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Bihar Daroga Candidate Protest : पटना में प्रदर्शनकारी दारोगा अभ्यर्थियों को पुलिस ने रोका, अनाउंसमेंट कर कहा- डेलीगेशन तैयार करें…

Bihar Doroga Bharti Exam Protest LIVE : बिहार पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे. गर्दनीबाग में जारी धरना प्रदर्शन के बीच आज उनका गुस्सा फूट पड़ा. परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है. The post Bihar Daroga Candidate Protest : पटना में प्रदर्शनकारी दारोगा अभ्यर्थियों को पुलिस ने रोका, अनाउंसमेंट कर कहा- डेलीगेशन तैयार करें… appeared first on Naya Vichar.

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CEC ज्ञानेश कुमार के सस्पेंशन पर SC का इनकार, ECI से मांगा जवाब

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन आरोपों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है. कोर्ट ने संकेत दिया कि चुनाव आयोग का जवाब मिलने के बाद अगर यह सामने आता है कि कुछ फैसले जरूरी सर्वसम्मति के बिना लिए गए थे, तो उन फैसलों पर दोबारा विचार किया जा सकता है या उन्हें वापस लिया जा सकता है. कोर्ट ने कहा, “नोटिस के बाद अगर वे आकर दिखाते हैं कि ABC फैसले सर्वसम्मति के बिना लिए गए थे, तो हम उन फैसलों को वापस ले लेंगे.” याचिकाओं में किन मांगो का किया जिक्र पटना निवासी राकेश कुमार सिंह ने एक याचिका दायर की है. इसमें सुप्रीम कोर्ट से पूछा गया है कि क्या CEC ज्ञानेश कुमार ने ऐसे अधिकारों का इस्तेमाल अकेले किया, जो पूरे चुनाव आयोग को मिलकर करने थे. याचिका में ऐसे फैसलों को कानूनी अधिकार के बिना लिया गया फैसला घोषित करने की मांग की गई है. वहीं, अंतिम फैसला आने तक ज्ञानेश कुमार को CEC के कामकाज से अलग रखने की भी मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है. इसलिए उसके सामूहिक अधिकारों का इस्तेमाल केवल CEC अकेले नहीं कर सकते. इसके लिए याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला दिया गया है. ये भी पढ़ें: जंतर-मंतर के ‘हीरो’ विवेक भगत, जुलाई में जख्मी होकर साथी को बचाया, अब स्त्री पत्रकार से बदसलूकी के आरोप में घिरे दूसरी याचिका में क्या आरोप? अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में भी CEC के कथित तौर पर एकतरफा फैसले लेने पर सवाल उठाया गया है. इसमें कथित वैधानिक उल्लंघनों को लेकर CEC और दूसरे अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है. याचिका में SIR के दौरान Form 6 में कथित बदलाव का भी मुद्दा उठाया गया है. Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सॉफ्टवेयर के जरिए इसमें पूर्व SIR से जुड़े विवरण और वंश संबंधी जानकारी की जरूरत जोड़ी गई, जबकि इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. The post CEC ज्ञानेश कुमार के सस्पेंशन पर SC का इनकार, ECI से मांगा जवाब appeared first on Naya Vichar.

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जो राज जान जाता है, उसकी हत्या कर देते हैं… प्रेमानंद आश्रम के शिष्य की मौत में नया मोड़, CBI जांच की मांग से मचा हड़कंप

