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आंदोलनों की आग से निकले इन 8 नेताओं को जानें, किसी ने संभाली सत्ता तो कोई रह गया संघर्ष की राह पर

देश के इतिहास पर अगर गौर करें तो कई ऐसे बड़े नेता हुए हैं, जिनकी नेतृत्वक यात्रा संसद या सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि सड़कों पर उठे आंदोलनों से शुरू हुई. किसी ने The post आंदोलनों की आग से निकले इन 8 नेताओं को जानें, किसी ने संभाली सत्ता तो कोई रह गया संघर्ष की राह पर appeared first on Naya Vichar.

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक ही मंच पर केजरीवाल और दीपके, फिर क्यों एजेंडे में मतभेद?

आम आदमी पार्टी और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच रिश्तों की चर्चा नई नहीं है. अभिजीत दीपके का AAP से पुराना रिश्ता कई बार सामने आ चुका है. देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन को लेकर एक एक बार फिर से इसकी चर्चा हो रही है. 2 अक्टूबर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जहां CJP ने मुंबई में प्रदर्शन किया वहीं दिल्ली में दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने मोर्चा संभाले रखा. लेकिन इसके बाद भी दोनों के एजेंडे में दूरियां दिखाई दे रही है. दरअसल, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के आंदोलन और अभिजीत दीपके द्वारा विपक्षी दलों से चुनाव बहिष्कार की अपील ने दोनों के बीच एक दिलचस्प नेतृत्वक स्थिति पैदा कर दी है. एक तरफ दीपके विपक्षी दलों से इस आंदोलन से नेतृत्वक दूरी बनाने की अपील कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल CJP से आंदोलन का एजेंडा बदलकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करने को कह रहे हैं. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP ने क्यों खोला मोर्चा? मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का मोर्चा द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद तेज हुआ. 23 सितंबर को प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयोग के भीतर मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर असहमति थी. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान कम-से-कम 14 मौकों पर मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने समेत चुनावी रोल से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी. इस रिपोर्ट के अगले दिन, 24 सितंबर 2026 को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं दिया गया तो देश भर में आंदोलन किया जाएगा. CJP ने इस आंदोलन को ‘जंतर-मंतर 2.0’ नाम दिया. दीपके ने विपक्षी दलों से क्या कहा? CJP ने नया आंदोलन कैसे और कहां होगा इसको लेकर प्रेस कांफ्रेंस की. इसमें अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें किसी नेतृत्वक दल का समर्थन या नेतृत्वक साथ नहीं चाहिए. लेकिन अगर किसी विपक्षी दल को वास्तव में लगता है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है, तो उसे केवल आरोप लगाने के बजाय चुनाव का बहिष्कार करना चाहिए. हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की ओर से एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं आई. तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने दीपके की चुनाव बहिष्कार वाली अपील का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि अगर विपक्षी दल चुनाव से बाहर हो जाते हैं तो इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है. लेकिन चुनाव बहिष्कार के अपील पर प्रतिक्रिया से अलग अरविंद केजरीवाल ने CJP के आंदोलन के मुद्दे पर अपना अलग सुझाव दिया है. ये भी पढ़ें: Delhi Protest : स्त्रीओं को घसीटा, युवकों से धक्का-मुक्की, पत्रकारों को भी नहीं छोड़ा; देखिए वीडियो केजरीवाल ने CJP से क्या अपील की थी? दिल्ली के पूर्व CM और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने CJP से कहा कि आपको सीधा ‘बॉस’ नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांगना चाहिए. 28 सितंबर को एक मीडिया चैनल से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि CJP वालों ने पहले इन्होंने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया और अब ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं. लेकिन आप कितनी बार जंतर मंतर पर जाएंगे? कितनी बार आंदोलन करेंगे? इसलिए बेहतर होगा सीधा ‘बॉस’ नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांगना चाहिए , क्योंकि ये सब अपने ‘बॉस’ के लिए कर रहे. दो दिन बाद केजरीवाल ने अपने बयान को ‘स्पेशल अपील’ के तौर पर फिर साझा किया और CJP से अपनी मांग दोहराई. हालांकि अभिजीत दीपके या CJP की ओर से केजरीवाल की इस अपील को लेकर कोई सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया है. CJP और अभिजीत दीपके का क्या है AAP कनेक्शन मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी चर्चा में आई. 15 मई को सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ बेरोजगार युवाओं और एक्टिविस्टों को लेकर ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. इसके बाद सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और इसे युवाओं के अपमान से जोड़कर आलोचना की गई, हालांकि, अगले ही दिन यानी 16 मई को CJI सूर्यकांत ने कहा कि उनकी टिप्पणी को मीडिया के एक हिस्से ने गलत तरीके से पेश किया. उनका निशाना उन लोगों पर था, जो फर्जी तरीके या फर्जी डिग्री के सहारे कानून, मीडिया और दूसरे पेशों में दाखिल हुए हैं. इस सबके बीच 16 मई 2026 को अभिजीत दीपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम से एक सटायरिकल ऑनलाइन अभियान शुरू किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद को ‘कॉकरोच’ कहे जाने वाले लोगों के लिए एक नए प्लेटफॉर्म की बात कही और लोगों को जुड़ने के लिए गूगल फॉर्म साझा किया. शुरुआत में यह पहल एक व्यंग्यात्मक डिजिटल प्रयोग के तौर तक सीमित थी, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के समर्थन मिलने के बाद यह जमीन पर आ गया. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं, मीडिया रिपोर्ट में उनके AAP के साथ काम करने और उसकी सोशल मीडिया टीम से जुड़े होने का कई जिक्र मिलते है. इसलिए आम आदमी पार्टी और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच रिश्तों की चर्चा होती रहती है. ये भी पढ़ें: अभिजीत दीपके ने नेहरू, गांधी और अंबेडकर की तारीफ करते हुए प्रशासन पर साधा निशाना, कहा- आपकी औकात नहीं अब दीपके चाहते हैं कि विपक्ष चुनाव बहिष्कार करे, जबकि केजरीवाल चाहते हैं कि CJP का आंदोलन ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग पर भी केंद्रित हो. The post ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक ही मंच पर केजरीवाल और दीपके, फिर क्यों एजेंडे में मतभेद? appeared first on Naya Vichar.

