Virat Ramayan Mandir: दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग को मोतिहारी के विराट रामायण मंदिर में स्थापित कर दिया गया. इस ऐतिहासिक पल के सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा समेत कई अन्य अधिकारी हिस्सा बने. शिवलिंग की स्थापना से पहले महावीर मंदिर न्यास बोर्ड के सचिव शायन कुणाल और उनकी सांसद पत्नी शांभवी चौधरी ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ की.
महादेव के जयकारे से गूंज उठा मंदिर परिसर
विराट रामायण मंदिर परिसर सहस्त्र लिंगम की स्थापना के दौरान जयकारों से गूंज उठा. हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे थे, जो महादेव के नारे लगा रहे थे. इस दौरान सीएम नीतीश कुमार और दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने पूरे मंत्रोच्चार के साथ पूजा की. इस मौके पर विराट शिवलिंग का निर्माण करने वाले विनायक वेंकटरमन और उनकी मां हेमलता की भी मौजूदगी रही.
तमिलनाडु में तैयार हुआ है शिवलिंग
मालूम हो, तमिलनाडु के महाबलीपुरम में 33 फीट ऊंचा, 33 फीट लंबा और 210 मीट्रिक टन वाले शिवलिंग को तैयार किया गया. शिवलिंग का निर्माण इस तरह किया गया है कि यह भूकंपरोधी हो और आने वाले सैकड़ों सालों तक सुरक्षित रह सके.
मोतिहारी के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में शिवलिंग स्थापना के बाद पूजा-अर्चना करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, सायल कुणाल, सांसद शांभवी चौधरी सहित अन्य नेता शामिल हुएं.#Motihari #RamayanaTemple #Shivling #NitishKumar… pic.twitter.com/lzVU9Fbz8V
— Naya Vichar (@prabhatkhabar) January 17, 2026
एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बना शिवलिंग
शिवलिंग निर्माण करने वाली कंपनी के संस्थापक विनायक वेंकटरमण के अनुसार, इस शिवलिंग के निर्माण पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. यह विशाल शिवलिंग एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है. यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन के वजन का है. तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में बीते 10 साल से विशाल शिवलिंग का निर्माण किया जा रहा था. शिवलिंग के मुख्य शिल्पकार लोकनाथ हैं, उनकी टीम ने इसे तराशा है.
सड़क मार्ग से इसे 21 नवंबर को महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना किया गया था. शिवलिंग को रवाना करने के पहले पूजा-पाठ की गई थी, जिसमें स्थानीय गांव के लोग भी शामिल हुए थे.
आज ही क्यों किया गया स्थापित?
आज यानी 17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी की तिथि है. ऐसा माना जाता है कि इसी दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और भगवान शिव की लिंग के रूप में पूजा हुई थी. इस दिन का महत्व शिवरात्रि के समान माना जाता है, इसलिए स्थापना के लिए यह दिन चुना गया है.
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