UP News: संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गहराता जा रहा है. 25 वर्षीय दीपक की 25 सितंबर को वृंदावन स्थित गुरु कृपा कुंज भवन की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हुई थी. अब मामले में CBI जांच की मांग के साथ एक बयान ने विवाद को और हवा दे दी है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलहारी ने दावा किया है कि यहां “जो राज जान जाता है, उनकी हत्या कर देते हैं.” हालांकि यह उनका आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. यहां बहुत कुछ गड़बड़ चल रहा है… दिनेश फलहारी ने मामले में कई सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री से CBI जांच कराने की मांग की है. उन्होंने आश्रम से जुड़े मामलों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ संतों को कथित तौर पर ऐसे राज पता चल जाते हैं, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी जाती है. उन्होंने बच्चों के गायब होने और आश्रम से जुड़े कथित विवादों का भी जिक्र किया. हालांकि इन आरोपों को पुलिस जांच का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है. आखिर रसिक दुलारी के साथ उस रात क्या हुआ? रसिक दुलारी शरण मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले दीपक लोधी थे. करीब दो साल पहले उन्होंने वृंदावन आकर प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी. पिछले करीब तीन महीने से वह वाराह घाट क्षेत्र स्थित गुरु कृपा कुंज भवन में रह रहे थे. यह भवन प्रेमानंद महाराज के केली कुंज ट्रस्ट से जुड़ा बताया गया है. 25 सितंबर की रात वह भवन की चौथी मंजिल पर पहुंचे. कुछ देर बाद वह नीचे गिर गए. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है. रिपोर्टों के मुताबिक फुटेज में वह चौथी मंजिल की ओर जाते और बाद में नीचे गिरते दिखाई देते हैं. पुलिस ने CCTV फुटेज को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है. पोस्टमार्टम में कई चोटें, खून बहना बताया गया कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटें मिलने की बात सामने आई है. सिर, चेहरे, हाथ-पैर और एड़ी के आसपास चोटों का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है. मौत का कारण अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया है. पुलिस जांच में यह भी देखा जा रहा है कि घटना से पहले और बाद में क्या हुआ था. CCTV फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य परिस्थितियों की जांच की जा रही है. मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंचा मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र याचिका भेजकर कोर्ट की निगरानी में SIT जांच कराने की मांग की गई है. याचिका में साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई है. आश्रम ने क्या कहा? इस बीच प्रेमानंद महाराज से जुड़े राधा केली कुंज ट्रस्ट ने रसिक दुलारी शरण की मौत पर शोक जताते हुए पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है. आश्रम की ओर से लोगों से मामले में अफवाहों पर भरोसा न करने और आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करने की अपील की गई है. अब सबसे बड़ा सवाल रसिक दुलारी शरण की मौत आत्महत्या थी, हादसा था या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था? फिलहाल इसका अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा. दूसरी ओर, CBI/SIT जांच की मांग और दिनेश फलहारी के गंभीर आरोपों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है. यही वजह है कि अब सबकी नजर मथुरा पुलिस की जांच, CCTV और फोरेंसिक रिपोर्ट पर है. यह भी पढ़ें: भाजपा जिलाध्यक्ष पर दुष्कर्म का आरोप: बलिया की स्त्री पदाधिकारी बोली- वीडियो वायरल करने की धमकी देकर किया शोषण The post जो राज जान जाता है, उसकी हत्या कर देते हैं… प्रेमानंद आश्रम के शिष्य की मौत में नया मोड़, CBI जांच की मांग से मचा हड़कंप appeared first on Naya Vichar.

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जुलाई के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से दिल्ली पुलिस ने क्या सीखा ? जानें यहां

Jantar Mantar Protest : आइए पहले बात करते हैं जुलाई में प्रदर्शन के दौरान क्या देखने को मिला था? इस महीने जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बुलाया तो यहां हजारों युवा जुटे, आंदोलन ने रफ्तार पकड़ी और देखते ही देखते प्रदर्शन दिल्ली की सड़कों तक फैल गया. हालांकि अक्टूबर में तस्वीर अलग थी. प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में एक जगह जमा हो पाते, उससे पहले ही पुलिस ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी, रास्ते बंद किए और लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया. सवाल यही है कि इन दो तस्वीरों के बीच ऐसा क्या बदला? इसका जवाब जुलाई के बाद हुई पुलिस की समीक्षा में छिपा है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने करीब दो महीने तक अपनी तैयारियों की समीक्षा की. अधिकारियों ने माना कि जंतर-मंतर तक लोगों की आसान पहुंच, खाने-पानी की व्यवस्था और आसपास की कुछ खास जगहों ने आंदोलन को लंबे समय तक टिकने में मदद की. पुलिस ने आसपास की सड़कों, टूटे फुटपाथों और दूसरी जगहों को भी सुरक्षा जोखिम के तौर पर पोइंट आउट किया. ये भी पढ़ें: अभिजीत दीपके ने अमित शाह को पोस्ट किया टैग, पूछा- ‘कितनों को अरेस्ट करोगे, 10 अक्टूबर को पूरा देश आ रहा है’ जुलाई में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि आंदोलन एक जगह से निकलकर एक व्यापक जन-आंदोलन जैसा रूप लेने लगा था. प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की तरफ बढ़े और कई जगहों पर पुलिस से टकराव हुआ. पुलिस की कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैले और इससे आंदोलन पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. बाद में पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल भी उठे और दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े मामलों पर केंद्र और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा. अक्टूबर में पुलिस ने शायद इसी अनुभव को ध्यान में रखकर भीड़ बनने के बाद संभालने के बजाय ‘भीड़ बनने से पहले रोकने’  पर जोर दिया. 2 और 4 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास भारी सुरक्षा लगाई गई. रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने इलाके को पहले ही बैरिकेड कर दिया था. अलग-अलग रास्तों से आने वाले प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया और कई लोगों को हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में भेजा गया. 2 अक्टूबर के दोपहर तक पुलिस ने 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी. ये भी पढ़ें: जंतर-मंतर के ‘हीरो’ विवेक भगत, जुलाई में जख्मी होकर साथी को बचाया, अब स्त्री पत्रकार से बदसलूकी के आरोप में घिरे हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, इस बार दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों की करीब 4,000 जवानों की तैनाती की गई थी और 20 से ज्यादा CAPF कंपनियों को बुलाया गया था. पुलिस ने यह भी कहा कि अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी. यानी जुलाई में जहां पुलिस को बढ़ती भीड़ और बदलते हालात के बीच रिएक्शन देना पड़ा, वहीं अक्टूबर में रणनीति का जोर शुरुआत से ही इंट्री रोकने, भीड़ को छोटे ग्रुप में बांटने और बड़े जमावड़े को बनने से रोकने पर दिखा. यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू है. आंदोलन को रोकने की रणनीति अब सिर्फ लाठी या बल प्रयोग तक सीमित नहीं दिखती. असली बदलाव यह है कि पुलिस भीड़ को उस प्रदर्शन की जगह तक पहुंचने ही नहीं देना चाहती, जहां वह बड़ी संख्या में जमा हो सकें. The post जुलाई के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से दिल्ली पुलिस ने क्या सीखा ? जानें यहां appeared first on Naya Vichar.

