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October 25, 2026

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Explained: अरुणाचल पर भारत-चीन के बीच क्यों नहीं थम रहा सीमा विवाद? समझें पूरा मामला

अरुणाचल प्रदेश को लेकर हिंदुस्तान और चीन के बीच एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है. हिंदुस्तान-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 22 अक्टूबर को कहा कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर कई जगहों पर हिंदुस्तानीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना जारी है. इसके अगले दिन विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीमा पर स्थिति तब बिगड़ती है, जब चीनी सैनिक गश्त के निर्धारित तौर-तरीकों से हटकर गतिविधियां करते हैं. इस बीच ITBP ने चीन से लगी सीमा पर सभी सीमा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून बनाई हैं. गलवान जैसी झड़पों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है. सीमा पर भूमिगत बंकर बनाए जा रहे हैं और ‘शौर्य कमांडो’ नाम की नई लड़ाकू टीम भी गठित की गई है. लेकिन सवाल यह है कि दशकों की बातचीत और सैन्य समझौतों के बावजूद अरुणाचल प्रदेश पर विवाद क्यों नहीं सुलझा? अरुणाचल प्रदेश को लेकर हिंदुस्तान-चीन के बीच क्यों है तनाव की स्थिति ? अरुणाचल प्रदेश को लेकर फिर से जो विवाद की स्थिति बनी है इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं. पहला, सीमावर्ती इलाकों में हिंदुस्तानीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना. दूसरा, इस क्षेत्र के भूगोल और पहचान को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे. 27 जगहों के नाम तय करने पर चीन ने क्यों जताई आपत्ति? अगस्त 2026 में हिंदुस्तान ने अरुणाचल प्रदेश के 27 जगहों के नाम बदल दिए. इनमें पहाड़ी दर्रे, जमीन के हिस्से, एक झील और एक स्मारक शामिल थे. हिंदुस्तान के इस कदम पर चीन ने आपत्ति जताई. चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता है और इसे ‘दक्षिण तिब्बत’ कहता है. हिंदुस्तान उसके इस दावे को खारिज करता है. यह विवाद केवल नामों का नहीं है. दोनों देश आधिकारिक नक्शों, स्थानों के नाम और प्रशासनी बयानों के जरिये अपनी-अपनी क्षेत्रीय स्थिति स्पष्ट करते हैं. लेकिन किसी स्थान का नाम तय करने से जमीन पर वास्तविक नियंत्रण नहीं बदलता और न ही सीमा विवाद का कानूनी या कूटनीतिक समाधान निकलता है. क्या है मैकमोहन लाइन, जिस पर अटका है विवाद? हिंदुस्तान और चीन के बीच पूर्वी क्षेत्र के सीमा विवाद की जड़ 1914 में हुए शिमला सम्मेलन से जुड़ी है. इस सम्मेलन में ब्रिटिश हिंदुस्तान, तिब्बत और चीन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था. इसी दौरान ब्रिटिश हिंदुस्तान के विदेश सचिव हेनरी मैकमोहन के नाम पर मैकमोहन लाइन निर्धारित की गई. हिंदुस्तान इस रेखा को अरुणाचल प्रदेश से लगी अपनी पूर्वी सीमा का आधार मानता है. चीन इस रेखा को स्वीकार नहीं करता. उसका तर्क है कि उस समय तिब्बत को इस तरह का समझौता करने का स्वतंत्र अधिकार नहीं था. यही दोनों देशों के बीच बुनियादी मतभेद है. हिंदुस्तान का कहना है कि मैकमोहन लाइन उसकी सीमा को निर्धारित करती है, जबकि चीन इसे मान्यता नहीं देता और अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है. चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत क्यों कहता है? चीन का दावा तिब्बत के इतिहास और उसके क्षेत्रीय दावों से जुड़ा है. चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से को ‘जांगनान’ यानी दक्षिण तिब्बत कहता है. वह तवांग सहित राज्य के कुछ क्षेत्रों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार पर अपने दावे में शामिल करता है. हिंदुस्तान इस दावे को स्वीकार नहीं करता. हिंदुस्तान के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न अंग है और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था हिंदुस्तानीय संविधान के तहत चलती है. तवांग पर चीन की नजर क्यों है? तवांग अरुणाचल प्रदेश का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है. इसका महत्व केवल भौगोलिक स्थिति के कारण नहीं, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक संबंधों की वजह से भी है. यहां स्थित तवांग मठ तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्रों में से एक है. छठे दलाई लामा त्सांगयांग ग्यात्सो का जन्म भी तवांग क्षेत्र में हुआ था. इन ऐतिहासिक और धार्मिक संबंधों के कारण तवांग तिब्बती बौद्ध परंपरा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपने व्यापक दावे के तहत तवांग को भी दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है. हिंदुस्तान इस दावे को खारिज करता है और तवांग को अपना क्षेत्र मानता है. तवांग की सामरिक स्थिति भी इसे महत्वपूर्ण बनाती है. यह क्षेत्र हिंदुस्तान-चीन सीमा के नजदीक है और यहां तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्तों पर निर्भर रहना पड़ता है. इसलिए सड़क, सुरंग और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास स्थानीय लोगों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के लिए भी अहम है. गलवान जैसी झड़पों के लिए ‘स्ट्राइक’ प्रशिक्षण ITBP ने गलवान जैसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया है. कपूर के मुताबिक, वर्ष 2027 के अंत तक पूरे बल को यह प्रशिक्षण देने की योजना है. जून 2020 में गलवान घाटी में हिंदुस्तानीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में हिंदुस्तान के 20 जवान मारे गए थे. चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों की मौत स्वीकार की थी. इस घटना ने दिखाया कि सीमा पर तनाव के दौरान सैनिकों को कठिन और अचानक पैदा होने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है. शौर्य कमांडो और भूमिगत बंकर ITBP ने ‘शौर्य कमांडो’ नाम की नई लड़ाकू टीम भी गठित की है. बल प्रमुख ने बताया कि इन कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ गतिरोध के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया. इन्हें प्रत्येक सीमा बटालियन में तैनात करने की योजना है. इसके साथ ही सीमा पर भूमिगत आश्रय स्थल और बंकर बनाए जा रहे हैं. आधुनिक युद्ध में ड्रोन और दूर से हमला करने वाली प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ऐसे ढांचे सैनिकों को कुछ परिस्थितियों में सुरक्षा दे सकते हैं. ITBP अपने पुराने हथियारों को आधुनिक बनाने, नए वाहनों की खरीद और ऊंचाई वाले इलाकों में जवानों की सुविधाएं बेहतर करने पर भी काम कर रही है. बल के मुताबिक, शून्य से नीचे तापमान वाले क्षेत्रों में स्थित 383 बैरकों में से 342 में ऊष्मारोधी व्यवस्था की गई है. दूरदराज की चौकियों के लिए 141 जनरेटर खरीदे गए हैं और कई स्थानों पर सौर जल हीटर लगाए गए हैं. ये भी पढ़ें: जमीन से अंतरिक्ष तक 6 मोर्चों पर हमला कर सकता है चीन! पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल सोढ़ी ने बताया, थ्री-फ्रंट वॉर के लिए हिंदुस्तान कितना तैयार?

