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बीजेपी से MLC बनेंगे पवन सिंह, संजय मयूख फिर बने उम्मीदवार, BJP ने 4 नामों पर लगाई मुहर

BJP MLC Candidate: हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने चार उम्मीदवारों को मंजूरी दी है. जारी सूची के अनुसार पवन सिंह, डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया गया है. पार्टी ने इन नामों पर अंतिम सहमति दे दी है. उम्मीदवारों की सूची जदयू ने भी उम्मीदवारों की घोषणा की जनता दल यूनाइटेड ने भी बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने निशांत कुमार, हिंदुस्तानी मंडल, ललन प्रसाद और शिवरानी देवी को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है. जेडीयू की ओर से पटना सीट के लिए निशांत कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीट से ललन प्रसाद को पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है. मधुबनी से हिंदुस्तानी मेहता को और पश्चिमी चंपारण से शिवरानी देवी प्रजापति को जदयू ने बिहार विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया है. जदयू में तीन अति पिछड़े, भाजपा में दो सवर्ण और दो अति पिछड़े एनडीए के आठ घोषित उम्मीदवारों में पांच अतिपिछड़ों को जगह दी गयी है. एक स्वास्थ्य मंत्री नियशांत पिछड़े वर्ग से उम्मीदवार बनाये गये हैं. जबकि भाजपा के चार उम्मीदवारों में संजय मयूख और पवन सिंह सवर्ण उम्मीदवार बनाये गये हैं. जबकि शीला पंडित और अनिल कुमार ठाकुर अति पिछड़े समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे. जदयू के चारों नये चेहरे, भाजपा में संजय मयूख तीसरी बार बनेंगे एमएलसी जदयू ने जिन चार उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है. उनमें सभी नये चेहरे हैं. चारों उम्मीदवार पहली बार किसी सदन के सदस्य होंगे. भाजपा के चार उम्मीदवारों में संजय मयूख तीसरी बार उम्मीदवार बनाये गये हैं. पार्टी ने उनके नाम पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर उपरी सदन भेजने का फैसला लिया है. तीन अन्य उम्मीदवार पवन सिंह, अनिल ठाकुर और शीला पंडित पहली बार उम्मीदवार बनायी गयी हैं. कैसे तय होती है जीत 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में 9 विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव होना है. ऐसे में जीत का आंकड़ा कुल मतदान करने वाले विधायकों की संख्या के आधार पर तय किया जाता है. अगर सभी 243 विधायक वोट डालते हैं, तो चुनावी नियमों के अनुसार जीत का कोटा निकाला जाता है. इसके लिए कुल वोट मूल्य 24300 माना जाता है, क्योंकि हर विधायक के वोट की कीमत 100 होती है. इसके बाद 24300 को 10 से भाग दिया जाता है, क्योंकि 9 सीटों के साथ एक संख्या और जोड़ी जाती है. इससे आंकड़ा 2430 आता है. इसमें 1 जोड़ने पर जीत का कोटा 2431 हो जाता है. यानी किसी भी उम्मीदवार को जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 2431 वोट मूल्य हासिल करना होगा. आसान भाषा में कहें तो लगभग 25 विधायकों की पहली वरीयता का समर्थन किसी उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त माना जाता है. एनडीए और महागठबंधन की स्थिति वर्तमान समय में विधानसभा में एनडीए के पास जदयू, भाजपा, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो को मिलाकर 202 विधायक हैं. इस संख्या के आधार पर एनडीए आसानी से 8 सीटें जीत सकता है. दूसरी तरफ महागठबंधन के पास राजद, कांग्रेस, माले, सीपीएम और अन्य सहयोगी दलों को मिलाकर 35 से ज्यादा विधायक हैं. इसके अलावा एआईएमआईएम और बसपा के विधायक भी विपक्षी खेमे में हैं. कुल मिलाकर विपक्ष के पास लगभग 41 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त हैं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें दूसरी वरीयता के वोट क्यों अहम यदि पहली वरीयता के वोटों से सभी सीटों का फैसला नहीं हो पाता, तो दूसरी वरीयता के मतों की गिनती शुरू होती है. इसी प्रक्रिया से पहले भी राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शिवेश राम को जीत मिली थी. उस चुनाव में कई उम्मीदवार पहले दौर में ही जीत गए थे. उनके अतिरिक्त वोटों की वैल्यू निकालकर दूसरी वरीयता के आधार पर दूसरे उम्मीदवार को ट्रांसफर किया गया. इसी वजह से शिवेश राम जीत का आंकड़ा पार कर सके थे. इसे भी पढ़ें: ‘खड़े होकर क्या कर रहे, गोली चलाओ’, खान सर के आदेश पर बॉडीगार्ड्स ने दागी गोलियां कोचिंग की छुट्टी होने के बाद पटना पुलिस खान सर पर कस सकती है शिकंजा, प्रशासन ने की ये अपील The post बीजेपी से MLC बनेंगे पवन सिंह, संजय मयूख फिर बने उम्मीदवार, BJP ने 4 नामों पर लगाई मुहर appeared first on Naya Vichar.

