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September 23, 2026

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23 सितंबर की टॉप 20 खबरें: जमुई मुठभेड़ में मुख्य आरोपित नंदन यादव घायल, IIT Bombay छात्र मौत मामले में जांच तेज

1. जमुई वायरल वीडियो मामले में 5 पकड़े गये, मुठभेड़ में नंदन यादव घायल, एसपी ने बतायी पूरी कहानी नाबालिग छात्रा से बदसलूकी से जुड़े वायरल वीडियो मामले में जमुई पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए अब तक तीन नाबालिगों को पकड़ा है, जबकि दो को गिरफ्तार किया है. मुख्य आरोपित नंदन यादव और हरेराम यादव को मंगलवार को सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव के समीप नदी किनारे से गिरफ्तार किया गया. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 2. IIT Bombay छात्र मौत मामला: CCTV फुटेज खंगाल रही क्राइम ब्रांच, परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक की जांच IIT Bombay के छात्र साहिल रविंद्र वाकोड़े की मौत के मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच जांच कर रही है. जांच टीम परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है. क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि CCTV फुटेज जांच का अहम हिस्सा है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 3. 72nd National Film Awards: ‘Article 370’ के लिए यामी गौतम को मिला बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड, पति आदित्य धर ने जमकर बजाईं तालियां हिंदुस्तानीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में अभिनेत्री यामी गौतम ने इतिहास रच दिया है. गुजरात के एकता नगर केवड़िया में मंगलवार 22 सितंबर 2026 को आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यामी गौतम को फिल्म ‘Article 370’ में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बेस्ट एक्ट्रेस के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 4. Video : 320 की रफ्तार में भी नहीं लगेगा झटका? मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में पहली बार लगी ये खास तकनीक हिंदुस्तानीय रेलवे में पहली बार मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट में ऐसे खास टर्नआउट लगाए जा रहे हैं, जिनमें मूवेबल क्रॉसिंग यानी स्विंग-नोज तकनीक का इस्तेमाल होगा. ये टर्नआउट 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली ट्रेनों के लिए बनाए गए हैं. इसकी खासियत यह है कि ट्रैक पर पहियों के गुजरने के दौरान कोई गैप नहीं रहता. इससे ट्रेन के पहियों को बेहतर सहारा मिलता है और झटके, कंपन, शोर और ट्रैक की टूट-फूट कम होती है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 5. IIT में 5 साल में 53 की मौत, साहिल की मौत पर बवाल के बीच SC-ST OBC छात्रों को लेकर आया ये आंकड़ा बीटेक दूसरे वर्ष के छात्र साहिल की मौत के बाद आक्रोशित छात्रों ने IIT परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया. परिवार ने साहिल की मौत के पीछे जातिगत उत्पीड़न को वजह बताया. मुंबई पुलिस ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोप के आधार पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है. अब देश के शिक्षण संस्थानों में जातीय आधार पर उत्पीड़न और आत्महत्या की घटनाओं पर नई बहस छिड़ गई है. SC-ST और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों से जुड़े आत्महत्या के मामलों की गूंज संसद में भी सुनाई देती रही है. साल 2024 में इसे लेकर सांसद एंटो एंटनी ने लोकसभा में सवाल भी पूछा था. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 6. राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने के बाद क्या है रवि राज मुर्मू का अगला कदम ? नया विचार से खास बातचीत में बतायी भविष्य की योजना जादूगोड़ा के रवि राज मुर्मू के लिए मंगलवार का दिन सिर्फ एक पुरस्कार मिलने का दिन नहीं था, बल्कि वर्षों के संघर्ष, सपनों और अपनी मिट्टी से जुड़ी कहानियों के राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का क्षण था. संताली लघु फिल्म ‘आंगेन’ के निर्देशन के लिए उन्हें 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में ‘बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर’ (नॉन-फीचर) पुरस्कार से सम्मानित किया गया. गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 7. ICC T20I Rankings: एशियन गेम्स में शतक जड़ने के बाद शेफाली वर्मा की लंबी छलांग, टॉप-4 में पहुंचीं; देखें Top-10 की सूची ICC Women’s T20I Rankings: एशिया कप और एशियन गेम्स में बल्ले से लगातार शानदार प्रदर्शन का फायदा हिंदुस्तानीय सलामी बल्लेबाज शैफाली वर्मा को आईसीसी की ताजा टी20 इंटरनेशनल रैंकिंग में मिला है. शैफाली ने दो स्थान की छलांग लगाकर बल्लेबाजी रैंकिंग में चौथा स्थान हासिल कर लिया है. उनके खाते में अब 756 रेटिंग अंक हैं. इस दौरान उन्होंने अपनी साथी स्मृति मंधाना और वेस्टइंडीज की हेली मैथ्यूज को पीछे छोड़ा है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 8. Chatra: टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू की मौत के बाद चतरा के लूटूं और सोहावन गांव में नहीं मना करमा, तीन दिनों से पसरा है मातम टीएसपीसी के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोगता की मौत के बाद चतरा जिले के लावालौंग क्षेत्र के दो गांव लूटूं और सोहावन गांव में गम का माहौल बना हुआ है. मंगलवार को दोनों गांवों में करमा पर्व नहीं मनाया गया. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन दिनों से दोनों गांव शोक में डूबे हैं और इस दौरान दो दिनों तक कई घरों में चूल्हा भी नहीं जला. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 9. SC/ST एक्ट जैसा कानून दुनिया के 7 देशों में कैसे काम करता है? जानिए आदिवासी और अल्पसंख्यक अधिकारों की कानूनी सुरक्षा हिंदुस्तान का SC/ST Prevention of Atrocities Act, 1989 अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अत्याचार रोकने, विशेष अदालतों और पीड़ितों के राहत-पुनर्वास की व्यवस्था करता है. लेकिन अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और अन्य देशों में ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा कैसे होती है? यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 10. ईरान की जंग से झुलसी दुनिया, बढ़ते कच्चे तेल के दाम ने बढ़ाई चिंता, क्या ये मंदी की आहट है? मिडिल ईस्ट की जंग की काली छाया से दुनिया हलकान और हैरान है. ईरान के साथ इजराइल और अमेरिका के संग्राम की तपिश से दुनिया झुलस रही है. इतिहास के पन्नों में दर्ज जंग की दास्तान हमेशा यही बताती है कि युद्ध ने बर्बादी और बेकारी ही हर तरफ फैलाई है. इसके दरीचे में खून की छींटे, बेपनाह दर्द, जमींदोज हसरतें, बिछड़ाव और बिखराव ही समेटे हुए हैं. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 11. शरजील इमाम को 7 दिन की अंतरिम जमानत, दो कजिन की शादी में शामिल होने की मिली अनुमति शरजील इमाम को अपने दो कजिन की शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की अंतरिम जमानत