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28 दिन से अंधेरे में थी डेला टोली की गलियां, प्रभात खबर के मंच पर उठाया गया मामला और हर पोल पर लग गयी लाइट

रांची. राजधानी रांची के कोकर की डेला टोली में 28 दिन से बिजली कटी हुई थी. रविवार को आयोजित “प्रभात वार्ड उत्सव” में मौहल्ले के लोगों ने अपनी शिकायत रखी और इसके साथ ही निगम के अधिकारियों ने समस्याओं को दूर कर बिजली पोल पर स्ट्रीट लाइट लगवा दी. रविवार की शाम तक मोहल्ला रोशनी से गुलजार हो गया, नगर निगम के काउंटर पर डेला टोली से आये कुछ लोगों ने 28 दिनों से मोहल्ले की गलियों में अंधेरा होने की शिकायत की. इसके बाद निगम के अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल से संबंधित निगम कर्मियों को फोन कर समस्या का निवारण करने का निर्देश दिया. इसका आदेश मिलने के बाद निगम कर्मी मोहल्ले में पहुंचे और बिजली के पौरन पर स्ट्रीट लाइट लगाना शुरू कर दिया. शाम होते ही अंधेरे में डूबा मौहल्ला जगमग हो गया, इसी मंच पर मेयर रोशनी खलखो ने घोषणा की कि सोमवार को 46 दिनों के बाद जयपाल सिंह स्टेडियम का तारला राष्ट्रात जायेगा. नया विचार ने रविवार को कोकर स्थित इंद्रप्रस्थ बैंक्वेट हॉल में “प्रभात वार्ड उत्सव” का आयोजन किया गया. नगर निगम और बिजली निगम के अधिकारियों ने सुलझायीं लोगों की समस्याएं आज से जयपाल सिंह स्टेडियम का खुल जायेगा ताला: पिछले 46 दिनों से बंद जयपाल सिंह स्टेडियम का ताला सोमवार को खोल दिया जायेगा. लंबे समय से स्टेडियम के बंद रहने से यहां प्रतिदिन सुबह और शाम दॉक के लिए आने वाले आम लोगो, नियमित प्रैक्टिस के लिए आनेवाले खिलाडियों को परेशानी हो रही थी. मेयर आपके द्वार कार्यक्रम की होगी शुरुआत: मेयर रोशनी खलखो द्वारा सोमवार से वार्ड नंबर सात गाडीगांव से मेयर आपके द्वार कार्यक्रम की शुरुआत करने की पोषणा की गयी. यह भी पढ़ें: जब पूरा रांची दुर्गा पूजा घूम रहा होगा, तब ये लोग करेंगे 12-12 घंटे ड्यूटी The post 28 दिन से अंधेरे में थी डेला टोली की गलियां, नया विचार के मंच पर उठाया गया मामला और हर पोल पर लग गयी लाइट appeared first on Naya Vichar.

