Hot News

October 27, 2026

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Bihar MLC Election Result Live Update: 8 सीटों पर आज फैसला, पहले आएगा टीचर सीटों का रिजल्ट, काउंटिंग शुरू

Bihar MLC Election Result Live Update: पटना स्नातक एवं शिक्षक चुनाव में 36 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला आज होगा. बांकीपुर गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल में सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू, शाम तक आएंगे नतीजे. जानें पूरी अपडेट. The post Bihar MLC Election Result Live Update: 8 सीटों पर आज फैसला, पहले आएगा टीचर सीटों का रिजल्ट, काउंटिंग शुरू appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

चीन ने मकाउ, मंगोलिया समेत 5 देशों की जमीन कब्जाया, अब अरुणाचल की 90 हजार वर्ग किमी जमीन पर क्यों है नजर?

23 अक्टूबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले में कई जगह चीनी सेना ने हिंदुस्तानीय सीमा के अंदर घुसने की कोशिश की. इसके बाद दोनों देशों की सेना का आमना-सामना हुआ. अरुणाचल प्रदेश में चीन और हिंदुस्तानीय सेना के बीच पहली बार टकराव नहीं हुआ है. इससे पहले 9 सितंबर 2022 को भी तवांग में दोनों देशों की सेना के टकराव की समाचार सामने आई थी. दरअसल, चीन अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार वर्ग किमी जमीन पर दावा पेश करता है. इतना ही नहीं चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 62 जगहों के नाम भी बदल दिए थे. दूसरे देशों की जमीन पर दावा करना चीन की फितरत में रहा है. हमारे रिसर्च में पता चला कि चीन ने सिर्फ हिंदुस्तान नहीं, बल्कि मकाउ, मंगोलिया समेत 5 देशों के करीब 40 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन को हथियाई है. इस स्टोरी में जानते हैं कि चीन ने किन देशों की कितनी जमीन हथियाई है और अरुणाचल प्रदेश में चीन का इतना ज्यादा इंट्रेस्ट होने की क्या वजह है? सबसे पहले तीन हिस्सों में बंटे हिंदुस्तान-चीन सीमा के बारे में जानें लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) जे. एस. सोढ़ी की किताब अरुणाचल प्रदेश पर चीन की नजर होने की तीन वजह: डिफेंस एक्सपर्ट सोढ़ी अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा मानता है चीन डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) जे. एस. सोढ़ी के मुताबिक, 1962 में चीन ने हिंदुस्तान पर दो तरफ से हमला किया था. पहला हमला लद्दाख के लेह और जम्मू-कश्मीर की ओर से हुआ, जबकि दूसरा अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन नेफा (NEFA) क्षेत्र में किया गया. अरुणाचल की ओर चीनी सेना करीब 60 किलोमीटर अंदर तक पहुंच गई थी. हालांकि, 21 नवंबर 1962 को चीन ने इस इलाके से अपनी सेना वापस बुला ली, लेकिन अक्साई चीन पर उसका नियंत्रण बना रहा. सोढ़ी ने कहा कि 2007 में चीन दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी वित्तीय स्थिति बना. इसके बाद क्षेत्रीय मामलों में उसका रुख ज्यादा सख्त नजर आने लगा. साल 2010 में दूसरी बड़ी वित्तीय स्थिति बनने के बाद उसका रुख ज्यादा आक्रमक नजर आने लगा. इसके बाद चीन का इंटरेस्ट अरुणाचल में बढ़ता चला गया. चीन जानता है कि अरुणाचल हिंदुस्तान का अभिन्न अंग है, फिर भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा. अरुणाचल को चीन अपना अभिन्न हिस्सा मानता है. चीन को तिब्बत में विद्रोह का डर जे. एस. सोढ़ी ने बताया कि 2009 में दलाई लामा दो बार अरुणाचल प्रदेश गए. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगले दलाई लामा का चयन चीन के बाहर होगा. चीन को आशंका थी कि इससे तिब्बत में अस्थिरता बढ़ सकती है. इसके बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों के नाम बदलने शुरू किए. बाद के वर्षों में उसने हिंदुस्तानीय राज्य के 62 स्थानों के लिए चीनी नाम जारी किए. अरुणाचल जियो स्ट्रैटेजिक प्वाइंट से खास जेएस सोढ़ी के मुताबिक, चीन की करीब 97 प्रतिशत आबादी उसके पूर्वी हिस्से में रहती है. चीन के पूर्वी और पश्चिमी छोर के बीच की दूरी करीब 9,000 किलोमीटर है. उन्हें आशंका है कि हिंदुस्तान से युद्ध होने पर अरुणाचल प्रदेश से दागी गई मिसाइल चीन के घनी आबादी वाले पूर्वी हिस्से तक पहुंच सकती है. वहीं, लद्दाख से दागी गई मिसाइल के लिए इतनी दूर तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है. क्या हिंदुस्तान पर हमला करेगा चीन? जेएस सोढ़ी के मुताबिक, चीन का पहला निशाना ताइवान हो सकता है. उनका अनुमान है कि 2027 के अंत तक ताइवान को लेकर बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है. वहीं, उन्होंने आशंका जताई कि 2030 के बाद चीन और पाकिस्तान मिलकर हिंदुस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं. दोनों देश टूफ्रंट वार कर सकते हैं. The post चीन ने मकाउ, मंगोलिया समेत 5 देशों की जमीन कब्जाया, अब अरुणाचल की 90 हजार वर्ग किमी जमीन पर क्यों है नजर? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Murma Jatra 2026: आखिर क्यों खास है 40 पड़हा का जुटना? जानिए झारखंड के ऐतिहासिक मुड़मा जतरा की अनकही कहानियां