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Prem Chopra Birthday: कभी अखबार में की नौकरी, फिर बने बॉलीवुड के सबसे यादगार विलेन, एक डायलॉग ने बदल दी पूरी पहचान

बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने पर्दे पर ऐसा असर छोड़ा कि उनका किरदार खत्म होने के बाद भी लोगों के जेहन में बना रहा. प्रेम चोपड़ा भी ऐसे ही कलाकार हैं. कभी हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचे प्रेम चोपड़ा ने आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे पहचाने जाने वाले विलेन की पहचान बनाई. उनकी खलनायक वाली छवि का असर इतना गहरा था कि एक बार उन्हें देखकर एक शख्स ने ऐसी बात कह दी, जिसे सुनकर उनके पिता भी हैरान रह गए थे. लाहौर में हुआ जन्म, शिमला में बीता बचपन प्रेम चोपड़ा का जन्म 23 सितंबर 1935 को लाहौर में हुआ था. हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद उनका परिवार शिमला आ गया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में करियर बनाने का फैसला किया. हालांकि, उनके पिता चाहते थे कि वह पढ़-लिखकर कोई अच्छा पेशा अपनाएं. लेकिन प्रेम चोपड़ा का सपना फिल्मों में काम करना था. इसी सपने को लेकर वह मुंबई पहुंचे और यहां से उनके लंबे फिल्मी सफर की शुरुआत हुई. प्रेम चोपड़ा फिल्मों में आने से पहले की नौकरी मुंबई आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलना उनके लिए आसान नहीं था. अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया के सर्कुलेशन विभाग में नौकरी की. नौकरी के साथ-साथ वह फिल्मों में काम पाने के लिए स्टूडियो के चक्कर भी लगाते रहे. धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में मौके मिलने लगे और उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी. हीरो बनने आए थे, लेकिन विलेन ने बदल दी किस्मत प्रेम चोपड़ा फिल्मों में हीरो बनने की चाहत लेकर आए थे, लेकिन उन्हें लगातार नकारात्मक किरदार मिलने लगे. उन्होंने इन भूमिकाओं को इतनी मजबूती से निभाया कि धीरे-धीरे उनकी पहचान ही बॉलीवुड के विलेन के तौर पर बन गई. फिल्म ‘उपकार’ के बाद उनके करियर को बड़ा मोड़ मिला. इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई फिल्मों में यादगार खलनायक के किरदार निभाए. View on Instagram जब पार्क में किसी ने चिल्लाकर कहा- ‘अपनी बेटियों को छुपा लो!’ प्रेम चोपड़ा की पर्दे वाली छवि का असर असल जिंदगी में भी देखने को मिला था. एक इंटरव्यू में उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया था. उन्होंने बताया था कि एक बार वह अपने पिता के साथ चंडीगढ़ के एक पार्क में घूम रहे थे. तभी वहां मौजूद एक शख्स ने उन्हें पहचान लिया और जोर से चिल्लाते हुए कहा- ‘अपनी-अपनी बेटियों को छुपा लो, प्रेम चोपड़ा आ गया’ यह सुनकर उनके पिता हैरान रह गए थे. हालांकि, प्रेम चोपड़ा ने उन्हें समझाया कि लोग उन्हें इसलिए डरावना मानते हैं क्योंकि उन्होंने फिल्मों में विलेन के किरदार इतने प्रभावी तरीके से निभाए हैं. यही किस्सा बताता है कि पर्दे पर निभाए गए उनके किरदारों का दर्शकों पर कितना गहरा असर था. ‘मेरा नाम प्रेम… प्रेम चोपड़ा’ से घर-घर में पहचान प्रेम चोपड़ा के करियर का सबसे यादगार दौर उनकी फिल्मों और दमदार डायलॉग्स से जुड़ा रहा. ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया की फिल्म ‘बॉबी’ में उनका किरदार आज भी लोगों को याद है. फिल्म में उनका डायलॉग ‘मेरा नाम प्रेम, प्रेम चोपड़ा’ बेहद मशहूर हुआ. यह लाइन उनकी पहचान का हिस्सा बन गई और आज भी बॉलीवुड के चर्चित डायलॉग्स में गिनी जाती है. View on Instagram राजेश खन्ना के साथ किया कई फिल्मों में काम प्रेम चोपड़ा और राजेश खन्ना ने भी कई फिल्मों में साथ काम किया. दोनों करीब 19 फिल्मों में साथ नजर आए. इनमें प्रेम चोपड़ा को अक्सर राजेश खन्ना के किरदार के सामने खड़े विरोधी के रूप में देखा गया. ‘कटी पतंग’, ‘दो रास्ते’, ‘दाग’, ‘अजनबी’ और ‘नमक हराम’ जैसी फिल्मों में दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने देखा. 380 से ज्यादा फिल्मों का हिस्सा रहे प्रेम चोपड़ा प्रेम चोपड़ा का फिल्मी करियर छह दशक से ज्यादा लंबा रहा है. इस दौरान उन्होंने हिंदी और पंजाबी सिनेमा की 380 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. ‘बॉबी’, ‘दो अनजाने’, ‘क्रांति’, ‘काला पत्थर’, ‘नगीना’, ‘मर्द’ और ‘कटी पतंग’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदारों ने उन्हें खास पहचान दिलाई. बाद के दौर में उन्होंने नकारात्मक भूमिकाओं के अलावा चरित्र और सकारात्मक किरदार भी निभाए. View on Instagram ‘एनिमल’ में भी आए नजर बदलते दौर के साथ प्रेम चोपड़ा ने फिल्मों में अपनी भूमिकाएं भी बदलीं. वह ‘कोई मिल गया’ और ‘रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए. हाल के वर्षों में उन्होंने ‘एनिमल’ में भी काम किया. यानी जिस कलाकार ने कभी हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई का रुख किया था, वही आगे चलकर बॉलीवुड के सबसे यादगार विलेन में शामिल हो गया. प्रेम चोपड़ा की कहानी उनके लंबे फिल्मी सफर और पर्दे पर निभाए किरदारों के असर की एक खास मिसाल है. ये भी पढ़ें: Bigg Boss 20: “शायद मैं ही गधी हूं…”, बिग बॉस 20 में आम्रपाली दुबे ने खुद को क्यों कहा ऐसा? गुल्लू के गेम पर उठी बहस ये भी पढ़ें: 72nd National Film Awards: ‘Article 370’ के लिए यामी गौतम को मिला बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड, पति आदित्य धर ने जमकर बजाईं तालियां The post Prem Chopra Birthday: कभी अखबार में की नौकरी, फिर बने बॉलीवुड के सबसे यादगार विलेन, एक डायलॉग ने बदल दी पूरी पहचान appeared first on Naya Vichar.