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प्रभात खबर खुलासा: पंचायत चुनाव में बचे सिर्फ छह माह, गाइडलाइन के फेर में अटके विकास कार्यों के 658 करोड़ रुपये

रांची : झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब महज छह महीने का समय बाकी रह गया है. वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था का कार्यकाल समाप्त होने की ओर है, लेकिन राज्य के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का बुरा हाल है. हैरानी की बात यह है कि विकास कार्यों को धरातल पर उतारने के लिए पंचायतों के पास 658 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि उपलब्ध है, लेकिन पंचायती राज विभाग की ओर से ‘खर्च की गाइडलाइन’ जारी न किए जाने के कारण पूरा पैसा फाइलों और प्रशासनी खातों में अटका पड़ा है. वर्ष 2010 के बाद 16 वर्षों में यह पहला मौका था जब राज्य वित्त आयोग के माध्यम से पंचायतों को यह राशि उपलब्ध कराई गई, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती ने इस ऐतिहासिक कदम पर पानी फेर दिया है. 76% ग्रामीण आबादी पर सीधी मार झारखंड की लगभग 3.29 करोड़ आबादी में से करीब 2.50 करोड़ (76 प्रतिशत) लोग गांवों में रहते हैं. राज्य की 4,423 पंचायतों में ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों जैसे- नल-जल योजना व जलमीनार की मरम्मत, बंद पड़ी योजनाओं को चालू करना, गांव की नालियां, कच्ची-पक्की सड़कें, आंगनबाड़ी केंद्र और प्रशासनी स्कूलों में छोटे-मोटे निर्माण कार्य इसी फंड से होने थे. 5वें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर पंचायती राज सचिव ने 29 मार्च 2026 को ही इस आवंटन का पत्र जारी कर दिया था. हालांकि, बीते 6 महीनों में विभाग यह तय नहीं कर पाया कि पैसा किस मद में और किस प्रक्रिया से खर्च होगा, जिससे 2.50 करोड़ आबादी बुनियादी सुविधाओं को तरस रही है. ये भी पढ़ें: दो साल से नहीं मिला विद्यालय विकास अनुदान, चौक-डस्टर से TC बुक तक शिक्षक उठा रहे खर्च; सफाई व्यवस्था भी प्रभावित ग्राम पंचायतों के पास ही अटका 493.51 करोड़ रुपये का बजट झारखंड वित्त आयोग द्वारा स्वीकृत 658 करोड़ रुपये की कुल राशि का बंटवारा त्रिस्तरीय पंचायती राज ढांचे में इस प्रकार किया गया है. ग्राम पंचायत (75% हिस्सा): 493.51 करोड़ रुपये (सबसे निचला और सीधा असरदार स्तर) पंचायत समिति (15% हिस्सा): 98.70 करोड़ रुपये जिला परिषद (10% हिस्सा): 65.79 करोड़ रुपये ग्राम पंचायतों के पास ही करीब 494 करोड़ रुपये की भारी राशि पड़ी हुई है, जो सीधे गांव के विकास पर खर्च होनी थी. त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधि संघ के अध्यक्ष विकास कुमार महतो का कहना है कि “बजट आवंटित कर देना और 6 महीने तक गाइडलाइन न देना पंचायतों को जानबूझकर पीछे धकेलने जैसा है. जनता जवाब मांग रही है और जनप्रतिनिधि बेबस हैं. ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग सचिव मनोज कुमार से ‘नया विचार’ के सवाल सवाल: राज्य वित्त आयोग से स्वीकृत 658 करोड़ रुपये की राशि की वर्तमान में क्या स्थिति है? सचिव: पहली बार हम लोगों ने पंचायतों को 658 करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया था. इसमें से 197 करोड़ रुपये की राशि जिला परिषदों को हस्तांतरित भी कर दी गई थी. सवाल: लेकिन मार्च से अब तक 6 महीने बीत गए, जमीनी स्तर पर पंचायतों को विकास का पैसा मिला ही नहीं? सचिव: पूरी राशि का इंतजाम अब कर लिया गया है. बहुत जल्द ही यह सारी राशि सीधे पंचायतों के खातों में भेज दी जाएगी, ताकि गांवों में तुरंत काम शुरू हो सके. सवाल: पिछले वित्तीय वर्ष के मार्च का मामला है, आखिर इतनी बड़ी देरी क्यों हुई? सचिव: त्रिस्तरीय पंचायतों (जिला, समिति व ग्राम पंचायत) को एक साथ बजट राशि जारी करनी थी, इसलिए पूरे फंड का प्रबंधन किया जा रहा था. अब आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. राशि जारी करने के साथ ही काम के निष्पादन और खर्च की विस्तृत गाइडलाइन भी जिलों को भेज दी जाएगी. ये भी पढ़ें: रांची से लौटा मॉनसून, 5 से 8 अक्तूबर तक लगातार छाये रहेंगे बादल The post नया विचार खुलासा: पंचायत चुनाव में बचे सिर्फ छह माह, गाइडलाइन के फेर में अटके विकास कार्यों के 658 करोड़ रुपये appeared first on Naya Vichar.