रांची : झारखंड में लगने वाले मेलों की बात हो और रांची के मांडर इलाके में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ‘मुड़मा जतरा’ का जिक्र न आए, ऐसा हो नहीं सकता है. मांडर में लगने वाला यह मेला केवल खरीदारी, खानपान या मनोरंजन का ठिकाना भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे आदिवासी समाज की सदियों पुरानी परंपराएं, समृद्ध लोककथाएं और गहरी सामुदायिक एकता की अनूठी कहानी जुड़ी हुई है. हर साल यहां जुटने वाली भारी भीड़, मांदर की गूंजती थाप, पारंपरिक वेशभूषा और दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोगों की मौजूदगी इस आयोजन को बेहद खास बनाती है. मुड़मा जतरा को लेकर स्थानीय समाज में कई पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताएं प्रचलित हैं. स्थानीय लोकपरंपराओं में इस मेले को 400 साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है. इसकी शुरुआत की कहानी मुख्य रूप से उरांव और मुंडा समुदायों के आपसी संबंधों से जोड़कर सुनाई जाती है. जमीन और बसावट को लेकर पैदा हो गए थे मतभेद प्रचलित लोककथा के मुताबिक, एक समय छोटानागपुर क्षेत्र में इन दोनों समुदायों के बीच जमीन और बसावट को लेकर कुछ मतभेद पैदा हो गए थे. उस विवाद को सुलझाने के लिए जो तरीका अपनाया गया, वह अपने आप में अनोखा था. कहानी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लगातार सात दिनों और सात रातों तक एक भव्य नाच-गान की प्रतियोगिता हुई, जिसमें मांदर बजाने और पारंपरिक नृत्य को मुख्य आधार बनाया गया. इस मुकाबले में उरांव समुदाय को जीत मिली, जिसके बाद दुश्मनी को आगे बढ़ाने के बजाय दोनों पक्षों ने मेल-मिलाप, सद्भाव और भाईचारे को प्राथमिकता दी. इसी ऐतिहासिक घटना को मुड़मा जतरा की परंपरा का आधार माना जाता है. हालांकि, इसे प्रमाणित करने के लिए ठोस ऐतिहासिक दस्तावेजों की जरूरत है, फिर भी यह कथा आदिवासी समाज में आपसी सहमति और एकता के महत्व को बखूबी दर्शाती है. 40 पड़हा की परंपरा और जतरा खूंटा का विशेष महत्व इस आयोजन की पहचान में ’40 पड़हा’ की व्यवस्था का एक विशेष स्थान है. छोटानागपुर के उरांव समाज में पड़हा पारंपरिक सामाजिक संगठन का एक मजबूत स्तंभ रहा है, जिसके माध्यम से कई गांवों के आपसी संबंध और सामुदायिक मामले व्यवस्थित किए जाते हैं. जतरा के अवसर पर विभिन्न गांवों और पड़हा से जुड़े लोगों का पारंपरिक झंडों और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ जुटना इस बात की याद दिलाता है कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लोगों को आपस में जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है. इसके अलावा, मुड़मा जतरा में ‘जतरा खूंटा’ का होना इसकी सबसे बड़ी विशेषता है. स्थानीय परंपरा में इसे आस्था, पूर्वजों की स्मृति और सामुदायिक पहचान का केंद्र माना जाता है. मेले के दौरान इससे जुड़े पारंपरिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किए जाते हैं, जिसमें सामाजिक और धार्मिक अगुवाओं की भूमिका अहम होती है. प्रकृति और पूर्वजों से जुड़े ये प्रतीक आज भी इस मेले की मूल पहचान को सहेजे हुए हैं. ये भी पढ़ें: 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा विवाद में हाईकोर्ट से प्रार्थियों को राहत नहीं, हस्तक्षेप याचिका खारिज मांदर की थाप और बदलते स्वरूप के साथ सामाजिक जुड़ाव मुड़मा जतरा की चर्चा हो और ‘मांदर की थाप’ का जिक्र न हो, ऐसा होना असंभव है. झारखंड की लोकसंस्कृति में मांदर का इस्तेमाल हर खुशी, त्योहार और सामूहिक नृत्य में होता आया है. मेले के दौरान गूंजते पारंपरिक वाद्य यंत्रों की आवाज और सामूहिक नृत्य का माहौल लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ता है. समय के साथ मुड़मा जतरा के स्वरूप में भी बदलाव आया है. अब पारंपरिक पूजा-पाठ और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ यहां बड़ी संख्या में दुकानें, खानपान के स्टॉल और घरेलू सामानों की बाजार सजती है, जिससे स्थानीय कारोबारियों और छोटे दुकानदारों को अच्छी कमाई का अवसर मिलता है. नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का बेहतरीन जरिया ग्रामीण आंचल में लगने वाले ऐसे मेलों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे बिसरती जा रही परंपराओं को जीवित रखते हैं. दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोग अपने परिचितों और रिश्तेदारों से मिलते हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना मजबूत होता है. मुड़मा जतरा की वास्तविक अहमियत इस बात में है कि आधुनिकता के इस दौर में भी लोग अपनी पुरानी जड़ों से मजबूती से जुड़े हुए हैं. यह आयोजन नई पीढ़ी को उनके समाज के इतिहास, लोककथाओं और रीति-रिवाजों से रूबरू कराने का एक खुला मंच देता है. यह इस बात का प्रमाण है कि किसी समाज की पहचान केवल किताबों में दर्ज लिखित इतिहास से नहीं, बल्कि उसकी लोककथाओं, संगीत और पीढ़ियों से चली आ रही जीवंत परंपराओं से तय होती है. ये भी पढ़ें: SIR में सुनवाई और निष्पादन की रफ्तार पर सवाल, नो मैपिंग के 72% से अधिक मामले लंबित The post Murma Jatra 2026: आखिर क्यों खास है 40 पड़हा का जुटना? जानिए झारखंड के ऐतिहासिक मुड़मा जतरा की अनकही कहानियां appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

