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May 1, 2026

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जब क्रूड था सबसे सस्ता, तब कंपनियों ने बनाया ₹1.37 लाख करोड़ का मुनाफा; अब घाटे का दावा कितना सच?

Oil Companies Profit: पिछले कुछ दिनों से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर घमासान मचा है. तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों का हवाला देकर रेट बढ़ाने का दबाव बना रही हैं. लेकिन अगर हम वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रशासनी आंकड़ों को खंगालें, तो एक बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आती है. रोज की कमाई ₹116 करोड़ प्रशासनी दस्तावेजों के मुताबिक, देश की चार दिग्गज तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 9 महीनों में ही 1.37 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ (Net Profit) कमाया. अगर इसे दिनों में बांटें, तो इन कंपनियों ने हर रोज ₹116 करोड़ की कमाई की है. यह आंकड़ा तब का है जब बाजार में कोई बड़ी हलचल नहीं थी और कंपनियां शांति से मुनाफा बटोर रही थीं. कोरोना काल के बाद सबसे सस्ता था कच्चा तेल कंपनियों के लिए पिछले साल ‘हनीमून पीरियड’ जैसा था. वित्त वर्ष 2025-26 में कच्चे तेल के औसत दाम महज 71 डॉलर प्रति बैरल रहे. यह कीमत 2020-21 के कोरोना काल के बाद का सबसे निचला स्तर है. जब कच्चा तेल सस्ता था, तब भी आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतनी राहत नहीं मिली, जितनी कंपनियों ने अपनी बैलेंस शीट सुधारने में इस्तेमाल की. क्या वाकई कंपनियां डूब रही हैं? 28 फरवरी 2026 को ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद कच्चा तेल उछलकर 126 डॉलर तक पहुंच गया. अब कंपनियां दावा कर रही हैं कि उन्हें हर दिन ₹2,400 करोड़ का नुकसान हो रहा है. पेट्रोल पर ₹14 और डीजल पर ₹18 प्रति लीटर का ‘अंडर-रिकवरी’ (घाटा) हो रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों ने जो 9 महीनों में ₹1.37 लाख करोड़ कमाए हैं, वह इस 2 महीने के युद्ध वाले घाटे को झेलने के लिए काफी है. फिर भी, कंपनियां जनता पर बोझ डालने की तैयारी में हैं. प्रशासन का ‘विंडफाल टैक्स’ बना सुरक्षा कवच प्रशासन जानती है कि कंपनियां निर्यात (Export) से मोटा पैसा कमा रही हैं. इसीलिए जब कंपनियां देश के बाहर डीजल बेचकर मुनाफा कमा रही थीं, तो प्रशासन ने विंडफाल टैक्स को ₹21.50 से बढ़ाकर ₹55.5 प्रति लीटर कर दिया. अकेले डीजल एक्सपोर्ट से प्रशासन को महीने में ₹10,500 करोड़ मिल रहे हैं. यह पैसा उस घाटे की भरपाई करता है जो प्रशासन ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर (₹12,000 करोड़ महीना) सहा था. मुनाफा कम न हो, इसके लिए कंपनियों ने अब ‘राशनिंग’ शुरू कर दी है. पंपों पर डीजल की बिक्री सीमित कर दी गई है और एक बार में 200 लीटर से ज्यादा तेल नहीं दिया जा रहा. यह कदम इंडस्ट्री को होने वाली सप्लाई रोकने के लिए है, ताकि कंपनियां रिटेल घाटे से बच सकें. Also Read: कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम 993 रुपये बढ़े, जानें घरेलू गैस सिलेंडर का हाल The post जब क्रूड था सबसे सस्ता, तब कंपनियों ने बनाया ₹1.37 लाख करोड़ का मुनाफा; अब घाटे का दावा कितना सच? appeared first on Naya Vichar.

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UPSC क्रैक करने की जिद, शादी के बाद दिव्या ने लहराया परचम

