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11वीं-13वीं JPSC और फूड सेफ्टी परीक्षा रद्द करने पर HC ने लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं-13वीं परीक्षा को प्रशासन की ओर से रद्द किए जाने के मामले पर गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई की गई. हाई कोर्ट में सौरभ सिंह और सोनम कुमारी की ओर से प्रशासन के फ़ैसले के विरुद्ध याचिका दायर की गई थी. जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन की ओर से 11वीं से 13वीं और फूड सेफ़्टी ऑफिसर परीक्षा को रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही अदालत ने प्रशासन से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर JPSC की परीक्षा देने के बाद 70 प्रतिशत लोग भी अगर गलत तरीके से आए हैं तो भी प्रशासन उन्हें नहीं निकाल सकती. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने इस मामले में fast-track कोर्ट गठन का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. ये है पूरा मामला झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा रद्द होने से सेवामुक्त हुईं डिप्टी कलेक्टर सोनम कुमारी (हजारीबाग जिले में पदस्थापित थीं) ने झारखंड प्रशासन की अधिसूचना को चुनौती दी है. उनकी ओर से अधिवक्ता ने झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की. याचिका में कहा गया है कि जेपीएससी की विज्ञापन संख्या-01/2024 को राज्य प्रशासन ने मेमो नंबर 5404/18.8.2026 के माध्यम से रद्द कर दिया है. गुरुवार को हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी. 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में चयनित होने के बाद उन्होंने बिहार के गया जिले में शिक्षक की नौकरी छोड़ कर झारखंड में योगदान दिया था. चयन होने के बाद राज्य प्रशासन ने उनकी नियुक्ति की. उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था. उन्होंने डिप्टी कलेक्टर पद पर योगदान दिया था अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही थीं. प्रार्थी सोनम कुमारी ने हाईकोर्ट से राज्य प्रशासन की अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की है. नवनियुक्त 200 उप समाहर्ताओं की ट्रेनिंग बीच में ही रुकी राज्य प्रशासन द्वारा जेपीएससी 11वीं, 12वीं व 13वीं सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने के कारण इन परीक्षाओं से नियुक्त हुए करीब 200 उप समाहर्ताओं की ट्रेनिंग बीच में ही रुक गयी है. हाल ही में श्रीकृष्ण लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान से ट्रेनिंग लेकर उन्हें जिलों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था. अभी वे जिलों में प्रोबेशन पीरियड में हैं. उनकी परीक्षा रद्द कर दिये जाने के बाद तकनीकी रूप से उनकी नौकरी चली गयी है. ऐसे में सारे उप समाहर्ता संशय की स्थिति में हैं. वे रांची पहुंचने लगे हैं. उधर, देवघर स्थित बाबा धाम में विधि व्यवस्था बनाये रखने के लिए इनमें से 40 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को प्रतिनियुक्त किया गया था. इसके साथ ही दुमका जिला स्थित बासुकीनाथ में 23 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को दंडाधिकारी बनाया गया था. अब क्योंकि से सभी सेवा में नहीं रहे, इसलिए उन्हें ड्यूटी से हटा दिया गया है. The post 11वीं-13वीं JPSC और फूड सेफ्टी परीक्षा रद्द करने पर HC ने लगाई रोक, प्रशासन से मांगा जवाब appeared first on Naya Vichar.

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पत्नी को धोखेबाज बता कर दी हत्या, WhatsApp स्टेटस लगाकर खुद को और बहन को मारी गोली