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अभिजीत दीपके ने अमित शाह को पोस्ट किया टैग, कहा- ‘कितनों को अरेस्ट करोगे, 10 अक्टूबर को पूरा देश आ रहा है’

अभिजीत दीपके ने सौरव दास के आरोप पर रिएक्शन दिया है. सीजेपी नेता सौरव दास ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है. इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशासन उन्हें, अभिजीत, आशुतोष, रत्ना और पार्टी के अन्य नेताओं को गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ऐसी कार्रवाई से युवा पीछे हटने वाले नहीं हैं. नई पीढ़ी अपने अधिकारों और भविष्य के लिए जागरूक हो चुकी है. सौरव दास ने लोगों से अपील की कि नेता जेल जाएं या बाहर रहें, आंदोलन जारी रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि वे जेल जाने या इससे भी बड़ी मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार हैं. साथ ही 10 अक्टूबर से देशभर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की अपील की. एक्स पर क्या लिखा अभिजीत दीपके ने, पढ़ें सौरव के इस पोस्ट को कोट करते हुए अभिजीत दीपके ने लिखा, ‘कितनो को अरेस्ट करोगे. 10 अक्टूबर को पूरा देश आ रहा है. इस पोस्ट की खास बात ये है कि सवालिया निशान के साथ पोस्ट को उन्होंने अमित शाह  को टैग किया है. महाराष्ट्र के पुणे में क्या बोले अभिजीत दीपके पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के समर्थन में उतरे अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के पुणे में अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से 4 अक्टूबर को मुलाकात की. उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक होने से छात्रों का भविष्य खतरे में है, लेकिन प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है. CJP छात्रों की मांगों का समर्थन करती है. दीपके ने साफ कहा कि जब तक महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के चेयरमैन इस्तीफा नहीं देते, तब तक छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. ज्ञानेश कुमार पर क्या बोले दीपके, देखें ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग अभिजीत दीपके ने की अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित नहीं होते, तब तक ऐसे चुनावों में हिस्सा लेने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार विजेता पहले से तय है. दीपके ने दावा किया कि बीजेपी उन राज्यों में भी जीत रही है, जहां कथित तौर पर ‘मोदी लहर’ के दौरान भी उसे सफलता नहीं मिली थी. उन्होंने इसके लिए ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार बताया. दीपके ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के पद से हटने और SIR प्रक्रिया पर रोक लगने के बाद ही पता चलेगा कि बीजेपी वास्तव में कितनी सीटें जीतती है. The post अभिजीत दीपके ने अमित शाह को पोस्ट किया टैग, कहा- ‘कितनों को अरेस्ट करोगे, 10 अक्टूबर को पूरा देश आ रहा है’ appeared first on Naya Vichar.

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प्रेमानंद महाराज के समर्थन में उतरे संत-समाज, चित्रलेखा-अनिरुद्धाचार्य ने कहा- पूरी बात जाने बिना बयानबाजी गलत, हाईकोर्ट पहुंचा केस

