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October 16, 2026

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भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया जाना क्या कानूनी था?

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10–11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने हजारों प्रदर्शनकारियों, छात्र नेताओं, पत्रकारों, वकीलों, नेतृत्वक दलों के नेताओं और यहां तक कि प्रदर्शन में शामिल नहीं रहे लोगों को भी हिरासत में ले लिया. मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision, SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन होना था. इसे रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में आवाजाही और सार्वजनिक गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां लगा दी थीं. हालांकि, हिरासत में लेने की कार्रवाई केवल प्रदर्शन स्थल के आसपास मौजूद लोगों तक सीमित नहीं रही. यूट्यूबर ध्रुव राठी और स्वतंत्र पत्रकार हर्ष यादव समेत कई लोगों को प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही उनके घरों और होटलों से उठा लिया गया. व्यंग्यात्मक नेतृत्वक समूह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं को दिल्ली पहुंचने पर विमान के भीतर से ही हिरासत में ले लिया गया. इसके बाद से संयुक्त राष्ट्र, वकीलों और पत्रकार संगठनों ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना की है. पत्रकार सुरक्षा समिति (Committee for the Protection of Journalists, CPJ) और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (Reporters Without Borders, RSF) जैसे अधिकार संगठनों ने प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने, परेशान किए जाने और रिपोर्टिंग से रोके जाने की करीब 40 घटनाएं दर्ज की हैं. 28 वर्षीय पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा को 11 अक्टूबर को प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करते समय हिरासत में लिया गया था. फोटो: Asian Dispatch/उल्टा चश्मा (uc) 11 अक्टूबर को हिंदुस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने भी विशेष सुनवाई की. वकीलों के संगठनों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी. आरोप था कि पुलिस ने न्यायालय के उन पूर्व आदेशों का उल्लंघन किया, जिनमें मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, इंटरनेट बंद करने और बड़े पैमाने पर एहतियाती हिरासत से बचने के निर्देश दिए गए थे. न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में दोहराया कि इंटरनेट सेवाएं बिना किसी बाधा के चालू रहनी चाहिए, किसी को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए और वकीलों तथा पत्रकारों को बिना किसी रुकावट के अपना काम करने दिया जाना चाहिए. रविवार को हुई सुनवाई के बाद 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से संबंधित कई याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई हैं. इस मामले पर 15 अक्टूबर को सुनवाई होगी. न्यायालय ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए तलब किया है. पुलिस एहतियाती कार्रवाई तब कर सकती है, जब उसके पास यह मानने का वास्तविक और उचित आधार हो कि कोई विशेष अपराध या अशांति हो सकती है। लेकिन एहतियाती शक्तियां पुलिस को असीमित अधिकार नहीं देतीं कि वह लोगों को केवल इसलिए हिरासत में ले ले, क्योंकि वे कार्यकर्ता हैं, नेतृत्वक विरोधी हैं या शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के संदेह में हैं। — विकास पाहवा, वरिष्ठ अधिवक्ता कानूनी विशेषज्ञों ने इन हिरासतों को ‘गैरकानूनी‘ बताते हुए दिल्ली पुलिस की उस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई. उनका कहना है कि हिंसा की आशंका को लेकर ‘उचित आशंका‘ का तर्क देकर प्रदर्शनों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता. चलो संसद: हिंदुस्तान में शिक्षा सुधारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों में गुस्सा प्रदर्शन पर रोक: गलत फैसला पूर्व आईपीएस अधिकारी अमोद कंठ ने कहा कि निषेधाज्ञा केवल सीमित परिस्थितियों में और सीमित उच्च-सुरक्षा वाले क्षेत्रों में लागू की जा सकती है. इसके बावजूद इसका अर्थ यह नहीं है कि लोगों के एकत्र होने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा सकता है. संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों में कहा गया है कि प्रदर्शन करना और असहमति व्यक्त करना मौलिक अधिकार हैं, हालांकि इन पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. कंठ ने एशियन डिस्पैच से कहा, ‘प्रशासन, कोई भी राज्य या पुलिस इन मौलिक अधिकारों को छीन नहीं सकती.’ संसद के निकट स्थित जंतर-मंतर के संदर्भ में, जिसे अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल का दर्जा प्राप्त नहीं है, कंठ ने कहा, ‘प्रदर्शन सत्ता के केंद्र के नजदीक होते हैं, ताकि संसद को पता चल सके कि नागरिकों की शिकायतें क्या हैं.’ सीजेपी के नेताओं ने 2 अक्टूबर को प्रदर्शन की घोषणा की थी. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हिंदुस्तानीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी थी. यह धारा अधिकारियों को उन परिस्थितियों में आदेश जारी करने का अधिकार देती है, जहां ‘इस धारा के तहत कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार हो और तत्काल रोकथाम या शीघ्र उपचार आवश्यक हो.’ हालांकि, पुलिस ने कार्रवाई को इस हद तक बढ़ा दिया कि लोगों को उनके घरों, होटलों, यहां तक कि ट्रेनों और विमानों से भी हिरासत में लिया गया. आपराधिक बचाव के मामलों के विशेषज्ञ वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने जोर देकर कहा कि किसी व्यक्ति को केवल इसलिए हिरासत में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि अधिकारियों को उसका प्रदर्शन असुविधाजनक लगता है या वे उसके संदेश से सहमत नहीं हैं. उन्होंने बीएनएसएस की धारा 172 का भी उल्लेख किया, जो पुलिस के वैध निर्देशों का पालन करने से संबंधित है. उन्होंने बताया कि यह धारा पुलिस को ऐसे व्यक्ति को हिरासत में लेने की अनुमति देती है, जो सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिए गए वैध पुलिस निर्देश का विरोध करता है, उसे मानने से इनकार करता है या उसकी अवहेलना करता है. चिंता की बात यह है कि इस प्रावधान में ‘मामूली मामले’ (petty case) की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है. इससे पुलिस को शुरुआती स्तर पर यह तय करने का काफी विवेकाधिकार मिल जाता है कि किसी व्यक्ति को कब हिरासत में लिया जाए या वहां से हटाया जाए. प्रदर्शनों के संदर्भ में इससे वास्तविक खतरा पैदा होता है कि लोगों को केवल पुलिस के निर्देशों का पालन करने से इनकार करने के कारण हिरासत में लिया जा सकता है, भले ही उनका आचरण सामान्य आपराधिक कानून के तहत गिरफ्तारी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त न हो. — विकास पाहवा, वरिष्ठ अधिवक्ता इस धारा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है. हालांकि, पाहवा ने

