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भारतीयों की मौत पर जयशंकर ने उठाए सवाल, तो अमेरिका ने भारत को ही दिया ज्ञान; कहा- नाकेबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं

Hormuz Blockade: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के हमले में तीन हिंदुस्तानीय नागरिकों की मौत हो गई. इस पर हिंदुस्तान ने विरोध दर्ज कराना चाहा, तो अमेरिका ने उल्टा हिंदुस्तान को ही नियम और कानून का ज्ञान देने की कोशिश की. हिंदुस्तानीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से इस मुद्दे पर अहम बात हुई. जिसके बाद अमेरिका ने कहा कि सभी कमर्शियल जहाजों का यूएस का आदेश मानना चाहिए. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ईरान के तेल की अवैध ढुलाई भी नहीं हो सकती.  

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप-प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए हालात पर विस्तार से चर्चा की. पिगॉट के अनुसार, मार्को रुबियो ने कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से अमेरिकी बल कार्रवाई कर रहे हैं और सभी वाणिज्यिक जहाजों को उनके निर्देशों का तत्काल पालन करना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा, ‘स्ट्रेट में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अमेरिकी बल काम कर रहे हैं. सभी व्यावसायिक जहाजों को तुरंत अमेरिकी निर्देशों का पालन करना चाहिए. अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.’

हिंदुस्तानीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया

इस बातचीत से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूरोप दौरे पर रहते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री से बात की. उन्होंने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान हिंदुस्तानीय नागरिकों की मौत का मुद्दा मजबूती से उठाया.

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा, ‘आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई. मैंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के खिलाफ हिंदुस्तान का कड़ा विरोध दोहराया, जिसमें तीन हिंदुस्तानीय नाविकों की जान चली गई.’ उन्होंने आगे कहा, ‘वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ इस तरह की घातक कार्रवाई किसी भी तरह उचित नहीं ठहराई जा सकती.’

ओमान के पास हमले में तीन हिंदुस्तानीयों की मौत

ओमान के निकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हिंदुस्तानीय चालक दल वाले तीन जहाज अमेरिकी हमले की चपेट में आ गए थे. पहला हमला पलाऊ के ध्वज वाले तेल टैंकर ‘मैरीवेक्स’ पर किया गया. फिर 10 जून को पलाऊ के ही ध्वज वाले टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर हमला हुआ. इनमें से एक जहाज पर कुल 24 चालक दल के सदस्य सवार थे. हमले के बाद 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन हिंदुस्तानीय नाविकों की मौत हो गई. इसके बाद  गिनी-बिसाऊ के फ्लैग वाले टैंकर ‘जलवीर’ पर गुरुवार को अटैक किया गया.  

इस घटना के बाद हिंदुस्तान प्रशासन ने अमेरिका के समक्ष औपचारिक और कड़ा विरोध दर्ज कराया. नई दिल्ली में तैनात अमेरिका के सबसे वरिष्ठ राजनयिक को भी तलब किया गया और हिंदुस्तानीय नागरिकों की मौत पर हिंदुस्तान की नाराजगी जाहिर की गई. हालांकि, अमेरिका ने अपने पक्ष में कहा कि जिस जहाज को निशाना बनाया गया, उसने अमेरिकी बलों की ओर से जारी निर्देशों का पालन नहीं किया था.

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युद्ध की कीमत चुका रहे हिंदुस्तानीय

28 फरवरी से पश्चिम एशिया में संघर्ष की शुरुआत हुई, जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने साझा हमला किया. इसके बाद ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी ने क्षेत्र में काम कर रहे हजारों विदेशी नागरिकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दीं. अब तक इस संघर्ष में कम से कम 13 हिंदुस्तानीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक हिंदुस्तानीय के अब भी लापता होने की सूचना है. शनिवार को हिंदुस्तानीय नागरिक निशांत उइर्थनाथन का ओमान के दुक्म बंदरगाह पर स्थित एमटी सेलेस्टियल जहाज पर चिकित्सा संबंधी जटिलताओं के कारण निधन हो गया.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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