता है कि इस दौरान सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं. इसलिए यह समय भक्ति, साधना और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. चातुर्मास में कौन-से कार्य करने चाहिए? चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन विशेष फलदायी माना गया है. भक्तों को ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए. इसके अलावा श्रीमद्भागवत पुराण, भगवद्गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है. तुलसी पूजा, दान-पुण्य और एकादशी व्रत का भी विशेष महत्व बताया गया है. मांगलिक कार्य क्यों नहीं किए जाते? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के विश्राम काल में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और जनेऊ जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते. इस अवधि को आध्यात्मिक साधना और संयम के लिए समर्पित माना गया है. चातुर्मास का वैज्ञानिक पक्ष चातुर्मास वर्षा ऋतु में पड़ता है. प्राचीन समय में भारी वर्षा के कारण यात्रा और सामाजिक आयोजन करना कठिन होता था. जलभराव और खराब मार्गों के कारण बड़े समारोहों से बचा जाता था. इसी वजह से विवाह जैसे मांगलिक कार्यक्रमों को स्थगित करने की परंपरा विकसित हुई. साधु-संत भी इस दौरान एक स्थान पर रहकर साधना और धर्म प्रचार करते थे. The post देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास, जानें इस दौरान कौन-से कार्य करने चाहिए appeared first on Naya Vichar.

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15 जुलाई से बिहार में बदल जाएगा जमीन रजिस्ट्री का तरीका, अब ऐसे होगी पूरी प्रक्रिया

Bihar Jamin Registry: बिहार में जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया में बदलाव होने जा रहा है. 15 जुलाई से राज्य के सभी निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है. नई व्यवस्था के तहत जमीन से जुड़े दस्तावेजों की रजिस्ट्री पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से होगी. मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को नई व्यवस्था को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. विभाग ने पात्र आवेदकों को जल्द से जल्द सर्विस प्रोवाइडर का लाइसेंस जारी करने को कहा है, ताकि डिजिटल रजिस्ट्री व्यवस्था सुचारू रूप से शुरू हो सके. कातिब और स्टांप वेंडर बनेंगे सर्विस प्रोवाइडर नई व्यवस्था में वर्तमान में काम कर रहे अनुज्ञप्तिधारी दस्तावेज नवीस (कातिब), प्रशिक्षु दस्तावेज नवीस, स्टांप वेंडर और रजिस्ट्री कार्य से जुड़े अधिवक्ताओं को सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करने की अनुमति दी गई है. बिहार स्टांप नियमावली, 2026 के तहत इन्हें निर्धारित शैक्षणिक और अन्य योग्यताओं में विशेष छूट भी दी गई है. इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े अनुभवी लोगों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी. ऑनलाइन होगी रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया नई व्यवस्था में सर्विस प्रोवाइडर की भूमिका काफी अहम होगी. वे आईआरएस पोर्टल पर जमीन खरीद-बिक्री करने वाले पक्षकारों की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करेंगे. इसके अलावा दस्तावेजों की ई-फाइलिंग, ई-साइन, बायोमेट्रिक सत्यापन, संपत्ति का प्रशासनी मूल्यांकन, स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क का निर्धारण भी ऑनलाइन किया जाएगा. रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और ई-स्टांप कोड उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी सर्विस प्रोवाइडर की होगी. लोगों को मिलेगी राहत, कम होंगे कागजी काम पेपरलेस रजिस्ट्री लागू होने के बाद लोगों को निबंधन कार्यालयों में कागजी प्रक्रिया से काफी राहत मिलेगी. पूरी प्रक्रिया एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने से समय की बचत होगी. प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी, तेज और आसान बनेगी. इससे निबंधन सेवाओं में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा. बिहार में हर साल लाखों दस्तावेजों की होती है रजिस्ट्री बांका जिले में हर दिन औसतन करीब 100 दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में कुल 25,103 दस्तावेजों का निबंधन किया गया. इसमें बांका निबंधन कार्यालय में 13,248 और अमरपुर निबंधन कार्यालय में 11,882 दस्तावेजों की रजिस्ट्री हुई. राजस्व वसूली में भी आगे रहा विभाग वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बांका जिले को 86.38 करोड़ रुपये राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया था. इसके मुकाबले 31 मार्च तक 92.89 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जो लक्ष्य का 107 फीसदी है. बांका निबंधन कार्यालय को 55.45 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला था, जबकि यहां 59.33 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ. वहीं, अमरपुर निबंधन कार्यालय ने 30.93 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 33.56 करोड़ रुपये की वसूली की. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें 15 जुलाई से शुरू होगी नई डिजिटल व्यवस्था बांका के जिला अवर निबंधक हेमंत कुमार ने बताया कि 15 जुलाई से रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया पेपरलेस हो जाएगी. इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां अंतिम चरण में हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिहार में जमीन रजिस्ट्री का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा और लोगों को डिजिटल माध्यम से आसान व तेज सेवा मिल सकेगी. Also Read: बिहार के प्रशासनी दफ्तरों में बदलेगा कामकाज का तरीका, अब लंबी मीटिंग पर लगेगी रोक, जानिए नई गाइडलाइन The post 15 जुलाई से बिहार में बदल जाएगा जमीन रजिस्ट्री का तरीका, अब ऐसे होगी पूरी प्रक्रिया appeared first on Naya Vichar.

