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राहुल गांधी और संदीप दीक्षित विवाद पर बोले जयराम रमेश, अब डिप्लोमेसी कहां है? अब तो हगलोमेसी है

जयराम रमेश ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “सबको गले लगाओ, दिखाओ कि विदेशी नेता तुम्हारे अच्छे दोस्त हैं, और छोटे देशों से अवॉर्ड और मेडल मांगो. मेरा मानना ​​है कि यह हमारी विदेश नीति के हित में नहीं है; इसने हमें कमजोर किया है. यही सवाल उठाए जा रहे हैं.” पीएम मोदी पीड़ित होने का नाटक करते हैं : जयराम रमेश जयराम रमेश ने आगे कहा, “जब लोगों की छवि खराब करने की बात आती है, तो प्रधानमंत्री का कोई मुकाबला नहीं है. जब भी प्रधानमंत्री से सवाल पूछा जाता है या उनकी आलोचना की जाती है, तो वे खुद को पीड़ित बताते हैं और विक्टिम पॉलिटिक्स करते हैं. वे दूसरों से सवाल कर सकते हैं, मजाक उड़ा सकते हैं और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन जब कोई उनसे सवाल पूछता है, तो दोहरे मापदंड अपनाए जाते हैं.” राहुल गांधी ने पीएम मोदी की विदेश नीति पर क्या कहा था, जिससे मचा है हंगामा राहुल गांधी ने 13 अगस्त को भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें जोकरों का समूह करार दिया था. प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर कटाक्ष करते हुए राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को प्रतीकात्मक रूप से गले लगाया था. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिमाग में पता नहीं कहां से यह बात घर कर गई कि गले मिलना ही विदेश नीति है. जब राहुल गांधी ने दीक्षित को गले लगाया तो पूर्व सांसद ने मजाकिया लहजे में सवाल किया कि आपने मुझे (जॉर्जिया) मेलोनी समझकर तो नहीं पकड़ा था? इस पर राहुल गांधी ने कहा कि वह अभी तक यहां नहीं पहुंचे हैं. दीक्षित की टिप्पणी को सोशल मीडिया में कई लोगों ने स्त्री विरोधी करार दिया. The post राहुल गांधी और संदीप दीक्षित विवाद पर बोले जयराम रमेश, अब डिप्लोमेसी कहां है? अब तो हगलोमेसी है appeared first on Naya Vichar.

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मनोज तिवारी का प्रशांत किशोर पर पलटवार, बोले- जीतने के बाद जो झुके वो संस्कारी, गाली दे वो अहंकारी, पीके ने कहा था फ्रॉड

Manoj Tiwari On Prashant Kishor: भोजपुरी कलाकार और भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर पर तीखा हमला बोला है. बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. अब मनोज तिवारी ने खुद को ‘संस्कारी बिहारी’ बताते हुए प्रशांत किशोर को ‘अहंकारी’ करार दिया है. मनोज तिवारी बोले- जीत के बाद भी गाली दे रहे हैं पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में मनोज तिवारी ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चुनाव की बात चुनाव तक ही होनी चाहिए. जीतने के बाद भी किसी के मुंह से अपशब्द निकलना सही नहीं है. मनोज तिवारी ने कहा कि जो जीतने के बाद झुकता है, वो संस्कारी होता है और जो जीतने के बाद भी गाली दे, वो अहंकारी होता है. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे सुनकर वह हैरान हैं. ‘हम संस्कारी बिहारी हैं’ भाजपा सांसद ने अपने काम का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एक हजार से ज्यादा कलाकारों को मंच दिया है. बिहार का नाम देश और दुनिया में पहुंचाने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि हम तो संस्कारी बिहारी हैं. हम इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते. मनोज तिवारी ने प्रशांत किशोर को बांकीपुर की जीत पर बधाई भी दी. साथ ही कहा कि अब उन्हें अपने क्षेत्र की जनता का ध्यान रखना चाहिए. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें प्रशांत किशोर ने मनोज तिवारी को बताया था ‘फ्रॉड’ दरअसल, प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू में मनोज तिवारी पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने भाजपा सांसद को ‘फ्रॉड आदमी’ बताया था. पीके ने आरोप लगाया था कि मनोज तिवारी चुनाव के समय बिहार आते हैं और उसके बाद गायब हो जाते हैं. उन्होंने मनोज तिवारी को चुनौती भी दी थी. कहा था कि अगर उनमें हिम्मत है तो भोजपुर में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के परिवार को न्याय दिलाकर दिखाएं. भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर शुरू हुआ विवाद दोनों नेताओं के बीच विवाद की शुरुआत भरत तिवारी एनकाउंटर मामले से हुई. बांकीपुर उपचुनाव के प्रचार के दौरान मनोज तिवारी ने प्रशांत किशोर पर गंभीर आरोप लगाए थे. मनोज तिवारी का आरोप था कि प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी की मां से कहा था कि वह तभी न्याय दिलाएंगे, जब वह बांकीपुर आकर जन सुराज पार्टी के लिए प्रचार करेंगी. Also Read:बांकीपुर के बाद प्रशांत किशोर का नया एक्शन प्लान तैयार, फिर पहुंचेंगे गांव-गांव, चिराग पासवान ने की PK की तारीफ The post मनोज तिवारी का प्रशांत किशोर पर पलटवार, बोले- जीतने के बाद जो झुके वो संस्कारी, गाली दे वो अहंकारी, पीके ने कहा था फ्रॉड appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Student Protest: कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर की आंदोलनकारी छात्रों से अपील, बोले- CBI जांच की मांग पर पुनर्विचार करें