JPSC परीक्षा घोटाले में 12 आरोपियों पर चार्जशीट, टूटे लैपटॉप से लेकर व्हाट्सएप चैट तक 82 सबूत

JPSC Scam : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी की जांच कर रही सीआइडी ने न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में 12 आरोपियों के खिलाफ 97 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. इसके साथ विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी के दौरान जब्त किये गये 82 भौतिक, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की सूची भी सौंपी गयी है. सीआइडी के अनुसार, घोटाला सुनियोजित था. इसमें आयोग के तत्कालीन अधिकारियों, निजी आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल और बिचौलियों के बीच सांठगांठ थी. खियांग्ते के टूटे लैपटॉप और फॉर्मेट मोबाइल से मिले साक्ष्य सीआइडी ने आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिलने का दावा किया है. उनके आवास से 11वीं से 13वीं परीक्षा के 15 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू की तारीख, पदों की प्राथमिकता और गोपनीय इंटरव्यू कोड से संबंधित दस्तावेज मिले. जांच एजेंसी ने साक्ष्य मिटाने के प्रयास के संकेत मिलने की बात भी कही है. खियांग्ते के आवास से डेल कंपनी का टूटा लैपटॉप जब्त किया गया, जबकि रेडिसन ब्लू होटल के पास स्थित आइ-डेस्टिनी स्टोर से उनका फॉर्मेट किया हुआ मोबाइल बरामद हुआ. वित्तीय जांच के तहत मिजोरम और मणिपुर की लुंग्ली शाखा से खियांग्ते और उनकी पत्नी लालमिनी के एचडीएफसी व एसबीआइ खातों के लेन-देन का ब्योरा केस डायरी में शामिल किया गया है. सीआइडी के अनुसार, तत्कालीन जेपीएससी सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रजकुमार राम ने बिंसिस को काम दिलाने के लिए खियांग्ते के मिजोरम स्थित आवास पर ढाई लाख रुपये नकद पहुंचाये थे. खियांग्ते के लैपटॉप बैग से मिले 15 अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी जियो और एयरटेल से हासिल कर चार्जशीट में शामिल किया गया है. श्वेता गुप्ता के कक्ष से वर्क ऑर्डर और फाइलें बरामद आयोग की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के कक्ष से टीडीपीएल को जारी वर्क ऑर्डर का एग्रीमेंट और विज्ञापन संख्या 04/23 से संबंधित फाइलें बरामद की गयीं. जांच में सामने आया कि टीडीपीएल के निदेशक रामवीर और सत्यपाल रांची के रेडिसन ब्लू होटल में ठहरे थे. एजेंसी के कर्मचारी मोहम्मद उस्मान और श्वेता गुप्ता के परिजनों के यात्रा टिकट मेकमायट्रिप के माध्यम से बुक कराये गये थे. सीआइडी ने श्वेता गुप्ता के एसबीआइ की लालपुर शाखा स्थित खाते का विवरण भी हासिल किया है. रिकॉर्ड के अनुसार, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने टीडीपीएल को पहले ही दागी बताते हुए लिखित रिपोर्ट दी थी. इसके बावजूद एजेंसी को काम सौंप दिया गया. अभय तिवारी के ठिकानों से नकदी, लैपटॉप और बैंक रिकॉर्ड घोटाले में वित्तीय और तकनीकी समन्वय की भूमिका निभाने के आरोपी अभय कुमार तिवारी के पास से 5.50 लाख रुपये नकद, मोटोरोला मोबाइल और लैपटॉप जब्त किये गये. अभय द्वारा संचालित प्रकाश रेसिडेंसी और सागर पैलेस के आइडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों के अलावा एसबीआइ, कोटक महिंद्रा, ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक और एक्सिस बैंक की गिरिडीह शाखा से जुड़े खातों की भी जांच की गयी. अभय ने सह-अभियुक्त धर्मेंद्र कुमार के लिए बुलेट बाइक खरीदने को रांची के रॉयल एनफील्ड शोरूम में राशि का भुगतान किया था. इसकी रसीद सीआइडी ने जब्त की है. वहीं, अप्राथमिकी अभियुक्त लालू यादव के ठिकाने से अभय तिवारी के ईएसएएफ बैंक का चेक मिला. अवैध कार्यालय से परीक्षाओं के नतीजे और सर्वर डेटा मिले जांच के अनुसार, तकनीकी फर्जीवाड़े के लिए टीडीपीएल ने चड़रीटोला में सारिका सिंह के मकान में अवैध कार्यालय और सर्वर स्थापित किया था. इसका रेंट एग्रीमेंट अभय तिवारी के नाम पर था. सीआइडी ने वहां से हार्ड डिस्क और अमेजन एडब्ल्यूएस क्लाउड सर्वर का डेटा जब्त किया. हार्ड डिस्क से 11वीं से 13वीं जेपीएससी के अलावा एफआरओ, एसीएफ और सीडीपीओ परीक्षाओं के नतीजे भी मिले. जेपीएससी से जब्त रक्षक सिंह और नीतू पांडेय की उत्तर पुस्तिकाओं का मिलान आरोपियों के मोबाइल फोन से बरामद मॉडल आंसर से कराया गया. अरविंद कुमार और सुमन सौरभ के पास से मिली डायरी, व्हाट्सएप चैट और मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए एफएसएल भेजा गया है. सीआइडी ने 14वीं जेपीएससी के अभ्यर्थियों की अटेंडेंस शीट, सीसीटीवी फुटेज और ओएमआर शीट की छायाप्रतियां भी अदालत में पेश की हैं. रिजल्ट जारी होने से पहले व्हाट्सएप पर भेजने के साक्ष्य सीआइडी ने चार्जशीट में इस बात का भी उल्लेख किया है कि तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने रिजल्ट जारी होने से पहले व्हाट्सएप पर उस्मान को परिणाम भेजे थे. जांच एजेंसी के अनुसार, श्वेता लगातार उस्मान और अन्य लोगों को परीक्षा से संबंधित जानकारी दे रही थीं. राज्य के बाहर के कई अभ्यर्थियों और जेपीएससी में कार्यरत लोगों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट का विवरण भी अदालत को सौंपा गया है. The post JPSC परीक्षा घोटाले में 12 आरोपियों पर चार्जशीट, टूटे लैपटॉप से लेकर व्हाट्सएप चैट तक 82 सबूत appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

