JPSC Student Protest: क्या प्रेशर में आ गई कांग्रेस, 20 अगस्त से पहले छात्रों से होगी बात?
रांची से अभिषेक आनंद और अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट JPSC Student Protest: झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा सुधार और कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन 23वें दिन भी जारी है. रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में डटे अभ्यर्थियों ने अब 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव का ऐलान किया है. इससे पहले छात्रों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर मांगों को लेकर ठोस निर्णय नहीं लेने का आरोप लगाया था. हालांकि, आंदोलन के बीच छात्रों के एक बड़े वर्ग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति भरोसा जताते हुए बातचीत का रास्ता फिर से खोलने की अपील की है. 20 अगस्त से पहले प्रशासन से बातचीत की उम्मीद दोनों छात्र मंचों से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि वे आंदोलन को उग्र नहीं बनाना चाहते. उनका मानना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनके लिए बड़े भाई की तरह हैं और उन्हें अब भी उम्मीद है कि 20 अगस्त से पहले प्रशासन छात्रों को बातचीत के लिए बुलाएगी. छात्रों का कहना है कि संवाद के जरिए लंबित मांगों पर समाधान निकाला जा सकता है. यानी मामला अभी पूरी तरह टकराव की पटरी पर नहीं गया है, उम्मीद की ट्रेन कहीं धीमी गति से सही, चल रही है. दो प्रमुख मांगों पर अटका है विवाद छात्रों की मुख्य मांगों में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करना अथवा पूरे मामले की सीबीआई जांच कराना शामिल है. छात्रों का कहना है कि इन दो मुद्दों पर प्रशासन की ओर से स्पष्ट और ठोस निर्णय नहीं आने के कारण आंदोलन लंबा खिंच रहा है. इसके अलावा छात्र जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं से जुड़ी पारदर्शिता, सुधार और लंबित मांगों को भी उठाते रहे हैं. 2000 और 300 पदों की नियुक्ति का प्रस्ताव छात्रों ने तत्काल राहत के तौर पर जेएसएससी सीजीएल के लिए करीब 2000 पदों पर नयी वैकेंसी निकालने और जेपीएससी में लगभग 300 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग रखी है. अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि नयी नौकरियों के अवसर सामने आते हैं तो आंदोलन कर रहे युवाओं को अपने भविष्य की तैयारी के लिए वापस पढ़ाई की ओर लौटने का मौका मिलेगा. यह मांग आंदोलन को खत्म करने के लिए एक संभावित बीच का रास्ता भी बन सकती है. अभ्यर्थियों की मांग जायज, प्रशासन के पास विकल्प झारखंड में लंबे समय से कई प्रतियोगी परीक्षाएं नियमित रूप से नहीं हो पायी हैं. उन्होंने जे-टेट जैसी परीक्षाओं के लंबे अंतराल का भी उल्लेख किया. उनके मुताबिक राज्य में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और प्रशासन चाहे तो नयी वैकेंसी निकालकर छात्रों को अवसर दे सकती है. उनका कहना है कि नौकरी की संभावना सामने आने पर आंदोलन कर रहे छात्र मैदान छोड़कर फिर अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में लौट सकते हैं. विधानसभा घेराव के बाद प्रशासन पर बढ़ा दबाव छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान हुई घटनाओं और लाठीचार्ज के बाद प्रशासन पहले ही विपक्ष के निशाने पर है. अब मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा ने प्रशासनिक और नेतृत्वक दबाव दोनों बढ़ा दिए हैं. आनंद मोहन के अनुसार, यदि 20 अगस्त को बड़ी संख्या में छात्र मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ते हैं तो प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती होगी. ऐसे में प्रशासन के पास इससे पहले छात्रों से बातचीत कर स्थिति को संभालने का मौका है. कांग्रेस पर भी बढ़ रहा नेतृत्वक दबाव आंदोलन ने कांग्रेस को भी असहज स्थिति में ला दिया है. एक ओर कांग्रेस झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी छात्र आंदोलनों और युवाओं के मुद्दों को लेकर प्रशासनों पर सवाल उठाती रही है. आनंद मोहन के मुताबिक, झारखंड में आंदोलन के शुरुआती दौर में कांग्रेस नेताओं की सक्रियता और राहुल गांधी द्वारा छात्रों से फोन पर बातचीत के बाद पार्टी की छात्र हितैषी छवि बनी थी. अब छात्रों की नाराजगी कांग्रेस के लिए नेतृत्वक दबाव का कारण बन रही है. राहुल गांधी के पत्र से बढ़ी हलचल बताया गया कि राहुल गांधी की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र भेजा गया है. हालांकि, पत्र की सामग्री सार्वजनिक नहीं हुई है. इसी बीच 18 अगस्त को कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें मंत्री, विधायक और प्रदेश पदाधिकारी शामिल होंगे. बताया गया कि बैठक के एजेंडे में जेपीएससी-जेएसएससी विवाद और मौजूदा छात्र आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका पर रणनीति तय करना भी शामिल है. आक्रोश के बीच मुख्यमंत्री पर भरोसा आंदोलन के मौजूदा स्वरूप में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्रों में प्रशासन के प्रति नाराजगी के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर भरोसा भी दिखाई दे रहा है. अभ्यर्थियों का कहना है कि वे प्रशासन गिराने या किसी नेतृत्वक दल के खिलाफ लड़ने नहीं आए हैं. उनका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में सुधार और रोजगार के अवसर हासिल करना है. छात्रों का कहना है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर पहल करती है तो वे आंदोलन खत्म कर पढ़ाई की ओर लौटना चाहते हैं. इसे भी पढ़ें: ‘हेमंत सोरेन बड़े भाई… निकालेंगे आभार यात्रा’, जानें CM आवास घेराव पर छात्रों ने क्या कहा? संवाद ही बचा सकता है टकराव कुल मिलाकर 20 अगस्त का मुख्यमंत्री आवास घेराव प्रशासन के लिए नेतृत्वक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चुनौती बन सकता है. लेकिन छात्रों की बातों से यह भी साफ है कि अंतिम दरवाजा अभी बंद नहीं हुआ है. बातचीत का रास्ता खुलता है तो आंदोलन को टालने की संभावना बनी हुई है. छात्रों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री समय रहते हस्तक्षेप करेंगे और लंबित मुद्दों पर कोई ठोस समाधान निकलेगा. वरना मैदान में बैठे युवाओं और सत्ता के बीच दूरी बढ़ती जाएगी, और नेतृत्व में ऐसी दूरी अक्सर मुद्दे से ज्यादा बड़ी समाचार बन जाती है. इसे भी पढ़ें: JSSC CGL परीक्षा रद्द कर सकती है प्रशासन या नहीं? जानें क्या कहते हैं पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार The post JPSC Student Protest: क्या प्रेशर में आ गई कांग्रेस, 20 अगस्त से पहले छात्रों से होगी बात? appeared first on Naya Vichar.

