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नीति आयोग की बैठक में CM हेमंत सोरेन ने बुलंद की झारखंड की आवाज, जानें क्या-क्या रखी मांगें

रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट

Hemant Soren, रांची: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास, संसाधनों पर अधिकार और केंद्र से अपेक्षित सहयोग से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ उठाया. अपने विस्तृत संबोधन में मुख्यमंत्री ने झारखंड को केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि देश के भविष्य के औद्योगिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास के केंद्र के रूप में देखने की वकालत की. खास तौर पर उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए राज्य प्रशासन लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन मेडिकल कॉलेजों में 220 अतिरिक्त स्नातक और 217 स्नातकोत्तर सीटों की स्वीकृति लंबित है. उन्होंने केंद्र प्रशासन से इन प्रस्तावों को शीघ्र मंजूरी देने का अनुरोध किया. इसके अलावा पीपीपी मोड में प्रस्तावित छह मेडिकल कॉलेजों में से चार को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि दो की स्वीकृति अभी शेष है. मुख्यमंत्री ने इन दोनों कॉलेजों को भी जल्द मंजूरी देने की मांग की. साथ ही उन्होंने कहा कि विकसित हिंदुस्तान-2047 का सपना तभी साकार होगा, जब झारखंड जैसे राज्यों को संसाधन उपलब्ध कराने वाले प्रदेशों के बजाय विकास के बराबर भागीदार के रूप में स्वीकार किया जाएगा.

केवल खनिज संपदा से विकास संभव नहीं: CM हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड देश के औद्योगिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है. कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों ने देश के औद्योगिक विकास को ऊर्जा दी है, लेकिन इसके बदले राज्य ने विस्थापन, पर्यावरणीय दबाव और नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना भी किया है. उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों के अनुभव से यह स्पष्ट हो चुका है कि केवल खनिज संपदा से विकास संभव नहीं है. इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और मानव संसाधन निर्माण को प्राथमिकता देनी होगी.

शिक्षा व आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने की रखी मांग

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से लगभग 15 हजार केंद्र आज भी अपने भवन से वंचित हैं. इसके बावजूद पोषण अभियान और राज्य प्रशासन के ‘सामर’ कार्यक्रम के कारण कुपोषण और स्टंटिंग में उल्लेखनीय कमी आई है. उन्होंने बताया कि राज्य प्रशासन अपने संसाधनों से 5000 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कर रही है और केंद्र प्रशासन के सहयोग से इस कार्य में और तेजी लाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से अब झारखंड के विद्यार्थी आईआईटी, मेडिकल और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित हो रहे हैं. राज्य प्रशासन इसी तर्ज पर 5000 विद्यालय विकसित करने की दिशा में काम कर रही है. मुख्यमंत्री ने झारखंड में पीएम श्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की मांग की. साथ ही राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को देखते हुए एनसीईआरटी का एक क्षेत्रीय केंद्र झारखंड में स्थापित करने का आग्रह किया.

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कौशल विकास और रोजगार को प्राथमिकता देने की मांग

हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड आज प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहा है. मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत अब तक 6.76 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है. कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन और सौर ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है. उन्होंने बताया कि राज्य में कौशल विकास पर हर वर्ष 1400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं तथा एशियाई विकास बैंक के सहयोग से 1200 करोड़ रुपये की लागत से मेगा स्किलिंग इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने केंद्र प्रशासन से आग्रह किया कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण (बीओसीडब्ल्यू) योजना के संचालन में राज्यों को अधिक लचीलापन दिया जाए, ताकि प्रवासी और निर्माण श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके.

सीएम ने की स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र से सहयोग की अपेक्षा

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य प्रशासन स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला मुख्यालयों से पंचायत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है. पंचायत स्तरीय दवा दुकान योजना के तहत राज्य के 24 जिलों में 1276 दवा दुकानें संचालित हो रही हैं. उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र प्रशासन से सहयोग की मांग की है.

स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मांग

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आज हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स और तीरंदाजी जैसे स्पोर्ट्सों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है. राज्य ने देश को अनेक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं. ऐसे में झारखंड राष्ट्रीय स्तर के हॉकी और फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का स्वाभाविक दावेदार है. उन्होंने कहा कि यह केवल स्पोर्ट्स का विषय नहीं, बल्कि आदिवासी और ग्रामीण युवाओं को अवसर देने का प्रश्न है. मुख्यमंत्री ने स्पोर्ट्स महासंघों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए उनके पुनर्गठन की भी मांग की तथा राज्यों की भागीदारी वाली समितियों के गठन का सुझाव दिया.

जल जीवन मिशन और बकाया राशि का मुद्दा उठाया

बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्र प्रशासन के समक्ष झारखंड की वित्तीय मांगों को भी प्रमुखता से रखा. उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत लंबित लगभग 6000 करोड़ रुपये की राशि जल्द उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि पेयजल योजनाओं का कार्य समय पर पूरा हो सके. उन्होंने कोयला कंपनियों और केंद्रीय उपक्रमों पर झारखंड की लंबित 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि का भी मुद्दा उठाया. मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि यह राशि राज्य को प्राप्त होती है तो इसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और मानव संसाधन निर्माण जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है, जिससे लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा.

खनिज आधारित वित्तीय स्थिति से आगे बढ़ने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को केवल खनिज निकालने वाले राज्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. राज्य में वैल्यू एडिशन, मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल आधारित उद्योग, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग क्षेत्रों में बड़े निवेश की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि झारखंड कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित खनिज अन्वेषण और सतत खनन प्रणाली को बढ़ावा देना चाहता है तथा इस दिशा में केंद्र प्रशासन के सहयोग की अपेक्षा रखता है. सीएम हेमंत ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि यदि देश को विकसित हिंदुस्तान बनाना है तो झारखंड जैसे राज्यों को केवल संसाधनों के स्रोत के रूप में नहीं, बल्कि विकास के साझेदार के रूप में देखा जाना चाहिए. उन्होंने नीति आयोग से झारखंड के लिए दीर्घकालिक विकास दृष्टि तैयार करने और राज्य की खनिज संपदा को मानव संपदा में बदलने की दिशा में सहयोग देने का आग्रह किया.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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