Sleeping with Phone Nearby: सच बताइए, क्या आप भी रात में फोन चलाते-चलाते सो जाते हैं? मेरे साथ तो अक्सर ऐसा होता है. कभी सोने से पहले सोशल मीडिया देखने लगता हूं, तो कभी एक वीडियो के बाद दूसरा वीडियो देखते हुए पता ही नहीं चलता कि कितनी देर हो गई. इसके बाद जब नींद आने लगती है, तो फोन को तकिए के पास रखकर सो जाता हूं. सुबह अलार्म सुनने के लिए भी फोन पास रखना अच्छा लगता है. शायद आप में से ज्यादातर लोग भी ऐसा ही करते होंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रात में फोन को अपने पास रखकर सोना या बिस्तर पर लेटकर देर तक फोन चलाना हमारी नींद पर क्या असर डाल सकता है? क्या इससे रात में बार-बार आंख खुल सकती है या सुबह उठने पर भी थकान महसूस हो सकती है? मैंने भी इस बारे में जानने की कोशिश की, तो कुछ ऐसी रिसर्च सामने आईं, जिनमें फोन के ज्यादा इस्तेमाल और नींद की परेशानियों के बीच कनेक्शन पाया गया. आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि इन रिसर्च में क्या पता चला और हमें किन बातों का ख्याल रखना चाहिए.
बिस्तर पर फोन चलाने से नींद पर पड़ सकता है असर
साल 2023 में पर्सनल एंड युबिक्विटस कंप्यूटिंग नाम की मैगजीन में एक रिसर्च पब्लिश हुई. इसका नाम था लीव योर स्मार्टफोन आउट ऑफ बेड: क्वांटिटेटिव एनालिसिस ऑफ स्मार्टफोन यूज इफेक्ट ऑन स्लीप क्वालिटी. इस रिसर्च में 75 लोगों के फोन इस्तेमाल करने के स्टेटिस्टिक्स की तुलना उनकी नींद से जुड़े स्टेटिस्टिक्स से की गई. इसके लिए यह देखा गया कि वे फोन पर कितना समय बिता रहे हैं और साथ ही उनकी उंगली में पहनी जाने वाली स्लीप ट्रैकिंग रिंग से उनकी नींद का पूरा रिकॉर्ड निकाला गया. रिसर्च में पाया गया कि बिस्तर पर लेटकर फोन चलाने का कनेक्शन नींद आने में ज्यादा समय लगने और रात में अधिक देर तक जागते रहने से था. वहीं, बिस्तर से बाहर फोन इस्तेमाल करने पर नींद की क्वालिटी में वैसा कनेक्शन नहीं मिला.
हालांकि, इस रिसर्च में केवल 75 लोग शामिल थे. इसलिए इसके नतीजों को हर व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता. यह रिसर्च फोन चलाने और नींद की परेशानी के बीच संबंध दिखाती है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि फोन चलाना ही हर बार खराब नींद की वजह है.
36 हजार से ज्यादा लोगों की रिसर्च में क्या निकला?
साल 2023 में जर्नल ऑफ क्लिनिकल स्लीप मेडिसिन में पब्लिश्ड एक रिसर्च में स्मार्टफोन के इस्तेमाल और नींद की क्वालिटी को लेकर 17 स्टडीज का एनालिसिस किया गया. इन स्टडीज में टोटल 36,485 लोग शामिल थे. रिसर्च का नाम डोज-रिस्पांस एनालिसिस ऑफ स्मार्टफोन यूजेज एंड सेल्फ-रिपोर्टेड स्लीप क्वालिटी: ए सिस्टेमेटिक रिव्यू एंड मेटा-एनालिसिस ऑफ ऑब्जर्वेशनल स्टडीज था. इसमें पाया गया कि स्मार्टफोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल खराब नींद, नींद की कमी और सोने में ज्यादा समय लगने जैसी परेशानियों से जुड़ा था. इसका मतलब यह नहीं है कि फोन चलाने वाला हर व्यक्ति ठीक से नहीं सो पाएगा. इस रिसर्च में शामिल स्टडी लोगों की आदतों और उनके बताए नींद के एक्सपीरियंस पर बेस्ड थे. इसलिए इससे यह पक्का नहीं कहा जा सकता कि फोन के इस्तेमाल से ही नींद खराब होती है. फिर भी, नतीजे बताते हैं कि फोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नींद की परेशानी से जुड़ा हो सकता है.
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2024 की बड़ी रिसर्च में भी सामने आई जरूरी बात
साल 2024 में जर्नल ऑफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च में एक बड़ी एनालिसिस पब्लिश हुई. इसमें 55 रिसर्च पेपर्स के 56 स्टडीज और 41,716 लोगों के स्टेटिस्टिक्स का एनालिसिस किया गया. इस रिसर्च में स्मार्टफोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक मीडियम्स के इस्तेमाल को नींद की क्वालिटी से जोड़कर देखा गया. नतीजों में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल और नींद की खराब क्वालिटी के बीच कनेक्शन पाया गया. जरूरत से ज्यादा या परेशानी पैदा करने वाले इस्तेमाल का संबंध नींद से जुड़ी समस्याओं से भी मिला.