नीरज कुमार के विरोध से बढ़ीं अनंत सिंह की मुश्किलें, क्या फिर जाना पड़ेगा बाहुबली विधायक को जेल?

Dularchand Yadav Murder Case जेडीयू के एमएलसी प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध मोकामा के विधायक अनंत सिंह के लिए मुश्किलें बढ़ाता दिख रहा है. जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से निष्कासित किए जाने के बाद अब उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की पहल की गयी है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है. इसमें संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा की गयी है. इस बीच, 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर अहम सुनवाई होनी है. ऐसे में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं. गौरतलब है कि पिछले साल 30 अक्टूबर, 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गयी थी. जेल में रहते अनंत सिंह ने जीता था विधानसभा चुनाव दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आये थे. अनंत सिंह की जमानत को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने याचिका दायर कर अनंत सिंह की जमानत रद्द करने और उन्हें दोबारा जेल भेजने की मांग की है. नीरज कुमार को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से उनके दादा को न्याय मिलेगा. Also Read अनंत सिंह पर JDU का एक्शन, क्या NDA के वोट बैंक और जातीय समीकरण पर पड़ेगा असर? बिहार प्रशासन के जवाबी हलफनामा से बढ़ी परेशानी दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने इस मामले में बिहार प्रशासन को पक्षकार संख्या एक और अनंत सिंह को पक्षकार संख्या दो बनाया है. सूत्रों के मुताबिक, राज्य प्रशासन ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया था. हलफनामे में कहा गया है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड की पुलिस जांच में अनंत सिंह और कुछ अन्य आरोपितों के खिलाफ लगाये गये आरोप सही पाये गये हैं. इसमें जांच के दौरान एसडीपीओ और एसपी स्तर पर की गयी निगरानी का भी उल्लेख किया गया है. साथ ही, जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किये जाने की जानकारी दी गयी है. अब 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले में महत्वपूर्ण होगा. हालांकि, जमानत रद्द करने को लेकर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और उसके आदेश पर निर्भर करेगा. Also Read अनंत सिंह को JDU ने क्यों दिखाया बाहर का रास्ता? चुनावी बगावत से नीतीश पर बयान तक, समझिए पूरी कहानी The post नीरज कुमार के विरोध से बढ़ीं अनंत सिंह की मुश्किलें, क्या फिर जाना पड़ेगा बाहुबली विधायक को जेल? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

लता मंगेशकर के दौर में बनाई पहचान, फिर बॉलीवुड से बनाई दूरी… जानिए अनुराधा पौडवाल की कहानी

Anuradha Paudwal Birthday Special: बॉलीवुड में एक समय ऐसा था, जब अनुराधा पौडवाल की आवाज हर तरफ सुनाई देती थी. ‘धक धक करने लगा’, ‘बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम’ और ‘नजर के सामने जिगर के पास’ जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया था. करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था, लेकिन फिर उन्होंने फिल्मी गानों से दूरी बनानी शुरू कर दी और भक्ति संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई. हैरानी की बात यह है कि जिस भक्ति संगीत ने उन्हें घर-घर में मशहूर किया, उसे अपनाने की बात सुनकर वह कभी रो पड़ी थीं. 27 अक्टूबर को अनुराधा पौडवाल के जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी के ऐसे किस्से, जो उनकी कामयाबी के साथ-साथ उनके फैसलों के पीछे की कहानी भी बताते हैं. लता मंगेशकर को सुनकर करती थीं घंटों रियाज अनुराधा पौडवाल ने गायकी में अपनी पहचान बनाने के लिए लता मंगेशकर को अपना आदर्श माना. स्टार्सअनफोल्डेड पर प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, उन्होंने शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग लेने की कोशिश की थी, लेकिन वह इसमें सहज नहीं हो पाईं. इसके बाद उन्होंने लता मंगेशकर को सुन-सुनकर घंटों रियाज किया. अनुराधा पौडवाल यह किस्सा उनके करियर के शुरुआती दौर की झलक देता है. उस समय हिंदुस्तानीय कलाकारों के विदेशी लाइव कार्यक्रम संगीत की दुनिया में खास महत्व रखते थे. अनुराधा के सफर का यह पहलू उनके फिल्मी गानों और भक्ति संगीत से अलग एक और अनुभव सामने लाता है. कन्नड़ में और गाने गाना चाहती थीं अनुराधा अनुराधा पौडवाल की संगीत में दिलचस्पी केवल हिंदी गानों तक सीमित नहीं रही. उन्होंने कन्नड़ भाषा में और गाने गाने की इच्छा भी जाहिर की थी. वह मैसूर दशहरा में लाइव प्रस्तुति दे चुकी हैं. इससे पता चलता है कि अलग-अलग भाषाओं और संगीत की शैलियों को लेकर भी उनकी रुचि रही है. आज भी अधूरी है यह ख्वाहिश अनुराधा पौडवाल ने अपने करियर में फिल्मी गानों से लेकर भक्ति संगीत तक कई पड़ाव देखे हैं. लेकिन उनकी कुछ इच्छाएं अब भी बाकी हैं. स्टार्सअनफोल्डेड पर प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, उन्होंने कविता और आदि शंकराचार्य की रचनाओं को रिकॉर्ड करने की इच्छा जताई थी. अनुराधा पौडवाल की कहानी सिर्फ एक सफल गायिका बनने की नहीं है, बल्कि अपने लिए एक अलग रास्ता चुनने की भी है. उन्होंने हिंदी फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा और फिर भक्ति संगीत की ओर रुख कर वहां भी अपनी खास पहचान बनाई. उनके भजन आज भी लोगों के घरों और मंदिरों में सुनाई देते हैं. फिल्मी गानों से लेकर भक्ति संगीत तक का उनका सफर बताता है कि संगीत की दुनिया में पहचान बनाने के कई रास्ते हो सकते हैं. ये भी पढ़ें: 32 साल बाद फिर सिनेमाघरों में लौटेगी अक्षय कुमार-रवीना टंडन की ‘मोहरा’, जानें कब होगी रिलीज ये भी पढ़ें: इस हफ्ते थिएटर से लेकर ओटीटी तक, रिलीज होंगी 5 फिल्में और सीरीज, कीर्ति सुरेश की ‘अक्का’ से ‘पायर’ तक क्या है खास? The post लता मंगेशकर के दौर में बनाई पहचान, फिर बॉलीवुड से बनाई दूरी… जानिए अनुराधा पौडवाल की कहानी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Explainer : इजराइल में कैसे होते हैं चुनाव? नेतन्याहू के सामने कौन-कौन, सरकार बनाने के लिए क्यों जरूरी है गठबंधन