Divya Gehlawat Success Story: यूपीएससी सिविल सर्विस 2025 की परीक्षा रैंक 182 से क्रैक करने वाली दिव्या गहलावत की कहानी काफी रोचक है. उन्होंने छठे प्रायस में इस एग्जाम को क्रैक किया है. यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हर बार गिरकर खुद को फिर से संभाला और आगे बढ़ती रहीं. आइए दिव्या की यूपीएससी जर्नी (Divya Gehlawat Success Story) पर एक नजर डालते हैं. Divya Gehlawat Success Story: कौन हैं दिव्या गहलावत? दिव्या गहलावत हरियाणा के रोहतक की रहने वाली हैं और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी यहीं से हुई. उन्होंने ग्रेजुएशन साइंस स्ट्रीम से किया और इसके बाद एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक से भूगोल विषय में मास्टर्स पूरा किया. पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव सिविल सर्विस की तरफ होने लगा था. मास्टर्स के बाद उन्होंने क्लाइमेट चेंज विषय में पीएचडी शुरू की, लेकिन उनके मन में यूपीएससी क्लियर करने का लक्ष्य साफ था. लगातार मिली असफलता दिव्या ने साल 2018 में पहली बार UPSC परीक्षा दी. शुरुआत आसान नहीं रही और पहले दो प्रयासों में वह प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाईं. तीसरे प्रयास में उन्होंने मेन्स तक पहुंच बनाई, लेकिन इंटरव्यू में सेलेक्शन नहीं हो सका. इसके बाद भी हालात ज्यादा नहीं बदले और अगली दो बार फिर से प्रीलिम्स में ही रुकना पड़ा. इस दौरान कई बार निराशा भी हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. UPSC Interview देने गईं दिव्या शादी के बाद जारी रही तैयारी दिव्या की शादी साल 2024 में हो गई थी. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि शादी के बाद पढ़ाई पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है, लेकिन दिव्या ने इसे अपनी राह में रुकावट नहीं बनने दिया. उन्होंने घर की जिम्मेदारियों के साथ अपनी तैयारी को बैलेंस किया. छठे प्रयास में रैंक 192 लगातार असफलताओं के बाद भी दिव्या (Divya Gehlawat UPSC AIR 182) ने अपनी तैयारी जारी रखी. उन्होंने अपने कमजोर हिस्सों पर काम किया और पढ़ाई का तरीका बदला. आखिरकार छठे प्रयास में दिव्या की मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC परीक्षा में 182वीं रैंक हासिल कर ली. उन्हें यूपीएससी में कुल 985 मार्क्स प्राप्त हुए. इसमें उन्हें लिखित परीक्षा में 825 और इंटरव्यू में 165 मार्क्स मिले. यह भी पढ़ें: IIT बॉम्बे से BTech, UPSC में हैट्रिक, IPS बनीं सानिया सीरवी The post UPSC क्रैक करने की जिद, शादी के बाद दिव्या ने लहराया परचम appeared first on Naya Vichar.

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Motorola ने उतारे लंबी बैटरी वाले नये स्मार्टफोन्स, जानिए कीमत और सभी फीचर्स

मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट में बैटरी और परफॉर्मेंस की रेस अब और तेज हो गई है. इसी बीच Motorola ने अपने नए Moto G37 और Moto G37 Power को ग्लोबल मार्केट में पेश कर दिया है. खास बात यह है कि इन फोन्स में बड़ी बैटरी, मजबूत डिजाइन और लेटेस्ट सॉफ्टवेयर का कॉम्बिनेशन दिया गया है. Moto G37 Power खासतौर पर उन यूजर्स को टारगेट करता है, जो लंबे बैकअप वाले फोन की तलाश में हैं. बैटरी में बड़ा अपग्रेड, Power वेरिएंट बना खास Moto G37 और Moto G37 Power के बीच सबसे बड़ा फर्क बैटरी का है.Moto G37 में 5200mAh बैटरी दी गई है, जो डेली यूज के लिए पर्याप्त है. वहीं Moto G37 Power में 7000mAh की बड़ी बैटरी मिलती है, जिसे एक बार चार्ज करने पर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है.कंपनी का दावा है कि Power वेरिएंट सिंगल चार्ज पर करीब 78 घंटे तक चल सकता है. इसके साथ 30W फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है. परफॉर्मेंस और डिस्प्ले में बैलेंस दोनों स्मार्टफोन में 6nm MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो रोजमर्रा के काम और हल्की गेमिंग के लिए अच्छा माना जाता है.डिवाइस में 6.67 इंच HD+ LCD डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है. स्क्रीन ब्राइटनेस 1050 निट्स तक जाती है, जिससे आउटडोर यूज भी आसान हो जाता है.साथ ही Corning Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन दिया गया है, जो फोन को स्क्रैच से बचाता है. कैमरा और डिजाइन में दमदार फीचर्स फोटोग्राफी के लिए दोनों फोन में 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है, जो डेली फोटो और वीडियो के लिए पर्याप्त है.डिवाइस Android 16 पर चलते हैं और IP64 रेटिंग के साथ आते हैं, जिससे यह धूल और पानी के छींटों से सुरक्षित रहते हैं.इसके अलावा MIL-STD-810H सर्टिफिकेशन भी दिया गया है, जो फोन की मजबूती को बढ़ाता है. कीमत और उपलब्धता Moto G37 की कीमत 249 यूरो यानी करीब 27,000 रुपये रखी गई है. वहीं Moto G37 Power की कीमत 279 यूरो यानी करीब 31,000 रुपये है.फिलहाल इन दोनों स्मार्टफोन को जर्मनी में लॉन्च किया गया है. आने वाले समय में इन्हें अन्य बाजारों में भी पेश किया जा सकता है. क्या ये फोन आपके लिए सही हैं अगर आप ऐसा स्मार्टफोन चाहते हैं जिसमें बैटरी सबसे मजबूत हो, तो Moto G37 Power एक अच्छा विकल्प हो सकता है.वहीं बैलेंस्ड फीचर्स के लिए Moto G37 भी एक ठीक-ठाक पैकेज देता है. दोनों फोन उन यूजर्स के लिए सही हैं जो स्टेबल परफॉर्मेंस और लंबा बैकअप चाहते हैं. बैटरी और ड्यूरेबिलिटी पर खास फोकस Motorola ने अपने नए G-सीरीज स्मार्टफोन के जरिए बैटरी और ड्यूरेबिलिटी पर खास फोकस किया है.Moto G37 Power खासतौर पर लंबी बैटरी लाइफ के कारण भीड़ से अलग नजर आता है, जबकि स्टैंडर्ड वेरिएंट बैलेंस्ड एक्सपीरियंस देता है. यह भी पढ़ें: ₹15,000 में कौन सा 5G फोन लें? ये 5 ऑप्शंस हैं बेस्ट The post Motorola ने उतारे लंबी बैटरी वाले नये स्मार्टफोन्स, जानिए कीमत और सभी फीचर्स appeared first on Naya Vichar.