UP Crime: लखनऊ के गोमती नगर थाना क्षेत्र में गुरुवार को डबल मर्डर की घटना से सनसनी फैल गई. बैंक कर्मी मानस ने पहले अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा को ICICI बैंक के बाहर बुलाया और गोली मारकर हत्या कर दी. इसके बाद वह करीब 2 किलोमीटर दूर हुसड़िया चौराहे के पास स्थित अपने किराए के घर पहुंचा. यहां उसने अपनी बहन को गोली मार दी और फिर खुद को भी गोली मार ली. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी. ICICI बैंक में असिस्टेंट मैनेजर थी दिव्या मिश्रा दिव्या मिश्रा ICICI बैंक में असिस्टेंट मैनेजर थी और आलमबाग में रहती थी. जानकारी के मुताबिक, उसने करीब एक साल पहले पति मानस से तलाक के लिए कोर्ट में अपील दायर की थी. दिव्या की शादी 12 साल पहले हुई थी. दिव्या यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा की बहन थी. वहीं, उसका पति मानस SBI बैंक में काम करता था. पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है. फिलहाल वारदात की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है. हुसड़िया चौराहे के पास पहुंचा था आरोपी, फिर कमरे में खुद को मारी गोली मानस का घर हुसड़िया चौराहे के पास किराए पर है. जानकारी के मुताबिक, करीब 12:30 बजे वह वहां पहुंचा था. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह पसीने से भीगा हुआ था. कमरे में जाने के बाद उसने दरवाजा बंद कर लिया. कुछ देर बाद कमरे के अंदर से आवाज सुनाई दी. मानस की बहन भी उसके साथ रहती थी. बाद में पता चला कि उसने बहन को गोली मारने के बाद खुद को भी गोली मार ली. बताया जा रहा है कि मानस के माता-पिता नहीं हैं. WhatsApp Status (क्रेडिट सोशल मीडिया) सुसाइड से पहले WhatsApp Status में लिखा- पत्नी ने धोखा दिया जानकारी के मुताबिक, खुद को गोली मारने से पहले मानस ने WhatsApp पर एक स्टेटस लगाया था. इसमें उसने कथित तौर पर लिखा कि उसने अपनी पत्नी की हत्या इसलिए की क्योंकि उसने उसे धोखा दिया था. स्टेटस में उसने खुद को और अपनी बहन को भी मारने की बात लिखी थी. साथ ही उसने पत्नी की बहन प्रज्ञा और उनके पति भरत को सब कुछ पता होने का दावा किया था. हालांकि, WhatsApp Status में किए गए इन दावों की पुलिस जांच कर रही है. Must Read- “हाथ में बंद पर्ची, दिल में कई राज” फर्रुखाबाद में रेलवे ट्रैक के पास मिली 17 वर्षीय कोमल की लाश, मची अफरा-तफरी The post पत्नी को धोखेबाज बता कर दी हत्या, WhatsApp स्टेटस लगाकर खुद को और बहन को मारी गोली appeared first on Naya Vichar.

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लव मैरिज के पक्के संकेत: अगर आपकी हथेली और कुंडली में हैं ये निशान, तो मिलेगा मनपसंद जीवनसाथी

Love Marriage Astrology: शादी को लेकर हर व्यक्ति के मन में कई सवाल होते हैं. विवाह प्रेम विवाह होगा या परिवार की पसंद से अरेंज मैरिज, इसकी जिज्ञासा अक्सर लोगों को रहती है. ज्योतिष और हस्तरेखा शास्त्र में कुछ विशेष योग और संकेतों को विवाह के स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि ये पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए. हस्तरेखा में मिलते हैं कुछ संकेत हस्तरेखा शास्त्र की मान्यता के अनुसार दोनों हाथों की हृदय रेखा में द्वीप चिह्न और शुक्र रेखा का स्वास्थ्य रेखा को काटकर ऊपर की ओर जाना व्यक्ति के प्रेम संबंधों से जोड़ा जाता है. इसी तरह अंगुलियों के दूसरे या तीसरे पर्व में यव चिह्न होने पर व्यक्ति के भोग-विलास और आकर्षण की ओर अधिक झुकाव की बात कही जाती है. हृदय रेखा से प्रेम संबंध का संकेत मान्यता है कि यदि दोनों हाथों की हृदय रेखा बुध क्षेत्र तक पहुंचती है, तो व्यक्ति के प्रेम संबंधों की संभावना अधिक हो सकती है. कुछ हस्तरेखा परंपराओं में इसे करीबी परिचित या संबंधी वर्ग में प्रेम संबंध बनने के संकेत के रूप में भी देखा जाता है. अंक ज्योतिष में प्रेम विवाह का योग अंक ज्योतिष के अनुसार अंक 5 को बुध से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि यदि मूलांक 5 का संबंध 2, 7 या 11 जैसे अंकों से बनता है, तो प्रेम विवाह की संभावना देखी जाती है. ऐसे योगों को विवाह के स्वरूप का एक संकेत माना जाता है, लेकिन केवल अंक के आधार पर निर्णय नहीं किया जाता. कुंडली में चंद्रमा और सप्तम भाव जन्मकुंडली में सप्तम भाव विवाह और दांपत्य जीवन से संबंधित माना जाता है. यदि चंद्रमा और सप्तम भाव के स्वामी के बीच दृष्टि संबंध बनता है, तो ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे प्रेम विवाह की संभावना से जोड़ा जाता है. विवाह का निष्कर्ष निकालने के लिए पूरी कुंडली का विश्लेषण जरूरी माना जाता है. The post लव मैरिज के पक्के संकेत: अगर आपकी हथेली और कुंडली में हैं ये निशान, तो मिलेगा मनपसंद जीवनसाथी appeared first on Naya Vichar.

