रांची: बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) के सभी गेटों को बंद कर विस्थापितों के धरना-प्रदर्शन करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में रविवार को सुनवाई हुई. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने बीएसएल की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए प्लांट के आसपास विधि-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि प्लांट परिसर में आने-जाने वाले लोगों को किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए. साथ ही राज्य प्रशासन को मामले में लिखित हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया. इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी.
धरने से लोगों के फंसे होने का दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिंह ने अदालत को बताया कि बोकारो स्टील प्लांट के गेटों पर विस्थापितों के धरना-प्रदर्शन के कारण आवागमन बाधित हो रहा है. उन्होंने कहा कि लोग पिछले 48 घंटे से फंसे हुए हैं और प्लांट का संचालन भी प्रभावित हो रहा है. बीएसएल प्रबंधन की ओर से प्रशासन को इस संबंध में जानकारी दी गई है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण परेशानी बनी हुई है. अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्लांट के सभी 11 गेटों पर प्रदर्शनकारी मौजूद थे. इस वजह से कर्मचारियों और अन्य लोगों को आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था.
राज्य प्रशासन ने कहा, सभी गेटों से हटाए गए प्रदर्शनकारी
राज्य प्रशासन की ओर से अपर महाधिवक्ता जयप्रकाश ने अदालत को बताया कि प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सुबह पांच बजे बीएसएल के मुख्य गेट से धरना देने वालों को हटा दिया था. उन्होंने कहा कि सुबह 11 बजे तक प्लांट के सभी गेटों से प्रदर्शन कर रहे विस्थापितों को हटा दिया गया. प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि विस्थापितों का मामला बीएसएल प्रबंधन से जुड़ा है. राज्य प्रशासन की जिम्मेदारी क्षेत्र में विधि-व्यवस्था बनाए रखना है. प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं.
उपायुक्त और एसपी से भी अदालत ने की पूछताछ
सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में जुड़े थे. अदालत ने दोनों अधिकारियों से स्थिति के संबंध में सवाल-जवाब किया और विधि-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया. अधिकारियों की ओर से अदालत को बताया गया कि प्लांट के सभी गेटों को खाली करा दिया गया है और फिलहाल वहां कोई समस्या नहीं है. अदालत ने निर्देश दिया कि प्लांट के संचालन और लोगों के आवागमन में किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए.
राज्य प्रशासन को हलफनामा दायर करने का निर्देश
प्रार्थी और राज्य प्रशासन का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने मामले में राज्य प्रशासन को लिखित हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि प्लांट के आसपास कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों और आम लोगों को परेशानी नहीं हो. मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गयी है. अब अगली सुनवाई में राज्य प्रशासन के हलफनामे और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा.
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विस्थापितों के आंदोलन और प्लांट संचालन का मामला
बोकारो स्टील प्लांट के गेटों पर विस्थापितों के प्रदर्शन के कारण औद्योगिक गतिविधियों और आवागमन पर असर पड़ने का मुद्दा हाईकोर्ट पहुंचा है. बीएसएल की याचिका में प्लांट के गेटों पर धरना-प्रदर्शन से उत्पन्न स्थिति को उठाया गया है. वहीं, राज्य प्रशासन ने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारियों को हटाकर गेट खाली करा दिए गए हैं. हाईकोर्ट ने फिलहाल विधि-व्यवस्था बनाए रखने और आवागमन बाधित नहीं होने देने पर जोर दिया है. मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी.
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