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CJP के तिरंगा मार्च से पहले आधी रात दिल्ली में बवाल, थाने के बाहर NSUI का धरना, हिरासत में कई कार्यकर्ता

Delhi NSUI Protest: दिल्ली में CJP के प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है. गुरुवार देर रात पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर NSUI कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ धरना दिया. प्रदर्शनकारी अपने साथियों से कथित मारपीट के मामले में FIR दर्ज करने की मांग कर रहे थे. इस दौरान पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. NSUI का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद पुलिस अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं. थाने के बाहर धरना, कई कार्यकर्ता हिरासत में न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ता पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. उनकी मांग थी कि संगठन के सदस्यों से कथित मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए. प्रदर्शनकारियों ने कर दिया सड़क जाम NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी प्रदर्शन में शामिल हुए. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की, लेकिन शिकायत दर्ज कराने में सहयोग नहीं किया जा रहा है. धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क भी रोक दी. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. NSUI का आरोप- दो छात्राओं को पुलिस ने पीटा विनोद जाखड़ ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले NSUI की दो कार्यकर्ताओं अथिरा और रितु के साथ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की थी. इसी मामले में संगठन के नेता FIR दर्ज कराने थाने पहुंचे थे. जाखड़ ने कहा- NSUI कार्यकर्ताओं के साथ जिस तरह मारपीट की गई, उसके खिलाफ हम FIR दर्ज कराने आए हैं. लेकिन DCP न तो हमसे बात कर रहे हैं और न ही हमारी बात सुन रहे हैं. उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज कराना उनका संवैधानिक अधिकार है और संगठन इस मांग से पीछे नहीं हटेगा. DCP पर सहयोग नहीं करने का आरोप NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ के मुताबिक बुधवार को संगठन के प्रतिनिधि थाने पहुंचे थे और उनकी मुलाकात एक एडिशनल DCP से हुई थी. हालांकि संबंधित DCP से उनकी बातचीत नहीं हो सकी. जाखड़ ने आरोप लगाया कि DCP बुधवार को छुट्टी पर थे और गुरुवार को फोन नहीं उठा रहे थे. उन्होंने एक अन्य एडिशनल DCP पर भी घटना को लेकर अलग-अलग जवाब देने का आरोप लगाया. उनका दावा है कि अधिकारियों के रवैये से ऐसा लगता है कि मारपीट के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को बचाने की कोशिश की जा रही है. विनोद जाखड़ को जबरन ले जाने पर पुलिस पर गंभीर आरोप NSUI ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ को पुलिसकर्मी जबरन घेरकर ले गए, जिससे उनकी शर्ट के कारण गला दबने जैसी स्थिति बन गई. संगठन ने चेतावनी दी कि किसी अनहोनी के लिए दिल्ली पुलिस जिम्मेदार होगी. NSUI ने कहा कि साथियों को न्याय मिलने और FIR दर्ज होने तक आंदोलन जारी रहेगा. एनएसयूआई फिर करेगा प्रदर्शन- जाखड़ हिरासत में लिए जाने से पहले जाखड़ ने साफ किया कि NSUI अपना विरोध जारी रखेगी. उन्होंने कहा कि संगठन अगले दिन फिर प्रदर्शन करेगा और FIR दर्ज कराने की मांग उठाएगा. जाखड़ ने कहा- हम यहां धरने पर बैठे हैं और सड़क रोक रहे हैं. दिल्ली पुलिस जो करना चाहती है, कर सकती है. Also Read: SIR विवाद के बीच SSR की घोषणा, यूपी-पंजाब सहित 17 राज्यों और UTI में होगा वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण The post CJP के तिरंगा मार्च से पहले आधी रात दिल्ली में बवाल, थाने के बाहर NSUI का धरना, हिरासत में कई कार्यकर्ता appeared first on Naya Vichar.

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JSSC Recruitment: महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा के 33 सफल अभ्यर्थियों की डिग्री संदिग्ध, जांच में सामने आईं ये 4 गड़बड़ियां

