23 अक्टूबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले में कई जगह चीनी सेना ने हिंदुस्तानीय सीमा के अंदर घुसने की कोशिश की. इसके बाद दोनों देशों की सेना का आमना-सामना हुआ. अरुणाचल प्रदेश में चीन और हिंदुस्तानीय सेना के बीच पहली बार टकराव नहीं हुआ है. इससे पहले 9 सितंबर 2022 को भी तवांग में दोनों देशों की सेना के टकराव की समाचार सामने आई थी. दरअसल, चीन अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार वर्ग किमी जमीन पर दावा पेश करता है. इतना ही नहीं चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 62 जगहों के नाम भी बदल दिए थे.
दूसरे देशों की जमीन पर दावा करना चीन की फितरत में रहा है. हमारे रिसर्च में पता चला कि चीन ने सिर्फ हिंदुस्तान नहीं, बल्कि मकाउ, मंगोलिया समेत 5 देशों के करीब 40 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन को हथियाई है. इस स्टोरी में जानते हैं कि चीन ने किन देशों की कितनी जमीन हथियाई है और अरुणाचल प्रदेश में चीन का इतना ज्यादा इंट्रेस्ट होने की क्या वजह है?
सबसे पहले तीन हिस्सों में बंटे हिंदुस्तान-चीन सीमा के बारे में जानें
अरुणाचल प्रदेश पर चीन की नजर होने की तीन वजह: डिफेंस एक्सपर्ट सोढ़ी
अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा मानता है चीन
डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) जे. एस. सोढ़ी के मुताबिक, 1962 में चीन ने हिंदुस्तान पर दो तरफ से हमला किया था. पहला हमला लद्दाख के लेह और जम्मू-कश्मीर की ओर से हुआ, जबकि दूसरा अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन नेफा (NEFA) क्षेत्र में किया गया. अरुणाचल की ओर चीनी सेना करीब 60 किलोमीटर अंदर तक पहुंच गई थी. हालांकि, 21 नवंबर 1962 को चीन ने इस इलाके से अपनी सेना वापस बुला ली, लेकिन अक्साई चीन पर उसका नियंत्रण बना रहा.
सोढ़ी ने कहा कि 2007 में चीन दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी वित्तीय स्थिति बना. इसके बाद क्षेत्रीय मामलों में उसका रुख ज्यादा सख्त नजर आने लगा. साल 2010 में दूसरी बड़ी वित्तीय स्थिति बनने के बाद उसका रुख ज्यादा आक्रमक नजर आने लगा. इसके बाद चीन का इंटरेस्ट अरुणाचल में बढ़ता चला गया. चीन जानता है कि अरुणाचल हिंदुस्तान का अभिन्न अंग है, फिर भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा. अरुणाचल को चीन अपना अभिन्न हिस्सा मानता है.
चीन को तिब्बत में विद्रोह का डर
जे. एस. सोढ़ी ने बताया कि 2009 में दलाई लामा दो बार अरुणाचल प्रदेश गए. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगले दलाई लामा का चयन चीन के बाहर होगा. चीन को आशंका थी कि इससे तिब्बत में अस्थिरता बढ़ सकती है. इसके बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों के नाम बदलने शुरू किए. बाद के वर्षों में उसने हिंदुस्तानीय राज्य के 62 स्थानों के लिए चीनी नाम जारी किए.
अरुणाचल जियो स्ट्रैटेजिक प्वाइंट से खास
जेएस सोढ़ी के मुताबिक, चीन की करीब 97 प्रतिशत आबादी उसके पूर्वी हिस्से में रहती है. चीन के पूर्वी और पश्चिमी छोर के बीच की दूरी करीब 9,000 किलोमीटर है. उन्हें आशंका है कि हिंदुस्तान से युद्ध होने पर अरुणाचल प्रदेश से दागी गई मिसाइल चीन के घनी आबादी वाले पूर्वी हिस्से तक पहुंच सकती है. वहीं, लद्दाख से दागी गई मिसाइल के लिए इतनी दूर तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है.
क्या हिंदुस्तान पर हमला करेगा चीन?
जेएस सोढ़ी के मुताबिक, चीन का पहला निशाना ताइवान हो सकता है. उनका अनुमान है कि 2027 के अंत तक ताइवान को लेकर बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है. वहीं, उन्होंने आशंका जताई कि 2030 के बाद चीन और पाकिस्तान मिलकर हिंदुस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं. दोनों देश टूफ्रंट वार कर सकते हैं.
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