JPSC Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में कथित धांधली पर छात्रों के आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने आंदोलनकारी छात्रों से केंद्रीय अण्वेशन ब्यूरो (CBI) जांच की मांग पर पुनर्विचार करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों की समस्याओं पर काफी संवेदनशील हैं और प्रशासन उनकी मांगों को लेकर गंभीरता से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि किसी भी जांच को पूरा होने में समय लगता है और ऐसा नहीं है कि आज कोई निर्णय लिया जाए और अगले दिन उसका परिणाम सामने आ जाए. CID नतीजे तक पहुंचने का कर रही प्रयास राजेश ठाकुर ने कहा कि छात्रों की चिंताओं को समझा जा रहा है और मामले की जांच जारी है. उन्होंने कहा कि CID लगातार सही परिणाम तक पहुंचने के लिए प्रयास कर रही है. ऐसे में छात्रों को जांच प्रक्रिया पर भरोसा रखते हुए थोड़ा समय देना चाहिए. कांग्रेस नेता ने CBI जांच की मांग पर उठाए सवाल CBI जांच की मांग पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने एजेंसी के हालिया रिकॉर्ड का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि CBI के पास करीब 152 मामले हैं, लेकिन इनमें अब तक ऐसी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों को संतोष हो. उनका कहना था कि जब केंद्रीय जांच एजेंसी के कई मामलों में अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं, तो झारखंड में चल रही जांच को उसी एजेंसी को सौंपने की मांग पर छात्रों को पुनर्विचार करना चाहिए. छात्रों की परेशानियों पर हेमंत सोरेन संवेदनशील उन्होंने कहा कि छात्रों को अपना आंदोलन इस तरह आगे बढ़ाना चाहिए कि उन्हें मिल रही नेतृत्वक और सामाजिक सहानुभूति प्रभावित न हो. राजेश ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोनों ही छात्रों की परेशानियों पर संवेदनशील हैं. प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. CID कर रही मामलों की जांच कांग्रेस नेता ने कहा कि CID लगातार मामलों की जांच कर रही है और उसका उद्देश्य सही परिणाम तक पहुंचना है. ऐसे में ऐसी एजेंसी को जांच सौंपना उचित नहीं होगा, जिसके कामकाज और लंबित मामलों को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने छात्रों से भावनात्मक दबाव में फैसला लेने के बजाय मौजूदा जांच प्रक्रिया को भी मौका देने की बात कही. लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं छात्र JPSC-JSSC अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शामिल है. छात्र कई मामलों में CBI और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें: ‘यह कैसी आजादी?’ देवेंद्रनाथ महतो के साथ रांची के सदर अस्पताल में बर्ताव पर बरसे जयराम महतो छात्रों का CBI जांच पर जोर राजेश ठाकुर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत तथा जांच को लेकर लगातार गतिरोध बना हुआ है. एक ओर प्रशासन CID और प्रस्तावित अन्य जांच प्रक्रियाओं के जरिए कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं आंदोलनकारी छात्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग पर जोर दे रहे हैं. अब छात्रों के अगले कदम पर सबकी नजर है. इसे भी पढ़ें: झारखंड में कनीय स्तर के अभियंता बने हुए हैं जिला अभियंता, प्रशासनी आदेश का हो रहा उल्लंघन The post JPSC Student Protest: कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर की आंदोलनकारी छात्रों से अपील, बोले- CBI जांच की मांग पर पुनर्विचार करें appeared first on Naya Vichar.

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संसद में लगातार हुए हंगामे पर हरिवंश ने जताई चिंता, कहा- संकट के वक्त तो सरकार-विपक्ष मिलकर काम करे

