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August 12, 2026

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रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, जानिए कहां और कैसे दिखेगा यह दुर्लभ नजारा!

Surya Grahan 2026: आज बुधवार 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी विशेष माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस ग्रहण का संबंध कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र से बताया जा रहा है. वहीं, श्रावण मास की अमावस्या होने के कारण स्नान, दान, पितृ तर्पण और भगवान शिव की उपासना का भी महत्व माना जाता है. हालांकि, ग्रहण से जुड़े ज्योतिषीय प्रभाव धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. कब लगेगा सूर्य ग्रहण? जानें पूरा समय हिंदुस्तानीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात शुरू होगा और इसका प्रभाव 13 अगस्त की देर रात तक चलने की बात कही जा रही है. आपके दिए विवरण के अनुसार ग्रहण का प्रारंभ रात 9:04 बजे, मध्य रात्रि 11:16 बजे चरम और समाप्ति रात 1:28 बजे होगी. प्रकाशित करने से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें. क्या हिंदुस्तान में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण? 12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण हिंदुस्तान से दिखाई नहीं देगा. NASA के अनुसार पूर्ण ग्रहण की पट्टी उत्तरी रूस से होकर ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन तक जाती है, जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा. हिंदुस्तान में लगेगा सूतक काल या नहीं? धार्मिक परंपरा के अनुसार सूतक काल उस स्थान पर माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है. चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई नहीं देगा, इसलिए हिंदुस्तान में इसके सूतक काल को मान्य नहीं माना जाएगा. हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों में नियमों में अंतर हो सकता है. ये भी पढ़ें: रिश्तों पर न लगने दें मनमुटाव का ‘ग्रहण’, आज साल के अंतिम सूर्यग्रहण पर पति-पत्नी साथ मिलकर करें ये सरल उपाय ग्रहण देखने वालों के लिए जरूरी सावधानी जहां सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा हो, वहां इसे देखने के लिए केवल सुरक्षित सोलर-व्यूइंग चश्मे या ISO 12312-2 मानक वाले सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करें. सामान्य धूप के चश्मे सुरक्षित नहीं हैं. आंशिक ग्रहण के दौरान बिना उचित सुरक्षा के सीधे सूर्य को देखना आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. धार्मिक दृष्टि से क्या करें? आज श्रावण अमावस्या होने के कारण श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार स्नान, दान, पितृ तर्पण और भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं. ग्रहण से जुड़े धार्मिक उपाय और ज्योतिषीय प्रभाव आस्था एवं परंपराओं पर आधारित हैं, जबकि सूर्य ग्रहण स्वयं सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति से बनने वाली वैज्ञानिक खगोलीय घटना है. The post रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, जानिए कहां और कैसे दिखेगा यह दुर्लभ नजारा! appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में पेपर लीक पर ED की एंट्री, TRE-3 से NEET तक 4 परीक्षाएं रडार पर, अब माफियाओं के पैसे और संपत्ति का होगा हिसाब

