Hot News

December 5, 2025

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ये क्या हो रहा है? मोहम्मद सिराज का सेलेक्शन नहीं होने पर भड़के आकाश चोपड़ा, देखें Video

Aakash Chopra Lashed out at Selectors: हिंदुस्तान और साउथ अफ्रीका (IND vs SA) के बीच तीन मैच की वनडे सीरीज जारी है. इसी बीच टीम इंडिया ने टी20 सीरीज के लिए भी स्क्वाड का ऐलान कर दिया है. लेकिन इस टीम में फिर एक बार मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) को जगह नहीं मिली है. सिराज को चांस नहीं मिलने पर पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा (Aakash Chopra) ने बड़ा बयान दे दिया है. आकाश ने सेलेक्टर्स के उपर भी सवाल खड़ा कर दिया है. सोशल मीडिया पर अपने चैनल पर शेयर किए इस वीडियो में उन्होंने कई सवाल उठाए हैं. आइए जानते है क्या कहा आकाश चोपड़ा ने. सिराज के चयन पर बोले आकाश चोपड़ा टीम इंडिया के स्टार गेंदबाज मोहम्मद सिराज का साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले वनडे और फिर अब टी20 टीम में चयन नहीं होने से पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा काफी नाराज नजर आए. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर इस मुद्दे पर कई तीखे सवाल कर दिए हैं. उन्होंने अप्रत्यक्ष रुप से सेलेक्टर्स के सेलेक्शन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पूर्व क्रिकेटर ने अपने वीडियो में कहा कि ये मोहम्मद सिराज के साथ क्या हो रहा है आपको समझ आ रहा है… मतलब मेरी तो समझ में नहीं आ रहा है. मुझे ये भी समज नहीं आ रहा है कि ये कब हुआ की वह एक फॉर्मेंट के प्लेयर बन गए? क्योंकि जब वह टेस्ट क्रिकेट स्पोर्ट्सते हैं तो हम उनकी काफी तारीफ करते हैं. हम गुणगान करते हैं कि वाह क्या जज्बा है, क्या जोश है. ही इस एक विकेट टेकर.  इसके बाद चोपड़ा आगे कहते हैं कि वनडे क्रिकेट से कैसे गायब हो गए. इस समय वह घरेलू क्रिकेट स्पोर्ट्स रहे हैं लेकिन वनडे सीरीज का हिस्सा नहीं हैं. सभी को तब भी दुख हुआ था जब उनका नाम चैंपियंस ट्रॉफी की लिस्ट में नहीं था. क्योंकि उससे पिछले दो साल में वह हिंदुस्तान के लिए वनडे में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे. लेकिन अचानक उनका नाम नहीं था और अब भी नहीं है.  Why aren’t enough people talking about Miyaan Magic? #AakashVani pic.twitter.com/pBalG6LUYo — Aakash Chopra (@cricketaakash) December 4, 2025 हर्षित और प्रसिद्ध पर भी बोले आकाश चोपड़ा इस वीडियो में आकाश चोपड़ा ने तेज गेंदबाज हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा के स्पोर्ट्सने को लेकर भी बात कही है. चोपड़ा अपनी वीडियो में कहते हैं इस बीच हर्षित राणा स्पोर्ट्स चुके हैं, प्रसिद्ध कृष्णा स्पोर्ट्स चुके हैं लेकिन सिराज नहीं है. चलिए वनडे छोड़िए टी20 टीम में भी नहीं हैं. आगे उन्होंने कहा कि मोहम्मद सिराज ODI में नही हैं टी20 ये गायब हो चुके हैं पर ये कब हुआ? आई डोंट नो… मतलब मिजां मैजिक ऑल फॉर्मेट से सिर्फ एक फॉर्मेंट का गेंदबाज बन गया. आकाश चोपड़ा की यह वीडियो अप्रत्यक्ष रुप से सेलेक्टर्स के चयन पर बड़ा सवाल थी. उन्होंने ये सवाल कर दिया है कि आखिर मोहम्मद सिराज को क्यों टीम में जगह नहीं दी जा रही है. टी20 टीम में हार्दिक की वापसी 9 दिसंबर से हिंदुस्तान और साउथ अफ्रीका के बीच टी20 सीरीज का आगाज होगा. इसके लिए टीम इंडिया ने अपने स्क्वाड की घोषणा कर दी है. इस बार टीम में चोट से उभरकर आए हार्दिक पांड्या की वापसी हुई हैं. वहीं टीम में टी20 टीम के उप कप्तान शुभमन गिल का भी नाम है. गिल अगर अपनी गर्दन की चोट से उभर जाते हैं और मेडिकल टेस्ट पास कर लेते हैं तो वह टीम के साथ जुड़ जाएंगे और टी20 सीरीज का हिस्सा रहेंगे. इसके साथ ही टी20 में हिंदुस्तान की ओर से सूर्यकुमार यादव कप्तानी करते हुए नजर आएंगे. टी20 सीरीज के लिए हिंदुस्तान का स्क्वाड:- सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुभमन गिल (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जितेश शर्मा (विकेट कीपर), संजू सैमसन (विकेट कीपर), जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, वॉशिंगटन सुंदर. नया विचार पॉडकास्ट में रवि शास्त्री 7 दिसंबर को The post ये क्या हो रहा है? मोहम्मद सिराज का सेलेक्शन नहीं होने पर भड़के आकाश चोपड़ा, देखें Video appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Dhurandhar: कौन हैं मेजर मोहित शर्मा और चौधरी असलम खान , जिनके जीवन से प्रेरित है मूवी धुरंधर ?