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Gumla : न सड़क, न पुल; पांच गांवों के ग्रामीण पूछ रहे, कब बदलेगी जिंदगी?

जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट पालकोट (गुमला). गुमला जिले के पालकोट प्रखंड की बिलिंगबिरा पंचायत के पांच गांव आज भी सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं. गोइंधारा, लौखमहन, जमझरिया, चरखागोड़ी और बिलिंगबिरा रायटोली के करीब 150 घरों के ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड मुख्यालय पालकोट तक पहुंचने के लिए उनके पास एक ही रास्ता है, लेकिन रास्ते में चुटिया डूबा नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात में इन गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है. ग्रामीणों के अनुसार केरालोटी मुख्य पथ से इन गांवों को जोड़ने वाली करीब चार किलोमीटर सड़क कच्ची है. बारिश के दौरान सड़क की स्थिति खराब होने से दोपहिया वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल हो जाती है. ऐसे में बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती स्त्रीओं को खाट के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाने की नौबत आती है. बरसात में नदी बन जाती है सबसे बड़ी बाधा ग्रामीणों का कहना है कि चुटिया डूबा नदी पर अब तक पुल नहीं बन सका है. गर्मी के दिनों में लोग किसी तरह नदी पार कर लेते हैं, लेकिन बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर पांचों गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है. समस्या बताते ग्रामीण | Naya Vichar Network इसका असर बच्चों की पढ़ाई से लेकर किसानों की उपज तक पर पड़ता है. ग्रामीणों के मुताबिक बरसात में शिशु स्कूल नहीं जा पाते, किसान अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने में परेशान होते हैं और प्रखंड कार्यालय से जुड़े जरूरी काम भी प्रभावित होते हैं. कई बार ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है. कई बार लगायी गुहार के बाद भी नहीं हुआ समाधान बलदेव सिंह, केशर सिंह, निर्मल सिंह, कुलदीप सिंह, जयपाल सिंह, दीपनारायण सिंह, बालगोविंद सिंह, निरंजन सिंह, जय नारायण सिंह, परमेश्वर सिंह, दिलु खड़िया, श्याम सुंदर सिंह, बुद्धेश्वर सिंह, मोहन नाथ सिंह, प्रद्युम्न सिंह, नरेंद्र कुमार सिंह, रूकमणी देवी, कमला देवी, जानकी देवी, फुलमनी देवी, सरीता देवी और बालेश्वरी देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सड़क और पुल की समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगायी गयी है. ग्रामीणों के अनुसार पूर्व उपायुक्त को भी लिखित आवेदन दिया गया था. स्थानीय विधायक भूषण बड़ा के गांव का दौरा करने और सड़क-पुल निर्माण का आश्वासन देने की बात भी ग्रामीणों ने कही. हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ है. सड़क-पुल नहीं बना तो आंदोलन की चेतावनी लगातार समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है. ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द सड़क और पुल निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन किया जायेगा. ग्रामीणों ने प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक सड़क जाम करने और उपायुक्त कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि जब तक सड़क और पुल का निर्माण नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखा जायेगा. रोड नहीं तो वोट नहीं ग्रामीणों ने कहा कि सड़क और पुल की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों, विधायक और मंत्री को आवेदन दिया गया, लेकिन अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के आश्वासन मिलते हैं, लेकिन चुनाव के बाद समस्या जस की तस रह जाती है. ग्रामीणों ने दावा किया कि यदि जल्द सड़क और पुल निर्माण शुरू नहीं हुआ तो 2029 के चुनाव में वोट बहिष्कार किया जायेगा. ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “रोड नहीं तो वोट नहीं.” अब देखना होगा कि पांच गांवों की इस समस्या को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से कब तक ठोस पहल की जाती है.. The post Gumla : न सड़क, न पुल; पांच गांवों के ग्रामीण पूछ रहे, कब बदलेगी जिंदगी? appeared first on Naya Vichar.

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पिता थे मजदूर, चाहते थे बेटा बने पुलिसकर्मी; मगर उमेश यादव बन गए भारत के स्टार तेज गेंदबाज