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पत्रकार बनना चाहते थे, पिता ने बनाया इंजीनियर, फिर Adobe को बदलकर रख दिया… ऐसी है CEO शंतनु नारायण की कहानी

Adobe का नाम सुनते ही Photoshop, Acrobat और कई दूसरे क्रिएटिव सॉफ्टवेयर याद आते हैं. लेकिन इस बड़ी टेक कंपनी को लंबे समय तक संभालने वाले शख्स की कहानी किसी टेक्नोलॉजी के साथ नहीं, बल्कि एक अलग सपने से शुरू हुई थी. शंतनु नारायण बचपन में इंजीनियर नहीं, बल्कि पत्रकार बनना चाहते थे. उनके माता-पिता चाहते थे कि वह इंजीनियरिंग पढ़ें और आखिरकार उन्होंने वही किया. आगे चलकर यही शख्स Adobe का CEO बना और कंपनी के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव लेकर आया. ‘टेक टाइकून्स की कहानी’ की इस कड़ी में आइए जानते हैं शंतनु नारायण के बारे में, उनके बचपन से लेकर Adobe के CEO बनने तक के सफर में छिपे उन किस्सों के बारे में, जिन्हें शायद बहुत कम लोग जानते हैं. जिस कंपनी ने Pictra को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई, वहीं पहुंच गए Pictra की कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ यहीं आता है. Adobe ने भी कभी Pictra को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी, हालांकि बाद में यह सौदा नहीं हुआ. इसके बाद शंतनु ने सोचा कि अगर वह Adobe के साथ काम करें तो उन्हें एक बड़ी कंपनी के साथ काम करने और कुछ बड़ा सीखने का मौका मिलेगा. आखिरकार 1998 में वह Adobe में शामिल हो गए. यह फैसला आगे चलकर उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. Adobe में तेजी से बढ़ती गई जिम्मेदारी Adobe में शंतनु ने Vice President और General Manager के तौर पर शुरुआत की. इसके बाद वह अलग-अलग बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचे. 1998 में Adobe से जुड़े 2005 में President और COO बने 2007 में CEO बने 2017 में कंपनी के Chairman बने. यानी जिस कंपनी में वह नौकरी करने आए थे, कुछ ही वर्षों बाद उसी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उनके पास थी. Adobe को डेस्कटॉप से क्लाउड तक ले जाने में बड़ी भूमिका शंतनु के CEO बनने के समय टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही थी. Adobe का पुराना मॉडल मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर को डेस्कटॉप पर बेचने से जुड़ा था. शंतनु के नेतृत्व में कंपनी ने अपने क्रिएटिव प्रोडक्ट्स को क्लाउड-बेस्ड सब्सक्रिप्शन मॉडल की तरफ ले जाने पर बड़ा दांव लगाया. यह बदलाव आसान नहीं था, क्योंकि कस्टमर्स को भी नए तरीके से सॉफ्टवेयर यूज करने की आदत डालनी थी. Adobe की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, शंतनु के नेतृत्व में कंपनी ने अपने क्रिएटिव सॉफ्टवेयर बिजनेस को क्लाउड-बेस्ड सब्सक्रिप्शन मॉडल में बदला और डिजिटल एक्सपीरियंस बिजनेस को भी तेजी से आगे बढ़ाया. यही वजह है कि उनकी कहानी सिर्फ एक हिंदुस्तानीय के बड़ी विदेशी कंपनी का CEO बनने की कहानी नहीं है. यह उस इंसान की कहानी भी है जिसने अपने करियर में कई बार बदलती टेक्नोलॉजी के हिसाब से खुद को बदला. आज भी रोज माता-पिता को फोन करते हैं शंतनु की जिंदगी का एक छोटा लेकिन बेहद दिलचस्प किस्सा उनके एक इंटरव्यू में सामने आया. उन्होंने बताया कि वह दुनिया में कहीं भी हों, अपने दिन की शुरुआत अपने माता-पिता को फोन करके करते हैं. आज वीडियो कॉल की वजह से यह और आसान हो गया है. उन्होंने बताया कि वह इस आदत को लेकर काफी नियमित हैं और यह उन्हें उन लोगों की याद दिलाती है जिन्होंने उनकी जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर डाला. 18 साल बाद CEO पद से ट्रांजीशन का फैसला शंतनु नारायण करीब 18 साल तक Adobe के CEO रहे. मार्च 2026 में Adobe ने घोषणा की कि वह नए CEO की नियुक्ति के बाद CEO पद से ट्रांजीशन करेंगे और इसके बाद चेयरमैन के रूप में कंपनी से जुड़े रहेंगे. कंपनी ने उनके कार्यकाल के दौरान Adobe के ट्रासंफॉर्मशन और AI के दौर के लिए कंपनी को तैयार करने में उनके योगदान का भी उल्लेख किया. नोट: यह लेख नया विचार की ‘टेक टायकून्स की कहानी’ सीरीज का हिस्सा है. इस सीरीज के जरिए हम टेक जगत की अलग-अलग दिग्गज हस्तियों की कहानी आपके सामने ला रहे हैं. जानेंगे कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कैसे की, किन चुनौतियों का सामना किया और किस तरह अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचे. इस सीरीज की अगली कड़ी में हम 30 सितंबर को टेक इंडस्ट्री के एक और बड़े नाम की कहानी आपके सामने लेकर आएंगे. तब तक जुड़े रहिए हमारे साथ. ये भी पढ़ें: गांव के स्कूल में फर्श पर बैठकर पढ़े, PhD को बताया अपनी असफलता और फिर खड़ी की Zoho, जानिए श्रीधर वेम्बू की कहानी The post पत्रकार बनना चाहते थे, पिता ने बनाया इंजीनियर, फिर Adobe को बदलकर रख दिया… ऐसी है CEO शंतनु नारायण की कहानी appeared first on Naya Vichar.

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Ambati Rayadu 41st Birthday: 27 की उम्र में डेब्यू और 6 साल बाद ले लिया संन्यास, ऐसा रहा रायडू का क्रिकेट करियर

