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जिस अमेरिका के दम पर उड़ता है पाकिस्तान, उसी ने दिखाई थी असली औकात! अब UNGA में फिर हुई फजीहत

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें वो आतंकवाद और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद को लेकर पूछे गए सवाल को अंदेखा कर रहे हैं. ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने दोनों सवालों का कोई जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए. वीडियो को लेकर सोशल मीडिया यूजर अपनी प्रतिक्रिया साझा कर रहे. कई यूजर इसे पाकिस्तान की फजीहत बता रहे तो वहीं कुछ यूजर कहना है कि अमेरिका में पाकिस्तान की बेइज्जती नया नहीं है.

पहले जानते हैं क्या है नया वीडियो

ANI की 25 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज शरीफ जब संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रवेश कर रहे थे, तब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा.शहबाज ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया.

इसके बाद संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर मुकदमा चलाने को लेकर सवाल किया गया. इस सवाल पर भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया.

हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में हिंदुस्तान लंबे समय से उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है.

अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की बेइज्जती का मामला क्या है

दुनिया के सामने पाकिस्तान भले ही आज अमेरिका के करीब जाने की कोशिश करता नजर आ रहा हो, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. आतंकवाद से लेकर सुरक्षा सहायता और आर्थिक संकट तक, कई मौकों पर अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव बनाया है. कुछ मामलों में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति का सामना भी करना पड़ा.

2011 में पाकिस्तान की जमीन पर हुआ ओसामा बिन लादेन ऑपरेशन

  • 2 मई 2011 को अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में एक बेहद सीक्रेट सैन्य अभियान चलाया. इस अभियान में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया. अमेरिकी नेवी सील्स ने पाकिस्तान को पहले से जानकारी दिए बिना यह कार्रवाई की थी.
  • सवाल इसलिए उठे क्योंकि बिन लादेन का ठिकाना एबटाबाद में पाकिस्तान सैन्य अकादमी के काफी करीब था. अमेरिकी टीम हेलीकॉप्टर से वहां पहुंची और अभियान पूरा करके वापस लौट गई. पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को इस कार्रवाई की पहले से जानकारी नहीं थी.

2018 में ट्रंप ने पाकिस्तान पर लगाए थे गंभीर आरोप

  • जनवरी 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को लेकर कड़ा बयान दिया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि अमेरिका ने पिछले 15 वर्षों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता दी, लेकिन बदले में उसे झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं मिला.
  • ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया था कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में अमेरिका जिन आतंकवादी संगठनों का पीछा कर रहा था, उन्हें सुरक्षित ठिकाने देता रहा. पाकिस्तान ने अमेरिकी आरोपों को खारिज किया था.

अमेरिका ने सुरक्षा सहायता पर लगाई थी रोक

  • 2018 में अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता रोकने का ऐलान किया. अमेरिका का कहना था कि पाकिस्तान को अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई करनी होगी. इस फैसले से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया. पाकिस्तान के लिए यह आर्थिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका था.

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रहा पाकिस्तान

  • पाकिस्तान 2018 से 2022 तक वित्तीय कार्रवाई कार्यबल यानी FATF की ग्रे लिस्ट में रहा. इस दौरान उस पर आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े नियमों को मजबूत करने का दबाव रहा.
  • हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि पाकिस्तान का ग्रे लिस्ट में रहना केवल अमेरिका के दबाव का नतीजा था. FATF में कई देशों की भूमिका होती है और फैसला सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिया जाता है. हालांकि, अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान से आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की थी.

इमरान खान से जुड़े विवाद ने भी खींचा ध्यान

  • पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर भी अमेरिका में कई विवाद सामने आए हैं. उनकी पार्टी और अमेरिकी अधिकारियों से जुड़े बयानों के बीच समय-समय पर नेतृत्वक तनाव देखने को मिला है. हालांकि, इमरान खान से जुड़े वायरल दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

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आज कैसा है अमेरिका -पाकिस्तान रिश्ता

  • अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते सिर्फ टकराव पर आधारित नहीं रहे हैं. दोनों देशों ने सुरक्षा, आतंकवाद और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग भी किया है. पाकिस्तान के लिए अमेरिका आर्थिक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है, जबकि अमेरिका के लिए दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा संबंधी मुद्दे अहम रहे हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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