Hot News

Marital Rape : पति द्वारा की गई जबरदस्ती को क्यों नहीं कहा जाता रेप? जानिए, पति-पत्नी के संबंध पर क्या कहता है कानून

इसी क्रम में एक बड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. यह मामला है मैरिटल रेप यानी वैवाहिक बलात्कार का. अगर मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाया गया, तो यह हिंदुस्तानीय स्त्रीओं के अधिकारों में ऐतिहासिक वृद्धि होगी और बेशक इसका असर उनकी सामाजिक स्थिति पर भी पड़ेगा. लेकिन यह मसला इतना सरल नहीं है, यही वजह है अबतक यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है. केंद्र प्रशासन का भी इस मसले पर यह कहना है कि अगर मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाया गया तो परिवार नामक संस्था पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं, क्योंकि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है. आइए समझते क्या है पूरी बात.

BNS की धारा 63 में रेप की परिभाषा

हिंदुस्तानीय कानून के अनुसार किसी स्त्री की मर्जी के बिना उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना, कानून के हिसाब से अपराध है. हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 में रेप (बलात्कार) की परिभाषा और उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.

कानून के बारे में विस्तार से बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा बताते हैं कि बीएनएस की धारा 63 में रेप की परिभाषा का वर्णन है. जिसके अनुसार किसी स्त्री की इच्छा के खिलाफ; उसकी सहमति के बिना; डरा-धमकाकर ली गई सहमति से, सहमति इसलिए कि स्त्री को ऐसा लगता है कि संबंधित व्यक्ति भविष्य में उसका पति बन सकता है, मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के दौरान दी गई सहमति, नशे की हालात में दी गई सहमति, स्त्री की उम्र 18 साल से कम हो तो ऐसे शारीरिक संबंध को रेप माना जाता है.

बीएनएस की धारा 63

मैरिटल रेप जैसा शब्द कानून में वर्णित नहीं

अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा बताते हैं कि बीएनएस में मैरिटल रेप जैसे शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है. दो व्यक्ति वैवाहिक संबंध में हैं तो यह एक नैसर्गिक सत्य है कि उनके बीच शारीरिक संबंध बनते हैं. पति-पत्नी के बीच अगर शारीरिक संबंध बिना सहमति के बनाए जाते हैं, तो उसके लिए BNS की धारा 63 में Exception 2 है.

इसमें कहा गया है कि-“A sexual act or sexual intercourse by a man with his own wife, the wife not being under eighteen years of age, is not rape. यहां गौर करने वाली बात यह है कि यहां sexual intercourse शब्द का प्रयोग हुआ है ना कि रेप का.

पति-पत्नी के बीच बन रहे शारीरिक संबंध को कानून रेप नहीं मानता और उसके लिए sexual intercourse का प्रयोग किया गया है.अगर सुप्रीम कोर्ट इसे रेप के दायरे में लाता है, तो फिर इसके लिए प्रशासन को अध्यादेश लाना होगा, राष्ट्रपति की मंजूरी लगेगी और चूंकि बीएनएस 2024 से ही लागू हुआ है, इसलिए इतनी जल्दी इसमें बदलाव अलग संदेश भी दे सकता है.

पति-पत्नी के संबंधों के लिए BNS की धारा 67 में भी कुछ प्रावधान है, संभवत: इस धारा के तहत सुप्रीम कोर्ट कुछ विचार कर सकता है. BNS की धारा 67 के अनुसार अगर पति-पत्नी अलग रह रहे हैं—चाहे अदालत के separation decree के तहत या किसी अन्य कारण से और पति, पत्नी की सहमति के बिना उसके साथ यौन संबंध बनाता है, तो यह अलग अपराध है. इसकी सजा कम से कम 2 साल और अधिकतम 7 साल की जेल तथा जुर्माना है. BNS की धारा 68 के तहत अधीनस्थ कर्मचारी के साथ संबंध को भी sexual intercourse की श्रेणी में रखा गया है और शादी का प्रलोभन देकर बनाया गया संबंध भी इसी श्रेणी में आता है.

मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाने की क्यों हो रही है मांग?

मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाने की मांग करने वालों का कहना है कि शादी को स्त्री की स्थायी यौन सहमति (permanent consent) नहीं माना जाना चाहिए. याचिकाकर्ताओं और स्त्री अधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि विवाह के बाद भी स्त्री के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसकी सहमति का होना बहुत जरूरी है.

पक्ष मुख्य बिंदु (Key Points)
मुख्य मांग विवाह को स्त्री की स्थायी यौन सहमति (Permanent Consent) न माना जाए.
सहमति का अधिकार विवाह के बाद भी शारीरिक संबंध के लिए स्त्री की स्पष्ट सहमति आवश्यक है.
शारीरिक स्वायत्तता स्त्री के शरीर पर उसका स्वयं का अधिकार है, जिसे विवाह समाप्त नहीं करता.
मौलिक अधिकार यह मुद्दा स्त्री की गरिमा (Dignity), समानता (Equality) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) से जुड़ा है.
दोहरा मापदंड वही कृत्य जो गैर-पति करे तो ‘रेप’ माना जाता है, पति होने पर कानूनी छूट क्यों मिले?

एक स्त्री के शरीर पर उसका हक होता है और इस वजह से इस मसले को उसकी गरिमा,समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों से जोड़ा गया है. शादी हमेशा के लिए सेक्स का आधार नहीं हो सकता. यह भी तर्क दिया जाता है कि जिस कृत्य के लिए किसी व्यक्ति को रेप का दोषी माना जाता है उसी कृत्य के लिए उसके पति हो जाने पर उसे छूट क्यों दी जाती है.

मैरिटल रेप को अपराध बनाने का क्यों हो रहा है विरोध?

मैरिटल रेप को अपराध बनाने का विरोध इसलिए नहीं हो रहा है कि प्रशासन या कानून यह मानता है कि पत्नी के साथ जबरन यौन संबंध सही है. केंद्र प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि पति को पत्नी की सहमति के खिलाफ यौन संबंध बनाने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है.

विवाद इस बात को लेकर है कि क्या ऐसे कृत्य को अलग से रेप मानकर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए या मौजूदा वैवाहिक/आपराधिक कानूनों के तहत इसपर कार्रवाई हो. केंद्र प्रशासन का मानना है कि मैरिटल रेप को अपराध नहीं माना जाता है, अगर इस कृत्य को अपराध की श्रेणी में लाया जाएगा, तो उसके लिए अलग से कानून बनाना होगा, जो संसद का काम है.

प्रशासन यह भी मानती है कि मैरिटल रेप से हमारा समाज भी जुड़ा है, अगर यह कानून का रूप ले लेता है तो इसके दुरुपयोग की भी प्रबल आशंका है. अगर इस कानून का दुरुपयोग हुआ, तो विवाह नामक संस्था खतरे में आ सकती है, जिसका असर परिवार पर पड़ेगा. परिवार अगर टूटे तो समाज भी टूटेगा और यह खतरनाक हो सकता है.

हिंदुस्तानीय समाज दूसरे किसी भी देश के समाज से अलग है, यह कहना कि पश्चिमी देशों में मैरिटल रेप अपराध है, इसलिए हमारे देश में भी होना चाहिए, यह तर्कसंगत नहीं है. प्रशासन यह भी मानती है कि पति द्वारा किए जा रहे अन्याय से निपटने के लिए देश में कानून हैं, जिनके तहत इस तरह के मामलों की सुनवाई संभव है.

ये भी पढ़ें : BRICS Summit 2026 Live Updates in Hindi : बोले शी जिनपिंग- ग्लोबल शांति के लिए बड़ी भूमिका निभाए ब्रिक्स

The post Marital Rape : पति द्वारा की गई जबरदस्ती को क्यों नहीं कहा जाता रेप? जानिए, पति-पत्नी के संबंध पर क्या कहता है कानून appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top