Ambati Rayadu 41st Birthday: हिंदुस्तानीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जिनमें प्रतिभा की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उन्हें टीम इंडिया में अपनी जगह बनाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. अंबाती रायडू भी ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल रहे. घरेलू क्रिकेट में कम उम्र में अपनी पहचान बनाने वाले रायडू को हिंदुस्तानीय टीम की जर्सी पहनने के लिए 27 साल की उम्र तक इंतजार करना पड़ा. इंटरनेशनल क्रिकेट में उनका सफर भी ज्यादा लंबा नहीं चला और करीब छह साल बाद उन्होंने संन्यास का ऐलान कर दिया. आज 23 सितंबर को अंबाती रायडू अपना 41वां जन्मदिन मना रहे हैं. उनके क्रिकेट करियर को याद करें तो इसमें शानदार पारियां, आईपीएल की सफलता, टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए संघर्ष और कई विवाद शामिल रहे. 16 साल की उम्र में शुरू किया फर्स्ट क्लास करियर अंबाती रायडू फोटो—एक्स अंबाती रायडू का जन्म 23 सितंबर 1985 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर में हुआ था. उन्होंने महज 16 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा. हैदराबाद की ओर से स्पोर्ट्सते हुए उन्होंने कम उम्र में ही अपनी बल्लेबाजी से ध्यान खींचा. साल 2002 में इंग्लैंड दौरे पर हिंदुस्तान की अंडर-19 टीम के लिए रायडू ने नाबाद 177 रन की पारी स्पोर्ट्सी. इसके बाद घरेलू क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन चर्चा में रहा. उन्हें हिंदुस्तानीय क्रिकेट के उभरते हुए प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में गिना जाने लगा. अंडर-19 टीम की कप्तानी भी की रायडू की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें हिंदुस्तान की अंडर-19 टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी भी मिली. 2004 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में उन्होंने हिंदुस्तानीय टीम का नेतृत्व किया. टीम खिताब नहीं जीत सकी, लेकिन रायडू का नाम युवा क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुका था. हालांकि, घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करने के बावजूद टीम इंडिया तक पहुंचने में उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा. ये भी पढ़ें: India vs Japan T20I: आखिर कौन है ये 17 साल का गेंदबाज, जिसने पहले ओवर में अभिषेक को Duck पर तो दूसरे में श्रेयस को बनाया अपना शिकार 27 साल की उम्र में मिला टीम इंडिया का बुलावा रायडू ने 24 जुलाई 2013 को जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में अपना वनडे डेब्यू किया. उस समय उनकी उम्र 27 साल थी. डेब्यू मैच में ही उन्होंने 84 गेंदों पर नाबाद 63 रन की पारी स्पोर्ट्सकर अपनी बल्लेबाजी की क्षमता दिखाई. आंकड़ा वनडे टी20 इंटरनेशनल आईपीएल मैच 55 6 203 पारी 50 5 187 रन 1,694 42 4,348 गेंदें 2,143 50 3,409 सर्वोच्च स्कोर 124 20 100 बल्लेबाजी औसत 47.06 10.50 28.05 स्ट्राइक रेट 79.05 84.00 127.55 नाबाद 14 1 32 चौके 145 5 359 छक्के 30 0 173 डक 3 2 15 50+ स्कोर 10 0 22 शतक 3 0 1 वह हिंदुस्तान की ओर से वनडे डेब्यू मैच में सबसे ज्यादा उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बने. हालांकि, इसके