रांची. झारखंड स्त्री पर्यवेक्षिका नियुक्ति परीक्षा में पास हुए 33 उम्मीदवारों की स्नातक डिग्री की जांच में गड़बड़ी पाई गई है. विभागीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर स्त्री, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने इन उम्मीदवारों की नियुक्ति की अनुशंसा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को वापस लौटा दी है. आयोग से इस संबंध में आगे की कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है. विभागीय जांच में 33 अभ्यर्थियों की डिग्री पर उठे सवाल सभी 33 उम्मीदवारों ने राज्य के एक निजी विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा पास की है. इनकी डिग्री की जांच के लिए विभाग ने पहले एक कमेटी गठित की थी. कमेटी ने जांच के बाद डिग्रियों को संदेहास्पद बताया. जांच रिपोर्ट के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को भी पत्र लिखा है. डिग्री जांच में सामने आईं ये चार गड़बड़ियां विभागीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में उम्मीदवारों की शैक्षणिक डिग्री और संबंधित रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल सामने आए हैं. रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में परेशानी: विश्वविद्यालय को 33 उम्मीदवारों की फीस रसीद, दैनिक उपस्थिति और आंतरिक मूल्यांकन से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में परेशानी हुई. उपस्थिति शीट में ओवरराइटिंग: उपस्थिति शीट में उत्तर पुस्तिकाओं के सीरियल नंबर पर ओवरराइटिंग मिली. डिग्री जारी करने की तारीख पर सवाल: अधिकांश डिग्रियों पर जारी करने की तारीख 15 मई 2025 दर्ज है, जबकि दीक्षांत समारोह 9 मार्च 2025 को हुआ था. कुछ प्रोविजनल प्रमाण-पत्रों में भी अंतिम डिग्री के बाद जारी होने का उल्लेख है. 12वीं और स्नातक में नामांकन के बीच अंतर: सभी संबंधित उम्मीदवारों के 12वीं पास करने और स्नातक में नामांकन लेने के बीच छह से 13 वर्ष का अंतर मिला. 2023 में शुरू हुई थी भर्ती प्रक्रिया, मई 2025 में आया रिजल्ट झारखंड स्त्री पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा 2023 का आयोजन JSSC ने किया था. परीक्षा के लिए वर्ष 2023 में आवेदन आमंत्रित किए गए थे. इसके बाद सितंबर 2024 में परीक्षा हुई और आयोग ने 27 मई 2025 को परिणाम जारी किया. रिजल्ट जारी होने के बाद JSSC ने सफल उम्मीदवारों की नियुक्ति की अनुशंसा स्त्री, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग से की थी. जानकारी के अनुसार, विभाग ने 444 उम्मीदवारों की नियुक्ति की अधियाचना JSSC को भेजी थी. परीक्षा में कुल 313 उम्मीदवार सफल हुए थे, जबकि 131 पद रिक्त रह गए थे. 28 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला न्यायालय में लंबित 33 उम्मीदवारों की नियुक्ति अनुशंसा वापस किए जाने के अलावा 28 अन्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की अनुशंसा फिलहाल न्यायालय में लंबित है. ऐसे में स्त्री पर्यवेक्षिका नियुक्ति प्रक्रिया में डिग्री सत्यापन और न्यायालय में लंबित मामलों की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है. अब आगे क्या होगा? विभागीय जांच में 33 उम्मीदवारों की डिग्री संदेहास्पद पाए जाने के बाद उनकी नियुक्ति की अनुशंसा JSSC को लौटा दी गई है. आयोग से मामले में आगे की कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है. वहीं, विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने UGC को पत्र लिखा है. ये भी पढ़ें: मेदिनीनगर में शिवालय के प्रारूप पर बन रहा 35 फीट ऊंचा दुर्गा पूजा पंडाल, जानें खासियत The post JSSC Recruitment: स्त्री पर्यवेक्षिका परीक्षा के 33 सफल अभ्यर्थियों की डिग्री संदिग्ध, जांच में सामने आईं ये 4 गड़बड़ियां appeared first on Naya Vichar.

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अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 3 बच्चों और शिक्षक की मौत, 16 साल का हमलावर भी मारा गया

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना सिल्वर रेल एलीमेंट्री स्कूल में हुई. बेंड पुलिस विभाग के प्रमुख माइक क्रांट्ज ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस को दोपहर करीब एक बजे स्कूल में गोलीबारी की सूचना देने वाले 911 कॉल मिले थे. घटनास्थल पर पांच, आठ और 11 साल के तीन बच्चों और एक शिक्षक के शव मिले. संदिग्ध किशोर भी मृत पाया गया. रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध ने लंबी बंदूक से स्कूल के बंद दरवाजों पर गोली चलाकर अंदर प्रवेश किया था. हमलावर को रोकने के लिए स्थानीय व्यक्ति ने चलाई गोली रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संदिग्ध को स्कूल में घुसते देखकर एक स्थानीय व्यक्ति ने उसका पीछा किया और उसे गोली मार दी. ओरेगन की गवर्नर टीना कोटेक ने हमलावर को रोककर आगे होने वाले नुकसान को टालने के लिए उस व्यक्ति की सराहना की. हालांकि, पुलिस ने उस व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की है. रॉयटर्स के अनुसार, गोलीबारी में घायल सात साल के एक शिशु और 54 वर्षीय शिक्षक को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया. पुलिस को शुरुआती सूचना दोपहर करीब एक बजे मिली थी. अधिकारी लगभग तीन मिनट के भीतर स्कूल पहुंच गए थे. ये भी पढे़ं: अमेरिका में हिंदू मंदिर पर गोलीबारी का प्लान बनाते 19 साल का युवक गिरफ्तार, हथियार भी मिले स्कूल में छुट्टी, बच्चों की मदद के लिए टीम गठित ओरेगन पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग (OPB) की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद स्कूल में तलाशी और बच्चों को बाहर निकालने का काम कई घंटे तक चला. बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने के लिए जर्नी चर्च में केंद्र बनाया गया था. स्कूल प्रशासन ने शुक्रवार को सभी कक्षाएं रद्द कर दीं. इसके अलावा, डेशूट्स काउंटी प्रशासन ने घटना से प्रभावित बच्चों और स्थानीय लोगों की मदद के लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम तैयार करने की बात कही. वहीं, पुलिस ने हमले के पीछे की वजह और संदिग्ध की पहचान को लेकर जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. मामले की जांच जारी है. The post अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 3 बच्चों और शिक्षक की मौत, 16 साल का हमलावर भी मारा गया appeared first on Naya Vichar.

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BCCI चीफ सेलेक्टर नहीं बनना चाहते पूर्व क्रिकेटर? पार्थिव पटेल ने भी खींचे हाथ, अब क्या करेगा बोर्ड

