West Bengal Election 2021 vs 2026 Comparison: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बिसात बिछ चुकी है. 2021 के ऐतिहासिक चुनाव में ‘स्पोर्ट्सा होबे’ का नारा गूंजा था. 2026 की दहलीज पर खड़ा बंगाल उससे काफी अलग नजर आ रहा है. पिछले 5 वर्षों में राज्य की नेतृत्वक तस्वीर और मतदाताओं का मिजाज काफी हद तक बदल चुका है. 2021 में ममता बनर्जी ने एकतरफा जीत हासिल की थी. 2026 का यह रण चुनौतीपूर्ण और ‘कांटे की टक्कर’ वाला माना जा रहा है.
2021 का ‘जनादेश’ और 2026 की ‘चुनौती’
2021 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 213 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था. भाजपा 77 सीटों पर सिमट गयी थी. 2026 में परिस्थितियां बदली हुई हैं. इस बार क्या-क्या बदल गया है, यहां पढ़ें.
- सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency): 15 साल के शासन के बाद टीएमसी को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और ‘आरजी कर’ जैसे संवेदनशील मामलों के कारण उपजे जन-आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है.
- भाजपा का ग्राफ : भाजपा ने पिछले 5 सालों में अपनी सांगठनिक शक्ति बढ़ायी है. शुभेंदु अधिकारी अब नेता प्रतिपक्ष के रूप में ज्यादा आक्रामक हैं और ‘नंदीग्राम’ की जीत का मनोवैज्ञानिक लाभ उनके साथ है.
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‘ममता फैक्टर’ बनाम ‘शुभेंदु का उदय’
2021 में ममता बनर्जी ‘बंगाल की बेटी’ के रूप में उभरी थीं. 2026 में भी वह 49 प्रतिशत लोगों की पहली पसंद हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता के ग्राफ में गिरावट आयी है. दूसरी ओर, शुभेंदु अधिकारी अब अघोषित रूप से भाजपा के सबसे बड़े ‘चेहरे’ के रूप में स्थापित हो चुके हैं. यह मुकाबला अब सीधे तौर पर ‘दीदी बनाम दादा’ (ममता बनाम शुभेंदु) में बदल गया है.
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West Bengal Election 2021 vs 2026 Comparison: नये ‘गेमचेंजर’ और समीकरण
- वोटर लिस्ट विवाद (SIR): 2021 में ऐसा कोई मुद्दा नहीं था, लेकिन 2026 में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा ने ‘घुसपैठ’ के मुद्दे को जोर-शोर से उछाला है.
- त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना : ओवैसी की AIMIM और हुमायूं कबीर की AJUP का गठबंधन मुस्लिम मतों में सेंध लगा सकता है, जो 2021 में पूरी तरह ममता के साथ थे.
- युवा और आरजी कर का आंदोलन : 2021 में युवा वोटर टीएमसी के साथ थे. इस बार आरजी कर आंदोलन के बाद शिक्षित युवाओं और मध्यम वर्ग में प्रशासन के प्रति नाराजगी दिख रही है.
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बंगाल का ‘शिफ्ट होता’ चुनावी लैंडस्केप
2021 में भाजपा केवल उत्तर बंगाल और जंगलमहल तक सीमित थी, लेकिन 2026 में वह दक्षिण बंगाल और शहरी इलाकों (जैसे कोलकाता और सॉल्ट लेक) में भी टीएमसी को कड़ी टक्कर दे रही है. भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था इस बार विकास के दावों पर भारी पड़ते दिख रहे हैं.
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