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बंगाल में Detect, Delete, Deport का डर, CAA के दस्तावेज दुरुस्त करने के लिए हाबरा से बारासात तक लंबी कतारें

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CAA verification Bengal: बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पश्चिम बंगाल में बसे इलाकों में इन दिनों सीएए (Citizenship Amendment Act) वेरिफिकेशन केंद्रों के बाहर सिर घुमा देने वाली लंबी कतारें देखी जा रही हैं. दशकों पहले सीमा पार कर हिंदुस्तान आये हजारों परिवार अब अपनी हिंदुस्तानीय नागरिकता की औपचारिक पहचान के लिए सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं. खासकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा घोषित Detect, Delete, Deport (पहचानो, हटाओ और निर्वासित करो) की नीति के बाद लोगों में अपना वजूद बचाने की बेचैनी बढ़ गयी है.

पुराने दस्तावेजों पर भरोसा नहीं, चाहिए ‘पक्की’ नागरिकता

हाबरा, बारासात और बशीरहाट जैसे इलाकों में सीएए केंद्रों पर उमड़ी भीड़ एक बड़ी कहानी बयां कर रही है. आवेदन करने पहुंचे कई बुजुर्गों और मतुआ समुदाय के लोगों का कहना है कि अब पुराने राशन कार्ड, वोटर आईडी और आधार कार्ड भी उन्हें सुरक्षा का अहसास नहीं करा रहे.

अवैध घोषित किये जाने का डर

जैसे-जैसे प्रशासनी स्तर पर दस्तावेजों की स्क्रूटनी बढ़ रही है, लोगों को डर है कि कहीं उन्हें ‘अवैध’ घोषित न कर दिया जाये. दशकों से यहां रह रहे परिवारों के लिए यह सिर्फ एक प्रशासनी फॉर्म नहीं, बल्कि उनकी पहचान, स्थिरता और अपनेपन की लड़ाई है. उत्तर 24 परगना के मतुआ बहुल इलाकों में सीएए को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह और डर का मिला-जुला असर देखा जा रहा है.

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शुभेंदु की 3D नीति ने बढ़ायी सियासी तपिश

बीजेपी नेता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कड़े रुख ने सीमावर्ती जिलों के नेतृत्वक माहौल को गरमा दिया है. सीएम लगातार सार्वजनिक मंचों से कह रहे हैं कि घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जायेगा. आवेदनों की अचानक बढ़ी संख्या और वेरिफिकेशन हियरिंग के कारण प्रशासनी अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं. केंद्रों पर भीड़ को संभालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

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CAA verification Bengal: पीढ़ियों का संघर्ष और एक अदद पहचान

कतारों में खड़े कई ऐसे लोग भी हैं, जो 1971 के पहले या उसके तुरंत बाद हिंदुस्तान आये थे. उनके पास पुराने कागजात तो हैं, लेकिन डिजिटल युग और बढ़ती कड़ाई के बीच वे किसी भी तरह के जोखिम से बचना चाहते हैं. एक आवेदक ने नम आंखों से कहा- हम यहां वर्षों से रह रहे हैं, हमारे शिशु यहीं पले-बढ़े हैं. अब बस इतना चाहते हैं कि हमें कोई यहां से जाने के लिए न कहे.

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हकीमपुर से लेकर बारासात तक एक ही मंजर

पिछले कुछ दिनों में हकीमपुर सीमा चौकी पर संदिग्धों की वापसी और अब सीएए केंद्रों पर उमड़ती भीड़, ये दोनों घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. एक तरफ प्रशासन घुसपैठियों के खिलाफ आक्रामक है, तो दूसरी तरफ शरणार्थी परिवार अपनी नागरिकता की पुष्टि के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं. आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया और तेज होगी, क्योंकि प्रशासन ने कह दिया है कि नागरिकता के दस्तावेजों में कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जायेगी.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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