Ravan Dahan History: आज 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को देशभर में दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है. शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों के बाद आने वाला यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन कई शहरों में रामलीला का मंचन होता है और शाम को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले जलाए जाते हैं. लोग परिवार के साथ इस आयोजन को देखने पहुंचते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रावण दहन की परंपरा कब शुरू हुई और यह देशभर में इतना लोकप्रिय कैसे हुआ? आइए जानते हैं इससे जुड़ी मान्यताओं और इतिहास के बारे में.
कब शुरू हुई रावण दहन की परंपरा?
रावण दहन की परंपरा कब पहली बार शुरू हुई, इसका कोई पक्का ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. इसलिए यह कहना मुश्किल है कि इसकी शुरुआत किस साल या किस शासक के समय हुई थी. माना जाता है कि रामलीला के मंचन और स्थानीय धार्मिक आयोजनों के साथ यह परंपरा धीरे-धीरे लोगों के बीच लोकप्रिय हुई. इसमें रामलीला मंडलियों, स्थानीय रियासतों और आम लोगों की अहम भूमिका रही. समय के साथ दशहरा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामूहिक उत्सव का रूप लेने लगा. 1947 में देश के विभाजन के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचे शरणार्थी परिवारों ने भी कई जगह रामलीला और दशहरे की परंपराओं को आगे बढ़ाया. इससे सार्वजनिक रूप से रावण दहन के आयोजन को लोकप्रिय बनाने में मदद मिली. हालांकि, इसकी शुरुआत की कोई एक निश्चित तारीख बताना संभव नहीं है.
भगवान राम और रावण की क्या है कहानी?
रामायण के अनुसार, रावण लंका का राजा था. वह विद्वान और शक्तिशाली था, लेकिन उसके अहंकार ने उसे गलत रास्ते पर ला खड़ा किया. जब उसने माता सीता का अपहरण किया, तब भगवान श्रीराम ने उन्हें मुक्त कराने के लिए लंका पर चढ़ाई की. इस युद्ध में लक्ष्मण, हनुमान और वानर सेना ने भगवान राम का साथ दिया. लंबे संघर्ष के बाद श्रीराम ने रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त कराया. इसी घटना की याद में दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. यह परंपरा संदेश देती है कि अहंकार और अन्याय चाहे कितने भी ताकतवर क्यों न हों, अंत में सत्य और धर्म की जीत होती है.
ये भी पढ़ें: विजयादशमी 2026 पर राशि के अनुसार करें इन चीजों का दान, मिलेगा शुभ फल
मां दुर्गा से भी जुड़ा है विजयादशमी का महत्व
दशहरे का संबंध भगवान राम के अलावा मां दुर्गा की विजय से भी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी दुर्गा ने महिषासुर नाम के राक्षस से नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर दिया. महिषासुर के अत्याचारों से परेशान देवताओं और लोगों को उसके अंत से राहत मिली. इसी वजह से विजयादशमी को शक्ति और न्याय की जीत का प्रतीक भी माना जाता है. देश के कई हिस्सों में इस दिन मां दुर्गा की पूजा के बाद प्रतिमा विसर्जन किया जाता है. इस तरह दशहरा हमें याद दिलाता है कि बुराई के खिलाफ खड़े होने और सही रास्ते पर चलने की हमेशा जीत होती है.
The post रावण दहन कब से हुआ लोकप्रिय? जानें भगवान राम और मां दुर्गा से इसका संबंध appeared first on Naya Vichar.