Happy 39th Birthday Umesh Yadav: हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव आज यानी 25 अक्टूबर को अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं. 25 अक्टूबर 1987 को महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मे उमेश यादव ने अपनी तेज रफ्तार और घातक गेंदबाजी से क्रिकेट की दुनिया में अलग पहचान बनाई. हालांकि, टीम इंडिया तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था. उनके पिता कोयला खदान में मजदूरी करते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी. उमेश के पिता चाहते थे कि उनका बेटा पुलिस या सेना में भर्ती हो, लेकिन उमेश का सपना क्रिकेटर बनने का था. आखिरकार, तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए उन्होंने अपने सपने को सच कर दिखाया और हिंदुस्तानीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाजों में अपनी जगह बनाई. कोयला खदान में काम करते थे पिता, आर्थिक तंगी में बीता बचपन उमेश यादव (X) उमेश यादव का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का रहने वाला है. उनके पिता तिलक यादव काम की तलाश में महाराष्ट्र के नागपुर आ गए थे. यहां उन्होंने खापरखेड़ा स्थित कोयला खदान में काम किया. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि बच्चों की पढ़ाई और क्रिकेट का खर्च उठाना भी आसान नहीं था. उमेश के पिता चाहते थे कि उनके शिशु पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी करें. उमेश की मजबूत कद-काठी को देखते हुए उन्होंने बेटे को पुलिस या सेना में भर्ती कराने का सपना देखा था. दूसरी ओर, उमेश का मन बचपन से ही क्रिकेट में लगता था. वह अपने दोस्तों के साथ नियमित रूप से क्रिकेट स्पोर्ट्सते थे और तेज गेंदबाजी करना पसंद करते थे. ये भी पढ़ें: Lala Amarnath Birthday: स्वतंत्र हिंदुस्तान के पहले टेस्ट कप्तान थे अमरनाथ, पहला शतक जड़ते ही स्त्रीओं ने फेंक दिए थे मंगलसूत्र टेनिस बॉल से शुरू किया सफर शुरुआत में उमेश यादव टेनिस बॉल से क्रिकेट स्पोर्ट्सते थे. बाद में उन्होंने लेदर बॉल से अभ्यास करना शुरू किया. उस समय परिवार के पास क्रिकेट का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे. इसके बावजूद उमेश ने हार नहीं मानी और अपनी गेंदबाजी में लगातार सुधार करते रहे. उमेश ने घरेलू क्रिकेट में विदर्भ की ओर से स्पोर्ट्सते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. साल 2008-09 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट के अपने शुरुआती सीजन में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. चार मुकाबलों में 14.60 की औसत से 20 विकेट लेकर उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा. उनकी तेज गति और उछाल के कारण बल्लेबाजों के लिए उनका सामना करना चुनौतीपूर्ण होने लगा. आईपीएल से मिली पहचान, 2010 में टीम इंडिया में किया डेब्यू घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन का फायदा उमेश यादव को मिला और दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें आईपीएल में स्पोर्ट्सने का मौका दिया. इसके बाद वह कोलकाता नाइट राइडर्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस जैसी टीमों का हिस्सा भी रहे. उमेश ने 28 मई 2010 को जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की. इसके बाद नवंबर 2011 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया, जबकि 2012 में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला मुकाबला स्पोर्ट्सा. टेस्ट क्रिकेट में शुरुआती प्रदर्शन ने उन्हें जल्द ही पहचान दिलाई. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने चार टेस्ट मैचों में 14 विकेट हासिल किए. ये भी पढ़ें: Hardik Pandya Birthday: हार्दिक के 33वें जन्मदिन पर गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा ने लुटाया प्यार, शेयर किया दिल छू लेने वाला नोट 2015 वर्ल्ड कप में भी किया शानदार प्रदर्शन उमेश यादव के करियर का एक यादगार पड़ाव 2015 का वनडे वर्ल्ड कप रहा. इस टूर्नामेंट में उन्होंने 17.83 की औसत से 18 विकेट हासिल किए और सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में तीसरे स्थान पर रहे. उनकी तेज गेंदबाजी ने हिंदुस्तानीय टीम के अभियान में अहम भूमिका निभाई. उमेश की गेंदबाजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी रफ्तार और अतिरिक्त उछाल रही. वह लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से गेंदबाजी करने के लिए जाने जाते रहे. घरेलू परिस्थितियों में भी उन्होंने कई मौकों पर अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया. ऐसा रहा उमेश यादव का अंतरराष्ट्रीय करियर फॉर्मेट मैच विकेट टेस्ट क्रिकेट 57 170 वनडे क्रिकेट 75 106 टी20 इंटरनेशनल 9 12 प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उमेश ने 126 मैचों में 387 विकेट हासिल किए. वहीं, लिस्ट-ए क्रिकेट में उनके नाम 136 मैचों में 194 विकेट दर्ज हैं. आईपीएल में उन्होंने 148 मुकाबले स्पोर्ट्से और 144 विकेट अपने नाम किए. ये भी पढ़ें: 6 मेडन, 5 विकेट… कभी हिंदुस्तान को डराता था यह तेज गेंदबाज, आज टीम इंडिया का बॉलिंग कोच The post पिता थे मजदूर, चाहते थे बेटा बने पुलिसकर्मी; मगर उमेश यादव बन गए हिंदुस्तान के स्टार तेज गेंदबाज appeared first on Naya Vichar.

