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October 16, 2026

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4 दिन में फिल्म से निकाली गईं, सेट पर मां का हुआ अपमान, ‘दूसरी औरत’ का टैग… आसान नहीं थी ड्रीम गर्ल की राह

Hema Malini Birthday Special: बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की जिंदगी सिर्फ शोहरत और खूबसूरती की कहानी नहीं है. करियर की शुरुआत में फिल्म से निकाले जाने का झटका लगा, मां के चेहरे पर अपमान का भाव देखकर एक्ट्रेस बनने की जिद पैदा हुई और फिर शादीशुदा धर्मेंद्र से प्यार के कारण आलोचना झेलनी पड़ी. 16 अक्टूबर को जन्मदिन के मौके पर जानिए उस एक्ट्रेस की कहानी, जिसने जिंदगी के हर मोड़ पर अपनी राह खुद चुनी. बॉलीवुड में कुछ सितारों की जिंदगी किसी फिल्म की कहानी जैसी लगती है. पहले संघर्ष, फिर कामयाबी और आखिर में ऐसा स्टारडम कि दुनिया उन्हें उनके असली नाम से ज्यादा किसी खास पहचान से जानने लगती है. हेमा मालिनी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. आज दुनिया उन्हें ड्रीम गर्ल कहती है, लेकिन इस नाम के पीछे सिर्फ खूबसूरत चेहरा और सुपरहिट फिल्में नहीं हैं. उनकी जिंदगी में रिजेक्शन का झटका भी था, मां की उम्मीदें भी थीं और प्यार के लिए उठाए गए ऐसे फैसले भी, जिन पर सालों तक सवाल उठते रहे. जिस हेमा मालिनी की एक झलक के लिए कभी दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आते थे, उसी लड़की को करियर की शुरुआत में एक फिल्म से सिर्फ चार दिन की शूटिंग के बाद बाहर कर दिया गया था. आगे चलकर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई. लेकिन जब निजी जिंदगी में धर्मेंद्र से प्यार और शादी का फैसला आया, तो उनकी चर्चा एक्टिंग से आगे निकलकर उनके रिश्ते तक पहुंच गई. एक तरफ ड्रीम गर्ल का स्टारडम था, दूसरी तरफ ‘दूसरी शादी’ से जुड़ा ऐसा टैग, जिसने उन्हें भीतर तक आहत किया. आखिर कैसे एक रिजेक्शन से शुरू हुआ हेमा मालिनी का सफर सुपरस्टारडम तक पहुंचा और प्यार के लिए गए उनके फैसले ने उनकी जिंदगी की कहानी को हमेशा के लिए बदल दिया? आइए, जानते हैं हेमा मालिनी की जिंदगी के इस दिलचस्प सफर के बारे में. चार दिन शूटिंग के बाद फिल्म से निकाल दिया गया हेमा मालिनी ने लेहरें रेट्रो को दिए एक इंटरव्यू में अपने करियर के शुरुआती दिनों का यह किस्सा सुनाया था. उन्होंने बताया कि तमिल फिल्ममेकर सीवी श्रीधर ने उन्हें अपनी फिल्म के लिए चुना था. उस वक्त उनका नाम बदलकर सुजाता भी रखा गया था. फिल्म में जयललिता भी थीं. हेमा को उनके डांस कार्यक्रमों के दौरान देखा गया था और उनकी मां के जरिए फिल्म का प्रस्ताव पहुंचा था. हेमा मालिनी अपनी मां के साथ मां चाहती थीं कि बेटी आगे बढ़े, अपने लिए एक अलग पहचान बनाए. उन्होंने हेमा के करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी. ऐसे में फिल्म से बाहर किए जाने का झटका सिर्फ हेमा का नहीं था, उनकी मां की उम्मीदों से भी जुड़ा था. हेमा ने बताया था कि मां के चेहरे पर वह भाव देखकर उन्होंने अभिनेत्री बनने की ठान ली. यानी जिस रास्ते पर चलने को लेकर हेमा खुद असमंजस में थीं, उसी रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला उन्होंने उस पल लिया, जब उन्हें लगा कि उनकी मां की उम्मीदों को इस तरह टूटने नहीं देना चाहिए. यह उनके जीवन का ऐसा मोड़ था, जहां एक रिजेक्शन ने उनके भीतर खुद को साबित करने की जिद पैदा कर दी. ड्रीम गर्ल बनीं, तो बड़े-बड़े सितारे भी हुए दीवाने ‘सपनों का सौदागर’ के बाद हेमा मालिनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘सीता और गीता’, ‘शोले’, ‘ड्रीम गर्ल’ और ‘मीरा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए. कभी चुलबुली बसंती बनकर दर्शकों को हंसाया, तो कभी गंभीर भूमिकाओं से अपनी अभिनय क्षमता दिखाई. हेमा मालिनी की निजी जिंदगी भी उनके फिल्मी करियर की तरह चर्चा में रही. संजीव कुमार और जितेंद्र के साथ उनके रिश्तों की समाचारें उस दौर में सुर्खियों में थीं. बाद में हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र से शादी की, जिसके बाद उनकी निजी जिंदगी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं. धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी पर्दे पर खूब पसंद की गई. दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और धीरे-धीरे उनके निजी रिश्ते की समाचारें भी सामने आने लगीं. लेकिन इस प्रेम कहानी की सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा थे. उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर थीं और उनके चार शिशु थे. शादीशुदा धर्मेंद्र से प्यार, आसान नहीं था फैसला हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की प्रेम कहानी का जिक्र आते ही फिल्मी पर्दे की रोमांटिक जोड़ी के साथ-साथ उनकी निजी जिंदगी के सवाल भी सामने आते हैं. धर्मेंद्र और हेमा ने 1980 में शादी की. लेकिन यह फैसला उस दौर में हुआ, जब धर्मेंद्र की पहली शादी और परिवार पहले से मौजूद था. ऐसे में दोनों के रिश्ते को लेकर आलोचना होना तय था. हेमा मालिनी ने अपनी जीवनी ‘Hema Malini: Beyond the Dream Girl’ में धर्मेंद्र के साथ अपने रिश्ते को लेकर हुई आलोचनाओं का जिक्र किया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हेमा ने लिखा कि उनके रिश्ते पर लोगों ने सवाल उठाए और उनके बारे में बातें कीं. लोग उनके सामने भले ही कुछ नहीं कहते थे, लेकिन उन्हें पता था कि उनकी पीठ पीछे उनके रिश्ते को लेकर चर्चा होती थी. हेमा के लिए इस तरह की आलोचनाओं का सामना करना आसान नहीं था. हेमा मालिनी हेमा मालिनी की कहानी में मां की उम्मीदें हैं, शुरुआती रिजेक्शन है, प्यार है और सामाजिक आलोचना भी. लेकिन इन सबके बीच उनका काम लगातार आगे बढ़ता रहा. उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में जो बातें साझा कीं, उनसे यह समझ आता है कि उन्होंने कई मुश्किल फैसलों और अनुभवों के बावजूद अपने जीवन को आगे बढ़ाने की कोशिश की. आज उनके जन्मदिन पर ड्रीम गर्ल को याद करना सिर्फ उनकी खूबसूरती या सुपरहिट फिल्मों को याद करना नहीं है. यह उस सफर को भी देखना है, जिसमें शुरुआत का एक रिजेक्शन उनके लिए चुनौती बना और निजी जिंदगी के फैसलों ने उन्हें लंबे समय तक चर्चा में रखा. जिस लड़की को चार दिन बाद फिल्म से निकाल दिया गया था, वही आगे चलकर लाखों दिलों की ड्रीम गर्ल बनी. उनकी जिंदगी की राह आसान नहीं थी, लेकिन उनकी पहचान आखिरकार उनके लंबे करियर और पर्दे पर छोड़ी गई छाप से