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ताड़ी बेचने वाले का बेटा बनेगा SDM, 4 बार फेल होने के बाद BPSC में मिली सफलता

BPSC Success Story: मुश्किलें कितनी भी होगी अगर एक बार मन में ठान लिया जाए तो बड़ी-से-बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. कुछ ऐसी ही कहानी बिहार के बेगूसराय जिले के रहने वाले सूरज कुमार की है, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और संकल्प से BPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर ली. सूरज कुमार के पिता ने ताड़ी बेचकर उन्हें पढ़ाया. आज पूरा परिवार सूरज की इस सफलता से खुश है. सूरज कुमार ने BPSC 70वीं CCE परीक्षा में 1274 वीं रैंक हासिल की है. अनुसूचित जाति से आने वाले सूरज का सेलेक्शन अब SDM पद के लिए होगा. सूरज एक गरीब परिवार से आते हैं. ऐसे में उनकी इस सफलता से माता-पिता भी काफी खुश हैं.  ताड़ी बेचकर पिता ने पढ़ाया  सूरज बेगूसराय के नावकोठी गांव के रहने वाले हैं. सूरज कुमार के पिता रामचंद्र चौधरी ताड़ी बेचकर परिवार चलाते हैं. ऐसे में सूरज के पास सीमित संसाधन थे. लेकिन उनके पिता ने कभी मनोबल टूटने नहीं दिया और उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए प्रेरित करते रहे. रामचंद्र चौधरी ने हर मुश्किल का सामना किया लेकिन कभी बेटे की पढ़ाई से समझौता नहीं किया.  तमिलनाडु के इस फेमस यूनिवर्सिटी से की है पढ़ाई सूरज की शुरुआती पढ़ाई नावकोठी के एक स्कूल से हुई. 10वीं के बाद 12वीं उन्होंने जीडी कॉलेज बेगूसराय से की. इसके बाद तमिलनाडु की फेमस अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में BE की डिग्री हासिल की.  पहले चार प्रयास में मिली असफलता BTech की पढ़ाई करके भी सूरज संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने दिल्ली जाकर सिविल सेवा की पढ़ाई करने का मन बनाया. वे तैयारी में जुट गए. लेकिन इस दौरान उन्हें संघर्ष करना पड़ा. पिछले चार अटेंप्ट में सूरज को असफलता मिली थी. बार-बार मिल रही असफलता से टूट चुके थे जब-जब वे परीक्षा में असफल होते तब तब परिवार और समाज की नजर में एक ही सवाल होता है कि क्या वे काबिल नहीं हैं. परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था तो ऐसे में नौकरी लेकर सेटल होना ही उनकी प्राथमिकता थी. लेकिन परीक्षा की तैयारी करते हुए सूरज कुछ इस हद तक जुनूनी हो गए थे कि उन्हें हर हाल में सिविल सेवा में ही सफलता हासिल करनी थी. उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार अपने पांचवें प्रयास में BPSC परीक्षा में सफलता हासिल की.  सूरज ने सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया सूरज ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और पूरे परिवार को दिया है. उनका मानना है कि परिवार ने अगर उनमें हिम्मत नहीं दिखाई होती तो वे शायद आज इस मुकाम पर नहीं पहुंच पाते. 5वें प्रयास में सूरज ने अपनी गलतियों से सीख लेकर फिर से तैयारी की. वे अन्य अभ्यर्थियों को भी यही सलाह देते हैं कि अपनी गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ें. यह भी पढ़ें- IIT से लेकर IIIT तक, जानें बिहार के बेस्ट BTech कॉलेज में कैसे मिलता है एडमिशन The post ताड़ी बेचने वाले का बेटा बनेगा SDM, 4 बार फेल होने के बाद BPSC में मिली सफलता appeared first on Naya Vichar.

