रांची : रांची के जोड़ा तालाब निवासी के बुलेट पर गलत पार्किंग में 150 रुपये का चालान आया, थर्ड पार्टी से भुगतान करने पर इसके लिए कुल चार्ज 349.42 रुपये मांगा गया. सेटलमेंट फीस 169 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी का 30.42 रुपये इसमें जोड़ा गया था. इसी तरह धुर्वा निवासी पूजा कुमारी का कुल 2,000 रुपये का चालान कटा. थर्ड पार्टी साइट से भुगतान करने पर कुल 2446.04 रुपये मांगे गये. इसमें 1,000-1,000 रुपये का दो चालान और सेटलमेंट फीस और जीएसटी के नाम पर दोनों चालान के लिए 446.04 रुपये अतिरिक्त चार्ज किया गया. रातू रोड निवासी मनोज के अनुसार, ४०० रुपये के चालान के भुगतान के लिए एक थर्ड पार्टी पोर्टल पर कुल 1119 रुपये मांगे गये. झारखंड प्रशासन का ई-चालान पोर्टल पिछले छह माह से काम नहीं कर रहा है. हिंदुस्तान प्रशासन के पोर्टल पर भी लगातार तकनीकी समस्या बनी रहती है. इसके चलते लोग चालान प्रशासनी पोर्टल से चालान जमा नहीं कर पा रहे हैं. इसी का फायदा उठा रहे हैं थर्ड पार्टी पोर्टल.
ऐप से भुगतान करने पर लोगों को देने पड़ रहे हैं अतिरिक्त पैसे
इनके ऐप से भुगतान का विकल्प अपनाने पर लोगों को अतिरिक्त पैसे देने पड़ रहे हैं. सबसे गंभीर बात यह है कि प्रशासन के परिवहन विभाग से लोगों का डेटा इन निजी पोर्टलों तक पहुंच रहा है. इससे ठगी और फर्जीवाड़े का भी रास्ता खुल गया है.राजधानी रांची में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन करने पर लगातार चालान काटा जा रहा है, लेकिन चालान का भुगतान करना लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है. लोगों के पास दो ही विकल्प बचे हैं, या तो वे ज्यादा पैसे देकर थर्ड पार्टी एप से भुगतान करें या फिर भुगतान ही नहीं करें. नतीजा यह है कि रांची में 150 करोड़ रुपये से अधिक का चालान बकाया है.जुलाई से सितंबर तक रांची में कुल 3,07,071 चालान काटे गये. इस अवधि में हर माह औसतन 1,02,357 चालान काटे गये. ई-चालान जमा करने की निर्धारित समय सीमा निकलने के बाद मामला कोर्ट में स्थानांतरित हो जाता है. ऐसे मामलों में कोर्ट की अनुमति के बाद कचहरी रोड स्थित ट्रैफिक कार्यालय के काउंटर पर चालान की राशि जमा करनी पड़ती है. इस प्रक्रिया में लोगों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है. ऑनलाइन भुगतान की सुविधा में तकनीकी बाधा और ऑफलाइन भुगतान में लंबी प्रक्रिया के कारण आम लोग परेशान हैं.
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प्रशासनी पोर्टल पर इस तरह की समस्याएं आ रहीं हैं
प्रशासनी ई-चालान पोर्टल- https://echallan.jhpolice.gov.in/ लंबे समय से (लगभग छह माह से) ठीक से काम नहीं कर रहा है. वहीं, https://echal-lan.parivahan.gov.in/ पर भी भुगतान के दौरान परेशानी की शिकायते है. लोगों के अनुसार, कभी कैप्चा नहीं आता, तो कभी नी पेंडिंग रिकॉर्ड फाउंड’ का संदेश दिखता है. कई बार कोशिश करने के बाद भी चालान का विवरण नहीं मिलता और भुगतान अटक जाता है. कोकर निवासी रंजीत कुमार ने बताया कि हेलमेट नहीं पहनने पर उनका चालान कटा था. उन्होंने झारखंड प्रशासन के पोर्टल पर कई चार चालान का विवरण देखने की कोशिश की, लेकिन उन्हें जानकारी नहीं मिली. वहीं, थर्ड पार्टी पोर्टल पर भुगतान के लिए अधिक पैसे मांगे जा रहे थे. इस कारण वह चालान जमा नहीं कर सके.
एक मिनट में समझें यह पूरी समस्या
ऑनलाइन भुगतान बाधित : प्रशासनी पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं के चलते लोगा चालान कर विवरण नहीं देख पा रहे है और भुगतान भी अटक रहा है.
कैप्चा और रिकॉर्ड नहीं मिलने की समस्या : प्रशासनी पोर्टल पर कल्ली कैप्चा नहीं आता, तो कभी ‘नो पेडिन रिकॉर्ड फाउंड’ का संदेश आता है. लोग भुगतान नहीं कर पा रहे हैं.
थर्ड पार्टी पोर्टल पर अतिरिक्त शुल्क की मार : निजी पोर्टल से भुगतान करने पर लोगों को चालान की मूल राशि के अलावा सेटलमेंट फीस और जीएसटी मी देना पड़ रहा है. इससे भुगतान महंगा हो जा रहा है.
ऑफलाइन भुगतान के लिए कोर्ट का चक्कर और लंबी कतारें : ई-चालान जमा करने की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद मानाला कोर्ट में स्थानातरित हो जाता है. इसके बाद कोर्ट की अनुमति से ट्रैफिक कार्यालय के काउंटर पर भुगतान करना पड़ता है, जहां लोगों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता.
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आम लोगों के ट्रैफिक चालान का डेटा थर्ड पार्टी पोर्टल के पास कैसे पहुंच रहा है?
चालान के भुगतान में आ रही परेशानी और थर्ड पार्टी द्वारा लोगों को चालान जमा करने संबंधी मैसेज भेजने की शिकायत मिली है. साथ ही थर्ड पार्टी से चालान राशि के अलावा अतिरिक्त चार्ज जोड़ा जा रहा है. इसे लेकर विभाग की ओर से एनआइसी को पत्र लिखा गया है.
झारखंड प्रशासन का ट्रैफिक ई-चालान पोर्टल काम क्यों नहीं कर रहा है?
सर्वर डाउन रहने की जानकारी मिली है. इसे दुरुस्त करने की दिशा में काम कराया जा रहा है.
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