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Jaguar-Land Rover से Volvo तक की मालिक थी Ford, फिर क्या हुआ कि बेचनी पड़ी कंपनी? भारत में समेटा कारोबार, पढ़िए ये उतार-चढ़ाव भरी पूरी कहानी

एक कंपनी, जिसने कारों को अमीरों के गैराज से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. एक ऐसा ब्रांड, जिसने Jaguar, Land Rover, Volvo और Aston Martin जैसी दुनिया की मशहूर कार कंपनियों को अपने कारोबारी साम्राज्य में शामिल किया. लेकिन वक्त बदला तो इनमें से कई कंपनियों को बेच भी दिया. यह कहानी है अमेरिका की Ford Motor Company की. 1903 में शुरू हुई इस कंपनी ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में उत्पादन का तरीका बदल दिया. Mustang जैसी स्पोर्ट्स कार और F-Series जैसे पिकअप ट्रक से अपनी पहचान मजबूत की. लेकिन हिंदुस्तान में यही कंपनी अपनी लंबी मौजूदगी के बावजूद कारों का स्थानीय उत्पादन बंद करने पर मजबूर हुई. आखिर Ford ने इतनी बड़ी कंपनी कैसे बनाई? दुनिया के मशहूर कार ब्रांड खरीदने के बाद उन्हें क्यों बेचा? और अब इलेक्ट्रिक वाहनों के दौर में कंपनी क्या करने की तैयारी कर रही है? आइए, समझते हैं Ford की पूरी कहानी. 1903 में हुई शुरुआत Ford की स्थापना 16 जून 1903 को अमेरिका के मिशिगन राज्य के डेट्रॉयट में हेनरी फोर्ड ने की थी. उस दौर में कारें महंगी थीं और उन्हें खरीदना आम लोगों के लिए आसान नहीं था. हेनरी फोर्ड चाहते थे कि कार सिर्फ अमीरों की सवारी न रहे. इसी सोच के साथ कंपनी ने 1903 में अपनी पहली Model A कार ग्राहकों तक पहुंचाई. हालांकि, Ford को असली पहचान 1908 में आई Model T से मिली. अमेरिका में F-Series Ford की सबसे महत्वपूर्ण वाहन सीरीज में शामिल है. Mustang कंपनी की स्पोर्ट्स कार विरासत को आगे बढ़ाती है, जबकि Ranger और Transit जैसे मॉडल पिकअप और कमर्शियल वाहन बाजार में उसकी मौजूदगी मजबूत करते हैं. लेकिन Ford की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा अभी बाकी था. कंपनी ने सिर्फ अपने ब्रांड के मॉडल बढ़ाने के बजाय दूसरी कार कंपनियों को खरीदकर अपना साम्राज्य फैलाना शुरू किया. Ford ने Jaguar, Land Rover, Volvo और Aston Martin को क्यों खरीदा? 1990 और 2000 के दशक में Ford ने दुनिया के कई प्रतिष्ठित कार ब्रांड अपने पोर्टफोलियो में शामिल किए. कंपनी की कोशिश थी कि वह सामान्य कारों के साथ लग्जरी कार और प्रीमियम SUV बाजार में भी मजबूत जगह बनाए. Jaguar: Ford ने 1989 में ब्रिटिश लग्जरी कार ब्रांड Jaguar को खरीदा. इससे कंपनी को प्रीमियम सेडान और स्पोर्ट्स कारों के बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिला. 2008 में Ford ने इसे Land Rover के साथ Tata Motors को बेच दिया. Land Rover: Ford ने 2000 में BMW से Land Rover खरीदा. यह ब्रांड अपनी ऑफ-रोड क्षमता और प्रीमियम SUV के लिए जाना जाता था. 2008 में Tata Motors ने Jaguar और Land Rover दोनों का अधिग्रहण किया. बाद में दोनों ब्रांड Jaguar Land Rover (JLR) समूह के तहत आ गए. Volvo Cars: Ford ने 1999 में स्वीडन की Volvo Cars को खरीदा था. सुरक्षा और प्रीमियम कारों के लिए पहचान रखने वाले इस ब्रांड को 2010 में चीन की Geely ने खरीद लिया. Aston Martin: Ford ने 1987 में Aston Martin में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की थी. यह ब्रिटिश लग्जरी स्पोर्ट्स कार ब्रांड है. 2007 में Ford ने अपनी हिस्सेदारी निवेशकों के समूह को बेच दी. इन सौदों के बाद Ford दुनिया के कई बड़े कार ब्रांडों का मालिक बन गया था. लेकिन इन कंपनियों को संभालना आसान नहीं था. हर ब्रांड को नए मॉडल, तकनीक, उत्पादन और मार्केटिंग पर निवेश की जरूरत थी. हिंदुस्तान में Ford की एंट्री, EcoSport से मिली पहचान Ford ने 1995 में हिंदुस्तान में अपना परिचालन शुरू किया. कंपनी ने यहां Figo, Aspire, Freestyle, EcoSport और Endeavour जैसे मॉडल पेश किए. इनमें EcoSport ने कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में खास पहचान बनाई. इसकी स्टाइलिंग और ड्राइविंग अनुभव ने ग्राहकों को आकर्षित किया. Endeavour ने प्रीमियम SUV बाजार में अपनी जगह बनाई. इसके बावजूद कंपनी हिंदुस्तानीय बाजार में लंबे समय तक पर्याप्त बिक्री और मुनाफा हासिल नहीं कर सकी. Maruti Suzuki और Hyundai की मजबूत पकड़ थी. बाद में Tata Motors और Mahindra ने भी नए मॉडल पेश करके प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी. हिंदुस्तानीय ग्राहकों के लिए कीमत, माइलेज, सर्विस नेटवर्क और रीसेल वैल्यू महत्वपूर्ण हैं. Ford के सामने इन पहलुओं पर प्रतिस्पर्धा करना बड़ी चुनौती बना रहा. फोर्ड इन्फोग्राफिक्स (फोटो: AI) आगे क्या है Ford की योजना? Ford के सामने आने वाले समय में तीन बड़ी चुनौतियां हैं. मुनाफा बढ़ाना: F-Series और कमर्शियल वाहन कारोबार से कमाई मजबूत रखना. नई तकनीक अपनाना: इलेक्ट्रिक वाहन, कनेक्टेड कार और सॉफ्टवेयर सेवाओं में निवेश करना. लागत नियंत्रित करना: बदलती मांग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच खर्च को बेहतर तरीके से संभालना. Ford की कहानी बताती है कि दुनिया की बड़ी कंपनी बनना और लंबे समय तक सफल बने रहना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं. Model T ने उसे नई पहचान दी, Mustang और F-Series ने उसकी ताकत बढ़ाई और दूसरी कंपनियों को खरीदने से उसका साम्राज्य फैला. लेकिन बदलते बाजार ने उसे अपनी रणनीति बार-बार बदलने पर मजबूर किया. नोट: ये लेख नया विचार की ‘सफरनामा सीरीज’ का हिस्सा है. जिसके तहत हम दुनिया की अलग-अलग कंपनियों की डीप एनालिसिस करेंगे और ये जानने की कोशिश करेंगे कि कैसे कंपनियों ने अपने मुकाम को हासिल किया और क्या रही उनके सफलता की कहानी. इस सीरीज की अगली कड़ी में हम एक और कंपनी के बारे में जानेंगे. साथ ही कंपनी के कुछ अनछुए पहलुओं से भी रूबरू होंगे, तो जुड़े रहिए हमारे साथ. अगर आपके पास कोई सलाह या कोई सवाल हो तो आप हमें इस मेल आईडी पर लिख सकते हैं- (imsuyash001@gmail.com). हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि हम आपकी हर उलझन को दूर कर सकें. वाहनों से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों और लेटेस्ट अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें नया विचार. The post Jaguar-Land Rover से Volvo तक की मालिक थी Ford, फिर क्या हुआ कि बेचनी पड़ी कंपनी? हिंदुस्तान में समेटा कारोबार, पढ़िए ये उतार-चढ़ाव भरी पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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क्या आप भी रात में तकिए के पास फोन रखकर सोते हैं? रिसर्च में नींद को लेकर सामने आई ये जरूरी बात