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Form 6: राहुल गांधी का आरोप, BJP को फायदा पहुंचाने के लिए ज्ञानेश कुमार ने गैरकानूनी तरीके से किया बदलाव

Form 6: राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, अब यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि ज्ञानेश कुमार ने Form 6 में गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किया. यह BJP की मदद के लिए उनके पद के दुरुपयोग का एक और सबूत है. वह और इस लोकतंत्र पर आपराधिक हमला करने में शामिल हर व्यक्ति जवाबदेह ठहराया जाएगा. राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के साथ चुनाव आयोग की एक पुरानी प्रेस विज्ञप्ति की तस्वीर भी साझा की. सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? राहुल गांधी की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने Form 6 के किसी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है. Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए किया जाता है. विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान इसके इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, “किसी भी संशोधित Form 6 को हमारी मंजूरी नहीं मिली है. यह स्पष्ट कर दें. जब रिकॉर्ड पेश किया जाएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि इसे किसने संशोधित किया.” पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं. ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को नोटिस भेजकर मांगा जवाब, जानें सस्पेंड करने से इनकार करते हुए क्या कहा? 26 सितंबर की ECI प्रेस विज्ञप्ति पर भी विवाद इस मामले में 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति भी चर्चा में है. इसमें कहा गया था कि SIR के लिए Form 6 के साथ लगाए गए घोषणा पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. वहीं, गैर-SIR अवधि के लिए Registration of Electors Rules, 1960 के तहत लागू Form इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई थी. CJP कार्यकर्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि आयोग ने बाद में इस प्रेस विज्ञप्ति को अपनी वेबसाइट से हटा लिया. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति में सुप्रीम कोर्ट द्वारा Form 6 के आदेश को बरकरार रखने की बात कही गई थी और अब उसे हटा दिया गया है. CEC के निलंबन की मांग वाली याचिका पर SC में सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को CEC ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर एकतरफा अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पहले चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को सुना जाना जरूरी है. पीठ ने केंद्र प्रशासन, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और DG (IT) सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पहले मामले से जुड़ी प्रमाणित जानकारी सामने आने दी जाए. पीठ ने यह भी कहा कि यदि रिकॉर्ड से किसी फैसले में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो कोर्ट उस फैसले को रद्द कर सकता है. 14 फैसलों को लेकर उठे सवाल याचिका में एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि SIR से जुड़े 14 महत्वपूर्ण फैसले चुनाव आयोग के नाम पर लिए गए, जबकि दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर इन पर आपत्ति दर्ज की थी. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने CEC के तत्काल निलंबन की मांग की. उनका कहना था कि कथित तौर पर एकतरफा तरीके से लिए गए फैसले चुनावी लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं. वकील ने Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की धारा 18 का भी हवाला दिया. इसके मुताबिक आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से होना चाहिए और सदस्यों के बीच मतभेद होने पर फैसला बहुमत से किया जाना चाहिए. ‘CEC को निलंबित किया तो चुनाव कौन कराएगा?’ सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने CEC को निलंबित करने की मांग की व्यवहारिकता पर भी सवाल उठाया. पीठ ने पूछा, “अगर CEC को निलंबित कर दिया गया तो चुनाव कौन कराएगा?” याचिकाकर्ता की ओर से जवाब दिया गया कि बाकी दो चुनाव आयुक्त आयोग का काम संभाल सकते हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि पहले आरोपों की जांच करनी होगी और संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद ही इस पर विचार किया जा सकता है. CJI सूर्यकांत ने कहा कि कानून में तय व्यवस्था का पालन जरूरी है. उन्होंने कहा कि अगर किसी तरह का उल्लंघन सामने आता है तो कोर्ट उसे रद्द कर सकता है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी सवाल उठाया कि चुनाव आयोग को सुने बिना इस तरह की राहत कैसे दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि अगर रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि फैसले सर्वसम्मति से नहीं लिए गए थे, तो कोर्ट उन्हें कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर सकता है. CJI ने यह भी कहा कि कोर्ट केवल अखबारों में प्रकाशित समाचारों के आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकता. Form 6 में बदलाव भी याचिका का अहम मुद्दा याचिका में चुनाव आयोग के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके अधिकारों का इस्तेमाल कानून में तय सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के तहत होना चाहिए. याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं. इनमें आयोग की मंजूरी के बिना ECI के नाम से संवाद जारी करने, लंबे समय तक बैठक के एजेंडा और मिनट्स साझा नहीं करने और दोनों चुनाव आयुक्तों की भागीदारी या मंजूरी के बिना चुनावी रोल से जुड़े सिस्टम में बदलाव जैसे आरोप शामिल हैं. Form 6 में बदलाव भी इसी विवाद का एक प्रमुख हिस्सा है. याचिका के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी कि SIR से जुड़े अतिरिक्त विवरण लेने के लिए Form 6 में बदलाव Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन के बिना नहीं किया जा सकता. दावा है कि बाद

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Breaking: नितेश तिवारी की ‘रामायण’ के सेट पर लगी आग! धुएं का गुबार देख मची अफरा-तफरी

नितेश तिवारी की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘रामायण’ को लेकर इस वक्त एक चौंकाने वाली समाचार सामने आ रही है. फिल्म के मुंबई स्थित शूटिंग सेट पर आग लगने की समाचार है. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सेट के आसपास आग की लपटें और धुएं का गुबार दिखाई दे रहा है. घटना के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल नजर आया. फिल्म सिने एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी ने नया विचार को कंफर्म करते हुए बताया कि गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी में रामायण के सेट पर आग लगी है. किसी को चोट नहीं, दो दिन पहले ही भेजा गया था चेतावनी पत्र नया विचार की एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, इस घटना में किसी के घायल होने की समाचार नहीं है. अधिकारी ने बताया कि करीब 10 दिन पहले भी रॉयल पाम में आग लगने की घटना हुई थी. इसके बाद दो दिन पहले ही फायर ऑफिसर को चेतावनी पत्र भेजा गया था. लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई अधिकारी ने कहा कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद इस तरह की घटनाएं होना गंभीर मामला है. उन्होंने लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही. फिलहाल आग लगने की असली वजह और घटना के समय वहां शूटिंग चल रही थी या नहीं, इसकी जांच की जा रही है. ये भी पढ़ें: ‘मर्यादा पुरुषोत्तम या हॉलीवुड हीरो?’ ‘रामायण’ में रणबीर कपूर के ओवरपावर्ड स्टंट्स पर फूटा मुकेश खन्ना का गुस्सा The post Breaking: नितेश तिवारी की ‘रामायण’ के सेट पर लगी आग! धुएं का गुबार देख मची अफरा-तफरी appeared first on Naya Vichar.

