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October 6, 2026

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Aaj Ki Taza Khabar: असम से बंगाल तक वोटिंग, 1 लोकसभा और 5 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी

Aaj Ki Taza Khabar LIVE: 6 अक्टूबर की ताजा समाचारों और दिनभर के बड़े अपडेट्स के लिए हमारे साथ जुड़े रहें. इस लाइव अपडेट में आपको पल-पल की हर जरूरी जानकारी आसान भाषा में मिलेगी. The post Aaj Ki Taza Khabar: असम से बंगाल तक वोटिंग, 1 लोकसभा और 5 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी appeared first on Naya Vichar.

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तेज अर्थव्यवस्था, कमजोर शेयर बाजार,पढ़ें-प्रभु चावला का आलेख

नब्बे साल पहले जॉन मेनार्ड कीन्स ने शेयर बाजार की तुलना अखबार में प्रकाशित होने वाली सौंदर्य प्रतियोगिता से की थी. पाठक जीतता इसलिए नहीं है कि वह सबसे सुंदर चेहरे को चुनता है, बल्कि इसलिए कि वह अनुमान लगा सके कि बाकी सभी लोग किस चेहरे को चुनेंगे. कीन्स समझ गये थे कि कीमतें तथ्यों की सूची नहीं, बल्कि विश्वास पर दिये गये फैसले होती हैं. हिंदुस्तान ने पिछले आठ सप्ताहों में यह सबक बहुत भारी कीमत चुकाकर फिर से सीखा है. अप्रैल से जून में हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी, जो प्रतिद्वंद्वी वित्तीय स्थितिओं से कहीं तेज थी. शेयर बाजार में सूचीबद्ध देश की 50 सबसे बड़ी कंपनियों का मुनाफा 18 फीसदी बढ़ा, जो दस तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि थी. फिर भी पिछले शुक्रवार को सेंसेक्स 71,910 पर बंद हुआ और लगातार आठवें सप्ताह गिरावट दर्ज की गयी. कोविड के दौर वाले 2020 के बाद यह गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला था. पांच अगस्त से अब तक सूचकांक करीब 6,700 अंक गिर चुका है, यानी करीब 8.5 फीसदी की गिरावट. मोटे अनुमान के मुताबिक, 30 से 40 लाख करोड़ रुपये के बीच का बाजार पूंजीकरण खत्म हो चुका है. दो दशक से भी अधिक समय में हिंदुस्तान का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा है. इन आंकड़ों के पीछे वास्तविक लोग खड़े हैं. कानपुर में शेयर बाजार के एक कर्मचारी और कोच्चि की एक नर्स का उदाहरण लें. ये हर महीने कुछ हजार रुपये एसआइपी में लगाते रहे थे. इन्हें भरोसा दिलाया गया था कि धैर्य का फल मिलता है. पर इन्होंने थकाऊ हफ्तों के दौरान अपनी बचत को धीरे-धीरे खत्म होते देखा. इन्हीं हफ्तों में नैस्डैक ने रिकॉर्ड स्तर छुआ, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7,000 के स्तर पर लौट आया और जापान का निक्केई अपने शिखर के आसपास बना रहा. पूरे 2026 में सियोल का बाजार करीब 68 प्रतिशत, टोक्यो का 29 फीसदी और न्यूयॉर्क का 13 प्रतिशत चढ़ा है. इसके मुकाबले सेंसेक्स रुपये में 12 प्रतिशत से अधिक और डॉलर में करीब 18 फीसदी गिर चुका है. इन सभी देशों ने एक ही युद्ध, कच्चे तेल की समान चुनौती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की समान नीतियों का सामना किया. वे फलते-फूलते रहे, जबकि हिंदुस्तान संघर्ष करता रहा. यह गिरावट तीन चरणों में सामने आयी. अगस्त में होर्मुज के आर-पार तनाव बढ़ने के साथ तेल की कीमतें ऊपर जाने लगीं. सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ायीं, अमेरिकी बांड की प्रतिफल दर 2007 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी और रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार कर गया. फिर 28 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकरा दिया. उस दिन निफ्टी के 50 में से 47 शेयर गिर गये. हिंदुस्तान ही इतनी बुरी तरह क्यों प्रभावित हुआ? दरअसल, लंबे समय से मरम्मत किये जाते और टाले जाते रहे तीन आर्थिक संकट एक साथ फूट पड़े. पहला संकट तेल का था. हिंदुस्तान जितना कच्चा तेल इस्तेमाल करता है, उसका अधिकांश आयात करता है. इसलिए तेल की कीमतों में हर उछाल से आयात बिल बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है और महंगाई बढ़ती है. अगस्त में महंगाई 4.82 फीसदी तक पहुंच गयी. हिंदुस्तान की आर्थिक वृद्धि पर दांव लगा रही वाहन निर्माता कंपनियां, बंदरगाह और इंजीनियरिंग कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित हुईं. दूसरा संकट एआइ का था, जो इस दशक की सोने की दौड़ बन चुकी है. सैमसंग और एसके हाइनिक्स द्वारा डाटा केंद्रों में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप की बिक्री के चलते आठ महीनों में दक्षिण कोरिया का चिप निर्यात करीब 170 फीसदी बढ़ गया. हिंदुस्तान दुनिया को इस तरह का हार्डवेयर लगभग नहीं बेचता. इसके बजाय हिंदुस्तान की दिग्गज सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को स्वचालन के शिकार के रूप में देखा जा रहा है, न कि उसके लाभ उठाने वालों के रूप में. निवेशकों ने कमजोर होती खपत और ऐसे तेल संकट को देखा, जिसका अंत नजर नहीं आ रहा था. हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक ने भी वृद्धि दर के घटकर 6.4 से 6.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया था. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र में ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त के संकट की चेतावनी दी थी. अब आगे क्या होगा, यह आंशिक रूप से उन ताकतों पर निर्भर करेगा, जो नयी दिल्ली से बहुत दूर हैं. सात अक्तूबर को रिजर्व बैंक की बैठक में उसे रुपये को संभालने और कर्ज लेने वालों को राहत देने के बीच चुनाव करना होगा. खाड़ी क्षेत्र में युद्धविराम हिंदुस्तानीय शेयरों को बजट से कहीं अधिक तेजी से उबार सकता है. लेकिन असली सवाल यह है कि क्या हिंदुस्तान निवेशकों को वापस लौटने की कोई ठोस वजह दे सकता है. ऐसा संभव है, अगर वह एक साथ तीन स्तंभों पर काम करे. मोदी प्रशासन को घरेलू मांग बढ़ाने के लिए पर्याप्त मात्रा में धन उपलब्ध कराना होगा. हिंदुस्तानीय बचतकर्ताओं ने पहले ही अपनी मजबूती दिखा दी है. सितंबर के अंतिम सप्ताह में विदेशी निवेशकों ने करीब 11,500 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 16,400 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. दूसरा गति देने वाला कारक निवेश है. जून तिमाही में स्थिर पूंजी निवेश में करीब 12 फीसदी की वृद्धि हुई और अब इसे उन कमजोरियों पर सीधे केंद्रित करना होगा, जिन्हें सितंबर ने उजागर किया है. सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और बिजली से चलने वाले परिवहन पर खर्च किया गया हर रुपया कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर हिंदुस्तान द्वारा चुकाये जाने वाले युद्ध-कर को कम करता है. तीसरा प्रोत्साहन भरोसा है, और इसे बनाना सबसे कठिन है. फरवरी में बजट के दिन सट्टेबाजी पर कर में अचानक वृद्धि ने दिखाया कि मनमाने फैसलों से पूंजी कैसे बाहर निकलती है. स्थिर कर व्यवस्था से निवेशकों द्वारा मांगा जाने वाला अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम कम होगा. अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों के साथ तेज गति से व्यापार समझौते भी मदद करेंगे. इसी तरह ऐसी कूटनीति की जरूरत है, जो ऊर्जा की कीमतों पर अफसोस जताने के बजाय ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करे. हिंदुस्तान लंबे समय से दुनिया को बताता आया है कि वह अगला बड़ा बाजार है. अब उसे उसी तरह व्यवहार भी करना होगा. सबक बिल्कुल स्पष्ट है. पिछले आठ सप्ताहों