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ईरान को अमेरिका का अल्टीमेटम, कहा- अगर नहीं रोका होर्मुज पर हमला तो…

US Iran Conflict : अमेरिका ने ईरान को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) पर हमले रोकने को कहा है. अमेरिका ने अल्टीमेटम जारी करते हुए मांग की है कि ईरान जल्द से जल्द होर्मुज के रास्ते को जहाजों के लिए खोल दे. साथ ही तेल कंटेनरों में लगातार कर रहे हमलों को रोके. ऐसा नहीं करने पर ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. युद्धविराम समाप्ति की घोषणा अमेरिका की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध विराम के समाप्ति की घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुआ युद्धविराम समाप्त हो गया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए बताया कि हालिया दुश्मनी के बावजूद ईरान ने बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया था. उन्होंने लिखा कि अमेरिका इसके लिए सहमत है, लेकिन उन्हें बता दिया गया है कि अब युद्धविराम खत्म हो गया है. ईरान से आधिकारिक बयान की मांग हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिकी अधिकारी ईरान से सार्वजनिक घोषणा की मांग कर रहे हैं. जिसमें ईरान बताए कि वह होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर गोलीबारी नहीं करेगा. साथ ही उनसे कोई भी ट्रांजिट शुल्क नहीं लिया जाएगा. समझौते पर पहुंचने का सीमित समय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि तेहरान के साथ बातचीत सफल रही. ट्रंप प्रशासन ईरान को एक सीमित समय दे रही है, जिससे वे अपने विकल्पों पर विचार कर लें. ईरान ने किया अमेरिकी दावों को खारिज ईरान ने वाशिंगटन द्वारा किए जा रहे इस दावे को खारिज कर दिया है कि उसने यूएस के साथ बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया था. ईरान ने अमेरिका से सीधे बातचीत के बजाए कतर की मध्यस्थता पर स्वीकृति जाहिर की है. चेतावनी दी है कि अमेरिकी किसी भी प्रकार से अगर उग्रता दिखाता है तो इसका करारा जवाब दिया जाएगा. अमेरिकी मांगो पर जताया विरोध तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर की जाने वाली अमेरिकी मांगो पर कड़ा विरोध जताया है. इस बात पर जोर दिया है कि जलडमरूमध्य पर होने वाली कोई भी गतिविधि ईरान के अधिकार क्षेत्र में आती हैं. उनका कहना है कि बाहरी शक्तियों का होर्मुज स्ट्रेट प्रबंधन पर हस्तक्षेप पहले के समझौतों का उल्लंघन है. इससे इलाके में तनाव घटने के बजाए और बढ़ेगा. हमलों के पीछे ईरानी प्रशासन नहीं कोई और ! अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान ने स्वीकार किया कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों के पीछे बागी समूह का हाथ है. इस पर अमेरिका का साफ रुख है कि चाहे ईरान की प्रशासन इसमें इनवॉल्व न हो लेकिन इसका जिम्मेदार उन्हें ही ठहराया जाएगा. नई वार्ता की योजना हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि कतर के अधिकारी अमेरिका-ईरान तनाव कम करने को लेकर चर्चा करने तेहरान गए. वहीं इरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची होर्मुज के प्रशासन और सुरक्षित मार्गों पर बातचीत करने ओमान जाने वाले हैं. क्यों है होर्मुज स्ट्रेट का महत्व? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जो ओमान की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ता है. अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से पहले विश्व के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा रोज इसी रास्ते से होकर गुजरता था. हाल में हुए जहाजों पर हमले के बाद तेल की कीमतें भी बढ़ गई हैं. इसलिए इस युद्ध की समाप्ति बेहद जरूरी बताई जा रही है. The post ईरान को अमेरिका का अल्टीमेटम, कहा- अगर नहीं रोका होर्मुज पर हमला तो… appeared first on Naya Vichar.

