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Champat Rai: कौन हैं चंपत राय? 18 महीने जेल, राम मंदिर आंदोलन और अब महासचिव पद से इस्तीफा

Champat Rai: अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब मंदिर में प्राप्त दान के कथित गबन के मामले में FIR दर्ज होने के बाद जांच तेज हो गई है. उत्तर प्रदेश प्रशासन के निर्देश पर हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं- 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, तिन्नू यादव, मनीष यादव सहित अन्य 8 लोगों के नाम शामिल हैं.

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब अयोध्या के पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में मिले दान में से करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये का गबन हुआ है. इन आरोपों के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. विवाद की शुरुआत में चंपत राय ने दान राशि की चोरी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था. हालांकि, बाद में जब योगी प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की, तो उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया.

चंपत राय ने क्यों दिया इस्तीफा?

मामले ने मोड़ तब लिया जब अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी, जिसमें गिरफ्तार किए गए आठ लोगों का जिक्र किया गया. आरोपियों में चंपत राय का एक सहयोगी भी शामिल था. इसके बाद जांच का दायरा और बढ़ गया. इसी बीच समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है. बढ़ते विवाद और नैतिक जिम्मेदारी का हवाला देते हुए शुक्रवार को चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

कौन हैं चंपत राय?

चंपत राय का जन्म साल 1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ था. बचपन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से प्रभावित रहे और बाद में संगठन से जुड़ गए. लंबे समय तक उन्होंने सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब साल 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ तो राय को इसका महासचिव बनाया गया था.

रसायन विज्ञान के शिक्षक से राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे तक का सफर

राम मंदिर आंदोलन से जुड़ने से पहले चंपत राय बिजनौर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के शिक्षक थे. आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. समर्थकों का दावा है कि आरएसएस से जुड़े होने के कारण उन्हें करीब 18 महीने जेल में रहना पड़ा था. रिहाई के बाद उन्होंने शिक्षण कार्य में वापसी नहीं की और अपना जीवन सामाजिक और धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया. साल 1980 में वे औपचारिक रूप से विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े. संगठन में उन्होंने सचिव से लेकर अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक का सफर तय किया.

राम लला का रिकॉर्ड कीपर क्यों कहलाते हैं चंपत राय?

चंपत राय 1980 के दशक से ही राम मंदिर आंदोलन के सक्रिय चेहरों में रहे. उनके करीबी और समर्थकों का मानना है कि अयोध्या नगरी के इतिहास, परंपराओं और गलियों की जितनी गहरी जानकारी उन्हें है, उतनी शायद ही किसी अन्य व्यक्ति को हो. कई लोग इसी कारण चंपत राय को अयोध्या में रामलला का रिकॉर्ड कीपर भी कहते हैं. राम मंदिर आंदोलन से जुड़ने के बाद चंपत राय ने अपना पूरा जीवन राम मंदिर आंदोलन और उससे जुड़े सामाजिक-धार्मिक कार्यों में लगा दिया है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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