Karnataka MLC Election: कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में पहली चुनावी परीक्षा में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया. गुरुवार (18 जून 2026) को हुए विधान परिषद चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि विपक्षी बीजेपी को दो सीटों से संतोष करना पड़ा. जबकि जेडी(एस) का एकमात्र उम्मीदवार हार गया. वहीं, चुनाव परिणाम को कांग्रेस के लिए बड़ी नेतृत्वक सफलता माना जा रहा है. चुनाव में खास बात यह रही कि कांग्रेस को उसके विधायकों की संख्या से कहीं अधिक वोट मिले, जिससे विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है.
कांग्रेस को मिले 151 वोट, बहुमत से 16 अधिक
आधिकारिक मतगणना के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के 135 विधायक हैं, लेकिन एमएलसी चुनाव में पार्टी को कुल 151 वोट मिले. यानी, कांग्रेस को अपने संख्याबल से 16 वोट अधिक मिले हैं. इस अतिरिक्त समर्थन के दम पर कांग्रेस के सभी पांच उम्मीदवार पहले ही चरण में निर्वाचित घोषित कर दिए गए. परिणामों ने संकेत दिया कि विपक्षी दलों के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया हो सकता है.
बीजेपी को आठ वोटों का नुकसान
विधानसभा में बीजेपी के 64 विधायक हैं, लेकिन उसके दोनों उम्मीदवारों को मिलाकर केवल 56 वोट मिले. यानी पार्टी को अपने निर्धारित वोटों से आठ वोट कम मिले हैं. बीजेपी उम्मीदवार लिंगराज पाटिल को 27 वोट मिले, जबकि उनके लिए 30 वोट अपेक्षित थे. वहीं दूसरे उम्मीदवार रघु के. को 29 वोट मिले, जो उनके निर्धारित कोटे से एक वोट कम था. इन आंकड़ों ने बीजेपी खेमे में क्रॉस-वोटिंग और असंतोष की अटकलों को और मजबूत कर दिया है.
जेडी(एस) उम्मीदवार को भी लगा झटका
जेडी(एस) के पास विधानसभा में 18 विधायक हैं. एनडीए गठबंधन के तहत भाजपा ने अपने तीन विधायकों को जेडी(एस) उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करने के लिए अधिकृत किया था. इस तरह जेडी(एस) उम्मीदवार के पक्ष में कुल 21 वोट होने चाहिए थे. हालांकि मतगणना में जेडी(एस) उम्मीदवार को केवल 14 वोट मिले. यानी उसे अपेक्षित संख्या से सात वोट कम मिले हैं और वह कांग्रेस के पांचवें उम्मीदवार से हार गया.
एनडीए के 12 वोट कहां गए? बना बड़ा सवाल
चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एनडीए के कुल 12 वोट आखिर गए कहां. बीजेपी को आठ और जेडी(एस) को चार वोटों का नुकसान हुआ. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ये वोट कांग्रेस के पक्ष में गए, अमान्य घोषित हुए या फिर किसी अन्य कारण से गणना में शामिल नहीं हो सके. चुनाव अधिकारियों की ओर से अभी तक अंतिम और पूरी वोटिंग पैटर्न जारी नहीं किया गया है.
बीजेपी ने क्रॉस-वोटिंग की जांच के दिए संकेत
परिणामों के बाद कर्नाटक बीजेपी ने कहा कि जल्द ही यह साफ हो जाएगा कि किन विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की है. पार्टी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि क्रॉस-वोटिंग की पुष्टि होती है तो संबंधित विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
डीके शिवकुमार बोले- अंतरात्मा की आवाज पर पड़ा वोट
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें क्रॉस-वोटिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा- कुछ विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान किया होगा. बीजेपी और जेडी(एस) के आरोप उनकी हताशा को दर्शाते हैं. सीएम शिवकुमार ने आगे यह भी कहा कि पूर्व भाजपा विधायक शिवराम हेब्बर और एसटी सोमशेखर को भाजपा से निष्कासित किया जा चुका था और वे कांग्रेस के साथ जुड़ना चाहते थे. ऐसे में उन्होंने अपनी इच्छा और अंतरात्मा के अनुसार मतदान किया.
सुरजेवाला ने बताया सकारात्मक नेतृत्व की जीत
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चुनाव परिणामों को सकारात्मक नेतृत्व की जीत करार दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को 135 वोट मिलने थे, लेकिन पार्टी को 151 वोट प्राप्त हुए. वहीं भाजपा और जेडी(एस) दोनों को अपने अपेक्षित समर्थन से कम वोट मिले. सुरजेवाला ने दावा किया कि विपक्षी दल कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाओं का विरोध कर रहे थे, लेकिन उनके अपने विधायकों ने भी इन योजनाओं पर भरोसा जताया है.
अंतिम आंकड़ों का इंतजार
चुनाव परिणाम स्पष्ट हो चुके हैं, लेकिन क्रॉस-वोटिंग और अमान्य मतों की वास्तविक संख्या को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है. चुनाव अधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि एनडीए के कथित 12 वोट आखिर किस दिशा में गए.
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