Table of Contents कौन हैं मेजर मोहित शर्मा जिनके जीवन से प्रेरित है धुरंधर मूवी? कौन है चौधरी असलम खान, जिसका रोल निभा रहे हैं संजय दत्त? RAW vs ISI का क्या है सच? क्या धुरंधर मूवी सच्ची घटनाओं से प्रेरित होकर बनाई गई है? क्या धुरंधर पाकिस्तान में बेस्ड मूवी है? कौन हैं मेजर मोहित शर्मा? पाकिस्तानी बाॅलीवुड को क्या कहा जाता है? Dhurandhar : धुरंधर मूवी आज ही सिनेमा घरों में रिलीज हुई है और ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यह फिल्म बाॅलीवुड में एक नया ट्रेंड लेकर आ सकती है. बाॅलीवुड की यह काफी लंबी फिल्म है और इस फिल्म को इस साल की सबसे लंबी मूवी माना जा रहा है. फिल्म 3 घंटा 34 मिनट की बताई जा रही है. इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इस फिल्म को हिंदुस्तान और पाकिस्तान के खुफिया एजेंसी RAW vs ISI से जोड़कर देखा जा रहा है और यहां कई गुप्त ऑपरेशन भी दिखाए गए हैं, जिसकी वजह से इसमें आम लोगों की रुचि बढ़ सकती है. इस फिल्म में जिस तरह अंडरकवर ऑपरेशन को दिखाया गया है, उससे हिंदुस्तान में भी खुफिया ऑपरेशन को आधार बनाकर फिल्में बनाने का ट्रेंड शुरू हो सकता है, जैसा कि हाॅ लीवुड की फिल्मों में होता है. विवाद को अगर दरकिनार कर दें, तो इस फिल्म के दोनों किरदार हीरो रणवीर सिंह और विलेन संजय दत्त दोनों का ही किरदार दर्शकों को पसंद आ सकता है. हालांकि दोनों ही किरदार पर आपत्तियां आईं हैं और मामला कोर्ट तक भी गया है. दरअसल रणवीर सिंह जो किरदार निभा रहे हैं उसके बारे में यह कहा जा रहा है कि वह अशोक चक्र विजेता मेजर मोहित शर्मा से प्रभावित है. उनके परिजनों ने इसके विरोध में कोर्ट का रुख भी किया. हालांकि फिल्म के निर्देशक आदित्य धर का कहना है कि फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित जरूर है, लेकिन यह किसी व्यक्ति का बायोपिक नहीं है, तो आइए जानते हैं रियल लाइफ उन किरदारों को जिनके जीवन से प्रेरित होकर धुरंधर मूवी बनाई गई है. कौन हैं मेजर मोहित शर्मा जिनके जीवन से प्रेरित है धुरंधर मूवी? मेजर मोहित शर्मा हिंदुस्तानीय सेना के अधिकारी थे. वे स्पेशल फोर्स 1पैरा के अधिकारी थे. उनके बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने एक कश्मीर युवक इफ्तिकार भट्ट बनकर हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकवादी संगठन में घुसपैठ की और कई आतंकवादियों को मारा था. 2009 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ मुहिम में वे शहीद हो गए थे. उन्होंने अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है. मेजर मोहित शर्मा के बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में घुसकर कई अंडरकवर ऑपरेशन चलाए और आतंकवादियों को मारा. उनके परिजनों ने इस बात को लेकर आपत्ति जताई थी कि उनसे बिना अनुमति लिए मेजर मोहित शर्मा के जीवन पर फिल्म कैसे बनाई जा सकती है, हालांकि फिल्म के निर्देशक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह एक फिक्शन स्टोरी है, जो सच्ची घटनाओं से प्रेरित है, लेकिन इसे किसी की बाॅयोपिक नहीं कहा जा सकता है. फिल्म में रणवीर सिंह का गेटअप भी उसी तरह का है, जिस तरह का मेजर मोहित शर्मा अंडरकवर ऑपरेशन के दौरान रखते थे. विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें कौन है चौधरी असलम खान, जिसका रोल निभा रहे हैं संजय दत्त? धुरंधर मूवी में संजय दत्त धुरंधर मूवी के विलेन संजय दत्त, फिल्म में एक ऐसा कैरेक्टर निभा रहे हैं, जिसे पाकिस्तान के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट चौधरी असलम खान से प्रेरित बताया जा रहा है.