बाद भी टीम में उनकी जगह लंबे समय तक पक्की नहीं हो सकी और वह लगातार अंदर-बाहर होते रहे. वनडे में शानदार आंकड़े, टेस्ट स्पोर्ट्सने का मौका नहीं मिला रायडू 2019 में आखिरी बार हिंदुस्तान की ओर से मैदान पर उतरे. यानी टीम इंडिया के लिए उनका इंटरनेशनल सफर करीब छह साल ही चला. अंबाती रायडू ने हिंदुस्तान के लिए 55 वनडे मैच स्पोर्ट्से. इस दौरान उन्होंने 47.05 की औसत से 1,694 रन बनाए. उनके नाम तीन शतक और 10 अर्धशतक दर्ज हैं. टी20 इंटरनेशनल में रायडू को सिर्फ छह मैच स्पोर्ट्सने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने 42 रन बनाए. वहीं, उन्हें टेस्ट क्रिकेट स्पोर्ट्सने का मौका कभी नहीं मिला. यही वजह रही कि उनका इंटरनेशनल करियर प्रतिभा और मौकों के बीच संघर्ष की कहानी भी बन गया. आईपीएल में चमका रायडू का बल्ला टीम इंडिया में आने से पहले और बाद में आईपीएल ने रायडू के करियर में अहम भूमिका निभाई. मुंबई इंडियंस ने उन्हें 2010 में अपनी टीम में शामिल किया. इसके बाद रायडू ने आईपीएल में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और टीम के लिए कई अहम पारियां स्पोर्ट्सीं. बाद में वह चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा बने और इस टीम के साथ भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई. आईपीएल में उनका प्रदर्शन उनके इंटरनेशनल करियर की तुलना में कहीं ज्यादा लंबा और प्रभावशाली रहा. ये भी पढ़ें: Richest Cricket League: आखिर कौन है दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग? कितने नंबर पर है IPL, देखें टॉप-10 की लिस्ट मैदान पर गुस्से को लेकर भी रहे चर्चा में रायडू का नाम सिर्फ उनकी बल्लेबाजी की वजह से ही चर्चा में नहीं रहा. मैदान पर उनका गुस्सा भी कई बार सुर्खियां बना. आईपीएल 2012 में मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के मुकाबले में उनकी जहीर खान से बहस हो गई थी. दोनों के बीच विवाद बढ़ने पर एबी डिविलियर्स और धवल कुलकर्णी ने बीच-बचाव किया था. इसके अलावा 2016 में मुंबई इंडियंस के लिए स्पोर्ट्सते हुए रायडू की हरभजन सिंह से भी मैदान पर बहस हुई थी. राइजिंग पुणे के खिलाफ मुकाबले में यह घटना चर्चा का विषय बनी थी. 2019 वर्ल्ड कप चयन ने बदल दी कहानी रायडू के करियर का सबसे चर्चित दौर 2019 में आया. विश्व कप के लिए हिंदुस्तानीय टीम में उनकी जगह विजय शंकर को चुना गया. उस समय मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने विजय शंकर को ‘थ्री-डी प्लेयर’ बताया था. इसके बाद रायडू ने सोशल मीडिया पर ‘थ्री-डी चश्मा’ वाला ट्वीट किया, जिसे चयनकर्ताओं पर तंज के तौर पर देखा गया. इस घटनाक्रम के बाद रायडू ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया. हालांकि, बाद में उन्होंने अपना संन्यास वापस ले लिया. इसके बावजूद वह दोबारा लंबे समय तक टीम इंडिया का हिस्सा नहीं बन सके. ये भी पढ़ें: Lala Amarnath Birthday: स्वतंत्र हिंदुस्तान के पहले टेस्ट कप्तान थे अमरनाथ, पहला शतक जड़ते ही स्त्रीओं ने फेंक दिए थे मंगलसूत्र The post Ambati Rayadu 41st Birthday: 27 की उम्र में डेब्यू और 6 साल बाद ले लिया संन्यास, ऐसा रहा रायडू का क्रिकेट करियर appeared first on Naya Vichar.