इजराइल की चुनावी व्यवस्था हिंदुस्तान से अलग है. यहां मतदाता सीधे प्रधानमंत्री नहीं चुनते, बल्कि नेतृत्वक पार्टी को वोट देते हैं. चुनाव के बाद प्रशासन बनाने के लिए पार्टियों को एक-दूसरे का समर्थन जुटाना पड़ता है. ऐसे में छोटी पार्टियां भी प्रशासन बनाने और उसे चलाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. इजराइल में चुनाव कैसे होते हैं? इजराइल का आकार पूर्वोत्तर हिंदुस्तान के मिजोरम राज्य के लगभग बराबर है. वहां आनुपातिक प्रतिनिधित्व की राष्ट्रव्यापी चुनाव प्रणाली लागू है. इजराइल में संसद के चुनाव होते हैं. पूरे देश को एक ही निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है, जहां से संसद यानी नेसेट के 120 सदस्य चुने जाते हैं. संसद का कार्यकाल चार साल का होता है, हालांकि नेतृत्वक अस्थिरता के कारण कई बार समय से पहले चुनाव कराने पड़ते हैं. इजराइल में 18 साल या उससे अधिक उम्र के नागरिक मतदान कर सकते हैं. मतदाता किसी एक उम्मीदवार के बजाय नेतृत्वक पार्टी की सूची को वोट देते हैं. चुनाव में जिस पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उसे संसद में सीटें मिलती हैं. संसद में प्रवेश के लिए किसी पार्टी को देशभर में कम से कम 3.25 फीसदी वोट हासिल करना जरूरी है. यह सीमा पार करने वाली पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात में 120 सीटें बांटी जाती हैं. चुनाव के बाद प्रधानमंत्री कैसे चुना जाएगा? इजराइल में सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी का नेता अपने आप प्रधानमंत्री नहीं बन जाता. चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रपति सभी प्रमुख नेतृत्वक दलों से सलाह-मशविरा करते हैं और उस सांसद को प्रशासन बनाने का मौका देते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे बेहतर संभावना होती है. इसके बाद संबंधित नेता को गठबंधन बनाने के लिए निर्धारित समय मिलता है. सामान्य प्रक्रिया में 28 दिन का समय दिया जाता है, जिसे 14 दिन तक बढ़ाया जा सकता है. प्रशासन बनने के लिए संसद का समर्थन हासिल करना जरूरी है. अगर पहला नेता प्रशासन बनाने में नाकाम रहता है, तो किसी दूसरे उम्मीदवार को मौका दिया जा सकता है. यदि कोई भी उम्मीदवार जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाता, तो नए चुनाव की नौबत आ सकती है. प्रशासन बनाने के लिए गठबंधन क्यों जरूरी है? इजराइल में अब तक किसी एक पार्टी को संसद की सभी 120 सीटों में से बहुमत हासिल नहीं हुआ है. प्रशासन बनाने के लिए उस उम्मीदवार को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना होता है. इसलिए चुनाव के बाद कई पार्टियां मिलकर गठबंधन प्रशासन बनाती हैं. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिलती हैं, लेकिन उसके पास बहुमत नहीं है, तो उसे दूसरी पार्टियों का समर्थन लेना पड़ता है. इसके लिए मंत्री पद और नीतियों को लेकर समझौते भी करने पड़ सकते हैं. यही वजह है कि कम सीटें जीतने वाली पार्टियां भी प्रशासन बनाने में अहम हो जाती हैं. अगर गठबंधन में शामिल कोई बड़ी या छोटी पार्टी समर्थन वापस ले ले, तो प्रशासन का बहुमत खतरे में पड़ सकता है. नेतन्याहू के सामने कौन-कौन हैं? इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पार्टी लिकुड (Likud) के सामने विपक्ष के कई नेता चुनौती पेश कर रहे हैं. गादी आइजेनकोट: इजराइल के पूर्व सैन्य प्रमुख और याशर पार्टी के नेता. उन्हें नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में गिना जा रहा है. नफ्ताली बेनेट: इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री. वह पहले भी नेतन्याहू के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने में भूमिका निभा चुके हैं. यायर लैपिड: इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्ष के प्रमुख नेताओं में शामिल. अविग्दोर लिबरमैन: पूर्व रक्षा मंत्री और नेतन्याहू के पुराने सहयोगी, जो बाद में उनके मुखर आलोचक बन गए. इन नेताओं के अलावा यायर गोलान के नेतृत्व वाले वामपंथी दल डेमोक्रेट्स और अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियां भी चुनावी मुकाबले का हिस्सा हैं. नेतन्याहू की लोकप्रियता पर सवाल क्यों? 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर सवाल उठे थे. इसके बाद गाजा में युद्ध शुरू हुआ और संघर्ष का विस्तार लेबनान तथा ईरान तक हुआ. रॉयटर्स की 29 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, कई सर्वेक्षणों में नेतन्याहू की हार की संभावना जताई गई थी. हमास के हमले के बाद उनकी सुरक्षा संबंधी छवि को नुकसान पहुंचा. इसके अलावा धर्म और राज्य के संबंधों को लेकर प्रशासन की नीतियां भी इजरायल के कई नागरिकों के बीच अलोकप्रिय रही हैं. हालांकि, नेतन्याहू इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हैं और उन्हें नेतृत्वक गठबंधन बनाने का लंबा अनुभव है. दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता नेतन्याहू 1996 से तीन अलग-अलग अवधियों में लगभग 19 साल तक इजराइल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. इसलिए सर्वेक्षणों में पिछड़ने के बावजूद उनकी वापसी की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. नेतन्याहू के साथ कौन-कौन सी पार्टियां हैं? नेतन्याहू के खेमे में उनकी अपनी दक्षिणपंथी पार्टी लिकुड के अलावा बेजलेल स्मोट्रिच की धार्मिक राष्ट्रवाद से जुड़ी पार्टी और इतामार बेन-ग्विर की यहूदी पावर पार्टी शामिल हैं. अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली शास और यूनाइटेड टोरा जूडिज्म जैसी पार्टियां भी सत्ता के समीकरण में अहम हैं. इन पार्टियों की सैन्य सेवा से छूट संबंधी मांगें प्रशासन के भीतर विवाद का विषय रही हैं. विपक्षी खेमे में आइजेनकोट, बेनेट, लैपिड, लिबरमैन और अन्य दल शामिल हैं. लेकिन विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ नेतन्याहू को हराना नहीं, बल्कि चुनाव के बाद ऐसा गठबंधन बनाना भी है जो संसद में बहुमत जुटा सके. ये भी पढ़ें: क्या फिर सत्ता में लौटेंगे नेतन्याहू? 73 लाख मतदाता तय करेंगे इजराइल का भविष्य, 12018 बूथ तैयार The post Explainer : इजराइल में कैसे होते हैं चुनाव? नेतन्याहू के सामने कौन-कौन, प्रशासन बनाने के लिए क्यों जरूरी है गठबंधन appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Saif Ali Khan के मीम्स से छाया ये ब्रांड, जानिए कैसे शुरू हुआ 1992 से करोड़ों तक का सफर