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Love Mocktail 3 OTT Release: कन्नड़ की सुपरहिट फिल्म अब OTT पर आने को तैयार, जानें कहां देखें पिता-बेटी की ये इमोशनल कहानी

Love Mocktail 3 OTT Release: कन्नड़ की मशहूर रोमांटिक फिल्म ‘लव मॉकटेल’ का तीसरा और आखिरी हिस्सा यानी ‘लव मॉकटेल 3’ अब घर बैठे देखने के लिए तैयार है. मेकर्स ने अनाउंस किया है कि यह फिल्म 8 मई को ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 पर रिलीज हो रही है. View this post on Instagram A post shared by ZEE5 Kannada (@zee5kannada) फिल्म की कहानी क्या है? इस बार की कहानी ‘लव मॉकटेल 2’ के कई सालों बाद की है. फिल्म में दिखाया गया है कि आदित्य अब एक अकेला पिता (Single Father) है और अपनी गोद ली हुई बेटी निधि की परवरिश कर रहा है. दोनों की जिंदगी बहुत शांति से बीत रही होती है, लेकिन तभी एक बुजुर्ग स्त्री डॉक्टर शांता की एंट्री होती है. वह दावा करती हैं कि निधि उनकी सगी पोती है. इसके बाद आदित्य और शांता के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो जाती है. आदित्य को अपनी बेटी को अपने पास रखने के लिए न केवल अदालत में लड़ना पड़ता है, बल्कि अपने अतीत के अनसुलझे पन्नों का भी सामना करना पड़ता है. यह फिल्म दिखाती है कि एक पिता अपनी बेटी को बचाने के लिए किस हद तक जा सकता है. कौन-कौन है इस फिल्म में? इस फिल्म को डार्लिंग कृष्णा ने ही लिखा और डायरेक्ट किया है. फिल्म में डार्लिंग कृष्णा के साथ मिलाना नागराज, संवृथा, अमृता अयंगर और दिलीप राज जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं. मेकर्स और कलाकारों का क्या कहना है? फिल्म के एक्टर और डायरेक्टर डार्लिंग कृष्णा ने बताया कि यह फिल्म उनके लिए बहुत खास है. उन्होंने कहा, “‘लव मॉकटेल’ मेरे लिए एक सफर की तरह है और तीसरा हिस्सा इसे बहुत ही भावुक तरीके से पूरा करता है.” कृष्णा के मुताबिक, यह फिल्म सिर्फ लड़का-लड़की के प्यार के बारे में नहीं है, बल्कि यह बच्चों को पालने की जिम्मेदारी और दूसरों की परवाह करने की हिम्मत के बारे में है. वह बहुत खुश हैं कि उनकी यह फिल्म Zee5 पर आ रही है, ताकि लोग घर बैठे आराम से इस इमोशनल कहानी को देख सकें और उन यादों को ताजा कर सकें जो इस सीरीज के साथ शुरू से जुड़ी हुई हैं. यह भी पढ़ें: Mirzapur के ‘मुन्ना भैया’ अब नहीं बनना चाहते गुंडा, दिव्येंदु बोले- अब चाहिए सीधा-साधा रोमांटिक किरदार The post Love Mocktail 3 OTT Release: कन्नड़ की सुपरहिट फिल्म अब OTT पर आने को तैयार, जानें कहां देखें पिता-बेटी की ये इमोशनल कहानी appeared first on Naya Vichar.

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भवानीपुर में स्ट्रांग रूम में आधी रात तक डटी रहीं ममता बनर्जी, बोलीं- जनता का वोट लूटा तो खैर नहीं, सुरक्षा बल अलर्ट