Mathura News: वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद श्रीराधा केलिकुंज आश्रम को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कई संत और भागवताचार्य प्रेमानंद महाराज के समर्थन में सामने आए हैं. भागवताचार्य चित्रलेखा और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने बिना पूरी सच्चाई जाने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने और बयानबाजी करने पर सवाल उठाए. वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मामले की जांच और आश्रम से जुड़ी गतिविधियों की पड़ताल की मांग की है. वहीं रसिक दुलारी की मौत का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. चित्रलेखा ने कहा- पूरी सच्चाई जाने बिना बयानबाजी गलत भागवताचार्य चित्रलेखा ने प्रेमानंद महाराज के समर्थन में बोलते हुए कहा कि संत के बारे में लोग अपने मन में आने वाली बातों को बोल रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसी को किसी के बारे में कुछ पता नहीं है, फिर भी बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि यदि कोई घटना हुई भी है तो उसे लेकर पूरी जानकारी सामने आने से पहले किसी संत-महापुरुष पर आरोप लगाना उचित नहीं है. चित्रलेखा ने कहा कि सच्चाई की जानकारी नहीं है तो मौन रहना बेहतर है. अनिरुद्धाचार्य ने भी किया प्रेमानंद महाराज का समर्थन कथावाचक अनिरुद्धाचार्य भी प्रेमानंद महाराज के समर्थन में सामने आए हैं. उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया पर बिना पूरी जानकारी के लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाया. उनका कहना है कि किसी मामले की पूरी जानकारी सामने आए बिना किसी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों से बड़ी संख्या में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है. उन्होंने अपील की कि किसी भी मामले में पूरी जानकारी सामने आने से पहले निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए. संतों के साथ पीठाधीश्वर भी समर्थन में आए अमर उजाला की 5 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रेमानंद महाराज के समर्थन में संत और भागवताचार्य सामने आए हैं. पीठाधीश्वर महंत राजेंद्र दास महाराज ने भी संत प्रेमानंद महाराज का नाम लिए बिना कहा कि समाज बड़े से बड़े महापुरुष की आलोचना करने में नहीं चूकता, लेकिन समाज को इससे क्या मिला, इस पर विचार किया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा और आश्रम परिसर से जुड़ी गतिविधियों की जांच की मांग की है. पत्र में उन्होंने श्रीराधा केलिकुंज आश्रम से जुड़ी गतिविधियों को लेकर कई आरोप लगाए हैं. उन्होंने आश्रम से जुड़े संपत्ति और व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कराने तथा वहां लगे CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग की है. ये आरोप पत्र में लगाए गए हैं, इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. आश्रम में मतभेद का भी लगाया गया आरोप दिनेश फलाहारी ने दावा किया है कि श्रीराधा केलिकुंज आश्रम से जुड़ी गतिविधियों को लेकर दो पक्षों के बीच मतभेद हैं. पत्र में उन्होंने इन गतिविधियों की जांच की मांग की है. उन्होंने यह भी दावा किया कि इन्हीं परिस्थितियों से आहत होकर प्रेमानंद महाराज ने आश्रम छोड़कर यमुना पार बेलवन क्षेत्र में प्रवास शुरू किया है. यह भी पत्र में किया गया दावा है, इसे पुलिस या प्रशासन की पुष्टि के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए. बच्चों को लेकर भी जांच की मांग पत्र में आश्रम में आने वाले बच्चों और किशोरों को लेकर भी चिंता जताई गई है. दिनेश फलाहारी ने उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग से इस संबंध में जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि कुछ शिशु आध्यात्मिक गतिविधियों से प्रभावित होकर आश्रम में रुक जाते हैं और उनके परिजन उनकी तलाश में वहां पहुंचते हैं. उन्होंने ऐसे मामलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है. अनुज और मयंक दोनों सकुशल बरामद इस पूरे प्रकरण में लापता बताए जा रहे दो किशोरों को लेकर भी अब महत्वपूर्ण अपडेट सामने आ चुका है. सादाबाद के अनुज चौधरी को बरसाना के एक आश्रम से, जबकि कासगंज के मयंक चौहान को प्रयागराज के दारागंज से पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है. दोनों की पहचान उनके परिजनों ने की है. रसिक दुलारी की मौत की जांच अभी जारी वहीं, प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की 25 सितंबर को हुई मौत की जांच अभी जारी है. उन्हें वृंदावन में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के बाद अस्पताल ले जाया गया था, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था. पोस्टमार्टम में गंभीर चोटों की बात सामने आई है और पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है. मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहुंचा रसिक दुलारी की मौत का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है. मामले की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की गई है. हालांकि, यह मांग किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने SIT जांच का आदेश दे दिया है. आश्रम ने भी जारी किया अपना बयान इस बीच श्री हित राधा केलिकुंज ट्रस्ट की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि रसिक दुलारी शरण की मौत से प्रेमानंद महाराज और उनका परिकर आहत है. ट्रस्ट ने कहा कि पुलिस प्रशासन की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है. साथ ही जांच पूरी होने तक अपुष्ट जानकारी, अफवाह या अनुमान के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालने की अपील की गई है. यह भी पढ़ें: CM योगी ने बदला भदोही का नाम, फिर बना ‘संत रविदास नगर भदोही’; 32 साल में 5वीं बार बदली जिले की पहचान The post प्रेमानंद महाराज के समर्थन में उतरे संत-समाज, चित्रलेखा-अनिरुद्धाचार्य ने कहा- पूरी बात जाने बिना बयानबाजी गलत, हाईकोर्ट पहुंचा केस appeared first on Naya Vichar.

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कौन-सी दाल सबसे ज्यादा हेल्दी? डॉक्टर की रेटिंग में मूंग दाल नंबर-1, जानिए किस दाल को मिले कितने नंबर