फिल्म के ट्रेलर पर पाकिस्तान में भी विरोध होने की बात सामने आई है, क्योंकि असलम खान एक पुलिस अधिकारी थे और फिल्म में उनको लेकर अपमानजनक डाॅयलाॅग होने की बात कही जा रही है. चौधरी असलम खान कराची पुलिस के अधिकारी थे. जिनके बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया था और कइयों का एनकाउंटर भी किया था. असलम खान की मौत एक बम विस्फोट के दौरान हुई थी और उसके बारे में यह कहा जाता है कि वह आईएसआई का एजेंट था. RAW vs ISI का क्या है सच? RAW और ISI हिंदुस्तान और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां हैं. हिंदुस्तान और पाकिस्तान के संबंध जिस तरह के रहे हैं उसकी वजह से दोनों ही खुफिया एजेंसियां अकसर आमने-सामने आ जाती हैं. हिंदुस्तान के विभाजन के बाद पाकिस्तान का निर्माण हुआ, निर्माण के समय से ही पाकिस्तान कश्मीर पर कुदृष्टि बनाए हुए और इस कोशिश में रहता है कि किसी तरह कश्मीर को हिंदुस्तान से अलग कर दें. इसी कोशिश की वजह से पाकिस्तान, हिंदुस्तान के खिलाफ युद्ध लड़ता है, आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देता है और जासूसी करवाता है. हिंदुस्तान की सुरक्षा को लेकर राॅ हमेशा सक्रिया रहता है इसलिए उसका सामना आईएसआई के एजेंटों से होता रहता है. क्या धुरंधर मूवी सच्ची घटनाओं से प्रेरित होकर बनाई गई है? हां, 1999 के विमान हाईजैक और 2001 के संसद पर हमले से प्रेरित होकर यह फिल्म बनाई गई है. क्या धुरंधर पाकिस्तान में बेस्ड मूवी है? हां, धुरंधर मूवी को पाकिस्तान में ही दिखाया गया है, क्योंकि हीरो पाकिस्तान में ही अपने गुप्त ऑपरेशन चलाता है. कौन हैं मेजर मोहित शर्मा? मेजर मोहित शर्मा हिंदुस्तानीय सेना के अधिकारी थे, जिन्होंने कई गुप्त ऑपरेशन चलाए और 2009 में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शहीद हुए. पाकिस्तानी बाॅलीवुड को क्या कहा जाता है? पाकिस्तान में बाॅलीवुड को लाॅलीवुड कहा जाता है. ये भी पढ़ें : Viral Video 19 Minute : अगर आपने भी शेयर किया है ये कंटेंट, तो जाएंगे सीधे जेल कहां है मुगलों की शान तख्त ए ताऊस, जिसको बनाने में लगा था 1150 किलो सोना, कोहिनूर और दरिया ए नूर हीरा The post Dhurandhar: कौन हैं मेजर मोहित शर्मा और चौधरी असलम खान , जिनके जीवन से प्रेरित है मूवी धुरंधर ? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Live in Relationship : शादी की उम्र न हुई हो, तब भी ‘लिव-इन’ में रह सकते हैं बालिग, हाई कोर्ट ने कहा

Live in Relationship : राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि दो बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से ‘लिव-इन’ में रह सकते हैं भले ही अभी उनकी शादी के लिए जरूरी कानूनी उम्र न हुई हो. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी के संवैधानिक अधिकारों को इस आधार पर कम नहीं किया जा सकता. इस संबंध में न्यूज एजेंसी पीटीआई ने समाचार प्रकाशित की है. 27 अक्टूबर 2025 को ‘लिव-इन एग्रीमेंट’ किया था कपल ने समाचार के अनुसार, न्यायमूर्ति अनूप ढांड ने कोटा निवासी 18 वर्षीय स्त्री और 19 वर्षीय पुरुष द्वारा सुरक्षा के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. स्त्री और पुरुष ने कोर्ट को बताया कि वे अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं. इस आदेश की प्रति गुरुवार को उपलब्ध करवाई गई. इस कपल ने कहा कि उन्होंने 27 अक्टूबर 2025 को ‘लिव-इन एग्रीमेंट’ किया था. स्त्री के परिवार ने रिश्ते का विरोध किया याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्त्री के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी. उन्होंने कोटा पुलिस में इस बारे में शिकायत की तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. याचिका का विरोध करते हुए लोक अभियोजक विवेक चौधरी ने कहा कि चूंकि युवक की उम्र 21 साल नहीं हुई है, जो पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र है तो उसे ‘लिव-इन’ में रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. यह भी पढ़ें : Live in Relationship: लिव इन रिलेशन में रहने से पहले जानें क्या कहता है कानून हिंदुस्तानीय कानून के तहत ‘लिव-इन’ पर रोक नहीं कोर्ट ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत जीवन और निजी आजादी के अधिकार को केवल इसलिए नहीं नकारा जा सकता कि याचिकर्ताओं की शादी के लिए जरूरी कानूनी उम्र नहीं हुई है. न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह हर व्यक्ति के जीवन और आजादी की रक्षा करे. हिंदुस्तानीय कानून के तहत ‘लिव-इन’ पर रोक नहीं है और न ही इसे अपराध माना जाता है. कपल को जरूरी सुरक्षा देने का निर्देश न्यायाधीश ने भीलवाड़ा और जोधपुर (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक को याचिका में उल्लेखित तथ्यों का सत्यापन करने व जरूरत पड़ने पर कपल को जरूरी सुरक्षा देने का निर्देश दिया. The post Live in Relationship : शादी की उम्र न हुई हो, तब भी ‘लिव-इन’ में रह सकते हैं बालिग, हाई कोर्ट ने कहा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Simone Tata Death: नहीं रहीं रतन टाटा की मां, Lakme से Trent तक, सिमोन टाटा ने गढ़ी बिजनेस दुनिया में अपनी पहचान