Saif Ali Khan Gowardhan Ghee Viral Meme: आजकल सोशल मीडिया पर अगर आप एक्टिव हैं, तो आपने एक्टर सैफ अली खान और गोवर्धन घी (Gowardhan Ghee) के मीम्स जरूर देखे होंगे. टीवी शो से शुरू हुआ यह मजाक आज इंटरनेट का ट्रेंड बन चुका है. आखिर सैफ और गोवर्धन घी का यह पूरा मामला क्या है, और जिस ब्रांड की इतनी चर्चा हो रही है, उसकी शुरुआत और असली ताकत क्या है? आइए जानतें हैं इसके बारें में.  सैफ अली खान और गोवर्धन घी का यह ट्रेंड आखिर क्या है? बात सितंबर महीने की है, जब सैफ अली खान और अक्षय कुमार अपनी फिल्म ‘हैवान’ के प्रमोशन के लिए अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ (KBC 18) में गए थे. वहां 10वें सवाल का सही जवाब देने पर अमिताभ बच्चन ने उन्हें इनाम के तौर पर दो साल का मुफ्त गोवर्धन घी देने का ऐलान किया था. इस पर सैफ ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि वह तो इसी के लिए यहां आए हैं. बस फिर क्या था, इंटरनेट ने इस बात को पकड़ लिया और जब सैफ ने अपना नया इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया, तो फैंस ने कमेंट्स में घी को लेकर बाढ़ ला दी. बाद में जब सैफ ने कपिल शर्मा के शो में मजाकिया लहजे में कहा कि उन्हें अभी तक घी नहीं मिला है, तो गोवर्धन घी की मार्केटिंग टीम ने इसे एक शानदार मौके में बदल दिया. हाल ही में सैफ ने एक मजेदार वीडियो शेयर किया, जिसके पीछे गोवर्धन घी के बड़े-बड़े डिब्बे रखे हुए थे. इस तरह टीवी का एक छोटा सा चुटकुला आज सोशल मीडिया पर सबसे बड़ी चर्चा बन गया है, जहां हर कोई इस मजेदार पब्लिसिटी की तारीफ कर रहा है. गोवर्धन घी कंपनी की शुरुआत कब और किसने की थी? इस वायरल ट्रेंड के बीच लोगों के मन में यह सवाल भी आ रहा है कि यह कंपनी आखिर कितनी पुरानी है और इसका सफर कैसा रहा है? गोवर्धन घी की शुरुआत साल 1992 में श्री देवेंद्र शाह द्वारा इसकी पैरेंट कंपनी पराग मिल्क फूड्स (Parag Milk Foods) के रूप में की गई थी. अपनी शुरुआत के बाद से ही इस कंपनी ने डेयरी प्रोडक्ट्स में इंटरनेशनल लेवल की क्वालिटी देने पर पूरा ध्यान दिया है. आज के समय में यह अपनी शुद्धता और बेहतरीन स्वाद के वादे के साथ लोगों की रसोई और दिलों दोनों में अपनी खास जगह बना चुका है.  गोवर्धन कंपनी के पास कौन-कौन सी बड़ी उपलब्धियां हैं? आज पराग मिल्क फूड्स लगभग ₹3,076 करोड़ के मार्केट कैप और ₹3,900 करोड़ से ज्यादा के सालाना टर्नओवर वाली देश की सबसे बड़ी प्राइवेट डेयरियों में से एक बन चुकी है: मार्केट शेयर: काऊ घी (गाय के घी) मार्केट में गोवर्धन की अकेले 22% हिस्सेदारी है, जबकि चीज (Cheese) सेगमेंट में पराग 35% मार्केट शेयर के साथ देश में सबसे आगे है. विशाल क्षमता: रोजाना 10,00,000 लीटर दूध प्रोसेस करने की क्षमता के साथ इसके पास हिंदुस्तान का सबसे बड़ा काऊ प्लांट और एशिया का सबसे बड़ा चीज प्लांट है. क्लाइंट्स और ब्रांड्स: यह बास्किन रॉबिन्स, कैफे कॉफी डे, बारिस्ता और डोमिनोज जैसे ग्लोबल ब्रांड्स को सप्लाई करता है. इसके अलावा 2017 में कंपनी ने ‘अवतार’ (Avvatar) नाम से अपना वे प्रोटीन ब्रांड भी लॉन्च किया था. ये भी पढ़ें: रवींद्रनाथ टैगोर का परिवार था हिंदुस्तान का पहला कोयला कारोबारी, इस कंपनी से शुरू हुआ Coal का बिजनेस The post Saif Ali Khan के मीम्स से छाया ये ब्रांड, जानिए कैसे शुरू हुआ 1992 से करोड़ों तक का सफर appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Microsoft ने निधि यादव को दिया 52 लाख का पैकेज, जानें Amazon में कितने स्टूडेंट्स का हुआ सेलेक्शन