Bihar Paper Leak: बिहार में पेपर लीक और परीक्षा धांधली के खिलाफ जांच अब और तेज होने वाली है. बहाली परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले परीक्षा माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की भी एंट्री हो गई है. 2024 या उसके बाद बिहार में हुई बहाली परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़े और दूसरी गड़बड़ियों की जांच ED ने अपने स्तर से शुरू कर दी है. आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने ऐसी परीक्षाओं की सूची केंद्रीय एजेंसी को भेजी है. ED अब यह पता लगाएगी कि पेपर लीक के पीछे कौन लोग थे. इस पूरे नेटवर्क में कितनी रकम का लेन-देन हुआ. अपराध से कमाए गए पैसे को कहां लगाया गया. परीक्षा माफियाओं पर अब ED का शिकंजा बिहार प्रशासन ने परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई के लिए वर्ष 2024 में बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया था. अब इस मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच भी जुड़ गई है. देश के चर्चित परीक्षा माफिया संजीव मुखिया से जुड़े मामले की जांच ED पहले से कर रही है. अब 2024 और उसके बाद हुई दूसरी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों को भी जांच के दायरे में लाया जा रहा है. ED परीक्षा माफियाओं, उनके सहयोगियों और संगठित गिरोह के खिलाफ PMLA की धाराओं के तहत कार्रवाई करेगी. इस जांच में सिर्फ पेपर लीक तक मामला सीमित नहीं रहेगा. फोकस उस पैसे पर भी होगा, जो इस पूरे स्पोर्ट्स से कमाया गया. चार बड़ी परीक्षाएं ED के रडार पर 1. TRE-3, 2024 बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा यानी TRE-3 में पेपर लीक का मामला सामने आया था. इसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इस मामले में 296 लोगों को जेल भेजा गया. बाद में दोबारा परीक्षा कराई गई और बहाली की प्रक्रिया पूरी हुई. अब इस मामले में पेपर लीक से जुड़े आर्थिक लेन-देन की भी जांच ED कर सकती है. 2. NEET, 2024 NEET 2024 को लेकर भी बिहार में गड़बड़ी का मामला सामने आया था. कुछ सेंटरों पर परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की जांच हुई. इस मामले में 45 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. बाद में परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ी. अब ED यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस पूरे मामले में पैसे का लेन-देन किस तरह हुआ और कौन-कौन लोग इससे जुड़े थे. 3. CHO, 2025 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर यानी CHO भर्ती परीक्षा भी ED के रडार पर है. पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इस मामले में 40 लोगों को जेल भेजा गया. अभी तक इस परीक्षा का दोबारा आयोजन नहीं हुआ है. अब जांच का एक अहम हिस्सा यह होगा कि पेपर लीक से जुड़े लोगों ने कितनी रकम कमाई और उसका इस्तेमाल कहां किया. 4. AEDO, 2026 AEDO भर्ती परीक्षा भी पेपर लीक के आरोपों के बाद जांच के घेरे में आई. मामला सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई. इस केस में 27 लोगों को जेल भेजा गया. फिलहाल परीक्षा दोबारा नहीं हुई है. ED अब इस मामले में भी आर्थिक नेटवर्क की जांच करेगी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें ED की जांच में सबसे बड़ा फोकस क्या होगा? ED की जांच का सबसे अहम हिस्सा पैसे का पूरा ट्रेल होगा. यानी जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि पेपर लीक से जुड़े लोगों ने कितनी रकम कमाई. पैसा कहां से आया? किसके जरिए पहुंचा? कहां-कहां खर्च किया गया? और आखिर में पैसा किन लोगों तक पहुंचा? इसके अलावा पेपर लीक के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की भी पड़ताल होगी. कौन मुख्य आरोपी था? कौन उसके संपर्क में था? किसने पेपर उपलब्ध कराया?किसने अभ्यर्थियों से पैसे लिए? पैसा किन लोगों के खातों या संपत्तियों तक पहुंचा? इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे. संपत्तियों पर भी हो सकती है कार्रवाई जांच में अगर यह साबित होता है कि किसी आरोपी ने पेपर लीक या परीक्षा फर्जीवाड़े से कमाई की है, तो उसकी संपत्ति भी जांच के दायरे में आएगी. ED अपराध से अर्जित आय का पता लगाएगी. जरूरत पड़ने पर ऐसी संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है. यानी अब परीक्षा माफियाओं के लिए खतरा सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा. पेपर लीक से कमाया गया पैसा और उससे बनाई गई संपत्ति भी जांच के घेरे में होगी. Also Read: शराबबंदी के 10 साल, बिहार में आखिर क्या-क्या बदला? आंकड़ों से समझिए एक-एक बात The post बिहार में पेपर लीक पर ED की एंट्री, TRE-3 से NEET तक 4 परीक्षाएं रडार पर, अब माफियाओं के पैसे और संपत्ति का होगा हिसाब appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Scam: 70 लाख में अफसर बनाने का खेल, सदस्यों और चेयरमैन पर लगा इंटरव्यू सेटिंग का आरोप