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राहुल गांधी का बीजेपी-RSS पर हमला, कहा- देश में इस समय मुख्य लड़ाई विचारधारा की है

राहुल गांधी ने कहा, “RSS के साथ मेरी सबसे बड़ी समस्या यही है. उन्होंने तय कर लिया है कि वे 1.5 अरब लोगों का सच जानते हैं. जबकि सच यह है कि इस देश के लोग ही अपनी सच्चाई खुद जान सकते हैं। अगर मैं भी यह मानने लगूं कि मैं आपकी सच्चाई जानता हूं, तो यह मेरी बेवकूफी होगी क्योंकि मैंने वे हालात नहीं देखे जो आपने देखे हैं.” उन्होंने आगे कहा कि आज देश में लड़ाई पर्यावरण या मीडिया की आजादी से कहीं ज्यादा वैचारिक है. कुछ लोगों ने सिस्टम पर कब्जा कर लिया है और वे हर नागरिक पर अपनी सोच थोप रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘मैं छात्रों को माफ करता हूं’ जैसे बयान यह दिखाते हैं कि सत्ता में बैठे लोग खुद को सर्वज्ञ और जनता को अज्ञानी मानते हैं. ‘दो-तीन लोगों के एकाधिकार से नहीं मिलेगा स्वराज’ देश की आर्थिक स्थिति और पूंजीपतियों के कब्जे पर चिंता जताते हुए राहुल गांधी ने कहा, अगर देश के तमाम बिजनेस, एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमेंट कंपनियां कुछ चुनिंदा लोगों के पास होंगी, तो आम लोगों के लिए ‘स्वराज’ की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और राजीव गांधी का स्वराज का विजन ऐसी महंगी शिक्षा, अन्यायपूर्ण परीक्षा प्रणाली और एकाधिकार वाली वित्तीय व्यवस्था के साथ कभी साकार नहीं हो सकता. इसके लिए पंचायती राज, विधायकों और सांसदों तक फैली एक मजबूत और जमीनी नेतृत्वक व्यवस्था की जरूरत है. ‘17% अल्पसंख्यकों और वंचितों को हाशिए पर धकेलने की साजिश’ राहुल गांधी ने भाजपा पर सामाजिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की 17% आबादी (मुसलमान, ईसाई, सिख) को यह अहसास कराया जा रहा है कि उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है. वहीं 10% आदिवासियों की जमीनों पर नजर है और 15% दलितों के सामाजिक दमन की अनदेखी की जा रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस देश के हर व्यक्ति—चाहे वह किसी भी धर्म, समुदाय, उम्र या लिंग का हो—को यह महसूस होना चाहिए कि यह देश उसका है. इसी सोच और व्यवस्था को बदलने के लिए आज संघर्ष की जरूरत है. ये भी पढ़ें: वंदे मातरम् पर कांग्रेस के फैसले से बढ़ा विवाद, अमित शाह बोले- तुष्टीकरण के लिए देश तक बांट दिया The post राहुल गांधी का बीजेपी-RSS पर हमला, कहा- देश में इस समय मुख्य लड़ाई विचारधारा की है appeared first on Naya Vichar.

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फैमिली से लेकर रोज ऑफिस जाने वालों तक, ये 3 इलेक्ट्रिक स्कूटर कर देंगे पेट्रोल की छुट्टी, जानें कीमत-खासियत