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यूपी से राज्यसभा के लिए BJP ने घोषित किए 8 उम्मीदवार, धर्मपाल सिंह से श्रुति गंगवार तक नाम शामिल

UP Rajya Sabha Election 2026: हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने पांच अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में इन नामों पर अपनी स्वीकृति दी है. सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं. पार्टी ने सभी नाम उत्तर प्रदेश के लिए जारी किए हैं. सूची में आठ नेताओं को मिला स्थान भाजपा की सूची में प्रमुख नामों को जगह मिली है. पहले क्रम पर धर्मपाल सिंह और दूसरे क्रम पर राधाकांत ओझा का नाम है. इसके बाद प्रकाश पाल और विद्यसागर सोनकर को उम्मीदवार बनाया गया है. पांचवें स्थान पर गोपी कृष्ण पाण्डेय का नाम दर्ज है. वहीं प्रियंका सिंह रावत को छठे, राम प्रताप सिंह चौहान को सातवें और श्रुति गंगवार को आठवें स्थान पर रखा गया है. पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इन नामों को मंजूरी दी है. केंद्रीय कार्यालय से जारी हुआ आधिकारिक पत्र उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की खाली होने वाली सीटों को लेकर नेतृत्वक गतिविधियां तेज हैं. भाजपा की ओर से आठ नाम सामने आने के बाद चुनावी तस्वीर स्पष्ट हो गई है. केंद्रीय कार्यालय से जारी पत्र में राज्य का नाम उत्तर प्रदेश दर्ज किया गया है. पत्र पर राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी तरुण चुग के हस्ताक्षर हैं. इसमें चुनाव को राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव 2026 बताया गया है. पार्टी ने उम्मीदवारों की सूची आधिकारिक रूप से जारी की है. आठ नाम तय होने के बाद बढ़ेगी चुनावी हलचल भाजपा की इस सूची के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में पार्टी की रणनीति स्पष्ट दिख रही है. आठ नाम तय होने से चुनावी मुकाबले को लेकर चर्चाएं तेज होने की संभावना है. अब इन उम्मीदवारों के नामांकन और आगे की चुनावी प्रक्रिया पर नजर रहेगी. पार्टी के केंद्रीय कार्यालय ने पत्र में सभी नाम क्रमवार दर्ज किए हैं. पांच अक्टूबर 2026 की तारीख वाले इस दस्तावेज में उम्मीदवारों की सूची दी गई है. Must Read: नहीं कटेगी अब UP में बिजली! आंधी-तूफान के बाद एक्शन में पावर कॉर्पोरेशन, देखिए कैसे मोबाइल पर मिलेगा पल-पल का अपडेट The post यूपी से राज्यसभा के लिए BJP ने घोषित किए 8 उम्मीदवार, धर्मपाल सिंह से श्रुति गंगवार तक नाम शामिल appeared first on Naya Vichar.

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मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार कार्ल डिसेरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नेगल को दिए जाने की घोषणा

फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार कार्ल डिसेरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नेगल को दिए जाने की घोषणा हुई है. यह पुरस्कार इन तीनों वैज्ञानिकों को उनके ‘लाइट-गेटेड आयन चैनल’ और ऑप्टोजेनेटिक्स से जुड़ी उनकी खोजों के लिए दिया गया है. इस पुरस्कार की घोषणा सोमवार को नोबेल असेंबली ने की. वो एक्स पोस्ट देखें जिसमें पुरस्कार की घोषणा हुई- इन वैज्ञानिकों की खोज ने न्यूरोसाइंस यानी मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के अध्ययन को एक नई दिशा दी है. ऑप्टोजेनेटिक्स ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए वैज्ञानिक प्रकाश की मदद से जीवित मस्तिष्क में मौजूद खास तंत्रिका कोशिकाओं यानी न्यूरॉन्स की गतिविधि को नियंत्रित कर सकते हैं. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि मस्तिष्क की अलग-अलग कोशिकाएं याददाश्त, भावनाओं और व्यवहार को कैसे प्रभावित करती हैं. आखिर क्या है लाइट-गेटेड आयन चैनल? हमारे शरीर की कोशिकाओं में मौजूद आयन चैनल ऐसे प्रोटीन होते हैं, जो कोशिका की झिल्ली के आर-पार करंट वाले कणों यानी आयनों की आवाजाही को नियंत्रित करते हैं. न्यूरॉन्स के काम करने में इस करंट गतिविधि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को नोटिस भेजकर मांगा जवाब, जानें सस्पेंड करने से इनकार करते हुए क्या कहा? The post मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार कार्ल डिसेरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नेगल को दिए जाने की घोषणा appeared first on Naya Vichar.

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धमाके से कांपा गाजियाबाद: रावण के पुतले में पटाखे भरते ही हुआ जोरदार ब्लास्ट, नाबालिगों समेत 5 लोग दिल्ली रेफर

Ghaziabad Blast: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में दशहरा से पहले बड़ा हादसा हो गया. साहिबाबाद थाना क्षेत्र के लाजपत नगर में रामलीला के लिए तैयार किए जा रहे रावण और कुंभकर्ण के पुतले में अचानक ब्लास्ट हो गया. हादसे में पांच लोग घायल हो गए हैं. सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. सामुदायिक भवन में चल रही थी पुतला बनाने की तैयारी, सुबह 8:30 बजे हुआ हादसा पुलिस के मुताबिक हादसा सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे हुआ. लाजपत नगर में शनि चौकी के पास स्थित एक सामुदायिक भवन में आगामी दशहरे के लिए रामलीला के पुतले तैयार किए जा रहे थे. यहां रावण और कुंभकर्ण के पुतले बनाए जा रहे थे. इसी दौरान रावण के पुतले में दशहरे पर दहन के लिए पटाखे भरे जा रहे थे. पटाखे भरने की इसी प्रक्रिया के दौरान अचानक छोटी सी चिंगारी भड़की और इसके बाद जोरदार धमाका हो गया. धमाके के बाद वहां काम कर रहे लोगों में अफरा-तफरी मच गई. पिलखुवा के अनिल सिंह को मिला था ठेका, कारीगर कर रहे थे काम एसीपी साहिबाबाद अमित सक्सेना के अनुसार पुलिस को सामुदायिक भवन में ब्लास्ट होने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया. शुरुआती जांच में पता चला कि वहां रामलीला के लिए रावण का पुतला तैयार किया जा रहा था. पुतला बनाने का ठेका पिलखुवा निवासी अनिल सिंह को दिया गया था. उनके कारीगर और मजदूर सामुदायिक भवन में पुतले तैयार कर रहे थे. दशहरे के दौरान पुतला दहन के लिए उसमें पटाखे भरे जा रहे थे और इसी दौरान आग लगने से विस्फोट हो गया. दो घायल सफदरजंग और तीन GTB अस्पताल में रेफर, कुछ नाबालिग भी शामिल ब्लास्ट के बाद घायलों को तत्काल नजदीकी अंबे अस्पताल ले जाया गया. वहां प्राथमिक उपचार के बाद दो घायलों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल और तीन घायलों को जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया. पुलिस के मुताबिक घायलों में कुछ नाबालिग भी हैं. कुछ की हालत गंभीर बताई गई है जबकि कुछ को मामूली चोटें आई हैं. पुलिस ने क्या बताया, क्या पटाखा फैक्ट्री चल रही थी एसीपी ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच में यह मामला पटाखे बनाने या पटाखों का कारोबार करने से जुड़ा नहीं मिला है. पुलिस के मुताबिक सामुदायिक भवन में पटाखे बनाने का काम नहीं हो रहा था और न ही वहां पटाखों की बिक्री या कारोबार संचालित किया जा रहा था. वहां रावण का पुतला तैयार किया जा रहा था और दहन के लिए उसमें पटाखे भरे जा रहे थे. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि पटाखे भरते समय सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए गए थे या नहीं. साथ ही आग लगने की वास्तविक परिस्थितियों का भी पता लगाया जा रहा है. जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. Must Read- UPPSC Exam Calendar 2026 Out: अक्टूबर से दिसंबर तक की परीक्षाओं का शेड्यूल जारी, PCS प्रीलिम्स समेत देखें पूरी लिस्ट The post धमाके से कांपा गाजियाबाद: रावण के पुतले में पटाखे भरते ही हुआ जोरदार ब्लास्ट, नाबालिगों समेत 5 लोग दिल्ली रेफर appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Daroga Candidate Protest : पटना में प्रदर्शनकारी दारोगा अभ्यर्थियों को पुलिस ने रोका, अनाउंसमेंट कर कहा- डेलीगेशन तैयार करें…

