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June 10, 2026

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UPSC प्रीलिम्स में हुआ सेलेक्शन तो जरूर कर लें 6 काम, 24 घंटे का एक्शन प्लान 

UPSC CSE Prelims Result 2026: 24 मई को यूपीएससी प्रीलिम्स की परीक्षा हुई. इस परीक्षा में शामिल होने वाले कैंडिडेट्स को अब रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार है. रिजल्ट से पहले मन में कई तरह के सवाल होते हैं, जैसे कि रिजल्ट के बाद क्या करें, मेन्स के लिए कैसे सेलेक्ट होंगे आदि. आइए, जानते हैं इनके जवाब. रिजल्ट के बाद अगले 24 घंटे में क्या करें? रिजल्ट जारी होने के बाद के 24 घंटे सभी कैंडिडेट्स के लिए काफी अहम होते हैं. रिजल्ट्स के अनुसार, आप आगे की प्लानिंग करते हैं. अगर पीडीएफ में आपका नाम है तो मेन्स की तैयारी में जुट जाते हैं. प्रीलिम्स में सेलेक्शन ने होने की स्थिति में दोबारा से परीक्षा की तैयारी करते हैं. UPSC मेन्स की तैयारी के लिए क्या-क्या करें? अगर आपका सेलेक्शन UPSC CSE प्रीलिम्स परीक्षा में हो जाता है तो आप आगे की तैयारी के लिए खुद को तैयार करें. सबसे पहले टाइमटेबल बनाएं अगर आपका सेलेक्शन हो गया तो सबसे पहले टाइमटेबल बनाएं. हर विषय और टॉपिक को समय दें. टाइम टेबल में शॉर्ट गैप भी रखें. अखबार और मैग्जीन पढ़ें. लिखित परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक, अखबार पढ़ना काफी काम आता है. ऑप्शनल सब्जेक्ट पर फोकस बढ़ाएं मुख्य परीक्षा के Optional Subject का गहन रिवीजन करें और महत्वपूर्ण टॉपिक्स के शॉर्ट नोट्स तैयार करें. यह समय ऑप्शनल को मजबूत करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. GS-4 और निबंध की तैयारी शुरू करें एथिक्स (GS-4) और Essay पेपर पर विशेष ध्यान दें. ये दोनों पेपर मेन्स में बेहतर स्कोर दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं. DAF-1 फॉर्म सावधानी से भरें प्रीलिम्स पास करने के बाद Detailed Application Form (DAF-1) भरना होता है. इसमें हॉबी, एजुकेशनल बैकग्राउंड और अन्य जानकारियां सोच-समझकर डालें, क्योंकि इंटरव्यू के दौरान इन्हीं से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं. आंसर प्रैक्टिस करें मेन्स में सफलता के लिए Answer Writing बेहद जरूरी है. इसे अपनी डेली रूटीन में शामिल करें. डेली लॉन्ग आंसर प्रैक्टिस करें, टेस्ट सीरीज ज्वॉइन करें और समय सीमा के भीतर आंसर लिखने की आदत डालें. यह भी पढ़ें- UPSC मेन्स के लिए जरूरी है DAF फॉर्म, अगस्त की परीक्षा के लिए अभी से कमर कस लें The post UPSC प्रीलिम्स में हुआ सेलेक्शन तो जरूर कर लें 6 काम, 24 घंटे का एक्शन प्लान  appeared first on Naya Vichar.

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पिता लेखपाल, बेटे ने UPSC में लहराया परचम, हासिल की AIR 438

UPSC Success Story: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले आकाश कुमार ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है. आकाश ने इस परीक्षा में AIR 438 पाई है. आइए इनकी यूपीएससी की जर्नी को करीब से जानते हैं.  कहां के रहने वाले हैं आकाश कुमार? आकाश कुमार मूल रूप से कुशीनगर जिले के ग्राम तुर्कपट्टी महुअवां के रहने वाले हैं. आकाश ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में ऑल इंडिया 438वीं रैंक प्राप्त की है. उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों और गांवों के युवाओं में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. पिता हैं पडरौना तहसील में लेखपाल आकाश की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा संघर्ष रहा है. उनके पिता अरविंद रावत पडरौना तहसील में लेखपाल के पद पर कार्यरत हैं. एक साधारण परिवार से आने वाले आकाश ने अपनी मेहनत के दम पर आज यह बड़ा मुकाम हासिल किया है. अपने परिवार के साथ आकाश कुमार की सांकेतिक फोटो (Instagram) दिल्ली से की पढ़ाई, चौथे प्रयास में मिली कामयाबी आकाश की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत और धैर्य है. उन्होंने चौथे प्रयास में यह मुकाम हासिल किया है. शुरुआती असफलताओं से घबराने के बजाय आकाश अपनी कमियों को सुधारते रहे. आकाश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी करने के बाद देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की. UPSC Success Story: युवाओं के लिए प्रेरणा बने आकाश आकाश कुमार की यह उपलब्धि आज कुशीनगर ही नहीं, बल्कि देश के उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बीच सिविल सेवा में जाने का सपना देखते हैं. लगातार तीन बार असफल होने के बाद भी हार नहीं माना और चौथी बार में देश की सबसे बड़ी परीक्षा को क्रैक कर लिया.  यह भी पढ़ें: CISF असिस्टेंट कमांडेंट सुयश द्विवेदी ने UPSC में गाड़ा झंडा, मिला AIR 94 The post पिता लेखपाल, बेटे ने UPSC में लहराया परचम, हासिल की AIR 438 appeared first on Naya Vichar.