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बिहार MLC चुनाव से पहले NDA-महागठबंधन में बगावत, कई सीटों पर अपनों ने ही अपनों के खिलाफ खोला मोर्चा

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्तूबर को होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गयी है. चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही एनडीए और महागठबंधन के अंदर सीटों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. दोनों गठबंधनों में कई जगह घटक दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं. वहीं, कुछ सीटों पर गठबंधन के ही नेता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में उतर गये हैं. एनडीए में पहले जदयू, अब आरएलएम में बगावत एनडीए में पहले जदयू और अब उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) में भी मतभेद सामने आया है. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू ने आनंद पुष्कर को अपना प्रत्याशी बनाया है. वहीं, आरएलएम के तीन विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर अपने ही गठबंधन के घटक दल जदयू के प्रत्याशी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आरएलएम के तीनों विधायकों ने अपनी पार्टी के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा कुशवाहा को समर्थन देने का फैसला किया है. रामपुकार सिन्हा कुशवाहा ने सोमवार, 5 अक्तूबर को सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया. निर्वाचन क्षेत्र जदयू राष्ट्रीय लोक मोर्चा सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र आनंद पुष्कर रामपुकार सिन्हा कुशवाहा सारण शिक्षक सीट पर आरएलएम की दावेदारी पहले से रही है. पार्टी की ओर से इस सीट पर रामपुकार सिन्हा को उम्मीदवार बनाने की इच्छा जतायी गयी थी. बताया जाता है कि पार्टी ने उनके नाम पर प्रस्ताव भी पारित किया था. इसी वजह से एनडीए की ओर से इस सीट पर उम्मीदवार के नाम की घोषणा में देरी हुई. हालांकि, बाद में एनडीए ने जदयू के आनंद पुष्कर को उम्मीदवार बनाया. अब रामपुकार सिन्हा के मैदान में उतरने से दोनों सहयोगी दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें.. पटना स्नातक सीट पर अनंत सिंह ने खोला मोर्चा एनडीए में दो सीटों पर बागी तेवर ने पार्टी नेतृत्व की परेशानी बढ़ा दी है. पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू के अधिकृत प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ मोकामा विधायक अनंत सिंह खुलकर सामने आ गये हैं. अनंत सिंह लगातार नीरज कुमार का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने उनका विरोध किया था. इसलिए वह उनके लिए चुनाव प्रचार नहीं करेंगे. पार्टी के शीर्ष नेताओं की ओर से उन्हें समझाने की कोशिश की जा रही है. निर्वाचन क्षेत्र जदयू जन सुराज पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र नीरज कुमार डॉ अनुज कुमार (अनंत सिंह का समर्थन) इस मामले में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने सोमवार को अनंत सिंह से फोन पर बातचीत की. सूत्रों के अनुसार, ललन सिंह ने उनसे पार्टी हित में नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं देने का आग्रह किया. बताया जा रहा है कि अनंत सिंह ने इस पर सहमति जतायी है, लेकिन नीरज कुमार के लिए चुनाव प्रचार करने से उन्होंने इनकार कर दिया है. एनडीए के अधिकृत प्रत्याशी निर्वाचन क्षेत्र जदयू बीजेपी प्रत्याशी पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र —– नवल किशोर यादव कोशी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र —– डॉ. एन.के. यादव दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र —– डॉ. सर्वेश कुमार तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र —– नरेंद्र प्रसाद सिंह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र नीरज कुमार —- तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र अभिषेक झा —- सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र आनंद पुष्कर — दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र घनश्याम राय — महागठबंधन में भी सहयोगी आमने-सामने एमएलसी चुनाव को लेकर महागठबंधन में भी घटक दलों के बीच तालमेल का संकट सामने आया है. बिहार की आठ विधान परिषद सीटों के लिए राजद ने पहले छह सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किये थे. इसके बाद कांग्रेस ने पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिये. कांग्रेस के प्रत्याशियों के मैदान में उतरने के बाद राजद ने भी कांग्रेस के खिलाफ प्रत्याशी उतारने का फैसला किया. राजद ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा के खिलाफ भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया. इसके बाद कई सीटों पर महागठबंधन के दोनों प्रमुख घटक दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हो गये हैं. इससे चुनाव में सीट बंटवारे और आपसी तालमेल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. दोनों दलों के प्रत्याशी अब कई सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. निर्वाचन क्षेत्र आरजेडी कांग्रेस दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कुमर राय डॉ. मदन मोहन झा पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र डॉ. संजीव कुमार सिंह डॉ. संजय यादव पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र दिलीप कुमार डॉ. असदुल्लाह खान सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र प्रो. जयराम यादव —- तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र डॉ. रश्मि विनायक गौतम —- कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र नितेश कुमार मनोज कुमार जायसवाल दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र अनिल कुमार झा रजनीकांत पाठक बागियों के तेवर से बढ़ी शीर्ष नेतृत्व की परेशानी एमएलसी चुनाव से पहले दोनों प्रमुख गठबंधनों में बागी तेवर ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. एनडीए में जदयू और आरएलएम के नेता अपने ही गठबंधन के प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में हैं, जबकि महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी कई सीटों पर आमने-सामने हैं. इसके साथ ही बागी नेताओं और विधायकों की ओर से सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे तल्ख बयान भी शीर्ष नेतृत्व के लिए चुनौती बने हुए हैं. गठबंधन के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ बागी और सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से कई सीटों पर मुकाबला बहुकोणीय हो गया है. ऐसे में 23 अक्तूबर को होने वाला विधान परिषद चुनाव सिर्फ प्रत्याशियों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि एनडीए और महागठबंधन के अंदर आपसी तालमेल और गठबंधन की एकजुटता की भी परीक्षा माना जा रहा है. Also Read नीरज कुमार के खिलाफ अनंत सिंह ने खोला मोर्चा, आखिर विधायक किसके भरोसे ठोक रहे ताल? The post बिहार MLC चुनाव से पहले NDA-महागठबंधन में बगावत, कई सीटों पर अपनों ने ही अपनों के खिलाफ खोला मोर्चा appeared first on Naya Vichar.