हालांकि, इस रिसर्च में केवल रात के समय फोन चलाने की आदत पर ध्यान नहीं दिया गया था. इसलिए इससे यह साबित नहीं होता कि रात में फोन चलाना ही खराब नींद की वजह है. यह रिसर्च इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के इस्तेमाल और नींद की परेशानी के बीच कनेक्शन दिखाती है.
क्या सिर्फ पास में फोन रखने से भी दिक्कत हो सकती है?
फोन को पास रखकर सोने और उसे इस्तेमाल करते हुए सोने में फर्क है. अगर आप फोन को तकिए के पास रखकर सोते हैं, लेकिन रात में उसे नहीं चलाते और उसकी वजह से आपकी नींद नहीं टूटती, तो केवल पास में फोन होने को खराब नींद की पक्की वजह नहीं कहा जा सकता. हालांकि, फोन पास होने पर बार-बार संदेश देखने, सूचना की आवाज सुनकर जागने या थोड़ी देर के लिए फोन उठाने की आदत बन सकती है. इससे नींद का सिलसिला टूट सकता है या सोने का समय बढ़ सकता है. असल परेशानी इस बात पर निर्भर करती है कि फोन आपकी नींद और सोने की आदतों को किस तरह अफेक्ट कर रहा है.
बच्चों और टीनेजर्स पर हुई एक रिव्यु में 6 से 19 साल के लोगों से जुड़े 20 स्टडीज का एनालिसिस किया गया था. इसमें सोने के समय फोन जैसे डिवाइसेज का इस्तेमाल करने या उन्हें रात में पास रखने का कनेक्शन कम नींद, खराब नींद की क्वालिटी और दिन में नींद आने जैसी परेशानियों से मिला. हालांकि, ये स्टडी मुख्य रूप से बच्चों और टीनेजर्स पर आधारित थे. इसलिए इनके नतीजों को सभी एडल्ट्स पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता.
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स्क्रीन की रोशनी का क्या असर पड़ता है?
रात में फोन की स्क्रीन देखने से मिलने वाली रोशनी शरीर की सोने-जागने की नेचुरल रिदम को अफेक्ट कर सकती है. इसके अलावा, फोन पर देर तक कुछ देखते या पढ़ते रहने से सोने का समय भी टल सकता है. लगातार वीडियो देखने, संदेश पढ़ने या सोशल मीडिया चलाने से दिमाग बिजी रहता है. ऐसे में फोन बंद करने के बाद भी तुरंत नींद आना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, नींद पर असर केवल स्क्रीन की रोशनी से ही नहीं पड़ता. फोन पर बिताया गया समय, देखे जा रही कंटेंट और सोने का समय भी मायने रखते हैं. इसलिए केवल स्क्रीन की रोशनी कम कर देना ही हर व्यक्ति की नींद बेहतर करने के लिए काफी नहीं है.
रात में फोन से दूरी बनाने के आसान तरीके
अगर आपको रात में देर से नींद आती है या सुबह उठने पर थकान महसूस होती है, तो फोन इस्तेमाल करने की अपनी आदत पर ध्यान दें. इसके लिए कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं.
- सोने से कुछ समय पहले फोन चलाना बंद कर दें.
- फोन को तकिए के पास रखने के बजाय थोड़ी दूरी पर रखें.
- रात में गैरजरूरी मैसेजेस और नोटिफिकेशन की आवाज बंद कर दें.
- फोन पर वीडियो देखते-देखते सोने की आदत से बचें.
- सोने और सुबह उठने का समय रोज लगभग एक जैसा रखने की कोशिश करें.
- अगर फोन अलार्म के लिए जरूरी है, तो उसे ऐसी जगह रखें जहां अलार्म सुनाई दे, लेकिन बार-बार उठाकर देखने की आदत न बने.
इन तरीकों का मकसद फोन को पूरी तरह छोड़ना नहीं, बल्कि यह देखना है कि कहीं उसका इस्तेमाल आपकी नींद का समय तो नहीं घटा रहा.
आखिर में रिसर्च क्या कहती है?
अब तक की रिसर्च में स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल और नींद की परेशानियों के बीच कनेक्शन सामने आया है. वहीं, कुछ स्टडीज में बिस्तर पर फोन चलाने का कनेक्शन नींद आने में देरी और रात में ज्यादा देर तक जागने से भी मिला है. लेकिन केवल फोन को पास रखकर सोने से हर व्यक्ति की नींद खराब होती है, ऐसा पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता.
इसलिए अगर आप भी फोन को तकिए के पास रखकर सोते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. सिर्फ इस बात पर ध्यान दीजिये कि क्या आप सोने से पहले लंबे समय तक फोन चलाते हैं, नोटिफिकेशन्स की वजह से बार-बार जागते हैं या फोन के कारण देर से सोते हैं. अगर ऐसा है, तो रात में फोन के इस्तेमाल को कम करना आपकी नींद की आदतों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. सीधी बात यह है कि चिंता सिर्फ इस बात की नहीं होनी चाहिए कि फोन पास रखा है या नहीं, बल्कि यह देखना जरूरी है कि उसका इस्तेमाल आपकी नींद को किस तरह अफेक्ट कर रहा है.
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