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खान सर-ज्ञान बिंदु कोचिंग विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ? जानिए रौशन आनंद की जमानत को लेकर वकील का नया प्लान

Khan Sir Coaching Controversy: पटना के चर्चित कोचिंग विवाद मामले में कानूनी लड़ाई जारी है. खान ग्लोबल स्टडीज के संस्थापक खान सर को फिलहाल कोर्ट से राहत मिल गई है. वहीं, ज्ञान बिंदु जी.एस. एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद की मुश्किलें अभी कम होती नहीं दिख रही हैं. कोर्ट के आदेश के बाद खान सर की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. दूसरी तरफ रौशन आनंद की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और वह अभी जेल में हैं. खान सर को मिली अंतरिम सुरक्षा पटना के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में मंगलवार को खान सर उर्फ फैजल खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खान सर को 20 जून तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की. साथ ही पुलिस को केस डायरी और अभियुक्त के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी पेश करने का निर्देश दिया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 जून को होगी. तब तक खान सर के खिलाफ कोई गिरफ्तारी या अन्य कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी. वकील बोले- केस झूठा और बनावटी खान सर की ओर से अदालत में पक्ष रखते हुए उनके वकील ने कहा कि पुलिस ने दबाव बनाने के लिए हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराएं लगाई हैं. उन्होंने दावा किया कि घटना में कोई व्यक्ति गोली लगने से घायल नहीं हुआ. सुरक्षा गार्ड ने आत्मरक्षा में लाइसेंसी हथियार से हवा में फायरिंग की थी. रौशन आनंद की जमानत याचिका खारिज ज्ञान बिंदु एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद को कोर्ट से राहत नहीं मिली है. प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अनुराग वर्मा की अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि मामला हत्या के प्रयास से जुड़ा है और यह गंभीर प्रकृति का अपराध है. हालांकि अब रौशन आनंद के वकील जिला एवं सत्र न्यायालय में नई जमानत याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं. क्या है पूरा मामला? 2 जून की रात कदमकुआं थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि मुसल्लहपुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग सेंटर पर कुछ लोग तोड़फोड़, पथराव और फायरिंग कर रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को कंट्रोल किया. घटना में सुरक्षा कर्मी के साथ मारपीट की बात सामने आई थी. उसके सिर में चोट भी लगी थी. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई गिरफ्तारी घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की. जांच के आधार पर ज्ञान बिंदु एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद समेत अभिषेक कुमार और गौरव कुमार को गिरफ्तार किया गया. पुलिस का आरोप है कि तीनों ने कोचिंग संस्थान में घुसकर गार्ड के साथ मारपीट की थी. इसके बाद 3 जून को सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. फायरिंग वाले वीडियो ने बढ़ाई खान सर की मुश्किलें घटना के कुछ दिनों बाद एक और सीसीटीवी वीडियो सामने आया. वीडियो में सुरक्षा गार्ड फायरिंग करते दिखाई दिए. इसके बाद पुलिस ने दोनों गार्डों को गिरफ्तार कर लिया. जांच के दौरान यह दावा किया गया कि गार्डों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने खान सर के कहने पर गोली चलाई थी. खान सर पर भी दर्ज हुआ केस गार्डों के बयान के बाद पुलिस ने खान सर के खिलाफ भी मामला दर्ज किया. उन पर हत्या के प्रयास में सहयोग देने और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. फिलहाल इस मामले में कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी है, लेकिन अंतिम फैसला आगामी सुनवाई के बाद ही सामने आएगा. 20 जून पर टिकी सबकी नजर अब इस पूरे मामले में अगली बड़ी तारीख 20 जून है. इसी दिन अदालत में खान सर की अग्रिम जमानत पर आगे की सुनवाई होगी. वहीं रौशन आनंद की ओर से भी ऊपरी अदालत में जमानत के लिए नई कानूनी कोशिश शुरू होने वाली है. Also Read: ‘बेटियां जीनियस बन रही हैं, अब शादी का खर्च लड़के वाले उठाएं’, दहेज पर पप्पू यादव ने दिया नया फॉर्मूला The post खान सर-ज्ञान बिंदु कोचिंग विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ? जानिए रौशन आनंद की जमानत को लेकर वकील का नया प्लान appeared first on Naya Vichar.