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JDU ने जारी की MLC कैंडिडेट्स की लिस्ट, नीतीश के बेटे निशांत भी बने उम्मीदवार

Bihar MLC Election JDU Candidates List: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. पार्टी ने चार सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर दिए हैं. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को पार्टी ने पटना से मैदान में उतारा है. कौन कहां से लड़ेंगे चुनाव? पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, निशांत कुमार- पटना, हिंदुस्तानी मेहता- मधुबनी, शिवरानी देवी प्रजापति- पश्चिमी चंपारण और ललन प्रसाद को शेखपुरा से उम्मीदवार बनाया गया है. इन नामों की घोषणा के साथ ही विधान परिषद चुनाव को लेकर नेतृत्वक सरगर्मी तेज हो गई है. निशांत कुमार की उम्मीदवारी पर सबसे ज्यादा चर्चा इस चुनाव में सबसे ज्यादा नजरें निशांत कुमार पर टिकी हैं. वह फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, जबकि राज्य प्रशासन में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. संवैधानिक प्रावधानों के तहत मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें शपथ लेने के छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है. ऐसे में उनका विधान परिषद चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा था. निशांत कुमार पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र हैं. लंबे समय तक सक्रिय नेतृत्व से दूर रहने के बाद अब उनकी औपचारिक नेतृत्वक पारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं. ललन प्रसाद को भी मिला मौका JDU ने ललन प्रसाद को भी उम्मीदवार बनाया है. पार्टी उन्हें संगठन में सक्रिय और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं में गिनती है. वे अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) समाज से आते हैं और लंबे समय से संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं. स्थानीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें यह मौका दिया गया है. 10 सीटों पर होना है चुनाव बिहार विधान परिषद की कुल 10 सीटों के लिए चुनाव होना है, जिसमें एक सीट पर उपचुनाव भी शामिल है. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है. यदि जरूरत पड़ी तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा. Also Read: ‘शिक्षक पढ़ाता है, मीडियाबाजी नहीं करता, हाइलाइट होने के लिए ये सब हो रहा…’, खान सर पर बरसे तेज प्रताप यादव The post JDU ने जारी की MLC कैंडिडेट्स की लिस्ट, नीतीश के बेटे निशांत भी बने उम्मीदवार appeared first on Naya Vichar.

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अमित शाह ने त्रिपुरा में कहा- बाॅर्डर इलाकों में डेमोग्राफिक चेंज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

Amit Shah : गृहमंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा के हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीमा पर कहा कि हम डेमोग्राफिक चेंज की इजाजत किसी कीमत पर नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की सीमा हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह ऐलान लंकामुरा सीमा चौकी पर बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए किया. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि सीआरपीएफ और बीएसएफ के सभी जवान एक पेड़ को अपना भाई बहन या बच्चा मानकर पूरी श्रद्धा से उसकी देखभाल कर रहे हैं. डेमोग्राफिक चेंज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चेतावनी के अंदाज में कहा कि सीमावर्ती राज्यों में किसी भी डेमोग्राफिक चेंज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया. उन्होंंने घुसपैठ को रोकने के लिए सख्त निगरानी और स्मार्ट बॉर्डर परियोजना लागू करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि चाहे त्रिपुरा हो, चाहे पश्चिम बंगाल या फिर बिहार, हम किसी भी कीमत पर डेमोग्राफिक चेंज नहीं होने देंगे. यह हमारा अटल विश्वास और अटल संकल्प है. स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट के माध्यम से की जाएगी निगरानी केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा कि सीमा की सुरक्षा को बेहतर और मजबूत करने के लिए प्रशासन की ओर से स्मार्ट बॉर्डर परियोजना लागू की जा रही है. इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश के सात से आठ स्थानों पर लागू किया जाएगा. इसमें आधुनिक तकनीक और स्थानीय प्रशासन का समन्वय शामिल किया जाएगा. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शून्य से लेकर 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी अनधिकृत अतिक्रमण को बिल्कुल बर्दाश्त न करने (Zero-tolerance) की नीति अपनाई गई है. गृहमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में कट्टरपंथी केंद्रों,संदिग्ध वाहनों और फर्जी कंपनियों पर कड़ी निगरानी रखने के आदेश दिए हैं. एक पेड़ मां के नाम कोई प्रशासनी कार्यक्रम नहीं विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदुस्तान ब‍ांग्लादेश बॉर्डर को जोड़ने वाली लंकामुरा सीमा चौकी पर तैनात बीएसएफ के जवानों की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि यहां चौकी स्थापना के लिए कितने पेड़ों को काटना पड़ा, लेकिन खुशी इस बात की है कि हमारे जवान पेड़ लगाने का कार्य कर रहे हैं. गृहमंत्री ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम, यह प्रशासनी आदेशों से प्रेरित कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह हमारी स्वाभाविक आदत होनी चाहिए. The post अमित शाह ने त्रिपुरा में कहा- बाॅर्डर इलाकों में डेमोग्राफिक चेंज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा appeared first on Naya Vichar.