JPSC Scam, रांची : जेपीएससी परीक्षा घोटाले की जांच में महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है. आरोपी अभय तिवारी ने सीआईडी को दिये अपने बयान में जेपीएससी के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनीमा हांसदा की कथित भूमिका को लेकर कई चौंकानेवाले खुलासे किये हैं. अभय ने बताया है कि उसने जेपीएससी की परीक्षा लेनेवाली कंपनी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के माध्यम से उन सदस्यों तक अभ्यर्थियों की पैरवी कराई. अभय तिवारी ने आगे बताया कि जेपीएससी 11वीं से 13वीं सिविल सेवा पीटी का कथित रेट सामान्य वर्ग के लिए पांच लाख और एसटी-एससी के लिए दो-तीन लाख रुपये था, जबकि अंतिम परिणाम तक का रेट प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये बताया गया है. अभय तिवारी के मुताबिक, 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में जमाल अहमद, अजीता भट्टाचार्य और अनीमा हांसदा के साथ-साथ जेपीएससी चेयरमैन से संपर्क कर उसके द्वारा आदित्य पांडेय नामक व्यक्ति से संपर्क कर अभ्यर्थी उपलब्ध कराये गये. उन अभ्यर्थियों को आदित्य पांडेय ने अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, जमाल अहमद, अनीमा हांसदा और चेयरमैन एल खियांग्ते तक पहुंचाया. कुल 7 अभ्यर्थियों को पहुंचाए गए लाभ बताया जा रहा है कि इस सेटिंग से कुल सात अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया, जिसके एवज में प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये वसूले गये. आरोप है कि इंटरव्यू के पैसे अजीता भट्टाचार्य के पीए और मोरहाबादी निवासी ब्रजराम को दिये जाते थे, जबकि चेयरमैन एल खियांग्ते धर्मेंद्र नामक व्यक्ति के माध्यम से पैसा लेते थे. वहीं, जमाल अहमद पर हजारीबाग के कई दलालों के जरिये अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने और इसकी पूरी जानकारी रामवीर सिंह को देने का आरोप लगाया गया है. बयान के अनुसार, ये तीनों सदस्य टीडीपीएल प्रमुख रामवीर सिंह पर इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थी के कोड को डी-कोड कराने का कथित दबाव बनाते थे. आरोप है कि चेयरमैन एल खियांस्ते इंटरव्यू से एक दिन पहले ही रामवीर सिंह से कोड डी-कोड करा लेते थे, ताकि इंटरव्यू के दिन संबंधित अभ्यधी को अपने या भट्टाचार्य के बोर्ड में ही आवंटित किया जा सके. ये भी पढ़ें: विधानसभा में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाएं होंगी रद्द सीडीपीओ परीक्षा में भी वसूली का दावा अभय अभय तिवारी के मुताबिक, सीडीपीओ परीक्षा में भी टीडीपीएल की ओर से अभ्यर्थी उपलब्ध कराये गये. जिसका प्रति अभ्यर्थी रेट 10 लाख रुपये बताया गया, इसमें एक अभ्यर्थी रजक का इंटरव्यू बोर्ड चेयरमैन एल खियांगते के पास था, जिसमें रामवीर सिंह से बात होने के बाद 15 लाख रुपये चेयरमैन को दिये जाने का आरोप है. वहीं कथित तौर पर काजल हिंदुस्तानी का इंटरव्यू बोर्ड भट्टाचार्य के पास था, जिसके लिए उनके पीए ब्रजराम को 10 लाख रुपये दिये जाने का दावा किया गया है. अभय तिवारी के बयान के साथ-साथ रामवीर सिंह के कथित कबूलनामे का भी उल्लेख है. ये भी पढ़ें: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत की, कहा- युवाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप आगे बढ़ रहा झारखंड The post JPSC Scam: 70 लाख में अफसर बनाने का स्पोर्ट्स, सदस्यों और चेयरमैन पर लगा इंटरव्यू सेटिंग का आरोप appeared first on Naya Vichar.

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आज का सूर्य ग्रहण भारत में नहीं आएगा नजर! जानिए क्या गर्भवती महिलाओं के लिए सूतक और नियम लागू होंगे?

Surya Grahan 2026: साल 2026 का प्रमुख सूर्य ग्रहण आज 12 अगस्त को लगेगा. यह एक खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर कुछ समय के लिए सूर्य के प्रकाश को ढक देता है. ग्रहण की पूर्ण अवस्था ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी. हिंदुस्तान इस ग्रहण के दृश्यता क्षेत्र में शामिल नहीं है. गर्भवती स्त्रीओं के लिए धार्मिक मान्यता क्या कहती है? हिंदुस्तानीय परंपरा में ग्रहण के समय गर्भवती स्त्रीओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान भगवान का स्मरण, मंत्र जाप और सकारात्मक विचार करना शुभ माना जाता है. हालांकि, ग्रहण के कारण गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. कौन से मंत्रों का कर सकती हैं जाप? धार्मिक आस्था के अनुसार गर्भवती स्त्री ग्रहण के दौरान शांत मन से ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर सकती हैं. इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी शुभ माना जाता है. अपनी श्रद्धा के अनुसार ‘ॐ सूर्याय नमः’ या गायत्री मंत्र का मानसिक जाप किया जा सकता है. मंत्र जाप को मन को शांत रखने और सकारात्मक वातावरण बनाने का धार्मिक उपाय माना जाता है. ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए? यदि गर्भवती स्त्री धार्मिक मान्यताओं का पालन करना चाहती हैं तो घर में रहकर मंत्र जाप, ध्यान या भगवान का स्मरण कर सकती हैं. पर्याप्त पानी पीना, समय पर भोजन करना और आराम करना ज्यादा जरूरी है. किसी भी तरह की कमजोरी या परेशानी महसूस होने पर आराम करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें. ये भी पढ़ें: सूर्य ग्रहण का राशिफल: आज बदलेगी ग्रहों की चाल, जानें मेष से मीन तक का ऐसा रहेगा हाल क्या ग्रहण देखना गर्भवती स्त्री के लिए खतरनाक है? हिंदुस्तान में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां रहने वाली गर्भवती स्त्रीओं के लिए ग्रहण देखने से जुड़ा प्रत्यक्ष आंखों का जोखिम नहीं है. सामान्य स्थिति में सूर्य को सीधे देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, चाहे व्यक्ति गर्भवती हो या नहीं. इसलिए दिखाई देने वाले सूर्य ग्रहण को बिना उचित सोलर फिल्टर के सीधे नहीं देखना चाहिए. ये भी पढ़ें: ग्रहण का गर्भस्थ शिशु पर क्या पड़ता है असर? जानें धार्मिक आस्था, मान्यता और इससे बचने के पीछे की असली वजह मान्यता और विज्ञान को अलग-अलग समझें सूर्य ग्रहण के दौरान चाकू न चलाने, कुछ न खाने या गर्भस्थ शिशु को नुकसान होने जैसी कई मान्यताएं प्रचलित हैं, लेकिन इनके पीछे वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. गर्भवती स्त्री के लिए इस दौरान सबसे जरूरी है कि वह पर्याप्त पोषण, आराम और चिकित्सकीय सलाह का ध्यान रखे. धार्मिक आस्था के अनुसार मंत्र जाप करना मानसिक शांति के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसे चिकित्सकीय सुरक्षा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. The post आज का सूर्य ग्रहण हिंदुस्तान में नहीं आएगा नजर! जानिए क्या गर्भवती स्त्रीओं के लिए सूतक और नियम लागू होंगे? appeared first on Naya Vichar.