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AI की बढ़ती ‘प्यास’! हर दिन लाखों गैलन पानी कैसे ‘पी’ जाते हैं डेटा सेंटर्स?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में हिंदुस्तान तेजी से आगे बढ़ रहा है. देश के कई शहरों में बड़े-बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है और टेक कंपनियां अरबों रुपये का निवेश कर रही हैं. इसी बीच आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में प्रस्तावित एक बड़े एआई डेटा सेंटर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. सवाल यह है कि डिजिटल भविष्य को मजबूत बनाने वाले ये डेटा सेंटर आखिर कितने प्राकृतिक संसाधनों की खपत करते हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ पानी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जो आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है. डेटा सेंटरों को आखिर इतनी ज्यादा पानी की जरूरत क्यों पड़ती है? एआई मॉडल, क्लाउड सर्विस और बड़े लैंग्वेज मॉडल्स को चलाने वाले डेटा सेंटरों में हजारों हाई-परफॉर्मेंस सर्वर लगातार काम करते हैं. इन सर्वरों से भारी मात्रा में गर्मी पैदा होती है. अगर इन्हें समय पर ठंडा न किया जाए तो मशीनें प्रभावित हो सकती हैं. यही वजह है कि डेटा सेंटरों में बड़े कूलिंग सिस्टम लगाए जाते हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में पानी का इस्तेमाल होता है. जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इन सेंटरों की कूलिंग जरूरत भी बढ़ती जा रही है. एक दिन में हजारों लोगों जितना पानी खर्च कर सकते हैं डेटा सेंटर विभिन्न रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार बड़े डेटा सेंटर प्रतिदिन लाखों गैलन पानी की खपत कर सकते हैं. कुछ मामलों में यह खपत इतनी अधिक होती है कि उसकी तुलना 10 हजार से 50 हजार लोगों की दैनिक पानी जरूरत से की जाती है. यही वजह है कि पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में नए डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भविष्य में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ता है तो जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. विशाखापत्तनम परियोजना को लेकर क्यों बढ़ रही हैं चिंताएं? विशाखापत्तनम को देश के उभरते टेक्नोलॉजी हब के रूप में देखा जा रहा है. यहां बड़े एआई डेटा सेंटर निवेश की तैयारी चल रही है. हालांकि स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि शहर पहले से ही जल संसाधनों की चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में बड़े पैमाने पर पानी और बिजली की जरूरत रखने वाले डेटा सेंटर भविष्य में संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकते हैं. कुछ इलाकों में भूमि उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. क्या नई तकनीकें इस समस्या का समाधान बन सकती हैं? डेटा सेंटर उद्योग अब पानी की खपत कम करने वाली नई तकनीकों पर भी काम कर रहा है. इमर्शन कूलिंग और डायरेक्ट-टू-चिप कूलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को भविष्य का समाधान माना जा रहा है. इनकी मदद से सर्वरों को अधिक प्रभावी तरीके से ठंडा किया जा सकता है और पानी की जरूरत को कम किया जा सकता है. कई वैश्विक टेक कंपनियां ऐसे समाधानों में निवेश बढ़ा रही हैं ताकि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का पर्यावरणीय प्रभाव कम किया जा सके. एआई के भविष्य के साथ जुड़ा है संसाधनों का संतुलन हिंदुस्तान डिजिटल वित्तीय स्थिति और एआई टेक्नोलॉजी में वैश्विक भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी विकास के साथ पानी, बिजली और पर्यावरणीय संसाधनों के संतुलित उपयोग पर भी उतना ही ध्यान देना होगा. आने वाले वर्षों में डेटा सेंटरों का विस्तार केवल तकनीकी नहीं बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक चर्चा का भी बड़ा विषय बन सकता है. यह भी पढ़ें: Clean Android Phone क्या है? खूबियां जानेंगे तो अगला फोन यही मांगेंगे यह भी पढ़ें: क्या है 5G Network Slicing, जिसका यूज करके एयरटेल अपने पोस्टपेड यूजर्स को दे रहा फास्ट इंटरनेट? The post AI की बढ़ती ‘प्यास’! हर दिन लाखों गैलन पानी कैसे ‘पी’ जाते हैं डेटा सेंटर्स? appeared first on Naya Vichar.

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ममता बनर्जी को एक और झटका, सांसद सुष्मिता देव ने राज्य सभा से दिया इस्तीफा, TMC छोड़ BJP में हो सकती हैं शामिल