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पटना हाईकोर्ट को मिलीं नई महिला चीफ जस्टिस, जानिए कौन हैं न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय

Patna High Court Chief Justice: बिहार की न्यायपालिका के लिए शुक्रवार का दिन खास रहा. न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय ने पटना उच्च न्यायालय की नई मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली. पटना के लोकभवन में आयोजित समारोह में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री श्रवण कुमार और पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. शपथ समारोह में मौजूद अतिथि न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू की जगह संभालेंगी जिम्मेदारी न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय ने इस पद पर संगम कुमार साहू का स्थान लिया है. न्यायमूर्ति साहू 4 जून को सेवानिवृत्त हुए थे. अब पटना हाईकोर्ट की कमान न्यायमूर्ति राय के हाथों में होगी. माना जा रहा है कि उनके लंबे अनुभव का लाभ बिहार की न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा. 30 साल से ज्यादा का न्यायिक अनुभव सिक्किम से संबंध रखने वाली न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय का न्यायिक क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है और न्यायपालिका में अपनी अलग पहचान बनाई है. उनका नाम ईमानदार, अनुभवी और कुशल न्यायिक अधिकारियों में गिना जाता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई न्यायमूर्ति मीनाक्षी राय का जन्म 12 जुलाई 1964 को सिक्किम में हुआ था. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित लेडी श्री राम कॉलेज से नेतृत्व विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की. इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की. वर्ष 1990 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया और दिल्ली हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में वकालत की. सिक्किम की पहली स्त्री जज बनने का गौरव 1990 में ही उनका चयन सिक्किम न्यायिक सेवा में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सह सिविल जज के पद पर हुआ था. इस उपलब्धि के साथ वह सिक्किम की पहली स्त्री बनीं, जिन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया था. यह उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है. कई अहम पदों पर निभाई जिम्मेदारी अपने लंबे न्यायिक करियर में न्यायमूर्ति मीनाक्षी राय ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट जज, रजिस्ट्रार जनरल, एनडीपीएस कोर्ट की जज और भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष न्यायाधीश जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. उन्होंने न्यायपालिका के प्रशासनिक और न्यायिक दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. 2015 में बनीं हाईकोर्ट की जज 15 अप्रैल 2015 को उन्हें सिक्किम हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. करीब एक दशक तक हाईकोर्ट में सेवाएं देने के बाद अब उन्हें पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी गई है. Also Read: ‘शिक्षक पढ़ाता है, मीडियाबाजी नहीं करता, हाइलाइट होने के लिए ये सब हो रहा…’, खान सर पर बरसे तेज प्रताप यादव The post पटना हाईकोर्ट को मिलीं नई स्त्री चीफ जस्टिस, जानिए कौन हैं न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम. राय appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड से गुजरने वाली 10 ट्रेनों के परिचालन में बदलाव, देखें पूरी लिस्ट और डेट

Indian Railways: पुरी रेलवे स्टेशन पर चल रहे प्लेटफॉर्म और यात्री सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों के कारण हिंदुस्तानीय रेलवे ने कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के परिचालन में अस्थायी बदलाव करने का निर्णय लिया है. ईस्ट कोस्ट रेलवे द्वारा किए जा रहे इस कार्य को देखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल ने प्रभावित ट्रेनों की सूची जारी की है. रेलवे के अनुसार निर्धारित अवधि के दौरान कुल 10 ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट और शॉर्ट ऑरिजिनेट किया जाएगा. रेलवे प्रशासन का कहना है कि विकास कार्य पूरा होने के बाद यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी. हालांकि फिलहाल कुछ दिनों तक यात्रियों को यात्रा योजना बनाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी. पुरी-कामाख्या एक्सप्रेस के परिचालन में बदलाव रेलवे द्वारा जारी सूचना के अनुसार 15643 पुरी-कामाख्या एक्सप्रेस 6, 13 और 20 जून को पुरी स्टेशन तक नहीं जाएगी. यह ट्रेन मालतीपतपुर स्टेशन तक ही संचालित होगी. इसी प्रकार 15644 कामाख्या-पुरी एक्सप्रेस 4, 11 और 18 जून को मालतीपतपुर स्टेशन में अपनी यात्रा समाप्त करेगी. इस बदलाव के कारण पुरी जाने वाले यात्रियों को मालतीपतपुर स्टेशन से वैकल्पिक साधनों का उपयोग करना पड़ सकता है. दुरंतो एक्सप्रेस भी रहेगी प्रभावित यात्रियों के बीच लोकप्रिय 22201 सियालदह-पुरी दुरंतो एक्सप्रेस भी इस बदलाव से प्रभावित होगी. यह ट्रेन 5, 8, 10, 12, 15, 17 और 19 जून को मालतीपतपुर स्टेशन में ही अपनी यात्रा समाप्त करेगी. 22202 पुरी-सियालदह दुरंतो एक्सप्रेस 4, 6, 9, 11, 13, 16, 18 और 20 जून को पुरी स्टेशन के बजाय मालतीपतपुर स्टेशन से रवाना होगी. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यात्रियों को टिकट और यात्रा संबंधी जानकारी पहले से जांच लेने की सलाह दी गई है ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो. कामाख्या-पुरी एक्सप्रेस के रूट में भी अस्थायी परिवर्तन रेलवे ने बताया कि 15640 कामाख्या-पुरी एक्सप्रेस 7 और 14 जून को मालतीपतपुर स्टेशन में ही अपनी यात्रा समाप्त करेगी. 15639 पुरी-कामाख्या एक्सप्रेस 9 और 16 जून को मालतीपतपुर स्टेशन से ही अपने निर्धारित गंतव्य के लिए रवाना होगी. इन ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को विशेष रूप से अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करने की आवश्यकता होगी. राउरकेला-पुरी एक्सप्रेस पर भी पड़ा असर पुरी स्टेशन पर चल रहे विकास कार्य का असर राउरकेला-पुरी एक्सप्रेस पर भी पड़ा है. रेलवे के अनुसार 18125 राउरकेला-पुरी एक्सप्रेस 4 जून से 19 जून तक खुर्दा रोड स्टेशन में ही अपनी यात्रा समाप्त करेगी. इसी प्रकार 18126 पुरी-राउरकेला एक्सप्रेस 5 जून से 20 जून तक पुरी स्टेशन के बजाय खुर्दा Road स्टेशन से संचालित की जाएगी. इससे ओडिशा और झारखंड के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को कुछ अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ सकती हैं. मेमू ट्रेनों के परिचालन में भी बदलाव दैनिक यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण 68441 जलेश्वर-पुरी मेमू और 68442 पुरी-जलेश्वर मेमू के परिचालन में भी बदलाव किया गया है. रेलवे के अनुसार दोनों मेमू ट्रेनें 4 जून से 20 जून तक क्रमशः खुर्दा रोड स्टेशन में समाप्त होंगी और वहीं से अपनी यात्रा शुरू करेंगी. इस बदलाव का असर स्थानीय और दैनिक यात्रियों पर अधिक पड़ सकता है, जो नियमित रूप से इन ट्रेनों का उपयोग करते हैं. इसे भी पढ़ें: हटिया-पूर्णिया कोर्ट एक्सप्रेस में ब्रेक बाइंडिंग से मचा हड़कंप, हजारीबाग रोड स्टेशन पर रुकी रही ट्रेन; यात्री परेशान यात्रियों से रेलवे की अपील रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की अद्यतन स्थिति अवश्य जांच लें. विकास कार्य के दौरान ट्रेनों के परिचालन में अस्थायी बदलाव किए गए हैं, इसलिए स्टेशन पहुंचने से पहले समय और प्रस्थान स्थल की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पुरी स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों का उद्देश्य यात्रियों को भविष्य में बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है. कार्य पूरा होने के बाद स्टेशन की क्षमता और यात्री सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा. इसे भी पढ़ें: बरौनी जंक्शन पर यात्रियों की भारी भीड़, समर स्पेशल ट्रेनों की देरी से बढ़ीं मुश्किलें The post झारखंड से गुजरने वाली 10 ट्रेनों के परिचालन में बदलाव, देखें पूरी लिस्ट और डेट appeared first on Naya Vichar.