Simone Tata Death: टाटा समूह की वरिष्ठ हस्ती और प्रसिद्ध व्यवसायी सिमोन टाटा का शुक्रवार सुबह मुंबई में 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ थीं और अगस्त में उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके निधन से हिंदुस्तानीय उद्योग जगत में गहरा शोक फैल गया है.सिमोन टाटा, रतन टाटा की सौतेली मां थीं. उन्होंने 1955 में रतन टाटा के पिता, नेवल एच. टाटा से विवाह किया था. उस समय रतन टाटा और उनके भाई जमशेद टाटा अपनी किशोरावस्था में थे. विवाह के बाद सिमोन टाटा न सिर्फ टाटा परिवार का अहम हिस्सा बनीं, बल्कि अपने शांत स्वभाव, सरल जीवनशैली और मजबूत निर्णय क्षमता के कारण रतन टाटा के जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव डालने वाली महत्वपूर्ण शख्सियत रहीं. टाटा समूह ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा “श्रीमती सिमोन टाटा, 95, का आज सुबह ब्रीच कैंडी अस्पताल, मुंबई में संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया. उन्हेंलैक्मे को हिंदुस्तान का प्रमुख कॉस्मेटिक ब्रांड बनाने और वेस्टसाइड की नींव रखने के लिए हमेशा याद किया जाएगा. उन्होंने सर रतन टाटा इंस्टिट्यूट सहित कई सामाजिक संस्थाओं के काम को दिशा दी. उनकी सकारात्मक सोच और दृढ़ निश्चय ने अनेक लोगों को गहराई से प्रभावित किया.” सिमोन टाटा कौन थीं? सिमोन टाटा का जन्म 1930 में जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में हुआ. उन्होंने जिनेवा विश्वविद्यालय से शिक्षा पूरी की और वर्ष 1953 में पहली बार हिंदुस्तान आईं. दो साल बाद 1955 में उन्होंने नेवल एच. टाटा से विवाह किया और इसी के साथ हिंदुस्तान में उनका नया जीवन और करियर शुरू हुआ. उन्होंने 1960 के दशक की शुरुआत में टाटा समूह से जुड़कर अपने कॉर्पोरेट सफर की नींव रखी. 1962 में उन्हेंलैक्मे के बोर्ड में शामिल किया गया, जो उस समय टाटा ऑयल मिल्स की सहायक कंपनी थी. उन्हें लैक्मे (Lakme) को हिंदुस्तान के शीर्ष कॉस्मेटिक्स ब्रांड में बदलने का श्रेय दिया जाता है. उनकी रणनीति और नेतृत्व ने हिंदुस्तानीय ब्यूटी उद्योग में बड़ा बदलाव लाया. Lakme की बिक्री और ट्रेंट की स्थापना 1996 में लैक्समी को हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड (अब HUL) को बेच दिया गया. इस बिक्री से मिली राशि का उपयोग टाटा समूह ने नए रिटेल उपक्रम ट्रेंट की स्थापना में किया. यही ट्रेंट आगे चलकर वेस्टसाइड जैसे प्रमुख फैशन रिटेल ब्रांड का आधार बना. सिमोन टाटा कई वर्षों तक ट्रेंट की नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन रहीं और 2006 तक इस पद पर बनी रहीं. Also Read: बिजनेस से जुड़ी समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें The post Simone Tata Death: नहीं रहीं रतन टाटा की मां, Lakme से Trent तक, सिमोन टाटा ने गढ़ी बिजनेस दुनिया में अपनी पहचान appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

India’s Slowest Train: क्या आपको पता है भारत की सबसे धीमी ट्रेन का नाम? सिर्फ 9 km तय करने में लग जाते हैं 1 घंटे