Sushmita Dev Resigns TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है. हाल ही में 61 विधायकों के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में आने की समाचारों के बाद अब संसद में भी पार्टी को झटका लगा है. राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके साथ ही वह इस सप्ताह ऐसा कदम उठाने वाली दूसरी टीएमसी सांसद बन गईं. इससे महज एक सप्ताह पहले टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने भी अपना पद छोड़ दिया था. पार्टी के संगठन और संसद दोनों जगह ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है. बुधवार को तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया.  उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को भेजे पत्र में लिखा, ‘मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देती हूं, जिसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए.’ यानी उन्होंने अपने सांसद पद और टीएमसी पार्टी दोनों छोड़ दी है. सुष्मिता देव का इस्तीफा पत्र. कांग्रेस से लोकसभा सांसद रह चुकी हैं सुष्मिता सुष्मिता देव 2014 में लोकसभा सांसद बनी थीं. उन्होंने असम के सिलचर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था. असम कांग्रेस के दिग्गज नेता और प्रभावशाली बंगाली चेहरा रहे संतोष मोहन देव की बेटी सुष्मिता देव लंबे समय तक अखिल हिंदुस्तानीय स्त्री कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. सिलचर को उनके पिता संतोष मोहन देव का मजबूत नेतृत्वक गढ़ माना जाता रहा है. 2021 में टीएमसी में हुई थीं शामिल 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद 53 वर्षीय सुष्मिता देव ने 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था.  पार्टी में शामिल होने के समय उन्होंने सार्वजनिक जीवन में ‘एक नए अध्याय’ की शुरुआत की बात कही थी. टीएमसी में आने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा. उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और बाद में राज्यसभा भेजा गया. सूत्रों के मुताबिक, अब उनके हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. बीजेपी में हो सकती हैं शामिल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से भी मुलाकात की है. इसी के बाद ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह बीजेपी में शामिल हो सकती हैं. रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि बीजेपी उन्हें असम से राज्यसभा में भेज सकती है.  सुखेंदु शेखर ने भी दिया था इस्तीफा इससे पहले सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने संसद और पार्टी, दोनों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. अपने बयान में उन्होंने न केवल पद छोड़ा, बल्कि पार्टी और बंगाल में उसके 15 वर्षों के शासन पर भी तीखा हमला बोला. ये भी पढ़ें:- ममता बनर्जी के चारों ओर सन्नाटा! फोन बंद, चेहरे गायब, दीदी के सबसे करीबी सांसदों ने संकट में मुंह फेरा ये भी पढ़ें:- सोनिया गांधी के गले लगकर क्यों रो पड़ीं तृणमूल चीफ ममता बनर्जी? जानें जादू की झप्पी की इनसाइड स्टोरी बडे़ विद्रोह का सामना कर रही है टीएमसी इन दोनों इस्तीफों से पहले पार्टी को विधानसभा के भीतर भी बड़े विद्रोह का सामना करना पड़ा था. हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व की लाइन से अलग रुख अपनाते हुए विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन कर दिया था. उन्होंने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोवनदेब चट्टोपाध्याय को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. स्थिति तब और गंभीर हो गई जब विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी. इस घटनाक्रम ने चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर मौजूद गहरे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया. इतना ही नहीं, टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसद भी ममता बनर्जी और टीएमसी को छोड़ सकते हैं. हाल ही में जब ममता बनर्जी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की मीटिंग कर रही थीं, तभी यह गुट केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर मुलाकात कर रहा था. इस दौरान पश्चिम बंगाल के नए सीएम शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे.  लगातार दो वरिष्ठ नेताओं के राज्यसभा से इस्तीफे और पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी ने टीएमसी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में हार के केवल एक महीने और 10 दिन के भीतर ही ममता बनर्जी की पार्टी पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है.  The post ममता बनर्जी को एक और झटका, सांसद सुष्मिता देव ने राज्य सभा से दिया इस्तीफा, TMC छोड़ BJP में हो सकती हैं शामिल appeared first on Naya Vichar.

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इंडियन आर्मी का बड़ा प्लान, ₹23000 करोड़ से 300 K-9 वज्र तोप खरीदने की तैयारी; चीन-पाकिस्तान सीमा पर होंगे तैनात