हिंदुस्तानीय थाली में दाल सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाती, बल्कि शरीर को प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट, मैग्नीशियम, पोटैशियम और दूसरे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी देती है. लेकिन जब बाजार में मूंग, मसूर, अरहर, चना और उड़द जैसी कई वैरायटी मौजूद हैं, तो सवाल है कि आखिर उनमें से सबसे ज्यादा हेल्दी दाल कौनसी है. दिल्ली स्थित ISIC मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्स्य ने अलग-अलग दालों को उनकी पोषण संबंधी खूबियों और पाचन के लिहाज से 10 में से रेटिंग दी है. इस रेटिंग में मूंग दाल 9.5/10 के साथ शीर्ष पर है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी दालें बिल्कुल कम हेल्दी हैं. हर दाल से अलग-अलग पोषण मिलता है और कई बार किसी व्यक्ति के लिए सबसे अच्छी दाल उसकी सेहत, जरूरत और पाचन क्षमता पर भी निर्भर कर सकती है. तो क्या सिर्फ नंबर-1 दाल ही खानी चाहिए? बिल्कुल नहीं. हर दाल में पोषक तत्वों का संयोजन अलग होता है. साथ ही आपकी उम्र, शरीर की जरूरत, कुल डाइट और पाचन क्षमता भी मायने रखती है. इसलिए रोजाना सिर्फ एक ही दाल खाने के बजाय मूंग, मसूर, अरहर, चना और उड़द जैसी अलग-अलग दालों को रोटेट करके खाना ज्यादा बेहतर तरीका हो सकता है. यह भी पढ़ें: प्लास्टिक के डिब्बे में गर्म खाना रखने से हो सकता है कैंसर, भूल कर भी न रखें ये 4 चीजें The post कौन-सी दाल सबसे ज्यादा हेल्दी? डॉक्टर की रेटिंग में मूंग दाल नंबर-1, जानिए किस दाल को मिले कितने नंबर appeared first on Naya Vichar.

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‘कबीर सिंह’ के 20 मिनट भी नहीं झेल पाए अदिल हुसैन, फिल्म करने का आज भी पछतावा, 200 करोड़ के ऑफर पर कही ये बात