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कौन हैं अन्नामलाई जिनके बीजेपी छोड़ने पर मचा हड़कंप? तमिलनाडु की राजनीति में आ सकता है नया मोड़

K Annamalai : के अन्नामलाई तमिलनाडु में बीजेपी के ऐसे नेता थे, जिन्होंने प्रदेश में बीजेपी की अलग पहचान बनाने की कोशिश की और उसकी छवि सहयोगी पार्टी से बदलकर एक स्वतंत्र छवि वाली पार्टी के रूप स्थापित की. उन्होंने अपने कार्यों से तमिलनाडु में बीजेपी की पहचान को मजबूत बनाया और उसका वोट शेयर बढ़ाया, लेकिन जिस अन्नामलाई को तमिलनाडु में बीजेपी के भविष्य के रूप में देखा जा रहा था, वह पार्टी से अलग हो गए हैं और अपनी अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है, आइए समझते हैं कि क्या है इसकी वजह और कौन हैं अन्नामलाई और कैसा रहा है उनका सफर- कौन हैं के अन्नामलाई? तमिलनाडु की नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में के अन्नामलाई का नाम काफी तेजी से चर्चित हुआ है. इन्होंने अपने बूते अपनी पहचान बनाई. पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई का जन्म तमिलनाडु के करूर जिले में हुआ था. इन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद एमबीए किया और फिर 2011 में यूपीएससी की परीक्षा पास की. वे कर्नाटक कैडर के आईपीएस थे. उन्होंने उडुपी और चिकमंगलूर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया. उनकी छवि एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की थी, जिन्हें सिंघम उपनाम भी दिया गया था. 2011 से 2019 तक उन्होंने पुलिस सेवा में काम किया और फिर 2019 में इस्तीफा देकर नेतृत्व में आ गए. महज 42 साल के अन्नामलाई नेतृत्व के क्षेत्र में भी कुछ अलग करना चाहते हैं. उन्होंने दो बार चुनाव लड़ा, लेकिन एक बार भी उन्हें विजय नहीं मिली. वे एक बार विधानसभा का चुनाव लड़े थे और दूसरी बार लोकसभा का. बीजेपी के साथ नेतृत्वक सफर गृहमंत्री अमित शाह के साथ अन्नामलाई आईपीएस की नौकरी छोड़ने के बाद अगस्त 2020 में अन्नामलाई ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया. उस वक्त उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने पार्टी को प्रदेश में आगे बढ़ाने का काफी प्रयास किया. उनके सबसे चर्चित अभियानों में ‘एन मन्न, एन मक्कल’ (मेरी धरती, मेरे लोग) यात्रा है. इस यात्रा के जरिए अन्नामलाई ने पूरे तमिलनाडु का दौरा किया और खुद को बीजेपी को राज्य स्तर पर स्थापित करने का पूरा प्रयास किया. इस काम में उन्हें सफलता भी मिली और वे बीजेपी के लिए भविष्य के नेता बन गए. अन्नामलाई ने लगातार डीएमसे प्रशासन पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के आरोप लगाए. उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस और दस्तावेजों के साथ किए गए हमले ने खूब सुर्खियां भी बटोरीं. रिश्तों में तकरार कैसे शुरू हुई? जिस अन्नामलाई को बीजेपी के भविष्य के तौर पर देखा जा रहा था. उसी अन्नामलाई के साथ बीजेपी के रिश्ते खराब होने लगे. इसकी सबसे बड़ी वजह बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन था. अन्नामलाई डीएमके और एआईएडीएमके के खिलाफ नेतृत्व करना चाहते हैं, जबकि बीजेपी उनका साथ चाह रही थी. अन्नामलाई यह चाहते थे कि इन दोनों पार्टियों से अलग विकल्प के रूप में बीजेपी उभरे, ताकि उसे जनता का पूरा समर्थन मिले. लेकिन बीजेपी नेतृत्व ने 2026 विधानसभा चुनाव से पहले AIADMK के साथ गठबंधन कर लिया. यह गठबंधन अन्नामलाई को बिलकुल पसंद नहीं आया. इसी बीच उन्हें तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई. कई रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि इन वजहों से अन्नामलाई पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे. अन्नामलाई ने क्यों दिया इस्तीफा? अन्नामलाई ने पार्टी छोड़ने के बाद यह बयान दिया है कि वे अपनी पहचान से दूर हो रहे थे. उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं एक तमिलियिन हूं या फिर बीजेपी का सदस्य. वे यह बिलकुल नहीं चाहते थे कि बीजेपी द्रविड़ पहचान वाली पार्टियों से समझौता कर लें. वे पार्टी की स्वतंत्र पहचान चाहते थे, जब उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ कि पार्टी उनकी राय को दरकिनार कर रही है तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी.अन्नामलाई ने कहा है कि वे अपना रास्ता खुद तय करना चाहते हैं. उन्होंने एक नए नेतृत्वक आंदोलन की घोषणा भी की है, जो कथित तौर पर व्यक्तिपूजा और वंशवादी नेतृत्व के खिलाफ होगा. उनकी पार्टी अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी, जिसकी तैयारी शुरू कर दी गई है. ये भी पढ़ें : बंगाल की नेतृत्व में संक्रमण काल, ममता के सामने कुनबे को जोड़कर रखने की चुनौती, क्या होगा भविष्य? देश में आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हुईं स्त्रीएं, लेकिन 22.3% अभी भी पतियों से पिट रहीं The post कौन हैं अन्नामलाई जिनके बीजेपी छोड़ने पर मचा हड़कंप? तमिलनाडु की नेतृत्व में आ सकता है नया मोड़ appeared first on Naya Vichar.