Indian Army Tank Procurement: हिंदुस्तानीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. 300 अतिरिक्त के-9 वज्र-टी स्वचालित तोपों (सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी गन) की खरीद का प्रस्ताव तैयार कर रही है. इस प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. अगर इस योजना को मंजूरी मिल जाती है, तो यह हाल के दशकों में हिंदुस्तानीय सेना के सबसे बड़े तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक होगी. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा सूत्रों ने बताया कि यह प्रस्ताव इसी सप्ताह रक्षा खरीद बोर्ड (डीपीबी) के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है. यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो इसका ठेका लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को मिलने की संभावना है, जो दक्षिण कोरिया की रक्षा कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के साथ तकनीकी साझेदारी में हिंदुस्तान में के-9 वज्र-टी का निर्माण करती है. 500 से अधिक हो जाएगी के-9 वज्र तोपों की संख्या प्रस्तावित खरीद पूरी होने के बाद हिंदुस्तानीय सेना के लिए ऑर्डर की गई के-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से अधिक हो जाएगी. रक्षा योजनाकारों का मानना है कि इससे पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमा- एलओसी और चीन के साथ- एलएसी, दोनों मोर्चों पर सेना की फायरपावर में मजबूत बढ़ोतरी होगी. बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए सेना लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली प्रणालियों पर विशेष ध्यान दे रही है. हाल के वर्षों में सेना ने ऐसे हथियारों की आवश्यकता को और गंभीरता से महसूस किया है, खासकर उन अभियानों के बाद जिनमें सटीक और तीव्र प्रहार की क्षमता महत्वपूर्ण साबित हुई. ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा फोकस रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया सैन्य अभियानों, विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रदर्शित लंबी दूरी की सटीक हमला क्षमता ने सेना को आधुनिक तोपखाना प्रणालियों की आवश्यकता का नया आकलन करने के लिए प्रेरित किया है. सैन्य योजनाकार अब ऐसी मोबाइल और तेज प्रतिक्रिया देने वाली तोप प्रणालियों पर जोर दे रहे हैं, जो विभिन्न प्रकार के युद्धक्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध करा सकें. क्या है के-9 वज्र की खासियत? के-9 वज्र एक 155 मिमी/52 कैलिबर ट्रैक्ड स्वचालित हॉवित्जर तोप प्रणाली है. यह 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी “शूट एंड स्कूट” क्षमता है. यानी यह लक्ष्य पर गोले दागने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकती है. इससे दुश्मन की जवाबी तोपखाना कार्रवाई से बचाव आसान हो जाता है. इसके अलावा यह बख्तरबंद सुरक्षा से लैस है और रेगिस्तानी इलाकों के साथ-साथ ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है. यही वजह है कि आधुनिक युद्ध रणनीति में इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. 2017 में हुआ था पहला सौदा इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान ने के-9 वज्र तोपों के लिए पहला बड़ा समझौता वर्ष 2017 में किया था. उस समय 100 तोपों की खरीद के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया था. इन तोपों की आपूर्ति निर्धारित समय से पहले वर्ष 2021 में पूरी कर ली गई थी. इसके बाद इन्हें मुख्य रूप से पाकिस्तान सीमा से लगे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात किया गया. 2023 में मिला दूसरा ऑर्डर के-9 वज्र के प्रदर्शन से संतुष्ट हिंदुस्तानीय सेना ने दिसंबर 2023 में 100 और तोपों की खरीद को मंजूरी दी थी. इस सौदे की कीमत लगभग 7,600 करोड़ रुपये थी. इस निर्णय ने साफ संकेत दिया कि हिंदुस्तानीय सेना इस पर लगातार भरोसा जता रही है और इसे भविष्य की युद्ध रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है. लद्दाख में भी सफल रहे परीक्षण हाल ही में के-9 वज्र के संशोधित शीतकालीन संस्करण का परीक्षण लद्दाख में किया गया था. अत्यधिक ऊंचाई और बेहद कम तापमान वाले क्षेत्रों में हुए इन परीक्षणों में प्रणाली का प्रदर्शन सफल बताया गया. रक्षा अधिकारियों के अनुसार परीक्षण के नतीजों ने उत्तरी मोर्चे पर अतिरिक्त के-9 वज्र इकाइयों की तैनाती की योजना को और मजबूती दी है. चीन से लगती सीमाओं पर ऐसी प्रणालियों की मौजूदगी सेना की युद्धक क्षमता को और मजबूत कर सकती है. ये भी पढ़ें:- 4399 दिन… पीछे छूटे नेहरू, नरेंद्र मोदी बने हिंदुस्तान के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री ये भी पढ़ें:- अमेरिका ने अपाचे हेलीकॉप्टर गिराने का लिया बदला, ईरान के ऊपर किए ताबड़तोड़ हमले, तेहरान ने फिर दी चेतावनी पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर बढ़ेगी ताकत रक्षा अधिकारियों का मानना है कि प्रस्तावित खरीद से पाकिस्तान और चीन दोनों दिशाओं में मौजूद सैन्य जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. साथ ही सेना की लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा. रिपोर्ट के अनुसार, के-9 वज्र-टी की प्रस्तावित खरीद हिंदुस्तानीय सेना के व्यापक तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है. सेना एक साथ कई आधुनिक हथियार प्रणालियों को शामिल कर रही है.  इनमें एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस), धनुष तोप और अपग्रेडेड पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम जैसी परियोजनाएं शामिल हैं. रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन सभी प्रणालियों के शामिल होने से हिंदुस्तानीय सेना विभिन्न मोर्चों पर तेजी से, सटीक और लगातार फायरपावर उपलब्ध कराने में पहले से कहीं अधिक सक्षम हो जाएगी. The post इंडियन आर्मी का बड़ा प्लान, ₹23000 करोड़ से 300 K-9 वज्र तोप खरीदने की तैयारी; चीन-पाकिस्तान सीमा पर होंगे तैनात appeared first on Naya Vichar.