खास बातें हाई-वोल्टेज ड्रामा, रात 2 बजे तक जमी रहीं मुख्यमंत्री शुक्रवार सुबह छावनी में तब्दील हुए मतगणना केंद्र 4 मई का इंतजार, नर्वस हैं नेतृत्वक दल Mamata Banerjee Bhabanipur: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले राज्य में सरगर्मी चरम पर है. कोलकाता समेत सभी जिलों में मतगणना केंद्रों के अंदर और बाहर सुरक्षा बलों ने लोहे का घेरा तैयार कर दिया है. इस बीच, दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर स्थित शेखावत मेमोरियल स्कूल (मतगणना केंद्र) में गुरुवार देर रात उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गयी, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गयीं. ईवीएम में संभावित गड़बड़ी की शिकायतों के बाद दीदी ने करीब 4 घंटे वहां बिताये और चुनाव आयोग को चेतावनी दी कि मतगणना में किसी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जायेगी. हाई-वोल्टेज ड्रामा, रात 2 बजे तक जमी रहीं मुख्यमंत्री मतदान के बाद ईवीएम मशीनों को सुरक्षित रखने के लिए बनाये गये स्ट्रांग रूम की सुरक्षा का जायजा लेने ममता बनर्जी अचानक भवानीपुर पहुंची थीं. उन्होंने काउंटिंग सेंटर के बाहर पत्रकारों से कहा- लोकतंत्र में पारदर्शिता सबसे जरूरी है. जनता के एक-एक वोट की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है. मुझे गड़बड़ी की कुछ शिकायतें मिली थीं, इसलिए मैं तुरंत यहां पहुंची. उन्होंने कहा कि 4 मई को होने वाली मतगणना के दौरान यदि किसी ने जनादेश से खिलवाड़ करने की कोशिश की, तो उसके परिणाम गंभीर होंगे. Mamata Banerjee Bhabanipur: शुक्रवार सुबह छावनी में तब्दील हुए मतगणना केंद्र देर रात के हंगामे के बाद शुक्रवार सुबह भवानीपुर और राज्य के अन्य केंद्रों पर स्थिति शांतिपूर्ण रही. केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस के जवानों ने स्ट्रांग रूम के चारों ओर ‘थ्री-लेयर’ सुरक्षा घेरा बना रखा है. चप्पे-चप्पे पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिये मशीनों की निगरानी की जा रही है. किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को केंद्र के 100 मीटर के दायरे में फटकने की अनुमति नहीं है. चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार विभिन्न केंद्रों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट कर रहे हैं. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 4 मई का इंतजार, नर्वस हैं नेतृत्वक दल करीब ढाई दशक बाद दो चरणों में संपन्न हुए मतदान के बाद अब सबकी निगाहें सोमवार (4 मई) पर टिकी हैं. ममता बनर्जी के इस औचक दौरे ने यह साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस मतगणना के एक-एक राउंड पर बाज जैसी नजर रखने वाली है. पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को भी स्ट्रांग रूम के बाहर पहरा देने और सजग रहने के निर्देश दिये हैं. इसे भी पढ़ें बंगाल के ‘सिंहासन’ पर कौन बैठेगा? ये 7 फैक्टर तय करेंगे चुनाव परिणाम, पढ़ें पूरा विश्लेषण बंगाल चुनाव के Exit Poll पर कितना करें भरोसा? 2021 में दिग्गज एजेंसियां हो गयी थी फेल, जानें 2011 और 2016 में किसका गणित था सबसे सटीक बंगाल चुनाव 2026: दक्षिण बंगाल की 142 सीटों पर महामुकाबला, भवानीपुर में ममता-शुभेंदु की प्रतिष्ठा दांव पर कोलकाता, 24 परगना और हावड़ा की 91 सीटों से तय होगा ‘नबान्न का नवाब’, क्या दीदी का किला ढाह पायेगी भाजपा? The post भवानीपुर में स्ट्रांग रूम में आधी रात तक डटी रहीं ममता बनर्जी, बोलीं- जनता का वोट लूटा तो खैर नहीं, सुरक्षा बल अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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भारत की हवाई सुरक्षा का ‘सुदर्शन चक्र’ है एस 400