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8th Pay Commission: सिर्फ फिटमेंट फैक्टर नहीं, रेलवे इंजीनियरों को अब वेतन और प्रमोशन में भी चाहिए बराबरी

8th Pay Commission: इस बार सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं, बल्कि रेलवे इंजीनियरों ने वेतन, प्रमोशन और करियर ग्रोथ से जुड़े कई पुराने मुद्दे भी आयोग के सामने रखे हैं. उनका कहना है कि 6वें वेतन आयोग के बाद उनकी स्थिति पहले जैसी नहीं रही और अब 8वें वेतन आयोग से उन्हें बड़ी उम्मीद है. भुवनेश्वर में हुई बैठक के दौरान रेलवे इंजीनियरों के संगठनों ने आयोग को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा. हालांकि, अभी किसी भी मांग पर फैसला नहीं हुआ है. आयोग फिलहाल देशभर से कर्मचारियों और पेंशनर्स की राय जुटा रहा है. कहां हुई बैठक और किसने रखीं मांगें? 8वें वेतन आयोग ने 6 और 7 जुलाई को ओडिशा के भुवनेश्वर में कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स के साथ स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन किया. इस बैठक में ऑल इंडिया रेलवे इंजीनियर्स फेडरेशन (AIREF) और ईस्ट कोस्ट रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन (ECoREA) ने आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन को अपना ज्ञापन सौंपा. AIREF के महासचिव बी.पी. दाश ने कहा कि रेलवे इंजीनियर रेलवे के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन 6वें वेतन आयोग के बाद उनकी वेतन व्यवस्था कमजोर हुई. उनका दावा है कि आज भी उन्हें गैर-तकनीकी और गैर-सुरक्षा कैडर के कई कर्मचारियों की तुलना में कम अनुकूल वेतन मिलता है. रेलवे इंजीनियरों ने क्या-क्या मांग रखी? रेलवे इंजीनियरों ने आयोग के सामने कई अहम मांगें रखीं, जिनमें सबसे बड़ी मांग वेतन समानता और करियर ग्रोथ की रही. मांग क्या चाहते हैं इंजीनियर? वेतन समानता 6वें वेतन आयोग से पहले जैसी पे स्ट्रक्चर दोबारा लागू की जाए. ग्रुप B स्टेटस अन्य केंद्रीय प्रशासनी विभागों की तरह रेलवे इंजीनियरों को भी ग्रुप B का दर्जा मिले. ग्रुप B पद बढ़ें रेलवे में ग्रुप B पदों की हिस्सेदारी 0.29% से बढ़ाकर 7.5% की जाए. प्रमोशन लंबे समय से रुके प्रमोशन और करियर में आ रही रुकावट को दूर किया जाए. बैठक के दौरान AIREF के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी जनरल सिवाकांत सिंह ने भी कहा कि रेलवे इंजीनियर लंबे समय से करियर स्टैगनेशन यानी प्रमोशन और ग्रोथ रुकने की समस्या झेल रहे हैं. क्या सिर्फ रेलवे कर्मचारियों की मांगें सुनी जा रही हैं? नहीं. 8वां वेतन आयोग देशभर में अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स से सुझाव ले रहा है. इससे पहले दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में भी बैठकें हो चुकी हैं. भुवनेश्वर के बाद आयोग ने 10 जुलाई को कोलकाता में अंतिम दौर की चर्चा करने की योजना बनाई है. इन बैठकों में सिर्फ रेलवे कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि दूसरे कर्मचारी संगठनों ने भी फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, भत्तों में संशोधन, पेंशन सुधार, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बदलाव और Modified Assured Career Progression (MACP) व्यवस्था में सुधार जैसी मांगें रखी हैं. क्या अभी कोई फैसला हो गया है? अभी नहीं. ये बैठकें सिर्फ सुझाव और मांगें जुटाने के लिए हो रही हैं. आयोग सभी कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और पेंशनर्स से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करेगा. इसलिए फिलहाल वेतन, पेंशन, भत्तों या प्रमोशन से जुड़ा कोई नया फैसला लागू नहीं हुआ है. गौरतलब है कि 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था. आयोग का काम केंद्र प्रशासन के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, पेंशन और भत्तों की समीक्षा करना है. साथ ही कर्मचारियों की मांगों और प्रशासन की वित्तीय स्थिति के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी अंतिम सिफारिशें देना भी इसकी जिम्मेदारी है. ये भी पढ़ें: 8th Pay Commission: 65% तक सैलरी बढ़ाने की मांग, ₹9000 ट्रांसपोर्ट अलाउंस का भी प्रस्ताव The post 8th Pay Commission: सिर्फ फिटमेंट फैक्टर नहीं, रेलवे इंजीनियरों को अब वेतन और प्रमोशन में भी चाहिए बराबरी appeared first on Naya Vichar.

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