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15 अगस्त पर ट्राई करें ये Tricolor Fashion Ideas, साड़ी से कुर्ती तक दिखेगा देशभक्ति वाला अंदाज

Tricolor Fashion Ideas: 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस का दिन हर हिंदुस्तानीय के लिए खास होता है. इस दिन चारों तरफ तिरंगे के रंगों की खूबसूरती देखने को मिलती है. ऐसे में अगर आप भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने लुक में देशभक्ति का रंग शामिल करना चाहती हैं, तो इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है. आप अपने रोजमर्रा के कपड़ों में ही केसरिया, सफेद और हरे रंग को शामिल करके खूबसूरत ट्राई कलर लुक (Tricolor Fashion Ideas) पा सकती हैं. आइए जानते हैं कुछ आसान ट्राई कलर फैशन आइडियाज, जिन्हें आप 15 अगस्त पर ट्राई कर सकती हैं.  तिरंगे रंग की साड़ी से पाएं एलिगेंट लुक 15 अगस्त के दिन साड़ी पहनना चाहती हैं तो तिरंगे के रंगों वाली साड़ी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. आप केसरिया, सफेद और हरे रंग के कॉम्बिनेशन वाली साड़ी चुन सकती हैं. अगर पूरी साड़ी में तीनों रंग नहीं चाहतीं, तो सफेद साड़ी के साथ हरे या केसरिया रंग का बॉर्डर भी काफी सुंदर लगेगा. PC: AI Generated ट्राई कलर दुपट्टा (Tricolor Fashion Ideas) अगर आपके पास पहले से ही सफेद या क्रीम कलर का सूट है तो नया आउटफिट खरीदने की जरूरत नहीं है.  इसके साथ केसरिया, सफेद और हरे रंग वाला दुपट्टा कैरी करें. चाहें तो दुपट्टे पर तिरंगे रंग की हल्की कढ़ाई या प्रिंट भी चुन सकती हैं.  PC: AI Generated तिरंगे रंग की एक्सेसरीज से पूरा करें लुक अगर आप पूरे आउटफिट में तिरंगे के रंग नहीं पहनना चाहतीं, तो एक्सेसरीज की मदद ले सकती हैं. ग्रीन चूड़ियां, केसरिया ईयररिंग्स या तिरंगे रंग की हेयर एक्सेसरी (Tricolor Fashion Ideas) आपके सिंपल लुक को भी खास बना सकती है. PC: AI Generated यह भी पढ़ें: 15 अगस्त पर बेटियों को दें ये खास तोहफा, सुनाएं इन 10 स्त्रीओं की प्रेरणादायक कहानी The post 15 अगस्त पर ट्राई करें ये Tricolor Fashion Ideas, साड़ी से कुर्ती तक दिखेगा देशभक्ति वाला अंदाज appeared first on Naya Vichar.