हिंदुस्तान में आज भी कई लोग रोजमर्रा की आवाजाही के लिए पेट्रोल स्कूटर को ही पहली पसंद मानते हैं. लेकिन अब इलेक्ट्रिक स्कूटर भी एक दमदार ऑप्शन बन चुके हैं. इनका खर्च कम होता है, तुरंत स्पीड पकड़ता है और एक बार चार्ज करने पर अच्छी दूरी भी तय कर लेता है. ऐसे में रोज ऑफिस या दूसरे कामों के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर चलाना अब मुश्किल नहीं लगता. बाजार में ऑप्शन भी काफी बढ़ गए हैं. फैमिली के लिए बने स्कूटर से लेकर किफायती मॉडल और ज्यादा परफॉर्मेंस वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर तक, हर तरह के खरीदार के लिए कुछ न कुछ मौजूद है. अगर आप भी नया स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं और पेट्रोल का झंझट नहीं चाहते, तो इन तीन इलेक्ट्रिक स्कूटरों पर जरूर नजर डाल सकते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में. Ather Rizta (एथर रिज्टा) अगर आप ऐसी स्कूटर चाहते हैं जो सिर्फ चलने के काम न आए, बल्कि परिवार के डेली यूज में भी पूरी तरह काम की हो, तो Ather Rizta इस लिस्ट में जरूर शामिल होगी. इसकी सबसे बड़ी खासियत ही इसकी प्रैक्टिकलिटी है. Ather Rizta को खास तौर पर फैमिली स्कूटर के तौर पर डिजाइन किया गया है. इसमें चौड़ी और कम्फर्टेबल सीट के साथ 34 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मिलता है.  इसमें अलग-अलग बैटरी ऑप्शन दिए गए हैं, जिनकी क्लेम्ड रेंज 159 km तक है. वहीं, इसकी टॉप स्पीड 80 kmph तक है. कीमत की बात करें तो Rizta की शुरुआती कीमत 1.21 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. इसमें ट्रैक्शन कंट्रोल, फॉल अलर्ट, पॉटहोल अलर्ट और हिल-होल्ड असिस्ट जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. ये भी पढ़ें: बिना लाइसेंस-रजिस्ट्रेशन के चला सकते हैं ये इलेक्ट्रिक स्कूटर, 80km+ रेंज और 24 लीटर स्टोरेज भी है खासियत TVS iQube (टीवीएस आईक्यूब) इसकी डिजाइन और राइडिंग पोजिशन काफी जानी-पहचानी है. यानी EV पर जाने के लिए आपको स्कूटर चलाने का अपना तरीका बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसमें 2.2kWh, 3.1kWh और 3.5kWh बैटरी के ऑप्शन मिलते हैं. इनमें 2.2kWh वाला वर्जन 94 km तक की रेंज का दावा करता है. इसके अलावा, TVS का मजबूत सर्विस नेटवर्क भी इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की बड़ी खासियत है. कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती कीमत 1.20 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. Vida VX2 (विडा वीएक्स2) इस लिस्ट में Vida VX2 सबसे ज्यादा दिलचस्प स्कूटरों में से एक है. इसकी सबसे बड़ी वजह है इसकी रिमूवेबल बैटरी. इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने वालों के लिए चार्जिंग कई बार परेशानी बन जाती है, खासकर तब जब आप अपार्टमेंट में रहते हों या स्कूटर ऐसी जगह पार्क करते हों जहां पास में पावर सॉकेट न हो. Vida VX2 इसी परेशानी का आसान समाधान देता है. इसमें लगी बैटरी को स्कूटर से निकालकर अलग से चार्ज किया जा सकता है. यानी स्कूटर को चार्जिंग पॉइंट तक ले जाने की जरूरत नहीं. इसके अलावा, इसमें 33.2 लीटर का बूट स्पेस भी मिलता है. Vida VX2 को अलग-अलग बैटरी कॉन्फिगरेशन के साथ खरीदा जा सकता है. इसकी कीमत वेरिएंट के हिसाब से ₹79,490 से लेकर ₹1.31 लाख (एक्स-शोरूम) तक जाती है. ये भी पढ़ें: Ather के नए इलेक्ट्रिक स्कूटर Konarc में मिलेगी मेटल बॉडी, CEO तरुण मेहता ने किया कन्फर्म, देखें वीडियो The post फैमिली से लेकर रोज ऑफिस जाने वालों तक, ये 3 इलेक्ट्रिक स्कूटर कर देंगे पेट्रोल की छुट्टी, जानें कीमत-खासियत appeared first on Naya Vichar.