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इस साल मिलेगी मोटी सैलरी हाइक? TeamLease रिपोर्ट में सेक्टर-वाइज अनुमान

Private Job Salary Hike : प्रशासनी नौकरी करने वाले कर्मचारी जहां बेसब्री से 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं, वहीं प्राइवेट सेक्टर (Private Job) में काम करने वालों की नजरें भी इस साल के अप्रेजल और इंक्रीमेंट पर टिकी हुई हैं. वित्त वर्ष 2025-26 का इंक्रीमेंट तो लोगों के खातों में आने लगा है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में सैलरी कितनी बढ़ेगी? एचआर कंपनी ‘टीमलीज सर्विसेज’ (TeamLease Services) की ताजा रिपोर्ट ‘जॉब्स एंड सैलरीज प्राइमर 2026-27’ के मुताबिक, इस साल हिंदुस्तानीय कंपनियां अपने कर्मचारियों पर दिल खोलकर पैसा बरसाने वाली हैं. रिपोर्ट का दावा है कि अलग-अलग सेक्टर्स में इस साल 8.6% से लेकर 10.2% तक का औसत सैलरी इंक्रीमेंट देखने को मिल सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह मार्केट में कुशल (Skilled) टैलेंट की भारी डिमांड होना है. सेक्टर के हिसाब से आपका कितना बढ़ेगा वेतन? टीमलीज ने देश के जॉब मार्केट और सेक्टर्स को उनकी ग्रोथ के हिसाब से तीन मुख्य कैटेगरीज में बांटा है. बंपर ग्रोथ वाले सेक्टर्स (औसत इंक्रीमेंट: 9.6% से 10.2%) इस लिस्ट में ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल), फिनटेक (FinTech), हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल्स (दवा कंपनियां) सबसे आगे चल रहे हैं. इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स: इस साल सबसे ज्यादा 11.2% तक की बंपर हाइक पा सकते हैं. क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर: इनकी सैलरी में 10.9% का तगड़ा उछाल आ सकता है. आईटी सपोर्ट एग्जीक्यूटिव: 10.3% की ग्रोथ देख सकते हैं. साइट इंजीनियर्स: इनकी सैलरी 10.2% तक बढ़ सकती है. सस्टेनेबल (स्थिर) ग्रोथ वाले सेक्टर्स (औसत इंक्रीमेंट: 8.9% से 9.5%) इस कैटेगरी में ऑटोमोटिव (गाड़ियों का सेक्टर), रिटेल, इंश्योरेंस और बीपीओ (BPO) शामिल हैं. प्रोजेक्ट इंजीनियर्स: इन्हें औसतन 10.7% का शानदार इंक्रीमेंट मिल सकता है. EHS ऑफिसर्स और रिलेशनशिप एग्जीक्यूटिव: इनकी सैलरी 10.1% तक बढ़ सकती है. धीरे-धीरे बढ़ने वाले सेक्टर्स (औसत इंक्रीमेंट: 8.6% से 8.8%) बैंकिंग, कंस्ट्रक्शन, रियल एस्टेट, टेलीकॉम और टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग) में कंपनियां इस साल थोड़ा संभलकर पैसा बढ़ाएंगी. इसके बावजूद कुछ खास पदों पर अच्छी हाइक मिलेगी. साइट इंजीनियर्स: 9.8% की बढ़ोतरी. टेलीकॉलर्स: 9.7% की हाइक. फाइनेंशियल एनालिस्ट: 9.5% का इंक्रीमेंट. इन शहरों में मिलेगा सबसे ज्यादा इंक्रीमेंट टीमलीज सर्विसेज के मुताबिक, अब सैलरी बढ़ने का ट्रेंड सिर्फ दिल्ली-मुंबई जैसे सुपर-मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इस बार बाजी कुछ दूसरे शहर मार रहे हैं. सैलरी बढ़ाने के मामले में इस साल चेन्नई (9.7%) सबसे आगे है. इसके ठीक बाद पुणे और हैदराबाद (9.6%) और अहमदाबाद (9.5%) का नंबर आता है. नए मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के कारण विशाखापट्टनम में 9.5% और नागपुर में 9.4% की औसत सैलरी हाइक देखी जा सकती है. पिछले साल के मुकाबले इस साल सूरत (8.4%), चंडीगढ़ (8.5%) और लखनऊ (8.7%) में सैलरी बढ़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी रहने का अनुमान है. इंक्रीमेंट का पूरा गणित: एक नजर में सेक्टर की कैटेगरी औसत सैलरी हाइक इन पदों को होगा सबसे ज्यादा फायदा हाई ग्रोथ (EV, फिनटेक, फार्मा) 9.6% – 10.2% इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (11.2%), क्वालिटी इंस्पेक्टर (10.9%) स्थिर ग्रोथ (ऑटो, रिटेल, BPO) 8.9% – 9.5% प्रोजेक्ट इंजीनियर (10.7%), IT सपोर्ट (10.1%) धीमी ग्रोथ (बैंकिंग, रियल एस्टेट) 8.6% – 8.8% साइट इंजीनियर (9.8%), टेलीकॉलर (9.7%) Also Read : 1 अप्रैल 2027 से बदल जाएगा लोन का नियम ! CIBIL स्कोर 730 से कम तो भूल जाइए होम-कार लोन The post इस साल मिलेगी मोटी सैलरी हाइक? TeamLease रिपोर्ट में सेक्टर-वाइज अनुमान appeared first on Naya Vichar.

