Hot News

कैसे दिया जाए महिलाओं को आरक्षण, 16 से 18 तक संसद में चर्चा; समझिए क्यों उबल रहे दक्षिण के राज्य?

Women Reservation : संसद और राज्य विधानसभाओं में स्त्रीओं को 33% आरक्षण देने के लिए प्रशासन ने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया था. इस अधिनियम को जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की योजना थी, लेकिन अब प्रशासन जनगणना से पहले ही इसे लागू करवाने के लिए संशोधन प्रस्ताव लेकर आ गई है. मोदी प्रशासन ने 16-18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें इस अधिनियम पर प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की जाएगी और उसे कानूनी रूप दिया जाएगा. स्त्री आरक्षण पर संशोधन प्रस्ताव आने के बाद से प्रशासन और विपक्ष आमने-सामने हैं, विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन सिर्फ अपने फायदे के लिए इस अधिनियम में संशोधन करवाना चाह रही है, जबकि अभी ना तो जनगणना हुई है और ना ही परिसीमन का काम ही पूरा हुआ है. आइए समझते हैं कि आखिर स्त्री आरक्षण, जनगणना और परिसीमन का क्या है कनेक्शन.

स्त्री आरक्षण, जनगणना और परिसीमन का कनेक्शन

2023 में जब यह अधिनियम बना था, उस वक्त यह बात कही गई थी कि संसद और राज्य विधानसभाओं में स्त्रीओं को 33% आरक्षण जनगणना और उसके आधार पर होने वाले परिसीमन के आधार पर दिया जाएगा. प्रशासन हर 10 साल में जनगणना करवाती है और उसके आधार पर परिसीमन यानी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटें निर्धारित की जाती हैं. 2021 में कोविड महामारी की वजह से जनगणना नहीं हो पाई और अबतक वह टल ही रही है. अब प्रशासन यह कह रही है कि 2027 तक जनगणना पूरी हो जाएगी, लेकिन अभी तक इसकी प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई है. 2029 के चुनाव से पहले प्रशासन जनगणना कराना चाहती है, ताकि परिसीमन का काम पूरा हो जाए और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में जो सीटें बढ़ें, उनके आधार पर स्त्रीओं के लिए सीटें आरक्षित की जाएं. 2023 में जब कानून बना, तो इसे लागू नहीं करवाया जा सका, क्योंकि जनगणना और परिसीमन का काम पूरा नहीं हो पाया था. अब प्रशासन यह चाह रही है कि 2029 के चुनाव में स्त्रीओं को आरक्षण का लाभ मिल जाए, लेकिन पेच यह फंस रहा है कि ना तो अबतक जनगणना हुई है और ना ही सीटों का बढ़ी हुई जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ है.

संशोधन प्रस्ताव में क्या है व्यवस्था?

प्रशासन यह चाहती है कि 2029 के चुनाव में स्त्री आरक्षण लागू हो जाए. इसी वजह से प्रशासन कुछ संशोधन प्रस्ताव लाना चाहती है. इन संशोधन प्रस्तावों पर 16 से 18 अप्रैल तक चर्चा होगी और उसके बाद ही आरक्षण की नीति पूरी तरह तय की जाएगी. परिसीमन का आधार नई जनगणना होगी और उसी के आधार पर किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी यह तय होगा. एक स्वतंत्र परिसीमन आयोग का गठन होगा और उसकी सिफारिशों के आधार पर कुल सीटों में से 33 प्रतिशत स्त्रीओं के लिए आरक्षित की जाएंगी. स्त्रीओं के लिए जो सीटें आरक्षित होंगी, उसे रोटेट किया जाएगा, मतलब कोई एक सीट हमेशा स्त्रीओं के लिए आरक्षित नहीं होगी, वह बदलती रहेगी.

विपक्षी पार्टियां क्यों कर रही हैं संशोधन प्रस्ताव का विरोध?

विपक्षी पार्टियां स्त्री आरक्षण से ज्यादा उसे लागू करने के तरीकों पर एतराज कर रही हैं. उनका कहना है कि अगर जनसंख्या को परिसीमन का आधार बनाया जाएगा, तो दक्षिण हिंदुस्तान में सीटें घट जाएंगी, क्योंकि जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए दक्षिण के राज्यों ने काफी प्रयास किया है. वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जनसंख्या अधिक है, इसलिए यहां की सीटें बढ़ जाएंगी. एम के स्टालिन का कहना है कि हमने देश के विकास में ज्यादा भागीदारी दी, लेकिन हमें उसका प्रतिफल सीटें घटाकर क्यों दिया जाए. कई विपक्षी पार्टियां स्त्री आरक्षण में ओबीसी स्त्रीओं के लिए अलग आरक्षण की व्यवस्था करने की मांग कर रही हैं. यह कुछ बातें हैं, जिसकी वजह से विपक्ष स्त्री आरक्षण का विरोध कर रहा है.

क्या है प्रशासन का तर्क?

प्रशासन यह कह रही है कि वो देश में आधी आबादी को उनका हक देना चाहती है. इसके लिए वह पूरा प्रयास कर रही है कि किसी भी क्षेत्र या प्रदेश के लोगों के साथ अन्याय ना हो. स्त्री आरक्षण को किस तरह लागू किया जाए, इसपर चर्चा करने के लिए संसद का विशेष बुलाया गया है. प्रशासन किसी भी पार्टी या क्षेत्र को लाभ पहुंचाना नहीं चाहती है, वह बस स्त्री शक्ति को उनका हक देना चाहती है. प्रशासन का यह भी कहना है कि दक्षिण के राज्य जो चिंता जता रहे हैं वो वाजिब हैं, लेकिन प्रशासन किसी भी राज्य की सीटें नहीं घटाने वाली हैं, हां यह जरूर है कि सीटें बढ़ाई जाएंगी और यह कैसे होगा, इसी पर चर्चा के लिए तीन दिन का समय आवंटित किया गया है.

ये भी पढ़ें : बीजेपी की हाइब्रिड पॉलिटिक्स, नीतीश फैक्टर और जातीय समीकरण को साधा; जदयू कोटे से दो डिप्टी सीएम बनाए गए

बिहार के सीएम पद पर पहली बार बीजेपी का राज, बदलेगी बिहार की नेतृत्व?

The post कैसे दिया जाए स्त्रीओं को आरक्षण, 16 से 18 तक संसद में चर्चा; समझिए क्यों उबल रहे दक्षिण के राज्य? appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top