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Women Asia Cup 2026: फाइनल में भारत जीता तो ट्रॉफी कौन देगा? नकवी को लेकर फिर बढ़ सकता है विवाद

Women Asia Cup 2026: स्त्री एशिया कप 2026 दुबई में 28 अगस्त से 13 सितंबर तक स्पोर्ट्सा जाएगा. हिंदुस्तान और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है और दोनों टीमें 5 सितंबर को आमने-सामने होंगी. हालांकि, दोनों की दूसरी भिड़ंत तभी हो सकती है, जब वे फाइनल तक पहुंचें. फाइनल जीता तो ट्रॉफी कौन देगा? इस टूर्नामेंट में एक दिलचस्प स्थिति बन सकती है. अगर हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली हिंदुस्तानीय टीम फाइनल जीतती है, तो सवाल उठेगा कि उसे ट्रॉफी कौन सौंपेगा. वजह यह है कि एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के प्रमुख मोहसिन नकवी ही ट्रॉफी देने वाले अधिकारी हो सकते हैं. पिछले साल पुरुष टीम ने ट्रॉफी लेने से किया था इनकार पिछले साल पुरुष एशिया कप जीतने के बाद हिंदुस्तानीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था. हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव और पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुए सैन्य टकराव के बीच यह फैसला लिया गया था. नकवी उस समय पाकिस्तान के मंत्री होने के साथ-साथ PCB और ACC के प्रमुख भी थे. विवाद इतना बढ़ा कि नकवी ट्रॉफी अपने साथ ले गए और बाद में भी इसे लेकर मामला सुलझ नहीं पाया. इसे भी पढ़े- रॉबिन उथप्पा ने चुनी 2027 वर्ल्ड कप की टीम, भुवी-वैभव के नाम ने खींचा ध्यान; ईशान को किया बाहर क्या स्त्री टीम भी अपनाएगी वही रास्ता? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर हिंदुस्तानीय स्त्री टीम चैंपियन बनती है तो क्या वह भी नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार करेगी? फिलहाल BCCI ने इस बारे में कोई साफ फैसला सार्वजनिक नहीं किया है. बोर्ड इस मामले में अभी ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना रहा है. बीसीसीआई की ओर से यह जरूर साफ किया गया है कि दोनों टीमों के बीच मैच के दौरान औपचारिकता से आगे कोई खास मेलजोल नहीं होगा. हरमनप्रीत कौर औऱ फातिमा सना, एक्स विवाद से बचने का एक रास्ता भी है मामले को टालने का सबसे आसान तरीका यह हो सकता है कि नकवी खुद ट्रॉफी न दें. उनकी जगह ACC का कोई दूसरा अधिकारी हिंदुस्तानीय टीम को ट्रॉफी सौंप सकता है. इससे पिछले साल जैसी स्थिति दोबारा बनने से बच सकती है. अब नजर टूर्नामेंट और फाइनल पर बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया की नकवी से मुलाकात भी हो चुकी है. सैकिया ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत की शुरुआत हुई है, लेकिन ट्रॉफी का मामला अब तक पूरी तरह सुलझा नहीं है. फिलहाल हिंदुस्तानीय टीम का पूरा ध्यान मैदान पर रहेगा. ट्रॉफी को लेकर विवाद तभी सामने आएगा, जब हिंदुस्तान फाइनल में पहुंचे और खिताब अपने नाम करे. ऐसे में स्त्री एशिया कप का फाइनल सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि प्रेजेंटेशन सेरेमनी के लिहाज से भी काफी दिलचस्प हो सकता है. इसे भी पढ़े- जो रूट बस 13 रन दूर, सचिन के इस खास रिकॉर्ड की करेंगे बराबरी The post Women Asia Cup 2026: फाइनल में हिंदुस्तान जीता तो ट्रॉफी कौन देगा? नकवी को लेकर फिर बढ़ सकता है विवाद appeared first on Naya Vichar.

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JSSC CGL मामले में पू्र्व CM रघुवर दास बोले- CBI जांच कराकर दोषियों को नौकरी से हटाए सरकार