BCCI Cheif Selector: हिंदुस्तानीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सामने चीफ सेलेक्टर की नियुक्ति को लेकर मुश्किल खड़ी हो गई है. पूर्व मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के जाने के बाद बोर्ड ने इस पद के लिए आवेदन मांगे थे, लेकिन 14 अक्टूबर की डेडलाइन खत्म होने तक किसी ने भी आधिकारिक तौर पर दावेदारी पेश नहीं की. रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने कुछ बड़े पूर्व क्रिकेटरों से भी संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी को संभालने से इनकार कर दिया. इस बीच, पार्थिव पटेल का नाम नए चीफ सेलेक्टर की रेस में सबसे आगे माना जा रहा था. हालांकि, उन्होंने भी आखिरी समय में अपना नाम वापस खींच लिया. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब हिंदुस्तानीय टीम के चयन की जिम्मेदारी संभालने का मौका है, तो पूर्व क्रिकेटर इस पद से दूरी क्यों बना रहे हैं? और अब बीसीसीआई चीफ सेलेक्टर की नियुक्ति के लिए क्या रास्ता अपनाएगा? प्रज्ञान ओझा के हाथों में रहेगी चयन समिति की कमान? अजीत अगरकर के जाने के बाद प्रज्ञान ओझा अंतरिम चीफ सेलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. अब नए उम्मीदवार के लिए आवेदन नहीं आने के बाद उनके भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड फिलहाल प्रज्ञान ओझा के साथ आगे बढ़ने पर विचार कर सकता है. हालांकि, चयन प्रक्रिया को लेकर एक और संभावना सामने आई है. बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण की चयन मामलों में भूमिका बढ़ सकती है. पार्थिव पटेल की दावेदारी सामने नहीं आने के बाद इस संभावना को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. ये भी पढ़ें: BCCI सेलेक्टर बनने से दो पूर्व क्रिकेटरों का इनकार, करीब 100 टेस्ट स्पोर्ट्सने वाले खिलाड़ियों को मिला था ऑफर बड़े पूर्व क्रिकेटर क्यों नहीं लेना चाहते यह जिम्मेदारी? चीफ सेलेक्टर का पद हिंदुस्तानीय क्रिकेट में काफी अहम माना जाता है. चयनकर्ताओं को खिलाड़ियों के प्रदर्शन, टीम की जरूरत और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर फैसले लेने होते हैं. इन फैसलों पर अक्सर सवाल भी उठते हैं. टीम से किसी बड़े खिलाड़ी को बाहर करना हो या किसी युवा को मौका देना हो, चयन समिति का हर निर्णय चर्चा में रहता है. इसके अलावा कई और भी कारण होंगे जिनके कारण पूर्व क्रिकेटर इस जिम्मेदारी से दूरी बना रहे हैं. वर्ल्ड कप से पहले निरंतरता बनाए रखना चाहता है BCCI वनडे वर्ल्ड कप में अब एक साल से भी कम समय बचा है. ऐसे में हिंदुस्तानीय टीम के चयन को लेकर निरंतरता बनाए रखना बीसीसीआई के लिए अहम हो सकता है. नए चीफ सेलेक्टर की सोच और टीम को लेकर उनका नजरिया मौजूदा चयन समिति से अलग हो सकता है. ऐसे में बोर्ड को यह भी देखना होगा कि बदलाव का असर टीम की तैयारियों पर न पड़े. टाइम्स ऑफ इंडिया से बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा, “बोर्ड यही चाहता था कि अगरकर वर्ल्ड कप तक बने रहें, ताकि निरंतरता बनी रहे, लेकिन चीजें उम्मीद के मुताबिक नहीं हुईं. अगर चयन समिति में कोई नया अध्यक्ष आता है, तो उसकी सोच अभी काम कर रहे लोगों से अलग हो सकती है. इसलिए बोर्ड को नए चयनकर्ता की सोच का आकलन करना होगा.” अब बीसीसीआई के सामने क्या हैं विकल्प? चीफ सेलेक्टर पद के लिए आवेदन नहीं आने के बाद बीसीसीआई के सामने फिलहाल दो संभावनाएं चर्चा में हैं. पहली, प्रज्ञान ओझा को अंतरिम जिम्मेदारी के साथ आगे भी बनाए रखा जाए. दूसरी, चयन प्रक्रिया के लिए नए विकल्प तलाशे जाएं और जरूरत के मुताबिक चयन समिति की भूमिका या कार्यप्रणाली में बदलाव किया जाए. वीवीएस लक्ष्मण की भूमिका बढ़ने की संभावना भी चर्चा में है, लेकिन इस पर अंतिम फैसला बोर्ड को ही लेना है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीसीसीआई मौजूदा व्यवस्था के साथ आगे बढ़ेगा या वर्ल्ड कप से पहले चयन समिति की कमान किसी नए चेहरे को सौंपेगा. ये भी पढ़ें: IND vs WI 5th T20I: फ्री में कहां देखें हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज का आखिरी टी20 मैच? जानें लाइव टेलीकास्ट डिटेल्स The post BCCI चीफ सेलेक्टर नहीं बनना चाहते पूर्व क्रिकेटर? पार्थिव पटेल ने भी खींचे हाथ, अब क्या करेगा बोर्ड appeared first on Naya Vichar.

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IND-W vs ZIM-W 1st T20I: फ्री में कहां देखें भारत-जिम्बाब्वे महिला टी20 मैच? जानें लाइव टेलीकास्ट डिटेल्स