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धर्मांतरण और भूमि अधिग्रहण पर शुभेंदु अधिकारी का ध्यान, अगले तीन माह में लायेंगे कानून

बांकुड़ा : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जंगलमहल में विकास के लिए प्रयासरत हैं. उन्होंने बांकुरा में 7 जिलों के अधिकारियों के साथ एक प्रशासनिक बैठक की. बैठक के बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. शुभेंदु ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन महीने के कार्यकाल में किए गए कार्यों और शेष कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी. सीमांत, सीमावर्ती और वन क्षेत्रों में हो रहे धर्मांतरण का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन विदेशी धन की मदद से चल रहे धर्मांतरण की प्रक्रिया से भलीभांति अवगत है, जिसमें वन क्षेत्रों के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की कमजोरी का फायदा उठाया जा रहा है. इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी. अपने कार्यों का रखा ब्योरा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक बार फिर मीडिया को अपनी प्रशासन द्वारा लिए गए विभिन्न निर्णयों की याद दिलाते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि हस्तांतरण, ओबीसी सूची का संशोधन, इमाम-मुअज़्ज़म भत्ते की समाप्ति और गौ संरक्षण के उपाय किए गए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि मुहर्रम के त्योहार के दौरान तलवारों के साथ जुलूस या प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें दो काम जो अगले तीन माह में होंगे इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा-कुछ ही दिनों में यूसीसी (यूसीसी) लागू हो जाएगी. एक देश, एक राष्ट्रपति, एक राज्य, एक मुख्यमंत्री, एक कानून. शुभेंदु ने कहा कि इसके बाद मुख्यमंत्री के रूप में उनके पास दो और कार्य शेष हैं. उन्होंने कहा- मेरे पास दो और कार्य शेष हैं. धार्मिक धर्मांतरण और भूमि अधिग्रहण पर कानून लाना. मैं यही कर रहा हूं. उन्होंने अगले तीन महीनों के लिए एक योजना भी तैयार की है, जिसमें जंगलमहल के विकास पर विशेष जोर दिया गया है. Also Read: बंगाल में होगी जाति प्रमाणपत्रों की जांच, अब तक 45,000 लोग संदिग्ध सूची में The post धर्मांतरण और भूमि अधिग्रहण पर शुभेंदु अधिकारी का ध्यान, अगले तीन माह में लायेंगे कानून appeared first on Naya Vichar.

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सूर्य ग्रहण का राशिफल: आज बदलेगी ग्रहों की चाल, जानें मेष से मीन तक का ऐसा रहेगा हाल

Surya Grahan 2026 Rashifal: सूर्य ग्रहण का ज्योतिष में विशेष महत्व माना जाता है. आज 12 अगस्त 2026 बुधवार को साल का अंतिम सूर्यग्रहण लगने जा रहा है. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान सूर्य से जुड़ी ऊर्जा प्रभावित होती है, जिसका असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ सकता है. आइए जानते हैं मेष से मीन राशि तक सूर्य ग्रहण का संभावित प्रभाव. मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण आत्ममंथन और नई योजनाओं पर विचार करने का समय हो सकता है. कार्यक्षेत्र में जल्दबाजी से बचें. धन से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसला लें. परिवार में किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है, इसलिए वाणी पर संयम रखें. वृषभ राशि वृषभ राशि वालों को इस दौरान खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत है. अचानक कुछ ऐसे खर्च सामने आ सकते हैं, जिनकी आपने योजना नहीं बनाई हो. नौकरी और व्यापार में मेहनत का परिणाम धीरे-धीरे मिल सकता है. स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और पर्याप्त आराम करें. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण करियर और आर्थिक मामलों में बदलाव का संकेत दे सकता है. नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. व्यापार करने वालों को कोई महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हो सकता है. दोस्तों और सहकर्मियों के साथ गलतफहमी से बचें. कर्क राशि कर्क राशि वालों के लिए सूर्य ग्रहण कार्यक्षेत्र में नई संभावनाएं लेकर आ सकता है. नौकरी में बदलाव या नई जिम्मेदारी के बारे में विचार कर सकते हैं. वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध अच्छे बनाए रखें. परिवार के किसी सदस्य की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है. सिंह राशि आज के राशिफल के अनुसार  सिंह राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण महत्वपूर्ण माना जा सकता है. आत्मविश्वास में उतार-चढ़ाव महसूस हो सकता है. करियर में कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले अच्छी तरह विचार करें. आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन अनावश्यक निवेश से बचना बेहतर होगा. कन्या राशि कन्या राशि वालों को इस अवधि में अपनी योजनाओं को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए. कार्यस्थल पर किसी व्यक्ति से मतभेद हो सकता है. पैसों के लेन-देन में सतर्क रहें. परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक तनाव कम करने में मदद मिल सकती है. ये भी पढ़ें: ग्रहण का गर्भस्थ शिशु पर क्या पड़ता है असर? जानें धार्मिक आस्था, मान्यता और इससे बचने के पीछे की असली वजह तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण रिश्तों और साझेदारी से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकता है. व्यापारिक साझेदारी में पारदर्शिता रखें. दांपत्य जीवन में छोटी बातों को लेकर विवाद करने से बचें. आर्थिक मामलों में संतुलित निर्णय लेना लाभकारी रहेगा. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों को नौकरी और स्वास्थ्य के मामले में विशेष सावधानी रखनी चाहिए. काम का दबाव बढ़ सकता है. किसी पुराने विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें. खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. धनु राशि धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण प्रेम, शिक्षा और रचनात्मक कार्यों से जुड़े मामलों में बदलाव ला सकता है. विद्यार्थियों को पढ़ाई पर अधिक ध्यान देना होगा. प्रेम संबंधों में पारदर्शिता बनाए रखें. निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा. ये भी पढ़ें: सूर्य ग्रहण लव अलर्ट: ग्रहण के दौरान दिल के मामलों में सतर्क रहें! जानें मेष से मीन तक का संपूर्ण होरोस्कोप मकर राशि मकर राशि वालों के लिए सूर्य ग्रहण परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण हो सकता है. घर में किसी बदलाव या खरीदारी की योजना बन सकती है. कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ेंगी. परिवार के सदस्यों की भावनाओं को समझने का प्रयास करें. कुंभ राशि कुंभ राशि के जातकों को इस दौरान अपनी वाणी और व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए. छोटी बात विवाद का कारण बन सकती है. नौकरी और व्यापार में नए संपर्क बन सकते हैं. यात्रा के दौरान सावधानी रखें और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित रखें. मीन राशि मीन राशि वालों के लिए सूर्य ग्रहण आर्थिक और व्यक्तिगत मामलों में आत्ममंथन का समय हो सकता है. आमदनी बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन खर्च भी बढ़ सकता है. स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें. किसी भी बड़े आर्थिक फैसले में जल्दबाजी न करें. The post सूर्य ग्रहण का राशिफल: आज बदलेगी ग्रहों की चाल, जानें मेष से मीन तक का ऐसा रहेगा हाल appeared first on Naya Vichar.