रांची से सतीश सिंह की रिपोर्ट पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने छात्रों के समर्थन में अपना अनशन का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है. सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के बैनर तले आंदोलनरत छात्रों ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की है. छात्रों ने सीबीआई जांच की अनुशंसा के लिए 60 दिन का समय राज्य प्रशासन को दिया है. मैं छात्रों के संघर्ष, समर्पण और सरोकार को नमन करता हूं. मैं छात्रों की घोषणा का सम्मान करते हुए उनके निर्णय के समर्थन में अपना प्रस्तावित एकदिवसीय सांकेतिक अनशन स्थगित करता हूं. छात्रों की मांग पर प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम मैंने आंदोलनरत छात्रों के मंच से प्रशासन को चेतावनी दी थी कि एक सप्ताह में छात्रों की मांगे माने, अन्यथा मैं भी भगवान बिरसा मुंडा स्मारक स्थल में उत्पाद सिपाही दौड़ के दौरान जिन अभ्यर्थियों की मृत्यु हुई है, उन 19 बच्चों को श्रद्धांजलि देते हुए एकदिवसीय अनशन करूंगा. उन्होंने आगे कहा कि छात्रों के आंदोलन को भाजपा का नैतिक समर्थन भी प्राप्त था. छात्रों की कुछ मांगों पर प्रशासन ने निर्णय लिया है, लेकिन उनकी मुख्य मांग सीबीआई जांच की घोषणा है, जिसके लिए छात्रों ने 60 दिन का समय राज्य प्रशासन को दिया है. रघुवर दास ने प्रशासन के सामने रखीं तीन बड़ी मांगें मैं प्रशासन से मांग करता हूं कि परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराई जाए. उत्पाद सिपाही भर्ती में दौड़ के दौरान मारे गए 19 झारखंडी-मूलवासी छात्रों को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा दे. कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व के आदेशों के अनुसार JSSC CGL परीक्षार्थियों के मामले में पूरी नियुक्ति को रद्द न करें, बल्कि मेरिट वाले अभ्यर्थी और दागदार अभ्यर्थियों के बीच अंतर होना चाहिए, जिसके लिए व्यापक जांच जरूरी है. पूर्व सीएम ने यह भी कहा कि जो छात्र मेरिट के आधार पर चयनित हुए हैं, उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, लेकिन जो लेन-देन कर नौकरी में आये हैं वैसे छात्रों को चिह्नित कर प्रशासन उन्हें नौकरी से तत्काल बर्खास्त करे. ये भी पढ़ें: JSSC CGL रद्द होने के बाद नौकरी बचाने सड़क पर उतरे चयनित कर्मचारी, फ्लैश लाइट मार्च निकालकर जताया विरोध The post JSSC CGL मामले में पू्र्व CM रघुवर दास बोले- CBI जांच कराकर दोषियों को नौकरी से हटाए प्रशासन appeared first on Naya Vichar.

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वंदे मातरम् पर कांग्रेस के फैसले से बढ़ा विवाद, अमित शाह बोले- तुष्टीकरण के लिए देश तक बांट दिया

गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के निर्णय को संसद के बनाए कानून की खुली अवहेलना भी बताया है. कांग्रेस ने यह निर्णय 1937 के अपने प्रस्ताव और संविधान सभा में अपनाये गये रुख के अनुरूप बताया है. कांग्रेस के फैसले ने करवाया था देश विभाजन अमित शाहने गुरुवार को तमिलनाडु में कहा कि कांग्रेस ने 1937 में मुस्लिमों के तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् को दो हिस्सों में बांटा था और इसी फैसले की वजह से देश के विभाजन की नींव पड़ी. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब राहुल गांधी के नेतृत्व में उसी तुष्टीकरण की नेतृत्व को आगे बढ़ा रही है. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली प्रशासन ने कांग्रेस की इस गलती को सुधारा है और वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में कदम उठाया है. कांग्रेस के फैसले पर देश एकजुट हो अमित शाह ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत और स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले लोगों का अपमान करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि देश को कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होना चाहिए और तुष्टीकरण की नेतृत्व को स्वीकार नहीं करना चाहिए. गृहमंत्री ने कांग्रेस के फैसले की निंदा की है. बीजेपी के आरोपों को कांग्रेस ने खारिज किया कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया है. कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि पार्टी 1937 से ही वंदे मातरम् की पहली दो कड़ियां गाती रही है. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् कांग्रेस के लिए स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी भावनात्मक विरासत है, जबकि बीजेपी इसे नेतृत्वक मुद्दा बना रही है.कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CWC की बैठक में 1937 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस ने भी रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के आधार पर पहली दो कड़ियां गाने का समर्थन किया था. ये भी पढ़ें : BCI चेयरमैन मनन मिश्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को CJP का समर्थन, इस्तीफे की कर रहे हैं मांग The post वंदे मातरम् पर कांग्रेस के फैसले से बढ़ा विवाद, अमित शाह बोले- तुष्टीकरण के लिए देश तक बांट दिया appeared first on Naya Vichar.