संसद के मानसून सत्र में लगातार हुए हंगामे और कार्यवाही बाधित होने के बीच राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने प्रशासन और विपक्ष दोनों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि संसद को चलाने की जिम्मेदारी किसी एक पक्ष की नहीं, बल्कि प्रशासन और विपक्ष दोनों की बराबर है. नेतृत्वक पार्टियों की संविधान में आस्था पर किया सवाल हरिवंश ने कहा कि अगर प्रशासन या विपक्ष में से कोई एक पक्ष सदन की कार्यवाही रोकने पर अड़ जाता है, तो संसद में वही स्थिति होती है, जो फिलहाल के दिनों में देखने को मिली. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नेतृत्वक पार्टियां लगातार संविधान की बात करती हैं और उसकी कॉपियां लेकर चलती हैं, लेकिन उनके वास्तविक व्यवहार में संविधान में आस्था कितनी दिखाई देती है? ये भी पढ़ें: UP के युवाओं के लिए खुशसमाचारी! CM योगी ने किया ‘यूथ ब्रिगेड स्कीम’ का ऐलान, जानिएं कैसे मिलेंगे लाभ ये भी पढ़ें: ट्रंप की ईरान पॉलिसी से बेचैन हैं खाड़ी के देश, रणनीति पर उठे सवाल तो व्हाइट हाउस ने दिया जवाब संसद का सही ढंग से चलना बहुत जरूरी हरिवंश ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नेतृत्वक और सुरक्षा परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में संसद की कार्यवाही का सही ढंग से चलना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा, हमें अपनी पिछली पीढ़ी से पूछना चाहिए कि 2014 के बाद हमने ‘विकसित हिंदुस्तान’ का सपना क्यों देखा?” उन्होंने जोर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में कम से कम संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए. संकट के वक्त पक्ष-विपक्ष एक सुर में बोले हरिवंश ने कहा कि विश्व अभी गंभीर एनर्जी क्रासिस के दौर से गुजर रहा है, बावजूद इसके हमारे देश में उतनी बदतर स्थिति नहीं है. इसकी वजह यह है कि हमने खुद को मजबूत किया है. ऐसे में जब संकट के हालात हैं, देश के लोगों को एक साथ आकर देश चलाना चाहिए ना कि संसद को बाधित करके लोकतंत्र के मंदिर को ठप करना चाहिए. The post संसद में लगातार हुए हंगामे पर हरिवंश ने जताई चिंता, कहा- संकट के वक्त तो प्रशासन-विपक्ष मिलकर काम करे appeared first on Naya Vichar.

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Gen Z को साधने बिहार पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, 400 से ज्यादा स्टूडेंट्स से करेंगे बात, जानिए पूरा कार्यक्रम

Gyanesh Kumar Bihar Visit: दो दिवसीय दौरे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पटना पहुंचे. पटना पहुंचने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने पत्रकारों से बातचीत की. उन्होंने कहा, मतदाता सूची के शुद्धिकरण का देशभर में सबसे सफल आयोजन बिहार से ही शुरू हुआ था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव का मतदान प्रतिशत न केवल आजादी से अब तक बिहार में सर्वाधिक रहा बल्कि अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, जापान, स्पेन के आम चुनाव से भी ज्यादा मतदान प्रतिशत रहा. ELC 2.0 की करेंगे शुरुआत जानकारी के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 17 अगस्त को Electrol literacy Clubs (ELC 2.0) की शुरुआत करेंगे. 17 अगस्त को लॉन्चिंग की जाएगी. ज्ञानेश कुमार बिहार के कई जिलों का दौरा करेंगे. खासकर वे राज्य के Gen Z वोटर्स से बात करेंगे. चुनाव में विद्यार्थियों की ज्यादा से ज्यादा सहभागिता हो, इसके लिए उन्हें प्रेरित करेंगे. View on Instagram इन जिलों में जायेंगे मुख्य चुनाव आयुक्त आज मुख्य चुनाव आयुक्त सीतामढ़ी, वैशाली और मधुबनी जायेंगे. यहां वे बूथ लेवल के अधिकारियों से बातचीत करेंगे. बताया जा रहा है कि ज्ञानेश कुमार का यह प्रयास चुनावी प्रक्रिया की जमीनी हकीकत को समझने के लिए होगा. इस दौरान बीएलओ अपने अनुभव साझा करेंगे, फील्ड में आने वाली चुनौतियों पर खुलकर चर्चा करेंगे और निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के सुझाव देंगे. बिहार से जुड़ी अन्य समाचारों के लिए यहां क्लिक करें पटना के ज्ञान भवन में होगा कार्यक्रम 17 अगस्त को पटना के ज्ञान भवन में निर्वाचन साक्षरता क्लब 2.0 (ELC 2.0) और ECINET को लेकर एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इस सम्मेलन की सबसे खास बात इसकी भागीदारी होगी. बिहार के 400 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों से हजारों विद्यार्थी इसमें शामिल होंगे. इनमें बड़ी संख्या उन युवाओं की होगी, जो पहली बार मतदान करने जा रहे हैं. कार्यक्रम में सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि शिक्षक, विश्वविद्यालयों के कुलपति, महाविद्यालयों और विद्यालयों के प्राचार्य और अलग-अलग संस्थानों के प्रमुख भी हिस्सा लेंगे. इस तरह से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस दौरे से न केवल जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल होगी. Also Read: बिहार में जमीन रजिस्ट्री के बाद WhatsApp पर मिलेंगे डॉक्युमेंट्स, नई डिजिटल व्यवस्था से आसान होगी प्रक्रिया The post Gen Z को साधने बिहार पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, 400 से ज्यादा स्टूडेंट्स से करेंगे बात, जानिए पूरा कार्यक्रम appeared first on Naya Vichar.