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शेखपुरा के चांदी वृंदावन पहाड़ पर मिला प्राचीन मूर्ति और पांडुलिपि का प्रमाण, महाभारत काल से जुड़ी है मान्यता

Shiekhpura News : (प्रदीप कुमार) शेखपुरा जिले के अरियरी प्रखंड स्थित चांदी वृंदावन पहाड़ एक बार फिर चर्चा में है. यहां प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज को लेकर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सुजीत कुमार सुमन ने स्थल का निरीक्षण किया. पहाड़ और आसपास के क्षेत्र में बिखरी प्राचीन मूर्तियों को देखकर इतिहास से जुड़े नए रहस्यों के खुलने की उम्मीद बढ़ गई है. प्राचीन धरोहरों की खोज में पहुंचे अधिकारी जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सुजीत कुमार सुमन ने चांदी वृंदावन पहाड़ और चांदी गांव का विस्तृत निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में मौजूद प्राचीन मूर्तियों और अन्य ऐतिहासिक अवशेषों का जायजा लिया. जांच के लिए कुछ नमूने भी अपने साथ ले गए हैं. इतिहास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा स्थल निरीक्षण के दौरान पदाधिकारी ने कहा कि चांदी वृंदावन पहाड़ शेखपुरा के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल है. यहां मौजूद पुरातात्विक अवशेष इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की ओर संकेत करते हैं. उन्होंने इस धरोहर को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया. पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने कहा कि इस ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित कर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए. इससे न केवल जिले की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे. वर्षों से उठ रही है खुदाई की मांग स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ता पिंटू चंद्रवंशी द्वारा लंबे समय से इस क्षेत्र में वैज्ञानिक खुदाई कराने और पर्यटन विकास की मांग की जा रही है. उनका मानना है कि पहाड़ के अंदर और आसपास कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य छिपे हो सकते हैं, जो जिले के इतिहास को नई पहचान दे सकते हैं. महाहिंदुस्तान काल और जरासंध से जुड़ी है मान्यता स्थानीय मान्यताओं के अनुसार चांदी वृंदावन पहाड़ का संबंध महाहिंदुस्तान काल और मगध सम्राट जरासंध से माना जाता है. इसी वजह से यह स्थल इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यदि यहां व्यापक स्तर पर शोध और खुदाई होती है तो कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारियां सामने आ सकती हैं. ऐतिहासिक विरासत को बचाने की जरूरत ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते इस क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित नहीं किया गया तो कई महत्वपूर्ण अवशेष नष्ट हो सकते हैं. लोगों ने प्रशासन और पुरातत्व विभाग से जल्द सर्वेक्षण और संरक्षण कार्य शुरू करने की मांग की है, ताकि शेखपुरा की इस अनमोल विरासत को सुरक्षित रखा जा सके. Also Read : बिहार STF बड़ी कार्रवाई, 12 साल से फरार नक्सली को धर दबोचा The post शेखपुरा के चांदी वृंदावन पहाड़ पर मिला प्राचीन मूर्ति और पांडुलिपि का प्रमाण, महाहिंदुस्तान काल से जुड़ी है मान्यता appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, मुनीर की फौज ने ली 11 मासूम बच्चों सहित 13 अफगानों की जान