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धोने के बाद तौलिया हो जाता है खुरदरा? इन आसान तरीकों से रखें उसे हमेशा सॉफ्ट

How to keep towels soft: ‘काम की बात’ सीरीज में आज बात करेंगे ऐसी चीज की, जिसका इस्तेमाल हम रोज नहाने के बाद करते हैं वह है तौलिया. नहाने के बाद साफ, सूखा और मुलायम तौलिया इस्तेमाल करने का एहसास ही अलग होता है. लेकिन कई बार तौलिया बार-बार धोने के बाद पहले जैसा सॉफ्ट नहीं रहता. धोने के बाद यह इतना सख्त हो जाता है कि शरीर पर इस्तेमाल करते समय भी खुरदुरा महसूस होता है. आज की ‘काम की बात’ में जानेंगे कि धोने के बाद सख्त हो चुके तौलिये को दोबारा मुलायम कैसे बनाया जा सकता है. साथ ही तौलिया धोते समय किन छोटी-छोटी गलतियों से बचना चाहिए. ज्यादा डिटर्जेंट डालने से बचें (How to keep towels soft) कई लोगों को लगता है कि ज्यादा डिटर्जेंट डालने से तौलिया ज्यादा साफ होगा. लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. कपड़े में जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट रह जाने पर उसके रेशों पर परत जम सकती है. इससे तौलिया खुरदुरा महसूस हो सकता है. इसलिए तौलिया धोते समय डिटर्जेंट की मात्रा कपड़े और वॉशिंग मशीन के हिसाब से ही रखें. बहुत ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल करने से बचें. मशीन को जरूरत से ज्यादा न भरें अगर वॉशिंग मशीन में जरूरत से ज्यादा कपड़े भर दिए जाएं तो तौलिया अच्छी तरह साफ और रिंस नहीं हो पाता. इससे डिटर्जेंट के अवशेष रेशों में रह सकते हैं. तौलिये को धोते समय मशीन में पर्याप्त जगह रखें, ताकि पानी और डिटर्जेंट कपड़े के रेशों तक अच्छी तरह पहुंच सकें और बाद में आसानी से निकल भी जाएं. सिरके से कर सकते हैं रिंस अगर तौलिया लगातार सख्त हो रहा है, तो कभी-कभी आखिरी रिंस में थोड़ी मात्रा में सफेद सिरका इस्तेमाल किया जा सकता है. यह कपड़े में जमा डिटर्जेंट के अवशेष को हटाने में मदद कर सकता है. सिरके को सीधे डिटर्जेंट के साथ मिलाकर न डालें. इसे रिंस साइकिल में अलग से इस्तेमाल करना बेहतर है. हालांकि, अपने वॉशिंग मशीन के निर्देशों को भी जरूर देखें. तौलिया बहुत तेज धूप में न सुखाएं तौलिये को धूप में सुखाने से वह जल्दी सूख जाता है, लेकिन बहुत तेज धूप और लंबे समय तक सीधी गर्मी में रखने से कपड़े के रेशे सख्त महसूस हो सकते हैं. धोने के बाद तौलिये को अच्छी तरह झटक लें और ऐसी जगह सुखाएं जहां हवा का अच्छा आना-जाना हो. इससे तौलिया सूखने के बाद ज्यादा खुरदुरा महसूस नहीं होगा. PC: AI Generated फैब्रिक सॉफ्टनर का इस्तेमाल सोच-समझकर करें तौलिया मुलायम करने के लिए कुछ लोग हर बार फैब्रिक सॉफ्टनर डालते हैं. लेकिन तौलिये में इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल उसकी पानी सोखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. इसलिए अगर आप फैब्रिक सॉफ्टनर इस्तेमाल करते हैं, तो उसे बहुत ज्यादा मात्रा में न डालें और प्रोडक्ट के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करें. धोने के बाद तौलिये को तुरंत सुखाएं गीले तौलिये को लंबे समय तक वॉशिंग मशीन में पड़ा न रहने दें. इससे उसमें बदबू आने के साथ-साथ कपड़ा भी भारी और बासी महसूस हो सकता है. धुलाई पूरी होने के बाद तौलिया तुरंत निकालें, उसे अच्छी तरह झटकें और हवा वाली जगह पर फैलाकर सुखाएं. छोटी-छोटी बातों से तौलिया रहेगा सॉफ्ट तौलिये को मुलायम रखने के लिए सबसे जरूरी है कि उसे सही मात्रा में डिटर्जेंट से धोया जाए. मशीन को जरूरत से ज्यादा न भरा जाए और धुलाई के बाद तुरंत सुखाया जाए. समय-समय पर रिंसिंग पर भी ध्यान दें, ताकि कपड़े में साबुन की परत जमा न हो. इन आसान बातों का ध्यान रखेंगे तो आपका तौलिया लंबे समय तक साफ, आरामदायक और इस्तेमाल करने में बेहतर बना रह सकता है.    यह भी पढ़ें: गमले में लगे पौधे की मिट्टी बार-बार सूख जाती है? अपनाएं ये आसान तरीका The post धोने के बाद तौलिया हो जाता है खुरदरा? इन आसान तरीकों से रखें उसे हमेशा सॉफ्ट appeared first on Naya Vichar.