Free Mein Kaise Dekhe IND-W vs ZIM-W ka Match: हिंदुस्तानीय स्त्री क्रिकेट टीम और जिम्बाब्वे स्त्री क्रिकेट टीम के बीच शुक्रवार, 16 अक्टूबर को पहला टी20 इंटरनेशनल मुकाबला स्पोर्ट्सा जाएगा. दोनों टीमों के बीच यह मैच रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में होगा. मुकाबले की शुरुआत हिंदुस्तानीय समयानुसार शाम 7 बजे होगी. इस तीन मैचों की टी20 सीरीज में हिंदुस्तानीय टीम की कप्तानी स्मृति मंधाना करेंगी. वहीं, जिम्बाब्वे की टीम जोसेफिन नोकोमो की अगुवाई में मैदान पर उतरेगी. क्रिकेट फैंस इस मुकाबले को टीवी और मोबाइल पर लाइव देख सकते हैं. आइए जानते हैं हिंदुस्तान और जिम्बाब्वे स्त्री टीम के पहले टी20 मैच का लाइव टेलीकास्ट और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग कहां उपलब्ध होगी. IND-W vs ZIM-W Live Telecast: टीवी पर कहां देखें मैच? हिंदुस्तान और जिम्बाब्वे स्त्री टीम के बीच पहले टी20 इंटरनेशनल मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा. टीवी पर मैच देखने वाले दर्शक स्टार स्पोर्ट्स के संबंधित चैनलों पर मुकाबले का आनंद ले सकते हैं. IND-W vs ZIM-W Live Streaming: मोबाइल पर कैसे देखें लाइव? हिंदुस्तान और जिम्बाब्वे स्त्री टीम के पहले टी20 मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार (JioHotstar) पर उपलब्ध होगी. क्रिकेट फैंस मोबाइल और अन्य समर्थित डिवाइस पर जियोहॉटस्टार ऐप या वेबसाइट के जरिए मैच देख सकते हैं. स्ट्रीमिंग की उपलब्धता और सब्सक्रिप्शन से जुड़ी शर्तें प्लेटफॉर्म पर चेक कर लें. ये भी पढ़ें: ICC Rankings: वनडे में स्मृति मंधाना नंबर 1, टी20 के टॉप-10 में हिंदुस्तान के 3 बल्लेबाज; देखें लिस्ट IND-W vs ZIM-W Free Live Telecast: फ्री में कहां देखें मैच? हिंदुस्तान और जिम्बाब्वे स्त्री टीम के पहले टी20 मुकाबले को फ्री में देखने के लिए आपके टीवी में डीडी स्पोर्ट्स चैनल होना चाहिए क्योंकि यहां बिना कोई चार्ज दिए आप मैच का लाइव प्रसारण देख पाएंगे. IND-W vs ZIM-W 1st T20I: मैच से जुड़ी अहम जानकारी विवरण जानकारी तारीख शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 समय शाम 7:00 बजे टॉस शाम 6:30 बजे मैदान शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम, रायपुर लाइव टेलीकास्ट स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार फ्री टेलीकास्ट डीडी स्पोर्ट्स पर इस प्रकार है दोनों टीमें हिंदुस्तान स्त्री टीम: स्मृति मंधाना (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), शेफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर, गुणालन कमलिनी, दीप्ति शर्मा, अरुंधति रेड्डी, मिन्नू मणि, श्री चरणी, नंदनी शर्मा, क्रांति गौड़, अनुष्का शर्मा, जिंतिमणि कलिता, निकी प्रसाद, प्रेमा रावत. जिम्बाब्वे स्त्री टीम: चिएद्जा धुरुरु (विकेटकीपर), जोसेफिन नोकोमो (कप्तान), केलिस न्द्लोवु, बिलव्ड बीजा, चिपो मुगेरी-तिरिपानो, न्याशा ग्वान्जुरा, मोडेस्टर मुपाचिक्वा, शार्ने मेयर्स, लोरिन फिरी, फ्रांसिस्का चिपारे, कुडजाई चिगोरा, नोमवेलो सिबांडा, ओलिंडर चारे, मिशेल मावुंगा, तेंदाई मकुशा. ये भी पढ़ें: Babar Azam Net Worth: कंगाल पाकिस्तान में कैसी जिंदगी जीते हैं बाबर आजम? जानें कितनी है उनकी नेटवर्थ The post IND-W vs ZIM-W 1st T20I: फ्री में कहां देखें हिंदुस्तान-जिम्बाब्वे स्त्री टी20 मैच? जानें लाइव टेलीकास्ट डिटेल्स appeared first on Naya Vichar.

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16 अक्टूबर की टॉप 20 खबरें: SIR के बीच 17 राज्यों में SSR का ऐलान, CJP का तिरंगा मार्च आज; नेहा बोरा और प्रशांत भूषण के बयानों पर बवाल

1. SIR विवाद के बीच SSR की घोषणा, यूपी-पंजाब सहित 17 राज्यों और UTI में होगा वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी नेतृत्वक विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने एक और प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है. आयोग 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) करेगा. इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा जैसे राज्य भी शामिल हैं, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 2. CJP का 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च: दो दिन बंद रहेंगे सेंट्रल पार्क, कोर्ट ने प्रदर्शन पर रोक से किया इनकार CJP के 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च के लिए कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 3. OCI Explained : इमरान खान को देश छोड़ने के लिए क्यों कहा गया? प्रवासी हिंदुस्तानीयों के लिए क्या है हिंदुस्तान में नियम अभिनेता इमरान खान को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद हिंदुस्तान छोड़ने का नोटिस मिला है. उन पर OCI कार्ड से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 4. Video : प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिनकर की कविता पढ़ रही थीं नेहा बोरा, तभी ‘बंद करो’, ‘बाहर जाओ’ के नारे लगे दिल्ली में प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेहा बोरा ने कहा कि SIR के खिलाफ जारी लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं है, ये उन लोगों का मूवमेंट है जिनके नाम वोटर लिस्ट से कट चुके हैं. हालांकि नेहा बोरा जब ये सब बोल ही रही थीं कि वहां हंगामा शुरू हो गया.