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7.7% GDP ग्रोथ से चमकी अर्थव्यवस्था, अब डेटा में जुड़ेंगे ई-व्हीकल और घरेलू नौकर

India GDP : हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति के लिए एक बहुत ही शानदार समाचार आई है. देश की इकोनॉमी ने पूरे साल यानी वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 7.7% की रफ्तार से तरक्की की है. वहीं, अगर आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) की बात करें, तो इस दौरान जीडीपी (GDP) ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 5 जून को जारी किए गए ये आंकड़े प्रशासन के अपने पुराने अनुमान (7.6%) से भी बेहतर रहे हैं. इस शानदार बढ़त के साथ ही प्रशासन ने जीडीपी को मापने के तरीके और पैमाने में भी एक ऐतिहासिक बदलाव किया है. मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती, पर GVA की रफ्तार बरकरार तिमाही-दर-तिमाही के आधार पर देखें तो विकास दर में थोड़ी सी नरमी आई है, जिसकी मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार का धीमा पड़ना है. तीसरी तिमाही में जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 12.8% के ऊंचे स्तर पर था, वह चौथी तिमाही में घटकर 7.3% पर आ गया. हालांकि, देश की ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) ग्रोथ पूरे साल और चौथी तिमाही दोनों में 7.9% की मजबूत स्थिति पर बनी हुई है. अगले साल थोड़ी धीमी हो सकती है रफ्तार सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों से ठीक पहले हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए अपने अनुमान जारी किए हैं. आरबीआई के मुताबिक, अगले साल आर्थिक विकास की यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़कर 6.6% रह सकती है. वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए तिमाही आधार पर अनुमान क्यों बदला गया जीडीपी नापने का पैमाना ? प्रशासन ने इस बार जीडीपी के आंकड़ों को नए बेस ईयर 2022-23 के पैमाने पर कैलकुलेट किया है. इससे पहले तक साल 2011-12 को आधार वर्ष (Base Year) माना जाता था. क्यों था जरूरी: पुराना पैमाना 14 साल पुराना हो चुका था. उस समय आज की तरह यूपीआई (UPI), जोमैटो, ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स और गिग इकोनॉमी जैसी चीजें मुख्यधारा में नहीं थीं. क्या-क्या नया जुड़ा: आर्थिक तरक्की की सटीक तस्वीर देखने के लिए अब जीडीपी की नई सीरीज में जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन (E-Vehicles) डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर व घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है. 2022-23 ही क्यों चुना: यह साल पूरी तरह से ‘सामान्य’ था. कोरोना महामारी खत्म हो चुकी थी, वित्तीय स्थिति स्थिर थी और डिजिटल इंडिया पूरी तरह स्थापित हो चुका था. क्या होता है बेस ईयर और कैसे निकलती है GDP? बेस ईयर (Base Year): यह वह साल होता है जिसकी कीमतों को फिक्स मानकर आज की तरक्की को मापा जाता है. इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन (Production) सच में बढ़ा है या सिर्फ चीजें महंगी (महंगाई की वजह से) हुई हैं. जीडीपी निकालने का गणित: अर्थशास्त्र में जीडीपी की गणना करने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है. आम आदमी पर क्या होगा असर? इस बदलाव का आपकी जेब पर तुरंत कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन सही और सटीक आंकड़ों की मदद से प्रशासन बेहतर नीतियां और योजनाएं बना सकेगी. जब सही जगह पैसा लगेगा, तो देश में विदेशी निवेश (Foreign Investment) बढ़ेगा और नए रोजगार पैदा होंगे, जिसका फायदा घूम-फिरकर आने वाले समय में देश के हर नागरिक को मिलेगा. Also Read : क्या हिंदुस्तान में जल्द आने वाले हैं प्लास्टिक के नोट ? RBI ने सबकुछ साफ कर दिया The post 7.7% GDP ग्रोथ से चमकी वित्तीय स्थिति, अब डेटा में जुड़ेंगे ई-व्हीकल और घरेलू नौकर appeared first on Naya Vichar.

