कहा जाता है कि इंसान की तकदीर में जो लिखा होता है, वह उसे ढूंढ ही लेती है. कहानी कुछ ऐसी ही है बॉलीवुड के उस मशहूर गिटारिस्ट की, जिनके हाथों में पेन और नक्शे की जगह गिटार आया और उन्होंने अपनी धुनों से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया. हम बात कर रहे हैं मशहूर संगीतकार एहसान नूरानी की, जो ‘शंकर-एहसान-लॉय’ की जादुई तिकड़ी का अहम हिस्सा हैं.
12 अक्टूबर को एहसान नूरानी के जन्मदिन पर आइए पर्दे के पीछे की उस दिलचस्प दास्तान को जानते हैं, जहां एक विज्ञापन के लिए सिर्फ 300 रुपये कमाने वाले लड़के ने बॉलीवुड के सबसे बड़े रॉकस्टार बनने का सफर तय किया.
नक्शों से गिटार तक का फासला
एहसान का परिवार आर्किटेक्चर की दुनिया से ताल्लुक रखता था. उनके पिता दिलावर नूरानी अपने दौर के बेहद नामी आर्किटेक्ट थे, जिन्होंने मुंबई की मशहूर और ऐतिहासिक ऊंची इमारत ‘उषा किरण’ को डिजाइन किया था.
वो पहली कमाई: जब जेब में आए सिर्फ 300 रुपये
हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदमों से होती है. एहसान के करियर की शुरुआत भी कुछ ऐसी ही फिल्मी थी. रेडिफ डॉट कॉम को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया था कि उनकी जिंदगी की पहली कमाई महज 300 रुपये थी. ये पैसे उन्हें पैरागॉन शूज के एक विज्ञापन में गिटार बजाने के बदले मिले थे. फिल्मों में आने से पहले उन्होंने एक सेशन गिटारिस्ट के तौर पर लंबा संघर्ष किया और स्टूडियो के हर एक राज को बहुत करीब से जाना.
जब मिले तीन यार और बन गया इतिहास (शंकर-एहसान-लॉय)
1986 में विदेश से पढ़ाई पूरी कर देश लौटने के बाद उन्होंने विज्ञापनों और फिल्मों के लिए गिटार बजाना शुरू किया. सफर आगे बढ़ा और किस्मत ने उनकी मुलाकात लॉय मेंडोंसा से कराई. और फिर साल 1996 में वह ऐतिहासिक मोड़ आया जब शंकर महादेवन, एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा ने हाथ मिलाया और जन्म लिया ‘शंकर-एहसान-लॉय’ का.
- शंकर की जादुई आवाज, लॉय का कीबोर्ड और एहसान के गिटार के तीखे सुर इस तिकड़ी ने आते ही बॉलीवुड म्यूजिक का पूरा ट्रेंड ही बदलकर रख दिया.
- साल 2001 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दिल चाहता है’ ने इस जोड़ी को रातों-रात स्टार बना दिया. इसके बाद ‘कल हो ना हो’, ‘मितवा’, ‘रॉक ऑन!!’ और ‘सेनोरिटा’ जैसे एक से बढ़कर एक गानों ने उन्हें बुलंदियों के उस आसमान पर पहुंचा दिया, जहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं होती.
जब ‘फेंडर’ गिटार ने दी एहसान को सबसे बड़ी सलामी
एहसान नूरानी का रुतबा सिर्फ एक कम्पोजर तक सीमित नहीं है, वे हिंदुस्तान के उन चुनिंदा गिटार वादकों में हैं जिन्हें दुनियाभर में पहचान मिली है. दुनिया के सबसे बड़े गिटार ब्रांड ‘फेंडर’ ने जब उनके नाम का सिग्नेचर गिटार मॉडल जारी किया, तो यह हिंदुस्तानीय संगीत जगत और हर गिटार प्रेमी के लिए गर्व का सबसे बड़ा पल बन गया.
इमारतों के नक्शों से शुरू हुआ सफर जब गिटार के तारों पर थिरका, तो उसने इतिहास रच दिया. एहसान नूरानी की यह कहानी हमें सिखाती है कि सपने चाहे कितने भी अलग रास्ते मांगें, अगर लगन सच्ची हो तो अपनी मंजिल मिल ही जाती है.
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