पूरी समाचार यहां पढ़ें. 5. Video : नेहा बोरा के बांग्लादेश वाले बयान पर BJP का आरोप- राहुल गांधी रच रहे सत्ता पलटने की साजिश नेहा बोरा ने बांग्लादेश के जेन-Z आंदोलन की तारीफ करते हुए कहा कि हिंदुस्तान में हो रहे आंदोलन के लिए बांग्लादेश ने ही हमें रास्ता दिखाया है. नेहा के इस बयान पर बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 6. वोटर लिस्ट से नाम कटने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक की याचिका पर CEC ज्ञानेश कुमार समेत 3 आयुक्तों को नोटिस SIR और कथित तौर पर वोटरों के नाम हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की याचिका पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार समेत 3 आयुक्तों से जवाब मांगा गया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 7. सिद्धारमैया से चेन्निथला तक, कांग्रेस में सत्ता का सहज हस्तांतरण; राहुल की स्ट्रेटजी का क्यों नहीं हुआ विरोध? कांग्रेस में कर्नाटक से केरल और पंजाब तक नेतृत्व से जुड़े फैसलों की चर्चा साल 2026 में हुई. कहीं मुख्यमंत्री बदला, तो कहीं प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी नए नेता को सौंपी गई. इन फैसलों के बीच सवाल है कि राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया और विरोध को कैसे संभाला? पढ़ें पॉलिटिकल एक्सपर्ट अनिल आनंद ने क्या कहा. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 8. ‘न्यायपालिका को कोई डरा नहीं सकता’, SIR पर SC की सख्त टिप्पणी, राहुल-अखिलेश को नोटिस एसआईआर को लेकर जारी सियासी टकराव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने को लेकर सख्त टिप्पणी की है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका को कोई डरा-धमकाकर प्रभावित नहीं कर सकता. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष के मार्च के खिलाफ याचिका पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 9. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया तो कितने दिनों की होगी जेल? सौरव दास और आशुतोष रांका के मामले से समझें कानून जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर 2026 को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा दिया गया. दरअसल, जंतर-मंतर को दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया है. जिस कारण से यहां बिना अनुमति किसी तरह के प्रदर्शन करने पर कार्रवाई हो सकती है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 10. दिल्ली में पाबंदियों पर गृह सचिव ने बिना शर्त SC से मांगी माफी, इंटरनेट बंद करने के फैसले पर दी सफाई केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है. उन्होंने अदालत में दाखिल जवाब में कहा कि 9 अक्टूबर के आदेश का जानबूझकर या सोच-समझकर उल्लंघन नहीं किया गया था. यह जवाब उनके खिलाफ जारी अवमानना नोटिस के संदर्भ में दाखिल किया गया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 11. गोपालगंज में छात्रा की मौत पर बवाल, आरोपित के घर के सामने शव जलाया; इलाका पुलिस छावनी में तब्दील गोपालगंज में दो दिन से लापता छात्रा का शव मिलने के बाद पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया. इसके बाद परिजनों ने शव को आरोपित के घर के दरवाजे पर जला दिया.जानकारी पर इलाके में भारी संख्या में पुलिस की तैनाती की गयी. पढ़िये पूरी समाचार. 12. पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों और गोलीबारी की लाइव कवरेज पर पाबंदी, नियम तोड़ने वाले चैनलों पर होगी सख्त कार्रवाई पाकिस्तान ने विस्फोट, गोलीबारी और आतंकवादी हमलों के सीधे प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है. पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पीईएमआरए) ने सैटेलाइट टीवी चैनलों को चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 13. देश के टॉप प्रशासनी आवासीय स्कूलों में नेतरहाट को दूसरा स्थान, 1300 में मिले 1039 अंक नेतरहाट आवासीय विद्यालय ने सीफोर स्कूल रैंकिंग 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है. जानिए कैसे मिला यह मुकाम. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 14. Exclusive: झारखंड के अपराधियों में पुलिस की गोली का खौफ! 27 मुठभेड़ों में 6 अपराधी ढेर, 31 घायल झारखंड में जनवरी 2025 से अक्टूबर 2026 तक 27 पुलिस एनकाउंटर में 6 अपराधी मारे गये, जबकि 31 घायल हुए. धनबाद, रांची, जमशेदपुर, रामगढ़, पलामू और हजारीबाग समेत कई जिलों