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पटना में खान सर के समर्थन में सड़क पर उतरे छात्र, कोचिंग के बाहर कर रहे नारेबाजी, पुलिस की अपील- बहकावे में न आएं

Khan Sir Coaching Attack: पटना में फायरिंग विवाद को लेकर खान सर के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामला अब सड़कों तक पहुंच गया है. उनके कोचिंग सेंटर के बाहर बड़ी संख्या में छात्र जुट गए हैं समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिया है. कोचिंग के आसपास का इलाका छात्रों की भीड़ से भर गया है. जबकि पुलिस और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. खान सर के खिलाफ हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. यह समाचार सामने आते ही छात्रों में हलचल तेज हो गई. देखते ही देखते सैकड़ों छात्र कोचिंग सेंटर के बाहर पहुंच गए और समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी. FIR के बाद बढ़ा छात्रों का आक्रोश दरअसल, कदमकुआं थाने में खान सर के खिलाफ हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई गार्ड्स के बयान के आधार पर की गई है. जैसे ही FIR की समाचार छात्रों तक पहुंची, बड़ी संख्या में छात्र समर्थन में बाहर निकल आए. छात्रों का कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आने से पहले किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए. पुलिस की अपील के बावजूद जुटी भीड़ इधर पुलिस ने छात्रों से किसी के बहकावे में नहीं आने और शांति बनाए रखने की अपील की है. इसके बावजूद कोचिंग सेंटर के बाहर छात्रों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है. स्थिति को देखते हुए पुलिस भी अलर्ट मोड में है ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो. खान सर बोले- जांच में करूंगा पूरा सहयोग विवाद के बीच खान सर ने कहा है कि उन्हें FIR की आधिकारिक जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे. खान सर का दावा है कि उनके गार्ड्स ने आत्मरक्षा में फायरिंग की थी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. 2 जून की घटना से शुरू हुआ विवाद पूरा मामला 2 जून की रात हुए हमले से जुड़ा है. आरोप है कि कुछ लोगों ने कोचिंग सेंटर पर हमला किया, गार्ड के साथ मारपीट की और परिसर में हंगामा किया. इसके बाद गार्ड्स द्वारा फायरिंग किए जाने का वीडियो सामने आया. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने दोनों गार्ड्स को गिरफ्तार कर लिया और अब मामले में खान सर को भी नामजद आरोपी बनाया गया है. Also Read: ‘खड़े होकर क्या कर रहे, गोली चलाओ’, खान सर के आदेश पर बॉडीगार्ड्स ने दागी गोलियां, FIR कॉपी में क्या-क्या The post पटना में खान सर के समर्थन में सड़क पर उतरे छात्र, कोचिंग के बाहर कर रहे नारेबाजी, पुलिस की अपील- बहकावे में न आएं appeared first on Naya Vichar.

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भारत में इबोला की दस्तक? युगांडा से आई महिला जयपुर में आइसोलेशन में भर्ती, रिपोर्ट का इंतजार