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अमिताभ का ‘एंग्री यंग मैन’ लुक भी पड़ा फीका, फिर क्यों शोहरत के शिखर पर बैठकर ओशो के बर्तन धोने लगे ये सुपरस्टार?

मुंबई के फिल्मी गलियारों में उस वक्त हलचल मच जाती है, जब करियर के शिखर पर पहुंचा एक एक्टर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर रातोंरात गायब हो जाता है… अपने पीछे छोड़ जाता है भरा-पूरा परिवार, करोड़ों की दौलत, महंगी गाड़ियां और स्टारडम. यह किसी मसाला फिल्म की स्क्रिप्ट जरूर लगती है, लेकिन ऊपर वाले ने उस एक्टर के लिए जिंदगी की ऐसी ही स्क्रिप्ट तैयार कर रखी थी. उस एक्टर का नाम था विनोद खन्ना. 70 और 80 के दशक में एक ऐसा दौर था, जब विनोद खन्ना का स्टारडम अपने चरम पर था. जब मुंबई के हर तीसरे सिनेमाघर के बाहर लगे कटआउट्स पर एक ही नाम चमक रहा था. गजब का हैंडसम लुक, चाल में एक अलग ही बेपरवाही और पर्दे पर ऐसी कड़क स्क्रीन प्रेजेंस कि अमिताभ बच्चन जैसे महानायक का ‘एंग्री यंग मैन’ अवतार भी उनके सामने फीका पड़ने लगता था. उस दौर में प्रोड्यूसर्स नोटों से भरे बैग लेकर उनके जुहू वाले बंगले के बाहर सिर्फ एक ‘हां’ के लिए दिन-रात पहरा देते थे. लेकिन फिर 1982 में अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे बी-टाउन के होश उड़ा दिए. जब पूरी इंडस्ट्री मान चुकी थी कि विनोद खन्ना अब अमिताभ से ‘नंबर-1’ का ताज छीनकर बॉलीवुड के नए बादशाह बनने वाले हैं, तभी उन्होंने यू-टर्न लेते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और अपनी करोड़ों की गाड़ियां, आलीशान जिंदगी और परिवार को पीछे छोड़ गायब हो गए. विनोद खन्ना, फोटो – इंस्टाग्राम हीरो बनकर मचाया तहलका: 1971 में ‘मेरे अपने’ और धर्मेंद्र के साथ ‘मेरा गांव मेरा देश’ में डाकू जब्बार सिंह बनकर उन्होंने इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया. इसके बाद ‘अचानक’, ‘इम्तिहान’ और ‘कुर्बानी’ जैसी ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने उन्हें सीधे सुपरस्टार बना दिया. चैप्टर 2: अमिताभ बच्चन से सीधी टक्कर, जब कहा- ‘मैं ही उनका इकलौता दावेदार था’ 70 के दशक के में जब अमिताभ बच्चन सफलता के शिखर पर थे, तब विनोद खन्ना ही अकेले ऐसे एक्टर थे जिनकी फीस और रुतबा अमिताभ के बराबर खड़ा था. जब भी ये दोनों ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘परवरिश’ और ‘हेरा फेरी’ जैसी फिल्मों में एक साथ पर्दे पर आते, तो सिनेमाघरों की छतें तालियों से गूंज उठती थीं. दोनों के बीच इस जबरदस्त कॉम्पिटिशन पर मार्च 1998 में न्यूज 24 को दिए एक पुराने इंटरव्यू में विनोद खन्ना ने बड़ी बेबाकी से कहा था: “बॉलीवुड में मैं ही अमिताभ का ‘Only Contender’ था. अगर आप 100 लोगों के पास जाकर पूछेंगे कि उन्हें अमिताभ पसंद हैं या विनोद, तो 50 लोग अमिताभ का नाम लेंगे और 50 विनोद खन्ना का.” कैमरे के सामने दोनों के बीच पर्दे पर कड़ा मुकाबला होता था, लेकिन कैमरे के पीछे कोई दुश्मनी नहीं थी. दोनों सेट पर साथ खाना खाते थे और एक-दूसरे की एक्टिंग का बेहद सम्मान करते थे. चैप्टर 3: नंबर-1 बनने की रेस छोड़ी और अमेरिका के जंगलों में ओशो के बर्तन धोने लगे ये सुपरस्टार? जब विनोद खन्ना अमिताभ को पछाड़कर बॉलीवुड के ‘किंग’ बनने ही वाले थे, तभी 1980 के आसपास उनकी मां का अचानक निधन हो गया. दिन-रात की शूटिंग, अथाह पैसा और बेहिसाब शोहरत के बावजूद उनके अंदर एक गहरा सन्नाटा और खालीपन छा गया. वह रात को अकेले बैठकर खुद से पूछते- “इसके बाद क्या? क्या जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित है?” विनोद खन्ना, फोटो – इंस्टाग्राम 1975 में वह ओशो से जुड़े थे और 1982 में उन्होंने अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर फिल्मों, करोड़ों के ऑफर्स और अपने परिवार को अलविदा कह दिया. वह सब कुछ छोड़कर अमेरिका के ओरेगन स्थित ओशो के आश्रम ‘रजनीशपुरम’ चले गए. ओशो ने उन्हें नाम दिया ‘स्वामी विनोद हिंदुस्तानी’. महंगी गाड़ियां छोड़ पकड़ी कुदाल: जिस सुपरस्टार के एक इशारे पर हिंदुस्तान में सैकड़ों नौकर हाजिर रहते थे, वह अमेरिका में सादे कपड़े पहनकर रोज सुबह 5 बजे उठता, बगीचे की घास काटता, पौधों में पानी डालता, प्लंबिंग करता और आश्रम के बर्तन धोता था. अकेलेपन का दर्शन: जब लोगों ने पूछा कि चमकता स्टारडम छोड़कर यहां बर्तन क्यों धो रहे हो, तो उन्होंने कहा- हर इंसान को अकेला ही सफर करना है. आप अकेले आते हैं, अकेले ही जाते हैं. असली शांति मुझे इस मिट्टी में काम करके मिली. आखिर कौन थे ओशो?: ओशो भगवान श्री रजनीश एक बेहद चर्चित और बेबाक आध्यात्मिक गुरु थे, जो दुनिया त्यागने के बजाय सांसारिक सुख भोगते हुए ध्यान में जीने की सीख देते थे. उनके इन आजाद और गहरे विचारों ने विनोद खन्ना को ऐसा आकर्षित किया कि उन्हें अपने अंदर के खालीपन का जवाब ओशो के पास ही नजर आया. चैप्टर 4: 1987 में वापसी, बदल चुका था बॉलीवुड, फिर नेतृत्व और अंतिम सफर अमेरिका में 5 साल बिताने के बाद 1987 में जब ओशो का आश्रम विवादों में फंसा, तो विनोद खन्ना वापस हिंदुस्तान लौटे. लेकिन इन 5 सालों में उनकी जिंदगी तबाह हो चुकी थी. पत्नी गीतांजलि से तलाक हो चुका था, बैंक बैलेंस खत्म हो चुका था और बॉलीवुड में अनिल कपूर व सनी देओल जैसे नए चेहरे आ चुके थे. लेकिन शेर जब लौटता है तो दहाड़ के साथ लौटता है. 1987 में डिंपल कपाड़िया के साथ आई उनकी फिल्म ‘इंसाफ’ और फिर ‘सत्यमेव जयते’ ने आते ही बॉक्स ऑफिस फाड़ दिया. इसके बाद उन्होंने ‘दयावान’, ‘चांदनी’ और सलमान खान की ‘दबंग’ में प्रजापति पांडे का अमर किरदार निभाया. नेतृत्वक पारी: 1997 में उन्होंने बीजेपी जॉइन की और पंजाब की गुरदासपुर सीट से 4 बार लोकसभा सांसद बने. अटल बिहारी वाजपेयी प्रशासन में वह केंद्रीय मंत्री भी रहे. अंतिम सफर और अमिताभ की श्रद्धांजलि: 27 अप्रैल 2017 को कैंसर की वजह से 70 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. उनके निधन पर अमिताभ बच्चन ने भावुक होकर लिखा था- “मैंने पहली बार विनोद को 1969 में देखा था. जैसी पर्सनैलिटी और रुतबा उनका था, वैसा किसी और में नहीं था. भीड़ भरे कमरे में भी जब विनोद आते थे, तो सब सिर्फ उन्हें ही देखते रह जाते थे.” अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने वाले विनोद खन्ना बॉलीवुड के इकलौते ऐसे ‘संन्यासी सुपरस्टार’ थे, जिन्होंने चमकती दुनिया को छोड़कर अपनी रूह की तलाश चुनी. ये भी पढ़ें: समन मिला, पूछताछ की तारीख भी तय थी, फिर भी महाराष्ट्र साइबर सेल