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Video: लद्दाख में ‘हम Gen Z हैं’ कहकर जवानों से भिड़ी महिला, पूर्व सैन्य अधिकारियों ने लगाई फटकार

Ladakh Viral Video: लद्दाख के करगिल जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया तेजी से वायरल हुआ है. वीडियो में एक स्त्री पर्यटक चेक पोस्ट पर सुरक्षाबलों से बहस करती, चिखती-चिल्लाती नजर आ रही है. स्त्री पर्यटक सुरक्षा कर्मियों से सवाल करती दिख रही है कि पर्यटकों को आगे जाने से क्यों रोका जा रहा है. वह कश्मीर में लोगों पर लगने वाली पाबंदियों से भी इसकी तुलना करती सुनाई देती है. इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और सेना के जवानों को लेकर की गई टिप्पणियों पर बहस शुरू हो गई. पूर्व सैन्य अधिकारियों ने स्त्री के व्यवहार पर जताई नाराजगी मामला वायरल होने के बाद गुरुवार को कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने स्त्री की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई. उनका कहना है कि सीमा और संवेदनशील इलाकों में तैनात जवान कठिन हालात में ड्यूटी करते हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए. पूर्व अधिकारियों ने यह भी कहा कि सैनिक भी आम नागरिकों की तरह टैक्स देते हैं, इसलिए उनके योगदान और बलिदान को कम करके नहीं आंकना चाहिए. पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह ने जताई नाराजगी- मिजोरम के राज्यपाल और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह (रिटायर्ड) ने स्त्री की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों को बिना पूरी जानकारी के दोष देना या उनका अपमान करना गलत है. वीके सिंह ने कहा कि जवान देश और उसे नुकसान पहुंचाने वालों के बीच दीवार बनकर खड़े हैं. चिनार कॉर्प्स के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों- चिनार कॉर्प्स के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों (रिटायर्ड) ने भी वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सैनिक भी टैक्स देते हैं और उन्हीं की वजह से लोग सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षित घूम पाते हैं. जवान दिन-रात इन क्षेत्रों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं और कई बार अपनी जान तक जोखिम में डालते हैं. ढिल्लों ने स्त्री से कानून का पालन करने और सुरक्षा कर्मियों के साथ सम्मान से पेश आने की भी बात कही. पूर्व चिनार कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ- चिनार कॉर्प्स के एक अन्य पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ (रिटायर्ड) ने भी स्त्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह कहना कि सेना की तनख्वाह टैक्स के पैसे से आती है, सैनिकों के बलिदान को कम करके देखने जैसा है. उन्होंने कहा कि सेना के जवान भी टैक्स देते हैं. उमर अब्दुल्ला ने भी Gen Z वाली भाषा पर उठाया सवाल जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हम Gen Z हैं जैसी भाषा के इस्तेमाल पर सवाल उठाया. उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि छोटी-सी बात पर Gen Z की पहचान को धमकी की तरह इस्तेमाल करना इस पीढ़ी को लेकर बनी अच्छी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है. क्यों संवेदनशील माना जाता है मिनामार्ग इलाका? मिनामार्ग लद्दाख के कारगिल जिले में श्रीनगर-लेह हाईवे पर जोजी ला के पास स्थित है. यह सीमावर्ती और सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील इलाका माना जाता है, इसलिए यहां कई जगह सुरक्षा जांच और ट्रैफिक कंट्रोल किया जाता है. जोजी ला का रास्ता संकरा होने के साथ-साथ चट्टानें गिरने, भूस्खलन और अचानक मौसम बदलने के लिए भी जाना जाता है. सीमावर्ती क्षेत्र होने की वजह से यहां सुरक्षा व्यवस्था सामान्य इलाकों के मुकाबले ज्यादा सख्त रहती है. कई जगह सुरक्षा जांच, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक कंट्रोल किया जाता है. इस इलाके में चट्टानें गिरने और भूस्खलन का खतरा बना रहता है. खराब मौसम के दौरान सड़क पर सफर और भी मुश्किल हो सकता है. जोजी ला क्षेत्र में मौसम अचानक बदलने के लिए भी जाना जाता है. कुछ ही समय में तेज बारिश, बर्फबारी, धुंध या कम विजिबिलिटी जैसी स्थिति बन सकती है. सुरक्षा और मौसम से जुड़े खतरों को देखते हुए प्रशासन कई बार वाहनों को तय समय पर ही आगे बढ़ने की इजाजत देता है. कुछ स्थितियों में ट्रैफिक को रोककर चरणबद्ध तरीके से छोड़ा जाता है. यही वजह है कि मिनामार्ग और जोजी ला के आसपास सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी माना जाता है, खासकर जब सड़क, मौसम या सुरक्षा से जुड़े हालात सामान्य न हों. Also Read: पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बुलडोजर एक्शन, इस्लामाबाद की कार्रवाई का दिल्ली में जवाब The post Video: लद्दाख में ‘हम Gen Z हैं’ कहकर जवानों से भिड़ी स्त्री, पूर्व सैन्य अधिकारियों ने लगाई फटकार appeared first on Naya Vichar.