Sleeping with Phone Nearby: सच बताइए, क्या आप भी रात में फोन चलाते-चलाते सो जाते हैं? मेरे साथ तो अक्सर ऐसा होता है. कभी सोने से पहले सोशल मीडिया देखने लगता हूं, तो कभी एक वीडियो के बाद दूसरा वीडियो देखते हुए पता ही नहीं चलता कि कितनी देर हो गई. इसके बाद जब नींद आने लगती है, तो फोन को तकिए के पास रखकर सो जाता हूं. सुबह अलार्म सुनने के लिए भी फोन पास रखना अच्छा लगता है. शायद आप में से ज्यादातर लोग भी ऐसा ही करते होंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रात में फोन को अपने पास रखकर सोना या बिस्तर पर लेटकर देर तक फोन चलाना हमारी नींद पर क्या असर डाल सकता है? क्या इससे रात में बार-बार आंख खुल सकती है या सुबह उठने पर भी थकान महसूस हो सकती है? मैंने भी इस बारे में जानने की कोशिश की, तो कुछ ऐसी रिसर्च सामने आईं, जिनमें फोन के ज्यादा इस्तेमाल और नींद की परेशानियों के बीच कनेक्शन पाया गया. आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि इन रिसर्च में क्या पता चला और हमें किन बातों का ख्याल रखना चाहिए. बिस्तर पर फोन चलाने से नींद पर पड़ सकता है असर साल 2023 में पर्सनल एंड युबिक्विटस कंप्यूटिंग नाम की मैगजीन में एक रिसर्च पब्लिश हुई. इसका नाम था लीव योर स्मार्टफोन आउट ऑफ बेड: क्वांटिटेटिव एनालिसिस ऑफ स्मार्टफोन यूज इफेक्ट ऑन स्लीप क्वालिटी. इस रिसर्च में 75 लोगों के फोन इस्तेमाल करने के स्टेटिस्टिक्स की तुलना उनकी नींद से जुड़े स्टेटिस्टिक्स से की गई. इसके लिए यह देखा गया कि वे फोन पर कितना समय बिता रहे हैं और साथ ही उनकी उंगली में पहनी जाने वाली स्लीप ट्रैकिंग रिंग से उनकी नींद का पूरा रिकॉर्ड निकाला गया. रिसर्च में पाया गया कि बिस्तर पर लेटकर फोन चलाने का कनेक्शन नींद आने में ज्यादा समय लगने और रात में अधिक देर तक जागते रहने से था. वहीं, बिस्तर से बाहर फोन इस्तेमाल करने पर नींद की क्वालिटी में वैसा कनेक्शन नहीं मिला. हालांकि, इस रिसर्च में केवल 75 लोग शामिल थे. इसलिए इसके नतीजों को हर व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता. यह रिसर्च फोन चलाने और नींद की परेशानी के बीच संबंध दिखाती है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि फोन चलाना ही हर बार खराब नींद की वजह है. effects of keeping smartphone in bed 36 हजार से ज्यादा लोगों की रिसर्च में क्या निकला? साल 2023 में जर्नल ऑफ क्लिनिकल स्लीप मेडिसिन में पब्लिश्ड एक रिसर्च में स्मार्टफोन के इस्तेमाल और नींद की क्वालिटी को लेकर 17 स्टडीज का एनालिसिस किया गया. इन स्टडीज में टोटल 36,485 लोग शामिल थे. रिसर्च का नाम डोज-रिस्पांस एनालिसिस ऑफ स्मार्टफोन यूजेज एंड सेल्फ-रिपोर्टेड स्लीप क्वालिटी: ए सिस्टेमेटिक रिव्यू एंड मेटा-एनालिसिस ऑफ ऑब्जर्वेशनल स्टडीज था. इसमें पाया गया कि स्मार्टफोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल खराब नींद, नींद की कमी और सोने में ज्यादा समय लगने जैसी परेशानियों से जुड़ा था. इसका मतलब यह नहीं है कि फोन चलाने वाला हर व्यक्ति ठीक से नहीं सो पाएगा. इस रिसर्च में शामिल स्टडी लोगों की आदतों और उनके बताए नींद के एक्सपीरियंस पर बेस्ड थे. इसलिए इससे यह पक्का नहीं कहा जा सकता कि फोन के इस्तेमाल से ही नींद खराब होती है. फिर भी, नतीजे बताते हैं कि फोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नींद की परेशानी से जुड़ा हो सकता है. ये भी पढ़ें: सुबह गूंथा आटा दोपहर या शाम तक इस्तेमाल करना कितना सही? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स 2024 की बड़ी रिसर्च में भी सामने आई जरूरी बात साल 2024 में जर्नल ऑफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च में एक बड़ी एनालिसिस पब्लिश हुई. इसमें 55 रिसर्च पेपर्स के 56 स्टडीज और 41,716 लोगों के स्टेटिस्टिक्स का एनालिसिस किया गया. इस रिसर्च में स्मार्टफोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक मीडियम्स के इस्तेमाल को नींद की क्वालिटी से जोड़कर देखा गया. नतीजों में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल और नींद की खराब क्वालिटी के बीच कनेक्शन पाया गया. जरूरत से ज्यादा या परेशानी पैदा करने वाले इस्तेमाल का संबंध नींद से जुड़ी समस्याओं से भी मिला. हालांकि, इस रिसर्च में केवल रात के समय फोन चलाने की आदत पर ध्यान नहीं दिया गया था. इसलिए इससे यह साबित नहीं होता कि रात में फोन चलाना ही खराब नींद की वजह है. यह रिसर्च इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के इस्तेमाल और नींद की परेशानी के बीच कनेक्शन दिखाती है. क्या सिर्फ पास में फोन रखने से भी दिक्कत हो सकती है? फोन को पास रखकर सोने और उसे इस्तेमाल करते हुए सोने में फर्क है. अगर आप फोन को तकिए के पास रखकर सोते हैं, लेकिन रात में उसे नहीं चलाते और उसकी वजह से आपकी नींद नहीं टूटती, तो केवल पास में फोन होने को खराब नींद की पक्की वजह नहीं कहा जा सकता. हालांकि, फोन पास होने पर बार-बार संदेश देखने, सूचना की आवाज सुनकर जागने या थोड़ी देर के लिए फोन उठाने की आदत बन सकती है. इससे नींद का सिलसिला टूट सकता है या सोने का समय बढ़ सकता है. असल परेशानी इस बात पर निर्भर करती है कि फोन आपकी नींद और सोने की आदतों को किस तरह अफेक्ट कर रहा है. बच्चों और टीनेजर्स पर हुई एक रिव्यु में 6 से 19 साल के लोगों से जुड़े 20 स्टडीज का एनालिसिस किया गया था. इसमें सोने के समय फोन जैसे डिवाइसेज का इस्तेमाल करने या उन्हें रात में पास रखने का कनेक्शन कम नींद, खराब नींद की क्वालिटी और दिन में नींद आने जैसी परेशानियों से मिला. हालांकि, ये स्टडी मुख्य रूप से बच्चों और टीनेजर्स पर आधारित थे. इसलिए इनके नतीजों को सभी एडल्ट्स पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता. ये भी पढ़ें: सब्जियां धोने का सही तरीका क्या है? सिर्फ नल का पानी काफी है या कुछ और भी जरूरी? FSSAI की गाइडलाइन से जानें स्क्रीन की रोशनी का क्या असर पड़ता है? रात में फोन की स्क्रीन देखने से मिलने वाली रोशनी शरीर की सोने-जागने की नेचुरल रिदम को अफेक्ट कर सकती है. इसके अलावा, फोन पर देर तक कुछ देखते या पढ़ते रहने से सोने का समय