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घर बनवाने में लाखों खर्च करने से पहले जान लें ईंट, बालू और सीमेंट की क्वालिटी पहचानने का तरीका

Building Material Quality: अपना घर बनवाना हर किसी का सपना होता है. इसके लिए लोग सालों तक पैसे जोड़ते हैं, ताकि अपने परिवार के लिए एक मजबूत और अच्छा घर बना सकें. लेकिन घर बनवाते समय सिर्फ सुंदर डिजाइन और अच्छे नक्शे पर ध्यान देना काफी नहीं है. घर की मजबूती इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे बनाने में किस तरह की ईंट, बालू और सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है. अगर सामान की क्वालिटी अच्छी नहीं हुई, तो आगे चलकर दीवारों में दरार आने या दूसरी परेशानियां होने का खतरा बढ़ सकता है. कई लोग घर बनवाते समय सारा सामान खुद खरीदते हैं, ताकि अच्छी क्वालिटी की चीजें इस्तेमाल हों और पैसे भी सही जगह खर्च हों. लेकिन बाजार में कई तरह के ईंट, बालू और सीमेंट मिलते हैं. ऐसे में बिना सही जानकारी के यह समझना आसान नहीं होता कि कौन-सा सामान अच्छा है और किसकी जांच करवानी चाहिए. कई बार लोग दुकानदार की बातों पर भरोसा करके सामान खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें परेशानी होती है. इसलिए घर बनवाने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना अच्छा रहता है. हिंदुस्तानीय मानक ब्यूरो (BIS) एक प्रशासनी संस्था है, जो सामान की क्वालिटी के लिए नियम बनाती है. घर बनवाते समय ईंट, बालू और सीमेंट खरीदने से पहले उनकी क्वालिटी का ध्यान रखना जरूरी है. आइए जानते हैं कि अच्छा सामान पहचानने के लिए किन बातों पर ध्यान देना चाहिए. अच्छी ईंट खरीदते समय इन बातों को देखें इन्फोग्राफिक, PC -AI घर बनवाने के लिए ईंट खरीद रहे हैं, तो सबसे पहले उसका शेप और बनावट देखें. ईंटें एक जैसी होनी चाहिए. उनके किनारे बहुत ज्यादा टूटे हुए न हों और उनमें बड़ी दरारें भी न दिखें. एक साथ कई ईंटें देखने पर उनके आकार में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होना चाहिए. कई लोग दो ईंटों को टकराकर उनकी आवाज सुनते हैं या ईंट को जमीन पर गिराकर देखते हैं कि वह टूटती है या नहीं. लेकिन सिर्फ इन तरीकों से ईंट की मजबूती का सही पता नहीं चलता. हिंदुस्तानीय मानक ब्यूरो (BIS) ने ईंटों की मजबूती और पानी सोखने की क्षमता जांचने के तरीके तय किए हैं. इसलिए बड़ी मात्रा में ईंट खरीदने से पहले किसी जानकार की मदद से उसकी जांच करवाना बेहतर है. सीमेंट खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सीमेंट खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत देखकर फैसला न करें. पैकेट पर लिखी जानकारी देखें और ध्यान दें कि पैकेट फटा हुआ या गीला तो नहीं है. अगर सीमेंट में सख्त गांठें बनी हुई हैं, तो उसे खरीदने से बचें या पहले उसकी जांच करवाएं. नमी के संपर्क में आने से सीमेंट में गांठें बन सकती हैं. कई लोग सीमेंट को पानी में डालकर उसकी क्वालिटी पहचानने की कोशिश करते हैं. लेकिन पानी में सीमेंट डालने से यह पता नहीं चलता कि वह घर बनाने के लिए कितना मजबूत है. सीमेंट की मजबूती जांचने के लिए खास तरीके अपनाए जाते हैं. इसलिए सीमेंट खरीदते समय पैकेट पर दी गई जानकारी देखें और जरूरत पड़ने पर किसी इंजीनियर से सलाह लें. बालू में मिट्टी मिली है या नहीं, ऐसे लगाएं पता घर बनवाते समय बालू की क्वालिटी पर भी ध्यान देना जरूरी है. बालू में बहुत ज्यादा मिट्टी या दूसरी गंदगी मिली हो, तो इससे घर बनाने के काम पर असर पड़ सकता है. इसलिए बालू खरीदते समय उसे ध्यान से देखें. अगर उसमें मिट्टी के ढेले, कचरा या दूसरी अनचाही चीजें दिखाई दें, तो उसकी जांच करवाएं. बालू में बारीक मिट्टी की मात्रा का शुरुआती अंदाजा लगाने के लिए एक पारदर्शी माप वाले बर्तन में बालू और पानी डालकर कुछ समय के लिए छोड़ सकते हैं. इसके बाद नीचे बालू और ऊपर जमा बारीक मिट्टी की परत को देखा जाता है. केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की निर्माण संबंधी जानकारी में भी बालू में बारीक मिट्टी की मात्रा जांचने का तरीका बताया गया है. हालांकि, इस तरीके से बालू की पूरी क्वालिटी का पता नहीं चलता. इसलिए घर की नींव और छत जैसे जरूरी हिस्सों में इस्तेमाल करने से पहले किसी इंजीनियर की सलाह लेना बेहतर है. घर बनवाने से पहले इन बातों का भी रखें ध्यान ईंट, बालू और सीमेंट खरीदते समय पक्का बिल जरूर लें. सामान खरीदने से पहले उसकी पैकिंग और उस पर लिखी जानकारी भी देख लें. अगर किसी सामान की क्वालिटी को लेकर शक है, तो सिर्फ देखकर फैसला न करें. जरूरत पड़ने पर इंजीनियर या जांच करने वाली प्रयोगशाला की मदद लें. घर बनवाते समय शुरुआत में थोड़ी सावधानी रखने से आगे होने वाली परेशानियों से बचने में मदद मिल सकती है. इसलिए सामान खरीदने में जल्दबाजी न करें और घर के जरूरी हिस्सों में इस्तेमाल होने वाली चीजों की क्वालिटी पर खास ध्यान दें. यह भी पढ़ें: पैक्ड आटा, बेसन और मसाले खरीदने से पहले लेबल पर चेक कर लें ये 7 चीजें, ज्यादातर लोग कर देते हैं नजरअंदाज The post घर बनवाने में लाखों खर्च करने से पहले जान लें ईंट, बालू और सीमेंट की क्वालिटी पहचानने का तरीका appeared first on Naya Vichar.