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Aaj Ki Taza Khabar: अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 बच्चों और शिक्षक की मौत; हमलावर भी मारा गया

Aaj Ki Taza Khabar LIVE: 16 अक्टूबर की ताजा समाचारों और दिनभर के बड़े अपडेट्स के लिए हमारे साथ जुड़े रहें. इस लाइव अपडेट में आपको पल-पल की हर जरूरी जानकारी आसान भाषा में मिलेगी. The post Aaj Ki Taza Khabar: अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 बच्चों और शिक्षक की मौत; हमलावर भी मारा गया appeared first on Naya Vichar.

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4 दिन में फिल्म से निकाली गईं, सेट पर मां का हुआ अपमान, ‘दूसरी औरत’ का टैग… आसान नहीं थी ड्रीम गर्ल की राह

Hema Malini Birthday Special: बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की जिंदगी सिर्फ शोहरत और खूबसूरती की कहानी नहीं है. करियर की शुरुआत में फिल्म से निकाले जाने का झटका लगा, मां के चेहरे पर अपमान का भाव देखकर एक्ट्रेस बनने की जिद पैदा हुई और फिर शादीशुदा धर्मेंद्र से प्यार के कारण आलोचना झेलनी पड़ी. 16 अक्टूबर को जन्मदिन के मौके पर जानिए उस एक्ट्रेस की कहानी, जिसने जिंदगी के हर मोड़ पर अपनी राह खुद चुनी. बॉलीवुड में कुछ सितारों की जिंदगी किसी फिल्म की कहानी जैसी लगती है. पहले संघर्ष, फिर कामयाबी और आखिर में ऐसा स्टारडम कि दुनिया उन्हें उनके असली नाम से ज्यादा किसी खास पहचान से जानने लगती है. हेमा मालिनी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. आज दुनिया उन्हें ड्रीम गर्ल कहती है, लेकिन इस नाम के पीछे सिर्फ खूबसूरत चेहरा और सुपरहिट फिल्में नहीं हैं. उनकी जिंदगी में रिजेक्शन का झटका भी था, मां की उम्मीदें भी थीं और प्यार के लिए उठाए गए ऐसे फैसले भी, जिन पर सालों तक सवाल उठते रहे. जिस हेमा मालिनी की एक झलक के लिए कभी दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आते थे, उसी लड़की को करियर की शुरुआत में एक फिल्म से सिर्फ चार दिन की शूटिंग के बाद बाहर कर दिया गया था. आगे चलकर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई. लेकिन जब निजी जिंदगी में धर्मेंद्र से प्यार और शादी का फैसला आया, तो उनकी चर्चा एक्टिंग से आगे निकलकर उनके रिश्ते तक पहुंच गई. एक तरफ ड्रीम गर्ल का स्टारडम था, दूसरी तरफ ‘दूसरी शादी’ से जुड़ा ऐसा टैग, जिसने उन्हें भीतर तक आहत किया. आखिर कैसे एक रिजेक्शन से शुरू हुआ हेमा मालिनी का सफर सुपरस्टारडम तक पहुंचा और प्यार के लिए गए उनके फैसले ने उनकी जिंदगी की कहानी को हमेशा के लिए बदल दिया? आइए, जानते हैं हेमा मालिनी की जिंदगी के इस दिलचस्प सफर के बारे में. चार दिन शूटिंग के बाद फिल्म से निकाल दिया गया हेमा मालिनी ने लेहरें रेट्रो को दिए एक इंटरव्यू में अपने करियर के शुरुआती दिनों का यह किस्सा सुनाया था. उन्होंने बताया कि तमिल फिल्ममेकर सीवी श्रीधर ने उन्हें अपनी फिल्म के लिए चुना था. उस वक्त उनका नाम बदलकर सुजाता भी रखा गया था. फिल्म में जयललिता भी थीं. हेमा को उनके डांस कार्यक्रमों के दौरान देखा गया था और उनकी मां के जरिए फिल्म का प्रस्ताव पहुंचा था. हेमा मालिनी अपनी मां के साथ मां चाहती थीं कि बेटी आगे बढ़े, अपने लिए एक अलग पहचान बनाए. उन्होंने हेमा के करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी. ऐसे में फिल्म से बाहर किए जाने का झटका सिर्फ हेमा का नहीं था, उनकी मां की उम्मीदों से भी जुड़ा था. हेमा ने बताया था कि मां के चेहरे पर वह भाव देखकर उन्होंने अभिनेत्री बनने की ठान ली. यानी जिस रास्ते पर चलने को लेकर हेमा खुद असमंजस में थीं, उसी रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला उन्होंने उस पल लिया, जब उन्हें लगा कि उनकी मां की उम्मीदों को इस तरह टूटने नहीं देना चाहिए. यह उनके जीवन का ऐसा मोड़ था, जहां एक रिजेक्शन ने उनके भीतर खुद को साबित करने की जिद पैदा कर दी. ड्रीम गर्ल बनीं, तो बड़े-बड़े सितारे भी हुए दीवाने ‘सपनों का सौदागर’ के बाद हेमा मालिनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘सीता और गीता’, ‘शोले’, ‘ड्रीम गर्ल’ और ‘मीरा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए. कभी चुलबुली बसंती बनकर दर्शकों को हंसाया, तो कभी गंभीर भूमिकाओं से अपनी अभिनय क्षमता दिखाई. हेमा मालिनी की निजी जिंदगी भी उनके फिल्मी करियर की तरह चर्चा में रही. संजीव कुमार और जितेंद्र के साथ उनके रिश्तों की समाचारें उस दौर में सुर्खियों में थीं. बाद में हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र से शादी की, जिसके बाद उनकी निजी जिंदगी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं. धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी पर्दे पर खूब पसंद की गई. दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और धीरे-धीरे उनके निजी रिश्ते की समाचारें भी सामने आने लगीं. लेकिन इस प्रेम कहानी की सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा थे. उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर थीं और उनके चार शिशु थे. शादीशुदा धर्मेंद्र से प्यार, आसान नहीं था फैसला हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की प्रेम कहानी का जिक्र आते ही फिल्मी पर्दे की रोमांटिक जोड़ी के साथ-साथ उनकी निजी जिंदगी के सवाल भी सामने आते हैं. धर्मेंद्र और हेमा ने 1980 में शादी की. लेकिन यह फैसला उस दौर में हुआ, जब धर्मेंद्र की पहली शादी और परिवार पहले से मौजूद था. ऐसे में दोनों के रिश्ते को लेकर आलोचना होना तय था. हेमा मालिनी ने अपनी जीवनी ‘Hema Malini: Beyond the Dream Girl’ में धर्मेंद्र के साथ अपने रिश्ते को लेकर हुई आलोचनाओं का जिक्र किया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हेमा ने लिखा कि उनके रिश्ते पर लोगों ने सवाल उठाए और उनके बारे में बातें कीं. लोग उनके सामने भले ही कुछ नहीं कहते थे, लेकिन उन्हें पता था कि उनकी पीठ पीछे उनके रिश्ते को लेकर चर्चा होती थी. हेमा के लिए इस तरह की आलोचनाओं का सामना करना आसान नहीं था. हेमा मालिनी हेमा मालिनी की कहानी में मां की उम्मीदें हैं, शुरुआती रिजेक्शन है, प्यार है और सामाजिक आलोचना भी. लेकिन इन सबके बीच उनका काम लगातार आगे बढ़ता रहा. उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में जो बातें साझा कीं, उनसे यह समझ आता है कि उन्होंने कई मुश्किल फैसलों और अनुभवों के बावजूद अपने जीवन को आगे बढ़ाने की कोशिश की. आज उनके जन्मदिन पर ड्रीम गर्ल को याद करना सिर्फ उनकी खूबसूरती या सुपरहिट फिल्मों को याद करना नहीं है. यह उस सफर को भी देखना है, जिसमें शुरुआत का एक रिजेक्शन उनके लिए चुनौती बना और निजी जिंदगी के फैसलों ने उन्हें लंबे समय तक चर्चा में रखा. जिस लड़की को चार दिन बाद फिल्म से निकाल दिया गया था, वही आगे चलकर लाखों दिलों की ड्रीम गर्ल बनी. उनकी जिंदगी की राह आसान नहीं थी, लेकिन उनकी पहचान आखिरकार उनके लंबे करियर और पर्दे पर छोड़ी गई छाप से

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Jaguar-Land Rover से Volvo तक की मालिक थी Ford, फिर क्या हुआ कि बेचनी पड़ी कंपनी? भारत में समेटा कारोबार, पढ़िए ये उतार-चढ़ाव भरी पूरी कहानी