Ebola Virus: युगांडा की एक स्त्री शुक्रवार (5 जून) सुबह शारजाह से जयपुर पहुंची थी. एयरपोर्ट पर नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग के दौरान उसमें इबोला वायरस से मिलते-जुलते लक्षण पाए गए. इसके बाद अधिकारियों ने उसे संदिग्ध मरीज मानते हुए तत्काल चिकित्सा निगरानी में ले लिया. स्त्री को जयपुर के राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसे आइसोलेशन में रखा गया है. उसके नमूने जांच के लिए पुणे की विशेष प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं. RUHS के अधीक्षक डॉ अनिल गुप्ता ने साफ किया है कि फिलहाल इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि स्त्री इबोला वायरस से संक्रमित है या नहीं. इसी बीच गुरुवार (4 जून) को हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे एक सूडानी नागरिक को भी बुखार पाए जाने के बाद अलग कर दिया गया. थर्मल स्क्रीनिंग के दौरान उसकी तबीयत खराब मिलने पर उसे सिकंदराबाद स्थित गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल प्रशासन के अनुसार मरीज के नमूने लेकर जांच के लिए सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी केंद्र (CCMB) भेजे गए हैं. STORY | Ugandan woman quarantined in Jaipur after showing Ebola-like symptoms A 19-year-old woman from Uganda has been admitted to a government hospital here after showing symptoms similar to Ebola virus infection, health officials said on Friday, adding that they have not… pic.twitter.com/mFD6i1R8QI — Press Trust of India (@PTI_News) June 5, 2026 केंद्र प्रशासन ने जारी की है एडवाइजरी अफ्रीका के कई देशों में बढ़ते इबोला के मामलों को देखते हुए केंद्र प्रशासन ने हिंदुस्तानीय नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है. प्रशासन ने यात्रियों को इन देशों की यात्रा से पहले स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने और अत्यधिक सावधानी बरतने को भी कहा है. कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया था. वहीं अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (अफ्रीका CDC) ने भी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैल रहे बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इबोला वायरस प्रकोप को महाद्वीपीय स्तर का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है. WHO की आपातकालीन समिति ने 22 मई को सदस्य देशों को सलाह दी थी कि वे अपने हवाई अड्डों और अन्य एंट्री पॉइंट पर रोग निगरानी तंत्र को मजबूत करने की सलाह दी थी. WHO ने विशेष रूप से बुंडीबुग्यो वायरस प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की पहचान, जांच और निगरानी बढ़ाने की अपील की थी. क्या है बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इबोला वायरस? इबोला वायरस रोग एक गंभीर वायरल बुखार (Viral Hemorrhagic Fever) है. अफ्रीकी देशों में इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन काफी तेजी से फैल रहा है. यह इबोला वायरस की एक खतरनाक प्रजाति मानी जाती है. इस बीमारी में मृत्यु दर काफी अधिक होती है और संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव (खून निकलना) जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. सबसे दुखद बात यह है कि फिलहाल बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से होने वाले इबोला संक्रमण के लिए कोई सटीक टीका या विशेष उपचार मौजूद नहीं है. हिंदुस्तान में अब तक नहीं मिला कोई इबोला का मामला स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार हिंदुस्तान में अब तक बुंडीबुग्यो वायरस के कारण इबोला बीमारी का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है. जयपुर और हैदराबाद के दोनों मामलों की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी. युगांडा की मदद के लिए आगे आया हिंदुस्तान इबोला संकट से जूझ रहे युगांडा की सहायता के लिए हिंदुस्तान आगे आया है. हाल ही में हिंदुस्तान ने चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति भी की है. हिंदुस्तानीय वायु सेना के बोइंग सी-17 ग्लोबमास्ट (Globemaster III) विमान के जरिए 2 जून को नई दिल्ली से युगांडा के लिए कई जरूरी चिकित्सा सहायता भेजी गई है. विदेश मंत्रालय के अनुसार अफ्रीकी संघ आयोग के अनुरोध पर हिंदुस्तान ने अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र को इबोला नियंत्रण प्रयासों में सहयोग देने के लिए आपात चिकित्सा सहायता मुहैया कराई है. विदेश मंत्रालय ने बताया कि हिंदुस्तान ने करीब 2.5 टन चिकित्सा सामग्री की पहली खेप 24 मई को युगांडा की राजधानी कंपाला भेजी थी. इसमें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE), चिकित्सा निगरानी उपकरण, आवश्यक दवाइयां और अन्य स्वास्थ्य सामग्री शामिल थीं. Also Read: खामेनेई के दफ्तर पर हुए हमले से जिंदा निकले थे अराघची, खुद सुनाया किस्सा; बोले- 2 दिन तक सुप्रीम लीडर का पता नहीं चला The post हिंदुस्तान में इबोला की दस्तक? युगांडा से आई स्त्री जयपुर में आइसोलेशन में भर्ती, रिपोर्ट का इंतजार appeared first on Naya Vichar.

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क्या आप भी सुबह सोकर उठते ही करते हैं ये 5 गलतियां? तेजी से बढ़ सकता है आपका ब्लड प्रेशर