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25 अक्टूबर की टॉप 20 खबरें: बाहुबली नेता अनंत सिंह को JDU ने निकाला, अरुणाचल प्रदेश सीमा पर तनाव; शिवा शर्मा मौत मामले में CCTV फुटेज आया सामने

1. जश्न की तैयारी के बीच अनंत सिंह को JDU ने पार्टी से निकाला, आवास पर बन रहे तीन लाख रसगुल्ले, लग रहे टेंट-पंडाल Anant Singh: बिहार की नेतृत्व में अनंत सिंह को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. JDU ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है. वहीं, अनंत सिंह के प्रशासनी आवास पर जीत के जश्न की तैयारी चल रही है. यहां तीन लाख रसगुल्ले बनाए जा रहे हैं और टेंट-पंडाल लगाए जा रहे हैं. पूरी समाचार यहां पढ़ें 2. तिब्बत में फिर आया भूकंप, 5.4 रही तीव्रता; गुरुवार को 7.0 के झटके से गई थी 16 लोगों की जान तिब्बत में 5.4 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया. पहले आए 7.0 तीव्रता के झटके से 16 लोगों की मौत और 76 घायल हुए थे. जानें ताजा जानकारी. पूरी समाचार यहां पढ़ें 3. IND vs NZ 2nd T20I: रोमांचक मुकाबले में हिंदुस्तान ने आखिरी ओवर में जीता मैच, तिलक वर्मा बने हीरो हिंदुस्तान और न्यूजीलैंड के बीच दूसरे टी20 मुकाबले में आखिरी ओवर तक रोमांच बना रहा. हिंदुस्तानीय टीम ने मुकाबला जीत लिया और तिलक वर्मा ने जीत में अहम भूमिका निभाई. पूरी समाचार यहां पढ़ें 4. अरुणाचल सीमा पर तनाव: स्वामी बोले- चीन हिंदुस्तानीय क्षेत्र पर कर रहा कब्जा; राउत का केंद्र पर हमला- ‘सेना को कमजोर किया’ अरुणाचल सीमा पर हिंदुस्तान-चीन तनाव पर सुब्रमण्यम स्वामी दिल्ली हाईकोर्ट जाने की बात कह रहे हैं. संजय राउत ने भी केंद्र प्रशासन की नीतियों पर उठाए सवाल, कहा कि प्रशासन ने सेना को कमजोर कर दिया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 5. Video: फारूक अब्दुल्ला ने कहा- पाकिस्तान कर रहा कश्मीरियों की रक्षा, दिल्ली से उम्मीद भी नहीं; BJP ने किया पलटवार फारूक अब्दुल्ला के बयान के बाद नेतृत्वक विवाद सामने आया है. बीजेपी ने उनके बयान पर पलटवार किया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 6. Sting Video: सिद्धारमैया ने दर्ज कराई पुलिस शिकायत; बोले- ब्लैकमेल करने की हुई साजिश 23 अक्टूबर को मैसूरु में पत्रकारों से बात करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने खुद पुलिस में शिकायत की है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके. उन्होंने कहा, “यह झूठा मामला है. मुझे ब्लैकमेल करने के इरादे से यह सब किया गया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 7. छात्र संघ चुनाव की मांग पर भड़का आंदोलन: जामिया कैंपस में झड़प के बाद सभी कक्षाएं होंगी ऑनलाइन जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रदर्शनों के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी कोर्स की क्लासेस तत्काल ऑनलाइन करने का फैसला किया है. कहा है कि छात्रों की सुरक्षा सबसे पहले, पढ़ाई जारी रहेगी. पूरी समाचार यहां पढ़ें 8. राहुल की रैली पर भड़की बीजेपी, रविशंकर प्रसाद बोले- 1 नवंबर को रैली कर सिख दंगों के पीड़ितों को चिढ़ा रही कांग्रेस बीजेपी ने कांग्रेस की 1 नवंबर की रैली को लेकर बड़ा हमला बोला है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी 1984 सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की भावनाओं को आहत कर रहे हैं. जानें क्या है पूरा विवाद. पूरी समाचार यहां पढ़ें 9. शिवा शर्मा मौत मामला: मॉडल श्रद्धा दुबे का नया CCTV फुटेज आया सामने, सीढ़ियों से उतरते दिखे दोनों; डमी से सीन री-क्रिएट करेगी पुलिस शिवा शर्मा मौत मामले में नया CCTV फुटेज आया है जिसमें मॉडल श्रद्धा दुबे के साथ शिवा शर्मा सीढ़ियों से उतर रहे हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस डमी से सीन री-क्रिएट कर मौत का सच खंगालने की तैयारी कर रही है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 10. पाकिस्तान में 8,000 रुपये पार हुई LPG की कीमत, ईरान ने बंद की सप्लाई तो मचा हाहाकार LPG cylinder price : ईरान के साथ बॉर्डर बंद होने के कारण पाकिस्तान में एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है. देश में 12 किलो के सिलेंडर की कीमत 4,500 से बढ़कर करीब 8,200 रुपये तक पहुंच गई. जानिए बॉर्डर बंद होने की वजह क्या है और इसका असर आम लोगों पर कैसे पड़ रहा है? पूरी समाचार यहां पढ़ें 11. बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमला, बलूच विद्रोहियों ने कहा- हमने किए हमले, पाकिस्तान हार चुका है बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना पर ‘ऑपरेशन अलमास’ के तहत हमले का दावा किया है. इस दौरान पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों पर कब्जे और भारी नुकसान पहुंचाने की बात भी कही गई है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 12. कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जमा हो रहे हैं इंडिया गठबंधन के नेता, मोदी प्रशासन को चुनौती देने की है तैयारी इंडिया गठबंधन के नेता दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जुट रहे हैं. बैठक में केंद्र प्रशासन को चुनौती देने से जुड़े नेतृत्वक मुद्दों पर चर्चा की तैयारी है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 13. सोनिया गांधी CWC बैठक में दिग्विजय सिंह की किस बात पर भड़कीं? कहा- ‘अच्छा ही हुआ नीतीश चले गए’ कांग्रेस की CWC बैठक से जुड़ा एक घटनाक्रम चर्चा में है. सोनिया गांधी और दिग्विजय सिंह के बीच हुई बातचीत में नीतीश कुमार का जिक्र भी सामने आया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 14. INDIA ब्लॉक की बैठक से AAP ने बनाई दूरी, संजय सिंह बोले- हम गठबंधन में नहीं इंडिया गठबंधन की बैठक के बीच आम आदमी पार्टी की दूरी और संजय सिंह के बयान ने नेतृत्वक हलचल बढ़ाई है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 15. मिलन प्रधान की जमानत को बंगाल प्रशासन ने दी चुनौती, सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘रद्द कर देंगे’ मिलन प्रधान की जमानत को लेकर पश्चिम बंगाल प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. मामले की सुनवाई से पहले अदालत की टिप्पणी चर्चा में है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 16. पूर्व IAF ऑफिसर ने राहुल गांधी की कसाब से की तुलना, कांग्रेस ने कहा- “नहीं किया जाएगा बर्दाश्त” राहुल गांधी को लेकर पूर्व वायुसेना अधिकारी की टिप्पणी पर नेतृत्वक विवाद सामने आया है. कांग्रेस ने इस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 17. सऊदी अरब पर हूतियों के हमले का दावा, रियाद एयरपोर्ट समेत 6 से ज्यादा ठिकानों को बनाया निशाना यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट और अरामको फैसिलिटी समेत 6 से ज़्यादा ठिकानों पर ड्रोन-मिसाइल हमले का दावा किया है. जानिए सऊदी पर हमले से दूसरे देशों पर क्या होगा असर? पूरी समाचार यहां पढ़ें 18. Cyclone Alert: बंगाल