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Exclusive: अपार्टमेंट के फ्लैटों की दाखिल-खारिज का रास्ता साफ, बिहार सरकार लाने जा रही है अध्यादेश

Exclusive: पटना. बिहार में अपार्टमेंट के फ्लैटों की दाखिल खारिज का इंतजार करने वालों के लिए अच्छी समाचार है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से अगले महीने से दाखिल खारिज शुरू करने के लिए राज्यपाल के माध्यम से अध्यादेश लाने की तैयारी है. फिलहाल दाखिल खारिज को लेकर विभाग की तरफ से नया सॉफ्टवेयर बन चुका है. हालांकि दाखिल खारिज एक्ट में इससे संबंधित प्रावधान नहीं होने की वजह से विधि विभाग से नये एक्ट की मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है. वहां से मंजूरी मिलने के बाद राज्यपाल के माध्यम से अध्यादेश लाकर इसे लागू कर दिया जायेगा और सॉफ्टवेयर के माध्यम से फ्लैटों की दाखिल खारिज शुरू हो जायेगी. इसकी विधिवत मंजूरी विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में ली जायेगी.   मुख्य बातें नया सॉफ्टवेयर तैयार, नियमों में संशोधन के लिए विधि विभाग से मंजूरी का इंतजार  फ्लैट खरीदार के नाम दाखिल-खारिज करने में तकनीकी और कानूनी परेशानी का होगा बेहतर समाधान अप्रैल 2025 से लगी हुई है रोक विभाग का उद्देश्य फ्लैटों की जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को स्पष्ट, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सही बनाना है. इससे फ्लैट को लेकर विवाद पर विराम लग सकेगा. सूत्रों के अनुसार बिहार में अपार्टमेंट की जमीन के फ्लैटधारियों के नाम दाखिल-खारिज पर अप्रैल 2025 से रोक लगी हुयी है. इसे लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर अपार्टमेंट की जमीन का फ्लैटधारियों के नाम दाखिल-खारिज, नामांतरण और जमाबंदी सृजन की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकने को कहा था.  नियमावली में नहीं थी व्यवस्था विभाग के अनुसार बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम 2011 और नियमावली 2012 में अपार्टमेंट की जमीन का सीधे फ्लैटधारियों के नाम दाखिल खारिज करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है. साथ ही विभागीय सॉफ्टवेयर में भी इसके लिए आवश्यक प्रावधान नहीं था. यही वजह थी कि अलग-अलग अंचलों में फ्लैट की जमीन के दाखिल-खारिज को लेकर अलग-अलग तरीके अपनाये जा रहे थे. तकनीकी और कानूनी परेशानी का समाधान दरअसल, फ्लैट की रजिस्ट्री के समय खरीदार को अपार्टमेंट की जमीन में आनुपातिक हिस्सा यानी प्रोपोर्शनेट ऑफ लैंड मिलता है, लेकिन यह जमीन अपार्टमेंट के किस हिस्से में है, इसे अलग से चिह्नित करना संभव नहीं होता. ऐसे में सामान्य जमीन की तरह फ्लैट खरीदार के नाम दाखिल-खारिज करने में तकनीकी और कानूनी परेशानी पैदा हो रही थी. विभाग ने लिया था नयी व्यवस्था तैयार करने का निर्णय ऐसे में फ्लैट की दाखिल खारिज पर रोक के बाद विभाग ने नयी व्यवस्था तैयार करने का निर्णय लिया. इसके तहत अपार्टमेंट की जमीन और फ्लैटधारियों को आवंटित आनुपातिक भूमि के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को सॉफ्टवेयर में शामिल किया जा रहा है. विभागीय स्तर पर इसके लिए प्रक्रिया और नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. पहले भी विभाग ने स्पष्ट किया था कि नया सॉफ्टवेयर तैयार होने और आवश्यक प्रावधान लागू होने के बाद ही अपार्टमेंट की जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी. बिहार की ताजा समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें फ्लैट खरीदारों नहीं लगाना होगा अंचल कार्यालयों का चक्कर फिलहाल नयी व्यवस्था लागू होने के बाद फ्लैट खरीदारों को दाखिल-खारिज के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है. बिहार भूमि पोर्टल पर फिलहाल सामान्य दाखिल-खारिज की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है, जबकि फ्लैटों के मामले में नयी व्यवस्था लागू की जानी है.  Also Read: Success Story : पटना के विवेक ने छोड़ी होटल मैनेजमेंट की नौकरी, 15 एकड़ में मछली पालन कर ऐसे बदल दी 20 लोगों की किस्मत The post Exclusive: अपार्टमेंट के फ्लैटों की दाखिल-खारिज का रास्ता साफ, बिहार प्रशासन लाने जा रही है अध्यादेश appeared first on Naya Vichar.

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खतरे में नौकरी: रेलवे में AI की एंट्री, क्या बिगड़ जाएगा लाखों भर्तियों का गणित?

हिंदुस्तानीय रेलवे में मॉडर्न टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल कई सवाल खड़े करता है. जैसे क्या आने वाले समय में मशीनें और AI उन कामों को संभालने लगेंगे, जिनके लिए अभी हजारों कर्मचारी तैनात हैं? क्या लोको पायलट, ट्रैक मेंटेनर और तकनीकी निरीक्षण से जुड़े कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडरा सकता है? साल 2014 से जून 2026 तक हिंदुस्तानीय रेलवे में 5.56 लाख से ज्यादा भर्तियां की गईं, जबकि 1.61 लाख से अधिक गैर-राजपत्रित पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही थी. – रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 12 मार्च 2026 की ये भी पढ़ें: बात करियर की: Oracle में गईं 21000 नौकरियां, IIT-NIT के छात्रों से भी छीन लिया प्लेसमेंट, 10000+ स्टाफ पर लटकी तलवार The post खतरे में नौकरी: रेलवे में AI की एंट्री, क्या बिगड़ जाएगा लाखों भर्तियों का गणित? appeared first on Naya Vichar.

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बिहार MLC चुनाव: जिन सीटों पर आसानी से मिलती थी जीत, वहां अब दिग्गजों की सांसें अटकीं

Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव में पटना की दो सीटें खास चर्चा में हैं. वजह हैं दो पुराने चेहरे, जिनकी नजर अपनी जीत का सिलसिला आगे बढ़ाने पर है. पटना स्नातक सीट से जदयू के नीरज कुमार लगातार चौथी जीत की कोशिश में हैं, जबकि पटना शिक्षक सीट से भाजपा के प्रो. नवल किशोर यादव छठी बार जीतना चाहते हैं. लेकिन इस बार दोनों के सामने विपक्षी उम्मीदवारों के अलावा ऐसे चुनावी समीकरण भी हैं, जिन पर उनकी नजर रहेगी. नीरज कुमार के सामने जन सुराज के डॉ. अनुज कुमार और राजद के दिलीप कुमार हैं. दूसरी ओर, नवल किशोर यादव को राजद के डॉ. संजीव कुमार सिंह और जन सुराज की डॉ. दिव्या ज्योति से मुकाबला करना है. इन दोनों सीटों पर सवाल सिर्फ पुराने उम्मीदवारों के अनुभव का नहीं है. असली सवाल यह भी है कि क्या वे अपने पुराने समर्थकों को साथ रख पाएंगे और विरोधी उम्मीदवारों के बीच बन रहे समीकरणों का सामना कर पाएंगे? पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार के सामने दो तरफ से चुनौती पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं. इस बार उनका लक्ष्य जीत का चौका लगाना है. लेकिन मुकाबले में जन सुराज के डॉ. अनुज कुमार और राजद के दिलीप कुमार की मौजूदगी ने चुनावी गणित को चर्चा में ला दिया है. नीरज कुमार के लिए सबसे ज्यादा चर्चा मोकामा के विधायक अनंत सिंह के रुख को लेकर है. दी गई जानकारी के मुताबिक, अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार का समर्थन किया है. ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि नेतृत्वक प्रभाव और मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. अनुज कुमार और अनंत सिंह के समर्थन से नीरज कुमार के मतदाताओं पर कितना असर पड़ेगा, इसका अभी कोई पक्का अनुमान नहीं लगाया जा सकता. लेकिन अगर अनुज कुमार स्नातक मतदाताओं के एक हिस्से तक अपनी पहुंच बना लेते हैं, तो नीरज कुमार के लिए मुकाबला कठिन हो सकता है. यही वजह है कि इस सीट पर अनंत सिंह की भूमिका को अहम माना जा रहा है. हालांकि, किसी नेता का समर्थन मिलना और मतदाताओं का वोट मिलना दो अलग बातें हैं. अंतिम तस्वीर मतदान के बाद ही साफ होगी. दिलीप कुमार की उम्मीदवारी से भी बढ़ सकती है मुश्किल नीरज कुमार के सामने दूसरी चुनौती राजद के दिलीप कुमार की है. राजद ने उन्हें पटना स्नातक सीट से उम्मीदवार बनाया है. दिलीप कुमार कुर्मी समुदाय से आते हैं. ऐसे में उनकी उम्मीदवारी को जातीय समीकरण के लिहाज से भी देखा जा रहा है. राजद की रणनीति के बारे में नेतृत्वक आकलन यह है कि पार्टी अपने परंपरागत मुस्लिम-यादव समर्थन के साथ कुर्मी मतदाताओं के बीच भी जगह बनाने की कोशिश कर सकती है. अगर दिलीप कुमार को कुर्मी स्नातकों का अच्छा समर्थन मिलता है, तो इसका असर नीरज कुमार के वोटों पर पड़ सकता है. यह मान लेना सही नहीं होगा कि किसी समुदाय के सभी मतदाता एक ही उम्मीदवार को वोट देंगे. स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पहचान, मतदाताओं से संपर्क और स्थानीय मुद्दे भी अहम हो सकते हैं. इसलिए नीरज कुमार के सामने चुनौती केवल विरोधी उम्मीदवारों से मुकाबला करने की नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को अपने पक्ष में बनाए रखने की भी है. निशांत कुमार के प्रचार से नीरज को कितनी राहत? नीरज कुमार के समर्थन में निशांत कुमार ने नालंदा और नवादा में प्रचार किया है. चुनाव के दौरान बड़े नेताओं और पार्टी से जुड़े प्रमुख चेहरों का प्रचार उम्मीदवारों को समर्थन जुटाने में मदद कर सकता है. लेकिन प्रचार का असर कितना होगा, यह मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है. नीरज कुमार के लिए यह देखना अहम होगा कि पार्टी का समर्थन और उनका अपना चुनावी अनुभव विरोधियों की चुनौती को कितना कम कर पाता है. तीन बार जीत चुके नीरज कुमार के सामने इस बार चौथी जीत दर्ज करने का लक्ष्य है. उनके पुराने मतदाताओं का समर्थन, अनंत सिंह का रुख और दिलीप कुमार की उम्मीदवारी इस सीट के प्रमुख पहलू बने हुए हैं. पटना शिक्षक सीट पर नवल किशोर यादव के सामने छठी जीत का लक्ष्य पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के प्रो. नवल किशोर यादव लगातार छठी बार जीतने की कोशिश में हैं. इस सीट पर नाम वापसी के बाद कुल 18 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं. इनमें राजद के डॉ. संजीव कुमार सिंह और जन सुराज की डॉ. दिव्या ज्योति प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं. नवल किशोर यादव का चुनावी अनुभव उनके लिए अहम हो सकता है, लेकिन इस बार मुकाबले में कई उम्मीदवारों की मौजूदगी वोटों के बंटवारे की संभावना भी है. नवल यादव के सामने अपने समर्थकों को एकजुट रखने और विरोधी उम्मीदवारों की चुनौती का सामना करने का सवाल है. चुनाव में उनकी पकड़ कितनी मजबूत रहती है, यह शिक्षक मतदाताओं के रुख से तय होगा. राजद के संजीव कुमार सिंह से कैसे बन सकता है मुकाबला? राजद ने पटना शिक्षक सीट से डॉ. संजीव कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है. वह पहले जदयू के विधायक रह चुके हैं. उनकी उम्मीदवारी को लेकर चर्चा है कि पुराने नेतृत्वक संपर्क और राजद का समर्थन उन्हें चुनाव में मदद दे सकते हैं. संजीव कुमार सिंह भूमिहार समुदाय से आते हैं. इस वजह से उनके और दूसरे उम्मीदवारों के बीच मतदाताओं के समर्थन को लेकर कई तरह के आकलन किए जा रहे हैं. लेकिन यह तय नहीं है कि समुदाय के मतदाता किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान करेंगे. नवल किशोर यादव के लिए चुनौती यह होगी कि वे अपने अनुभव और पुराने संपर्कों के आधार पर मतदाताओं का समर्थन बनाए रखें. वहीं, संजीव कुमार सिंह को अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए चुनाव प्रचार और मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर निर्भर रहना होगा. जन सुराज की दिव्या ज्योति भी क्यों हैं चर्चा में? पटना शिक्षक सीट पर जन सुराज ने डॉ. दिव्या ज्योति को उम्मीदवार बनाया है. वह बाढ़ की रहने वाली हैं और भूमिहार समुदाय से आती हैं. राजद के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार सिंह भी इसी समुदाय से हैं. इस वजह से