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Xiaomi 17T 5G खरीदना हुआ महंगा, कंपनी ने एक झटके में बढ़ा दी ₹5,000 कीमत, अब इतनी हो गई कीमत

फेस्टिव सीजन शुरू होने से ठीक पहले Xiaomi ने अपने कस्टमर्स को शॉक दे दिया है. कंपनी ने हिंदुस्तान में Xiaomi 17T 5G की कीमत बढ़ा दी है. कुछ महीने पहले ही लॉन्च हुए इस फोन को 12GB RAM और 512GB स्टोरेज के साथ बाजार में उतारा गया था. अब इसकी कीमत में सीधे 5,000 रुपये तक का इजाफा कर दिया गया है. खास बात यह है कि Xiaomi अकेली कंपनी नहीं है, जिसने हाल के दिनों में अपने स्मार्टफोन महंगे किए हैं. OnePlus, Motorola, Apple समेत कई बड़े ब्रांड भी हिंदुस्तान में अपने कुछ फोन की कीमतें बढ़ा चुके हैं. आखिर Xiaomi 17T 5G की कीमत कितनी बढ़ी है और अब यह फोन कितने में मिलेगा? आइए जानते हैं इसके बारे में. Xiaomi 17T 5G के नए दाम जारी फोन का बेस वेरिएंट 12GB RAM और 256GB स्टोरेज के साथ आता है, जिसकी कीमत अब 69,999 रुपये हो गई है. इससे पहले यही मॉडल 64,999 रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध था. वहीं, 12GB RAM और 512GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत भी बढ़ाई गई है. यह मॉडल अब 74,999 रुपये में मिल रहा है, जबकि पहले इसकी कीमत 69,999 रुपये थी. यानी दोनों वेरिएंट पर 5,000 रुपये की सीधी बढ़ोतरी हुई है. नई कीमतें Xiaomi India की ऑफिशियल वेबसाइट और Amazon.in पर अपडेट कर दी गई हैं. आपको बता दें कि हिंदुस्तान में यह फोन जब लॉन्च हुआ था, तब इसकी शुरुआती कीमत 59,999 रुपये रखी गई थी. अब कंपनी ने इसकी कीमत में सीधे 10,000 रुपये का इजाफा कर दिया है. फोन को हिंदुस्तान में Violet, Blue और Black जैसे कई कलर ऑप्शन में पेश किया गया था. नई कीमतें 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई हैं. Xiaomi 17T 5G के फीचर्स Xiaomi 17T 5G में कंपनी ने बड़ा और शानदार 6.59 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया है. इसमें 1.5K रेजोल्यूशन के साथ 120Hz का रिफ्रेश रेट मिलता है. डिस्प्ले की प्रोटेक्शन के लिए ऊपर Corning Gorilla Glass 7i भी दिया गया है. परफॉर्मेंस की बात करें तो फोन में MediaTek Dimensity 8500 Ultra प्रोसेसर मिलता है. इसके साथ 12GB RAM और 512GB स्टोरेज दी गई है. बैटरी के मामले में भी Xiaomi 17T 5G पीछे नहीं रहता. इसमें 6500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जिसे 67W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 32MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है. फोटोग्राफी के लिए फोन के पीछे Leica ब्रांडेड कैमरा सेटअप दिया गया है. इसमें 50MP का मेन कैमरा, 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा और 12MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा शामिल है. ये भी पढ़ें: 7,000mAh बैटरी के साथ Realme का नया फोन लॉन्च, कीमत सिर्फ ₹16,499, फीचर्स भी हैं जबरदस्त The post Xiaomi 17T 5G खरीदना हुआ महंगा, कंपनी ने एक झटके में बढ़ा दी ₹5,000 कीमत, अब इतनी हो गई कीमत appeared first on Naya Vichar.