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शराबबंदी के 10 साल, बिहार में आखिर क्या-क्या बदला, आंकड़ों से समझिए एक-एक बात

Bihar Sharabbandi: बिहार में शराबबंदी को लागू हुए 10 साल हो चुके हैं. 1 अप्रैल 2016 को जब तत्कालीन नीतीश कुमार प्रशासन ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, तब इसे सिर्फ शराब की बिक्री रोकने वाला कानून नहीं बताया गया था. इसके पीछे एक महत्वपूर्ण सामाजिक उद्देश्य था. प्रशासन का तर्क था कि अगर शराब आसानी से उपलब्ध नहीं होगी तो घरेलू हिंसा कम होगी, स्त्रीओं के खिलाफ अपराध घटेंगे, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और शराब पर खर्च होने वाला पैसा बच्चों की पढ़ाई और घर की दूसरी जरूरतों पर खर्च होगा. शुरुआत में इस फैसले को स्त्रीओं का व्यापक समर्थन भी मिला. लेकिन 10 साल बाद तस्वीर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या बिहार में शराबबंदी ने अपने उन सामाजिक लक्ष्यों को हासिल किया, जिनके लिए इसे लागू किया गया था? क्या शराब पीने वालों की संख्या वास्तव में कम हुई? क्या घरेलू हिंसा और स्त्रीओं के खिलाफ अपराध घटे? क्या परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी? या फिर शराब की मांग खत्म होने के बजाय उसका रास्ता बदल गया और वैध शराब की जगह अवैध शराब, तस्करी और दूसरे नशीले पदार्थों ने ले ली? इन्हीं सवालों के बीच देश की प्रतिष्ठित आर्थिक नीति अनुसंधान संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च यानी NCAER की एक रिसर्च ने बिहार की शराबबंदी को लेकर बहस फिर तेज कर दी है. इंडिया पॉलिसी फोरम में पेश किए गए रिसर्च पेपर ‘बिहार के विकास का व्यापक परिप्रेक्ष्य: उपलब्धियां, अपूर्ण एजेंडा और आगे की राह’ में रत्ना सहाय के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों की टीम ने बिहार के विकास से जुड़े कई पहलुओं का स्टडी किया है. रिपोर्ट में शराबबंदी को लेकर शोधकर्ताओं ने बेहद महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं और प्रशासन को पूर्ण शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित या विनियमित बिक्री की दिशा में जाने की सलाह दी है. लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है. क्योंकि दूसरी तरफ NFHS के आंकड़े बताते हैं कि शराब की खपत में बड़ी गिरावट आई है. तो फिर असली तस्वीर क्या है? आइए आंकड़ों और दावों के जरिए समझते हैं कि बिहार में शराबबंदी के 10 साल में आखिर बदला क्या? पहले समझिए, शराबबंदी लागू करने की जरूरत क्यों महसूस हुई थी? 1 अप्रैल 2016 को बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई. उस समय प्रशासन का सबसे बड़ा तर्क था कि शराब सिर्फ व्यक्ति की आदत नहीं, बल्कि परिवार और समाज की समस्या है. मान्यता यह थी कि शराब की वजह से घरेलू हिंसा बढ़ती है. शराब पर पैसा खर्च होने से परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती है और इसका सबसे ज्यादा असर स्त्रीओं और बच्चों पर पड़ता है. प्रशासन को उम्मीद थी कि शराब की उपलब्धता बंद होने के बाद परिवार की आय का इस्तेमाल दूसरी जरूरतों के लिए होगा. यही वजह थी कि शराबबंदी को सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि स्त्री सुरक्षा, परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुधार का फैसला बताया गया. स्त्रीओं ने भी इस फैसले का बड़े स्तर पर समर्थन किया. लेकिन सवाल यही है कि 