Bihar Doroga Bharti Exam Protest LIVE : बिहार पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे. गर्दनीबाग में जारी धरना प्रदर्शन के बीच आज उनका गुस्सा फूट पड़ा. परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है. The post Bihar Daroga Candidate Protest : पटना में प्रदर्शनकारी दारोगा अभ्यर्थियों को पुलिस ने रोका, अनाउंसमेंट कर कहा- डेलीगेशन तैयार करें… appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Doroga Bharti Exam Protest LIVE : बिहार पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे. गर्दनीबाग में जारी धरना प्रदर्शन के बीच आज उनका गुस्सा फूट पड़ा. परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है. The post Bihar Daroga Candidate Protest : पटना में प्रदर्शनकारी दारोगा अभ्यर्थियों को पुलिस ने रोका, अनाउंसमेंट कर कहा- डेलीगेशन तैयार करें… appeared first on Naya Vichar.

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CEC ज्ञानेश कुमार के सस्पेंशन पर SC का इनकार, ECI से मांगा जवाब

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन आरोपों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है. कोर्ट ने संकेत दिया कि चुनाव आयोग का जवाब मिलने के बाद अगर यह सामने आता है कि कुछ फैसले जरूरी सर्वसम्मति के बिना लिए गए थे, तो उन फैसलों पर दोबारा विचार किया जा सकता है या उन्हें वापस लिया जा सकता है. कोर्ट ने कहा, “नोटिस के बाद अगर वे आकर दिखाते हैं कि ABC फैसले सर्वसम्मति के बिना लिए गए थे, तो हम उन फैसलों को वापस ले लेंगे.” याचिकाओं में किन मांगो का किया जिक्र पटना निवासी राकेश कुमार सिंह ने एक याचिका दायर की है. इसमें सुप्रीम कोर्ट से पूछा गया है कि क्या CEC ज्ञानेश कुमार ने ऐसे अधिकारों का इस्तेमाल अकेले किया, जो पूरे चुनाव आयोग को मिलकर करने थे. याचिका में ऐसे फैसलों को कानूनी अधिकार के बिना लिया गया फैसला घोषित करने की मांग की गई है. वहीं, अंतिम फैसला आने तक ज्ञानेश कुमार को CEC के कामकाज से अलग रखने की भी मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है. इसलिए उसके सामूहिक अधिकारों का इस्तेमाल केवल CEC अकेले नहीं कर सकते. इसके लिए याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला दिया गया है. ये भी पढ़ें: जंतर-मंतर के ‘हीरो’ विवेक भगत, जुलाई में जख्मी होकर साथी को बचाया, अब स्त्री पत्रकार से बदसलूकी के आरोप में घिरे दूसरी याचिका में क्या आरोप? अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में भी CEC के कथित तौर पर एकतरफा फैसले लेने पर सवाल उठाया गया है. इसमें कथित वैधानिक उल्लंघनों को लेकर CEC और दूसरे अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है. याचिका में SIR के दौरान Form 6 में कथित बदलाव का भी मुद्दा उठाया गया है. Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सॉफ्टवेयर के जरिए इसमें पूर्व SIR से जुड़े विवरण और वंश संबंधी जानकारी की जरूरत जोड़ी गई, जबकि इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. The post CEC ज्ञानेश कुमार के सस्पेंशन पर SC का इनकार, ECI से मांगा जवाब appeared first on Naya Vichar.

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