किसी एक्टर की पहचान हमेशा उसके सबसे बड़े रोल से नहीं होती. कई बार पर्दे पर कुछ मिनट का किरदार भी ऐसा असर छोड़ जाता है कि पूरी फिल्म के बाद वही चेहरा याद रह जाता है. अदिल हुसैन इसी तरह के एक्टर हैं. उन्होंने न तो पारंपरिक तरीके से बॉलीवुड में एंट्री ली और न ही खुद को सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित रखा. असम के छोटे से शहर गोलपाड़ा से निकले अदिल ने थिएटर किया, स्टैंड-अप कॉमेडी की, मोबाइल थिएटर में काम किया, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंचे और फिर इंटरनेशनल सिनेमा तक अपनी जगह बनाई. आज उनके 63वें जन्मदिन के मौके पर जानिए एक छोटे से कस्बे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अदाकारी से अलग पहचान बनाने तक का उनका पूरा सफर. 5 साल की उम्र में शुरू हुआ जुनून अदिल हुसैन का जन्म 5 अक्टूबर 1963 को असम के गोलपाड़ा में हुआ था. उनके पिता एक स्कूल हेडमास्टर थे और चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पूरी करके अंग्रेजी का प्रोफेसर या शिक्षक बने. लेकिन अदिल की किस्मत में तो कुछ और ही लिखा था. आदिल हुसैन शुरुआती दिनों में थिएटर और मंच पर परफॉर्म करते अदिल हुसैन. बचपन के अनोखे किस्से: 5 साल में पहली परफॉर्मेंस: जब वह सिर्फ 5 साल के थे, तभी से मोहल्ले के लोगों को इकट्ठा करके उनके सामने स्टैंड-अप कॉमेडी करने लगे थे. 16 साल में लिया फैसला: स्कूल के नाटकों में भाग लेते-लेते 16 साल की उम्र तक आते-आते उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें एक्टर ही बनना है. पिता से मतभेद: पिता एक सुरक्षित प्रशासनी नौकरी चाहते थे. एक्टिंग के फैसले की वजह से पिता उनसे कई सालों तक नाराज रहे, लेकिन अदिल ने अपना रास्ता नहीं बदला. कॉमेडी और मिमिक्री: गुवाहाटी के बी. बरुआ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने लगभग 6 साल तक स्टैंड-अप कॉमेडी की और मशहूर बॉलीवुड स्टार्स की नकल उतारी. असम का मोबाइल थिएटर: उन्होंने असम की मशहूर ‘मोबाइल थिएटर’ परंपरा में काम किया और गांव-गांव घूमकर लाइव ऑडियंस के सामने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. जब NSD पहुंचकर टूटा स्टार बनने का सपना शुरुआत में अदिल भी आम लड़कों की तरह बड़े स्टार्स के दीवाने थे. वह अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और राजेश खन्ना जैसा बड़ा सुपरस्टार बनना चाहते थे. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के दिनों में अदिल हुसैन. 27 साल की उम्र में जब वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंचे, तो सुपरस्टार बनने का उनका यह सपना बदल गया. NSD में उन्होंने समझा कि एक्टर बनने का मतलब सिर्फ स्टारडम हासिल करना नहीं, बल्कि किरदार को ईमानदारी से जीना है. इसके बाद उन्हें चार्ल्स वॉलेस स्कॉलरशिप मिली और वह ड्रामा स्टूडियो लंदन में एक्टिंग सीखने गए. 2012 में बदला करियर, मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान अदिल हुसैन ने असमिया, बंगाली, तमिल, मलयालम, मराठी, हिंदी और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में काम किया. लेकिन साल 2012 उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ और ‘लाइफ ऑफ पाई’ में अदिल हुसैन के आइकॉनिक रोल्स. साल फिल्म किरदार खासियत / उपलब्धि 2012 इंग्लिश विंग्लिश सतीश गोडबोले (श्रीदेवी के पति) कम बोलने वाले, व्यावहारिक पति के रोल में बिना ड्रामे के छाप छोड़ी. 2012 लाइफ ऑफ पाई संतोष पटेल (पाई के पिता) ऑस्कर विजेता फिल्म, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. 2017 मुक्ति भवन / मज राति केतकी दया / सोमनाथ 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में दोनों फिल्मों के लिए Special Mention Award मिला. 2018 व्हाट विल पीपल से मिर्जा (नॉर्वेजियन फिल्म) नॉर्वे का प्रतिष्ठित Amanda Award जीता. 2019 कबीर सिंह कॉलेज डीन छोटा सा रोल, लेकिन आज भी फिल्म चुनने को लेकर पछतावा जताया. 2026 ऑपरेशन सफेद सागर एयर मार्शल विनोद पाटनी नेटफ्लिक्स सीरीज में 1999 कारगिल युद्ध के एयर कमांडर का दमदार रोल. ‘कबीर सिंह’: जब अपनी ही फिल्म की कर दी पब्लिक में बुराई अदिल हुसैन के करियर में ‘कबीर सिंह’ सबसे चर्चित विवादों में से एक रहा. वह अकेले ऐसे एक्टर रहे जिन्होंने खुलेआम अपनी ही हिट फिल्म की आलोचना की. फिल्म ‘कबीर सिंह’ में कॉलेज डीन के किरदार में अदिल हुसैन. बिना स्क्रिप्ट पढ़े की फिल्म: अदिल ने बताया कि ‘कबीर सिंह’ इकलौती ऐसी फिल्म थी, जिसे उन्होंने बिना पूरी स्क्रिप्ट पढ़े साइन किया था. 20 मिनट में थिएटर से बाहर: जब वह फिल्म देखने थिएटर पहुंचे, तो 20 मिनट बाद ही बाहर निकल आए. उन्होंने कहा कि फिल्म में स्त्रीओं के प्रति गलत बर्ताव और हिंसा को सही ठहराया गया है, जिसका उन्हें पछतावा है. 100-200 करोड़ का ऑफर भी ठुकरा दें: निर्देशक संदीप रेड्दी वांगा से सोशल मीडिया पर बहस के बाद अदिल ने साफ कहा कि अगर उन्हें ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों के लिए 200 करोड़ रुपये भी मिले, तो भी वह ऐसी फिल्में नहीं करेंगे. 2026 में लगातार एक्टिव: एयर मार्शल के रोल में दिखे 63 साल की उम्र में भी अदिल का सफर जारी है. साल 2026 में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में उन्होंने 1999 कारगिल युद्ध के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड के चीफ रहे एयर मार्शल विनोद पाटनी का किरदार निभाया. 2026 की सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में एयर मार्शल के रोल में अदिल हुसैन. View on Instagram अदिल का मानना है कि रोल छोटा हो या बड़ा, जब तक कैमरा आपके ऊपर है, किरदार एकदम असली और सच्चा लगना चाहिए. अमिताभ और धर्मेंद्र जैसा स्टार बनने का सपना देखने वाले अदिल हुसैन आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. वह साबित करते हैं कि स्टारडम से बड़ी चीज होती है- एक बेहतरीन और सच्चा कलाकार होना. ये भी पढ़ें: ‘मैं सुनीता नहीं हूं, तेरी धज्जियां उड़ा दूंगी’, गोविंदा की रूमर्ड GF पर भड़कीं राखी सावंत, कहा- ‘पति चोर’ ये भी पढ़ें: बड़ी फिल्म दिलाऊंगा, शो के बाद भी मेरे साथ रहना… क्या इरीना रुदाकोवा पर आया तेज प्रताप यादव का दिल? The post ‘कबीर सिंह’ के 20 मिनट भी नहीं झेल पाए अदिल हुसैन, फिल्म करने का आज भी पछतावा, 200 करोड़ के ऑफर पर कही ये बात appeared first on Naya Vichar.

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