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शरद पूर्णिमा: क्या आपकी कुंडली का यह भाव बदल देता है चंद्रमा का पूरा फल, जानिए यहां

Sharad Purnima Astrology: शरद पूर्णिमा का पर्व चंद्रमा की पूजा से जुड़ा है. वैदिक ज्योतिष में भी चंद्रमा को महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है. इसे मन, भावनाओं, माता और मानसिक शांति का कारक माना जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जन्म कुंडली में चंद्रमा किस भाव में बैठा है, इसका भी विशेष महत्व होता है? ज्योतिष के अनुसार, सिर्फ राशि देखकर चंद्रमा का पूरा फल नहीं समझा जा सकता. इसके लिए कुंडली में उसकी स्थिति, दूसरे ग्रहों के साथ संबंध और उन पर पड़ने वाली दृष्टि को भी देखना जरूरी होता है. आइए ज्योतिषाचार्य पंडित धनंजय पांडेय से समझते हैं कि कुंडली के अलग-अलग भावों में चंद्रमा की स्थिति क्या संकेत देती है. कुंडली में भाव क्या होते हैं? वैदिक ज्योतिष में जन्म कुंडली को 12 भावों में बांटा गया है. प्रत्येक भाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों को दर्शाता है. उदाहरण के लिए पहला भाव व्यक्ति के व्यक्तित्व, चौथा भाव घर और माता, सातवां भाव विवाह और साझेदारी, जबकि दसवां भाव कर्म और करियर से जुड़ा होता है. माना जाता है. चौथे भाव में चंद्रमा हो तो क्या होता है? वैदिक ज्योतिष में चौथे भाव को सुख, घर-परिवार, माता, घरेलू जीवन और मन की शांति से जोड़कर देखा जाता है. चंद्रमा को भी मन और माता का कारक माना गया है. इसलिए जब जन्म कुंडली में चंद्रमा चौथे भाव में मौजूद होता है, तो इस स्थिति को विशेष महत्व दिया जाता है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को घर-परिवार से लगाव, भावनात्मक जुड़ाव और सुख-सुविधाओं के प्रति रुचि रहती है. ऐसे जातक (व्यक्ति) अपने घर के वातावरण और परिवार के सदस्यों की भावनाओं को अधिक महत्व देने वाले होते हैं. हालांकि, सिर्फ कुंडली के चौथे भाव में चंद्रमा होने से यह तय नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को जीवन में सुख ही मिलेगा. चंद्रमा किस राशि में है, वह कितन मजबूत है और उस पर दूसरे ग्रहों का क्या प्रभाव पड़ रहा है, इन बातों को भी देखना जरूरी होता है. कुंडली के भाव और उनके मुख्य क्षेत्र (इंफोग्राफिक टेबल) कुंडली का भाव (घर) प्रतिनिधित्व और मुख्य क्षेत्र पहला भाव (लग्न) व्यक्तित्व, शारीरिक बनावट, स्वभाव चौथा भाव सुख, माता, घर-परिवार, घरेलू वातावरण, मानसिक शांति सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी, व्यापारिक साझेदारी दसवां भाव कर्म, करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा, पिता ये भी पढ़ें: राहु के नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश इन 5 राशि वालों के लिए शुभ, भाग्योदय के साथ होगी उन्नति लग्न से चंद्रमा की स्थिति क्यों है महत्वपूर्ण? ज्योतिष में लग्न (कुंडली का पहला भाव) और चंद्रमा दोनों से कुंडली का विश्लेषण किया जाता है. लग्न व्यक्ति के व्यक्तित्व, शारीरिक बनावट और जीवन को लेकर उसके नजरिए को दर्शाता है. वहीं, चंद्रमा को मन, सोच और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का कारक माना जाता है. उदाहरण के लिए, अगर चंद्रमा लग्न से चौथे भाव में है, तो ज्योतिषी घर, परिवार और मानसिक सुख से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान देते हैं. यदि चंद्रमा लग्न में स्थित हो, तो उसके प्रभाव को व्यक्तित्व और भावनात्मक स्वभाव के संदर्भ में भी देखा जाता है. इसका मतलब यह नहीं है कि किसी एक भाव में चंद्रमा होने से व्यक्ति का पूरा स्वभाव तय हो जाता है. सही फलादेश के लिए पूरी जन्म कुंडली को देखना जरूरी होता है. दूसरे ग्रहों की दृष्टि से कैसे बदल सकता है चंद्रमा का फल? गुरु ग्रह की दृष्टि: वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह की शुभ दृष्टि को चंद्रमा के लिए सहायक माना गया है. इसका फल कुंडली की दूसरी स्थितियों पर भी निर्भर करता है. शनि ग्रह का प्रभाव: शनि के साथ संबंध होने पर जिम्मेदारी, गंभीरता और भावनात्मक दबाव जैसे विषयों पर विचार किया जाता है. मंगल ग्रह का प्रभाव: मंगल के साथ चंद्रमा के संबंध को ऊर्जा, साहस और भावनात्मक प्रतिक्रिया के संदर्भ में देखा जाता है. राहु ग्रह का प्रभाव: राहु के साथ चंद्रमा की युति को ज्योतिष में विशेष स्थिति माना गया है. इसका फल राशि, भाव और अन्य ग्रहों के संबंधों के आधार पर समझा जाता है. शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा का क्या है ज्योतिषीय महत्व? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा सूर्य के ठीक सामने होता है. इस वजह से चंद्रमा का लगभग पूरा हिस्सा पृथ्वी से दिखाई देता है. हालांकि, जन्म कुंडली में चंद्रमा कितना मजबूत है और उसका क्या फल मिलेगा, यह सिर्फ पूर्णिमा से तय नहीं होता. इसके लिए जन्म के समय ग्रहों की स्थिति और कुंडली में बनने वाले दूसरे योगों को भी देखना जरूरी होता है. ये भी पढ़ें: अक्टूबर के आखिरी दिन गुरु गोचर, मेष, तुला और कुंभ राशि वालों के लिए क्या होगा खास? The post शरद पूर्णिमा: क्या आपकी कुंडली का यह भाव बदल देता है चंद्रमा का पूरा फल, जानिए यहां appeared first on Naya Vichar.