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UP पंचायत चुनाव: OBC आरक्षण पर अड़ा ग्राम प्रधान संघ, 3 महीने में चुनाव कराने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में देगा चुनौती?

UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य में तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है. हालांकि, राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन इस समय चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है. संगठन ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है. प्रधान संगठन का कहना है कि चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, ताकि सभी वर्गों को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिल सके. प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले का स्वागत राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने गुरुवार को कहा कि संगठन प्रधानों को प्रशासक बनाने के प्रशासन के फैसले को सही ठहराने वाले हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत करता है. उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव होने तक प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने का फैसला उचित है. हालांकि, तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के निर्देश से संगठन सहमत नहीं है. संगठन इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगा. उसका कहना है कि चुनाव कराने से पहले जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करना चाहिए. ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट को लेकर उठाए सवाल प्रधान संगठन ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए हैं. अखिलेश सिंह के मुताबिक, वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया गया था. आयोग को प्रदेश के सभी 75 जिलों का दौरा कर ओबीसी आरक्षण से जुड़े आंकड़े जुटाने और रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है. संगठन का दावा है कि अभी तक 10 जिलों के आंकड़े भी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, इसलिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. मतदाता सूची में गड़बड़ी का भी लगाया आरोप संगठन ने पंचायत और विधानसभा चुनाव की मतदाता सूचियों में अंतर होने का आरोप लगाया है. अखिलेश सिंह का कहना है कि मतदाता सूची में मौजूद विसंगतियों को दूर किए बिना जल्दबाजी में पंचायत चुनाव कराना ठीक नहीं होगा. संगठन चाहता है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची की जांच हो और ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जाए. दूसरी ओर, पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं. राज्य प्रशासन भी इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकती है. हाईकोर्ट ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत चुनाव कराने को कहा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पिछड़ा वर्ग आयोग की जांच लंबित होने के कारण ओबीसी आरक्षित सीटों को सामान्य सीट नहीं माना जाएगा. पंचायत चुनाव मौजूदा 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे. इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और स्त्रीओं के लिए लागू आरक्षण नियमों का भी पालन करना होगा. अदालत के निर्देश के मुताबिक, आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया लंबित होने को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता. इसी बिंदु पर प्रधान संगठन ने अपनी आपत्ति जताई है. प्रशासन और निर्वाचन आयोग को तुरंत तैयारी शुरू करने का निर्देश हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन और राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने और आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया है. अदालत ने प्रशासन से निर्वाचन आयोग को जरूरी कर्मचारी, बजट और सुरक्षा बल उपलब्ध कराने को भी कहा है, ताकि चुनाव समय पर कराए जा सकें. अब प्रधान संगठन की सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी और राज्य प्रशासन के अगले कदम पर सबकी नजर है. देखना होगा कि चुनाव तय समय पर होंगे या इस मामले में कोई नया कानूनी मोड़ आएगा. Must Read: UP Panchayat Election: 3 महीने में चुनाव पर पंचायती राज मंत्री राजभर का बयान, जानें अब क्या करेगी योगी प्रशासन The post UP पंचायत चुनाव: OBC आरक्षण पर अड़ा ग्राम प्रधान संघ, 3 महीने में चुनाव कराने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में देगा चुनौती? appeared first on Naya Vichar.