हिंदुस्तान को रूस से एक दीर्घकालीन समझौते के तहत मिलने वाली एस 400 एयर डिफेंस सिस्टम की पांच स्क्वाड्रन (इकाइयों) में से चौथी इकाई इसी महीने (मई, 2026 में) हिंदुस्तान पहुंचने वाली है. सुदर्शन चक्र के हिंदुस्तानीय नाम से जाने जाने वाले इस सिस्टम की पांच इकाइयों के लिए 2018 में रूस के साथ पांच सौ करोड़ डॉलर मूल्य का समझौता हुआ था. गत वर्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस प्रणाली ने कम से कम पांच पाकिस्तानी जेट लड़ाकू विमानों को गिराकर और संभवतः एक एयरबॉर्न इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस विमान को तीन सौ किलोमीटर दूरी पर उड़ते हुए मार गिराकर शानदार सफलता प्राप्त की थी. छह सौ किलोमीटर की दूरी तक मार करने की क्षमता वाली इस प्रणाली की चौथी इकाई की स्थापना और उपयोग राजस्थान-पाकिस्तान सीमा पर किया जायेगा. हिंदुस्तान अब एक नये समझौते के अंतर्गत कई और ऐसे सिस्टम आयात करने के साथ ही इसके विकसित संस्करण एस 500 के आयात की योजना भी बना रहा है. इतनी विकसित रक्षा प्रणालियां भारी खर्च के बिना नहीं मिलतीं. वर्ष 2026-27 के लिए हिंदुस्तान का रक्षा बजट लगभग 7.86 लाख करोड़ रुपये होगा जो वर्तमान में जीडीपी का लगभग दो प्रतिशत है. हिंदुस्तान ने 2026-27 के लिए अनुमोदित राशि में से 2.19 लाख करोड़ रुपये सेनाओं के आधुनिकीकरण पर खर्च किये जाने का प्रावधान रखा है. क्या यह खर्च विकास की कीमत पर किया जायेगा? एस 400 मिसाइल प्रणाली और परमाणु पनडुब्बियों (एसएसबीएन) जैसे बड़े निवेश ‘विकास बनाम सुरक्षा’ की बहस का हिस्सा रहे हैं. पर विश्वभर में चल रहे कई युद्ध याद दिलाने के लिए काफी हैं कि रणनीतिक सुरक्षा ही विकास की नींव होती है. यह भी समझना जरूरी है कि पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में रक्षा के लिए आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा घरेलू उद्योगों से खरीद में खर्च होता है. इसी से देश के भीतर रोजगार और तकनीक का विकास होता है. दिलचस्प तथ्य यह है कि कुल प्रशासनी खर्च में रक्षा का हिस्सा पिछले दशक में 17 प्रतिशत से गिरकर लगभग 14.6 प्रतिशत पर आ गया है. युद्ध का इतिहास गवाह है कि जब कोई तकनीक बहुत महंगी और दुर्लभ हो जाती है, तो उसे एक सस्ती और बड़े पैमाने पर उत्पादित तकनीक चुनौती देती है. युद्ध केवल जीतना काफी नहीं है, उसकी लागत भी मायने रखती है. एक एक करोड़ रुपये की मिसाइल या 500 करोड़ रुपये का फाइटर जेट छोटे-मोटे सीमा विवादों में इस्तेमाल नहीं किये जा सकते. इसलिए, दुर्गा जैसे लेजर हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स का उत्पादन वित्तीय रूप से अधिक समझदारी भरा है. हिंदुस्तान में तेजस फाइटर जेट के विकसित संस्करणों के उत्पादन में जीई इंजन की ढीली सप्लाई के कारण बहुत धीमी रफ्तार से हो रहे काम ने सिद्ध कर दिया है कि विदेशी हथियारों के साथ हमेशा डिलीवरी और ब्लैकमेल का जोखिम रहता है. सौभाग्य से, ब्रह्मोस के निर्माण में हिंदुस्तान का नियंत्रण बहुत अधिक है. राफेल फाइटर जेट विमानों का बहुत बड़ा सौदा उसके निर्माता डसाल्ट एविएशन और फ्रांस प्रशासन की इन लड़ाकू विमानों की सारी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली और आक्रामक सिस्टम की पूरी जानकारी देने में आनाकानी करने के कारण खटाई में पड़ता दिख रहा है. उसकी जगह रूसी एसयू 57 भी सस्ता सौदा तभी होगा, जब भविष्य में हिंदुस्तान में उसके निर्माण और निर्यात की अनुमति मिल जाये. पर ड्रोन तकनीक में हिंदुस्तान के पास हजारों छोटे स्टार्टअप्स हैं, जिन्हें किसी अमेरिकी या फ्रांसीसी कंपनी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है. यह ‘आत्मनिर्भरता’ युद्ध के समय सबसे बड़ा हथियार साबित होगी. भविष्य में एक अकेला फाइटर जेट नहीं, बल्कि सैकड़ों छोटे ड्रोन का एक टिड्डी दल जैसा झुंड हमला करेगा, जिन्हें एक रडार या एक मिसाइल सिस्टम एक साथ नहीं रोक सकता. एस 400 सिस्टम के मिसाइलों की मारक क्षमता और ड्रोनों की संख्यात्मक शक्ति का मेल किसी भी देश की सीमा को भेदने के लिए पर्याप्त है. इसका प्रमाण है इस्राइल के अभेद्य माने जाने वाले आयरन डोम को धता बताकर ईरान के मिसाइलों का तेल अवीव तक हमला कर पाना. भविष्य के आकाशीय युद्ध का एक दिलचस्प पहलू ‘लॉयल विंगमैन’ प्रोजेक्ट है, जिस पर कई विकसित देश काम कर रहे हैं. इसमें एक पायलट वाला फाइटर जेट होगा, जिसके साथ 10-12 मानवरहित ड्रोन उड़ेंगे. डीआरडीओ अब दुर्गा 2 जैसी लेजर तकनीक अस्त्रों पर काम कर रहा है, जो कम खर्च में शत्रु ड्रोन को गिरा सकेंगे. इन तथ्यों के आधार पर यही निष्कर्ष निकलता है कि हिंदुस्तान को अब महंगे प्लेटफॉर्म्स (जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर या जेट्स) से हटकर सटीक और सस्ते वेपंस (मिसाइल, ड्रोन और साइबर) की ओर बजट का रुख करना चाहिए. हिंदुस्तान ने हाल ही में बड़ी संख्या में आत्मघाती ड्रोन के लिए अनुबंध किये हैं. ‘आइडीइएक्स’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदुस्तानीय स्टार्टअप्स को सस्ते और प्रभावी ड्रोन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. पर हिंदुस्तान को अपनी विशाल भौगोलिक स्थिति और चीन जैसी बड़ी वायुसेना का मुकाबला करने के लिए महंगे इंटरसेप्टर (एस 400) और सस्ते ड्रोन, दोनों के संतुलन की आवश्यकता है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post हिंदुस्तान की हवाई सुरक्षा का ‘सुदर्शन चक्र’ है एस 400 appeared first on Naya Vichar.

