Hot News

SIR विवाद पर ECI ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- फॉर्म 6 में नहीं हुआ बदलाव, सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए

मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. निर्वाचन आयोग ने सोमवार को सर्वोच्च अदालत में दावा किया कि SIR के दौरान फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया. SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिये गये थे. आयोग ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने सर्वसम्मति से इस हलफनामे को मंजूरी दी है.

अखबार में छपे समाचार साक्ष्य नहीं माने जाते : आयोग

निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल एफिडेविट में कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को काम करने से रोकने संबंधी कोई भी याचिका विचार योग्य नहीं है. आयोग के वकील ने कहा है कि कानून की नजर में अखबार में प्रकाशित समाचार को साक्ष्य नहीं माना जाता. आयोग ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई भी दी है.

चुनाव आयोग के हलफनामे में क्या?

  • हलफनामे को तीनों सदस्यों – मुख्य चनाव आयुक्त (CEC) और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है.
  • तीनों SIR आदेश (जून 2025, अक्टूबर 2025, मई 2026) आयोग के सर्वसम्मत फैसले थे.
  • फाइल आगे बढ़ने के दौरान CEC या EC द्वारा दी गयी टिप्पणियां, सवाल या सुझाव, आयोग के ‘फैसले’ नहीं माने जाते.
  • फाइलें पहले एक EC के पास जाती हैं, फिर दूसरे EC के पास और अंत में CEC के पास. बहुत जरूरी मामलों में, मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ली जाती है और बाद में उसे फाइल में दर्ज कर लिया जाता है.
  • अगर कोई अधिकारी अपनी तय शक्तियों से बाहर जाकर आदेश जारी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
  • 28 जुलाई का काम बांटने वाला आदेश प्रतिनियुक्ति पर आये एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था. अगले ही दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा. 30 जुलाई को चुनाव आयोग के संयुक्त निर्देश के बाद उस आदेश को कभी लागू नहीं किया गया.
  • फॉर्म 6 में कोई बदलाव (संशोधन) नहीं किया गया है. इसमें बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्र प्रशासन के पास है. SIR घोषणा-पत्र एक अलग दस्तावेज है.
  • ऑनलाइन दिखने वाली जानकारी को ‘संशोधन’ के रूप में समझा जा सकता था. 21 अक्टूबर से, ऑनलाइन आवेदन को फॉर्म 6 और घोषणा-पत्र में बांट दिया जायेगा, ठीक वैसे ही जैसे फिजिकल फॉर्म में होता है.
  • जिन मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है, उन्हें सुनवाई के लिए आने की जरूरत नहीं है. बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उनके घर जाकर दस्तावेज ले लेंगे. सुनवाई केवल बहुत खास मामलों में ही होगी. इस प्रक्रिया को भी ऑनलाइन पूरी करने की कोशिश होगी.
  • ECINet पर ERO के आदेश के बिना कोई नाम न तो जोड़ा जा सकता है, न ही हटाया जा सकता है. नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह जांचने के लिए IIT और IISc के विशेषज्ञों की एक समिति बनायी गयी है.
  • गोवा में वोटर लिस्ट से छूटे 97 मतदाताओं में से 88 पहले ही पंजीकृत हो चुके थे. 6 विदेश में थे और 3 के पास पुर्तगाल के पासपोर्ट थे.
  • पश्चिम बंगाल में मतदाताओं को शामिल करने के खिलाफ अपीलें, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), पश्चिम बंगाल के अधिकारियों द्वारा दायर की गयीं थीं. इन मामलों को आयोग के सामने नहीं लाया गया था.
  • CEC को काम करने से रोकने या उन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका कानूनी रूप से मान्य नहीं है. CEC को केवल उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है, जिससे सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है.
  • आयोग ने कभी भी किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया, न ही ऐसा करने की अनुमति दी.
  • इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर बार-बार उठाये गये सवालों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है.

ये भी पढ़ें: 1 नवंबर को रामलीला मैदान में CEC के खिलाफ कांग्रेस की रैली, दिल्ली पुलिस से मिली मंजूरी

राहुल गांधी व अन्य ने दाखिल की थी याचिका

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये गये थे. याचिकाकर्ताओं ने आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, मतदाता सूची से नाम हटाये जाने की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने समेत अन्य मांगें रखीं थीं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. इसी के जवाब में आयोग ने सोमवार को हलफनामा दाखिल किया.

राहुल व अन्य की याचिका में क्या थीं मांगें

आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाये. मतदाता सूची से नाम हटाये जाने की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट हो. वोटर लिस्ट से हटाये गये मतदाताओं की बूथ-वार सूची जारी की जाये. यह सुनिश्चित किया जाये कि बिना किसी नोटिस या अपनी बात रखने का मौका दिये पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाये जायेंगे.

ये भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस, 1 नवंबर को दिल्ली चलो मार्च, 10 लाख लोगों को जुटाने की तैयारी

The post SIR विवाद पर ECI ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- फॉर्म 6 में नहीं हुआ बदलाव, सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top