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AI से क्यों बढ़ रही खतरे की चिंता? अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेकाबू हुआ तो क्या इंसान उसे रोक पाएगा?

AI के ‘Godfather’ कहे जाने वाले Geoffrey Hinton ने अपनी एक चर्चित lecture की शुरुआत ही ऐसी बात से की थी, जो सुनने वाले को असहज कर दे. उनका कहना था कि अगर आप यह सब सुनने के बाद भी रात को चैन से सोते हैं, तो शायद आपने मेरी बात को समझा नहीं है. यह टिप्पणी मूल रूप से उनकी 2025 की Royal Institution lecture में कही गई थी, जिसे 2026 में फिर से खूब चर्चा मिली. लेकिन Hinton सिर्फ डराने वाली बात नहीं कर रहे थे. उनकी चिंता के पीछे एक सीधा सवाल है- अगर किसी दिन AI की बुद्धिमत्ता इंसानों से बहुत आगे निकल गई, तो उसे अपने नियंत्रण में कौन रखेगा? ‘इंसान और मुर्गी’ का उदाहरण देकर समझाया सबसे बड़ा डर Hinton ने इस खतरे को समझाने के लिए एक बेहद साधारण तुलना की. अगर इंसानों से कहीं ज्यादा बुद्धिमान कोई जीव हमें खत्म करना चाहे, तो हमारे पास उसे रोकने के कितने रास्ते होंगे? उनके मुताबिक यह वैसा ही अंतर हो सकता है जैसा इंसान और मुर्गी के बीच है. मुर्गी यह नहीं समझ सकती कि इंसान उसके साथ क्या करने वाला है. यही वजह है कि Hinton के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI इंसानों को नुकसान पहुंचा सकता है या नहीं. असली सवाल है कि अगर AI हमसे ज्यादा बुद्धिमान हो गया, तो हम उसे इंसानों को नुकसान न पहुंचाने के लिए कैसे तैयार करेंगे? यहीं कहानी और डरावनी हो जाती है. Hinton ने 2026 में कहा कि ज्यादातर विशेषज्ञ मानते हैं कि इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान AI अगले एक दशक में आ सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल कोई नहीं जानता कि ऐसी AI को नियंत्रण में रखा जा सकेगा या नहीं. उन्होंने इस समस्या का समाधान मिलने तक ऐसी तकनीक विकसित करने की रफ्तार को लेकर सावधानी बरतने की बात कही. ये भी पढ़ें: AI का मिसयूज कर मिसाइल सॉफ्टवेयर बनाने की कोशिश? टेस्ट फेल हुआ तो Claude से पूछी गड़बड़ी की वजह, Anthropic रिपोर्ट में खुलासा AI को रोकने की बात नहीं, उसे ‘इंसानों की परवाह’ करना सिखाने की चिंता Hinton की चिंता का एक और हिस्सा ज्यादा दिलचस्प है. उनका कहना है कि हम AI को लगातार ज्यादा बुद्धिमान बनाने पर काम कर रहे हैं, लेकिन उतना काम इस बात पर नहीं हो रहा कि वह इंसानों की परवाह करने वाला सिस्टम कैसे बने. उन्होंने हाल की बातचीत में कहा कि हमें ऐसी AI चाहिए जो अपने फायदे से ज्यादा इंसानों के हित को महत्व दे. यानी डर यह नहीं कि AI अचानक फिल्म के किसी रोबोट की तरह बंदूक उठाकर हमारे पीछे दौड़ पड़ेगा. डर इससे कहीं ज्यादा जटिल है. सोचिए क्या होगा अगर वह अपने लक्ष्य खुद तय करने लगे और हम उसके रास्ते में आ जाएं? यही वजह है कि AI Safety आज सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रह गया है. दुनिया के कई AI विशेषज्ञ विकास की रफ्तार के साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कर रहे हैं. ये भी पढ़ें: Artificial Sun: धरती पर सूरज बनाने की कोशिश में हिंदुस्तान? 82.6 GHz की मशीन करेगी प्लाज्मा को गर्म बेंगलुरु के प्रोफेसर ने डर की दिशा ही बदल दी IISc Bengaluru के Assistant Professor और AI researcher Prathosh AP ने AI को लेकर सवाल को थोड़ा अलग तरीके से रखा है. उनका कहना है कि समस्या सिर्फ यह नहीं है कि मशीनें हमसे ज्यादा बुद्धिमान हो जाएंगी. असली संकट शायद यह है कि हमने इंसान की कीमत को ही उसकी बुद्धिमत्ता से जोड़ रखा है. उन्होंने कहा कि वह जब छात्रों से भरे lecture hall को देखते हैं तो खुद से सवाल पूछते हैं- ये छात्र यहां क्यों बैठे हैं? क्योंकि मशीन अब reasoning कर सकती है, code लिख सकती है और जानकारी को इंसानों की तुलना में बेहद तेजी से जोड़ सकती है. ऐसे में अगर मशीन ज्ञान और तर्क का काम करने लगेगी, तो इंसान की खासियत आखिर बचेगी क्या? Prathosh के मुताबिक जवाब शायद वहीं है जिसे हम आज सबसे कम महत्व देते हैं- care, love, empathy और community. मशीन जानकारी दे सकती है. लेकिन इंसान दूसरे इंसान के पास सिर्फ जानकारी लेने नहीं जाता. वह भरोसा करने, जुड़ने और साथ महसूस करने भी जाता है. इसी वजह से उनके मुताबिक AI का दौर सिर्फ टेक्नोलॉजी का संकट नहीं, बल्कि मानव पहचान का संकट भी है. ये भी पढ़ें: 40 साल पीछे ले जा रहा है AI? 1980 में कैसे दिखते Gen-Z, वायरल ट्रेंड पूरी पीढ़ी को nostalgia में पहुंचा दिया क्या सच में AI इंसानों को खत्म कर देगा? इसका जवाब आज किसी के पास निश्चित रूप से नहीं है. Hinton खुद मानते हैं कि AI से मानवता के अस्तित्व को होने वाले खतरे की सटीक संभावना बताना मुश्किल है. उन्होंने 10 फीसदी जैसे अनुमान को भी निश्चित वैज्ञानिक आंकड़ा नहीं माना, बल्कि विशेषज्ञों के अनुमान को मूलतः उनके gut feeling पर आधारित बताया. इसलिए कहानी का अंत यह नहीं है कि AI इंसानों को खत्म करने वाला है. असल कहानी इससे ज्यादा दिलचस्प है. हमने एक ऐसी मशीन बनाई है जो हर साल पहले से ज्यादा तेज, ज्यादा सक्षम और ज्यादा स्वायत्त होती जा रही है. अब उसके सामने खड़ा सबसे बड़ा सवाल शायद यह नहीं कि AI इंसान जैसा बनेगा या नहीं. सवाल यह है- जब AI इंसान से ज्यादा समझदार हो जाएगा, तब इंसान अपनी सबसे बड़ी ताकत किसे मानेगा? शायद यही वह सवाल है कि यदि AI आने वाले भविष्य में हमें नुकसान पहुंचाने लगे, तो क्या हम इंसान उसे रोक पाएंगे. जिसकी वजह से AI की दुनिया को समझने के बाद रात की नींद थोड़ी देर के लिए उड़ सकती है. The post AI से क्यों बढ़ रही खतरे की चिंता? अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेकाबू हुआ तो क्या इंसान उसे रोक पाएगा? appeared first on Naya Vichar.