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CINTAA RAW: ‘11 लोग बच्चे नहीं हैं कि मैं उन्हें बहका दूं’, पद्मिनी कोल्हापुरे के आरोप पर उपासना सिंह का पलटवार

मुंबई: CINTAA में 11 एग्जिक्यूटिव कमिटी सदस्यों के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. कमिटी की संवैधानिक स्थिति, नए चुनाव और पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं. इसी बीच पद्मिनी कोल्हापुरे ने उपासना सिंह पर CINTAA सदस्यों के बीच गलतफहमी पैदा करने का आरोप लगाया है. अब इस आरोप पर उपासना सिंह ने ‘नया विचार’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपना पक्ष रखा है. ‘11 लोग शिशु नहीं हैं कि मैं उन्हें मिसगाइड कर दूं’ उपासना सिंह ने कहा कि उन पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने कमिटी के सदस्यों को मिसगाइड किया. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि “11 लोग शिशु नहीं हैं कि मैं उन्हें समझाकर इस्तीफा दिलवा दूं.” उनके मुताबिक, इस्तीफा देने वालों में बिंदु, हेमंत पांडे, मनोज जोशी और मुकेश ऋषि जैसे अनुभवी कलाकार शामिल हैं. ऐसे में यह कहना कि सभी लोग किसी के कहने पर इस्तीफा दे रहे हैं, उन्हें सही नहीं लगता. उपासना के मुताबिक CINTAA के संविधान में 50 फीसदी से ज्यादा सदस्यों के इस्तीफा देने की स्थिति में कमिटी के भंग होने और चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने का प्रावधान है. उनका दावा है कि 21 सदस्यीय कमिटी में 11 लोगों ने इस्तीफा दिया है, यानी संख्या 50 फीसदी से ज्यादा है. ‘मैंने इस्तीफा दिया नहीं, एक्सेप्ट किया था’ अपने पद को लेकर उठ रहे सवालों पर उपासना ने साफ किया कि उन्होंने खुद इस्तीफा नहीं दिया था. उनका नाम उन 11 लोगों की इस्तीफा सूची में नहीं था. उन्होंने कहा कि वह उस समय CINTAA की जनरल सेक्रेटरी थीं और उन्होंने बतौर जनरल सेक्रेटरी उन सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार किए थे. उपासना का दावा है कि इसके बाद इस्तीफों से जुड़े दस्तावेज लेकर लेबर कमिश्नर के पास प्रक्रिया पूरी की गई और वहां से भी कमिटी के भंग होने से जुड़ा पत्र मिला. उनका कहना है कि लेबर कमिश्नर की ओर से यह भी कहा गया कि ऐसी स्थिति में EGM या AGM जैसी बैठक नहीं की जा सकती. ‘मदर बॉडी ने भी चुनाव कराने को कहा’ उपासना के मुताबिक इसके बाद उन्होंने CINTAA की मदर बॉडी FWICE से चुनाव कराने की मांग की. उनका दावा है कि FWICE की जनरल काउंसिल की बैठक में कई संबद्ध संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे और चुनाव कराने का फैसला लिया गया. उन्होंने बताया कि 12 सितंबर को चुनाव की तारीख घोषित की गई है. हालांकि CINTAA के दूसरे पक्ष की ओर से कमिटी के भंग होने और इस्तीफों की संवैधानिक व्याख्या को लेकर अलग दावा किया गया है. यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. ‘पद्मिनी कोल्हापुरे ने खुद को जनरल सेक्रेटरी घोषित कर दिया’ उपासना ने पद्मिनी कोल्हापुरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी EGM के उन्हें जनरल सेक्रेटरी घोषित कर दिया गया. उनके मुताबिक, पद्मिनी ने खुद को जनरल सेक्रेटरी और पूनम ढिल्लों को प्रेसिडेंट बताते हुए फेडरेशन को एक पत्र भेजा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हेतल परमार को ट्रेजरार बनाया गया, जबकि पहले दीपक पराशर इस पद पर थे. उपासना ने इन फैसलों को ‘इलीगल’ बताते हुए कहा कि उनके पास इससे जुड़े दस्तावेज और पत्र मौजूद हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके पास लेबर कमिश्नर का पत्र, फेडरेशन का पत्र और इस्तीफा देने वाले सदस्यों के हस्ताक्षरित दस्तावेज भी हैं. ‘मेरे खिलाफ भी शो-कॉज नोटिस भेजा गया’ उपासना ने संस्था के कामकाज के तरीके पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि जो लोग मौजूदा व्यवस्था से सहमत नहीं थे, उन्हें शो-कॉज नोटिस दिए गए. उन्होंने कहा कि उन्हें भी रणवीर सिंह के मामले में नोटिस देकर पूछा गया था कि वह उनके समर्थन में क्यों बोलीं. उपासना ने बताया कि वह FWICE की जनरल काउंसिल की सदस्य हैं और इसी हैसियत से रणवीर सिंह के मामले में अपनी बात रखने गई थीं. उन्होंने सवाल किया कि अगर CINTAA किसी कलाकार के हितों की रक्षा करने के लिए बनी संस्था है, तो अपने ही सदस्य के पक्ष में बोलने के लिए उन्हें स्पष्टीकरण क्यों देना पड़ा? उन्होंने यह भी कहा कि बाद में पद्मिनी कोल्हापुरे ने भी रणवीर का समर्थन किया था. ‘अगर मैं गलत हूं तो बाकी 11 लोग भी गलत हैं?’ उपासना ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप लगाए जा सकते हैं, लेकिन यह कैसे माना जा सकता है कि बाकी 11 अनुभवी सदस्य भी गलत थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली चुनावी प्रक्रिया में हार चुके कुछ लोगों को बाद में कमिटी में शामिल किया गया. अब उपासना का कहना है कि इस पूरे विवाद का समाधान सिर्फ नए और निष्पक्ष चुनाव हैं. उनका दावा है कि उनके पास अपने पक्ष में दस्तावेज मौजूद हैं और वह कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक ही आगे बढ़ेंगी. दूसरी ओर CINTAA के मौजूदा पदाधिकारियों की ओर से उपासना के दावों को लेकर अलग पक्ष रखा गया है. ऐसे में 12 सितंबर को प्रस्तावित चुनाव इस पूरे विवाद का अगला बड़ा पड़ाव बन सकता है. The post CINTAA RAW: ‘11 लोग शिशु नहीं हैं कि मैं उन्हें बहका दूं’, पद्मिनी कोल्हापुरे के आरोप पर उपासना सिंह का पलटवार appeared first on Naya Vichar.

