अब्राहम अकॉर्ड्स अमेरिका की पहल पर डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुआ समझौता था. इसका मकसद इजराइल और अरब व मुस्लिम देशों के रिश्ते सामान्य करना था. अब ईरान से बातचीत के बीच ट्रंप फिर खाड़ी देशों पर दबाव बना रहे हैं कि वे भी इस समझौते में शामिल होकर इजराइल से रिश्ते बेहतर करें.
ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की, कतर और सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड्स पर औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर करने होंगे. कैबिनेट बैठक में ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, कतर और दूसरे देशों को जल्द से जल्द इस समझौते में शामिल होना चाहिए. उन्होंने बताया कि उनके खास दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस पर काम कर रहे हैं.
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ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि उन्हें हमारे लिए यह करना चाहिए. अगर वे ऐसा करते हैं, तो यह ऐतिहासिक होगा. मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ से पूछा कि क्या और देशों को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल कराया जा सकता है. इस पर विटकॉफ ने कहा कि कोशिशें जारी हैं. इसके बाद ट्रंप ने कहा कि अगर खाड़ी देश इस समझौते में शामिल नहीं होते, तो अमेरिका मध्य पूर्व में शांति की कोशिशों पर दोबारा विचार कर सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर खाड़ी देश अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर नहीं करते, तो शायद अमेरिका को ईरान के साथ समझौता नहीं करना चाहिए. ट्रंप ने इस समझौते में शामिल देशों, खासकर UAE की तारीफ की. उनका कहना था कि इससे सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे देशों को आर्थिक और नेतृत्वक फायदा होगा.
अब्राहम अकॉर्ड्स क्या है?
अब्राहम अकॉर्ड्स की शुरुआत साल 2020 में हुई थी. इसमें यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों धर्मों में सम्मान दिया जाता है. अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत इजराइल और अरब देशों के बीच व्यापार, तकनीक, पर्यटन, दवा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इस समझौते के तहत UAE और बहरीन इजराइल के साथ आधिकारिक रिश्ते बनाने वाले पहले खाड़ी देश बने. बाद में मोरक्को और सूडान भी इस समझौते में शामिल हो गए.
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