दाऊद की बहन से लॉरेंस गैंग के कूरियर तक: मुंबई क्राइम वर्ल्ड में स्त्रीएं कैसे बनती रहीं हथियार? जानिए पूरी स्टोरीमुंबई अंडरवर्ल्ड का नाम आते ही दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन और हाजी मस्तान जैसे नाम याद आते हैं. लेकिन मुंबई के अपराध जगत की कहानी में कुछ ऐसे नाम भी हैं, जिन्हें अक्सर कम चर्चा मिलती है. ये नाम स्त्रीओं के हैं. 18 अक्टूबर को बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग ने एक बार फिर मुंबई अंडरवर्ल्ड के उस चेहरे को सामने ला दिया है, जिस पर अमूमन कम बात होती है.
इस मामले में पुलिस ने अमृतसर से मुंबई हथियार पहुंचाने के आरोप में राधा और बबिता नाम की दो स्त्रीओं को गिरफ्तार किया है. पुलिस जांच कर रही है कि इन दोनों को इस साजिश की कितनी भनक थी. लेकिन मुंबई के जुर्म के इतिहास में यह कोई पहला मामला नहीं है. ‘भाई’ और ‘गैंगस्टर्स’ की दुनिया में स्त्रीएं कभी बिचौलिया बनकर, कभी खुद का सिंडिकेट चलाकर, तो कभी हथियारों और पैसों की कूरियर बनकर इस नेटवर्क की रीढ़ रही हैं.
किसी का पति गैंगस्टर, तो किसी ने संभाला उसका काम
अंडरवर्ल्ड में पहुंचने का रास्ता हर स्त्री के लिए एक जैसा नहीं था. कुछ स्त्रीएं अपने परिवार या रिश्तों के जरिए इस दुनिया से जुड़ीं. कई मामलों में पति के जेल जाने या शहर से बाहर रहने के बाद स्त्रीओं पर उसके गिरोह के कुछ काम संभालने के आरोप लगे. ऐसी ही एक कहानी अशरफ खान की है, जिन्हें सपना दीदी के नाम से जाना जाता था. उनके पति महमूद खान उर्फ महमूद कालिया, दाऊद इब्राहिम के साथी बताए जाते थे. पति की हत्या के बाद सपना दीदी को लगा कि इसके पीछे दाऊद का हाथ है. उनके जीवन से जुड़ी कहानियों के मुताबिक, इसके बाद उन्होंने गैंगस्टर और पुलिस के मुखबिर रहे हुसैन उस्तरा से संपर्क किया. बताया जाता है कि उसने उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी.
सपना दीदी को लेकर यह भी कहा जाता है कि उन्होंने शारजाह में हिंदुस्तान-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान दाऊद की हत्या की योजना बनाई थी. हालांकि, यह प्लान कथित तौर पर सामने आ गई. साल 1994 में नागपाड़ा स्थित उनके घर में चाकू मारकर उनकी हत्या कर दी गई.
अंडरवर्ल्ड के ‘भाई’ ही नहीं, ‘बहनें’ भी थीं
मुंबई के अपराध जगत में स्त्रीओं की भूमिका को लेकर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के प्रोफेसर अब्दुल शाबान ने अपनी स्टडी में लिखा है कि अंडरवर्ल्ड के ‘भाइयों’ के साथ-साथ इन ‘बहनों’ का भी अलग नेटवर्क था. साल 2017 में प्रकाशित उनके अध्याय ‘अंडरवर्ल्ड एंड द पुलिस इन मुंबई’ में गैंगस्टरों से जुड़ी स्त्रीओं का जिक्र मिलता है. उन्होंने ऐसी स्त्रीओं के लिए ‘बहनें’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिस तरह गैंगस्टरों के लिए ‘भाई’ शब्द प्रचलित रहा है.
इस लेख में कई ऐसी स्त्रीओं के नाम दर्ज हैं, जिनके गैंगस्टरों से संबंध होने और उनके नेटवर्क में काम करने के आरोप सामने आए थे. इनमें बबलू श्रीवास्तव से जुड़ी अर्चना शर्मा, अबू सलेम से जुड़ी मोनिका बेदी, गुरु साटम से जुड़ी लक्ष्मी सोनी उर्फ लक्का, छोटा राजन के सहयोगी बंटी पांडे से जुड़ी प्रिया राजपूत और छोटा शकील से जुड़ी शमीम पॉल के नाम शामिल हैं.
हथियार पहुंचाने से लेकर उन्हें छिपाने तक के आरोप
साल 2009 में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने निखत अंसारी को गिरफ्तार किया था. उन पर छोटा शकील गिरोह के लिए हथियार पहुंचाने का काम करने का आरोप था. जेनाबाई दारूवाली से लेकर राधा और बबीता तक के ये मामले मुंबई अंडरवर्ल्ड की एक ऐसी तस्वीर दिखाते हैं, जिसमें स्त्रीएं अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आती हैं. कोई अपने संपर्कों के दम पर प्रभावशाली बनीं, किसी पर गैंग का काम संभालने का आरोप लगा, तो किसी का नाम हथियार पहुंचाने या छिपाने जैसे मामलों में सामने आया. समय – समय पर ऐसे नाम समाज में रियलिटी चेक देते रहते है.
ये भी पढ़ें: 1998 काला हिरण केस से 2026 तक: सलमान खान के करीबियों पर कब-कब हुए हमले? जानिए पूरी टाइमलाइन
The post दाऊद की बहन से लॉरेंस गैंग के कूरियर तक: मुंबई क्राइम वर्ल्ड में स्त्रीएं कैसे बनती रहीं हथियार? जानिए पूरी स्टोरी appeared first on Naya Vichar.