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विराट कोहली को 5 करोड़ देकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम बुलाया गया, दावे की पड़ताल में सामने आया चौंकाने वाला सच

Premanand Maharaj Ashram: प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े विवाद के बीच हिंदुस्तानीय क्रिकेटर विराट कोहली का नाम भी चर्चा में आ गया है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में दावा किया है कि एक गुट ने विराट कोहली को कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये देकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम बुलाया था. उनका आरोप है कि इसके पीछे आश्रम की लोकप्रियता बढ़ाने और प्रचार का उद्देश्य था. 5 करोड़ रुपये वाला दावा आया कहां से? फलाहारी महाराज के पत्र के मुताबिक, राजस्थान की एक निजी कंपनी से जुड़े लोगों ने विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के प्रचार के लिए 5 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी. पत्र में आश्रम से जुड़े लोगों और संपत्ति गतिविधियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. हालांकि, यह पूरा मामला फिलहाल आरोप और दावे के स्तर पर है. उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि विराट कोहली को वास्तव में 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. क्या विराट कोहली सच में प्रेमानंद महाराज से मिले थे? इस सवाल का जवाब हां है. विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कोई काल्पनिक या फर्जी घटना नहीं है. दोनों पहली बार 4 जनवरी 2023 को वृंदावन पहुंचे थे. उनके साथ बेटी वामिका भी थीं. इस दौरान दोनों ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया था. इस मुलाकात का वीडियो और तस्वीरें उस समय भी सामने आई थीं. इसके बाद विराट-अनुष्का कई मौकों पर प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे. जनवरी 2025 में भी दोनों आश्रम पहुंचे थे. टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के बाद भी विराट कोहली पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ प्रेमानंद महाराज से मिलने वृंदावन पहुंचे थे. फिर 5 करोड़ रुपये की सच्चाई क्या है? यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है. पड़ताल में 5 करोड़ रुपये के भुगतान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. अभी तक ऐसा कोई सार्वजनिक रूप से सत्यापित बैंक ट्रांजेक्शन, भुगतान रसीद, अनुबंध, कंपनी रिकॉर्ड या विराट कोहली अथवा उनके प्रतिनिधि का बयान सामने नहीं आया है, जिससे यह कहा जा सके कि उन्हें आश्रम आने के लिए 5 करोड़ रुपये दिए गए थे. एक स्वतंत्र फैक्ट-चेक में भी इस दावे को फिलहाल unverified यानी अपुष्ट बताया गया है. इसलिए ‘विराट कोहली को 5 करोड़ रुपये देकर बुलाया गया’ को समाचार में तथ्य के रूप में लिखना सही नहीं होगा. इसे ‘फलाहारी महाराज का दावा’ या ‘आरोप’ के तौर पर ही लिखा जाना तथ्यात्मक रूप से उचित है. सोशल मीडिया पर दावे ने क्यों पकड़ा जोर? प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े हालिया विवाद और उनके एक शिष्य की मौत के बाद आश्रम को लेकर कई तरह के आरोप सामने आए हैं. इसी माहौल के बीच फलाहारी महाराज का पत्र सामने आया, जिसमें विराट कोहली से जुड़ा 5 करोड़ रुपये वाला दावा भी शामिल था. इसके बाद सोशल मीडिया पर इसे कई जगह इस तरह प्रसारित किया गया मानो 5 करोड़ रुपये का भुगतान साबित हो चुका हो. लेकिन उपलब्ध प्रमाण इस दावे की पुष्टि नहीं करते हैं. फैक्ट चेक: क्या सच, क्या दावा? विराट कोहली और अनुष्का शर्मा प्रेमानंद महाराज से मिले थे — सत्य. पहली मुलाकात जनवरी 2023 में हुई थी — उपलब्ध रिपोर्टों से पुष्ट. 5 करोड़ रुपये में विराट कोहली को आश्रम बुलाने का आरोप लगाया गया — सत्य, लेकिन यह एक आरोप है. विराट कोहली को वास्तव में 5 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ — स्वतंत्र प्रमाण नहीं मिला. विराट कोहली ने 5 करोड़ रुपये मिलने की पुष्टि की — ऐसी कोई पुष्टि सामने नहीं आई. इसलिए 5 करोड़ रुपये का भुगतान साबित तथ्य नहीं, बल्कि फिलहाल अपुष्ट दावा है. यह भी पढ़ें: भाजपा जिलाध्यक्ष पर दुष्कर्म का आरोप: बलिया की स्त्री पदाधिकारी बोली- वीडियो वायरल करने की धमकी देकर किया शोषण The post विराट कोहली को 5 करोड़ देकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम बुलाया गया, दावे की पड़ताल में सामने आया चौंकाने वाला सच appeared first on Naya Vichar.

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6 अक्टूबर की टॉप 20 खबरें : महिला पत्रकार से यौन उत्पीड़न के आरोपी ACP का प्रमोशन, हवा में 28 हजार फीट नीचे आया British Airways विमान