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Viksit Bharat 2047: लक्ष्य बड़ा है, अब प्रगति को मापने का पैमाना भी बड़ा होना चाहिए मोदी जी!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में विकसित हिंदुस्तान 2047 के लक्ष्य को सामने रखते हुए आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा, कृषि, युवा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर जोर दिया. लेकिन किसी भी बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य की विश्वसनीयता केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उसकी मापने योग्य प्रगति से तय होती है. विकसित हिंदुस्तान का लक्ष्य 2047 तक हिंदुस्तान को एक विकसित राष्ट्र बनाने का है. ऐसे में अगले दो दशक में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है, उनमें वास्तविक बदलाव कितना हुआ. इसके लिए केवल बजट खर्च, सड़क की लंबाई, योजनाओं की संख्या या प्रशिक्षण पाने वाले लोगों की गिनती पर्याप्त नहीं होगी. असली सवाल होगा- इन खर्चों और योजनाओं का नागरिकों की आय, रोजगार, उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ा? इसी नजरिए से विकसित हिंदुस्तान के लिए प्रशासन के प्रदर्शन को कुछ स्पष्ट संकेतकों के जरिए लगातार मापा जा सकता है. Read more: 8. राष्ट्रीय सुरक्षा अब सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं आधुनिक युद्ध के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ केवल सीमा सुरक्षा नहीं है. साइबर हमले, बैंकिंग सिस्टम, ऊर्जा प्रतिष्ठान, रिफाइनरी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा हैं. इसलिए साइबर घटनाओं, प्रतिक्रिया समय, रणनीतिक भंडार और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे संकेतकों पर भी नियमित निगरानी जरूरी होगी. 9. संस्थागत सुधार: प्रशासन कितनी तेजी से डिलीवर कर रही है? विकसित हिंदुस्तान के लिए मजबूत संस्थानों की जरूरत होगी. न्यायिक लंबित मामलों, रेगुलेटरी देरी, प्रशासनी परियोजनाओं में देरी, नागरिक शिकायतों के समाधान और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई जैसे संकेतक प्रशासन की संस्थागत क्षमता को माप सकते हैं. हर मंत्रालय के लिए स्पष्ट KPI- Key Performance Indicators तय किए जाएं और यह बताया जाए कि निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले प्रदर्शन कितना रहा. नागरिकों से डिजिटल माध्यम से सेवा-संतुष्टि का फीडबैक लेना भी प्रशासनी जवाबदेही को मजबूत कर सकता है. 10. सबसे जरूरी सवाल: 2047 तक हर साल कितना हासिल करना है? विकसित हिंदुस्तान 2047 कोई एक दिन में हासिल होने वाला लक्ष्य नहीं है. इसलिए 2025 को बेसलाइन मानकर 2026, 2027, 2028 और आगे हर वर्ष के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जा सकते हैं. आखिर 2047 का लक्ष्य तभी विश्वसनीय बनेगा जब नागरिक यह देख सकें कि आज हम कहां हैं, अगले साल कहां पहुंचना है और उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कौन-सा मंत्रालय क्या कर रहा है. The post Viksit Bharat 2047: लक्ष्य बड़ा है, अब प्रगति को मापने का पैमाना भी बड़ा होना चाहिए मोदी जी! appeared first on Naya Vichar.

