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ईरान-अमेरिका में समझौते की उम्मीद से थमी तेल की तेजी, ब्रेंट 89 डॉलर के करीब

कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी पर बुधवार को थोड़ी राहत दिखी है. इसकी वजह ईरान और अमेरिका के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर संभावित समझौते की उम्मीद है. हालांकि, इस अहम समुद्री रास्ते से तेल की आवाजाही अभी भी बुरी तरह प्रभावित है. यही वजह है कि तेल की कीमतें अभी भी कई महीनों के ऊंचे स्तर के करीब बनी हुई हैं.

ब्रेंट क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में इसकी कीमत करीब 12% चढ़ चुकी है. वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 83 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है.

अमेरिका और ईरान के बीच क्या चल रहा है?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अमेरिका और ईरान किसी तरह के समझौते के करीब पहुंच रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात शांति की तरफ बढ़ रहे हैं. पाकिस्तान दोनों देशों के बीच बातचीत में मदद कर रहा है. इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत भी आगे बढ़ी है. अल जजीरा ने कतर के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता के हवाले से बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी है. तेल बाजार में फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इसी बात पर है कि हॉर्मुज से सामान्य आवाजाही कब शुरू होती है. समझौते की उम्मीद बढ़ते ही तेल की कीमतों पर दबाव आ सकता है, जबकि बातचीत रुकने की आशंका कीमतों को फिर ऊपर धकेल सकती है.

हॉर्मुज से तेल की सप्लाई क्यों अहम है?

अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य मदद के साथ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से करीब 90 लाख बैरल तेल रोजाना गुजर रहा है. लेकिन इलाके में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं. स्थिति कितनी तनावपूर्ण है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी नौसेना के एक हेलिकॉप्टर ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे पनामा-फ्लैग वाले एक कार्गो जहाज पर दो हेलफायर मिसाइलें दागी. इस सप्लाई संकट का असर कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर भी पड़ा है. इस साल अब तक क्रूड की कीमतें 40% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी सप्लाई की परेशानी ने डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ाया है.

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अमेरिका के तेल भंडार में कितना बदलाव आया?

अमेरिका के तेल भंडार का आंकड़ा भी बाजार के लिए अहम है. अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के मुताबिक, पिछले हफ्ते अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक 91 लाख बैरल बढ़ा है. अगर प्रशासनी आंकड़ों में भी इसकी पुष्टि होती है, तो यह फरवरी के बाद एक हफ्ते में सबसे बड़ी बढ़ोतरी होगी. ज्यादा स्टॉक का मतलब बाजार में सप्लाई बेहतर रहने की उम्मीद हो सकती है, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव बन सकता है.

आगे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन का अनुमान है कि ईरान से जुड़े संघर्ष की वजह से तेल की सप्लाई में रोजाना करीब 6 लाख बैरल की कमी 2027 के अंत तक बनी रह सकती है. बुधवार को इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और OPEC की मासिक रिपोर्ट भी आने वाली है. इनमें दुनिया में तेल की मांग और सप्लाई को लेकर नए अनुमान मिलेंगे. इसलिए आने वाले समय में तेल की कीमतों की दिशा तय करने में हॉर्मुज की स्थिति, अमेरिका के तेल भंडार और OPEC-IEA के अनुमान अहम रहेंगे.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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