1. Vivek Bhagat Promotion: स्त्री पत्रकार से यौन उत्पीड़न के आरोपी ACP का प्रमोशन, बने एडिशनल DCP; CJP ने कहा- छेड़छाड़ का मिला इनाम यौन उत्पीड़न के आरोपी दिल्ली पुलिस ACP विवेक भगत को प्रमोशन मिला है. इस फैसले पर उठ रहे सवालों और पूरी घटना का विवरण पढ़ें. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 2. Form 6: राहुल गांधी का आरोप, BJP को फायदा पहुंचाने के लिए ज्ञानेश कुमार ने गैरकानूनी तरीके से किया बदलाव Form 6: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर एक बार फिर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने Form 6 में गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किया. राहुल गांधी ने कहा कि अब यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि CEC ने अपने पद का दुरुपयोग किया है. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 3. सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को नोटिस भेजकर मांगा जवाब, जानें सस्पेंड करने से इनकार करते हुए क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को अंतरिम तौर पर पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया. उनपर आरोप था कि उन्होंने चुनाव आयोग के दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले लिए. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 4. British Airways Flight Emergency: हवा में 28 हजार फीट नीचे आया विमान, आयरलैंड के ऊपर मचा हड़कंप; लंदन लौटी फ्लाइट ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट BA295 में आयरलैंड के ऊपर आपातकाल की घोषणा हुई. 7700 कोड एक्टिव होने के बाद विमान 28 हजार फीट नीचे आ गया और वापस लंदन लौटा. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 5. CEC के खिलाफ NSUI का ‘मुर्दा प्रदर्शन’ : कफन ओढ़कर सड़क पर लेट गए, दिल्ली पुलिस ने किया डिटेन मतदाता सूची से नाम हटने के विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं का अनोखा प्रदर्शन. कफन ओढ़कर खुद को ‘मृत’ घोषित किया, दिल्ली पुलिस ने कई को हिरासत में लिया. जानिए क्यों हुआ यह विरोध. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 6. कांगो नदी में दो नावों की भीषण टक्कर में 30 लोगों की मौत, दर्जनों लापता कांगो नदी में दो नावों की भयानक टक्कर से 30 लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में दर्जनों यात्री लापता है. स्थानीय प्रशासन लापता लोगों की तलाश में जुटी. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 7. NDA को 245-265 सीटों का अनुमान: 403 सीटों का Matrize सर्वे सामने आते ही गरमाई सियासत, जानें पूर्वांचल से पश्चिमी यूपी तक पूरा गणित UP Election 2027: यूपी चुनाव 2027 के लिए Matrize सर्वे का ताजा अनुमान जारी. NDA को 245-265 सीटों का अनुमान, जानें पूर्वांचल से पश्चिमी यूपी तक का पूरा सीट गणित. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 8. 2022 के बाद ‘स्विंग के सुल्तान’ की हिंदुस्तानीय टीम में वापसी, इस टूर्नामेंट में संभालेंगे टीम की कमान भुवनेश्वर कुमार 2022 के बाद पहली बार हिंदुस्तानीय जर्सी में वापसी कर रहे हैं. उन्हें हांगकांग सिक्सेस के लिए हिंदुस्तानीय टीम का कप्तान बनाया गया है. जानिए पूरी टीम और ग्रुप. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 9. रांची में क्रिकेट का फीवर! Ind vs WI T-20 मैच के लिए टिकटों की बिक्री शुरू, काउंटरों पर उमड़ी फैंस की भारी भीड़ रांची में हिंदुस्तान और वेस्टइंडीज के बीच T20 मैच के लिए टिकटों की बिक्री शुरू हो गई है. स्टेडियम में फैंस की भारी भीड़ देखी जा रही है. जानें कब और कहां से खरीदें. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 10. प्रेमानंद महाराज ने करीबी संतों के साथ छोड़ा केलि कुंज आश्रम? अचानक कहां गए, वृंदावन में इस दावे ने मचाई हलचल Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज के केलि कुंज आश्रम छोड़ने और बेलवन जाने के दावों से वृंदावन में हलचल मची है. शिष्य की मौत के बाद उठी जांच की मांग के बीच यह समाचार चर्चा में है. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 11. तृणमूल कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुईं कोयल मल्लिक, राज्यसभा के लिए किया नामांकन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद प्रदेश की नेतृत्व में बड़ा बदलाव आया. टीएमसी में टूट के बाद कई सांसदों ने टीएमसी छोड़ दी. राज्यसभा से कई सदस्यों ने इस्तीफा दिया. जिन्होंने टीएमसी छोड़ी, वे भाजपा के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गये. कोयल मल्लिक भी अब भाजपा के टिकट पर उच्च सदन जा रहीं हैं. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 12. बिहार में 23772 करोड़ की 11 NH परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का अल्टीमेटम जारी, जानें कहां कितना होगा खर्च Bihar Road Projects: बिहार में 23772.15 करोड़ रुपये की 11 नेशनल हाईवे परियोजनाओं को समय पर आगे बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है. पथ निर्माण विभाग ने डीपीआर में देरी करने वाले कंसल्टेंट को कार्रवाई की चेतावनी दी है. राम जानकी मार्ग, अरवल-बिहारशरीफ और कई बाईपास परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 13. CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगने सड़क पर उतरेंगे विपक्ष के नेता, 8 अक्टूबर को तेजस्वी पटना में करेंगे मार्च Gyanesh Kumar: मतदाता सूची में धांधली का आरोप लगाते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आठ अक्टूबर को पटना में लोकभवन मार्च निकालेंगे. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 14. नया विचार खुलासा: दवाओं की MRP के स्पोर्ट्स में आयुष्मान योजना पर ‘डाका’, अस्पतालों को मोटा कमीशन, मरीज बेबस कैंसर दवाओं की एमआरपी और खरीद मूल्य में भारी अंतर से आयुष्मान योजना पर सेंध. अस्पताल कमीशन के चक्कर में मरीज बेबस. जनऔषधि की दवाएं हो सकती हैं समाधान. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 15. रेलवे में 10वीं पास के लिए 2008 पदों पर बंपर भर्ती, बिना किसी परीक्षा के मौका, जानें पूरी डिटेल Railway Apprentice Recruitment 2026: नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने अप्रेंटिस के 2008 पदों पर भर्ती निकाली है. 10वीं पास और संबंधित ट्रेड में ITI करने वाले उम्मीदवार 7 अक्टूबर से आवेदन कर सकते हैं. यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी समाचार 16. UPI पर चार्ज लगा तो क्या ATM के दिन फिर लौटेंगे? जानिए Cash से Digital Payment तक की पूरी कहानी UPI पर MDR शुल्क लगने से क्या ATM

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अचानक कोई बेहोश हो जाए तो सबसे पहले क्या करें? डॉक्टर से जानें फर्स्ट एड का सही तरीका

What to do if someone suddenly faints: अचानक कोई व्यक्ति आपके सामने गिर जाए और बेहोश हो जाए, तो घबराहट में लोग अक्सर कुछ ऐसी चीजें करने लगते हैं जो उस वक्त बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. कोई उसे उठाकर बैठाने लगता है, कोई चेहरे पर पानी छिड़कता है, तो कोई गाल थपथपाकर होश में लाने की कोशिश करता है. कई बार लोग बेहोश व्यक्ति को पानी पिलाने की कोशिश भी करते हैं. लेकिन ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी है कि पहले उसकी हालत को समझें और सही तरीके से मदद करें. एमएमआई नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, रायपुर के डॉ. ह्यूमन प्रसाद के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अचानक गिरकर बेहोश हुआ है और शरीर में अकड़न जैसी स्थिति नहीं है, तो उसे तुरंत बैठाने या उठाने के बजाय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. PC: AI Generated सबसे पहले मरीज को सीधा लिटाएं अगर व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर गया है, तो उसे गोद में उठाने या बैठाने (What to do if someone suddenly faints) की कोशिश न करें. उसे किसी सुरक्षित जगह पर सीधा लिटा दें. इसके बाद दोनों पैरों को थोड़ा ऊपर की ओर उठाया जा सकता है. न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ह्यूमन प्रसाद सिन्हा बताते हैं कि अगर बेहोशी की वजह लो ब्लड प्रेशर हो सकती है, तो पैरों को ऊपर उठाने से पैरों में जमा खून को शरीर के ऊपरी हिस्से की ओर पहुंचने में मदद मिल सकती है. इससे दिमाग तक ब्लड फ्लो बेहतर होने की संभावना रहती है और मरीज को होश आने में मदद मिल सकती है. चेहरे पर पानी छिड़कना या थप्पड़ मारना सही नहीं बेहोश व्यक्ति को होश में लाने के लिए चेहरे पर पानी डालना, गाल थपथपाना या छाती पर हाथ मारना सही तरीका नहीं है. इसी तरह बेहोशी की हालत में उसे पानी या कोई दूसरी चीज पिलाने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए. इससे पानी सांस की नली में जाने का खतरा हो सकता है. सबसे जरूरी है कि व्यक्ति को सुरक्षित स्थिति में रखें और उसकी सांस और प्रतिक्रिया पर ध्यान दें. सांस और पल्स जरूर चेक करें बेहोश व्यक्ति की हालत देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि सिर्फ ब्लड प्रेशर कम होने की वजह (What to do if someone suddenly faints) से ऐसा हुआ है. अगर व्यक्ति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है, तो यह देखना जरूरी है कि वह सामान्य रूप से सांस ले रहा है या नहीं और पल्स महसूस हो रही है या नहीं. अगर व्यक्ति सांस नहीं ले रहा है या सामान्य सांस नहीं चल रही है और पल्स भी महसूस नहीं हो रही है, तो इसे गंभीर आपात स्थिति मानें. ऐसे में तुरंत CPR शुरू करना चाहिए और इमरजेंसी मेडिकल मदद बुलानी चाहिए. होश न आए तो अस्पताल ले जाने में देर न करें अगर पैरों को ऊपर करने और सुरक्षित तरीके से लिटाने के बाद भी व्यक्ति को होश नहीं आता है, तो इंतजार न करें. उसे तुरंत ऐसे अस्पताल ले जाएं, जहां इमरजेंसी स्थिति को संभालने की सुविधा हो. यह भी पढ़ें: कौन-सी दाल सबसे ज्यादा हेल्दी? डॉक्टर की रेटिंग में मूंग दाल नंबर-1, जानिए किस दाल को मिले कितने नंबर The post अचानक कोई बेहोश हो जाए तो सबसे पहले क्या करें? डॉक्टर से जानें फर्स्ट एड का सही तरीका appeared first on Naya Vichar.