NIT Jalandhar Placement: एनआईटी जालंधर के स्टूडेंट्स का चयन Amazon और Microsoft जैसी दिग्गज टेक कंपनियों में हुआ है. Microsoft में चयनित पांच छात्रों को 52 लाख रुपये सालाना का प्लेसमेंट पैकेज मिला है. वहीं, Amazon में भी नौ छात्रों ने अपनी जगह बनायी है. Amazon में 9 छात्रों का चयन Amazon में NIT जालंधर के 9 छात्रों का चयन हुआ है. इन स्टूडेंट्स के नाम नीचे देख सकते हैं- क्रम संख्या छात्र का नाम 1 हेनान (Henan) 2 मनरीत (Manreet) 3 रामनदीप (Ramandeep) 4 तनु (Tanu) 5 सार्थक (Sarthak) 6 श्रुति (Shruti) 7 लौविश (Louvish) 8 मेघना (Meghna) 9 रोहिणी (Rohini) Microsoft में पांच छात्रों को 52 लाख का पैकेज NIT जालंधर के लिए दूसरी बड़ी खुशसमाचारी Microsoft से आई. कंपनी ने संस्थान के 5 छात्रों का चयन किया है और उनके लिए 52 लाख रुपये सालाना का प्लेसमेंट पैकेज बताया गया है. View on Instagram ये भी पढ़ें: NIT पटना में हाईएस्ट प्लेसमेंट 41.37 लाख, मिले 500 से ज्यादा जॉब ऑफर कैसा रहा प्लेसमेंट रिकॉर्ड? डॉ बीआर आंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), जालंधर के बीटेक 2021-25 बैच के प्लेसमेंट आंकड़े छात्रों के लिए कई अच्छी समाचारें लेकर आए हैं. संस्थान के कुल 862 योग्य छात्रों में से 792 छात्रों को प्लेसमेंट मिला. इस दौरान कुल 1003 जॉब ऑफर आए, जिनमें 211 डबल जॉब ऑफर शामिल हैं. बैच का अधिकतम सालाना पैकेज 52 लाख रुपये रहा. औसत पैकेज 9.78 लाख रुपये रहा. कुल प्लेसमेंट प्रतिशत 91.88 रहा. डिसिप्लीन के हिसाब से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) में 145 योग्य छात्रों में से 137 को नौकरी मिली. NIT Jalandhar Placement Record 2026 इस ब्रांच में औसत पैकेज 15.83 लाख रुपये रहा, जो तालिका में सबसे अधिक है. IT ब्रांच का औसत पैकेज 15.07 लाख रुपये और ECE का 13.20 लाख रुपये रहा. इन ब्रांचों में अधिकतम पैकेज 52 लाख रुपये दर्ज किया गया. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE) में 50, केमिकल इंजीनियरिंग (CHE) में 59 और मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ME) में 85 छात्रों को प्लेसमेंट मिला. सिविल इंजीनियरिंग में 71 योग्य छात्रों में से 41 को नौकरी मिली, जबकि इसका प्लेसमेंट प्रतिशत 57.75 रहा. Google, Microsoft और Amazon जैसी कंपनियों ने कई प्रमुख ब्रांचों में अधिकतम पैकेज दिये. कुल मिलाकर, ये आंकड़े बताते हैं कि NIT जालंधर के 2021-25 बैच ने प्लेसमेंट के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया. ये भी पढ़ें: NIT Jamshedpur में वर्ष 2024-25 में 93.76% छात्रों का हुआ प्लेसमेंट, CSE समेत इन ब्रांच में 82 LPA तक पैकेज The post Microsoft ने निधि यादव को दिया 52 लाख का पैकेज, जानें Amazon में कितने स्टूडेंट्स का हुआ सेलेक्शन appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Harley-Davidson Sprint 440 की तस्वीरें आईं सामने, 440cc इंजन और 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ होगी लॉन्च

