Success Story Monika Srivastava: किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिलना कई युवाओं का सपना होता है. लेकिन मोनिका श्रीवास्तव ने अपनी पढ़ाई और कॉरपोरेट करियर के बाद एक अलग रास्ता चुना. बिहार के औरंगाबाद की रहने वाली मोनिका ने पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की, फिर PayPal में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम किया. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया. इस सफर में BPSC की सफलता एक अहम पड़ाव बनी, लेकिन उनकी तैयारी यहीं नहीं रुकी.
IIT गुवाहाटी से PayPal तक का सफर
मोनिका श्रीवास्तव की शुरुआती पढ़ाई बिहार के औरंगाबाद में हुई. उन्होंने IIT Guwahati से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की. साल 2016 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर अपना करियर शुरू किया. वह करीब छह साल तक PayPal में काम करती रहीं.
कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने के दौरान उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने अपनी तैयारी पर ध्यान देना शुरू किया और आखिरकार नौकरी छोड़कर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ीं. यह फैसला उनके करियर में एक बड़ा मोड़ था.
BPSC में 6th Rank हासिल कर बनीं अधिकारी
मोनिका ने वर्ष 2022 में 66वीं BPSC परीक्षा में छठी रैंक हासिल की. इस सफलता के बाद उनका चयन राज्य कर सहायक आयुक्त के पद पर हुआ. यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन UPSC में बेहतर रैंक हासिल करने का लक्ष्य अभी बाकी था.
BPSC में सफलता मिलने के बाद भी उन्होंने UPSC की तैयारी नहीं छोड़ी. उनकी पहली बड़ी सफलता ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया और उन्होंने अपनी तैयारी को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया.
UPSC में 455वीं रैंक से AIR 16 तक
मोनिका ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में ऑल इंडिया रैंक 455 हासिल की. इस रिजल्ट के आधार पर उनका चयन हिंदुस्तानीय रेलवे प्रबंधन सेवा (ट्रैफिक) में हुआ. इसके बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और सेवा में रहते हुए अगले प्रयास की तैयारी की.
आखिरकार UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में उन्होंने अपने छठे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 16 हासिल की. पिछली रैंक से आगे बढ़कर इस मुकाम तक पहुंचना उनके लगातार प्रयास और अपनी तैयारी को बेहतर बनाने की कहानी कहता है.
मां सिद्धिदात्री की शक्ति से जुड़ती है कहानी
मां सिद्धिदात्री को ज्ञान और साधना से सिद्धि प्राप्त करने की प्रेरणा से जोड़ा जाता है. मोनिका श्रीवास्तव का सफर भी बताता है कि ज्ञान केवल डिग्री या नौकरी तक सीमित नहीं है. अपनी कमियों को समझना, उनसे सीखना और लगातार खुद को बेहतर बनाना भी इसका हिस्सा है.
‘नौ शक्ति, नौ उड़ान’ की इस आखिरी कड़ी में मोनिका की कहानी यही संदेश देती है कि एक सफलता के बाद भी सीखने और आगे बढ़ने की गुंजाइश बनी रहती है. सही दिशा में लगातार प्रयास करते रहने से मंजिल तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है.
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