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NIT रायपुर के 738 स्टूडेंट्स को मिला प्लेसमेंट, 60 लाख का पैकेज

NIT रायपुर में बार 738 स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट मिला और उन्हें कुल 821 ऑफर्स मिले. मतलब कई स्टूडेंट्स को एक से ज्यादा जगह से ऑफर आया. कुल 217 कंपनियां कैंपस में आईं और ओवरऑल प्लेसमेंट रेट 70% रहा, जो चार साल में सबसे ज्यादा है. पैकेज की बात करें तो सबसे ऊंचा पैकेज 60.3 लाख रुपये सालाना रहा जबकि अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स का औसत पैकेज 12.5 लाख रुपये सालाना रहा. यह दिखाता है कि सिर्फ कुछ चुनिंदा स्टूडेंट्स ही नहीं बल्कि ज्यादातर लोगों को अच्छी सैलरी मिली है. NIT Raipur प्लेसमेंट साल ओवरऑल प्लेसमेंट रेट रिक्रूटिंग कंपनियां 2022-23 67% 125 2023-24 63% 127 2024-25 67% 135 2025-26 70% 217 UG और PG में कौन आगे रहा? अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में 636 स्टूडेंट्स प्लेस हुए और प्लेसमेंट रेट 74% रहा, वहीं पोस्टग्रेजुएट में 102 स्टूडेंट्स को नौकरी मिली और यहां रेट 47% था. MCA स्टूडेंट्स का प्रदर्शन खास तौर पर अच्छा रहा जहां 90 में से 72 यानी 80% स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट मिला. ये भी पढ़ें: MNNIT के 816 स्टूडेंट्स को मिली जॉब, 96 लाख का हाईएस्ट प्लेसमेंट किस ब्रांच ने मारी बाजी? सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच सबसे आगे रही जहां 98% स्टूडेंट्स को नौकरी मिली. इसके बाद इलेक्ट्रिकल का नंबर आता है जिसका आंकड़ा 90% रहा. केमिकल और मैकेनिकल भी पीछे नहीं रहे और दोनों ने 85% से ऊपर का स्कोर हासिल किया. किस सेक्टर से कितनी कंपनियां आईं? IT और सॉफ्टवेयर सेक्टर से सबसे ज्यादा 78 कंपनियां आईं. उसके बाद कोर इंजीनियरिंग सेक्टर से 74 कंपनियां पहुंचीं. एनालिटिक्स और डेटा साइंस सेक्टर से भी 38 कंपनियों ने हिस्सा लिया, जो बताता है कि नई टेक्नोलॉजी वाली इंडस्ट्रीज की दिलचस्पी भी बढ़ रही है. इसके अलावा एजुकेशन सेक्टर से 11 और रिसर्च एंड AI-ML सेक्टर से 5 कंपनियां शामिल हुईं. ये भी पढ़ें: KIIT की झोली में 4621 जॉब ऑफर्स, Microsoft में मिला 51 लाख का प्लेसमेंट The post NIT रायपुर के 738 स्टूडेंट्स को मिला प्लेसमेंट, 60 लाख का पैकेज appeared first on Naya Vichar.

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