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राजधानी से भी तेज दौड़ेगी नयी वंदे भारत एक्सप्रेस! हावड़ा-नयी दिल्ली के बीच चलेगी स्लीपर ट्रेन

Indian Railways News: हिंदुस्तानीय रेलवे देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण हावड़ा-नयी दिल्ली रेल मार्ग (Howrah–New Delhi Route) पर स्लीपर वंदे हिंदुस्तान ट्रेन की शुरुआत करने जा रहा है. यह ट्रेन झारखंड के धनबाद के रास्ते (Via Dhanbad) गुजरेगी. वंदे हिंदुस्तान स्लीपर एक्सप्रेस (Vande Bharat Sleeper Express) ट्रेन चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है. नवी मुंबई में हाई लेवल मीटिंग में प्रस्ताव को मंजूरी नवी मुंबई में 8 से 10 अक्टूबर के बीच आयोजित रेलवे की एक उच्चस्तरीय बैठक में इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव को हरी झंडी दी गयी. कहा जा रहा है कि नयी वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेन देश की सबसे तेज चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस से भी कम समय में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचायेगी. ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन में 160 किमी की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें हावड़ा-नयी दिल्ली रूट पर वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेन को बेहद तेज रफ्तार से चलाने के लिए ग्रैंड कॉर्ड रूट (Grand Chord Section) पर इन्फ्रास्ट्रक्चर को तेजी से अपग्रेड किया जा रहा है. रेलवे लाइन और सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाया जा रहा है, ताकि ट्रेनें बिना किसी रुकावट के अधिकतम गति सीमा पर दौड़ सकें. ये भी पढ़ें: रेल यात्रियों के लिए खुशसमाचारी! हावड़ा-पटना वंदे हिंदुस्तान को मिला नया स्टॉपेज, जानें अब कहां-कहां रुकेगी सेमी हाई स्पीड ट्रेन राजधानी से कम समय में हावड़ा से दिल्ली वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेन के आधिकारिक टाइम-टेबल (समय सारणी) और यात्रा की अवधि की अंतिम घोषणा अभी बाकी है. लेकिन यह साफ है कि यह स्लीपर ट्रेन समय के मामले में नया कीर्तिमान रचेगी. देश में 200 से अधिक वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेनों का प्लान हिंदुस्तानीय रेलवे का लक्ष्य देश के प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए 200 से अधिक वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेन सेट (Vande Bharat Sleeper Trainsets) तैयार करने का है. इसके निर्माण और डिजाइन की जिम्मेदारी देश-विदेश की शीर्ष कंपनियों व निर्माण इकाइयों को दी गयी है. ये भी पढ़ें: हावड़ा से पुरी तक का सफर अब सिर्फ तीन घंटे में, वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेन में मिलेगी ये खास सुविधा इन 4 कंपनियों को वंदे हिंदुस्तान स्लीपर ट्रेन बनाने की जिम्मेदारी हिंदुस्तान अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) काइनेट (Kinet) टिटागढ़-भेल कंसोर्टियम (Titagarh–BHEL Consortium) इंटीग्रल कोच फैक्टरी चेन्नई (ICF Chennai) शेड्यूल और लांच डेट पर बोर्ड की मुहर बाकी नवी मुंबई की बैठक में इस रूट के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन हावड़ा-दिल्ली सेवा के अंतिम शेड्यूल और लांच डेट पर रेलवे बोर्ड (Railway Board) की ओर से औपचारिक मुहर लगनी अभी बाकी है. The post राजधानी से भी तेज दौड़ेगी नयी वंदे हिंदुस्तान एक्सप्रेस! हावड़ा-नयी दिल्ली के बीच चलेगी स्लीपर ट्रेन appeared first on Naya Vichar.

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नवरात्रि के छठे दिन जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, भोग और मंत्र