India’s Slowest Train: फास्ट स्पीड ट्रेनों के दौर में, दक्षिण हिंदुस्तान की धुंध भरी पहाड़ियों के बीच एक पुरानी लेकिन खूबसूरत ट्रेन अब भी धीरे-धीरे चलती रहती है. इतनी धीमी कि शहरों में साइकिल चलाने वाले भी इससे तेज निकल जाएं. करीब 9 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली मेट्टुपालयम–ऊटी नीलगिरि पैसेंजर देश की सबसे धीमी ट्रेन है. इसे ऊटी टॉय ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है. लेकिन यही धीमी चाल हर साल हजारों टूरिस्टों को अपनी ओर खींच लाती है. आइए जानते हैं इस ट्रेन से जुड़ी कुछ रोचक बातें.  1908 में शुरू हुई थी हिंदुस्तान की सबसे धीमी ट्रेन 1854 में इसका प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन नीलगिरि माउंटेन रेलवे (NMR) को हकीकत बनने में लगभग पांच दशक लग गए. मुश्किल पहाड़ी इलाकों और इंजीनियरिंग चुनौतियों से लड़ते हुए इसका काम 1891 में शुरू हुआ, और 1908 तक यह मीटर-गेज की सिंगल-ट्रैक लाइन तैयार हो गई. तमिलनाडु की इन नीली पहाड़ियों में बनी यह रेल लाइन मेहनत और जज्बे की एक अनोखी मिसाल है. UNESCO के Mountain Railways of India हेरिटेज समूह का हिस्सा मानी जाने वाली नीलगिरि रेलवे, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे और कालका-शिमला रेलवे की तरह ही अपनी शानदार इंजीनियरिंग और यात्रियों को मिलने वाले पुराने जमाने के रोमांस के लिए मशहूर है. लगभग 5 घंटे में पूरा करती है 46km का सफर  मेट्टुपालयम से ऊटी (उधगमंडलम) तक की 46km की यह यात्रा लगभग पांच घंटे लेती है. यानि सबसे तेज वंदे हिंदुस्तान एक्सप्रेस से करीब 18 गुना धीमी. लेकिन इसके नीले रंग के आइकॉनिक डिब्बों में सफर कर रहे यात्रियों के लिए समय जैसे थम सा जाता है, क्योंकि खिड़कियों के बाहर धुंध से ढकी घाटियां, ऊंचे नीलगिरि के जंगल और सीढ़ीनुमा ढलानें धीरे-धीरे गुजरती रहती हैं. किन-किन जगहों से गुजरती है ये ट्रेन  मैदानों से ऊपर चढ़ते हुए यह रूट तेजी से ऊंचाई पकड़ता है और कल्लर, कुनूर, वेलिंगटन, लवडेल होते हुए आखिर में ऊटी (Ootacamund) तक पहुंचता है. इस पूरी चढ़ाई के दौरान ट्रेन 208 मोड़ों से गुजरती है, 250 पुलों को पार करती है और 16 सुरंगों में घुसकर फिर बाहर निकलती है. हर पल नीलगिरि की पहाड़ियों को एक सुंदर पोस्टकार्ड जैसा बना देता है. वापसी की ढलान में उतना जोर नहीं लगता, क्योंकि रैक-एंड-पिनियन सिस्टम पर लोड कम होता है, इसलिए वापसी का सफर करीब एक घंटे तेज हो जाता है. नया विचार पॉडकास्ट में रवि शास्त्री 7 दिसंबर को यह भी पढ़ें: Auto Rickshaws में सिर्फ 3 ही टायर क्यों होते हैं? अच्छे-अच्छों को नहीं पता इसके पीछे की वजह The post India’s Slowest Train: क्या आपको पता है हिंदुस्तान की सबसे धीमी ट्रेन का नाम? सिर्फ 9 km तय करने में लग जाते हैं 1 घंटे appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

New Bridge In Bihar: बिहार में गंडक नदी पर नये पुल के लिये इतने करोड़ हुए मंजूर, न्यू ईयर से पहले बड़ा तोहफा

New Bridge In Bihar: बिहार के बेतिया में गंडक नदी पर बनने वाले पुल से जुड़ा बड़ा अपडेट आ गया है. केंद्र प्रशासन ने नई साल की शुरुआत से पहले बड़ा तोहफा देते हुए निर्माण को मंजूरी दे दी है. जिसके बाद करीब 1977 करोड़ रुपये पुल के निर्माण में खर्च किये जायेंगे. जानकारी के मुताबिक, बिहार के लिये केंद्र प्रशासन ने लगभग 4 हजार करोड़ से भी अधिक सड़क और पुल परियोजनाओं को लेकर स्वीकृति दे दी है. गुरुवार को समीक्षा बैठक में हुई ये बातचीत दरअसल, गुरुवार को गंडक एवं परिवहन मंत्रालय और एनएचएआई की परियोजनाओं को लेकर समीक्षा बैठक की गई. इस बैठक में परियोजनाओं को लेकर वर्तमान में स्थिति क्या है, जमीन अधिग्रहण की प्रगति, निर्माण सामग्रियों समेत अन्य चैलेंजेस को लेकर बातचीत हुई. साथ ही ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे से जुड़े कई परियोजनाओं को लेकर चर्चा की गई. ऐसे में इस पुल के बनने से उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच दूरी कम हो सकेगी. उत्तर प्रदेश से बिहार आसानी से जुड़ सकेगा जानकारी के मुताबिक, इस पुल को गंडक नदी के ऊपर बनाया जायेगा. यह पुल बेतिया के मनुआपुल को यूपी के कुशीनगर में तिवारीपट्टी सेवराही को जोड़ेगा. इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता में पीपीपीएसी की बैठक हुई थी. इसी बैठक में एनएच 727एए पर पुल निर्माण को लेकर मंजूरी दी गई थी. जिसके बाद अब बजट को भी मंजूर कर लिया गया है. इतनी घट जायेगी दूरी साथ ही इस पुल की कुल लंबाई 10.5 किलोमीटर होगी. नेशनल हाइवे (727एए) 29 किलोमीटर लंबा है. यह हाईवे बिहार में 27 किलोमीटर और उत्तर प्रदेश में 2 किलोमीटर