Harley-Davidson बहुत जल्द हिंदुस्तानीय बाजार में अपनी नई क्रूजर बाइक Sprint 440 लॉन्च करने जा रही है. लॉन्चिंग से पहले ही इस दमदार बाइक की बिना कवर वाली तस्वीरें सामने आ गई हैं, जिसमें इसका शानदार क्रूजर लुक, नया फ्यूल टैंक और सीट साफ नजर आ रहे हैं. यह बाइक कंपनी की मौजूदा X440 से काफी अलग है और इसे पूरी तरह एक ‘ट्रेडिशनल क्रूजर’ का रूप दिया गया है. खास बात यह है कि इस बाइक को हिंदुस्तान में ही Hero MotoCorp बनाएगी. कैसा है नई Sprint 440 का लुक और डिजाइन? दमदार क्रूजर लुक: नई बाइक में X440 के मुकाबले ज्यादा क्लासिक क्रूजर लुक देखने को मिलता है. इसमें एक नया फ्यूल टैंक, एक ही हिस्से में बनी सीट और पीछे की तरफ मुड़ा हुआ हैंडलबार दिया गया है. रंग और ग्राफिक्स: बाइक के ज्यादातर हिस्सों पर ब्लैक फिनिश है, जबकि इंजन पर हल्की मेटल फिनिश दी गई है. फ्यूल टैंक पर नारंगी बॉर्डर वाले ग्राफिक्स के साथ Harley-Davidson की ब्रांडिंग है और साइड पैनल पर ‘Sprint’ लिखा है. तस्वीरों में यह बाइक ब्लू, ग्रे और रेड कलर में नजर आई है. सिंपल फ्रंट लुक: आगे की तरफ गोल हेडलैंप, अलग टर्न इंडिकेटर और एक छोटा मडगार्ड दिया गया है. इसमें बड़ी विंडस्क्रीन नहीं है, जिससे इसका सामने का लुक काफी सिंपल और आकर्षक लगता है. ये भी पढ़ें: 142km vs 123km रेंज, इस धनतेरस Ampere खरीदें या Ather? जानें यूपी, बिहार और झारखंड में दोनों के इलेक्ट्रिक स्कूटर की ऑन-रोड कीमत सफर को आरामदायक बनाएगी खास सीट राइडिंग पोजीशन: इस बाइक में आगे की तरफ झुकी सीट के बजाय, बीच में नीचे की तरफ धंसी हुई राइडर सीट दी गई है. वहीं, पीछे बैठने वाले के लिए सीट का हिस्सा थोड़ा उठा हुआ है. फुटपेग्स और हैंडल: हैंडलबार पीछे की तरफ मुड़ा हुआ है और फुटपेग्स (पैर रखने की जगह) इंजन के थोड़े आगे की तरफ दिए गए हैं. इससे रोजाना इस्तेमाल में आसानी होगी और राइडिंग पोजीशन काफी आरामदायक रहेगी. कंसोल और चाबी: हैंडलबार के ऊपर X440 जैसा ही गोल इंस्ट्रूमेंट कंसोल है. इसके अलावा बाइक में पारंपरिक चाबी से स्टार्ट होने वाला सिस्टम भी देखा गया है. सस्पेंशन और ब्रेकिंग हार्डवेयर: बाइक में आगे की तरफ अपसाइड-डाउन (USD) फ्रंट फोर्क और पीछे दो शॉक एब्जॉर्बर (सस्पेंशन) लगे हैं. इसके अलॉय व्हील्स पर शानदार मेटल फिनिश दी गई है. ब्रेक: आगे और पीछे, दोनों पहियों में डिस्क ब्रेक दिए गए हैं. फ्रंट व्हील में ABS सेंसर रिंग भी नजर आई है. साइलेंसर: दाईं ओर नीचे की तरफ एग्जॉस्ट है, जिस पर तीन काली पट्टियों वाली मेटल हीट शील्ड लगी है. पीछे की तरफ एक चौड़ा टायर, छोटा टेललैंप और टर्न इंडिकेटर भी मौजूद हैं. कैसा होगा इंजन? नई Sprint 440 में Harley-Davidson X440 वाला ही दमदार 440cc का सिंगल-सिलेंडर, एयर-ऑयल-कूल्ड इंजन मिलने की पूरी उम्मीद है. मौजूदा X440 में यह इंजन 27 bhp की पावर और 38 Nm का टॉर्क पैदा करता है, जिसके साथ 6-स्पीड गियरबॉक्स जुड़ा है. हालांकि, नई बाइक की ट्यूनिंग या गियरिंग में कोई बदलाव होगा या नहीं, इसकी पक्की जानकारी लॉन्च के समय ही मिलेगी. हिंदुस्तान में बनेगी, जल्द होगी लॉन्च इस नई क्रूजर बाइक का निर्माण दोनों कंपनियों की साझेदारी के तहत हिंदुस्तान में Hero MotoCorp द्वारा किया जाएगा. जो ग्राहक Harley-Davidson की पारंपरिक डिजाइन वाली क्रूजर बाइक का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. फिलहाल इसकी कीमत और लॉन्च की आधिकारिक तारीख का खुलासा होना बाकी है. ये भी पढ़ें: Trip 500 बाइक लॉन्च करेगी Moto Guzzi, 28 अक्टूबर को उठेगा राज, Aprilia के दमदार इंजन से लैस होगी ये नई रेट्रो बाइक The post Harley-Davidson Sprint 440 की तस्वीरें आईं सामने, 440cc इंजन और 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ होगी लॉन्च appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top