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श्मशान में आये एक फोन ने बदल दी किस्मत, हाथ पर ‘चे ग्वेरा’ और दिल में ‘राम’, जानें बीजेपी विधायक शंकर घोष की अनसुनी कहानी

खास बातें श्मशान घाट, जलती चिता और एक लाइफ चेंजिंग कॉल गुरु को हराया, अब मेयर से मुकाबला शंकर घोष की शख्सीयत का विरोधाभास Shankar Ghosh Biography: नेतृत्व में रातों-रात तकदीर बदलने की कहानियां तो बहुत हैं, लेकिन शंकर घोष का किस्सा किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं है. कभी उत्तर बंगाल में वामपंथी नेतृत्व (CPM) का चमकता चेहरा रहे शंकर घोष आज बीजेपी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में से एक हैं. 51 वर्षीय शंकर घोष ने न केवल अपनी विचारधारा बदली, बल्कि अपने नेतृत्वक गुरु को हराकर यह साबित कर दिया कि वह उत्तर बंगाल की सियासत के नये ‘चाणक्य’ हैं. 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में वह एक बार फिर सिलीगुड़ी की पिच पर बड़ी लड़ाई के लिए तैयार हैं. श्मशान घाट, जलती चिता और एक लाइफ चेंजिंग कॉल शंकर घोष के ‘वाम’ से ‘राम’ होने की कहानी बड़ी नाटकीय है. दो बिंदुओं में उस पूरी कहानी को समझिये. अंतिम संस्कार के बीच फैसला : 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, शंकर घोष एक सीपीएम कार्यकर्ता के शवदाह के लिए श्मशान घाट पर थे. वह चिता की आग के सामने खड़े थे, तभी उनके पास दार्जिलिंग के बीजेपी सांसद राजू बिष्ट का फोन आया. विचारधारा का अंत : कहा जाता है कि उस एक फोन कॉल ने शंकर के मन में चल रहे अंतर्द्वंद्व को खत्म कर दिया. उन्होंने अपनी बरसों पुरानी मार्क्सवादी विचारधारा को श्मशान की उसी ‘विद्युत भट्ठी’ में छोड़ दिया और हिंदुत्व की राह चुन ली. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें गुरु को हराया, अब मेयर से मुकाबला 2021 के विधानसभा चुनाव में शंकर घोष ने वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद कम ही लोगों को थी. उन्होंने अपने नेतृत्वक गुरु और सिलीगुड़ी के दिग्गज वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य को पटखनी दी और पहली बार विधायक बने. विधानसभा में वाकपटुता और तर्कों के कारण वह नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के ‘दाहिने हाथ’ बन गये. उन्हें बीजेपी विधायक दल का मुख्य सचेतक (Chief Whip) बनाया गया. इस बार उनका मुकाबला सिलीगुड़ी के मेयर और कद्दावर नेता गौतम देव से है, जो इस लड़ाई को और भी हाई-प्रोफाइल बना रहा है. इसे भी पढ़ें : सोनारपुर या रूपा-पुर? दक्षिण सोनारपुर फतह करने निकलीं ‘द्रौपदी’, जानें क्यों छप्पन भोग छोड़ मांगती हैं सिर्फ ‘अंडे की झोल’ Shankar Ghosh Biography: शंकर घोष की शख्सीयत का विरोधाभास शंकर घोष की शख्सीयत में एक विरोधाभास आज भी जिंदा है, जो उनके शरीर पर अंकित है. शंकर घोष कभी क्रांतिकारी चे ग्वेरा के इतने बड़े प्रशंसक थे कि उन्होंने अपनी बायीं बांह पर उनका टैटू बनवा लिया था. आज झंडा लाल से भगवा हो गया, प्रतीक बदल गये, मंत्र भी बदल गये. लेकिन शंकर ने अपने हाथ से ‘चे ग्वेरा’ का वह टैटू नहीं हटाया. वह अपने शरीर पर इस अतीत को आज भी ढो रहे हैं, भले ही उनकी आत्मा अब हिंदुत्व में रमी हो. इसे भी पढ़ें : मौसम की तरह बदली सियासत, विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा जाने वाली इकलौती नेता, कांग्रेस में वापसी का क्या है स्पोर्ट्स? विधानसभा सत्र के दौरान हमेशा धोती-कुर्ता पहने नजर आने वाले शंकर घोष बीजेपी के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जो रणनीति बनाने में माहिर माने जाते हैं. अब देखना यह है कि सिलीगुड़ी की जनता उनके इस ‘बदलाव’ पर दोबारा मुहर लगाती है या नहीं. इसे भी पढ़ें ममता बनर्जी को लड़ाई, लड़ाई, लड़ाई चाई : नंदीग्राम की हार के बाद भवानीपुर में ‘फाटाफाटी स्पोर्ट्सा’, 60 हजार का टार्गेट शुभेंदु अधिकारी का ‘हिंदुत्व’ अवतार : श्रीखोल बजाकर संकीर्तन और 500 किमी का सफर, 35 साल तक नहीं देखी फिल्म कटवा में ‘लाल गढ़’ पर दीदी का कब्जा, क्या युवा और किसान बिगाड़ेंगे स्पोर्ट्स? जानें अजय-हुगली के संगम का सियासी मिजाज कोलकाता, 24 परगना और हावड़ा की 91 सीटों से तय होगा ‘नबान्न का नवाब’, क्या दीदी का किला ढाह पायेगी भाजपा? The post श्मशान में आये एक फोन ने बदल दी किस्मत, हाथ पर ‘चे ग्वेरा’ और दिल में ‘राम’, जानें बीजेपी विधायक शंकर घोष की अनसुनी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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हाई हील्स और झुमकों का फैशन नहीं चलेगा, NEET परीक्षा के लिए NTA ने दिए सख्त आदेश 