Pakistan Airstrikes Afghanistan: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव भड़क उठा है. तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. तालिबान प्रशासन का कहना है कि हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए और मरने वालों में बड़ी संख्या में शिशु शामिल हैं. इस संबंध में पाकिस्तान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. तालिबान का दावा- तीन प्रांतों में हुए हवाई हमले तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और कुनार, खोस्त तथा पक्तिका प्रांतों में कई स्थानों को निशाना बनाया. मुजाहिद के अनुसार, ‘पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने रात के समय नागरिकों के घरों पर बमबारी की. इस हमले में 11 बच्चों, एक स्त्री और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हुई है.’ उन्होंने यह भी बताया कि हमले में 14 स्त्रीएं घायल हुई हैं. प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी साझा कीं, जिनके बारे में दावा किया गया कि वे हमलों में प्रभावित लोगों की हैं. Reports circulating on social media claim that Pakistan has once again carried out airstrikes inside Afghanistan. Yesterday TTP-linked militants attacked a Pakistani paramilitary post in Hassan Khel near Peshawar, reportedly killing 7 soldiers and capturing 5 others.@RANATVAF… https://t.co/Uji3VdxNMD — Sami Yousafzai سمیع یوسفزي (@SamiYousafzaii) June 9, 2026 पिछले एक साल से बढ़ रही हैं सीमा पार झड़पें तालिबान प्रशासन का आरोप है कि पिछले एक वर्ष के दौरान पाकिस्तान की ओर से अफगान क्षेत्र में कई सैन्य अभियान चलाए गए हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. अफगानिस्तान का दावा है कि मार्च में भी पाकिस्तान ने काबुल स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया था, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. हालांकि संयुक्त राष्ट्र् ने 269 लोगों की मौत कंफर्म की थी.  2025 में बढ़ा था दोनों देशों के बीच संघर्ष अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव नया नहीं है. दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय से खटास बनी हुई है, लेकिन अक्टूबर 2025 में हालात और ज्यादा बिगड़ गए थे. रिपोर्टों के मुताबिक उस समय पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों, यहां तक कि राजधानी काबुल के आसपास भी हवाई हमले किए थे. इसके बाद सीमा पार संघर्ष और तेज हो गया. लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और झड़पों के कारण हजारों अफगान नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े. कई इलाकों में बड़े पैमाने पर विस्थापन की स्थिति पैदा हो गई. ये भी पढ़ें:- लंदन में हिंदुस्तानीय परिवार की दर्दनाक मौत: 36वीं मंजिल से गिरकर दंपती और बेटे की जान गई, सामने आईं कई चौंकाने वाली बातें पाकिस्तान क्या कहता रहा है? पाकिस्तान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान में मौजूद कुछ समूह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं. इस्लामाबाद का कहना है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठन अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल कर हमले करते हैं. पाकिस्तान कई बार यह भी दावा कर चुका है कि तालिबान प्रशासन इन संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है. हालांकि तालिबान प्रशासन इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है. ये भी पढ़ें:- अमेरिका ने अपाचे हेलीकॉप्टर गिराने का लिया बदला, ईरान के ऊपर किए ताबड़तोड़ हमले, तेहरान ने फिर दी चेतावनी रिश्तों में आई बड़ी दरार दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक समय पाकिस्तान को तालिबान का प्रमुख समर्थक माना जाता था. कई सालों तक तक इस्लामाबाद और तालिबान के बीच करीबी संबंधों की चर्चा होती रही. लेकिन 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में लौटने के बाद दोनों पक्षों के संबंध लगातार खराब होते गए. सीमा सुरक्षा, उग्रवादी संगठनों की मौजूदगी और सीमा पार हमलों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद गहराते चले गए, जो अब खुले टकराव का रूप लेते दिखाई दे रहे हैं. The post पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, मुनीर की फौज ने ली 11 मासूम बच्चों सहित 13 अफगानों की जान appeared first on Naya Vichar.

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सपना चौधरी की जिंदगी में मचा बवाल, पति के खिलाफ कोर्ट पहुंचीं तो मिला बड़ा सहारा

Sapna Choudhary: हरियाणवी डांसर और गायिका सपना चौधरी इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं. हाल ही में सामने आए एक कानूनी मामले में दिल्ली की एक स्त्री अदालत ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है. अदालत ने उनके पति यशवीर साहू (वीर साहू) के खिलाफ कुछ अस्थायी प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है. यह फैसला घरेलू विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. अदालत ने जारी किए अंतरिम निर्देश मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अगली सुनवाई तक दोनों पक्षों के बीच दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. आदेश के अनुसार, पति को सपना चौधरी से सीधे संपर्क करने, उनके निवास स्थान, कार्यस्थल या सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने से रोका गया है. अदालत का उद्देश्य मामले की निष्पक्ष सुनवाई तक दोनों पक्षों की सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करना है. क्या है पूरा मामला? दायर याचिका में सपना चौधरी ने वैवाहिक जीवन से जुड़ी कई परेशानियों का जिक्र किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि शादी के बाद उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. याचिका के अनुसार, हालात ऐसे बने कि उन्हें अपने बच्चों के साथ ससुराल छोड़कर मायके में रहना पड़ा. उन्होंने अदालत के समक्ष यह भी आशंका जताई कि भविष्य में उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है. इसी आधार पर अदालत से सुरक्षा की मांग की गई थी. फिल्म प्रीमियर को लेकर भी जताई गई चिंता सुनवाई के दौरान सपना की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उनकी आगामी फिल्म Momaku का प्रीमियर आयोजित होना है. ऐसे में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सुरक्षा जरूरी है. अदालत ने इस तर्क को ध्यान में रखते हुए अंतरिम आदेश जारी किया. सबूतों पर विचार के बाद आया फैसला मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कई दस्तावेज, तस्वीरें और अन्य सबूत पेश किए गए. इन्हें देखने के बाद न्यायालय ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत देने का फैसला किया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा. यह भी पढ़ें: सतीश शाह को मरणोपरांत मिलेगा पद्म श्री, भावुक हुईं रुपाली गांगुली बोलीं- काश वो खुद ये सम्मान ले पाते The post सपना चौधरी की जिंदगी में मचा बवाल, पति के खिलाफ कोर्ट पहुंचीं तो मिला बड़ा सहारा appeared first on Naya Vichar.

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