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Investigation : छोटे शहर बन रहे बिहार के बड़े कर्मशियल कैपिटल, 90 प्रतिशत MSME सेक्टर हुए पटना से बाहर

Investigation : पटना. बिहार की आर्थिक संरचना में बड़ा बदलाव सामने आया है. राज्य में छोटे और मझोले कारोबार अब केवल राजधानी पटना तक सीमित न रहकर अन्य जिलों में भी तेजी से पैर पसार रहे हैं. राज्य के गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के 91.77 प्रतिशत प्रतिष्ठान पटना के बाहर अन्य जिलों में स्थित हैं, जबकि राजधानी पटना की हिस्सेदारी इसमें महज 8.23 प्रतिशत है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा सितंबर में जारी रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार जारी इन जिलेवार आंकड़ों से पता चला है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेजी से मजबूत हो रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के तहत कुल 43.19 लाख से अधिक प्रतिष्ठान संचालित हैं. इसमें कुल 58.51 लाख से ज्यादा लोग कार्यरत हैं. NSO रिपोर्ट में खुलासा पटना नहीं, यह जिला बन रहा बिहार का नया आर्थिक केंद्र बिहार में छोटे कारोबारियों का 91% नेटवर्क पटना से बाहर 43 लाख छोटे कारोबारों से बदला बिहार का नक्शा शहर के साथ अब ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार की बहार मुख्य तथ्य बिहार में फूड सेक्टर में कामगारों में 52% स्त्रीएं हैं (राष्ट्रीय औसत 41%). ई-श्रम पोर्टल पर बिहार के 1.90 लाख फूड सेक्टर कामगार पंजीकृत हैं (देश में यूपी 3.82 लाख के बाद दूसरे स्थान पर). कुल 4.36 लाख से अधिक लोग स्ट्रीट फूड, ढाबा व ठेला-खोमचा कारोबार से जुड़े हैं. कमर्शियल पावरहाउस बने मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर पटना के ठीक बाद उत्तर बिहार में मुजफ्फरपुर, दक्षिण बिहार में गया, अंग क्षेत्र में भागलपुर और सारण प्रमंडल में छपरा राज्य के सबसे बड़े कमर्शियल और सर्विस हब के रूप में उभरे हैं. भारी जनसंख्या, पारंपरिक मंडियों और बेहतर ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी के कारण यहां छोटे कारखानों और ट्रेड का बड़ा क्लस्टर स्थापित हुआ है. मॉल से हाट तक फैला ‘सिंगल-ओनरशिप’ कारोबार पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी और दरभंगा के घनी आबादी वाले जिलों में असंगठित प्रतिष्ठानों का बड़ा आधार है. यहां लोकल मार्केट में रिटेल ट्रेड, हथकरघा, कारीगरी, कृषि-उपकरणों की रिपेयरिंग और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स संचालित हो रही हैं. पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सहरसा और सुपौल में में छोटे कारोबार मुख्य रूप से एग्री-बिजनेस, वीकली हाट-बाजारों और ट्रांसपोर्ट सर्विस पर आधारित हैं, जहां ”सिंगल-ओनरशिप” वाली छोटी दुकानों का जाल फैला हुआ है. इन जिलों में माइक्रोलेंडिंग व स्वरोजगार के अवसर बढ़े रोहतास, भोजपुर, नालंदा, नवादा, औरंगाबाद, जमुई, बांका, लखीसराय, शेखपुरा, जहानाबाद और अरवल में माइक्रोलेंडिंग और स्वरोजगार के अवसरों के चलते छोटे उद्यम लगातार बढ़ रहे हैं. रोहतास, भोजपुर और नालंदा जैसे इलाकों में सर्विस सेक्टर (एजुकेशन, ट्रांसपोर्ट, रिपेयरिंग) और ट्रेडिंग यूनिट्स अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों से ही धमाकेदार तरीके से ऑपरेट हो रही हैं. बांका, जमुई और रोहतास के पहाड़ी व झारखंड बॉर्डर से सटे इलाके में लोकल फॉरेस्ट प्रोड्यूस और लघु निर्माण से जुड़े असंगठित कारखाने यहां की लोकल इकॉनमी की बैकबोन बने हुए हैं. क्रम संख्या जिले छोटे उद्यमों के प्रमुख क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों की विशेषता 1 रोहतास सर्विस सेक्टर, ट्रेडिंग, लघु निर्माण, वन उत्पाद माइक्रोलेंडिंग और स्वरोजगार से छोटे उद्यमों का विस्तार; ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सेवा और व्यापारिक इकाइयों की सक्रियता 2 भोजपुर एजुकेशन, ट्रांसपोर्ट, रिपेयरिंग, ट्रेडिंग ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से सेवा क्षेत्र और व्यापारिक इकाइयों का संचालन 3 नालंदा एजुकेशन, ट्रांसपोर्ट, रिपेयरिंग, ट्रेडिंग स्वरोजगार और स्थानीय मांग के आधार पर सेवा व व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि 4 नवादा माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार छोटे उद्यमों के विस्तार में वित्तीय सहायता और स्वरोजगार की भूमिका 5 औरंगाबाद माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यमों और स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार 6 जमुई वन उत्पाद, लघु निर्माण, छोटे उद्यम पहाड़ी और झारखंड सीमा से सटे इलाकों में स्थानीय वन उत्पाद तथा निर्माण गतिविधियां आजीविका का आधार 7 बांका वन उत्पाद, लघु निर्माण, छोटे उद्यम पहाड़ी क्षेत्रों में वन उत्पादों और स्थानीय निर्माण से जुड़ी असंगठित इकाइयों की भूमिका 8 लखीसराय माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार छोटे उद्यमों के विकास में स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का योगदान 9 शेखपुरा माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार छोटे स्तर पर उद्यमिता और स्थानीय व्यापार के अवसर 10 जहानाबाद माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे कारोबार और स्वरोजगार की संभावनाएं 11 अरवल माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यमों के विस्तार और रोजगार सृजन की संभावनाएं बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के प्रतिष्ठानों का वितरण क्रम संख्या क्षेत्र प्रतिष्ठानों की हिस्सेदारी 1 पटना जिला 8.23% 2 पटना के बाहर अन्य जिले 91.77% कुल बिहार 100% 43.19 लाख से अधिक प्रतिष्ठान, 58.51 लाख लोग कार्यरत बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के 43.19 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों में 58.51 लाख से ज्यादा लोग कार्यरत हैं. कुल रोजगार का लगभग 74% हिस्सा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में केंद्रित है. इन प्रतिष्ठानों में 99.3 प्रतिशत इकाइयां एकल स्वामित्व वाली हैं. कुल रोजगार का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा (43.6 लाख श्रमिक) ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में केंद्रित है, जबकि शहरी क्षेत्र की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत (16.6 लाख श्रमिक) है. व्यापार और सेवाओं के अलावा, लघु विनिर्माण और मरम्मत केंद्रों के मामले में पटना के बाद मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और सारण जिले राज्य के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं. इसके अतिरिक्त, इस असंगठित क्षेत्र में लगभग 9.27 लाख स्त्री श्रमिक भी जुड़ी हुई हैं. बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र की स्थिति बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के प्रमुख आंकड़े क्रम संख्या प्रमुख बिंदु आंकड़े 1 कुल प्रतिष्ठानों की संख्या 43.19 लाख से अधिक 2 कुल कार्यरत लोग 58.51 लाख से अधिक 3 एकल स्वामित्व वाली इकाइयां 99.3% 4 ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार 43.6 लाख श्रमिक (लगभग 74%) 5 शहरी क्षेत्रों में रोजगार 16.6 लाख श्रमिक (लगभग 26%) 6 स्त्री श्रमिकों की संख्या लगभग 9.27 लाख 7 लघु विनिर्माण और मरम्मत के प्रमुख केंद्र पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और सारण कुल रोजगार का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण इलाके में बिहार के असंगठित क्षेत्र में रोजगार की स्थिति क्रम संख्या प्रमुख बिंदु आंकड़े 1 एकल स्वामित्व वाले उद्यम 99.3% 2 ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार 43.6 लाख श्रमिक (लगभग 74%) 3 शहरी क्षेत्रों में रोजगार 16.6 लाख श्रमिक (लगभग 26%) 4 असंगठित क्षेत्र में स्त्री श्रमिकों की संख्या लगभग 9.27 लाख क्या कहते हैं मंत्री इन वजहों

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Weekly Top Jobs: यूपी में 17000 से ज्यादा शिक्षक पदों पर भर्ती, ISRO और DU में भी मौका

