महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में प्रशासन ने एक कदम आगे बढ़ाया है. इसके लिए बनाई गई समिति ने गुरुवार को अपनी वेबसाइट शुरू की है. इस वेबसाइट के जरिए आम लोगों और संगठनों से सुझाव मांगे गए हैं. इसमें शादी, तलाक, संपत्ति में हिस्सेदारी, दूसरी शादी और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों पर 37 सवाल पूछे गए हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिसंबर में विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने की बात कही है.
जनता से क्या-क्या सवाल पूछे गए हैं?
समिति ने लोगों से पूछा है कि क्या महाराष्ट्र में अभी यूसीसी लागू होना चाहिए? क्या ऐसा कानून बन सकता है, जिससे लोगों को अपने धर्म का पालन करने की आजादी भी बनी रहे? क्या एक जैसे नियम बनने से कानूनी झगड़े कम होंगे और मामलों का निपटारा आसान होगा? इन सवालों के जवाब देने के लिए तीन विकल्प दिए गए हैं, हां, नहीं और कोई टिप्पणी नहीं. शादी को लेकर भी कई सवाल हैं. जैसे, क्या पहले से शादीशुदा व्यक्ति को दूसरी शादी करने की इजाजत होनी चाहिए? क्या शादी में धार्मिक रीति-रिवाज और पारंपरिक तरीके पहले की तरह जारी रहने चाहिए? इसके अलावा, किन रिश्तों के बीच शादी नहीं हो सकती, इसके लिए एक जैसे नियम बनाने पर भी लोगों की राय मांगी गई है.
लिव-इन रिलेशनशिप और स्त्रीओं के अधिकारों पर भी सवाल
लिव-इन रिलेशनशिप यानी बिना शादी किए एक साथ रहने वाले जोड़ों को लेकर भी समिति ने सवाल पूछे हैं. इसमें जानना चाहा गया है कि क्या ऐसे रिश्तों का रजिस्ट्रेशन यानी प्रशासनी रिकॉर्ड में दर्ज कराना जरूरी होना चाहिए. यह भी पूछा गया है कि अगर कोई साथी दूसरे को छोड़कर चला जाए, तो क्या कानून के जरिए छोड़े गए साथी को आर्थिक मदद यानी गुजारा भत्ता और संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए? इसमें स्त्रीओं के अधिकारों पर भी ध्यान दिया गया है. इसके अलावा, दूसरी शादी, एक से ज्यादा शादी करने की प्रथा और मुस्लिम समुदाय में हलाला जैसे मुद्दों पर भी राय मांगी गई है. इन सवालों का मतलब यह नहीं है कि प्रशासन ने इन मामलों में कोई अंतिम फैसला ले लिया है.
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15 नवंबर तक दे सकते हैं अपनी राय
महाराष्ट्र में लोगों के सुझाव लेने के लिए वेबसाइट 15 नवंबर तक खुली रहेगी. लोग और संगठन अपने जवाब के साथ विस्तार से सुझाव भी दे सकते हैं. इसके अलावा, समिति राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से बातचीत करेगी और जन सुनवाई भी आयोजित करेगी. जानकारी के लिए बता दें कि समिति में पूर्व न्यायाधीश, पूर्व प्रशासनी अधिकारी, कानून विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं. सुझाव और चर्चा पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी. इसके बाद रिपोर्ट राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखी जाएगी. मंजूरी मिलने पर विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा. विधानसभा से पारित होने के बाद इसे जरूरी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिसंबर में विधेयक पेश करने की कोशिश करने की बात कह चुके हैं.
यूसीसी को लेकर दूसरे राज्यों में लोगों से क्या पूछा गया था ?
यूसीसी के लिए सबसे पहले उत्तराखंड में 2022 में समिति बनाई गई थी. वहां भी शादी, तलाक, गुजारा भत्ता, संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर लोगों से राय ली गई. गुजरात की प्रश्नावली में 13 सवाल थे, जबकि महाराष्ट्र में 37 सवाल पूछे गए हैं. दोनों राज्यों में लोगों की राय जानने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रक्रिया अपनाई गई है. फिलहाल उत्तराखंड में यूसीसी लागू है. गुजरात और असम में विधेयकों को भी राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी इस दिशा में कदम उठाए गए हैं.
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क्या है UCC?
समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का मतलब है कि शादी, तलाक, गुजारा भत्ता और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक जैसे नियम बनाए जाएं. फिलहाल इन मामलों में अलग-अलग धर्मों के अपने निजी कानून लागू होते हैं. यूसीसी लागू होने पर इन नियमों में बदलाव हो सकता है. हालांकि, महाराष्ट्र में अभी यह कानून लागू नहीं हुआ है और इसके नियमों को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है.
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