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Bhojpuri Bawal: मुझे आंसू से खरीदा जा सकता है, पैसे और धौंस से नहीं… Pawan Singh ने क्यों कही ये बात?

Bhojpuri Bawal: रियलिटी शो ‘भोजपुरी बवाल’ के 14वें एपिसोड में पावर स्टार पवन सिंह और मशहूर कॉमेडियन हिंदुस्तानी सिंह के बीच दिल खोलकर बातचीत देखने को मिली. शो के दौरान हिंदुस्तानी सिंह ने पवन सिंह की दरियादिली से जुड़ा एक किस्सा शेयर करते हुए पूछा, “हमने सुना है कि एक शो में आपने 11 लाख रुपये कमाए थे और घर जाते-जाते सब रास्ते में ही बांट दिए?” इसके बाद हिंदुस्तानी ने अपने मजाकिया अंदाज में चुटकी लेते हुए कहा, “आप हमारे घर के बगल से क्यों नहीं निकले? उधर हम लोग भी खड़े थे.” “पैसे और धौंस से मुझे नहीं खरीदा जा सकता” View on Instagram हिंदुस्तानी की बात सुनकर पवन सिंह मुस्कुराए और स्वीकार किया कि वह थोड़े मूडी इंसान हैं. अपने पुराने दिनों को याद करते हुए पवन सिंह ने एक दिलचस्प किस्सा सुनाया: “बहुत पहले की बात है, बारिश में एक शख्स ने मुझे साइन किया और कैश लाकर दिया कि भाईजी यह काम करना है. साथ में मौजूद एक और शख्स ने कहा कि ‘पवन जी के पास पैसा रहेगा तो इनसे कभी भी काम करवा लूंगा.’ उनकी यह बात सुनते ही मैंने साफ मना कर दिया कि भाई अब तो मैं यह फिल्म बिल्कुल नहीं करूंगा. मैंने तुरंत पैसे वापस भिजवा दिए और वह फिल्म नहीं की.” पवन सिंह ने अपनी सोच को साफ करते हुए कहा, “मुझे जितने लोग जानते हैं, उन्हें पता है कि पवन सिंह को आंसू से खरीदा जा सकता है, पैसे और धौंस से नहीं.” “मुझे समझ आ जाता है कि कौन मक्खन लगा रहा है” शो में आगे हिंदुस्तानी ने पवन सिंह से पूछा कि क्या उन्हें अपने आसपास मौजूद लोगों की नीयत का पता चल जाता है कि कौन सच बोल रहा है और कौन सिर्फ मक्खन लगा रहा है? इस पर पवन सिंह ने दिल की बात कहते हुए कहा, “मुझे तुरंत महसूस हो जाता है. मुझे समझ आ जाता है कि यह इंसान मुझे पागल समझ रहा है. लेकिन अगर मुझे किसी का सच्चा प्यार दिख गया, तो मुझे यह सोफा (इशारा करते हुए) भी नहीं चाहिए. मैं आज भी अपने घर में बेड पर नहीं सोता, हॉल में चटाई बिछाकर सोता हूं. मुझे आसपास 3-4 लोग चाहिए ताकि हंस-बोलकर सो सकूं. मैं मिजाज से ही काम करता हूं और आगे भी ऐसे ही करूंगा.” ये भी पढ़ें: Bhojpuri Bawal Promo: बिहारी स्टाइल में पवन सिंह ने बनाया दाल-भात-भुजिया, जन्नत जुबैर को भी पढ़ा दिया ‘हरियर मर्चा’ का पाठ The post Bhojpuri Bawal: मुझे आंसू से खरीदा जा सकता है, पैसे और धौंस से नहीं… Pawan Singh ने क्यों कही ये बात? appeared first on Naya Vichar.

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₹10 हजार डाउन पेमेंट पर घर लाएं Suzuki Access 125, हर महीने इतनी देनी होगी EMI