NEET Exam Guidelines: नीट यूजी परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की जाएगी. इस परीक्षा को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने दिशा -निर्देश जारी किए हैं. NTA ने खासकर ड्रेस कोड को लेकर एक नोटिस जारी किया है. एनटीई ने साफ कर दिया है कि सभी कैंडिडेट्स को सिंपल कपड़े पहनकर आना होगा. एग्जाम सेंटर पर किसी भी तरह की आभूषण प्रतिबंधित है.  NTA ने जारी किया नोटिस NTA ने अपने X पर एक नोटिस के जरिए नीट अभ्यर्थी को बताया कि एग्जाम सेंटर पर कौन-कौन सी चीजें बैन है. नीट ने एक पोस्टर जारी किया है, जिसमें तस्वीरों और इंसट्रक्शन के सहारे बताया गया है कि किस तरह के कपड़े बैन हैं.  NEET UG 2026 is on 03 May 2026.Follow the dress code and carry only permitted items for a smooth entry.Report early and stay calm on exam day.#NTA #NTAUpdate #NTAExams #NEETUG2026 #ExamDayGuidelines pic.twitter.com/ooNgaTm7zW — National Testing Agency (@NTA_Exams) April 30, 2026 NEET UG 2026: जारी गाइडलाइंस के अनुसार, क्या-क्या बैन है?  फुल स्लीव या वुलेन कपड़े बैन हैं (अगर किसी परिस्थिति में जरूरी है तो पहले से रिपोर्ट करना होगा)  किसी भी तरह के धार्मिक कपड़े जैसे कि पगड़ी, हिजाब पहनने की अनुमति है  ट्रांसपेरेंट बोतल लाने की अनुमति है  पैरों में चप्पल या कम हील वाली सैंडल पहन सकते हैं. जूते पहनने की अनुमति नहीं है  NEET UG Do’s and Don’t: क्या करें और क्या न करें  क्या करें (Do’s) क्या न करें (Don’ts) ट्रांसपेरेंट पानी की बोतल ला सकते हैं महंगे या भारी आभूषण पहनकर न जाएं सिंपल और हल्के कपड़े पहनें हाई हील्स या मोटे सोल वाली सैंडल न पहनें एडमिट कार्ड और जरूरी डॉक्यूमेंट साथ रखें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स (मोबाइल, स्मार्टवॉच) न ले जाएं समय से पहले एग्जाम सेंटर पहुंचें देरी से पहुंचने की गलती न करें केवल जरूरी स्टेशनरी (जैसे पेन) रखें बैग, नोट्स या किताबें सेंटर में न ले जाएं एग्जाम सेंटर पर सही समय पर पहुंचें इसी के साथ NTA ने सभी स्टूडेंट्स को सलाह दी है कि एग्जाम सेंटर पर मौजूद सभी स्टाफ से अच्छे से पेश आएं और कॉर्डिनेट करें. एग्जाम सेंटर पर सही समय में पहुंचें. लेट से आने वालों को परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा. NTA ने कहा कि नीट परीक्षा के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है. हमें मिलकर इस परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है. यह भी पढ़ें- MP PAT के लिए एडमिट कार्ड जारी, 8 मई को होगी परीक्षा The post हाई हील्स और झुमकों का फैशन नहीं चलेगा, NEET परीक्षा के लिए NTA ने दिए सख्त आदेश  appeared first on Naya Vichar.

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Mirzapur के ‘मुन्ना भैया’ अब नहीं बनना चाहते गुंडा, दिव्येंदु बोले- अब चाहिए सीधा-साधा रोमांटिक किरदार

