कभी सुना था कि TCS में नौकरी लग गई तो जिंदगी सेट. लेकिन जुलाई 2025 में तस्वीर कुछ बदली. कंपनी ने करीब 2% वर्कफोर्स, यानी 12,261 पदों में कटौती का ऐलान किया. खास बात ये रही कि इसका असर सबसे ज्यादा मिड और सीनियर लेवल के कर्मचारियों पर पड़ा. उन लोगों पर, जिन्हें लगता था कि सालों का अनुभव नौकरी की सबसे बड़ी गारंटी है. हालांकि, ये वर्कफोर्स में बदलाव जॉब मार्केट में नई डिमांड की और इशारा करता है. साथ ही युवाओं को नई स्किल्स डेवलप करने के लिए आगाह करता है.
AI और Tech एक्सपर्ट वेणुगोपाल उम्मादिसेट्टी ने एक पोस्ट में इसे TCS का 2012 के बाद ऐसा दूसरा बड़ा कदम बताया. यानी करीब 13 साल बाद कंपनी के वर्कफोर्स में इतनी बड़ी कटौती देखने को मिली. कंपनी के आंकड़े भी तस्वीर बदलने की तरफ इशारा करते हैं. मार्च 2025 में TCS के 6,07,979 कर्मचारी थे, जो मार्च 2026 तक घटकर 5,84,519 रह गए. एक साल में कर्मचारियों की संख्या 23 हजार से ज्यादा कम हुई.
TCS के CEO और MD के कृतिवासन ने 21 जुलाई 2025 को दिए इंटरव्यू में पहली बार बताया था कि कंपनी कितनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की संख्या घटाने जा रही है और इसके पीछे क्या वजह है.
अब सवाल सिर्फ TCS का नहीं है. Oracle जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों में भी अचानक हजारों Layoff हो जा रहे हैं. ऐसे में नौकरियों पर ऐसा दबाव क्यों बढ़ रहा है? AI आने के बाद किन तरह के प्रोफेशनल्स सबसे ज्यादा जोखिम में हैं? क्या ज्यादा अनुभव अब नौकरी की गारंटी नहीं रहा?
खतरे में नौकरी की इस सीरीज में ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशेंगे-
नोट: इस सेग्मेंट का उद्देश्य किसी कंपनी को साख को क्षति पहुंचाना नहीं है. खतरे में नौकरी में एक उदाहरण के साथ उन स्किल्स के बारे में बताएंगे जिनकी डिमांड AI के इस दौर में रहने वाली है.
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