है. यह पुल बन जाने के बाद बिहार के बेतिया से यूपी के गोरखपुर और कुशीनगर की दूरी कम हो जाएगी. बेतिया से गोरखपुर की दूरी अभी लगभग 160 किलोमीटर है. नया पुल बनते ही गोरखपुर की दूरी 125 और कुशीनगर की दूरी 103 किलोमीटर की जगह 73 किलोमीटर हो जाएगी. Also Read: Industries In Bihar: बिहार में औद्योगीकरण के लिये ये योजना साबित हो सकेगी गेम चेंजर, युवाओं को मिलेगा बड़ा फायदा The post New Bridge In Bihar: बिहार में गंडक नदी पर नये पुल के लिये इतने करोड़ हुए मंजूर, न्यू ईयर से पहले बड़ा तोहफा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Public Holiday: 9 और 11 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाश, जानें वजह

Public Holiday : 9 दिसंबर को केरल के तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानमथिट्टा, अलप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की और एर्नाकुलम जिलों में छुट्टी रहेगी. 11 दिसंबर की छुट्टी त्रिशूर, पलक्कड, मालप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में लागू होगी. ये छुट्टियां स्थानीय निकाय चुनावों के कारण घोषित की गई हैं. प्रशासन के आदेश के अनुसार, जिन प्रशासनी कर्मचारियों का वोट उस स्थानीय निकाय क्षेत्र (LSG क्षेत्र) में है जहां चुनाव हो रहा है. लेकिन उनकी ड्यूटी ऐसे जिले में है जहां चुनाव की छुट्टी लागू नहीं है, उन्हें चुनाव वाले दिन विशेष सुविधा दी जाएगी. ऐसे कर्मचारियों को विशेष अवकाश (लेकिन कैज़ुअल लीव, कम्यूटेड लीव और अर्न्ड लीव को छोड़कर) उनकी सुविधा के अनुसार दिया जा सकता है. इससे वे बिना किसी परेशानी के मतदान कर सकेंगे. छुट्टी मिलने के बावजूद सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन मिलेगा किसी भी व्यावसायिक, व्यापारिक, औद्योगिक या निजी क्षेत्र के संस्थान में काम करने वाले ऐसे सभी कर्मचारियों को, जो पंचायत या नगरपालिका चुनाव में वोट डालने के पात्र हैं. उन्हें चुनाव के दिन अवकाश दिया जाएगा. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस छुट्टी के कारण किसी कर्मचारी के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी. यानी, छुट्टी मिलने के बावजूद सभी कर्मचारियों को उस दिन का पूरा वेतन मिलेगा. यह व्यवस्था इसलिए है ताकि सभी लोग बिना किसी चिंता के मतदान कर सकें. सभी संस्थानों को दिया गया है खास निर्देश श्रम आयुक्त सभी निजी कंपनियों, आईटी सेक्टर, निजी औद्योगिक केंद्रों और अन्य संस्थानों के साथ मिलकर आवश्यक व्यवस्था करेंगे. दुकानदार और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत इन सभी संस्थानों को निर्देश दिया जाएगा कि चुनाव के दिन अपने सभी कर्मचारियों को सवेतन अवकाश (Paid Holiday) दें. यह भी पढ़ें : School Holiday : स्कूलों में 8 दिन लगातार छुट्टी, जानें वजह ऐसे कर्मचारियों में दैनिक वेतनभोगी या कैज़ुअल वर्कर भी शामिल हैं. उनका वोट जिस क्षेत्र में पड़ता है वहां चुनाव होने पर यदि वे किसी दूसरे क्षेत्र में स्थित उद्योग या संस्थान में काम कर रहे हों, तब भी उन्हें मतदान वाले दिन सवेतन अवकाश दिया जाना जरूरी है. The post Public Holiday: 9 और 11 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाश, जानें वजह appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Bihar News: बिहार के मुख्य सचिव से अब बिना अपॉइंटमेंट मिल सकेंगे निवेशक, हर गुरुवार होगी उद्योग वार्ता

खास बातें कई कंपनियों ने बिहार में निवेश की जतायी इच्छा टेक हब के रूप में विकसित होगा बिहार निवेशकों से सीधे संवाद का मंच बनेगी उद्योग वार्ता Bihar News: पटना. बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश माहौल को और तेज बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने गुरुवार को नयी पहल ‘उद्योग वार्ता’ की शुरुआत की. प्रशासन की यह पहल निवेशकों को सीधे शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों से जोड़ कर उनकी समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करेगी. मुख्य सचिव ने बताया कि प्रत्येक गुरुवार सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक निवेशक बिना