Cockroach Janta Party:जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर गिरफ्तार किए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके शनिवार (17 अक्टूबर) को रिहा हो गए. हालांकि, पार्टी के दो अन्य नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अभी न्यायिक हिरासत में हैं. दोनों की हिरासत रविवार (18 अक्टूबर) को खत्म हो रही है. ऐसे में उनकी रिहाई को लेकर उम्मीद बढ़ गई है. इस बीच दीपके ने साफ किया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. साथियों के बाहर आने के बाद संगठन आगे की रणनीति तय करेगा.
साथियों की रिहाई के बाद बनेगी नई रणनीति
अभिजीत दीपके ने कहा कि सौरव और आशुतोष के बाहर आने के बाद सभी नेता एक साथ बैठेंगे. इसके बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा. उन्होंने पिछले कुछ दिनों में हुई गिरफ्तारियों पर भी सवाल उठाए.
दीपके ने आरोप लगाया कि लोगों को हिरासत में लेकर डराने की कोशिश हो रही है. लेकिन संगठन इससे पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने कहा कि यह लंबी लड़ाई है और वे इसके लिए तैयार हैं. दीपके ने दोनों नेताओं की जल्द रिहाई की उम्मीद जताई. साथ ही बताया कि वह मामले के कुछ कानूनी पहलुओं पर चर्चा करने के लिए वृंदा मैम से मिलने जा रहे हैं.
रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर क्या लिखा?
अभिजीत दीपके को 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च में शामिल होने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था. अगले दिन उन्हें कुछ शर्तों के साथ छोड़ दिया गया. बाहर आने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर सौरव दास और आशुतोष रांका की तस्वीर साझा की. इसके साथ उन्होंने लिखा- अब बस अपने भाइयों के रिहा होने का इंतजार है. उनके इस पोस्ट के बाद संगठन के बाकी नेताओं की रिहाई पर भी चर्चा तेज हो गई.
अभिजीत दीपके को किन शर्तों पर मिली रिहाई?
शनिवार को पुलिस ने दीपके को दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया. सुनवाई के दौरान उन्हें 50 हजार रुपये का मुचलका भरने को कहा गया. इसके अलावा भविष्य में शांति भंग नहीं करने का लिखित भरोसा भी देना पड़ा. इन शर्तों को पूरा करने के बाद वह मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से बाहर आ गए.
किन धाराओं के तहत हुई थी दीपके की गिरफ्तारी
अभिजीत दीपके के खिलाफ हिंदुस्तानीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई थी. पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया था. धारा 170 के तहत पुलिस किसी संज्ञेय अपराध को होने से रोकने के लिए गिरफ्तारी कर सकती है. वहीं, धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति को शांति बनाए रखने के लिए मुचलका भरने का निर्देश दे सकता है.
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