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और एक खराब लाइफस्टाइल होने की वजह से हाई ब्लड प्रेशर (High BP) यानी कि हाइपरटेंशन एक कॉमन बीमारी बन चुका है. इसे साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि कई बार इसके लक्षण हमें साफ-साफ दिखाई भी नहीं देते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर यह हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाने का काम करता ही रहता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की अगर मानें तो हमारी सुबह की कुछ आदतें होती हैं, जिनका सीधा असर हमारे ब्लड प्रेशर पर पड़ता है. अगर आप सुबह उठकर इन गलतियों को करते हैं, तो आपका ब्लड प्रेशर अचानक से बढ़ सकता है. अगर ऐसा हो तो यह आपके हार्ट हेल्थ के लिए बेहद ही खतरनाक साबित हो सकता है. आज इस आर्टिकल में हम आपको सुबह की ऐसी ही 5 आदतों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, जिन्हें अगर आप सुधार लेते हैं तो आपका ब्लड प्रेशर काफी हद तक कंट्रोल में रह सकता है. तो चलिए जानते हैं इनके बारे में. सुबह उठते ही अचानक झटके से बेड से खड़े होना अक्सर लोगों की आदत होती है कि सुबह का अलार्म बजते ही या फिर किसी काम को जल्दबाजी में करने के चक्कर में झटके से बिस्तर से उठकर खड़े हो जाते हैं. अगर आपको ब्लड प्रेशर की समस्या है तो आपकी यह आदत काफी ज्यादा हानिकारक हो सकती है. जब आप सो रहे होते हैं तो आपका शरीर पूरी तरग से आराम करने की मुद्रा में रहता है और साथ ही शरीर में ब्लड सर्कुलेशन स्लो भी रहता है. लेकिन जब आप तेजी से उठकर खड़े होते हैं तो आपके शरीर का ब्लड प्रेशर तेजी से बदल जाता है. इसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन’ या बीपी का अचानक फ्लक्चुएट होना कहा जाता है. आपकी इस आदत की वजह से आपको चक्कर आ सकते हैं या फिर अचानक प्रेशर भी बढ़ सकता है. अगर आप नहीं चाहते हैं कि ऐसा हो तो सुबह सोकर उठने के बाद कम से कम दो मिनट तक आराम से बिस्तर पर ही बैठे रहें. दिन की शुरुआत चाय या कॉफी से करना हिंदुस्तान में ज्यादातर लोगों के दिन की शुरुआत या तो गर्म चाय के साथ या फिर कॉफी के साथ होती है. अगर आप भी इन्हीं लोगों में आते है, तो आपको यह पता होना चाहिए कि खली पेट कैफीन का सेवन करना आपके ब्लड प्रेशर के बढ़ने का एक कारण बन सकता है. चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन आपके नर्वस सिस्टम को एक्साइटेड कर देते हैं, जिसकी वजह से आपके दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ने लगते हैं. इसके अलावा जब आप खाली पेट चाय पीते हैं तो आपको एसिडिटी की प्रॉब्लम होती है और शरीर का स्ट्रेस भी बढ़ता है. उठते ही मोबाइल देखना और मेंटल स्ट्रेस लेना आज के समय में ज्यादातर लोगों की आदत होती है सुबह सोकर उठते ही सबसे पहले अपना स्मार्टफोन चेक करने की. सोकर उठते ही सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, ऑफिस का ईमेल चेक करना या फिर न्यूज देखने की आदत तो बहुत ही कॉमन हो गयी है. लेकिन जब आप सुबह-सुबह कोई स्ट्रेसफुल ईमेल देखते हैं या फिर निगेटिव समाचार पढ़ते हैं तो आपके शरीर में कोर्टिसोल का लेवल अचानक से ही बढ़ने लग जाता है. जब आपके शरीर में स्ट्रेस बढ़ता है, तो ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं और आपका ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है. सुबह सोकर उठने के बाद कम से कम आधे घंटे तक खुद को शांत करके रखने की कोशिश करें. गहरी सांसें लेना, मेडिटेशन करना और कोई स्लो म्यूजिक सुनना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. सुबह हैवी और अनहेल्दी ब्रेकफास्ट करना हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा यह कहते रहते हैं कि सुबह का जो नाश्ता होता है वह बिलकुल एक राजा की तरह होना चाहिए. लेकिन इसका यह मतलब बिलकुल भी नहीं है कि आप बहुत ही ज्यादा तले-भुने या फिर ज्यादा नमक वाली चीजें खाना शुरू कर दें. पैक्ड फूड्स, प्रोसेस्ड मीट, समोसे और कचौड़ी या फिर इस तरह की अन्य चीजें आपके शरीर में सोडियम की मात्रा को अचानक से बढ़ा देती हैं. यह सोडियम डायरेक्टली आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ाने का काम करता है. अगर आप ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो ब्रेकफास्ट में हमेशा कम तेल और नमक वाली चीजों को शामिल करना शुरू कर दें. लिया, ओट्स, पोहा, फ्रेश फल और स्प्राउट्स हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकते हैं. फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज न करना अगर आप सुबह उठकर सुस्ती दिखाते हैं या बिना कोई फिजिकल एक्टिविटी किये सीधे अपने कामों में लग जाते हैं, तो यह भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को बुलावा देने का काम करता है. जो लोग सुबह उठकर बिलकुल भी एक्सरसाइज या फिर वॉक नहीं करते हैं, उनकी नसें समय के साथ टाइट होने लग जाती हैं और शरीर में खून भी सही से फ्लो नहीं कर पाता है. सुबह की हल्की धूप में सिर्फ 20 से 30 मिनट की वॉक या योगासन करने से पूरे दिन ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है. सुबह की एक्सरसाइज आपके दिल को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है और साथ ही बिना किसी एक्स्ट्रा प्रेशर के खून को पंप करने में भी मदद करती है. ये भी पढ़ें: डायबिटीज के मरीजों के लिए कितना फायदेमंद है जामुन? यहां जानिए आसान भाषा में The post क्या आप भी सुबह सोकर उठते ही करते हैं ये 5 गलतियां? तेजी से बढ़ सकता है आपका ब्लड प्रेशर appeared first on Naya Vichar.

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