एक कंपनी, जिसने कारों को अमीरों के गैराज से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. एक ऐसा ब्रांड, जिसने Jaguar, Land Rover, Volvo और Aston Martin जैसी दुनिया की मशहूर कार कंपनियों को अपने कारोबारी साम्राज्य में शामिल किया. लेकिन वक्त बदला तो इनमें से कई कंपनियों को बेच भी दिया. यह कहानी है अमेरिका की Ford Motor Company की. 1903 में शुरू हुई इस कंपनी ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में उत्पादन का तरीका बदल दिया. Mustang जैसी स्पोर्ट्स कार और F-Series जैसे पिकअप ट्रक से अपनी पहचान मजबूत की. लेकिन हिंदुस्तान में यही कंपनी अपनी लंबी मौजूदगी के बावजूद कारों का स्थानीय उत्पादन बंद करने पर मजबूर हुई. आखिर Ford ने इतनी बड़ी कंपनी कैसे बनाई? दुनिया के मशहूर कार ब्रांड खरीदने के बाद उन्हें क्यों बेचा? और अब इलेक्ट्रिक वाहनों के दौर में कंपनी क्या करने की तैयारी कर रही है? आइए, समझते हैं Ford की पूरी कहानी. 1903 में हुई शुरुआत Ford की स्थापना 16 जून 1903 को अमेरिका के मिशिगन राज्य के डेट्रॉयट में हेनरी फोर्ड ने की थी. उस दौर में कारें महंगी थीं और उन्हें खरीदना आम लोगों के लिए आसान नहीं था. हेनरी फोर्ड चाहते थे कि कार सिर्फ अमीरों की सवारी न रहे. इसी सोच के साथ कंपनी ने 1903 में अपनी पहली Model A कार ग्राहकों तक पहुंचाई. हालांकि, Ford को असली पहचान 1908 में आई Model T से मिली. अमेरिका में F-Series Ford की सबसे महत्वपूर्ण वाहन सीरीज में शामिल है. Mustang कंपनी की स्पोर्ट्स कार विरासत को आगे बढ़ाती है, जबकि Ranger और Transit जैसे मॉडल पिकअप और कमर्शियल वाहन बाजार में उसकी मौजूदगी मजबूत करते हैं. लेकिन Ford की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा अभी बाकी था. कंपनी ने सिर्फ अपने ब्रांड के मॉडल बढ़ाने के बजाय दूसरी कार कंपनियों को खरीदकर अपना साम्राज्य फैलाना शुरू किया. Ford ने Jaguar, Land Rover, Volvo और Aston Martin को क्यों खरीदा? 1990 और 2000 के दशक में Ford ने दुनिया के कई प्रतिष्ठित कार ब्रांड अपने पोर्टफोलियो में शामिल किए. कंपनी की कोशिश थी कि वह सामान्य कारों के साथ लग्जरी कार और प्रीमियम SUV बाजार में भी मजबूत जगह बनाए. Jaguar: Ford ने 1989 में ब्रिटिश लग्जरी कार ब्रांड Jaguar को खरीदा. इससे कंपनी को प्रीमियम सेडान और स्पोर्ट्स कारों के बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिला. 2008 में Ford ने इसे Land Rover के साथ Tata Motors को बेच दिया. Land Rover: Ford ने 2000 में BMW से Land Rover खरीदा. यह ब्रांड अपनी ऑफ-रोड क्षमता और प्रीमियम SUV के लिए जाना जाता था. 2008 में Tata Motors ने Jaguar और Land Rover दोनों का अधिग्रहण किया. बाद में दोनों ब्रांड Jaguar Land Rover (JLR) समूह के तहत आ गए. Volvo Cars: Ford ने 1999 में स्वीडन की Volvo Cars को खरीदा था. सुरक्षा और प्रीमियम कारों के लिए पहचान रखने वाले इस ब्रांड को 2010 में चीन की Geely ने खरीद लिया. Aston Martin: Ford ने 1987 में Aston Martin में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की थी. यह ब्रिटिश लग्जरी स्पोर्ट्स कार ब्रांड है. 2007 में Ford ने अपनी हिस्सेदारी निवेशकों के समूह को बेच दी. इन सौदों के बाद Ford दुनिया के कई बड़े कार ब्रांडों का मालिक बन गया था. लेकिन इन कंपनियों को संभालना आसान नहीं था. हर ब्रांड को नए मॉडल, तकनीक, उत्पादन और मार्केटिंग पर निवेश की जरूरत थी. हिंदुस्तान में Ford की एंट्री, EcoSport से मिली पहचान Ford ने 1995 में हिंदुस्तान में अपना परिचालन शुरू किया. कंपनी ने यहां Figo, Aspire, Freestyle, EcoSport और Endeavour जैसे मॉडल पेश किए. इनमें EcoSport ने कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में खास पहचान बनाई. इसकी स्टाइलिंग और ड्राइविंग अनुभव ने ग्राहकों को आकर्षित किया. Endeavour ने प्रीमियम SUV बाजार में अपनी जगह बनाई. इसके बावजूद कंपनी हिंदुस्तानीय बाजार में लंबे समय तक पर्याप्त बिक्री और मुनाफा हासिल नहीं कर सकी. Maruti Suzuki और Hyundai की मजबूत पकड़ थी. बाद में Tata Motors और Mahindra ने भी नए मॉडल पेश करके प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी. हिंदुस्तानीय ग्राहकों के लिए कीमत, माइलेज, सर्विस नेटवर्क और रीसेल वैल्यू महत्वपूर्ण हैं. Ford के सामने इन पहलुओं पर प्रतिस्पर्धा करना बड़ी चुनौती बना रहा. फोर्ड इन्फोग्राफिक्स (फोटो: AI) आगे क्या है Ford की योजना? Ford के सामने आने वाले समय में तीन बड़ी चुनौतियां हैं. मुनाफा बढ़ाना: F-Series और कमर्शियल वाहन कारोबार से कमाई मजबूत रखना. नई तकनीक अपनाना: इलेक्ट्रिक वाहन, कनेक्टेड कार और सॉफ्टवेयर सेवाओं में निवेश करना. लागत नियंत्रित करना: बदलती मांग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच खर्च को बेहतर तरीके से संभालना. Ford की कहानी बताती है कि दुनिया की बड़ी कंपनी बनना और लंबे समय तक सफल बने रहना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं. Model T ने उसे नई पहचान दी, Mustang और F-Series ने उसकी ताकत बढ़ाई और दूसरी कंपनियों को खरीदने से उसका साम्राज्य फैला. लेकिन बदलते बाजार ने उसे अपनी रणनीति बार-बार बदलने पर मजबूर किया. नोट: ये लेख नया विचार की ‘सफरनामा सीरीज’ का हिस्सा है. जिसके तहत हम दुनिया की अलग-अलग कंपनियों की डीप एनालिसिस करेंगे और ये जानने की कोशिश करेंगे कि कैसे कंपनियों ने अपने मुकाम को हासिल किया और क्या रही उनके सफलता की कहानी. इस सीरीज की अगली कड़ी में हम एक और कंपनी के बारे में जानेंगे. साथ ही कंपनी के कुछ अनछुए पहलुओं से भी रूबरू होंगे, तो जुड़े रहिए हमारे साथ. अगर आपके पास कोई सलाह या कोई सवाल हो तो आप हमें इस मेल आईडी पर लिख सकते हैं- (imsuyash001@gmail.com). हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि हम आपकी हर उलझन को दूर कर सकें. वाहनों से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों और लेटेस्ट अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें नया विचार. The post Jaguar-Land Rover से Volvo तक की मालिक थी Ford, फिर क्या हुआ कि बेचनी पड़ी कंपनी? हिंदुस्तान में समेटा कारोबार, पढ़िए ये उतार-चढ़ाव भरी पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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