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6 मेडन, 5 विकेट… कभी भारत को डराता था यह तेज गेंदबाज, आज टीम इंडिया का बॉलिंग कोच

Morne Morkel 42nd Birthday: दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज और हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम के मौजूदा गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल आज 6 अक्टूबर को अपना 42वां जन्मदिन मना रहे हैं. कभी अपनी रफ्तार और उछाल से हिंदुस्तानीय बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाले मोर्केल अब टीम इंडिया के गेंदबाजों को अपनी विशेषज्ञता से मजबूत कर रहे हैं. मोर्ने मोर्केल का अंतरराष्ट्रीय करियर करीब 12 साल लंबा रहा. दक्षिण अफ्रीका के लिए उन्होंने तीनों फॉर्मेट में कुल 247 मुकाबले स्पोर्ट्से और 544 विकेट अपने नाम किए. टेस्ट क्रिकेट में उनका प्रदर्शन सबसे ज्यादा प्रभावशाली रहा. हिंदुस्तान के खिलाफ 2010 में सेंचुरियन टेस्ट में स्पोर्ट्सा गया उनका स्पेल आज भी उनके करियर के यादगार प्रदर्शनों में शामिल है. हिंदुस्तान के खिलाफ 5/20 का यादगार स्पेल 16 दिसंबर 2010 से सेंचुरियन में हिंदुस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट मुकाबला शुरू हुआ. इस मैच की पहली पारी में मोर्ने मोर्केल ने हिंदुस्तानीय बल्लेबाजी क्रम को बुरी तरह परेशान किया. उन्होंने सिर्फ 20 रन देकर 5 विकेट झटके. मोर्केल ने 12.4 ओवर की गेंदबाजी में 5 मेडन ओवर भी किए. उनकी सटीक लाइन और लेंथ के सामने हिंदुस्तानीय बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष करते नजर आए. उन्होंने एमएस धोनी, गौतम गंभीर, राहुल द्रविड़, एस श्रीसंत और हरभजन सिंह को अपना शिकार बनाया. मोर्केल के इस शानदार स्पेल के कारण हिंदुस्तान की पहली पारी महज 136 रन पर सिमट गई. ये भी पढ़ें: Washington Sundar Birthday: एक कान से नहीं सुन सकते, नाम का उड़ा मजाक; आज हिंदुस्तान के भरोसेमंद ऑलराउंडरों में होती है गिनती दूसरी पारी में भी चटकाए 2 विकेट हिंदुस्तान को पहली पारी में समेटने के बाद दक्षिण अफ्रीका ने मैच पर पूरी तरह पकड़ बना ली. जैक्स कैलिस के शानदार दोहरे शतक की बदौलत मेजबान टीम ने 620/4 रन बनाकर पारी घोषित की. दूसरी पारी में हिंदुस्तानीय टीम ने बेहतर बल्लेबाजी की. सचिन तेंदुलकर ने नाबाद 111 रन की पारी स्पोर्ट्सी और टीम ने 459 रन बनाए. हालांकि, मोर्केल ने इस पारी में भी हिंदुस्तानीय बल्लेबाजों को परेशान किया और 2 विकेट अपने नाम किए. इस तरह पूरे मैच में मोर्केल के गेंदबाजी आंकड़े 7/114 रहे. दक्षिण अफ्रीका ने हिंदुस्तान को एक पारी और 25 रन से हराया. ये भी पढ़ें: Richest Cricket Board: आखिर कौन है दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड? देखें टॉप-10 की पूरी लिस्ट तीनों फॉर्मेट में 544 विकेट मोर्ने मोर्केल ने दक्षिण अफ्रीका के लिए 86 टेस्ट मैचों में 309 विकेट लिए. टेस्ट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 23 रन देकर 6 विकेट रहा. उन्होंने इस फॉर्मेट में आठ बार एक पारी में पांच या उससे ज्यादा विकेट लिए. फॉर्मेट मैच पारी गेंद रन विकेट सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इकोनॉमी 4 विकेट 5 विकेट टेस्ट 86 160 16,498 8,550 309 6/23 3.10 18 8 वनडे 117 114 5,760 4,761 188 5/21 4.95 7 2 टी20 इंटरनेशनल 44 44 952 1,191 47 4/17 7.50 2 0 वनडे क्रिकेट में मोर्केल ने 117 मैचों में 188 विकेट चटकाए. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 21 रन देकर 5 विकेट रहा. वहीं, 44 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में उनके नाम 47 विकेट दर्ज हैं. इस फॉर्मेट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 17 रन देकर 4 विकेट रहा. IPL में भी छोड़ी छाप मोर्केल ने इंडियन प्रीमियर लीग में भी अपनी तेज गेंदबाजी का जलवा दिखाया. उन्होंने राजस्थान रॉयल्स, दिल्ली डेयरडेविल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए स्पोर्ट्सा. वह 2014 में केकेआर की खिताबी जीत का हिस्सा रहे और उस सीजन में 12 मुकाबलों में 12 विकेट लिए. कुल मिलाकर आईपीएल में मोर्केल ने 70 मैचों में 77 विकेट हासिल किए. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 20 रन देकर 4 विकेट रहा. अब टीम इंडिया के गेंदबाजों को दे रहे हैं टिप्स क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद मोर्ने मोर्केल ने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा. वह आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स के गेंदबाजी कोच रहे और इसके बाद कुछ समय पाकिस्तान क्रिकेट टीम के साथ भी काम किया. साल 2024 में उन्हें हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया. गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद मोर्केल टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा बने. आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में हिंदुस्तानीय गेंदबाजों के प्रदर्शन में भी मोर्केल की भूमिका अहम रही. टीम ने शानदार गेंदबाजी के दम पर खिताब अपने नाम किया. इसके बाद टी20 एशिया कप में भी हिंदुस्तानीय गेंदबाजों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया. अब उनके कंधों पर हिंदुस्तानीय टीम को 2027 वर्ल्ड में टीम इंडिया को खिताब दिलाने की जिम्मेदारी होगी. ये भी पढ़ें: Rishabh Pant 29th Birthday: हादसे में मरते-मरते बचे थे ऋषभ पंत, डॉक्टर से पूछा था- ‘क्या मैं फिर क्रिकेट स्पोर्ट्स पाऊंगा?’ The post 6 मेडन, 5 विकेट… कभी हिंदुस्तान को डराता था यह तेज गेंदबाज, आज टीम इंडिया का बॉलिंग कोच appeared first on Naya Vichar.