अपॉइंटमेंट सीधे उनसे मिल सकते हैं. बैठक में उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता और ऊर्जा विभाग के सचिव मनोज कुमार सिंह भी उपस्थित रहेंगे. कई कंपनियों ने बिहार में निवेश की जतायी इच्छा अगले सप्ताह से यह बैठक पटना एयरपोर्ट के पास स्थित वायुयान संगठन निदेशालय में आयोजित होगी ताकि बाहरी निवेशकों को सुविधा मिल सके. ‘उद्योग वार्ता’ के पहले ही दिन देश-विदेश के कई बड़े निवेशकों ने बिहार में निवेश को लेकर गहरी रुचि दिखायी. इनका कहना था कि वे बिहार में औद्योगिक माहौल बनाकर पलायन की समस्या कम करने और ‘बिहार वापसी’ को सार्थक बनाना चाहते हैं. वॉशिंगटन डीसी से जुड़े टेंसर एनालिटिक्स के संस्थापक किसलय सिंह ने डेटा इंटीग्रेशन क्षेत्र में निवेश करने की इच्छा जतायी. टेक हब के रूप में विकसित होगा बिहार टाइगर एनालिटिक्स के सीइओ महेश कुमार ने यूएसए से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कहा कि एआइ की बढ़ती मांग को देखते हुए बिहार को टेक हब के रूप में विकसित किया जा सकता है. इसके अलावा एविसेज सर्विस प्रा लिमिटेड के सीइओ हर्षवर्धन कुमार, ब्रांड रणनीतिकार सचिन भारद्वाज, डालमिया सीमेंट के कॉरपोरेट मामलों के प्रमुख राजेश कुमार, मुंबई स्थित सीलिंक फायर सेफ्टी एलएलपी के सीइओ सुशील के सिंह और जेनेसिस कंपनी के गितेश विश्वास ने भी राज्य में निवेश की प्रतिबद्धता जतायी. निवेशकों से सीधे संवाद का मंच बनेगी उद्योग वार्ता मुख्य सचिव ने सभी निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार प्रशासन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि उद्योग वार्ता गंभीर निवेशकों से सीधे संवाद का मंच बनेगी. प्रशासन निवेश को बढ़ाने के लिए हर जरूरी कदम उठायेगी. यदि जरूरत पड़ी तो नीतियों में संशोधन भी तुरंत किया जायेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं बल्कि सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. प्रशासन का मानना है कि ‘उद्योग वार्ता’ राज्य को औद्योगिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इसके माध्यम से निवेशकों को त्वरित समाधान, बेहतर मार्गदर्शन और अनुकूल माहौल मिलेगा जिससे बिहार देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकेगा. Also Read: Bihar News: समस्तीपुर में बनी अगरबत्ती से सुगंधित होगा ओमान, मिथिला मखान के निर्यात पर भी चर्चा The post Bihar News: बिहार के मुख्य सचिव से अब बिना अपॉइंटमेंट मिल सकेंगे निवेशक, हर गुरुवार होगी उद्योग वार्ता appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Oats Poha Recipe: खाने में बहुत ही हेल्दी और स्वादिष्ट है ओट्स पोहा, झटपट करें तैयार

Oats Poha Recipe: आजकल के दौर में हर कोई भारी खाने की तुलना में हल्का खाना ज्यादा पसंद करता है. ऐसा कहा जाता है कि खाना जितना हल्का होता है वह उतना ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है. खासकर डेस्क जॉब करने वाले लोगों को तो अक्सर पाचन की समस्या रहती है. ऐसे में उनके लिए हल्का भोजन लाभकारी होता है. आज हम आपको एक ऐसा ही नाश्ता ओट्स पोहा रेसिपी बताने जा रहे हैं जिसे बनाना बहुत आसान है और ये स्वादिष्ट भी है. बनाने की सामग्री ओट्स – डेढ़ कप मिक्‍स सब्‍जियां – 1 या डेढ़ कप हरा धनिया – महीन कटा हींग – एक पिंच राई – आधा छोटा चम्‍मच करी पत्‍ता – 6 पत्‍तियां हरी मिर्च – 3 बारीक कटी हुई नींबू – एक नमक – स्‍वादानुसार बनाने की विधि इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में ओट्स डालकर इसे एक बार पानी से धो लें. अब इसका पानी निकल जाने दें. अब आप इस पर नमक, हल्‍दी, कटी हरी मिर्च और नींबू का रस डालें. अब आप इसे अच्छे से मिला लें. इसके बाद अब आप कढ़ाई में तेल गर्म करें. अब इसमें हींग, राई डालकर तड़का मार लें. इसके बाद आप इसमें करी पत्ता और कटी हरी सब्जियां मिक्स करें. बीच-बीच में पानी के हल्के छीटे मारें. इसे अब आप 2 मिनट तक ढककर पकाएं. अब आप इस पर मसाला ओट्स मिला लें. अब आंच कम करके और इसे पकाएं और फिर गैस बंद कर दें.   अब इसे एक प्लेट में निकाल कर ऊपर से कटा हरा धनिया और नींबू से गार्निश करें और फिर सर्व कर दें. इसे भी पढ़ें: Peanut Butter French Toast: ब्रेकफास्ट के लिए परफेक्ट है पीनट बटर फ्रेंच टोस्ट, मिनटों में हो जाएगा तैयार The post Oats Poha Recipe: खाने में बहुत ही हेल्दी और स्वादिष्ट है ओट्स पोहा, झटपट करें तैयार appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी रक्षा विभाग पर ठोका मुकदमा, डिफेंस सेक्रेटरी की इन नीतियों को दी चुनौती