‘मिर्जापुर’ में मुन्ना भैया का रोल करने के बाद दिव्येंदु की इमेज एक ‘गुस्से वाले आदमी’ की बन गई है. इस वजह से उन्हें बार-बार वैसे ही रोल मिल रहे हैं. लेकिन अब दिव्येंदु इस इमेज को तोड़ना चाहते हैं. हाल ही में उन्होंने बताया कि वह अब पर्दे पर एक लवर बॉय बनना चाहते हैं. वह अब मार-धाड़ से दूर रोमांस करना चाहते हैं. गुस्सा छोड़ अब प्यार करेंगे दिव्येंदु शर्मा दिव्येंदु ने न्यूज 18 को दिए एक लेटेस्ट इंटरव्यू में कहा कि वह अब कोई रोमांटिक कॉमेडी फिल्म करना चाहते हैं, जैसे हॉलीवुड की फिल्म ’50 First Dates’ थी. वह चाहते हैं कि वह एक ऐसा किरदार निभाएं जो बहुत सीधा-साधा और प्यारा हो, न कि ऐसा जो अंदर ही अंदर गुस्से में जल रहा हो. इसी बीच उनके दोस्त और एक्टर पुलकित सम्राट ने मजाक में कहा कि “तेरे पास जो गुस्से वाले रोल आ रहे हैं वो मुझे भेज दे और मेरे पास जो प्यार वाले रोल हैं वो तू रख ले.” मिर्जापुर फिल्म पर बड़ी अपडेट फैंस लंबे समय से ‘मिर्जापुर’ फिल्म का इंतजार कर रहे हैं. इस पर दिव्येंदु ने बताया कि यह फिल्म बहुत बड़ी होने वाली है. उन्होंने कहा कि इसकी शूटिंग में बहुत मजा आया और यह पूरी तरह से ‘पैसा वसूल’ फिल्म होगी. उन्होंने ज्यादा जानकारी तो नहीं दी, लेकिन इतना जरूर कहा कि जो भी उन्होंने शूट किया है वह बहुत शानदार है. नई सीरीज ‘ग्लोरी’ की कहानी दिव्येंदु की नई सीरीज ‘ग्लोरी’ हरियाणा के बॉक्सिंग की दुनिया पर आधारित है. इसमें दो भाइयों की कहानी दिखाई गई है जो अपने परिवार के साथ हुए अन्याय का बदला लेना चाहते हैं. यह सीरीज दिखाती है कि कैसे वे अपनी इज्जत वापस पाने के लिए लड़ते हैं. अगर आप ‘ग्लोरी’ देखना चाहते हैं तो यह आज 1 मई से नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है. यह भी पढ़ें: Moondram Pirai OTT Release: 44 साल बाद OTT पर आई कमल हासन-श्रीदेवी की सुपरहिट फिल्म, जानें कहां देखें The post Mirzapur के ‘मुन्ना भैया’ अब नहीं बनना चाहते गुंडा, दिव्येंदु बोले- अब चाहिए सीधा-साधा रोमांटिक किरदार appeared first on Naya Vichar.

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पटना में फूलों से सजाया जा रहा 7 सर्कुलर रोड आवास, आज ही शिफ्ट हो सकते हैं नीतीश कुमार

Nitish Kumar: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आवास बदलने वाला है. संभावना जताई जा रही है कि आज ही वे अपने नये आवास 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो सकते हैं. इससे पहले आवास को सजाने के लिए फूलों की माला लाई गई है. ऐसे में लगभग 20 सालों तक बिहार की सत्ता का केंद्र रहा ‘1 अणे मार्ग’ स्थित सीएम आवास अब खाली होने वाला है. नीतीश कुमार कर चुके हैं निरीक्षण जानकारी के मुताबिक, कई बार नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड आवास में चल रहे कार्यों का निरीक्षण करने जा चुके हैं. इसके अलावा आज (शुक्रवार) की सुबह भी ट्रैक्टर से सामान ढोए गए. इस दौरान गमला, चेयर, कपड़ा स्टैंड, फोल्डिंग आइटम समेत कई सामानों को ढोया गया. इससे पहले भी सामान 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट किए गए थे. खुद की देखरेख में नीतीश कुमार ने बनवाया था बंगला बताया जा रहा है कि सीएम नीतीश कुमार ने खुद की देखरेख में ही बंगले को बनवाया था. 2014 में लोकसभा चुनाव में जब हार हुई थी, तब उन्होंने सीएम पद छोड़ दिया था. उस वक्त जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था. इस दौरान सीएम नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड में रह रहे थे. लेकिन एक बार फिर वे मुख्यमंत्री बने और 1 अणे मार्ग में शिफ्ट हुए. लेकिन अब राज्यसभा सांसद बनने के बाद 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होने वाले हैं. कैसा है नीतीश कुमार नया बंगला? जानकारी के मुताबिक, 7 सर्कुलर रोड पटना के वीआईपी और हाई सिक्योरिटी जोन में आता है. यहां चारों तरफ ऊंची दीवारें हैं और एंट्री गेट पर सुरक्षाकर्मी मौजूद होते हैं. हर जगह CCTV कैमरे लगे हैं, पुलिस और विशेष सुरक्षा बल की तैनाती है. आवास में आने वाले लोगों के लिए अलग चेकिंग गेट हैं. नीतीश कुमार जैसे वरिष्ठ नेता के लिए सुरक्षा कड़ी रखी जाएगी. परिसर का हर कोना निगरानी में रहेगा. इसके साथ ही यह बंगला बड़ा और शानदार है. मुख्य भवन के सामने और पीछे लॉन फैला हुआ है. लॉन के बीच तालाब जैसा स्थान है, जहां छठ पूजा के समय अर्घ्य दिया जाता है. बंगले के चारों ओर पेड़-पौधे और हरियाली से घिरा शांत वातावरण है. अलग गार्डन और वॉकिंग एरिया भी मौजूद है. नीतीश कुमार को सादगी और हरियाली पसंद है. इसलिए यह परिसर उनके जीवनशैली के अनुरूप है. Also Read: मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेन का DPR तैयार, 3000 करोड़ की लागत से बनेगा रोड, NHAI ने भेजी रिपोर्ट The post पटना में फूलों से सजाया जा रहा 7 सर्कुलर रोड आवास, आज ही शिफ्ट हो सकते हैं नीतीश कुमार appeared first on Naya Vichar.

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