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सोनारपुर या रूपा-पुर? दक्षिण सोनारपुर फतह करने निकलीं ‘द्रौपदी’, जानें क्यों छप्पन भोग छोड़ मांगती हैं सिर्फ ‘अंडे की झोल’

Roopa Ganguly Sonarpur Election: पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में ग्लैमर और जुझारूपन का जब संगम होता है, तो चेहरा उभरता है, रूपा गांगुली का. 11 वर्षों से नेतृत्व में सक्रिय और हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (बीजेपी) स्त्री मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रूपा गांगुली अब एक नयी अग्निपरीक्षा से गुजर रही हैं.

राज्यसभा के बाद विधानसभा की जंग में रूपा गांगुली

राज्यसभा की सांसद (राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत) के रूप में दिल्ली की नेतृत्व का अनुभव लेने के बाद, वह अब दक्षिण सोनारपुर की जमीन पर विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि उनके खिलाफ चुनावी मैदान में तृणमूल की जो प्रत्याशी हैं, वह भी अभिनेत्री हैं. लेकिन रूपा के समर्थक डंके की चोट पर कह रहे हैं- क्या उनकी तुलना हमारी नेशनल स्टार (द्रौपदी) से हो सकती है?

सोनारपुर से है रूपा का गहरा नाता

रूपा गांगुली का सोनारपुर से रिश्ता केवल वोट का नहीं, बल्कि भावनाओं का है. रूपा की जड़ें पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) में हैं. उनके जन्म और पढ़ाई के बाद जब उनके माता-पिता ने स्थायी रूप से हिंदुस्तान आने का फैसला किया, तो रूपा ने उनके लिए सोनारपुर में ही आशियाना बनाया था.

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उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उस घर से रूपा का लगाव आज भी अटूट है. टिकट मिलने के बाद से वह इसी घर को अपना चुनावी मुख्यालय बनाकर रह रही हैं.

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Roopa Ganguly Sonarpur Election: कैलाश विजयवर्गीय का दौर और राष्ट्रीय पहचान

रूपा गांगुली का नेतृत्वक उत्थान बंगाल बीजेपी के पूर्व पर्यवेक्षक कैलाश विजयवर्गीय के समय में तेजी से हुआ. वह उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिन्हें राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था. इसके बाद बीजेपी में कई बदलाव आये, कई नेता आये और गये, लेकिन रूपा गांगुली की प्रासंगिकता और उनका रुतबा आज भी बरकरार है. वह आज भी बीजेपी के लिए बंगाल में एक बड़ा चेहरा हैं.

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अनोखी बात : स्टार जैसी चमक, फरमाइश सिर्फ ‘अंडा-भात’

रूपा गांगुली एक बड़ी सेलिब्रिटी हैं. जब वह कार्यकर्ताओं के घर जाती हैं, तो लोग उनके स्वागत में छप्पन भोग सजाना चाहते हैं. लेकिन रूपा का अंदाज बिल्कुल अलग है.

  • सादा जीवन : द्रौपदी के रूप में घर-घर में मशहूर हो चुकीं रूपा जहां भी जाती हैं, पहले ही अपना मेनू बता देती हैं. उन्हें भारी-भरकम खाना पसंद नहीं है.
  • पसंदीदा डिश : उनकी थाली में अगर ‘खिचड़ी जैसा गला हुआ भात’ और ‘अंडे की पतली झोल’ (Egg Curry) मिल जाये, तो वह सबसे ज्यादा खुश होती हैं. वह इस साधारण भोजन को परम तृप्ति के साथ खाती हैं.
  • स्पष्ट मिजाज : अगर उन्हें यह सादा खाना नहीं मिलता, तो वह अपनी नाखुशी जाहिर करने में भी कतराती नहीं हैं.

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बेबाकी के लिए जानी जाती हैं रूपा गांगुली

सियासत के गलियारों में रूपा गांगुली अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं. अब देखना यह है कि क्या सोनारपुर की जनता उनकी इस सादगी और राष्ट्रीय ख्याति पर मुहर लगाकर सोनारपुर को ‘रूपा-पुर’ बनाती है या नहीं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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