The New York Times sued the Pentagon: अमेरिका के प्रमुख दैनिक ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन के खिलाफ एक अहम मुकदमा दायर किया है. इसमें रक्षा मंत्री (डिफेंस सेक्रेटरी) पीट हेगसेथ द्वारा लागू की गई नई मीडिया नीतियों को चुनौती दी गई है. इन नए नियमों के चलते मुख्यधारा की अधिकांश मीडिया संस्थाओं को पेंटागन की कवरेज से बाहर कर दिया गया है. न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि यह नीति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष प्रक्रिया से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है, क्योंकि इन नियमों से रक्षा मंत्री को यह विशेषाधिकार मिल जाता है कि वे मनमर्जी से किसी भी पत्रकार की पहुंच सीमित कर सकते हैं. पेंटागन की नई गाइडलाइंस के तहत केवल वही मीडिया संस्थान अंदर रह सकते हैं जो हेगसेथ द्वारा बनाए गए नियमों को पूरी तरह मानने को तैयार हों. जिन पत्रकारों को इन शर्तों पर आपत्ति थी, उन्होंने अक्टूबर में विरोध स्वरूप अपने ‘एक्सेस बैज’ (पेंटागन में प्रवेश का आधिकारिक कार्ड) लौटा दिए और प्रेस कक्ष से बाहर निकल गए. इसके बाद से पेंटागन प्रेस ब्रीफिंग में केवल कुछ चुनिंदा रूढ़िवादी (कंजरवेटिव) मीडिया संगठनों के प्रतिनिधि ही शामिल हो रहे हैं, जिन्होंने प्रशासनी शर्तें स्वीकार कर ली थीं. यही समूह मंगलवार को रक्षा मंत्री की प्रेस सचिव के साथ हुई ब्रीफिंग में भी शामिल था. हिंदुस्तानीय रक्षा मंत्री के साथ अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ. फोटो- एक्स क्यों हो रही हेगसेथ के नियम की आलोचना सबसे विवादित नियम यह है कि हेगसेथ द्वारा स्वीकृत न की गई किसी भी जानकारी (चाहे वह गोपनीय हो या सामान्य) की रिपोर्टिंग करने पर पत्रकार को तुरंत पेंटागन से निष्कासित किया जा सकता है. मीडिया संगठनों का कहना है कि यह व्यवस्था प्रशासन को उस रिपोर्टिंग पर नियंत्रण स्थापित करने का अवसर देती है जिसे वह नापसंद करती है या जिसे वह विवादित मानती है. न्यूयॉर्क टाइम्स और कई अन्य प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने इस नीति को स्वीकार करने से इनकार किया. इसके परिणामस्वरूप उनके पत्रकारों को न केवल पेंटागन कवरेज से बाहर होना पड़ा, बल्कि कई महत्वपूर्ण प्रेस ब्रीफिंग्स से भी दूरी बनानी पड़ी. प्रेस की स्वतंत्रता पर आघात न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रवक्ता चार्ल्स स्टैटलैंडर ने कहा कि यह नीति प्रशासन द्वारा आलोचनात्मक रिपोर्टिंग पर अंकुश लगाने की कोशिश है. यह प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रत्यक्ष आघात है. इसी आधार पर अखबार ने गुरुवार को वाशिंगटन की यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेंटागन के खिलाफ मुकदमा दायर किया. फिलहाल पेंटागन ने इस कानूनी कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की है. लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य मीडिया संगठनों का दावा है कि यह मामला अमेरिकी पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. PTI के इनपुट के साथ. ये भी पढ़ें:- पुतिन-मोदी की मुलाकात को लेकर क्या बोला ग्लोबल मीडिया? अमेरिका से लेकर चीन तक ने डिप्लोमेसी पर कहीं ये बातें नेतन्याहू ने ये क्या किया! ऐसे आदमी को मोसाद चीफ बनाया, जिसने खुफिया विभाग में कभी काम ही नहीं किया US में बैन हो शहबाज-मुनीर की एंट्री, 44 अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से की मांग, खोला पूरा कच्चा चिट्ठा   The post न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी रक्षा विभाग पर ठोका मुकदमा, डिफेंस सेक्रेटरी की इन नीतियों को दी चुनौती appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top