इंडियन ऑटोमोबाइल मार्केट में स्कूटर की डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. इसका क्रेज सिर्फ शहरों में ही नहीं, बल्कि गांव में भी लोग पसंद कर रहे हैं. खासकर स्त्रीओं के लिए यह एक बढ़िया साधन भी है. ऐसे में जब स्कूटर की बात होती है तो सुजुकी एक्सेस 125 का नाम सबसे पहले आता है, जो लंबे समय से ग्राहकों का दिल जीत रही है. सुजुकी स्कूटर स्कूल, कॉलेज या रोजाना ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए बेहतर ऑप्शन है. यदि आपको भी इसे घर लाना है, तो इस आर्टिकल में बताएंगे कि कैसे कम कीमत में खरीद सकते हैं. एक बार पूरा बजट नहीं बना रहे हैं, तो इसे EMI पर ले सकते हैं, वो भी सिर्फ 10 हजार देकर. आइए जानते हैं कैसे… सुजुकी एक्सेस 125 की कीमत कितनी है? कोई भी गाड़ी लेने से पहले उसकी कीमत के बारे में जान लेना सबसे पहले जरूरी होता है. सुजुकी एक्सेस 125 इलेक्ट्रिक स्कूटर की शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 82,185 रुपये है, जबकि टॉप वेरिएंट के लिए 92,200 रुपये है. हालांकि, इसे रोड पर लाने तक में आपकी खर्च बढ़ जाएगी, क्योंकि उसमें RTO और इंश्योरेंस चार्ज जुड़ जाता है. इसका डिस्क/ड्रम मॉडल की ऑन रोड कीमत 98 हजार रुपये करीब है.  सुजुकी एक्सेस 125 10 हजार रुपये डाउन पेमेंट पर कैसे खरीदें? यदि आपने सुजुकी एक्सेस 125 का स्टैंडर्ड एडिशन खरीदने का प्लान है, तो कीमत लगभग 1,00,040 ऑन रोड पड़ेगा. उसके बाद आप 10,000 रुपये डाउन पेमेंट करते हैं, तो बाकी बचे 90,040 अमाउंट को लोन के रूप में फाइनेंशियल बैंक से लेना पड़ेगा. यदि आपका सारा क्रेडिट स्कोर और बैंक रिकॉर्ड बेहतर रहता है, तो आसानी से लोन मिल जाएगा.  ये भी पढ़ें: TVS Jupiter 125 vs Suzuki Access 125: स्त्रीओं के लिए कौन-सा स्कूटर रहेगा सेफ और शानदार? मंथली EMI कितनी बनेगी? यदि आपको, सुजुकी एक्सेस 125 का स्टैंडर्ड एडिशन के लिए लोन ऑफर किया जाता है और आपको EMI पूरा करने के लिए 24 महीने यानि 2 साल का टेन्योर लेते हैं, तो आपकी EMI ज्यादा प्रेशर वाली नहीं बनेगी. आमतौर पर ऐसा होता है कि फाइनेंस करने वाले बैंक 9.5 से लेकर 10 प्रतिशत तक ब्याज दर पर लोन देते हैं. यदि आपको भी यह लोन 9.8 प्रतिशत ब्याज रेट पर मिलता है, तो हरेक महीने 4,163 रुपये EMI देनी पड़ेगी. इस अमाउंट में आपके ऊपर ज्यादा प्रेशर नहीं बनेगा. यदि आप 25 हजार रुपये का महिना भी कमाते हैं, तो इसे अफोर्ड कर सकते हैं. दूसरा प्लान भी चुन सकते हैं? यदि आपकी सैलरी 50 हजार या उससे अधिक है और ज्यादा दिनों तक EMI का लफड़ा नहीं पालना चाहते हैं, तो कम टेन्योर वाला ऑप्शन का चयन कर सकते हैं. अगर आपने 18 महीने यानि डेढ़ साल के लिए प्लान लिया है तो महीने की EMI 5,241 रुपये बनेगी. इससे भी कम 12 साल का प्लान है, जिसमें आपको हर महीने 7,939 रुपये देने पड़ेंगे. ये भी पढ़ें: ₹95 हजार से कम में आता है Suzuki का ये स्कूटर, 55kmpl माइलेज के साथ मिलते हैं कई शानदार फीचर्स सुजुकी एक्सेस 125 की खासियत क्या है? सुजुकी एक्सेस 125 में 124 सीसी का एयर-कूल्ड, सिंगल सिलेंडर इंजन मिलता है. यह इंजन 8.7PS की ताकत और 10 NM का टॉर्क जेनरेट करने का पावर रखता है. इसमें बिग साइज अंडर सीट स्टोरेज भी मिलता है, जिसमें 2 हेलमेट आसानी से रख सकते हैं. इसके अलावा बाहरी फ्यूल फिलिंग, डिजिटल कंसोल और यूएसबी चार्जिंग सॉकेट जैसे शानदार फीचर्स भी मिलते हैं.   The post ₹10 हजार डाउन पेमेंट पर घर लाएं Suzuki Access 125, हर महीने इतनी देनी होगी EMI appeared first on Naya Vichar.

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खरगोश, बिल्ली से लेकर मच्छर तक…क्रोमोजोम से जुड़े 20 GK के सवाल SSC CGL के लिए हैं जरूरी