10 साल बाद उस समर्थन और उम्मीद का परिणाम क्या निकला? स्त्रीओं के खिलाफ हिंसा पर क्या असर पड़ा? NCAER की रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है. रिसर्चर्स के मुताबिक, शराबबंदी का प्रमुख उद्देश्य स्त्रीओं के खिलाफ हिंसा और घरेलू हिंसा को कम करना था. लेकिन आंकड़ों के विश्लेषण से यह साफ नहीं दिखता कि शराबबंदी के बाद स्त्रीओं के खिलाफ अपराधों में अपेक्षित कमी आई हो. रिसर्च में दावा किया गया है कि शराबबंदी के बाद स्त्रीओं के खिलाफ रिपोर्ट किए गए अपराधों में कमी आने के बजाय वृद्धि हुई. यानी जिस लक्ष्य को शराबबंदी की सबसे बड़ी वजह बताया गया था, उसी पर सवाल खड़ा हो गया. हालांकि यहां एक दूसरा आंकड़ा भी तस्वीर को अलग तरीके से देखने को मजबूर करता है. NFHS के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में शराब की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पुरुषों में शराब की खपत NFHS-4 के अनुसार बिहार में 15 से 49 वर्ष की उम्र के 28.9 प्रतिशत पुरुष शराब पीते थे. NFHS-5 में यह आंकड़ा घटकर 17 प्रतिशत रह गया. NFHS-6 में यह और घटकर 16.5 प्रतिशत दर्ज किया गया. यानी शराब पीने वाले पुरुषों के अनुपात में बड़ी गिरावट आई. तो सवाल फिर वही है- अगर शराब पीने वालों की संख्या इतनी कम हुई, तो स्त्रीओं के खिलाफ हिंसा में अपेक्षित गिरावट क्यों नहीं दिखी? इसका एक जवाब यह हो सकता है कि स्त्रीओं के खिलाफ होने वाला हर अपराध सिर्फ शराब की वजह से नहीं होता. इसके पीछे सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक समेत कई दूसरे कारण भी होते हैं. यही वजह है कि शराबबंदी के असर को सिर्फ अपराध के आंकड़ों से देखना भी पूरी तस्वीर नहीं देता. घरेलू हिंसा का आंकड़ा क्या कहता है? NFHS के आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखते हैं. NFHS-4 में अत्यधिक शराब पीने वाले पतियों की 83.1 प्रतिशत पत्नियों ने शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव होने की बात कही थी. वहीं शराब नहीं पीने वाले पतियों के मामलों में यह आंकड़ा 31.7 प्रतिशत था. NFHS-5 में अत्यधिक शराब पीने वाले पतियों के मामलों में यह आंकड़ा 83.3 प्रतिशत रहा, जबकि शराब नहीं पीने वाले पतियों के मामलों में यह 33.8 प्रतिशत दर्ज किया गया. यानी शराब और घरेलू हिंसा के बीच संबंध जरूर दिखाई देता है. लेकिन दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट है कि शराब न पीने वाले परिवारों में भी घरेलू हिंसा के मामले मौजूद हैं. इसलिए सवाल यह नहीं है कि शराब घरेलू हिंसा का कारण है या नहीं. सवाल यह है कि क्या शराब बंद करने भर से घरेलू हिंसा खत्म हो सकती है? NCAER की रिसर्च इसी बिंदु पर शराबबंदी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है. गर्भावस्था के दौरान हिंसा में क्या हुआ? NFHS-5 के अनुसार बिहार में गर्भावस्था के दौरान हिंसा के मामलों में 2 प्रतिशत की कमी आई. तुलना करें तो उत्तर प्रदेश में यह कमी 0.7 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 1.5 प्रतिशत रही. यानी इस मोर्चे पर बिहार में गिरावट पड़ोसी राज्यों की तुलना में ज्यादा रही. इस आंकड़े को शराबबंदी के सकारात्मक प्रभाव के रूप में भी देखा जा सकता है. लेकिन पूरी तस्वीर में अवैध

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भारतीय खेल जगत में 12 अगस्त क्यों है खास? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