Navratri 2026 Day 6: शारदीय नवरात्र का छठा दिन आज 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को है. इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की उपासना करने से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है. माता की कृपा से जीवन के कष्ट, भय और परेशानियां दूर होने की मान्यता है. आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, प्रिय भोग, शुभ रंग और मंत्र. मां कात्यायनी पूजा का शुभ मुहूर्त 16 अक्टूबर 2026 को मां कात्यायनी की पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं. भक्त अपनी सुविधानुसार इन समयों में पूजा-अर्चना कर सकते हैं. ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 बजे से 05:40 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:51 बजे से 06:16 बजे तक सायाह्न संध्या: शाम 05:51 बजे से रात 07:06 बजे तक कैसा है मां कात्यायनी का स्वरूप? मां कात्यायनी का स्वरूप दिव्य, भव्य और शक्ति का प्रतीक माना जाता है. उनकी चार भुजाएं हैं. माता के दाहिने हाथों में अभय और वर मुद्रा है, जबकि बाएं हाथों में तलवार और कमल सुशोभित हैं. मां सिंह पर सवार रहती हैं. उनका यह स्वरूप भक्तों को साहस, शक्ति और निर्भयता का संदेश देता है. मां कात्यायनी की पूजा विधि सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें. मां कात्यायनी का ध्यान करते हुए उन्हें कमल का फूल अर्पित करें. पंचोपचार विधि से माता की पूजा करें. मां को लाल फूल, अक्षत, कुमकुम और सिंदूर चढ़ाएं. घी या कपूर जलाकर माता की आरती करें. अंत में मां के मंत्रों का जाप करें और सुख-समृद्धि व मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें. मां कात्यायनी की पूजा का महत्व धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को मनोकामनाएं पूरी करने वाली देवी माना जाता है. उनकी आराधना से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आने और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने की मान्यता है. पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए यमुना तट पर मां कात्यायनी की पूजा की थी. इसी वजह से विवाह की कामना करने वाले भक्त भी माता की विशेष आराधना करते हैं. ये भी पढ़ें: मां कात्यायनी की पूजा में इन बातों को न करें नजरअंदाज, जानें क्या करें और क्या न करें मां कात्यायनी का प्रिय भोग और शुभ रंग मान्यता है कि मां कात्यायनी को शहद प्रिय है. इसलिए नवरात्रि के छठे दिन माता को शहद या शहद से बना हलवा अर्पित किया जाता है. इस दिन ग्रे रंग के वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है. भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ माता की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं. मां कात्यायनी के मंत्र बीज मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः वैकल्पिक मंत्र: ॐ ह्रीं नमः स्तुति मंत्र चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना. कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी ध्यान मंत्र या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः The post नवरात्रि के छठे दिन जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, भोग और मंत्र appeared first on Naya Vichar.

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मां कात्यायनी के दिन किस राशि की दूर होंगी परेशानियां? जानें आज का राशिफल

Aaj Ka Rashifal 16 October 2026: आज 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार का दिन है. शारदीय नवरात्र का आज छठा दिन है और इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी. आइए जानते हैं कि आज का दिन मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहने वाला है. 16 अक्टूबर 2026 का पंचांग दिन: शुक्रवार तिथि: शुक्ल पक्ष षष्ठी सुबह 5:54 बजे तक, फिर सप्तमी तिथि नक्षत्र: ज्येष्ठा सुबह 6:47 बजे तक, फिर मूल नक्षत्र योग: शोभन योग रात 10:05 बजे तक, फिर अतिगण्ड योग करण: कौलव शाम 4:38 बजे तक, फिर तैतिल और गर करण सूर्य राशि: कन्या चंद्र राशि: वृश्चिक सुबह 6:47 बजे तक, फिर धनु सूर्योदय: सुबह 6:28 बजे सूर्यास्त: शाम 5:56 बजे शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:40 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 से दोपहर 12:35 बजे तक अमृत काल: रात 2:39 से सुबह 4:27 बजे तक (17 अक्टूबर) अशुभ मुहूर्त राहुकाल: सुबह 10:46 से दोपहर 12:12 बजे तक यमगंड: दोपहर 3:04 से शाम 4:30 बजे तक गुलिक काल: सुबह 7:54 से 9:20 बजे तक मेष से मीन तक आज का राशिफल आज का मेष राशिफल मेष राशि वालों को आज वाहन चलाते समय और जोखिम भरे काम करते समय सावधानी बरतनी चाहिए. जल्दबाजी में कोई काम न करें. अपनी सेहत का ध्यान रखें और किसी भी तरह का जोखिम लेने से बचें. आज का वृषभ राशिफल वृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रह सकता है. प्रशासनी कामों में सफलता मिलने की संभावना है. कानूनी मामलों में भी राहत मिल सकती है. कोई भी जरूरी फैसला लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें. आज का मिथुन राशिफल मिथुन राशि वालों की आमदनी बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं. परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा. मन प्रसन्न रहेगा और आप अपने जरूरी काम पूरे करने में सफल हो सकते हैं. आज का कर्क राशिफल कर्क राशि वालों को आज व्यापार में पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतनी चाहिए. विरोधियों से सतर्क रहें और किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. सोच-समझकर काम करने से परेशानी से बच सकते हैं. आज का सिंह राशिफल सिंह राशि वालों को आज मेहनत का फल पाने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है. धैर्य बनाए रखें और अपने काम पर ध्यान दें. जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचें. लगातार प्रयास करने से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. आज का कन्या राशिफल कन्या राशि वालों के लिए आज का दिन सुकून भरा रह सकता है. परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और मन प्रसन्न रहेगा. जरूरी कामों को पूरा करने के लिए दिन का सही इस्तेमाल करें. अपनों के साथ समय बिताने से खुशी मिलेगी. आज का तुला राशिफल तुला राशि वालों को आज बेवजह की चिंता और तनाव से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए. कामकाज में सावधानी बरतें. सेहत में उतार-चढ़ाव हो सकता है, इसलिए अपनी दिनचर्या का ध्यान रखें. कोई भी बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें. आज का वृश्चिक राशिफल वृश्चिक राशि वालों के मान-सम्मान में बढ़ोतरी हो सकती है. परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा और मन खुश रहेगा. कार्यक्षेत्र में भी अपनी बात रखने का अच्छा मौका मिल सकता है. अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखें. आज का धनु राशिफल धनु राशि वालों के लिए प्रेम के मामले में अच्छी समाचार मिल सकती है. लंबे समय से चल रहे प्रेम संबंधों में सफलता मिलने की उम्मीद है. दिन उत्साह और खुशी से बीतेगा. मिले हुए अवसरों का सही इस्तेमाल करें. आज का मकर राशिफल मकर राशि वालों की किसी धार्मिक स्थान पर जाने की योजना बन सकती है. विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा रह सकता है और पढ़ाई में सफलता मिलने की संभावना है. अपने लक्ष्य पर ध्यान दें और मेहनत जारी रखें. आज का कुंभ राशिफल कुंभ राशि वालों को आज पुराना उधार वापस मिल सकता है, जिससे आर्थिक राहत मिलेगी. जरूरी मामलों में अपनी समझदारी से फैसला लें. मेहनत से पीछे न हटें. सही दिशा में किए गए प्रयास आगे चलकर अच्छा परिणाम दे सकते हैं. आज का मीन राशिफलफल मीन राशि वालों को आज जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. परिवार या दोस्तों के साथ किसी बात पर मतभेद हो सकते हैं. बातचीत में संयम रखें और गुस्से में कोई फैसला लेने से बचें. The post मां कात्यायनी के दिन किस राशि की दूर होंगी परेशानियां? जानें आज का राशिफल appeared first on Naya Vichar.

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