Biology GK Questions For SSC CGL: SSC CGL परीक्षा में General Science के तहत Biology से भी कई सवाल पूछे जाते हैं. इनमें सेल, DNA, RNA, जीन और क्रोमोजोम से जुड़े सवाल होते हैं. क्रोमोजोम की संख्या अलग-अलग जीवों में अलग होती है और इससे जुड़े सवाल प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं. अगर आप भी SSC CGL परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो यहां दिए गए क्रोमोजोम से जुड़े जनरल नॉलेज (General Knowledge) के सवाल आपके काम आ सकते हैं. क्रोमोजोम क्या होता है? क्रोमोजोम कोशिका के अंदर पाया जाने वाला DNA और प्रोटीन से बना एक खास ढांचा है. इसमें जीव की आनुवंशिक जानकारी यानी उसके गुणों से जुड़ी जानकारी मौजूद होती है. यही जानकारी माता-पिता से बच्चों तक गुण पहुंचाने में मदद करती है. यूकैरियोटिक कोशिकाओं में क्रोमोजोम मुख्य रूप से कोशिका के केंद्रक (Nucleus) में पाए जाते हैं. क्रोमोजोम शब्द का नामकरण जर्मन वैज्ञानिक विल्हेम वाल्डेयर (Wilhelm Waldeyer) ने 1888 में किया था. किसी भी जीव में क्रोमोजोम की संख्या एक बराबर नहीं होती है. ये भी पढ़ें: X-Ray से Neutron तक, SSC CGL परीक्षा से पहले जरूर पढ़ लें डिस्कवरी से जुड़े ये 20+ सवाल अलग-अलग जानवरों में कितनी है क्रोमोजोम की संख्या जीव (Organism) क्रोमोजोम की संख्या कबूतर (Pigeon) 80 कुत्ता (Dog) 78 घोड़ा (Horse) 64 चिंपैंजी (Chimpanzee) 48 आलू (Potato) 48 मानव (Human) 46 खरगोश (Rabbit) 44 गेहूं (Wheat) 42 बिल्ली (Cat) 38 मेंढक (Frog) 26 टमाटर (Tomato) 24 मटर (Pea) 14 घरेलू मक्खी (House Fly) 12 मच्छर (Mosquito) 6 एस्केरिस (Ascaris) 2 SSC CGL के लिए खास तथ्य: मानव की सामान्य शारीरिक कोशिकाओं में 46 क्रोमोजोम यानी 23 जोड़े होते हैं, जबकि गैमेट कोशिकाओं में 23 क्रोमोजोम होते हैं. SSC CGL GK Questions: क्रोमोजोम से जुड़े 20 जनरल नॉलेज के सवाल-जवाब 1.प्रश्न: क्रोमोजोम किससे बने होते हैं? उत्तर: DNA और प्रोटीन से. 2.प्रश्न: क्रोमोजोम का नामकरण किस वैज्ञानिक ने किया था? उत्तर: विल्हेम वाल्डेयर ने. 3.प्रश्न: वाल्डेयर ने क्रोमोजोम शब्द का नामकरण किस वर्ष किया था? उत्तर: 1888 में. 4.प्रश्न: मानव की सामान्य शारीरिक कोशिका में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 46 क्रोमोजोम. 5.प्रश्न: मानव में क्रोमोजोम के कितने जोड़े होते हैं? उत्तर: 23 जोड़े. 6.प्रश्न: मानव की गैमेट कोशिकाओं में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 23 क्रोमोजोम. 7.प्रश्न: क्रोमोजोम का मुख्य कार्य क्या है? उत्तर: आनुवंशिक जानकारी को संचित और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाना. 8.प्रश्न: क्रोमोजोम में आनुवंशिक जानकारी किस रूप में मौजूद होती है? उत्तर: DNA के रूप में. 9.प्रश्न: डिप्लॉयड कोशिका किसे कहते हैं? उत्तर: जिसमें क्रोमोजोम के दो सेट यानी जोड़े मौजूद हों. 10.प्रश्न: हैप्लॉयड कोशिका किसे कहते हैं? उत्तर: जिसमें क्रोमोजोम का एक सेट मौजूद हो. 11.प्रश्न: मानव के शुक्राणु और अंडाणु किस प्रकार की कोशिकाएं हैं? उत्तर: हैप्लॉयड कोशिकाएं. 12.प्रश्न: कबूतर में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 80. 13.प्रश्न: कुत्ते में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 78. 14.प्रश्न: घोड़े में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 64. 15.प्रश्न: चिंपैंजी में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 48. 16.प्रश्न: बिल्ली में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 38. 17.प्रश्न: खरगोश में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 44. 18.प्रश्न: घरेलू मक्खी में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 12. 19.प्रश्न: मच्छर में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 6. 20.प्रश्न: एस्केरिस में कितने क्रोमोजोम होते हैं? उत्तर: 2. ये भी पढ़ें: रीडिंग करने से होता है Time Waste?English मजबूत करने के लिए Neetu मैम ने दिए टिप्स SSC CGL के लिए याद रखने वाली ट्रिक मानव-46 बिल्ली-38 खरगोश-44 कुत्ता-78 घोड़ा-64 कबूतर-80 मच्छर-6 एस्केरिस-2 इन क्रोमोजोम संख्याओं को खास तौर पर याद रखें. परीक्षा में सीधे तथ्य आधारित सवाल पूछे जा सकते हैं. ये भी पढ़ें: परीक्षा हॉल में नहीं होगा पछतावा! बौद्ध-जैन धर्म के ग्रंथों से जुड़े 20 सबसे जरूरी सवाल और जवाब The post खरगोश, बिल्ली से लेकर मच्छर तक…क्रोमोजोम से जुड़े 20 GK के सवाल SSC CGL के लिए हैं जरूरी appeared first on Naya Vichar.

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