Weekly Top Jobs: प्रशासनी नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले पदों की संख्या के साथ अपनी योग्यता, जरूरी अनुभव और फॉर्म भरने की आखिरी तारीख जानना भी जरूरी है. कई भर्तियों में डिग्री के साथ काम का अनुभव मांगा जाता है, जबकि कुछ पदों के लिए टेक्निकल नॉलेज भी जरूरी होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए नया विचार के स्पेशल सेगमेंट Weekly Top Jobs में इस बार पांच अलग-अलग भर्तियों की जरूरी जानकारी दी जा रही है. यहां आप जान सकते हैं कि किस भर्ती के लिए कौन आवेदन कर सकता है और फॉर्म भरने की आखिरी तारीख क्या है. Job 1: UP में TGT के 17,735 पद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने TGT यानी ट्रेंड ग्रेजुएट ग्रेड के 17,735 पदों पर भर्ती निकाली है. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 24 अक्टूबर से शुरू हो गए हैं. संबंधित विषय में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और टीचर ट्रेनिंग की जरूरी शर्तें पूरी करने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. आवेदन फीस जमा करने की लास्ट डेट 23 नवंबर 2026 है. फॉर्म भरने से पहले उम्मीदवारों को वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) भी पूरा करना होगा.  पूरी समाचार → UP TGT Recruitment 2026: 17,735 पदों पर भर्ती, यहां करें अप्लाई Job 2: ISRO में 97 पदों पर भर्ती हिंदुस्तानीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में 97 पदों पर भर्ती निकली है. इसमें तकनीकी सहायक, टेक्नीशियन, तकनीकी सहायक, ड्राइवर और मल्टी टास्किंग स्टाफ समेत कई पद शामिल हैं. खास बात यह है कि कुछ पदों के लिए 10वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं. योग्यता पद के अनुसार अलग-अलग है. कहीं आईटीआई या डिप्लोमा की जरूरत है, तो कहीं संबंधित विषय में डिग्री और अनुभव मांगा गया है. आवेदन की लास्ट डेट 9 नवंबर 2026 है. पूरी समाचार → ISRO Recruitment 2026: 97 पदों पर भर्ती, 10वीं पास के लिए भी मौका Job 3: दिल्ली यूनिवर्सिटी में 126 पद दिल्ली यूनिवर्सिटी में नॉन-टीचिंग के 126 पदों पर भर्ती निकली है. इनमें असिस्टेंट के 80 और सीनियर असिस्टेंट के 46 पद शामिल हैं. दोनों पदों के लिए ग्रेजुएशन की डिग्री जरूरी है, लेकिन संबंधित काम का अनुभव भी मांगा गया है. असिस्टेंट पद के लिए जूनियर असिस्टेंट या समान पद पर कम से कम दो साल का अनुभव चाहिए. वहीं, सीनियर असिस्टेंट के लिए असिस्टेंट या समान पद पर पे लेवल-4 में कम से कम तीन साल का अनुभव जरूरी है. आवेदन की लास्ट डेट 9 नवंबर 2026 है. पूरी समाचार → DU Recruitment 2026: ग्रेजुएट्स के लिए 126 पदों पर भर्ती Job 4: UP में हेडमास्टर के 1,172 पद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में हेडमास्टर के 1,172 पदों पर भर्ती निकाली है. इस भर्ती के लिए पोस्टग्रेजुएशन के साथ बीएड या बीपीएड और निर्धारित शिक्षण अनुभव रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की प्रक्रिया 23 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है. उम्मीदवार 22 नवंबर 2026 तक आवेदन शुल्क जमा कर सकते हैं. स्कूलों में हेडमास्टर बनने की तैयारी कर रहे अनुभवी उम्मीदवारों के लिए यह अच्छा मौका है. पूरी समाचार →UP Head Master Recruitment 2026: 1172 पदों पर भर्ती Job 5: SBI में AI एक्सपर्ट के 6 पद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े विशेषज्ञ पदों पर भर्ती निकाली है. इस भर्ती में कुल 6 पद हैं. इनमें चीफ एआई ऑफिसर और एआई आर्किटेक्ट समेत कई विशेषज्ञ पद शामिल हैं. इस भर्ती के लिए संबंधित तकनीकी डिग्री और पद के अनुसार अनुभव जरूरी है. चीफ एआई ऑफिसर पद के लिए अधिकतम उम्र 55 साल रखी गई है. इस पद पर चयनित उम्मीदवार को सालाना 1.60 करोड़ रुपये तक का सीटीसी मिल सकता है. आवेदन की लास्ट डेट 9 नवंबर 2026 है. पूरी समाचार → SBI AI Expert Recruitment 2026: 6 पदों पर भर्ती, 1.60 करोड़ तक CTC तो ये थीं इस हफ्ते की 5 टॉप प्रशासनी नौकरियां. अगर इनमें से किसी भर्ती में आप आवेदन करना चाहते हैं, तो ऊपर दी गई पूरी समाचार जरूर पढ़ें. वहां आपको योग्यता, फीस, लास्ट डेट और अप्लाई करने का तरीका डिटेल में मिल जाएगा. ये भी पढ़ें: नौकरी का मौका! नालंदा यूनिवर्सिटी में रिसर्च असिस्टेंट के पदों पर भर्ती,जल्द करें अप्लाई The post Weekly Top Jobs: यूपी में 17000 से ज्यादा शिक्षक पदों पर भर्ती, ISRO और DU में भी मौका appeared first on Naya Vichar.

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आज है शरद पूर्णिमा? जानें पूजा विधि, आरती और चंद्र पूजा का महत्व

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है. इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने, चंद्रमा को अर्घ्य देने और खीर का भोग लगाने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है. ऐसे में आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा की पूजा विधि, शुभ परंपराएं और मां लक्ष्मी की आरती. पूजा विधि और आरती  शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी रात्रि में पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इस दिन चंद्रमा की पूजा करने और खीर का भोग लगाने की भी परंपरा है.  शरद पूर्णिमा की पूजा विधि सुबह स्नान करें: ब्रह्म मुहूर्त में या सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें. पूजा स्थल तैयार करें: चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. दीपक जलाएं: भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें. संकल्प लें: हाथ में जल और फूल लेकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए पूजा का संकल्प लें. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें: उन्हें रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. इसके बाद लक्ष्मी चालीसा, विष्णु मंत्र या अपनी श्रद्धा के अनुसार स्तुति करें. खीर का भोग लगाएं: दूध, चावल और चीनी से खीर बनाकर भगवान को अर्पित करें. कई परिवारों में खीर को रात में चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है. चंद्रमा को अर्घ्य दें: रात में चंद्रमा के दर्शन करके जल अर्पित करें. इसके बाद चंद्रमा की पूजा करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती करें. अंत में प्रसाद बांटें और जरूरतमंदों को दान दें. शरद पूर्णिमा के संकेतानक (फोटो-एआई) मां लक्ष्मी की आरती ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता. तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता. ऊं जय लक्ष्मी माता उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता. सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता. ऊं जय लक्ष्मी माता दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपत्ति दाता. जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता. ऊं जय लक्ष्मी माता  तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता. कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता. ऊं जय लक्ष्मी माता जिस घर तुम रहती हो, तहां सद्गुण आता. सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता. ऊं जय लक्ष्मी माता तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता. खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता. ऊं जय लक्ष्मी माता शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता. रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता. ऊं जय लक्ष्मी माता महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता. उर आनंद समाता, पाप उतर जाता. ऊं जय लक्ष्मी माता ये भी पढ़ें: शरद पूर्णिमा पर क्या दान करना चाहिए? जानें सफेद वस्त्र से चांदी तक का महत्व शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है. इसके लिए एक लोटे में जल लें और चंद्रमा के दर्शन करके श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित करें. इसके बाद चंद्र देव से मन की शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें.चंद्रमा की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप कर सकते हैं. “ॐ सोमाय नमः” शरद पूर्णिमा 2026 कब है? इस वर्ष शरद पूर्णिमा का मुख्य व्रत और रात्रि पूजन 25 अक्टूबर 2026, रविवार को किया जाएगा. पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी. ध्यान रखें कि पूजा की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं. अपने शहर के पंचांग के अनुसार चंद्रोदय और पूजा का समय देखना उचित रहेगा. अगर आपके मन में (त्योहार/ topic) से संबंधित पूजा पाठ से जुड़े कोई भी सवाल हो तो , अपना सवाल हमें astrology.digital@prabhatkhabar.in पर भेजें. आपके सवाल का जवाब हमारे ज्योतिषाचार्य के माध्यम से दिया जाएगा. डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. पूजा के समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें. The post आज है शरद पूर्णिमा? जानें पूजा विधि, आरती और चंद्र पूजा का महत्व appeared first on Naya Vichar.

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