सीवान से सच्चेंद्र द्विवेदी की रिपोर्ट
Bihar Panchayat Elections 2026: बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर नेतृत्वक हलचल तेज हो गई है. सीवान में भी सियासी सरगर्मी देखने को मिल रही है. गांव-गांव में संभावित उम्मीदवार चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है कि किस पंचायत की कौन-सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी. दस साल बाद होने जा रहे रोस्टर बदलाव ने दावेदारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. अब सभी की निगाहें आरक्षण सूची और निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं.
आरक्षण रोस्टर पर टिकी हजारों दावेदारों की नजर
पंचायत चुनाव 2026 को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी माहौल पूरी तरह बन चुका है. राज्य निर्वाचन आयोग और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. फिलहाल आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया जारी है, जिसके कारण संभावित उम्मीदवारों और आम लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. हर पंचायत में यह चर्चा है कि कौन-सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी और किसकी चुनावी राह आसान या मुश्किल बनेगी.

10 साल बाद बदलेगा स्पोर्ट्स
इस बार पंचायत चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव आरक्षण रोस्टर को लेकर माना जा रहा है. पिछले दस वर्षों के बाद रोस्टर में परिवर्तन होने जा रहा है, जिससे कई पंचायतों में नेतृत्वक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं. प्रशासनिक स्तर पर नए सिरे से सीटों के आरक्षण और परिसीमन को लेकर व्यापक मंथन चल रहा है. नेतृत्वक जानकारों का मानना है कि जैसे ही नया रोस्टर जारी होगा, पंचायत चुनाव की वास्तविक तस्वीर साफ हो जाएगी.

पुराने आंकड़ों से तैयार हो रहा नया फार्मूला
जानकारी के अनुसार प्रखंड और अनुमंडल स्तर पर आरक्षण रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है. वर्ष 2006 और 2016 के पंचायत आरक्षण रोस्टर को राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है. वर्ष 2016 का रोस्टर 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार हुआ था. अब दोनों रोस्टरों का तुलनात्मक अध्ययन कर नया आरक्षण फार्मूला तैयार किया जा रहा है.
प्रशासन की गाइडलाइन मिलते ही जारी होगी सूची
सूत्रों के मुताबिक राज्य प्रशासन की ओर से आरक्षण संबंधी गाइडलाइन जारी होते ही सभी प्रखंडों से आरक्षण सूची मांगी जाएगी. इसके बाद जिला प्रशासन सूची को अंतिम रूप देकर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेगा. आयोग की मंजूरी मिलने के बाद ही आरक्षण सूची आधिकारिक रूप से लागू होगी और उसी आधार पर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. यही सूची तय करेगी कि किस क्षेत्र में कौन चुनाव लड़ पाएगा.
दावा-आपत्ति नहीं किया तो बाद में नहीं मिलेगी राहत
आरक्षण और परिसीमन प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने के लिए 15 जून अंतिम तिथि निर्धारित की गई है. ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और संबंधित पक्ष सोमवार तक अपनी आपत्तियां और आवेदन आधिकारिक रूप से जमा कर सकते हैं. प्राप्त सभी आवेदनों और शिकायतों का निर्धारित समय सीमा के भीतर निपटारा किया जाएगा ताकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे.
21 जून को हो सकता है बड़ा ऐलान
चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सभी आपत्तियों के निपटारे के बाद 21 जून 2026 को अंतिम गजट प्रकाशित किया जा सकता है. फाइनल गजट जारी होते ही पंचायत चुनाव को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग जाएगा और उम्मीदवारों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी.
मतदान केंद्रों में होगा बड़ा बदलाव?
पंच, सरपंच, वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद पदों के चुनाव को लेकर मतदान केंद्रों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव की तुलना में इस बार मतदान केंद्रों और संवेदनशील भवनों की संख्या में बड़ा बदलाव संभव है. जनसंख्या वृद्धि और मतदाता सूची के पुनरीक्षण के आधार पर कई नए बूथ बनाए जा सकते हैं.
पहली बार सभी पदों पर EVM से मतदान
इस बार पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि सभी पदों के लिए मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से कराया जाएगा. राज्य में पहली बार पंचायत चुनाव पूरी तरह ईवीएम आधारित होने जा रहा है. निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं.
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