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10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर अलग-अलग आंदोलन करेंगे AAP और CJP! इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन का सौरभ ने किया स्वागत

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाये जाने के विरोध में और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर देश भर में आंदोलन शुरू हो गये हैं. आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसी मुद्दे पर 10 अक्टूबर को अलग-अलग आंदोलन का ऐलान किया है. दोनों का आंदोलन दिल्ली के जंतर मंतर पर होगा. इंडिया गठबंधन के विरोध-प्रदर्शन का सीजेपी ने किया स्वागत सीजेपी ने ‘इंडिया’ गठबंधन के मंगलवार के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन का स्वागत किया. कहा कि 10 अक्टूबर को सीजेपी के प्रदर्शन को किसी खास संगठन की पहल की बजाय युवाओं के एक व्यापक आह्वान के तौर पर देखा जाना चाहिए. सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास ने कहा- सभी लोगों, नेतृत्वक दलों, छात्र संगठनों और कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के जरिए अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए. ‘युवाओं और जेन-जी के आंदोलन का हिस्सा हैं हम’ सीजेपी के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की योजना पर सौरभ दास ने कहा- आपको 10 अक्टूबर को विरोध-प्रदर्शन के आह्वान को हमारा या किसी और का आह्वान नहीं समझना चाहिए. यह युवाओं और जेन-जी का आह्वान है. हम उसका एक हिस्सा हैं. दास का बयान उस ऑनलाइन बहस के बाद आया है, जो एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण शुरू हुई थी. इसमें सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके की तुलना ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा से की गयी थी. ये भी पढ़ें: जंतर मंतर पर NSUI का विरोध प्रदर्शन, CISF जवान पर जानलेवा हमला सौरभ दास को आशंका- गिरफ्तार किये जा सकते हैं सीजेपी के नेता सौरभ दास ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि सीजेपी को शासन के भीतर मौजूद ‘शुभचिंतकों’ से जानकारी मिली है कि 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन से पहले उसके नेताओं को गिरफ्तार किया जा सकता है. ‘आप’ ने जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की आम आदमी पार्टी (आप) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया जायेगा. उन्होंने प्रदर्शन का समर्थन करने वाले संगठनों से कहा कि वे दूसरी और तीसरी पंक्ति का नेतृत्व और संचार रणनीति तैयार रखें, ताकि अगर उनके नेताओं को हिरासत में लिया जाता है, तो भी आंदोलन जारी रहे. ये भी पढ़ें: 12 साल के 12 बड़े आंदोलन : किसानों-पहलवानों के प्रोटेस्ट से NEET पेपर लीक और SIR तक हमारे नेता को किया जा सकता है गिरफ्तार सौरभ भारद्वाज ने आशंका जतायी कि प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से एक दिन पहले जिला और विधानसभा स्तर के नेताओं को भी हिरासत में लिया जा सकता है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो संदेश जारी कर कहा- विरोध-प्रदर्शन से पहले नेताओं और आयोजकों को झूठे मामलों में गिरफ्तार किया जा सकता है. उन्होंने नेतृत्वक दलों और संगठनों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि अगर उनके वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में भी ले लिया जाए, तो भी विरोध-प्रदर्शन जारी रहे. यह 140 करोड़ हिंदुस्तानीयों का विरोध ‘आप’ के नेता ने कहा- यह विरोध किसी भी नेता, नेतृत्वक दल या संगठन से बड़ा है. यह 140 करोड़ हिंदुस्तानीयों का विरोध है. भारद्वाज ने कहा- जब प्रदर्शन स्थल पर कोई नेता मौजूद होता है, तो वह पुलिस और अधिकारियों से बात करता है और विरोध को शांतिपूर्ण बनाये रखता है. लेकिन नेता की मौजूदगी के बिना प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाये रखना मुश्किल हो जाता है. ये भी पढ़ें: Video : जंतर-मंतर पर NSUI का प्रदर्शन, ‘जिंदा लाश’ बनकर पहुंचे कार्यकर्ता, पुलिस से झड़प का वीडियो वायरल 4 दिन से जारी है विरोध प्रदर्शन ‘आप’ और आइसा, एनएसयूआई तथा आईवीसी जैसे छात्र संगठनों ने मतदाता सूचियों की एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और लोगों के मतदान के अधिकार को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए शुक्रवार, शनिवार, रविवार और सोमवार को विरोध-प्रदर्शन किये. सौरभ ने ‘नायक पूजा’ के प्रति किया आगाह सौरभ भारद्वाज ने आंदोलन से पहले ‘नायक पूजा’ के प्रति आगाह किया. इस घटनाक्रम से सीजेपी और कांग्रेस के कुछ वर्गों के बीच दबे हुए मतभेद खुलकर सामने आ गये. कांग्रेस का एक वर्ग सीजेपी के उभरने की वजह से सतर्क है, क्योंकि इसके कई प्रमुख चेहरों की पृष्ठभूमि आम आदमी पार्टी की है. आम आदमी पार्टी ने सीजेपी के हाल के प्रदर्शनों का समर्थन किया है. The post 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर अलग-अलग आंदोलन करेंगे AAP और CJP! इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन का सौरभ ने किया स्वागत appeared first on Naya Vichar.

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