Gold Medal In Hockey: हिंदुस्तानीय हॉकी के लिए कैलेंडर की तारीखें सिर्फ दिन और महीने का हिसाब नहीं हैं. कुछ तारीखें ऐसी हैं, जिनसे मैदान पर मिली जीत, देश की भावनाएं और खिलाड़ियों की मेहनत की कहानी जुड़ी हुई है. 12 अगस्त भी ऐसी ही तारीख है. इस दिन हिंदुस्तानीय हॉकी ने ओलंपिक में ऐसे मुकाम हासिल किए, जिनकी चर्चा आज भी होती है. खास बात यह है कि 12 अगस्त को हिंदुस्तान ने ओलंपिक में दो बार गोल्ड मेडल जीतकर इस दिन को हॉकी के लिए खास बना दिया. आजाद हिंदुस्तान का पहला ओलंपिक गोल्ड View on Instagram 12 अगस्त 1948 को लंदन ओलंपिक में हिंदुस्तानीय हॉकी टीम मैदान पर उतरी. देश को आजाद हुए अभी सिर्फ एक साल हुआ था. इससे पहले हिंदुस्तान ओलंपिक में हिस्सा लेता रहा था, लेकिन यह पहला मौका था जब हिंदुस्तानीय खिलाड़ी तिरंगे के नीचे मैदान में उतर रहे थे. फाइनल में हिंदुस्तान के सामने वही ब्रिटेन था, जिसने करीब दो शताब्दियों तक हिंदुस्तान पर शासन किया था. फेमस वेम्बली में स्पोर्ट्सा गया मैच मुकाबला लंदन के मशहूर वेम्बली स्टेडियम में स्पोर्ट्सा गया. करीब 10 हजार दर्शकों के सामने हिंदुस्तानीय टीम ने शानदार स्पोर्ट्स दिखाते हुए ब्रिटेन को 4-0 से हरा दिया. बारिश से मैदान गीला था और परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों के पास बेहतरीन गेंद नियंत्रण, सटीक पासिंग और शानदार तालमेल था. ब्रिटेन के खिलाफ जीत के साथ हिंदुस्तानीय टीम ने स्वतंत्र हिंदुस्तान के लिए पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल जीत लिया. Also Read: टीम इंडिया के टी20 कप्तान बाली में मना रहे छुट्टियां, शर्टलेस फोटो देखकर फैंस ऐसे कर रहे रिएक्ट बंटवारे के बाद बदली थी टीम की तस्वीर View on Instagram 1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन साथ ही विभाजन का दर्द भी मिला. इसका असर हिंदुस्तानीय हॉकी टीम पर भी पड़ा. पंजाब के कई बेहतरीन खिलाड़ी पाकिस्तान चले गए. इनमें नियाज खान, शाह रुख मोहम्मद, अजीज मलिक और अली शाह दारा जैसे नाम शामिल थे. इसके बावजूद हिंदुस्तानीय टीम ने अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी. तत्कालीन इंडियन हॉकी फेडरेशन के प्रमुख नवल टाटा ने खिलाड़ियों के लिए मुंबई में कैंप और अभ्यास मैच आयोजित करवाए. टीम को बेहतर तैयारी का समय मिले, इसके लिए खिलाड़ियों को जहाज की जगह हवाई यात्रा से लंदन भेजा गया. कप्तान किशन लाल के नेतृत्व वाली टीम में केडी सिंह बाबू, लेस्ली क्लॉडियस, केशव दत्त, रणधीर सिंह जेंटल और गोलकीपर आर. फ्रांसिस जैसे खिलाड़ी शामिल थे. Also Read: प्रैक्टिस सेशन के बाद रवींद्र जडेजा ने किया ‘पुष्पा’ वाला मूव, वीडियो देख फैंस को आई अल्लू अर्जुन की याद फिर 8 साल बाद 12 अगस्त को ही आया गोल्ड 12 अगस्त की तारीख ने हिंदुस्तानीय हॉकी को एक और यादगार पल दिया. 1956 मेलबर्न ओलंपिक में हिंदुस्तानीय टीम ने लगातार तीसरा ओलंपिक स्वर्ण जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में कदम रखा. इस बार फाइनल में सामने पाकिस्तान था. मुकाबला बेहद कड़ा रहा, लेकिन 38वें मिनट में फुलबैक रणधीर सिंह जेंटल ने गोल कर हिंदुस्तान को बढ़त दिलाई. यही गोल निर्णायक साबित हुआ और हिंदुस्तान ने पाकिस्तान को हराकर लगातार तीसरा ओलंपिक स्वर्ण अपने नाम कर लिया. Also Read: हिंदुस्तान-अफगानिस्तान T20 सीरीज की तारीखें तय, 13 सितंबर से दिल्ली में भिड़ेंगी दोनों टीमें The post हिंदुस्तानीय स्पोर्ट्स जगत में 12 अगस्त क्यों है खास? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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