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गंगा एक्सप्रेसवे पर बढ़ा खतरा, सुरक्षा दीवार टूटी, 140 मीटर सड़क धंसी, मवेशियों की आवाजाही से बढ़ी चिंता

UP News: गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद सड़क और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है. सोनीका क्षेत्र में एक्सप्रेसवे की सुरक्षा दीवार टूटने के बाद आसपास की मिट्टी कटकर सड़क के किनारे तक पहुंच गई. करीब चार जगहों पर कुल 140 मीटर हिस्से में सड़क के किनारे जमीन धंस गई है. इससे तेज रफ्तार वाहनों के लिए खतरा बढ़ गया है और निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं. समाजवादी पार्टी ने भी मुख्यमंत्री से जवाब मांग है. सुरक्षा दीवार टूटने से मवेशियों की आवाजाही बढ़ी सुरक्षा दीवार टूटने के बाद एक्सप्रेसवे के किनारे लगाए गए घास के क्षेत्र में मवेशी पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, बारिश के कारण मिट्टी धंसने की समस्या सामने आई और खुले हिस्से से मवेशियों के आने-जाने का रास्ता बन गया है. इससे एक्सप्रेसवे पर अचानक पशुओं के पहुंचने की आशंका बनी हुई है. सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने पर किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता. तीन दिनों की बारिश ने खोली व्यवस्था की पोल पिछले तीन दिनों में हुई बारिश के दौरान कई स्थानों पर मिट्टी धंसने की स्थिति बनी. बारिश रुकने के बाद भी सड़क किनारे की मिट्टी में कटाव जारी रहा. बताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे के आसपास जल निकासी और मिट्टी को रोकने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण समस्या बढ़ी. बुधवार को बारिश नहीं होने के बावजूद पूरे दिन पैचवर्क का काम चलता रहा, ताकि क्षतिग्रस्त हिस्सों को जल्द ठीक किया जा सके. रोज उभर रहीं खामियां, सड़क पर चल रहा पैचवर्क एक्सप्रेसवे पर लगातार सामने आ रही खामियों ने निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क पर प्रतिदिन करीब एक हजार मीटर तक पैचवर्क किया जा रहा है. इसके बावजूद अलग-अलग स्थानों पर सड़क और किनारे की मिट्टी धंसने की शिकायतें सामने आ रही हैं. कई जगह सड़क की सतह खराब होने के साथ ही किनारे का हिस्सा भी कमजोर दिखाई दे रहा है. 26वें दिन भी सड़क की मरम्मत जारी एक्सप्रेसवे पर सड़क की मरम्मत और पैचवर्क का काम शुरू हुए 26 दिन हो चुके हैं. इसके बावजूद कई हिस्सों में समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे पर बार-बार सामने आ रही तकनीकी खामियां अब चर्चा का विषय बन गई हैं. स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल पैचवर्क करने के बजाय सड़क धंसने के मूल कारण की जांच कर स्थायी समाधान किया जाए. यह भी देखें: मेरठ में रिश्ते का खौफनाक अंत, बेटी ने प्रेमी संग मिलकर की मां की हत्या, नहर किनारे फेंका शव The post गंगा एक्सप्रेसवे पर बढ़ा खतरा, सुरक्षा दीवार टूटी, 140 मीटर सड़क धंसी, मवेशियों की आवाजाही से बढ़ी चिंता appeared first on Naya Vichar.

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